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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 31 July 2021

 

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

1. साधारण बीमा व्यवसाय (राष्ट्रीयकरण) संशोधन विधेयक, 2021

2. ‘चिकन पॉक्स’ की भांति संक्रामक कोरोना वायरस का ‘डेल्टा वैरिएंट’

3. महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना

4. आर्कटिक विज्ञान मंत्रिस्तरीय बैठक

 

सामान्य अध्ययन-III

1. AERA संशोधन विधेयक’, 2021

2. सामरिक पेट्रोलियम भंडार (एसपीआर) कार्यक्रम

3. ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और इसके निकटवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन हेतु आयोग विधेयक, 2021’

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. ओडिशा सरकार द्वारा तेंदुओं की डीएनए प्रोफाइल बनाने की योजना

2. इंद्र नेवी-21

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

साधारण बीमा व्यवसाय (राष्ट्रीयकरण) संशोधन विधेयक, 2021


(General Insurance Business (Nationalisation) Amendment Bill, 2021)

संदर्भ:

‘साधारण बीमा व्यवसाय (राष्ट्रीयकरण) संशोधन विधेयक’, 2021, हाल ही में लोकसभा में पेश किया गया है। यह विधेयक सरकार के लिए सामान्य बीमा फर्मों में अपनी हिस्सेदारी बेचने का मार्ग प्रशस्त करेगा।

विपक्षी दलों के सांसदों द्वारा इस विधेयक का कड़ा विरोध किया गया है और इसे वापस लेने की मांग की जा रही है।

विधेयक के प्रमुख प्रावधान:

  1. विधेयक में, साधारण बीमा व्यवसाय (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1972 में संशोधन का प्रस्ताव किया गया है, जिसके तहत केंद्र सरकार के लिए किसी ‘बीमा कंपनी’ में न्यूनतम 51 प्रतिशत इक्विटी रखने की अनिवार्यता को समाप्त किया गया है।
  2. विधेयक के एक अन्य प्रावधान में यह सुनिश्चित किया गया है, बीमा कंपनियों पर केंद्र का नियंत्रण समाप्त होने की तारीख से, इन कंपनियों पर 1972 का अधिनियम लागू नहीं होगा।
  3. विधेयक में किसी गैर- पूर्णकालिक निदेशक को, अपनी जानकारी और बीमा कंपनी मिलीभगत से की गयी भूल-चूक के लिए उत्तरदायी बनाया गया है।

इन परिवर्तनों के लिए दिए गए तर्क:

हालांकि, भारत का बीमा क्षेत्र, हाल के वर्षों में तेजी से वृद्धि कर रहा है, फिर भी वैश्विक बीमा बाजार में इसकी हिस्सेदारी काफी कम है। इस विधेयक का उद्देश्य सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों में अधिक से अधिक निजी भागीदारी के लिए अवसर प्रदान करना है।

आलोचनाएं/चिंताएं:

  1. इस विधेयक के पारित होने से ‘सामान्य बीमा कंपनियों’ का पूर्णतयः निजीकरण हो जाएगा।
  2. इसके साथ ही, जारी किए जाने वाले शेयरों के अनुपात में, सरकार को प्राप्त होने वाले लाभांश का भी नुकसान होगा।

बीमा क्षेत्र में चुनौतियां:

  1. बीमा क्षेत्र का कम विस्तार और निम्न घनत्व दर
  2. बीमा उत्पादों में अपर्याप्त निवेश
  3. सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों का प्रभुत्व और बिगड़ती वित्तीय स्थिति

पिछले कुछ वर्षों के दौरान बीमा क्षेत्र में कई बदलाव हुए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  1. ‘जीवन’ बीमा क्षेत्र (LIC अधिनियम 1956) और ‘गैर-जीवन’ बीमा क्षेत्र (GIC अधिनियम 1972) का राष्ट्रीयकरण
  2. वर्ष 1999 में ‘भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण’ (IRDAI) का गठन
  3. वर्ष 2000 में बीमा क्षेत्र में निजी और विदेशी, दोनों क्षेत्रों को प्रवेश की अनुमति

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आपने ‘हिंदुस्तान इंश्योरेंस सोसाइटी’ के बारे में सुना है? इसकी स्थापना किसके द्वारा की गई थी?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘साधारण बीमा व्यवसाय (राष्ट्रीयकरण) संशोधन विधेयक’ के बारे में
  2. प्रमुख प्रावधान
  3. पुराने कानून से तुलना

