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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 10 August 2021

 

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-I

1. अरब सागर में चक्रवातों की आवृत्ति और तीव्रता में वृद्धि

 

सामान्य अध्ययन-II

1. समुद्री सहयोग बढ़ाने हेतु भारत का 5 सूत्री एजेंडा

2. ‘संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि’ (UNCLOS)

 

सामान्य अध्ययन-III

1. राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन- ताड़ तेल (NMEO-OP)

2. नासा का परसिवरेंस रोवर

3. भगोड़ा आर्थिक अपराधी

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. अंतर्राष्ट्रीय सेना खेल

2. राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, भौगोलिक विशेषताएँ और उनके स्थान आदि।

अरब सागर में चक्रवातों की आवृत्ति और तीव्रता में वृद्धि


संदर्भ:

पिछले दो दशकों के दौरान अरब सागर के ऊपर विकसित होने वाले चक्रवातों की आवृत्ति और तीव्रता में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है, जबकि इसी अवधि में बंगाल की खाड़ी में चक्रवातों की आवृत्ति में अपेक्षाकृत कमी देखी गयी है।

प्रमुख बदलाव:

  • वर्ष 2001 और 2019 के मध्य अरब सागर के ऊपर विकसित होने वाली चक्रवातों की आवृत्ति में 52% वृद्धि देखी गई, और इसी दौरान बंगाल की खाड़ी में आने वाले चक्रवातों की आवृत्ति में 8% की कमी हुई है।
  • पिछले दो दशकों के दौरान, अरब सागर में आने वाले अति भीषण चक्रवातों की संख्या में 150% की वृद्धि हुई है।

इसके लिए जिम्मेदार कारक:

  • ग्लोबल वार्मिंग / वैश्विक उष्मन की वजह से, पिछली शताब्दी के दौरान, अरब सागर के सतहीय तापमान में तेजी से वृद्धि हुई है। वर्तमान में अरब सागर का सतहीय तापमान, चार दशक पहले के तापमान से 2-1.4 डिग्री सेल्सियस अधिक है। यह अधिक गर्म तापमान, ‘संवहन प्रक्रिया में तीव्रता, भारी वर्षा और तीव्र चक्रवातों के निर्माण में सहायक होता है।
  • तापमान में होने वाली वृद्धि से, अरब सागर में विकसित होने वाले चक्रवातों की तीव्रता के लिए, पर्याप्त ऊर्जा की आपूर्ति होती है।
  • अरब सागर, चक्रवातों के अनुकूल पवन- अपरूपण (wind shear) भी प्रदान कर रहा है। उदाहरण के लिए, उच्च स्तरीय पूर्वी पवनों की वजह से, चक्रवात ओखी का निम्नदाब क्षेत्र / गर्त, बंगाल की खाड़ी से अरब सागर की ओर सरक गया था।

वर्तमान चिंता का विषय:

यदि यह प्रवृत्ति वर्षों तक जारी रहती है, तो इससे भारत के पश्चिमी तट पर आपदाओं में वृद्धि का जोखिम होगा।

चक्रवातों का निर्माण किस प्रकार होता है?

उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में समुद्रीय जल के ऊपर चक्रवातों का निर्माण होता है।

इन क्षेत्रों में सौर-प्रकाश की मात्रा सर्वाधिक होती है, जिसके परिणामस्वरूप स्थलीय  और जलीय भागों की ऊपरी सतह गर्म हो जाती हैं। सतह के गर्म होने के कारण, समुद्र के ऊपर स्थित उष्ण-आर्द्र वायु ऊपर की ओर उठने लगती है, जिसके बाद इस रिक्त स्थान को भरने के लिए तेजी से झपट्टा मारकर आगे बढ़ती है, फिर ये भी गर्म होकर ऊपर की उठ जाती है, और यह चक्र जारी रहता है।

वायु-चक्रण (Spin) निर्मित होने का कारण:

वायु, सदैव उच्च दाब क्षेत्र से निम्न दाब वाले क्षेत्रों की ओर प्रवाहित होती है। उच्च दाब क्षेत्रों का निर्माण ठंडे क्षेत्र में होता है, जबकि निम्न दाब की स्थिति उष्ण या गर्म क्षेत्रों में बनती है। ध्रुवीय क्षेत्रों में सौर-प्रकाश की मात्रा उष्ण-कटिबंधीय क्षेत्रों की तुलना में काफी कम होती है, अतः ये सामान्यतः उच्च दाब के क्षेत्र होते हैं। और इसीलिए वायु का संचरण प्रायः ध्रुवीय क्षेत्रों से उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों की ओर होता है।

  • इसके बाद, पृथ्वी की गति अपनी भूमिका अदा करती है, जोकि पश्चिम से पूर्व की ओर होती है। पृथ्वी के अपनी धुरी पर परिक्रमा करने की वजह से, दोनों धुर्वों की ओर से बहने वाली हवा का उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में विक्षेपण होता है, क्योंकि गोलाकार होने के कारण पृथ्वी के घूर्णन की गति ध्रुवों की तुलना में उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में अधिक होती है। आर्कटिक क्षेत्र से आने वाली हवा, दायीं ओर विक्षेपित हो जाती है तथा अंटार्कटिकक्षेत्र से चलने वाली हवा बायीं ओर विक्षेपित हो जाती है।
  • इस प्रकार, पहले से ही निश्चित दिशाओं में प्रवाहित हो रही वायु, जब किसी गर्म स्थान पर पहुँचने के पश्चात् ऊपर उठती है, तो रिक्त स्थान को भरने के लिए ठंडी हवा, केंद्र की ओर आकर्षित होने लगती है। केंद्र की ओर बढ़ते समय, ठंडी हवा विक्षेपित होती रहती है जिसके परिणामस्वरूप वायु-संचरण में परिवलन होने लगता है, और प्रक्रिया, चक्रवात के स्थल से टकराने तक जारी रहती है।

चक्रवात के स्थल से टकराने के पश्चात:

चक्रवात, स्थलीय क्षेत्रों पर पहुचने के बाद बिखर कर समाप्त हो जाता है, क्योंकि उष्ण जल के संपर्क में आने के कारण वायु गर्म होकर ऊपर उठती है और ठंडी वायु के लिए रिक्त स्थान बनाती है, किंतु स्थल पर इसका अभाव होता है। इसके अलावा, ऊपर उठने वाली आर्द्र हवा से बादलों का निर्माण का निर्माण होता है, जिससे चक्रवातों के दौरान तेज हवाओं के साथ तीव्र बारिश होती है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘सुपरसेल’ (Supercell) और ‘मेसोसायक्लोन’ (Mesocyclone) में अंतर जानते हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. चक्रवातों के निर्माण के लिए उत्तरदायी कारक
  2. विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में चक्रवातों का नामकरण
  3. भारत के पूर्वी तट पर अधिक चक्रवात आने का कारण
  4. कोरिओलिस बल क्या है?
  5. संघनन की गुप्त ऊष्मा क्या है?

मेंस लिंक:

उष्ण कटिबंधीय चक्रवातों के निर्माण के लिए उत्तरदायी कारकों की विवेचना कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

समुद्री सहयोग बढ़ाने हेतु भारत का 5 सूत्री एजेंडा


संदर्भ:

हाल ही में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘समुद्री सुरक्षा में वृद्धि’ (Enhancing Maritime Security) विषय पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक खुली बहस की अध्यक्षता की गयी।

इसके बाद, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा ‘समुद्री सुरक्षा’ पर भारत के अध्यक्षीय वक्तव्य को पारित कर दिया गया।

समुद्री क्षेत्र में वर्तमान चुनौतियां:

समुद्री मार्ग, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की जीवन रेखा हैं। परंतु:

  1. समुद्री मार्गों का समुद्री-डकैती और आतंकवाद के लिए दुरुपयोग किया जा रहा है।
  2. कई देशों के मध्य समुद्री विवाद जारी हैं और जलवायु परिवर्तन, भी समुद्री क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।

