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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 30 July 2021

 

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-I

1. अर्थ ओवरशूट डे, 2021

 

सामान्य अध्ययन-II

1. जांच आयोग अधिनियम, 1952

2. IFSCA द्वारा हस्ताक्षरित बहुपक्षीय समझौता ज्ञापन के लिए मंजूरी

 

सामान्य अध्ययन-III

1. प्रोजेक्ट बोल्ड

2. EOS-03 उपग्रह

3. अंतर्देशीय पोत विधेयक 2021

4. अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. संत सांबंदर

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, भौगोलिक विशेषताएँ और उनके स्थान।

‘अर्थ ओवरशूट डे’, 2021


(Earth Overshoot Day, 2021)

संदर्भ:

वर्ष 2021 का ‘अर्थ ओवरशूट डे’ (Earth Overshoot Day), पिछले वर्ष की तुलना में लगभग एक माह पहले 29 जुलाई मनाया गया। उत्सर्जन में वृद्धि होने तथा जैव विविधता की क्षति में तीव्रता होने की वजह से, इसे आगे बढ़ाया गया है।

‘अर्थ ओवरशूट डे’ की तिथि का निर्धारण:

प्रतिवर्ष ‘अर्थ ओवरशूट डे’ की तारीख की घोषणा ‘ग्लोबल फुटप्रिंट नेटवर्क’, (Global Footprint Network) द्वारा की जाती है, यह तत्काल जलवायु कार्रवाई और संवहनीय उपभोग पर कार्य करने वाला एक  वैश्विक संगठन है।

‘अर्थ ओवरशूट डे’ क्या है?

अर्थ ओवरशूट दिवस, प्रतिवर्ष उस तारीख को चिह्नित करता है, जब हम पृथ्वी द्वारा पूरे साल के लिए उपलब्ध कराए गए समस्त संसाधनों का उपभोग कर चुके होते हैं।

अर्थात, पृथ्वी द्वारा पूरे वर्ष के दौरान पुनरुत्पादित किए गए सभी जैविक संसाधनों का 29 जुलाई, 2021 तक मानवों द्वारा उपभोग किया जा चुका है।

यह दिवस, इस वर्ष एक महीना पहले मनाए जाने का कारण:

  • हम अपने वैश्विक कार्बन फुटप्रिंट में 6% की वृद्धि पहले ही देखा चुके हैं, और अमेज़ॅन वर्षावनों में वनों की अत्याधिक कटाई होने के कारण हमारी वैश्विक वन जैव-क्षमता, 0.5% तक कम हो चुकी है।
  • वर्ष 2020 के दौरान वनों की कटाई में भी 12% की वृद्धि हुई है, और वर्ष 2021 के अनुमानों से पता चलता है, कि यह आंकड़ा साल-दर-साल बढ़ते हुए 43% तक पहुंच जाएगा।

वर्तमान चिंताएं:

  • वर्तमान दर के हिसाब से, हम प्रतिवर्ष प्राकृतिक संसाधनों का लगभग 7 गुना अधिक तेज़ी से प्रयोग कर रहे हैं। आज की तारीख से, अर्थात 29 जुलाई से इस वर्ष के अंत तक, हम ‘पारिस्थितिक घाटा व्यय’ (Ecological Deficit Spending) पर कार्य कर रहे हैं।
  • संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, 1970 के दशक में ‘ओवरशूट’ अवधारणा शुरू होने के बाद से, वर्ष 2021 में हमारा ‘प्राकृतिक संसाधन व्यय’ सर्वाधिक है।

‘अर्थ ओवरशूट डे’ की अवधारणा:

‘अर्थ ओवरशूट डे’ की अवधारणा, पहली बार यूनाइटेड किंगडम के एक थिंक टैंक ‘न्यू इकोनॉमिक्स फाउंडेशन’ के ‘एंड्रयू सिम्स’ (Andrew Simms) द्वारा प्रस्तुत की गई थी। इन्होने वर्ष 2006 में ‘ग्लोबल फुटप्रिंट नेटवर्क’ के साथ भागीदारी में पहला ‘ग्लोबल अर्थ ओवरशूट डे’ अभियान शुरू किया था।

‘अर्थ ओवरशूट डे’ की गणना:

‘अर्थ ओवरशूट डे’ की गणना ग्रह की जैव क्षमता (दिए गए वर्ष में पृथ्वी द्वारा पारिस्थितिक संसाधनों की उत्पादन क्षमता) को मनुष्यों के पारिस्थितिक पदचिह्न (उस वर्ष में मानव द्वारा पारिस्थितिक संसाधनों के उपभोग की मांग) से विभाजित करके और 365 (एक वर्ष में दिनों की संख्या) से गुणा करके की जाती है।

अर्थात, ‘अर्थ ओवरशूट डे’ = (पृथ्वी की जैव क्षमता/मानवता का पारिस्थितिक पदचिह्न) x 365

‘पारिस्थितिक पदचिह्न’ क्या होते है?