मेंस लिंक:

विधेयक के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

 विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

‘चिकन पॉक्स’ की भांति संक्रामक  कोरोना वायरस का ‘डेल्टा वैरिएंट’


संदर्भ:

अमेरिका के ‘रोग नियंत्रण केंद्र’ (Center for Disease Control – CDC) द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार-

  • कोरोना वायरस का ‘डेल्टा वैरिएंट’, छोटी चेचक (Chickenpox) की तरह आसानी से फैलता है, और इसके संक्रमण की दर, मूल ‘वैरिएंट’ से नौ गुना अधिक होती है।
  • कुछ विशिष्ट मामलों में ‘डेल्टा वैरिएंट’ का संक्रमण टीका लगवा चुके व्यक्तियों में भी उसी तरह फ़ैल सकता है, जैसे बिना टीका लगवाए व्यक्तियों में फैलता है।
  • ‘डेल्टा वैरिएंट’ के संक्रमण से उत्पन्न वायरस की वायुमार्ग में मौजूद मात्रा, अत्यधिक संक्रामक ‘अल्फा वैरिएंट’ से संक्रमित लोगों द्वारा हवा के माध्यम से फैलने वाले वायरस की तुलना में दस गुना अधिक होती है।

वायरस के प्रकार:

वायरस के वैरिएंटस में एक या एक से अधिक उत्परिवर्तन (Mutations) होते हैं, जो नए रूपांतरित वैरिएंट को, माजूदा अन्य वायरस वेरिएंटस से अलग करते हैं। हालांकि, अधिकांश उत्परिवर्तन, वायरस के लिए हानिकारक होते हैं, किंतु कुछ उत्परिवर्तन वायरस के लिए जीवित रहना आसान बनाते हैं।

पूरे विश्व में, SARS-CoV-2 (कोरोना) वायरस से बड़े स्तर पर लोग संक्रमित हो चुके हैं, और इसी वजह से यह अधिक तेजी से फ़ैल रहा है। बड़े स्तर पर वायरस के फैलने का तात्पर्य यह है, कि वायरस अपनी प्रतिकृतियां तेजी से बनाने में सक्षम होता है, जिससे इसे रूपांतरण करने में आसानी होती है है।

 

 

उत्परिवर्तिन’ क्या होता है?

  • उत्परिवर्तन अथवा ‘म्युटेशन’ (Mutation) का तात्पर्य, जीनोम अनुक्रमण में होने वाला परिवर्तन होता है।
  • SARS-CoV-2 के मामले में, जोकि एक राइबोन्यूक्लिक एसिड (RNA) वायरस है, उत्परिवर्तन का अर्थ, उसके अणु-क्रम संयोजन व्यवस्था में बदलाव होता है।
  • आरएनए वायरस में उत्परिवर्तन, प्रायः वायरस द्वारा स्व-प्रतिलिपियाँ (copies of itself) बनाते समय गलती करने के कारण होता है।

‘डेल्टा वेरिएंट’ क्या है?

कोरोना वायरस के ‘डेल्टा वेरिएंट’ (B.1.617.2) सबसे पहले भारत में देखा गया था। इसलिए इसे ‘भारतीय वेरिएंट’ कहा जा रहा है। इस वैरिएंट में, वायरस में मौजूद ‘स्पाइक प्रोटीन’ में कई म्यूटेशन होते हैं।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

कोरोना वायरस के ‘डेल्टा वेरिएंट’ को ‘वैरिएंट ऑफ़ कंसर्न’ (VOC) के रूप में वर्गीकृत किया गया है? इस प्रकार का वर्गीकरण कैसे और किसके द्वारा किया जाता है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. कोविड-19 क्या है?
  2. उत्परिवर्तन क्या है?
  3. mRNA क्या है?
  4. RT- PCR टेस्ट क्या है?
  5. जीनोम अनुक्रमण क्या है?