समुद्री सहयोग बढ़ाने के लिए प्रधान मंत्री द्वारा निर्धारित पांच सूत्री एजेंडा:

  1. वैध समुद्री व्यापार की बाधाओं को दूर करना।
  2. अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार समुद्री विवादों का शांतिपूर्ण समाधान।
  3. प्राकृतिक आपदाओं और गैर-राज्य अभिकर्ताओं (Non State Actors – NSA) से होने वाले खतरे का मुकाबला।
  4. समुद्री संसाधनों का संरक्षण।
  5. उत्तरदायित्व-पूर्ण समुद्री संपर्क को बढ़ावा देना।

समुद्री सहयोग बढ़ाने हेतु भारत के प्रयास:

  1. क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास अर्थात ‘सागर’ (Security and Growth for All in the Region- SAGAR)।
  2. वर्ष 2008 से, भारतीय नौसेना द्वारा हिंद महासागर में समुद्री डकैती का मुकाबला करने के लिए गश्त जारी है।
  3. व्हाइट शिपिंग इनफार्मेशन फ्यूजन सेंटर (White Shipping Information Fusion Centre)
  4. कई देशों में जल सर्वेक्षण और समुद्री सुरक्षा कर्मियों के प्रशिक्षण हेतु सहायता।
  5. भारत का ‘डीप ओशन मिशन’

 

इंस्टा जिज्ञासु:

पॉलीमेटेलिक नोड्यूल’ (Polymetallic nodules) कहाँ पाए जाते हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. SAGAR के बारे में
  2. ‘सूचना संलयन केंद्र’ के बारे में
  3. ‘डीप ओशन मिशन’ क्या है?
  4. ‘पॉलीमेटेलिक नोड्यूल’ क्या हैं?
  5. UNSC के बारे में

मेंस लिंक:

समुद्री सहयोग बढ़ाने हेतु प्रधान मंत्री द्वारा निर्धारित पांच सूत्री एजेंडे के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

 संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि’ (UNCLOS)


(United Nations Convention on Law of Seas)

संदर्भ:

चीन द्वारा उत्पन्न रुकावटों को हटाते हुए, हाल ही में, भारत की अध्यक्षता में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक अभूतपूर्व सत्र के दौरान ‘संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि’ (United Nations Convention on Law of Seas – UNCLOS) प्रमुखता पर प्रकाश डाला गया। इस संबंध में फ्रेमवर्क को शामिल करते हुए एक ‘कांसेप्ट नोट’ भी वितरित किया गया था।

निहितार्थ और महत्व:

  1. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्षीय वक्तव्य के अनुसार, “‘संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि’ (UNCLOS), समुद्री क्षेत्र में अवैध गतिविधियों का मुकाबला करने सहित, महासागरों में की जाने वाली गतिविधियों पर लागू होने वाला एक कानूनी ढांचा है।”
  2. यह फ्रेमवर्क, समुद्री सुरक्षा के लिए होने वाले खतरों का मुकाबला करने हेतु ‘अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय सहयोग’ बढ़ाने के महत्व पर प्रकाश डालता है। इसके तहत, इस संबंध में क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय संगठनों और विभिन्न देशों द्वारा प्रयास करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
  3. साथ ही, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में यह “समुद्री सुरक्षा” पर पहली एकल चर्चा थी।

चीन की प्रतिक्रिया:

चीन ने भारी अंतरराष्ट्रीय दबाव में UNCLOS की प्रधानता को स्वीकार करने के लिए कूटनीतिक रूप से हामी भारी है।

  • दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर में चीन की आक्रामक कार्रवाइयां, द्वीप निर्माण और उसके मछली पकड़ने वाले मिलिशिया द्वारा देशों को धमकाना अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय रहा है।
  • हालांकि, वर्ष 2016 में UNCLOS के तहत स्थायी मध्यस्थता अदालत (PCA) द्वारा फैसला सुनाते हुए, दक्षिण चीन सागर में चीन की गतिविधियों को अवैध बताया गया था, फिर भी बीजिंग द्वारा बिना किसी भय के अपनी कार्रवाहियाँ की जा रही हैं, जिसके परिणामस्वरूप क्षेत्र में तनाव बढ़ता जा रहा है।

संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि’ (UNCLOS) के बारे में:

संयुक्त राष्ट्र द्वारा इस कानून को वर्ष 1982 में अपनाया गया था, किंतु यह नवंबर 1994 में प्रभाव में आया।

  • ‘संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि’ (UNCLOS) के द्वारा प्रादेशिक सागर (Territorial Sea) और सन्निहित क्षेत्र (Contiguous Zone), महाद्वीपीय शेल्फ, खुले सागर (High Seas), ‘खुले सागर में मत्स्यन एवं जीवित संसाधनों के संरक्षण’ से संबंधित, अप्रैल, 1958 में हस्ताक्षरित चार ‘जिनेवा संधियों’ को प्रतिस्थापित किया गया था।
  • वर्तमान में, यह संधि, जहाज़ी और समुद्री गतिविधियों के लिए कानूनी ढांचा बन गया है।
  • इसके लिए ‘समुद्री क़ानून’ (Law of the Sea) के रूप में भी जाना जाता है, और यह समुद्री क्षेत्र को पांच मुख्य क्षेत्रों में विभाजित करता है, अर्थात्- आंतरिक जल, प्रादेशिक सागर, सन्निहित क्षेत्र, विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) और खुला सागर।
  • UNCLOS, समुद्री क्षेत्रों में किसी देश के अधिकार क्षेत्र हेतु एक रूपरेखा निर्धारित करने वाला एकमात्र अंतरराष्ट्रीय समझौता है। इसके तहत, विभिन्न समुद्री क्षेत्रों के लिए अलग कानूनी-दर्जा प्रदान किया गया है।

‘संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि’ के द्वारा अंतरराष्ट्रीय मामलों पर तीन नए संस्थान गठित किए गए हैं:

  1. समुद्री कानूनों के लिए अंतर्राष्ट्रीय न्यायाधिकरण (International Tribunal for the Law of the Sea)
  2. अंतर्राष्ट्रीय सागर-नितल प्राधिकरण (International Seabed Authority)
  3. महाद्वीपीय शेल्फ सीमा आयोग (Commission on the Limits of the Continental Shelf)

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप खुले सागर से संबंधित संयुक्त राष्ट्र संधि के बारे में जानते हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. महाद्वीपीय शेल्फ के बारे में
  2. अंतर्राष्ट्रीय सागर-नितल प्राधिकरण के बारे में
  3. UNCLOS के बारे में
  4. EEZ के बारे में
  5. स्थायी मध्यस्थता अदालत (PCA) क्या है?
  6. दक्षिण चीन सागर विवाद के बारे में

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: भारत में खाद्य प्रसंस्करण एवं संबंधित उद्योग- कार्यक्षेत्र एवं महत्त्व, स्थान, ऊपरी और नीचे की अपेक्षाएँ, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन।

राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन- ताड़ तेल (NMEO-OP)


(National Mission on Edible Oil-Oil Palm)

संदर्भ:

हाल ही में, प्रधान मंत्री द्वारा ने कृषि-आय बढ़ाने में सहायता करने हेतु ताड़ के तेल उत्पादन पर इस नई राष्ट्रीय पहल की घोषणा की गई है।

इस योजना के अंतर्गत 11,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जाएगा।

योजना के लक्ष्य एवं उद्देश्य:

  1. खाद्य तेल में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना।
  2. महंगे ताड़ के तेल आयात से प्रभावित होने वाली, घरेलू खाद्य तेल की कीमतों पर नियंत्रण लाना।
  3. वर्ष 2025-26 तक ताड़ के तेल का घरेलू उत्पादन तीन गुना बढ़ाकर 11 लाख मीट्रिक टन करना।

योजना के प्रमुख बिंदु:

  • इस योजना के तहत, अनुकूल मौसम की स्थिति के कारण, भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
  • योजना के तहत, ताड़ तेल किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी और ‘कीमत एवं व्यवहार्यता सूत्र’ के तहत किसानों पारिश्रमिक प्राप्त होगा।

योजना के लाभ और महत्व:

इस योजना से, तिलहन और ताड़ के तेल उत्पादन को प्रोत्साहन व खाद्य देलों के आयात पर निर्भरता कम होने तथा बाजार में किसानों को अधिक नकद राशि प्राप्त होने की संभवना है।

इस प्रकार की योजनाओं की आवश्यकता:

भारत, वनस्पति तेल का विश्व में सबसे बड़ा उपभोक्ता है। ‘ताड़ के तेल’ का आयात, भारत के कुल वनस्पति तेल आयात का लगभग 60% है।

  • वर्ष 2016- 2017 में, भारत में ताड़ के तेल की कुल घरेलू खपत 9.3 मिलियन मीट्रिक टन थी, जिसमे से 98.97 प्रतिशत ताड़ का तेल मलेशिया और इंडोनेशिया से आयात किया गया था।
  • अर्थात, भारत में इसकी आवश्यकता का केवल 1.027 प्रतिशत ही उत्पादन हो रहा था।
  • इसके अलावा, भारत में 94.1 प्रतिशत ताड़ के तेल का उपयोग खाद्य उत्पादों, खासकर खाना पकाने के प्रयोजनों के लिए किया जाता है। इससे, ताड़ का तेल, भारत की खाद्य तेल अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बन जाता है।

ताड़ का तेल (Palm oil)

  1. ताड़ का तेल, वर्तमान में दुनिया का सबसे अधिक खपत होने वाला वनस्पति तेल है।
  2. इसका, डिटर्जेंट, प्लास्टिक, सौंदर्य प्रसाधन और जैव ईंधन के उत्पादन में बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है।
  3. वैश्विक स्तर पर, ताड़ के तेल के शीर्ष उपभोक्ता भारत, चीन और यूरोपीय संघ (European Union) हैं।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि ‘राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन- ताड़ तेल’ (NMEO-OP) से पहले यूपीए सरकार के कार्यकाल में ‘राष्ट्रीय तिलहन और ताड़ तेल मिशन’ (National Mission on Oil Seeds and Oil Palm) लॉन्च किया गया था और बाद में इसका राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन में विलय कर दिया गया था?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन- ताड़ तेल’ योजना की मुख्य विशेषताएं
  2. लाभ

मेंस लिंक:

‘राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन- ताड़ तेल’ के महत्व पर चर्चा करें।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

नासा का परसिवरेंस रोवर


(NASA Perseverance Rover)

संदर्भ:

नासा के ‘परसिवरेंस रोवर’ (NASA’s Perseverance rover) द्वारा मंगल ग्रह के ‘जेज़ेरो क्रेटर’ (Jezero Crater) का अन्वेषण किया जा रहा है, और साथ ही यह, ग्रह की सतह से चट्टानों का पहला नमूना एकत्र करने का प्रयास कर रहा है।

यद्यपि, ‘परसिवरेंस रोवर’ अपने पहले प्रयास के दौरान चट्टानों का कोई नमूना एकत्र करने में विफल रहा था।

परसिवरेंस रोवर’ के बारे में:

परसिवरेंस रोवर (Perseverance rover) को, जुलाई 2020 में ‘यूनाइटेड लॉन्च अलायंस एटलस V’ (Atlas V) से लॉन्च किया गया था।

मिशन का महत्व:

  • परसिवरेंस रोवर में MOXIE अथवा मार्स ऑक्सीजन ISRU एक्सपेरिमेंट नामक एक विशेष उपकरण लगा है, जो मंगल ग्रह पर कार्बन-डाइऑक्साइड-समृद्ध वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करके पहली बार आणविक ऑक्सीजन का निर्माण करेगा। (ISRU- In Situ Resource Utilization, अर्थात स्व-स्थानिक संशाधनो का उपयोग)
  • इस मिशन पर एक, इंजेन्युटी’ (Ingenuity) नामक एक हेलीकॉप्टर भी भेजा गया है, यह मंगल ग्रह पर उड़ान भरने वाला पहला हेलीकॉप्टर होगा।
  • यह मिशन, पृथ्वी पर परिष्कृत प्रयोगशालाओं में विश्लेषण करने हेतु, मंगल ग्रह से चट्टान के नमूनों को लाने का पहला नियोजित प्रयास है। इसका उद्देश्य मंगल ग्रह पर प्राचीन सूक्ष्मजीवीय जीवन के खगोलीय साक्ष्यों की खोज तथा वर्तमान या अतीत में जीवन-संकेतों की खोज करना है।

मिशन के कुछ प्रमुख उद्देश्य:

  1. प्राचीन सूक्ष्मजीवीय जीवन के खगोलीय साक्ष्यों की खोज करना।
  2. वापसी में पृथ्वी पर लाने के लिए चट्टानों तथा रेगोलिथ (Reglolith) के नमूने एकत्र करना है।
  3. मंगल ग्रह पर एक प्रयोगात्मक हेलीकाप्टर उतारना।
  4. मंगल ग्रह की जलवायु और भूविज्ञान का अध्ययन करना।
  5. भविष्य के मंगल मिशनों के लिए प्रौद्योगिकी का प्रदर्शन करना।

मंगल ग्रह के बारे में हालिया रुचि का कारण:

  1. मंगल ग्रह, पृथ्वी के काफी नजदीक (लगभग 200 मिलियन किमी दूर) पर स्थित है।
  2. यह एक ऐसा ग्रह है, जिस पर मनुष्य, भ्रमण करने या अधिक समय तक रहने की इच्छा कर सकता है।
  3. मंगल ग्रह पर अतीत में बहता हुए पानी और वातावरण होने के साक्ष्य मिले हैं; और संभवतः इस ग्रह पर कभी जीवन के लिए उपयुक्त स्थितियां भी मौजूद थी।
  4. यह ग्रह, व्यावसायिक यात्रा के लिए भी उपयुक्त हो सकता है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप मंगल ग्रह के वायुमंडल की संरचना के बारे में जानते हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. मंगल मिशन
  2. पर्सविरन्स रोवर – उद्देश्य
  3. पर्सविरन्स रोवर पर उपकरण
  4. UAE के ‘होप’ मिशन तथा चीन के तियानवेन -1 अंतरिक्ष यान के बारे में
  5. पाथफाइंडर मिशन

मेंस लिंक:

‘परसिवरेंस रोवर’ मिशन के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।

‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी’


(Fugitive Economic Offender)

संदर्भ:

हाल ही में, ब्रिटेन के उच्च न्यायालय द्वारा भगोड़े हीरा व्यापारी नीरव मोदी को, मानसिक स्वास्थ्य और मानवाधिकारों के आधार पर, भारतीय अदालतों के समक्ष धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों का सामना करने हेतु भारत को प्रत्यर्पण के पक्ष में जारी एक मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश के खिलाफ अपील करने की अनुमति दी है।

  • अप्रैल 2020 में, यूनाइटेड किंगडम के गृह विभाग द्वारा, पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के 13,758 करोड़ रुपए के धोखाधड़ी मामले से संबंधित हीरा व्यापारी नीरव मोदी को भारत के लिए प्रत्यर्पण को मंजूरी दी गयी थी।
  • प्रत्यर्पण को मंजूरी, दो महीने पहले, लंदन के वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा सुनाए गए फैसले के बाद दी गयी थी, जिसमे कोर्ट ने कहा था, कि प्रथम दृष्टया नीरव मोदी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला बनता है।

भगोड़ा आर्थिक अपराधी:

दिसंबर 2019, एक विशेष अदालत द्वारा ‘प्रवर्तन निदेशालय’ की याचिका पर हीरा कारोबारी नीरव मोदी को पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के $ 2 बिलियन की धोखाधड़ी मामले में एक भगोड़ा आर्थिक अपराधी (fugitive economic offender) घोषित कर दिया गया था।