यह एक मापक होता है, जिसके द्वारा ‘प्रकृति की पुनरुत्पादन की क्षमता’ के विरुद्ध ‘प्रकृति पर मानव- मांग’ की व्यापक रूप से तुलना की जाती है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आपने ‘वहन क्षमता’ (Carrying capacity) शब्द के बारे में सुना है? इसका क्या अर्थ है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘अर्थ ओवरशूट डे’ के बारे में
  2. इसकी गणना किस प्रकार की जाती है?
  3. देशवार तिथियां (Country-wise dates)
  4. ‘पारिस्थितिक पदचिह्न’ क्या है?

मेंस लिंक:

‘पारिस्थितिक पदचिह्न’ (Ecological footprint) क्या होते है? इसके महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्द्ध-न्यायिक निकाय।

‘जांच आयोग अधिनियम’, 1952


(Commissions of Inquiry Act, 1952)

संदर्भ:

हाल ही में, पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा ‘जांच आयोग अधिनियम’, 1952 (Commissions of Inquiry Act, 1952) के तहत, इजरायल की साइबर-खुफिया कंपनी NSO ग्रुप द्वारा विकसित ‘पेगासस स्पाइवेयर’ के माध्यम से ‘टेलीफोन’ की कथित निगरानी किए जाने की जाँच करने हेतु एक ‘जांच आयोग’ (लोकुर आयोग) का गठन किया गया है।

यह आयोग, विभिन्न व्यक्तियों की निजता के कथित उल्लंघन की जांच करेगा।

इस प्रकार के आयोग गठित करने की शक्ति:

यद्यपि, केंद्र और राज्य, दोनों सरकारों द्वारा इस प्रकार के ‘जांच आयोगों का गठन किया जा सकता है, किंतु राज्य सरकार केवल उन विषयों पर ‘जांच आयोग’ गठित कर सकती है, जिन पर उसे कानून बनाने का अधिकार होता है।

  • यदि केंद्र सरकार द्वारा किसी विषय पर आयोग का गठन पहले किया जाता है, तो राज्य सरकार, उसी विषय पर, केंद्र सरकार की मंजूरी लिए बिना, अन्य समानांतर जांच आयोग का गठन नहीं कर सकती है।
  • किंतु, यदि राज्य सरकार द्वारा ‘जांच आयोग’ का गठन किया जाता है, और यदि केंद्र सरकार को लगता है, कि इस विषय पर जांच का दायरा दो या अधिक राज्यों तक बढाया जा सकता है, तो वह समान विषय पर दूसरा जांच आयोग गठित कर सकती है।

‘जांच आयोग’ को प्राप्त शक्तियां:

जांच आयोग अधिनियम, 1952 के अंतर्गत सरकार द्वारा गठित आयोग को, ‘सिविल प्रक्रिया संहिता’, 1908 (Code of Civil Procedure, 1908) के तहत किसी मुकदमे की सुनवाई के दौरान एक ‘दीवानी अदालत’ के समान शक्तियां प्राप्त होंगी।

  • इसका अर्थ है, कि आयोग के पास, किसी भी व्यक्ति को, भारत के किसी भी कोने से बुलाने और उसके समक्ष पेश होने, उसकी शपथ पर जांच करने तथा शपथपत्रों पर साक्ष्य प्राप्त करने की शक्तियां होती हैं।
  • जांच आयोग, किसी भी किसी न्यायालय या कार्यालय से किसी भी लोक-अभिलेख या उसकी प्रतिलिपि दिए जाने का आदेश दे सकता है।

आयोग द्वारा किन विषयों पर जांच की जा सकती है?