मेंस लिंक:

कोविड- 19 वायरस के उत्परिवर्तन से संबंधित चिंताओं पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना


(Mahila Kisan Sashaktikaran Pariyojana)

संदर्भ:

हाल ही सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, ‘कृषि एवं किसान कल्याण विभाग’ (Department of Agriculture and Farmers Welfare DA&FW) द्वारा लागू की जाने जाने वाली योजनाओं के अंतर्गत कृषि योजनाओं के लिए आवंटित व्यय का कम से कम 30 प्रतिशत, महिलाओं को कृषि की मुख्यधारा में लाने के लिए खर्च किया जा रहा है। इसमें ‘महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना’ (Mahila Kisan Sashaktikaran Pariyojana) मुख्य रूप से शामिल है।

‘महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना’ के बारे में:

‘महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना’ (MKSP) वर्ष 2011 में शुरू की गयी थी।

  • यह योजना ‘दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) का एक उप घटक है।
  • इस योजना के तहत, कृषि क्षेत्र में महिलाओं की वर्तमान स्थिति में सुधार लाने और उन्हें सशक्त बनाने हेतु उपलब्ध अवसरों को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
  • MKSP के तहत, “महिला” को “किसान” के रूप में मान्यता दी जाती है और कृषि-पारिस्थितिक संवहनीय पद्धतियों के क्षेत्र में महिलाओं की क्षमता निर्माण करने का प्रयास किया जाता है।
  • सरकार द्वारा इस प्रकार की परियोजनाओं के लिए 60 प्रतिशत तक (पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 90 %) वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

MKSP का केंद्र-बिंदु:

छोटे किसानों के लिए सतत जलवायु अनुकूल कृषि-पारिस्थितिकी पद्धतियों को अपनाने हेतु सक्षम बनाना और अंततः कुशल सामुदायिक पेशेवरों का एक समूह तैयार करना।

कृषि के महिला-करण किए जाने की आवश्यकता:

अधिकांशतः जिन परिवारों की मुखिया ‘महिला’ होती हैं, वे परिवार विस्तृति सेवाओं, किसान सहायता संस्थानों और बीज, पानी, ऋण, सब्सिडी आदि उत्पादन परिसंपत्तियों तक पहुंचने में सक्षम नहीं हो पाते हैं। कृषि श्रमिकों के रूप में, महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कम मजदूरी का भुगतान किया जाता है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि, 15 अक्टूबर को प्रतिवर्ष ‘अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस’ मनाया जाता है। इसके उद्देश्य और ऐतिहासिक महत्व क्या हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना’ की मुख्य विशेषताएं
  2. कार्यान्वयन
  3. लाभ

मेंस लिंक:

भारत में महिला किसानों से संबंधित समस्याओं की विवेचना कीजिए। इन समस्याओं के समाधान पर चर्चा भी कीजिए।

स्रोत: पीआईबी।

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

आर्कटिक विज्ञान मंत्रिस्तरीय बैठक


संदर्भ:

हाल ही में, सरकार द्वारा संसद में भारत की ‘तीसरे आर्कटिक विज्ञान मंत्रिस्तरीय’ (3rd Arctic Science Ministerial ASM3) में भागीदारी के बारे में जानकारी दी गई।

  • ASM3 का आयोजन आइसलैंड और जापान द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था, और यह एशिया में आयोजित की जाने वाली पहली आर्कटिक विज्ञान मंत्रिस्तरीय बैठक थी।
  • ‘तीसरे आर्कटिक विज्ञान मंत्रिस्तरीय’ के लिए इस वर्ष की थीम: ‘संवहनीय आर्कटिक के लिए जानकारी’ (Knowledge for a Sustainable Arctic) है।

पृष्ठभूमि:

‘आर्कटिक विज्ञान मंत्रिस्तरीय’ (Arctic Science Ministerial – ASM) की पहली दो बैठकों ASM1 और ASM2 का आयोजन क्रमश: वर्ष 2016  में अमेरिका और वर्ष 2018 में जर्मनी में किया गया था।

इस बैठक का आयोजन, आर्कटिक क्षेत्र के बारे में सामूहिक समझ बढ़ाने तथा इसकी निरंतर निगरानी पर जोर देते हुए विभिन्न हितधारकों को इस दिशा में अवसर प्रदान करने हेतु किया गया है।

आर्कटिक क्षेत्र को बनाए रखने में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और सहयोग की आवश्यकता:

आर्कटिक क्षेत्र मे बढ़ती गर्मी और इसकी बर्फ पिघलना वैश्विक चिंता का विषय हैं क्योंकि ये जलवायु, समुद्र के स्तर को विनियमित करने और जैव विविधता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं।

