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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 29 July 2021

 

विषयसूची

 

सामान्य अध्ययन-II

1. सदन में आपराधिक कृत्य करने हेतु ‘विशेषाधिकार’ और ‘प्रतिरक्षा’ कोई सुरक्षा-कवच नहीं है: सुप्रीमकोर्ट

2. ‘अकादमिक क्रेडिट बैंक’ (ABC)

3. ‘तेलंगाना दलित बंधु योजना’ और इसकी आलोचना

4. ‘सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों’ हेतु ‘प्री-पैक’ समाधान और दिवालियापन मामले

 

सामान्य अध्ययन-III

1. ‘पंडित दीन दयाल उपाध्याय उन्नत कृषि शिक्षा योजना’ (PDDUUKSY)

2. खाद्य प्रणाली शिखर सम्मेलन

3. ‘नौचालन हेतु सामुद्रिक सहायता विधेयक’ 2021

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. राजा मिर्च

2. सैन्याभ्यास इंद्र-2021

3. ओडिशा के ‘पुरी’ शहर में ‘नल से शुद्ध पीने का पानी’ की सुविधा

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: संसद और राज्य विधायिका- संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।

सदन में आपराधिक कृत्य करने हेतु ‘विशेषाधिकार’ और ‘प्रतिरक्षा’ कोई सुरक्षा-कवच नहीं है: सुप्रीमकोर्ट


संदर्भ:

हाल ही में उच्चतम न्यायालय ने कहा है, कि कोई भी ‘विधि-निर्माता’, संसद या विधानसभा के सदन में पहले आपराधिक कृत्यों में शामिल होकर और और फिर ‘स्वतंत्र अभिव्यक्ति के अधिकार’ के हवाले से अपना बचाव नहीं कर सकते हैं।

संबंधित प्रकरण:

केरल सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में कुछ शीर्ष ‘वाम लोकतांत्रिक मोर्चा’ (LDF) के नेताओं के खिलाफ चल रहे मुकदमें को वापस लेने के लिए अपील की गई है।

  • इन नेताओं पर वर्ष 2015 में एक बजटीय भाषण के दौरान विधानसभा सदन में तोड़-फोड़ करने तथा सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट करने का आरोप है।
  • इन नेताओं ने तर्क दिया है, कि संबधित घटना विधानसभा सदन के भीतर हुई थी, और इसलिए उनके लिए प्राप्त ‘संसदीय विशेषाधिकार’ (Parliamentary Privilege) के आधार पर ‘आपराधिक अभियोजन’ से छूट दी जानी चाहिए।

अदालत द्वारा की गई टिप्पणियां:

  1. ‘तोड़-फोड़’ के कृत्यों को ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ का प्रदर्शन और विधानसभा की ‘कार्यवाही’ नहीं कहा जा सकता है।
  2. संविधान-निर्माताओं का अभिप्राय, ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ की व्याख्या में ‘विरोध प्रकट करने की आड़ में’ आपराधिक कृत्यों को शामिल करने का नहीं था।
  3. कोई भी विधि-निर्माता, संसद या विधान सभा में बल-प्रयोग, उत्पात या दंगा नहीं कर सकते हैं और फिर न ही संसदीय विशेषाधिकार और आपराधिक अभियोजन से उन्मुक्ति का दावा कर सकते हैं।
  4. विधान सभा में उत्तरदायी पद पर निर्वाचित विधायकों सहित, सभी के लिए विधिसम्मत व्यवहार की सीमाएं लागू होती हैं।

अदालत के अनुसार विशेषाधिकारों का वास्तविक भाव:

  • विधायिका के निर्वाचित सदस्यों को ‘विशेषाधिकार’ और ‘उन्मुक्ति’ प्रदान करने का उद्देश्य, उनके लिए बिना किसी अवरोध, भय या पक्षपात के अपने “प्रधान कार्यों” को निष्पादित करने में सक्षम बनाना था।
  • सदन का ‘प्रधान’ कार्य सामूहिक विचार-विमर्श करना और निर्णय लेना है।
  • ये विशेषाधिकार, विधायकों को किसी असमान पायदान पर खड़ा करने वाली ‘हैसियत’ का प्रतीक नहीं होते हैं।

संसदीय विशेषाधिकार’ क्या होते हैं?