  • केंद्र सरकार द्वारा गठित आयोग, संविधान की सातवीं अनुसूची में सूची-I (संघ सूची) अथवा सूची-II (राज्य सूची) या सूची-III (समवर्ती सूची) में शामिल किसी भी प्रविष्टि से संबंधित, किसी भी मामले की जांच कर सकता है।
  • जबकि, राज्य सरकारों द्वारा गठित आयोग ‘सातवीं अनुसूची’ की सूची-II या सूची-III में शामिल प्रविष्टियों से संबंधित मामलों की जांच कर सकते हैं।

पेगासस ‘जांच आयोग’ का मामला किस सूची से संबंधित है:

  • ‘जांच आयोग’ का गठन करने हेतु, पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा ‘लोक व्यवस्था’ और ‘पुलिस’ प्रविष्टियों का हवाला दिया गया है। हालांकि, ये विषय सांतवी अनुसूची की ‘राज्य सूची’ के अंतर्गत आते है, फिर भी एक तर्क यह भी दिया जा सकता है कि उक्त मामले में ‘जांच’ की विषय-वस्तु, मुख्यतः केंद्रीय सूची के अंतर्गत आती है।
  • इसके अलावा, डाक और टेलीग्राफ, टेलीफोन, वायरलेस, प्रसारण और संचार के अन्य माध्यम संघ सूची की प्रविष्टि 31 से संबंधित हैं।

इस प्रकार के जाँच आयोग की रिपोर्ट का महत्व:

  • इस तरह के आयोगों के निष्कर्षों को, आम तौर पर विधानसभा या संसद में पेश किया जाता है, जो इस पर निर्भर करता है कि, आयोग का गठन किसके द्वारा किया गया है।
  • सरकार, आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने के लिए बाध्य नहीं होती है। और हालांकि, आयोग के निष्कर्ष कार्यपालिका के लिए बाध्यकारी नहीं होते हैं, किंतु अदालतों द्वारा, साक्ष्य के रूप में इन निष्कर्षो पर विश्वास किया जा सकता है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं, कि ‘भारत सरकार अधिनियम’, 1935 द्वारा कुछ क्षेत्रों में राज्य विधानसभा या विधानसभाओं पर केंद्रीय संसद को प्रधानता दी गयी थी?  इन क्षेत्रों के बारे में बताइए?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. संविधान की 7वीं अनुसूची के बारे में
  2. लोकुर आयोग के बारे में
  3. जांच आयोग अधिनियम, 1952
  4. अधिनियम के तहत केंद्र और राज्यों की शक्तियां

मेंस लिंक:

जांच आयोग अधिनियम, 1952 से संबंधित मुद्दों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

IFSCA द्वारा हस्ताक्षरित बहुपक्षीय समझौता ज्ञापन के लिए मंजूरी


संदर्भ:

हाल ही में, केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा ‘अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण’ (IFSCA), ‘अंतर्राष्ट्रीय प्रतिभूति आयोग संगठन’ (IOSCO) और अंतर्राष्ट्रीय बीमा पर्यवेक्षक संघ (IAIS) के मध्य हस्ताक्षरित एक बहुपक्षीय समझौता ज्ञापन के लिए मंजूरी प्रदान कर दी गई है।

पृष्ठभूमि:

वर्ष 2002 में ‘अंतर्राष्ट्रीय प्रतिभूति आयोग संगठन’ (IOSCO) द्वारा ‘प्रतिभूति नियामकों’ के अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान तथा सीमा-पार लागू किए जाने की सुविधा हेतु डिज़ाइन किया गया एक ‘बहुपक्षीय समझौता ज्ञापन’ (Multilateral Memorandum of Understanding) अर्थात ‘IOSCO- MMoU’ अपनाया गया था।

आगे चलकर वर्ष 2005 में यह (IOSCO- MMoU), प्रतिभूति नियामकों के मध्य अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए एक बेंचमार्क बन गया।

अंतर्राष्ट्रीय प्रतिभूति आयोग संगठन’ (IOSCO) के बारे में:

  • वर्ष 1983 में गठित, ‘अंतर्राष्ट्रीय प्रतिभूति आयोग संगठन’ (International Organization of Securities Commissions – IOSCO), विश्व में प्रतिभूति एवं वायदा बाजारों को नियंत्रित करने वाली संस्थाओं का एक संगठन है।
  • इसके सदस्यों में, विशिष्ट रूप से, किसी राष्ट्रीय क्षेत्राधिकार में कार्यरत प्रमुख प्रतिभूति और/या वायदा बाजार नियामक या प्रत्येक देश के मुख्य वित्तीय नियामक शामिल होते हैं।
  • मुख्यालय: मैड्रिड, स्पेन।

