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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 6 August 2021

 

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-I

1. भारत में जाति आधारित जनगणना की आवश्यकता

 

सामान्य अध्ययन-II

1. ‘अनुसूचित जनजाति सूची’ में संशोधन हेतु विधेयक

2. मेकेदातु विवाद

3. पूर्वव्यापी करों पर विराम लगाने हेतु विधेयक

4. ‘समग्र शिक्षा योजना 0’ की अवधि में विस्तार

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. अगलेगा द्वीप

2. डिएगो गार्सिया

3. EOS-03 उपग्रह

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: भारतीय समाज की मुख्य विशेषताएँ, भारत की विविधता।

 भारत में जाति आधारित जनगणना की आवश्यकता


संदर्भ:

बिहार के मुख्यमंत्री के अनुसार, केंद्र सरकार को ‘जाति आधारित जनगणना’ करने से इंकार करने पर पुनर्विचार करना चाहिए, क्योंकि इस तरह के आंकड़े, उनकी सरकार को ‘अन्य पिछड़ा वर्ग’ (OBC) समुदायों के मध्य वास्तविक जरूरतमंदों के लिए अधिक केंद्रित नीतियां तैयार करने में सहायक हो सकते हैं।

हालाँकि, भारत सरकार ने नीतिगत तौर पर, जनगणना (Census) में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा अन्य समुदायों की जाति-वार गणना नहीं करने का निर्णय लिया है।

‘जाति-संबंधी’ विवरण एकत्र करने की विधि:

  • गणनाकारों के द्वारा, जनगणना के एक भाग के रूप में ‘अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति’ संबंधी विवरण एकत्र किया जाता है, जबकि इसके तहत, अन्य जातियों का विवरण एकत्र नहीं किया जाता है।
  • जनगणना की मुख्य पद्धति के अंतर्गत, सभी नागरिक गणनाकार के लिए ‘स्व-घोषित’ जानकारी प्रदान करते हैं।
  • अब तक, विभिन्न राज्यों में ‘पिछड़ा वर्ग आयोगों’ द्वारा पिछड़ी जातियों की जनसंख्या का पता लगाने हेतु अपनी-अपनी गणना की जाती रही है।

जनगणना में किस प्रकार के जाति संबंधी आंकड़े प्रकाशित किए जाते हैं?

  • स्वतंत्र भारत में, 1951 से 2011 के बीच की गई प्रत्येक जनगणना में केवल अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों पर आंकड़े प्रकाशित किए गए हैं। अन्य जातियों के विवरण को जनगणना में प्रकाशित नहीं किया गया है।
  • हालांकि, इससे पहले वर्ष 1931 तक की गई प्रत्येक जनगणना में जाति संबंधी आंकड़े प्रकशित किए जाते थे।

‘सामाजिक-आर्थिक और जातिगत जनगणना’ (SECC) 2011 के बारे में:

वर्ष 2011 में आयोजित ‘सामाजिक-आर्थिक और जातिगत जनगणना’ (Socio-Economic and Caste Census- SECC) विभिन्न समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति के बारे में आंकड़े प्राप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम था।

  • इसके दो घटक थे: पहला, ग्रामीण और शहरी परिवारों का एक सर्वेक्षण तथा पूर्व निर्धारित मापदंडों के आधार पर इन परिवारों की रैंकिंग, और दूसरा ‘जातिगत जनगणना’।
  • हालांकि, सरकार द्वारा केवल ग्रामीण और शहरी परिवारों में लोगों की आर्थिक स्थिति का विवरण जारी किया गया था। जाति संबंधी आंकड़े अभी तक जारी नहीं किए गए हैं।

‘जनगणना’ और ‘सामाजिक-आर्थिक और जातिगत जनगणना’ में अंतर:

  • जनगणना, भारत की आबादी की तस्वीर प्रदान करती है, जबकि सामाजिक-आर्थिक और जातिगत जनगणना’ (SECC) राज्य द्वारा सहायता प्राप्त करने वाले लाभार्थियों की पहचान करने का एक उपकरण होती है।
  • ‘जनगणना’, ‘जनगणना अधिनियम’ 1948 (Census Act of 1948) के अंतर्गत आती है और इसके सभी आकड़ों को गोपनीय माना जाता है, जबकि SECC के तहत दी गई सभी व्यक्तिगत जानकारी, सरकारी विभागों द्वारा परिवारों को लाभ प्रदान करने और/या रोकने हेतु उपयोग करने के लिए उपलब्ध रहती है।

जातिगत जनगणना के लाभ:

प्रत्येक जाति की आबादी की सटीक संख्या, सभी का समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने हेतु आरक्षण नीति को तैयार करने में मदद करेगी।

संबंधित चिंताएं:

  • संभावना है, कि जातिगत जनगणना से कुछ वर्गों में नाराज़गी पैदा होगी और कुछ समुदाय अपने लिए अधिक या अलग कोटा की मांग करेंगे।
  • कथित तौर यह माना जाता है, कि मात्र व्यक्तियों को किसी जाति से जुड़े होने का ठप्पा लगाने से, समाज में जाति-व्यवस्था हमेशा बनी रह सकती है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं, कि ‘आईना-ए-अकबरी’ में जनसंख्या, उद्योग, धन और कई अन्य विशेषताओं से संबंधित व्यापक आंकड़े मिलते हैं? इस पुस्तक में अन्य किन विषयों का विवरण दिया गया है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘जनगणना’ क्या है?
  2. इस संबंध में वैधानिक प्रावधान
  3. ‘जनगणना’ की विधि
  4. जनगणना 2011 की प्रमुख विशेषताएं
  5. ‘राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग’ के बारे में

मेंस लिंक:

जाति आधारित जनगणना की आवश्यकता और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

‘अनुसूचित जनजाति सूची’ में संशोधन हेतु विधेयक


संदर्भ:

हाल ही में, ‘संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश (संशोधन) विधेयक, 2021’ (Constitution (Scheduled Tribes) Order (Amendment) Bill, 2021) राज्यसभा में पारित हो गया है।

इस विधेयक के द्वारा, ‘संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश, 1950’ (Constitution (Scheduled Tribes) Order, 1950) में संशोधन किया गया है।

विधेयक के प्रमुख बिंदु:

  • विधेयक में, अरुणाचल प्रदेश में चिन्हित अनुसूचित जनजातियों की सूची से ‘अबोर’ जनजाति को हटाए जाने का प्रावधान किया गया है।
  • इसके तहत, चिह्नित सूची में, कुछ अनुसूचित जनजातियों को अन्य जनजातियों के स्थान पर शामिल किया गया है।
  • सूची में ‘ताई खाम्ती’, मिश्मी-कामन (मिजु मिश्मी), इदु (मिश्मी) और तारोन (दिगारु मिश्मी) जनजातियों को शामिल किया गया है।

अधिसूचित अनुसूचित जनजातियों की सूची को संशोधित करने की शक्ति:

भारतीय संविधान में, राष्ट्रपति को विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) को निर्दिष्ट करने की शक्ति प्रदान की गई है। इसके अलावा, संविधान में संसद को ‘अधिसूचित अनुसूचित जनजातियों’ (Notified STs) की सूची को संशोधित करने की अनुमति दी गई है।

‘अनुसूचित जनजाति’ की परिभाषा:

संविधान में, ‘अनुसूचित जनजातियों’ की मान्यता संबंधी मानदंडों को परिभाषित नहीं किया गया है।