संसदीय विशेषाधिकार (Parliamentary Privileges), संसद सदस्यों को, व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से, प्राप्त कुछ अधिकार और उन्मुक्तियां होते हैं, ताकि वे “अपने कार्यों का प्रभावी ढंग से निर्वहन” कर सकें।

  • संविधान के अनुच्छेद 105 में स्पष्ट रूप से दो विशेषाधिकारों का उल्लेख किया गया है। ये हैं: संसद में वाक्-स्वतंत्रता और इसकी कार्यवाही के प्रकाशन का अधिकार।
  • संविधान में विनिर्दिष्ट विशेषाधिकारों के अतिरिक्त, सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 में सदन या उसकी समिति की बैठक के दौरान तथा इसके आरंभ होने से चालीस दिन पूर्व और इसकी समाप्ति के चालीस दिन पश्चात सिविल प्रक्रिया के अंतर्गत सदस्यों की गिरफ्तारी और उन्हें निरुद्ध किए जाने से स्वतंत्रता का उपबंध किया गया है।

विशेषाधिकार हनन के खिलाफ प्रस्ताव:

सांसदों को प्राप्त किसी भी अधिकार और उन्मुक्ति की अवहेलना करने पर, इस अपराध को विशेषाधिकार हनन कहा जाता है, और यह संसद के कानून के तहत दंडनीय होता है।

  • किसी भी सदन के किसी भी सदस्य द्वारा विशेषाधिकार हनन के दोषी व्यक्ति के खिलाफ एक प्रस्ताव के रूप में एक सूचना प्रस्तुत की जा सकती है।

लोकसभा अध्यक्ष / राज्य सभा अध्यक्ष की भूमिका:

विशेषाधिकार प्रस्ताव की जांच के लिए, लोकसभा अध्यक्ष / राज्य सभा अध्यक्ष, पहला स्तर होता है।

  • लोकसभा अध्यक्ष / राज्यसभा अध्यक्ष, विशेषाधिकार प्रस्ताव पर स्वयं निर्णय ले सकते हैं या इसे संसद की विशेषाधिकार समिति के लिए संदर्भित कर सकते हैं।
  • यदि लोकसभा अध्यक्ष / राज्यसभा अध्यक्ष, संगत नियमों के तहत प्रस्ताव पर सहमति देते हैं, तो संबंधित सदस्य को प्रस्ताव के संदर्भ में एक संक्षिप्त वक्तव्य देने का अवसर दिया जाता है।

प्रयोज्यता:

  • संविधान में, उन सभी व्यक्तियों को भी संसदीय विशेषाधिकार प्रदान किए गए है, जो संसद के किसी सदन या उसकी किसी समिति की कार्यवाही में बोलने और भाग लेने के हकदार हैं। इन सदस्यों में भारत के महान्यायवादी और केंद्रीय मंत्री शामिल होते हैं।
  • हालांकि, संसद का अभिन्न अंग होने बावजूद, राष्ट्रपति को संसदीय विशेषाधिकार प्राप्त नहीं होते हैं। राष्ट्रपति के लिए संविधान के अनुच्छेद 361 में विशेषाधिकारों का प्रावधान किया गया है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि न्यायमूर्ति एम.एन. वेंकटचलैया की अध्यक्षता में गठित संविधान समीक्षा आयोग द्वारा विधायिकाओं के स्वतंत्र रूप से कामकाज करने हेतु विशेषाधिकारों को परिभाषित और सीमाबद्ध किए जाने की सिफारिश की गई थी? आयोग द्वारा की गई अन्य सिफारिशों के बारे में जानिए।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. संविधान के कौन से प्रावधान विधायिका के विशेषाधिकारों की रक्षा करते हैं?
  2. विधायिका के विशेषाधिकार के कथित उल्लंघन के मामलों में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया क्या है?
  3. संसद और राज्य विधानमंडलों में विशेषाधिकार समितियों की संरचना और कार्य
  4. विधायिका के विशेषाधिकार हनन का दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के लिए क्या सजा है?
  5. क्या राज्य विधानसभाओं के विशेषाधिकार हनन से जुड़े मामलों में न्यायालय हस्तक्षेप कर सकते हैं?