IOSCO के कार्य:

  1. निवेशकों की सुरक्षा में वृद्धि करने और प्रणालीगत जोखिम को कम करने हेतु विनियमन संबंधी उच्च मानकों को विकसित और कार्यान्वित करना तथा इन विनियमनो को बढ़ावा देना।
  2. विभिन्न ‘एक्सचेंजों’ के साथ जानकारी साझा करना, तथा तकनीकी एवं परिचालन संबंधी मुद्दों में उनकी सहायता करना।
  3. सीमा-पार और बाजारों में वैश्विक निवेश लेनदेन की निगरानी हेतु मानक स्थापित करना।

अंतर्राष्ट्रीय बीमा पर्यवेक्षक संघ (IAIS) के बारे में:

  • अंतर्राष्ट्रीय बीमा पर्यवेक्षक संघ (International Association of Insurance Supervisors – IAIS), विश्व के 97% बीमा प्रीमियम वाले 190 से अधिक क्षेत्राधिकारों के बीमा पर्यवेक्षकों का एक स्वैच्छिक सदस्यता संगठन है।
  • यह ‘बीमा क्षेत्र’ के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक निर्धारित करने वाला निकाय है।
  • इसका गठन वर्ष 1994 में किया गया था, और यह स्विस नागरिक कानून के तहत, एक प्रकार के गैर-लाभकारी संगठन के रूप में कार्य करता है।
  • IAIS की मेजबानी, बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) द्वारा की जाती है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या ‘अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र’ (IFSC) को ‘विशेष आर्थिक क्षेत्र’ (SEZ) में स्थापित किया जा सकता है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. IFSCs क्या होते हैं?
  2. क्या IFSC को SEZ में स्थापित किया जा सकता है?
  3. भारत का पहला IFSC
  4. IFSC द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाएं?
  5. IFSC की सीमाएं
  6. IOSCO के बारे में

मेंस लिंक:

अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्रों (IFSC)  के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

प्रोजेक्ट बोल्ड


(Project BOLD)

संदर्भ:

‘खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग’ (KVIC) तथा सीमा सुरक्षा बल ने जैसलमेर में मरुस्थलीकरण को रोकने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए ‘प्रोजेक्ट बोल्ड’ (Project BOLD) की शुरुआत की गयी है।

इस परियोजना के तहत, इनके द्वारा बांस के 1000 पौधे लगाए गए हैं।

‘प्रोजेक्ट बोल्ड’ के बारे में:

  1. बोल्ड का अर्थ “सूखे की स्थिति में भू-क्षेत्र पर बांस मरु-उद्यान” अर्थात (Bamboo Oasis on Lands in Drought BOLD) है।
  2. यह परियोजना ‘खादी और ग्रामोद्योग आयोग’ (KVIC) द्वारा शुरू की गई है।
  3. यह परियोजना, खादी ग्रामोद्योग आयोग द्वारा देश के 75वें स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित खादी बांस महोत्सव का हिस्सा है।
  4. उद्देश्य: शुष्क और अर्ध-शुष्क भू-क्षेत्रों में बांस आधारित हरित पट्टियां विकसित करना, मरुस्थलीकरण कम करना और आजीविका एवं बहु-विषयक ग्रामीण उद्योग सहायता प्रदान करना।

परियोजना में ‘बांस’ को क्यों चुना गया?

बांस, बहुत तेजी से बढ़ते हैं और लगभग तीन साल की अवधि में उन्हें काटा जा सकता है। बांस को पानी के संरक्षण और भूमि की सतह से पानी के वाष्पीकरण को कम करने के लिए भी जाना जाता है, जोकि शुष्क और सूखाग्रस्त क्षेत्रों की एक विशेषता होती है।

खादी और ग्रामोद्योग आयोग:

KVIC, खादी और ग्रामोद्योग आयोग अधिनियम, 1956 (Khadi and Village Industries Commission Act, 1956) के तहत स्थापित एक वैधानिक निकाय है।