  • हालांकि, संविधान के अनुच्छेद 366 (25) में, अनुसूचित जनजातियों को परिभाषित करने की केवल प्रक्रिया दी गयी है। जिसके अनुसार, अनुसूचित जनजातियों का अभिप्राय, ऐसी जनजातियाँ या जनजाति समुदाय अथवा ऐसी जनजातियों या जनजाति समुदायों के भाग या उनके समूह हैं जिन्हें इस संविधान के प्रयोजनों के लिए अनुच्छेद 342 के अधीन अनुसूचित जनजातियाँ समझा जाता है।
  • अनुच्छेद 342(1): राष्ट्रपति, किसी भी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश के विषय में, और जहाँ वह राज्य है, राज्यपाल से सलाह के बाद सार्वजनिक अधिसूचना द्वारा, आदिवासी जाति या आदिवासी समुदायों या आदिवासी जातियों या आदिवासी समुदायों के भागों या समूहों को निर्दिष्ट कर सकते हैं, जो इस संविधान के उद्देश्यों के लिए, उस राज्य या केंद्रशासित प्रदेश, जैसा भी मामला हो, के संबंध में अनुसूचित जनजातियाँ समझे जाएंगे।

‘अनुसूचित जनजातियों’ हेतु संवैधानिक संरक्षोपाय:

शैक्षिक और सांस्कृतिक संरक्षोपाय:

  1. अनुच्छेद 15(4):- अन्य पिछड़े वर्गों (जिसमें अनुसूचित जनजाति भी शामिल है) की उन्नति के लिए विशेष प्रावधान;
  2. अनुच्छेद 29:- अल्पसंख्यकों के हितों का संरक्षण (जिसमें अनुसूचित जनजाति भी शामिल है);
  3. अनुच्छेद 46:- राज्य जनता के कमजोर वर्गों और विशेष रूप से अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के शैक्षिक और आर्थिक हितों को विशेष सावधानी के साथ बढ़ावा देगा और सामाजिक अन्याय और सभी प्रकार के सामाजिक अन्याय एवं शोषण से उनकी रक्षा करेगा।
  4. अनुच्छेद 350:- विशिष्ट भाषा, लिपि या संस्कृति के संरक्षण का अधिकार।
  5. अनुच्छेद 350:- मातृभाषा में निर्देश।

सामाजिक संरक्षोपाय:

  1. अनुच्छेद 23:- मानव तस्करी एवं भिक्षावृत्ति तथा किसी भी अन्य प्रकार के बलात् श्रम का निषेध;
  2. अनुच्छेद 24:- बाल श्रम पर रोक।

आर्थिक सुरक्षा संरक्षोपाय:

  1. अनुच्छेद 244: – उपबंध (1) पाँचवीं अनुसूची के उपबंध असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों से भिन्न किसी राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन और नियंत्रण के लिए लागू होंगे। उपबंध (2) छठी अनुसूची के उपबंध असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों के जनजाति क्षेत्रों के प्रशासन के लिए लागू होंगे।
  2. अनुच्छेद 275:- संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची के अंतर्गत आने वाले निर्दिष्ट राज्यों (STs&SAs) को सहायता अनुदान।

राजनीतिक संरक्षोपाय:

  1. अनुच्छेद 164(1):- बिहार, मध्य प्रदेश और उड़ीसा में जनजातीय कार्य मंत्रियों के लिए प्रावधान;
  2. अनुच्छेद 330:- लोकसभा में अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटों का आरक्षण;
  3. अनुच्छे337– राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटों का आरक्षण;
  4. अनुच्छेद 334:- आरक्षण के लिए 10 वर्ष की अवधि (अवधि बढ़ाने के लिए कई बार संशोधित);
  5. अनुच्छेद 243:- पंचायतों में सीटों का आरक्षण।
  6. अनुच्छेद 371:- पूर्वोत्तर राज्यों और सिक्किम के संबंध में विशेष प्रावधान।

सेवा संरक्षोपाय:

अनुच्छेद 16(4), 16(4ए), 164(बी) अनुच्छेद 335, और अनुच्छेद 320(40) के तहत अनुसूचित जनजातियों  हेतु सेवा संबंधी संरक्षोपाय किए गए हैं।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि, अगस्त 2020 में, उच्चत्तम न्यायालय की पांच-न्यायाधीशों वाली खंडपीठ ने कहा था, कि राज्य ‘कमजोर में से सबसे कमजोर’ को तरजीह देने के लिए केंद्रीय सूची में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को उप-वर्गीकृत कर सकता है। इस फैसले के बारे में अधिक जानने हेतु देखें