मेंस लिंक:

विधायिका के विशेषाधिकारों से आप क्या समझते हैं? भारत में समय-समय पर देखी जाने वाली विधायिका विशेषाधिकारों की समस्या पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

‘अकादमिक क्रेडिट बैंक’ (ABC)


(Academic Bank of Credit)

संदर्भ:

केंद्र सरकार द्वारा शीघ्र ही ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति’ (National Education Policy – NEP) 2020 के तहत प्रस्तावित ‘अकादमिक क्रेडिट बैंक’ (Academic Bank of Credit- ABC) शरू की जाएगी।

‘अकादमिक क्रेडिट बैंक’ (ABC) क्या है?

  • ‘एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट’ को ‘विश्वविद्यालय अनुदान आयोग’ (UGC) द्वारा स्थापित किया जाएगा।
  • इसके तहत, छात्रों के लिए किसी पाठ्यक्रम में प्रवेश करने और उसे पूरा करने के कई विकल्प दिए जाएंगे।
  • ‘अकादमिक क्रेडिट बैंक’ के तहत, छात्रों के लिए किसी डिग्री या पाठ्यक्रम को छोड़ने और संबंधित प्रमाण पत्र प्राप्त करने का विकल्प दिया जाएगा। एक निश्चित समय के पश्चात, छात्र, अपनी अधूरी छोड़ी हुई पढाई को उसी स्तर से पुनः शुरू कर सकते हैं।
  • इसके द्वारा छात्रों को किसी डिग्री को पूरा करते समय या किसी पाठ्यक्रम को छोड़ने के दौरान संस्थान बदलने की सुविधा भी प्रदान की जाएगी।

कार्यविधि:

‘अकादमिक क्रेडिट बैंक’ एक वर्चुअल स्टोर-हाउस है, जो एक छात्र के ‘एकेडमिक क्रेडिट’ का रिकॉर्ड रखेगा। यह, सीधे छात्रों से किसी भी पाठ्यक्रम के कोई क्रेडिट कोर्स दस्तावेज़ स्वीकार नहीं करेगा, बल्कि केवल उच्च शिक्षा संस्थानों से, छात्रों के खातों में जमा ‘क्रेडिट कोर्स’ दस्तावेज़ों को स्वीकार करेगा।

लाभ:

‘अकादमिक क्रेडिट बैंक’ क्रेडिट सत्यापन, क्रेडिट संचय, क्रेडिट ट्रांसफर, छात्रों के विमोचन और छात्रों के प्रमोशन में मदद करेगा।

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‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति’ के बारे में अधिक जानने हेतु पढ़ें

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इंस्टा जिज्ञासु:

‘अकादमिक क्रेडिट बैंक’ को ‘नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी – एक वर्चुअल स्टोरहाउस’ की तर्ज पर तैयार किया गया है। ‘नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी’ क्या है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति’ (NEP) के बारे में
  2. ‘अकादमिक क्रेडिट बैंक’ (ABC) क्या है?
  3. विशेषताएं

मेंस लिंक:

‘अकादमिक क्रेडिट बैंक’ (ABC) के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

‘तेलंगाना दलित बंधु योजना’ और इसकी आलोचना


संदर्भ:

‘दलित बंधु’ तेलंगाना सरकार का नवीनतम प्रमुख कार्यक्रम है। दलित परिवारों के सशक्तिकरण हेतु ‘दलित बंधु’ कार्यक्रम को एक कल्याणकारी योजना के रूप में परिकल्पित किया गया है।

‘तेलंगाना दलित बंधु योजना’ क्या है?