  • इसके अलावा, आर्कटिक और हिंद महासागर के करीब होने के प्रमाण हैं (जो भारतीय मॉनसून को नियंत्रित करता है)।
  • इसलिए, भौतिक प्रक्रियाओं की समझ में सुधार करना और भारतीय गर्मियों के मॉनसून पर आर्कटिक बर्फ के पिघलने के प्रभाव को कम करना बहुत महत्वपूर्ण है।

भारत और आर्कटिक:

  • भारत, आर्कटिक से पेरिस में स्वालबार्ड संधि (Svalbard Treaty) पर वर्ष 1920 में हस्ताक्षर करने के बाद से जुड़ा हुआ है।
  • जुलाई 2008 से, भारत का आर्कटिक में नॉर्वे के स्वालबार्ड क्षेत्र के न्यालेसुंड (NyAlesund, Svalbard Area) में हिमाद्री नामक एक स्थायी अनुसंधान स्टेशन है।
  • भारत द्वारा, जुलाई 2014 से कांग्सजोर्डन फ़ियोर्ड (Kongsfjorden fjord) में इंडआर्क (IndARC) नामक एक बहु-संवेदक यथास्थानिक वेधशाला (multi-sensor moored observatory) भी तैनात की गई है।

भारत के आर्कटिक क्षेत्र में अन्य योगदान:

  • भारत ने आर्कटिक में, यथास्थान (in-situ) और रिमोट सेंसिंग, दोनों अवलोकन प्रणालियों में योगदान करने की अपनी योजना साझा की।
  • भारत ऊपरी महासागर कारकों और समुद्री मौसम संबंधी मापदंडों की लंबी अवधि की निगरानी के लिए आर्कटिक में खुले समुद्र में नौबंध की तैनाती करेगा।
  • यूएसए के सहयोग से ‘नासा-इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार’ (NISER) उपग्रह मिशन का शुभारंभ हो रहा है। NISER का उद्देश्य उन्नत रडार इमेजिंग का उपयोग करके भूमि की सतह के परिवर्तनों के कारण और परिणामों का वैश्विक रूप से मापन करना है।
  • सतत आर्कटिक निगरानी नेटवर्क (Sustained Arctic Observational Network SAON) में भारत का योगदान जारी रहेगा।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

दक्षिणी महासागर व्हेल अभयारण्य कहाँ स्थित है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ASM- उद्देश्यों और बैठकों के बारे में
  2. SAON के बारे में
  3. NISER क्या है?
  4. आर्कटिक परिषद के बारे में
  5. NCPOR के बारे में
  6. IndARC क्या है?
  7. आर्कटिक में भारत के स्थायी अनुसंधान स्टेशन के बारे में।

मेंस लिंक:

आर्कटिक क्षेत्र के सामरिक महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी।

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

AERA संशोधन विधेयक’, 2021


संदर्भ:

हाल ही में, लोकसभा द्वारा ‘भारतीय विमानपत्तन आर्थिक नियामक प्राधिकरण (AERA) संशोधन विधेयक’, 2021 (Airports Economic Regulatory Authority of India (AERA) Amendment Bill, 2021) पारित कर दिया गया है। इस विधेयक द्वारा ‘भारतीय विमानपत्तन आर्थिक नियामक प्राधिकरण अधिनियम’, 2008 में संशोधन किया जाएगा।

पृष्ठभूमि:

2008 के अधिनियम के तहत ‘विमानपत्तन आर्थिक नियामक प्राधिकरण’ (Airport Economic Regulatory AuthorityAERA) की स्थापना की गयी थी। AERA, भारत में प्रमुख हवाई अड्डों पर प्रदान की जाने वाली वैमानिकी सेवाओं के लिए टैरिफ और अन्य शुल्कों (जैसे हवाई अड्डा विकास शुल्क) को विनियमित करता है।

नवीनतम प्रावधान:

  1. 2008 के अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी हवाई अड्डे पर प्रतिवर्ष न्यूनतम 35 लाख यात्रियों द्वारा आवागमन किया जाता है, तो इसे प्रमुख हवाई अड्डे के रूप में नामित कर दिया जाएगा। प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, केंद्र सरकार किसी भी हवाई अड्डे को मात्र एक अधिसूचना द्वारा ‘प्रमुख हवाई अड्डे’ के रूप में नामित कर सकती है।
  2. विधेयक में प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार, AERA को प्रतिवर्ष न्यूनतम 35 लाख यात्रियों द्वारा आवागमन करने वाले प्रमुख हवाई अड्डों के अलावा अन्य हवाई अड्डों के एक समूह के लिए वैमानिकी सेवाओं हेतु टैरिफ और अन्य शुल्कों को विनियमित करने की अनुमति होगी।
  3. लाभदायक समूहन (Profitable Clubbing): विधेयक के तहत, सरकार ‘सार्वजनिक-निजी साझेदारी’ (PPP) मॉडल के तहत निवेश करने हेतु एक व्यवहारिक संयोजन बनाने के लिये बोलीदाताओं को एक संयोजन / पैकेज के रूप में लाभदायक तथा गैर-लाभकारी हवाई अड्डों को जोड़ने में सक्षम होगी।

सुधारों की आवश्यकता:

  • आम तौर पर, हवाई अड्डों पर एकाधिकार बनने का जोखिम रहता है, क्योंकि शहरों में आमतौर पर एक ही नागरिक हवाई अड्डा होता है, जो उस क्षेत्र में सभी वैमानिकी सेवाओं को नियंत्रित करता है।
  • कि निजी हवाईअड्डा संचालक अपने एकाधिकार का दुरुपयोग न कर सकें, यह सुनिश्चित करने के लिए, हवाईअड्डा क्षेत्र में एक ‘स्वतंत्र शुल्क नियामक’ का गठन करने की आवश्यकता महसूस की गई है।

नए कानून के लाभ:

  1. यह क़ानून, उड़ान (UDAN) क्षेत्रीय संपर्क योजना में तेजी लाने हेतु अपेक्षाकृत दूरदराज़ क्षेत्रों में स्थित हवाई संपर्क में सुधार का विस्तार करने में मदद करेगा।
  2. यह छोटे हवाई अड्डों के विकास को प्रोत्साहित करेगा।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. विधेयक की मुख्य विशेषताएं
  2. केंद्र सरकार की शक्तियां
  3. AERA के बारे में
  4. AAI के बारे में

मेंस लिंक:

‘भारतीय विमानपत्तन आर्थिक नियामक प्राधिकरण (AERA) संशोधन विधेयक’ की आवश्यकता और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

सामरिक पेट्रोलियम भंडार (एसपीआर) कार्यक्रम


(Strategic petroleum reserves (SPR) programme)

संदर्भ:

‘सामरिक पेट्रोलियम भंडार कार्यक्रम’ (Strategic petroleum reserves- SPR programme) के दूसरे चरण के तहत 6.5 मिलियन मीट्रिक टन भंडारण क्षमता की चंडीखोल और पादुर में दो और वाणिज्यिक-सह- सामरिक सुविधाएं स्थापित की जाएंगी।

पृष्ठभूमि:

‘सामरिक पेट्रोलियम भंडार (एसपीआर) कार्यक्रम’ के पहले चरण के तहत, भारत सरकार द्वारा अपने विशेष उद्देश्य संवाहक (Special Purpose Vehicle- SPV) ‘इंडियन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड’ (ISPRL) के माध्यम से तीन स्थानों नामतः विशाखापटनम, मंगलौर और पादुर (उडूपी के निकट) 5.33 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) के सामरिक खनिज तेल भंडार बनाने का निर्णय लिया गया था।

‘सामरिक पेट्रोलियम भंडार कार्यक्रम’ कार्यक्रम के बारे में:

  • ‘सामरिक पेट्रोलियम भंडार’, प्राकृतिक आपदाओं, युद्ध या अन्य आपदाओं की वजह से कच्चे तेल की आपूर्ति में व्यवधान के जोखिम जैसे किसी भी संकट से निपटने के लिए कच्चे तेल के विशाल भंडार हैं।
  • ये पेट्रोलियम भंडार सामरिक प्रकृति के होंगे और इन भंडारों में संग्रहीत कच्चे तेल का उपयोग ‘तेल की कमी की स्थिति’ के दौरान अथवा भारत सरकार द्वारा इस प्रकार की स्थिति घोषित किए जाने पर किया जाएगा।
  • सामरिक खनिज तेल भंडारण सुविधाओं के निर्माण का प्रबंधन, एक विशेष प्रयोजन कंपनी इंडियन स्‍ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्वस लिमिटेड (ISPRL) द्वारा किया जा रहा है, जो ‘पैट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय’ के अधीन ‘तेल उद्योग विकास बोर्ड’ (OIDB) की पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी कंपनी है।