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. वी. चिन्नैया मामला किससे संबंधित है?
  2. अनुच्छेद 341(1) के तहत राष्ट्रपति की शक्तियां
  3. केंद्रीय सूची में अनुसूचित जनजातियों को शामिल करने अथवा बाहर करने की शक्ति?
  4. सुप्रीम कोर्ट की विभिन्न खंडपीठ
  5. सर्वोच्च न्यायालय की अपने निर्णय की समीक्षा करने की शक्ति

मेंस लिंक:

आरक्षित वर्ग के भीतर ही ‘जातीय संघर्ष’ व्याप्त है क्योंकि आरक्षण का लाभ केवल कुछ लोगों द्वारा उठाया जा रहा है। चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

मेकेदातु विवाद


संदर्भ:

तमिलनाडु द्वारा ‘मेकेदातु’ (Mekedatu) में कावेरी नदी पर कर्नाटक द्वारा जलाशय बनाने के कदम का विरोध किया जा रहा है। हालांकि, कर्नाटक सरकार का कहना है, कि ‘मेकेदातु परियोजना’ से कोई “खतरा” नहीं है और राज्य द्वारा इस परियोजना को शुरू किया किया जाएगा।

समाधान हेतु उपाय:

इस बीच, केंद्र सरकार ने कहा है, कि इस परियोजना के लिए ‘कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण’ (CWMA) की अनुमति लेना आवश्यक है।

  • कर्नाटक द्वारा भेजी गई ‘विस्तृत परियोजना रिपोर्ट’ (Detail Project Report DPR) को अनुमोदन के लिए CWMA के समक्ष कई बार पेश किया चुका है, किंतु संबधित राज्यों, कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच सहमति नहीं बन पाने के कारण इस मुद्दे पर चर्चा नहीं हो सकी है।
  • साथ ही, ‘कावेरी जल विवाद प्राधिकरण’ के अंतिम निर्णय, जिसे सर्वोच्च न्यायालय द्वारा संशोधित किया गया था, के अनुसार, ‘जल शक्ति मंत्रालय’ द्वारा ‘विस्तृत परियोजना रिपोर्ट’ (DPR) पर विचार करने के लिए पहले CWMA की स्वीकृति लेना आवश्यक है।

चूंकि, यह परियोजना एक अंतर-राज्यीय नदी के पार प्रस्तावित की गई है, अतः इसे ‘अंतरराज्यीय जल विवाद अधिनियम’ (Interstate Water Dispute Act) के अनुसार, परियोजना के लिए नदी के निचले तटवर्ती राज्यों की मंजूरी लेना भी आवश्यक है।

‘मेकेदातु परियोजना’ के बारे में:

‘मेकेदातु’ एक बहुउद्देशीय (जल एवं विद्युत्) परियोजना है।

  • परियोजना के तहत, कर्नाटक के रामनगर जिले में कनकपुरा के पास एक ‘संतोलन जलाशय’ (Balancing Reservoir) का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है।
  • इस परियोजना का उद्देश्य, बेंगलुरू शहर और इसके निकटवर्ती क्षेत्रों के लिए पीने के प्रयोजन हेतु पानी (75 टीएमसी) का भंडारण और आपूर्ति करना है। इस परियोजना के माध्यम से लगभग 400 मेगावाट बिजली उत्पन्न करने का भी प्रस्ताव किया गया है।
  • परियोजना की अनुमानित लागत 9,000 करोड़ रुपये है।

तमिलनाडु द्वारा इस परियोजना का विरोध करने के कारण:

  1. तमिलनाडु का कहना है, कि ‘उच्चतम न्यायालय’ और ‘कावेरी जल विवाद अधिकरण’ (CWDT) के अनुसार ‘कावेरी बेसिन में उपलब्ध मौजूदा भंडारण सुविधाएं, जल भंडारण और वितरण के लिए पर्याप्त है, अतः कर्नाटक का यह प्रस्ताव पूर्व-दृष्टया असमर्थनीय है और इसे सीधे खारिज कर दिया जाना चाहिए।
  2. तमिलनाडु के अनुसार- प्रस्तावित जलाशय का निर्माण केवल पीने के पानी के लिए नहीं किया जा रहा है, बल्कि इसके द्वारा सिंचाई की सीमा बढाया जाएगा, जोकि ‘कावेरी जल विवाद निर्णय’ का स्पष्ट उल्लंघन है।

अधिकरण तथा सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय:

‘कावेरी जल विवाद अधिकरण’ (CWDT) का गठन वर्ष 1990 में की गयी थी और वर्ष 2007 में दिए गए अपने अंतिम फैसले में, तमिलनाडु को 419 टीएमसी फीट, कर्नाटक को 270 टीएमसी फीट, केरल को 30 टीएमसी फीट और पुडुचेरी को 7 टीएमसी फीट पानी का बटवारा किया था। अधिकरण ने, बारिश की कमी वाले वर्षों में, सभी राज्यों के लिए जल-आवंटन की मात्रा कम कर दी जाएगी।

 

  • हालांकि, तमिलनाडु और कर्नाटक दोनों द्वारा इस बटवारे पर अप्रसन्नता व्यक्त की और जल बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों में विरोध और हिंसा के प्रदर्शन हुए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले पर सुनवाई की गई और वर्ष 2018 के फैसले में, बंटवारा करते हुए तमिलनाडु के पूर्व निर्धारित हिस्से में से 14.75 टीएमसी फीट पानी कर्नाटक को दे दिया।
  • इस प्रकार, नया बटवारे के अनुसार, तमिलनाडु के लिए 404.25 टीएमसी फीट पानी मिला और कर्नाटक को 284.75 टीएमसी फीट पानी दिया गया। केरल और पुडुचेरी का हिस्सा अपरिवर्तित रहा।

 

 

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि 2018 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार के लिए ‘कावेरी प्रबंधन योजना’ अधिसूचित करने का निर्देश दिया था? इस योजना के प्रमुख घटक कौन से हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. कावेरी की सहायक नदियाँ।
  2. बेसिन में अवस्थित राज्य।
  3. नदी पर स्थित महत्वपूर्ण जलप्रपात तथा बांध।
  4. मेकेदातु कहाँ है?
  5. प्रोजेक्ट किससे संबंधित है?
  6. इस परियोजना के लाभार्थी।

मेंस लिंक:

मेकेदातु परियोजना पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

पूर्वव्यापी करों पर विराम लगाने हेतु विधेयक


संदर्भ:

हाल ही में, केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में कराधान कानून (संशोधन) विधेयक, 2021 (Taxation Laws (Amendment) Bill, 2021) प्रस्तुत किया गया है।

विधेयक का उद्देश्य:

  1. आयकर अधिनियम, 1961 और वित्त अधिनियम, 2012 में संशोधन करना।
  2. आयकर विभाग को ‘पूर्वव्यापी कर’ (Retrospective Tax) मांगों में वृद्धि करने से रोकना।

निहितार्थ:

  1. अब, उक्त पूर्वव्यापी कराधान संशोधन के आधार पर, भारतीय संपत्ति के, 28 मई, 2012 से पहले होने वाले किसी भी अप्रत्यक्ष हस्तांतरण पर किसी भी कर की मांग नहीं की जाएगी। 28 मई, 2012 को ‘वित्त अधिनियम, 2012’ के लिए राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त हुई थी।
  2. भारतीय संपत्ति के, 28 मई, 2012 से पहले होने वाले अप्रत्यक्ष हस्तांतरण पर ‘करों की मांग’ के लिए निर्दिष्ट शर्तों को पूरा करने पर रद्द कर दिया जाएगा।
  3. विधेयक में, इन मामलों में भुगतान की गई राशि को बिना किसी ब्याज के वापस करने का भी प्रस्ताव किया गया है।