‘दलित बंधु’ योजना के अंतर्गत, प्रति परिवार 10  लाख रुपये के प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से दलितों में उद्यमिता क्षमता विकसित की जाएगी।

  • यह संभवतः देश की सबसे बड़ी ‘नकदी हस्तांतरण योजना’ होगी।
  • दलित उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए, सरकार द्वारा, लाइसेंस जारी किए जाने वाले क्षेत्रों में दलितों के लिए आरक्षण की व्यवस्था शुरू करने का फैसला किया गया है। इन क्षेत्रों में शराब की दुकानें, मेडिकल शॉप, खाद की दुकान, चावल मिल आदि शामिल हैं।

दलित सुरक्षा कोष:

  • आर्थिक सहायता के अलावा, सरकार द्वारा किसी भी प्रतिकूल स्थिति में लाभार्थी को सहायता प्रदान करने हेतु ‘दलित सुरक्षा कोष’ नामक एक स्थायी कोष बनाने की योजना तैयार की जा रही है।
  • इस निधि का प्रबंधन संबंधित जिला कलेक्टर सहित लाभार्थियों की एक समिति द्वारा किया जाएगा।

‘दलित बंधु योजना’ की आलोचना का कारण:

राज्य में विपक्षी दलों द्वारा इस योजना के पीछे की मंशा और तर्क पर सवाल उठाए जा रहे हैं। दलितों के संरक्षण और सशक्तिकरण के लिए मौजूदा कानून और योजनाओं को पूरी तरह से लागू करने में विफल रहने के लिए भी सरकार को आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं, कि ‘दलित’ शब्द की उत्पत्ति का स्रोत, गांधी-अम्बेडकर पूना पैक्ट में मिलता है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘दलित बंधु योजना’ की मुख्य विशेषताएं
  2. पात्रता
  3. लाभ

मेंस लिंक:

‘दलित बंधु योजना’ के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

‘सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों’ हेतु प्री-पैक समाधान और दिवालियापन मामले


संदर्भ:

हाल ही में, लोकसभा द्वारा ‘दिवाला एवं दिवालियापन संहिता (संशोधन) विधेयक’, 2021 (The Insolvency and Bankruptcy Code (Amendment) Bill, 2021 पारित कर दिया गया है।

  • इस विधेयक में ‘सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों’ (MSMEs) के लिए दिवाला समाधान तंत्र के रूप में ‘प्री-पैक’ (Pre-Packs) का प्रस्ताव किया गया है।
  • मार्च 2021 में ‘दिवाला कानून समिति’ (Insolvency Law Committee- ILC) की एक उप-समिति द्वारा ‘दिवाला एवं दिवालियापन संहिता’ (Insolvency and Bankruptcy Code- IBC), 2016 की मूल संरचना के भीतर एक ‘प्री-पैक’ ढाँचे की सिफारिश की गयी थी।

‘प्री-पैक’ क्या होते है?

‘प्री-पैक’ (pre-pack), किसी संकटग्रस्त कंपनी की सार्वजनिक बोली लगाए जाने की प्रक्रिया के बजाय ‘रक्षित लेनदारों’ (secured creditors) और निवेशकों के बीच एक समझौते के माध्यम से संकटग्रस्त कंपनी के ऋण-समाधान हेतु एक समझौता होता है।

पिछले एक दशक के दौरान, दिवाला कार्रवाई की यह प्रणाली, ब्रिटेन और यूरोप में दिवाला समाधान हेतु तेजी से एक लोकप्रिय प्रणाली बन गई है।

भारत के मामले में, इस तरह की प्रणाली में वित्तीय लेनदारों और संभावित निवेशकों के मध्य शर्तो पर सहमति होना तथा ‘राष्ट्रीय कंपनी कानून अधिकरण’ (NCLT) द्वारा ‘समाधान योजना’ पर अनुमोदन प्राप्त करना आवश्यक होता है।