  • आयोग का प्रमुख कार्य, ग्रामीण विकास में लगे अन्य अभिकरणों से समन्वय स्थापित कर ग्रामीण क्षेत्रों में खादी और अन्य ग्रामोद्योग के विकास के लिए कार्यक्रमों की योजना बनाते हुए इसे संबंर्धित,संगठित तथा कार्यान्वित करना है।
  • यह सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जीआई टैग प्राप्त बांस उत्पादों का नाम बता सकते हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. प्रोजेक्ट BOLD के बारे में
  2. उद्देश्य
  3. KVIC के बारे में
  4. KVIC द्वारा चलाई जा रही अन्य परियोजनाएं

मेंस लिंक:

प्रोजेक्ट बोल्ड के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी।

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

EOS-03 उपग्रह


संदर्भ:

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा, वर्ष 2021 के अंत तक पृथ्वी का प्रेक्षण करने हेतु, ‘जियो इमेजिंग उपग्रह ‘ईओएस’-03 (EOS-03) प्रक्षेपित किये जाने का कार्यक्रम है।

  • EOS-03 एक ‘भू-प्रेक्षण उपग्रह’ (Earth Observation Satellite EOS) है।
  • पिछले वर्ष इसरो द्वारा EOS-01 भू-प्रेक्षण उपग्रह प्रक्षेपित किया गया था, जोकि ‘रडार इमेजिंग सैटेलाइट’ (Radar Imaging Satellite-RISAT) का एक प्रकार था और यह RISAT-2B और RISAT-2BR1 उपग्रहों के साथ कार्य करेगा।

अनुप्रयोग:

  • EOS-03 उपग्रह, बाढ़ एवं चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं की वास्तविक-समय निगरानी करने में सक्षम होगा।
  • यह उपग्रह, पूरे देश का प्रतिदिन चार-पांच बार प्रेक्षण करने में सक्षम है।
  • इसके साथ ही, EOS-03 उपग्रह, जल निकायों, फसलों, वनस्पतिक-स्थिति, वन आवरण परिवर्तन की निगरानी आदि करने में भी सक्षम होगा।

ऑप्टिकल उपकरणों की अपेक्षा रडार इमेजिंग के लाभ

रडार इमेजिंग में मौसम, बादल, कोहरे अथवा सौर-प्रकाश की कमी आदि का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। यह सभी परिस्थितियों में और हर समय उच्च-गुणवत्ता वाले चित्र प्रदान कर सकता है।

इसरो द्वारा लॉन्च किए गए अन्य भू-प्रेक्षण उपग्रह:

RESOURCESAT- 2, 2A, CARTOSAT-1, 2, 2A, 2B, RISAT-1 and 2, OCEANSAT-2, मेघ-ट्रॉपिक्स (Megha-Tropiques), सरल (SARAL) और SCATSAT-1, INSAT-3DR, 3D आदि।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. रडार इमेजिंग क्या है?
  2. पृथ्वी-निगरानी उपग्रह क्या हैं?
  3. GSLV और PSLV के बीच अंतर
  4. EOS-03 के अनुप्रयोग
  5. पृथ्वी की निचली कक्षा और भूस्थिर कक्षाओं के मध्य अंतर

मेंस लिंक:

ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण वाहन (PSLV) दुनिया के सबसे विश्वसनीय अंतरिक्ष प्रक्षेपण वाहनों में से एक क्यों माना जाता है? यह भारत को व्यावसायिक और तकनीकी रूप से कैसे मदद कर रहा है?

स्रोत: पीआईबी।

 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

अंतर्देशीय पोत विधेयक


(Inland Vessels Bill)

संदर्भ:

हाल ही में लोकसभा द्वारा ‘अंतर्देशीय पोत विधेयक’, 2021 (Inland Vessels Bill, 2021) को पारित कर दिया गया है।

विधेयक के प्रमुख बिंदु:

  1. ‘अंतर्देशीय पोत विधेयक’ में विभिन्न राज्यों द्वारा बनाए गए अलग-अलग नियमों के बजाय पूरे देश के लिए एक संयुक्त कानून का प्रावधान किया गया है।
  2. प्रस्तावित कानून के तहत जारी किया जाने वाला ‘पंजीकरण प्रमाण पत्र’ सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मान्य होगा, और इसके लिए राज्यों से अलग अनुमति लेने की कोई आवश्यकता नहीं होगी।
  3. विधेयक में एक इलेक्ट्रॉनिक पोर्टल पर, पोत, पोत पंजीकरण और चालक दल का विवरण दर्ज करने के लिए एक केंद्रीय डेटा बेस बनाने का प्रावधान किया गया है।
  4. विधेयक के तहत, यांत्रिक रूप से चालित सभी जहाजों के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य किया गया है। सभी गैर-यांत्रिक रूप से चालित जहाजों को भी जिला, तालुक या पंचायत या ग्राम स्तर पर पंजीकरण करना होगा।