पात्रता:

इस क़ानून के अंतर्गत लाभ पाने हेतु, संबंधित करदाताओं को सरकार के खिलाफ लंबित सभी मामलों को वापस लेना होगा और इसके लिए भविष्य में कोई हर्जाना या लागत की कोई मांग नहीं करने का वादा करना होगा।

संबंधित प्रकरण एवं पूर्वव्यापी कर:

  1. वोडाफोन द्वारा आयकर विभाग के ₹ 11,000 करोड़ की कर-बकाया मांग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक मामला जीतने के बाद ‘पूर्वव्यापी कर कानून’ (Retrospective Tax Law) को ‘वित्त अधिनियम, 2012’ के माध्यम से लागू किया गया था।
  2. वर्ष 2012 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनाए गए एक फैसले के अनुसार, भारतीय संपत्ति के अप्रत्यक्ष हस्तांतरण से प्राप्त होने वाला लाभ, मौजूदा कानूनों के तहत कर योग्य नहीं हैं। इस फैसले के बाद यह क़ानून अधिनियमित किया गया था।
  3. ‘पूर्वव्यापी कर कानून’ के प्रावधान, जनवरी 2014 में केयर्न एनर्जी पर पर भी लागू किए गए थे। केयर्न एनर्जी द्वारा केयर्न इंडिया लिमिटेड से बाहर निकलने के दौरान, आयकर विभाग ने ₹ 10,570 करोड़ की प्रारंभिक मांग की थी।

इस कदम का महत्व:

  • सरकार का यह निर्णय, ‘वोडाफोन पीएलसी’ जैसी विदेशी फर्मों के साथ काफी समय से लंबित विवादों को समाप्त करने का प्रयास करता है।
  • यह फैसला, निवेशकों के अनुकूल भी है, और विशेष रूप से केयर्न एनर्जी के साथ, अप्रिय मुकदमेबाजी और मध्यस्थता संबंधी मामलों को समाप्त करेगा।
  • विदित हो कि, केयर्न एनर्जी ने भारत सरकार के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता अधिकरण में मुकद्दमा जीतने के बाद भारत की विदेशों में स्थित परिसंपत्तियों पर दावा किया गया था।

‘पूर्वव्यापी कराधान’ क्या है?

‘पूर्वव्यापी कराधान’ (Retrospective Taxation) के तहत, किसी देश को, कानून पारित होने की तारीख से पहले से, कुछ उत्पादों, वस्तुओं या सेवाओं और सौदों पर, पूर्वव्यापी कर लगाने तथा कंपनियों पर पूर्वव्यापी दंड लगाने की अनुमति होती है।

  • विभिन्न देशों द्वारा अपनी कराधान नीतियों में उन विसंगतियों को ठीक करने के लिए इस मार्ग का उपयोग किया जाया हैं, जिनके तहत अतीत में ‘कंपनियों’ को ऐसी खामियों का लाभ उठाने का अवसर मिल गया था।
  • ‘पूर्वव्यापी कराधान’ से उन कंपनियों को नुकसान पहुँचाता है जिनके द्वारा जानबूझकर या अनजाने में देश के कर नियमों की अलग-अलग व्याख्या की गई थी।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

हेग, नीदरलैंड में किस ‘अंतर्राष्ट्रीय संगठन’ का मुख्यालय स्थित है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA) – संरचना, कार्य और सदस्य।
  2. क्या PCA के फैसले संबंधित पक्षकारों के लिए बाध्यकारी होते हैं।
  3. 1995 में भारत और नीदरलैंड के बीच हस्ताक्षरित ‘द्विपक्षीय निवेश संधि’ (BIT) का उपबंध 9
  4. पूर्वव्यापी कराधान क्या है?
  5. UNCITRAL का अवलोकन।

मेंस लिंक:

स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA) के कार्यों और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

समग्र शिक्षा योजना 2.0′ की अवधि में विस्तार


संदर्भ:

केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्कूली शिक्षा के लिए ‘समग्र शिक्षा योजना’ को अगले पांच वर्षों के लिए 31 मार्च, 2026 तक जारी रखने की मंजूरी प्रदान कर दी गयी है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की सिफारिशों के आधार पर नए घटकों एवं पहलों को शामिल करते हुए इस योजना को अब नया रूप दिया गया है।

‘समग्र शिक्षा अभियान’ (SSA) 2.0 के घटक:

  1. योजना की प्रत्यक्ष पहुंच को बढ़ाने के लिए सभी बाल केंद्रित हस्तक्षेप एक निश्चित समयावधि में ‘सूचना प्रौद्योगिकी’ (आईटी) आधारित प्लेटफॉर्म पर ‘प्रत्यक्ष लाभ अंतरण’ (direct benefit transfer – DBT) के माध्यम से सीधे छात्रों को प्रदान किए जाएंगे।
  2. इस ‘प्रत्यक्ष लाभ अंतरण’ में पाठ्यपुस्तकों, वर्दी और परिवहन भत्ता जैसे ‘शिक्षा के अधिकार’ के अंतर्गत प्रदान की जाने वाले सुविधाएँ शामिल होंगी।
  3. भारतीय भाषाओं को प्रोत्साहित करने पर एनईपी की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए, योजना में भाषा शिक्षक की नियुक्ति का एक नया घटक जोड़ा गया है- शिक्षकों को वेतन सहायता के अलावा शिक्षकों के प्रशिक्षण के घटक और द्विभाषी पुस्तकें और शिक्षण शिक्षण सामग्री जोड़ी गई है।
  4. निपुण भारत, मौलिक साक्षरता और संख्यात्मकता पर एक राष्ट्रीय मिशन है, इसके अंतर्गत शिक्षण सामग्री के लिए प्रति बच्चा प्रति वर्ष 500 रुपये, नियमावली और संसाधनों के लिए 150 रुपये प्रति शिक्षक, मूल्यांकन  के लिए 10-20 लाख रुपये प्रति जिला निर्धारित किए गए हैं।
  5. डिजिटल पहल के हिस्से के रूप में, डिजिटल बोर्ड, स्मार्ट कक्षाओं (क्लासरूम) आभासी कक्षाओं (वर्चुअल क्लासरूम) और डीटीएच चैनलों के प्रसारण के लिए सहायता सहित ‘सूचना संवाद और प्रशिक्षण’ (आईसीटी) प्रयोगशाला, स्मार्ट क्लासरूम का प्रावधान भी किया गया है।
  6. इसमें 16 से 19 वर्ष की आयु बच्चों को ‘राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय शिक्षा संस्थानों’ के माध्यम से उनके माध्यमिक/उच्चतर माध्यमिक स्तर की शिक्षा को पूरा कराने के लिए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, विकलांग बच्चों को प्रति कक्षा 2000 रुपये तक की सहायता प्रदान की जाएगी।
  7. यदि किसी स्कूल के कम से कम 2 छात्र राष्ट्रीय स्तर पर खेलो इंडिया स्कूल खेलों में पदक जीतते हैं तो उस स्कूल को 25,000 हजार रूपये तक का अतिरिक्त खेल अनुदान दिए जाने का प्रावधान किया गया है।

समग्र शिक्षा (Samagra Shiksha):

समग्र शिक्षा योजना, स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों पर समावेशी और समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूर्व-विद्यालय (प्री-स्कूल) से बारहवीं कक्षा तक के सभी पहलुओं को शामिल करने वाली एक एकीकृत योजना है।