  1. ‘राष्ट्रीय कंपनी कानून अधिकरण’ के समक्ष ‘समाधान योजना’ प्रस्तुत करने से पहले, न्यूनतम 66 प्रतिशत ‘वित्तीय लेनदारों’ (financial creditors) की सहमति आवश्यक होती है, यह ‘वित्तीय लेनदार’ किसी ‘कॉर्पोरेट देनदार’ से संबंधित नहीं होने चाहिए।
  2. ‘कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया’ (Corporate Insolvency Resolution Process – CIRP) हेतु याचिका पर विचार करने से पहले, NCLT को ‘प्री-पैक दिवाला कार्रवाई’ के लिए आवेदन को स्वीकार या अस्वीकार करना होगा।
  3. ‘प्री-पैक’ अधिकतम 120 दिनों तक सीमित होते है, जिसमें NCLT के समक्ष अनुमोदन हेतु ‘समाधान योजना’ पेश करने के लिए हितधारकों के लिए केवल 90 दिन का समय मिलता है।

प्री-पैक की आवश्यकता:

  • दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC) के अंतर्गत संकटग्रस्त कंपनियों के ऋणशोधन में CIRP व्यवस्था के धीमी गति से कार्य करना क्रेडिटर्स के लिए परेशानी का कारण है।
  • 2,170 मामलों में से 738 दिवालियापन समाधान प्रक्रियाएं मार्च के अंत तक 270 दिनों से अधिक का समय ले चुकी हैं।
  • इस देरी का एक प्रमुख कारण पूर्ववर्ती प्रमोटरों और संभावित बोली लगाने बालों द्वारा लंबी मुकदमेबाजी है।
  • IBC के तहत, हितधारकों के लिए दिवालियापन समाधान कार्यवाही के आरम्भ होने से 330 दिनों के भीतर CIRP को पूरा करना आवश्यक होता है।

आगे की राह:

प्री-पैक प्रणाली, संकटग्रस्त कंपनियों हेतु किसी ‘त्वरित समाधान’ पर पहुंचने में प्रभावी साबित हुई है, और चूंकि कारोबारी कानूनी मुद्दों को ‘मामले से संबंधित कानून’ के माध्यम से सुलझाया जाता है, इसलिए इस व्यवस्था को, समय के साथ सभी निगमों में लागू किया जाना चाहिए।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘दिवाला’ (Insolvency) और ‘दिवालियापन’ (Bankruptcy) में अंतर जानते हैं? संदर्भ: यहाँ।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. दिवाला और दिवालियापन क्या है?
  2. IBC कोड के तहत स्थापित विभिन्न संस्थाएं
  3. राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT)- संरचना तथा कार्य
  4. ऋण वसूली न्यायाधिकरण क्या हैं?
  5. IBC की धारा 7, 9 और 10
  6. आईबीसी के तहत दिवाला कार्रवाई पूरी करने की सीमा
  7. दिवाला और दिवालियापन बोर्ड की संरचना।

मेंस लिंक:

दिवाला प्रक्रिया कार्यवाहियों के निलंबन से कोविड -19 के प्रकोप से प्रभावित कंपनियों को किस प्रकार सहायता मिलेगी। चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: भारत में खाद्य प्रसंस्करण एवं संबंधित उद्योग- कार्यक्षेत्र एवं महत्त्व, स्थान, ऊपरी और नीचे की अपेक्षाएँ, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन।

‘पंडित दीन दयाल उपाध्याय उन्नत कृषि शिक्षा योजना’ (PDDUUKSY)


(Pandit Deen Dayal Upadhyay Unnat Krishi Shiksha Yojana)

संदर्भ:

इस योजना के तहत, अब तक 24 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 108 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं।

PDDUUKSY के बारे में:

‘पंडित दीन दयाल उपाध्याय उन्नत कृषि शिक्षा योजना’ (Pandit Deen Dayal Upadhyay Unnat Krishi Shiksha Yojana – PDDUUKSY) का आरंभ वर्ष 2016 में, पर्यावरणीय संपोषण और मृदा स्वास्थ्य को बनाए रखने हेतु जैविक खेती, प्राकृतिक खेती और ‘गाय आधारित अर्थव्यवस्था’ (Cow-Based Economy) में मानव संसाधन विकसित करने के लिए किया गया था।

यह योजना ‘भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद’ (ICAR) के शिक्षा प्रकोष्ठ द्वारा कार्यान्वित की जा रही है।