भारत में ‘अंतर्देशीय जल परिवहन’:

(Inland Water Transport-IWT)

  1. भारत में नौगम्य जलमार्ग की लम्बाई लगभग 14,500 किलोमीटर हैं, और इसमें नदियाँ, नहरें, अप्रवाही जल या बैकवाटर (Backwaters), खाड़ियाँ आदि शामिल हैं।
  2. अंतर्देशीय जल परिवहन (IWT) एक ईंधन-किफायती और पर्यावरण अनुकूल परिवहन माध्यम है।
  3. राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम 2016 के अनुसार, 111 जलमार्गों को राष्ट्रीय जलमार्ग (National Waterways- NW) घोषित किया गया है।
  4. भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) द्वारा, विश्व बैंक की तकनीकी और वित्तीय सहायता से, गंगा के हल्दिया-वाराणसी विस्तार (राष्ट्रीय जलमार्ग (NW)-1 का भाग) पर नौपरिवहन क्षमता बढ़ाने के लिए लगभग ₹ 18 करोड़ की लागत के साथ जल मार्ग विकास परियोजना (JMVP) का कार्यान्वयन किया जा रहा है।

 

 इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘राष्ट्रीय जलमार्ग’ (NW )-1 और राष्ट्रीय जलमार्ग-2 की अवस्थिति के बारे में जानते हैं? ‘राष्ट्रीय जलमार्ग’-1 किन राज्यों से होकर गुजरता हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. महत्वपूर्ण जलमार्ग
  2. इनकी अवस्थिति
  3. JMVP के बारे में
  4. IWAI के बारे में

मेंस लिंक:

राष्ट्रीय जलमार्गों के महत्व की विवेचना कीजिए।

स्रोत: पीआईबी।

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस


(International Tiger Day)

संदर्भ:

प्रतिवर्ष 29 जुलाई को, लुप्तप्राय बाघ प्रजाति की लगातार कम होती जा रही आबादी के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए ‘अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस’ (International Tiger Day) मनाया जाता है।

  • इस दिवस की घोषणा, वर्ष 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में आयोजितटाइगर समिट’ में की गयी थी।
  • इस ‘बाघ शिखर सम्मलेन’ में, भागीदार प्रतिनिधियों (जिन देशों में बाघ पाए जाते है- उनके प्रतिनिधि) द्वारा वर्ष 2022 तक अपने देशों में बाघों की आबादी को दोगुना करने का प्रयास करने की घोषणा की गयी थी।

बाघों की आबादी से संबंधित प्रमुख तथ्य:

  1. ‘वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर’ (WWF) के अनुसार, पिछले 150 वर्षों में बाघों की संख्या 95 प्रतिशत तक कम हो गई है।
  2. भारत में ‘रॉयल टाइगर्स’ पाए जाते है, और यहाँ वर्तमान में बाघों की संख्या 2967 है, जोकि जो बाघों की कुल वैश्विक आबादी का 70 प्रतिशत है।
  3. देश में बाघों की सर्वाधिक संख्या, मध्य प्रदेश (526) में है, इसके पश्चात क्रमशः कर्नाटक (524) तथा उत्तराखंड (442) का स्थान हैं।
  4. मध्यप्रदेश का बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान, रॉयल बंगाल टाइगर्स के लिए प्रसिद्ध है, और यहाँ भारत में बाघों का सर्वाधिक घनत्व पाया जाता है।
  5. मध्य प्रदेश का ‘कान्हा बाघ अभ्यारण्य, ‘भूरसिंह बारासिंघा’ को आधिकारिक तौर पर अपने शुभंकर के रूप में पेश करने वाला भारत का पहला बाघ अभयारण्य है।

वैश्विक तथा राष्ट्रीय स्तर पर बाघ संरक्षण के प्रयास:

  1. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (National Tiger Conservation Authority- NTCA) द्वारा वन- रक्षकों के लिए एक मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम, M-STrIPES- मॉनिटरिंग सिस्‍टम फॉर टाइगर्स इंटेंसिव प्रोटेक्‍शन एंड इकोलॉजिकल स्‍टेट्स (Monitoring system for Tigers’ Intensive Protection and Ecological Status) लॉन्च किया गया है।
  2. वर्ष 2010 में आयोजित पीटर्सबर्ग टाइगर समिट में, वैश्विक स्तर पर 13 बाघ रेंज वाले देशों के नेताओं ने T X 2’ नारा देते हुए बाघों की संख्या को दोगुना करने हेतु अधिक प्रयास करने का संकल्प लिया।
  3. विश्व बैंक ने अपने ‘ग्लोबल टाइगर इनिशिएटिव’ (GTI) कार्यक्रम, के माध्यम से, अपनी उपस्थिति और संगठन क्षमता का उपयोग करते हुए, बाघ एजेंडे को मजबूत करने हेतु वैश्विक साझेदारों को एक मंच पर एकत्रित किया है।
  4. पिछले कुछ वर्षों में, ‘ग्लोबल टाइगर इनिशिएटिव’ (GTI) पहल, ‘ग्लोबल टाइगर इनिशिएटिव काउंसिल (GTIC) के संस्थागत रूप में स्थापित हो गयी है, तथा अब यह, – ग्लोबल टाइगर फोरम (Global Tiger Forum) तथा ग्लोबल स्नो लेपर्ड इकोसिस्टम प्रोटेक्शन प्रोग्राम (Global Snow Leopard Ecosystem Protection Program)- के माध्यम से बाघ संरक्षण संबंधी कार्यक्रम चला रही है।
  5. भारत में वर्ष 1973 में ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ की शुरुआत की गयी, जो वर्तमान में 50 से अधिक संरक्षित क्षेत्रों में, देश के भौगोलिक क्षेत्र के लगभग 2% के बराबर क्षेत्रफल, में सफलतापूर्वक जारी है।

संरक्षण स्थिति:

  1. भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: अनुसूची-I
  2. अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) रेड लिस्ट: लुप्तप्राय (Endangered)
  3. लुप्तप्राय वन्यजीव तथा वनस्पति प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर अभिसमय (CITES): परिशिष्ट-I

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इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि ‘अखिल भारतीय बाघ आकलन 2018’ के चौथे चक्र के परिणामों ने विश्व का ‘सबसे बड़ा कैमरा ट्रैप वन्यजीव सर्वेक्षण’ होने का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है?

भारत के 14 बाघ अभयारण्यों को ‘अच्छे बाघ संरक्षण’ के लिए ‘ग्लोबल कंजर्वेशन एश्योर्ड | टाइगर स्टैंडर्ड्स’ (CA|TS) मान्यता प्रदान की गई है। CA|TS मान्यता क्या है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य और जीवमंडल संरक्षित क्षेत्र के मध्य अंतर
  2. भारत में महत्वपूर्ण बायोस्फीयर रिजर्व
  3. M-STREIPES किससे संबंधित है?
  4. GTIC क्या है?
  5. प्रोजेक्ट टाइगर कब लॉन्च किया गया था?
  6. NTCA- रचना और कार्य
  7. अखिल भारतीय बाघ आकलन 2018 के चौथे चक्र को गिनीज रिकॉर्ड बुक में क्यों दर्ज किया गया है?
  8. सबसे ज्यादा बाघों वाला राज्य
  9. उच्चतम बाघ घनत्व वाला राज्य

मेंस लिंक:

बाघ एजेंडे को महत्व देना, हमारे पर्यावरण की संवहनीयता बनाए रखने हेतु एक पारिस्थितिक- आवश्यकता है। इस संदर्भ में, बाघों के संरक्षण के लिए भारत द्वारा उठाए गए कदमों की विवेचना कीजिए?

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


संत सांबंदर

(Sambandar)

  • हाल ही में, ऑस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय गैलरी (NGA) द्वारा अपने एशियाई कला संग्रह से संत सांबंदर की मूर्ति सहित 14 कला-कृतियाँ भारत को लौटने की घोषणा की गई है।
  • नृत्य मुद्रा में बाल संत सांबंदर की यह प्रतिमा 12 वीं शताब्दी के चोल वंश से संबंधित है।
  • सांबंदर, दक्षिण भारत में सक्रिय तिरेसठ नयनार संतों में से एक थे। इन संतों ने भक्ति कविता और गीतों के माध्यम से शिव की आराधना को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

 


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