‘सामरिक तेल भंडार’ की आवश्यकता:

  • वर्ष 1990 के दौरान, पूरे पश्चिमी एशिया के खाड़ी युद्ध की चपेट में आ जाने से, भारत एक बड़े ऊर्जा संकट से जूझ रहा था। कुल मिलाकर, उस समय भारत के तेल भंडार में केवल तीन दिनों की आपूर्ति के लिए पर्याप्त तेल बचा था। हालांकि, भारत उस समय संकट को टालने में कामयाब रहा, किंतु ऊर्जा- व्यवधान का खतरा आज भी एक वास्तविक खतरे के रूप में सामने खड़ा है।
  • ऊर्जा असुरक्षा को दूर करने के लिए, अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने 1998 में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार की अवधारणा पर कार्य किया था। वर्तमान में, पेट्रोलियम पदार्थों की भारत में खपत बढ़ने के साथ, इस तरह के भंडार बनाने संबधित मामला मजबूत होता जा रहा है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

एक ‘अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा कार्यक्रम’ (I.E.P.) पर समझौते के अनुसार, प्रत्येक अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) वाले देश के पास कम से कम 90 दिनों के शुद्ध तेल आयात के बराबर आपातकालीन तेल भंडार रखना आवश्यक है। IEA क्या है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. सामरिक पेट्रोलियम भंडार (एसपीआर) कार्यक्रम के बारे में
  2. अवस्थिति
  3. कार्यान्वयन

मेंस लिंक:

ऊर्जा असुरक्षा को दूर करने के लिए, भारत सरकार द्वारा 1998 में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार की अवधारणा पर कार्य किया गया था। वर्तमान में इसकी मांग हर गुजरते दिन के साथ मजबूत होती जा रही है। इस तरह के रिजर्व की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी।

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और इसके निकटवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन हेतु आयोग विधेयक, 2021


संदर्भ:

हाल ही में ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और इसके निकटवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन हेतु आयोग विधेयक, 2021’ (‘The Commission for Air Quality Management in National Capital Region and Adjoining Areas Bill, 2021’)  को लोकसभा में पेश किया गया है।

  • यह विधेयक, एक आयोग की स्थापना करेगा और पिछले वर्ष लागू किए गए अध्यादेश को प्रतिस्थापित करेगा।
  • विधेयक में, कई दौर की वार्ता के बाद, पराली जलाने पर कठोर दंड और संभावित कारावास की सजा संबंधी किसानों की चिंताओं को ध्यान में रखा गया है।

प्रयोज्यता:

यह विधेयक, ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR)’ और इसके आस-पास स्थित हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के वायु प्रदूषण से संबंधित क्षेत्रों, जिनकी वजह से एनसीआर में वायु गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पडता है, पर लागू होगा।

विधेयक में किए गए प्रस्ताव:

विधेयक में निम्नलिखित के गठन का प्रावधान किया गया है:

  1. ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और इसके निकटवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन हेतु ‘वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग’ (Commission for Air Quality Management – CAQM)
  2. ‘वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग’ की सहायता हेतु तीन उप-समितियां – निगरानी और पहचान पर उप-समिति; सुरक्षा और प्रवर्तन पर उप-समिति; और अनुसंधान और विकास पर उप-समिति।

विधेयक की आवश्यकता:

विशेष रूप से ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र’ में वायु प्रदूषण के स्रोतों में कई तरह के कारक शामिल हैं, जिनमे से कुछ कारक इसकी क्षेत्रीय सीमाओं से बाहर मौजूद रहते है। अतः बिजली, कृषि, परिवहन, उद्योग, आवासीय और निर्माण सहित विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों से जुड़े, वायु प्रदूषण के सभी स्रोतों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

  • चूंकि वायु प्रदूषण एक स्थानीय घटना नहीं होती है, इसका प्रभाव, स्रोत से दूर के क्षेत्रों में भी महसूस किया जाता है।
  • इस वजह से, बहु-क्षेत्रीय संकालन (synchronisation) के साथ-साथ अंतर-राज्य और अंतर-शहर समन्वय के माध्यम से क्षेत्रीय स्तर पर पहल करने की आवश्यकता होती है।

‘वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग’ के बारे में:

‘वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग’ (Commission for Air Quality Management – CAQM) का गठन अक्टूबर 2020 में ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और इसके निकटवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन हेतु आयोग अध्यादेश’, 2020 (‘Commission for Air Quality Management in National Capital Region and Adjoining Areas Ordinance’) के तहत किया गया था ।