  • समग्र शिक्षा, सर्व शिक्षा अभियान (SSA), राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (RMSA) और शिक्षक शिक्षा (Teacher Education) की तीन योजनाओं को समेकित करती है।
  • यह योजना पूर्व प्राथमिक, प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक से उच्च माध्यमिक स्तर तक ‘निरंतरता के रूप में विद्यालय‘ की परिकल्पना करती है।
  • यह, विद्यालयी शिक्षा के विभिन्न कक्षा स्तरों में अंतरण दर में सुधार करने और बच्चों को विद्यालयी शिक्षा पूरी करने के लिए सार्वभौमिक पहुँच को बढ़ावा देने में सहायता करती है।
  • योजना का मुख्य केंद्र-बिंदु, अंग्रेजी भाषा के दो T अक्षरों – ‘टीचर्स’ और ‘टेक्नोलॉजी’ का एकीकरण करके सभी स्तरों पर गुणवत्ता में सुधार लाना है।
  • इस योजना का मुख्य उद्देश्य बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 के कार्यान्वयन में राज्यों की सहायता करना है।
  • यह योजना ‘केंद्र प्रायोजित योजना’ के रूप में क्रियान्वित की जा रही है। इसमें, केंद्र और अधिकांश राज्यों के मध्य 60:40 के अनुपात में वित्त पोषण किया जाता है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. समग्र शिक्षा के बारे में
  2. नए घटक
  3. आरटीई के बारे में
  4. अनुच्छेद 21ए
  5. राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के बारे में

मेंस लिंक:

शिक्षा का अधिकार (RTE) के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


अगलेगा द्वीप

(Agalega island)

यह मॉरीशस में स्थित एक द्वीप है।

  • यह द्वीपसमूह के ‘मुख्य द्वीप’ से लगभग 1,000 किमी उत्तर में स्थित है।
  • हाल ही में, ‘अगलेगा द्वीप’ काफी चर्चा में था, क्योंकि कुछ रिपोर्टों के अनुसार, मॉरीशस द्वारा भारत को इस द्वीप पर एक सैन्य अड्डा बनाने की अनुमति दी गई है।
  • हालांकि, मॉरीशस द्वारा स्पष्ट किया गया है कि भारत के साथ ऐसा कोई समझौता नहीं किया गया है।

 

डिएगो गार्सिया

(Diego Garcia)

यह यूनाइटेड किंगडम के एक विदेशी क्षेत्र के रूप में ‘ब्रिटिश हिंद महासागर क्षेत्र’ का एक द्वीप है।

  • यह चागोस द्वीपसमूह के 60 छोटे द्वीपों में सबसे बड़ा है।
  • पुर्तगाली इस द्वीप की खोज करने वाले पहले यूरोपीय थे और फिर 1790 के दशक में इस द्वीप को फ्रांसीसियों द्वारा बसाया गया और नेपोलियन काल में हुए युद्धों के बाद इसे ब्रिटिश शासन में मिला दिया गया।
  • वर्ष 1965 में, ब्रिटेन ने चागोस द्वीप समूह को मॉरीशस से अलग कर दिया, और डिएगो गार्सिया पर संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ एक संयुक्त सैन्य अड्डा स्थापित किया।
  • ब्रिटेन का कहना है, कि यह द्वीपसमूह लंदन की संपत्ति है और हाल ही में, ब्रिटेन द्वारा वर्ष 2036 तक डिएगो गार्सिया का उपयोग करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ एक पट्टा समझौते का नवीनीकरण किया गया है।

 

EOS-03 उपग्रह

EOS-03 एक ‘भू-प्रेक्षण उपग्रह’ (Earth Observation Satellite EOS) है।

  • यह उपग्रह, GSLV की 14वीं उड़ान (GSLV-F10) द्वारा अंतरिक्ष में भेजा जाएगा।
  • इस उपग्रह को भूस्थिर कक्षा में स्थापित किया जाएगा।
  • EOS-03 अत्याधुनिक उपग्रह है और बाढ़ एवं चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं की वास्तविक-समय निगरानी करने में सक्षम होगा।
  • यह उपग्रह, पूरे देश का प्रतिदिन चार-पांच बार प्रेक्षण करने में सक्षम है।

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