भगोड़ा आर्थिक अपराधी- परिभाषा:

कोई व्यक्ति, जिसके खिलाफ कम से कम 100 करोड़ रुपये अथवा उससे अधिक के आर्थिक अपराध में शामिल होने के कारण गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है और जो कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए भारत से भाग गया है, ऐसे व्यक्ति को अपराधी माना जायेगा।

प्रक्रिया:

  1. जांच एजेंसियों द्वारा ‘धन शोधन निवारण अधिनियम’ ( Money-Laundering Act) के तहत ‘विशेष अदालत’ में एक आवेदन दायर किया जाता है। इस आवेदन में जब्त की जाने वाली संपत्तियों और व्यक्ति के ठिकाने से संबधित अन्य जानकारी का विवरण होता है।
  2. इसके बाद, विशेष न्यायालय द्वारा, उस व्यक्ति को एक निर्दिष्ट स्थान पर उपस्थित होने के लिए एक नोटिस जारी किया जाता है। उपस्थिति होने के लिए, नोटिस के जारी होने से कम से कम छह सप्ताह के बाद की तारीख निर्धारित की जाती है।
  3. यदि वह व्यक्ति निर्धारित स्थान और तिथि पर हाजिर हो जाता है, तो आगे की कार्यवाही समाप्त कर दी जाती है। यदि वह व्यक्ति हाजिर नहीं होता है, तो जांच एजेंसियों द्वारा प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों के आधार पर व्यक्ति को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया जाता है।
  4. भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया व्यक्ति ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम’, 2018 के अनुसार, इस प्रकार की घोषणा के 30 दिनों के भीतर उच्च न्यायालय में इसे चुनौती दे सकता है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी’ कौन होता है?
  2. ‘प्रवर्तन निदेशालय’ की संरचना एवं शक्तियां
  3. सीबीआई की स्थापना और शक्तियां
  4. PMLA क्या है?
  5. ‘भगोड़ा आर्थिक अपराध अधिनियम’ का अवलोकन

मेंस लिंक:

‘भगोड़ा आर्थिक अपराध अधिनियम’ के महत्व और प्रमुख प्रावधानों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


अंतर्राष्ट्रीय सेना खेल

भारतीय सेना, रूस में होने वाले अंतर्राष्ट्रीय सेना खेलों (International Army Games) 2021 में भाग ले रही है।

  • अंतर्राष्ट्रीय सेना खेल, रूस के रक्षा मंत्रालय (MoD) द्वारा वार्षिक रूप आयोजित किया जाने वाला एक रूसी सैन्य खेल आयोजन है।
  • यह खेल पहली बार अगस्त 2015 में आयोजित किए गए थे, और दो सप्ताह तक चले इस सैन्य खेल आयोजन की दर्जनों प्रतियोगिताओं करीब 30 देशों ने भाग लिया था।
  • इन खेलों को ‘युद्ध ओलम्पिक’ (War Olympics) भी कहा जाता है।

 राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (National School of Drama – NSD) की स्थापना ‘संगीत नाटक अकादमी’ द्वारा वर्ष 1959 में उसकी एक इकाई के रूप में की गई।

  • वर्ष 1975 यह एक स्वतंत्र संस्था बनी व इसका पंजीकरण वर्ष 1860 के सोसायटी पंजीकरण धारा XXI के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्था के रूप में किया गया। यह संस्था संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पूर्ण रूप से वित्त पोषित है।
  • राष्‍ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा वर्ष 1999 में भारत रंग महोत्सव, या ‘राष्ट्रीय रंगमंच महोत्सव’ की शुरुआत की थी। यह राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) द्वारा नई दिल्ली में आयोजित किया जाने वाला वार्षिक थिएटर उत्सव है।
  • वर्तमान में, ‘राष्ट्रीय रंगमंच महोत्सव’ को, थिएटर के लिए पूरी तरह से समर्पित, एशिया के सबसे बड़े थिएटर उत्सव के रूप में माना जाता है।

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