  • CAQM का गठन करने के लिए पूर्ववर्ती ‘पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम एवं नियंत्रण) प्राधिकरण’ (Environment Pollution (Prevention and Control) Authority) अर्थात EPCA को भंग कर दिया गया था।
  • ‘वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग’ एक ‘सांविधिक प्राधिकरण’ (Statutory Authority) होगा।
  • यह केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जैसे निकायों का अधिक्रमण (Supersede) करेगा।

संरचना:

आयोग की अध्यक्षता भारत सरकार के सचिव अथवा राज्य सरकार के मुख्य सचिव के रैंक के अधिकारी द्वारा की जाएगी।

  • ‘अध्यक्ष’ तीन साल की अवधि तक या 70 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक पद पर कार्य करेगा।
  • आयोग में विभिन्न मंत्रालयों के साथ-साथ, हितधारक राज्यों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
  • इसमें, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और सिविल सोसाइटी के विशेषज्ञ भी सदस्य के रूप में शामिल होंगे।

शक्तियां और कार्य:

  1. ‘वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग’ को वायु प्रदूषण से संबंधित मुद्दों पर संबंधित राज्य सरकारों को निर्देश जारी करने का अधिकार होगा।
  2. ‘आयोग’, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता की सुरक्षा और सुधार के उद्देश्य से आवश्यक समझी जाने वाली शिकायतों पर विचार करेगा।
  3. वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए मानदंड भी निर्धारित करेगा।
  4. आयोग के पास, उल्लंघन-कर्ताओं को चिह्नित करने, कारखानों, उद्योगों तथा किसी भी अन्य प्रदूषणकारी इकाई की निगरानी करने, और ऐसी इकाइयों को बंद करने की शक्ति होगी।
  5. आयोग के पास, NCR और आसपास के क्षेत्रों में, प्रदूषण मानदंडों का संभावित उल्लंघन करने वाले, राज्य सरकारों द्वारा जारी किए गए निर्देशों को रद्द करने का भी अधिकार होगा।

विधेयक के अन्य प्रमुख प्रावधान:

  • विधेयक में, पराली जलाने को गैर-अपराध घोषित कर दिया गया है और संभावित कारावास संबंधी उपबंध को वापस ले लिया गया है।
  • हालांकि, किसानों सहित जो भी व्यक्ति पराली जलाते हुए पाए जाएंगे उन पर ‘पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क’ लगाया जाएगा।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप पराली जलाने वाले ‘घोल’ पूसा (PUSA) के बारे में जानते हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. EPCA के बारे में
  2. NGT के बारे में
  3. CPCB के बारे में
  4. ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन हेतु आयोग विधेयक, 2021 का अवलोकन

मेंस लिंक:

‘पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम एवं नियंत्रण) प्राधिकरण’ (Environment Pollution (Prevention and Control) Authority) अर्थात EPCA को क्यों भंग कर दिया गया था, और इसकी जगह पर किस निकाय का गठन किया गया है?

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


ओडिशा सरकार द्वारा तेंदुओं की डीएनए प्रोफाइल बनाने की योजना

  • ओडिशा के ‘वन और पर्यावरण विभाग’ द्वारा राज्य में तेंदुओं की डीएनए प्रोफाइलिंग करने का फैसला किया गया है।
  • यह पद्धति, शिकारियों और व्यापारियों से तेंदुओं की खाल और अन्य अंगों को जब्त करने के बाद, इनकी मौत और इसके कारणों का पता लगाने में सहायक होगी।
  • यह प्रणाली वन्यजीव अपराधों, विशेष रूप से तेंदुओं के अवैध शिकार, के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करेगी।

 

इंद्र नेवी-21

(INDRA NAVY)

हाल ही में, भारत और रूस की नौसेनाओं के बीच 12वां ‘इंद्र’ नौसेना (INDRA NAVY) अभ्यास बाल्टिक सागर में आयोजित किया गया।

  • यह सैन्याभ्यास हर दो वर्ष बाद भारत और रूस की नौसेनाओं के बीच किया जाता है।
  • ‘इंद्र नेवी’ अभ्यास की शुरूआत 2003 में की गई थी, जो दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच मौजूद दीर्घकालीन रणनीतिक सम्बंधों का परिचायक है।

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