उद्देश्य:

  1. ग्रामीण स्तर पर, जैविक खेती और संवहनीय कृषि के विकास हेतु प्रासंगिक ‘कुशल मानव संसाधन’ का निर्माण करना।
  2. ग्रामीण भारत को, जैविक खेती या प्राकृतिक खेती अथवा ग्रामीण अर्थव्यवस्था और संवहनीय कृषि के क्षेत्र में तकनीकी सहायता प्रदान करना।
  3. ग्राम स्तर पर स्थापित केन्द्रों के माध्यम से, इस योजना की अन्य गतिविधियों का विस्तार करना।

योजना के तहत निर्दिष्ट केंद्रों द्वारा इस पहल के लिए निम्नलिखित शर्तों के अधीन, किसानों का चयन किया जा सकता है:

  1. किसानों का चयन किए जाने से पहले, जैविक खेती, प्राकृतिक खेती और गाय आधारित अर्थव्यवस्था में उनकी रुचि के संदर्भ में उनका आंकलन किया जाना आवश्यक होगा।
  2. वर्तमान में जैविक खेती, प्राकृतिक खेती या गाय आधारित अर्थव्यवस्था पद्धति का प्रयोग कर रहे किसानों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
  3. सभी समुदायों के किसानों को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए।
  4. चयन में कोई लैंगिक भेदभाव शामिल नहीं होना चाहिए।

‘गाय आधारित अर्थव्यवस्था’ का महत्व

आधुनिक राष्ट्र के निर्माण के आरंभ में सोची गई पद्धतियों के तुलना में ‘भारत की परंपराएं और प्रथाएं, भले ही इनमे से कुछ, कहीं ज्यादा कीमती है; और इसीलिये इन्ही परम्पराओं और प्रथाओं के अनुसार देश में अपनी गायों के प्रति ऐसा व्यवहार किया जाता है।

  • यह पालतू पशु, प्राचीन काल से ही ग्रामीण भारत का अभिन्न अंग रहा है।
  • कृषि के संबंध में, भारतीय गाय की नस्लों में, बेहतर गुणवत्ता वाले दूध का उत्पादन करने की ‘आनुवंशिक क्षमता’ साबित हो चुकी है।
  • भारतीय गायों के दूध में ‘संयुग्मित लिनोलिक एसिड’ (Conjugated Linoleic AcidCLA) का उच्च स्तर पाया जाता है, जोकि कैंसर रोधी होता है।
  • इसके अलावा, गोमूत्र का उपयोग जैव-उर्वरक और कीट- निरोधक के रूप में किया जा सकता है, जिससे कम लागत के साथ फसल उत्पादन में वृद्धि होती है।

इन सब पहलुओं को देखते हुए, सरकार द्वारा ‘गाय-पालन’ को अपने ध्यान देने वाले प्रमुख केंद्रीय क्षेत्रों में माना जाता है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. योजना के प्रमुख बिंदु
  2. पात्रता
  3. लाभ

मेंस लिंक:

‘गाय-आधारित अर्थव्यवस्था’ क्या है? इस प्रकार की अर्थव्यवस्थाओं के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्य, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशु पालन संबंधी अर्थशास्त्र।

खाद्य प्रणाली शिखर सम्मेलन


(Food Systems Summit)

संदर्भ:

‘खाद्य प्रणाली शिखर सम्मेलन’ का आयोजन ‘रोम’ में किया जा रहा है।

‘संयुक्त राष्ट्र खाद्य प्रणाली शिखर सम्मेलन’ का यह ‘पूर्व-शिखर सम्मेलन’ (Pre-Summit) सितंबर में समाप्त होने वाले ‘वैश्विक कार्यक्रम’ के लिए मंच तैयार करेगा।

पृष्ठभूमि:

16 अक्टूबर 2019 को संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस द्वारा, एक ‘पूर्व-शिखर सम्मेलन’ सहित ‘संयुक्त राष्ट्र खाद्य प्रणाली शिखर सम्मेलन’ (UN Food Systems Summit) के आयोजन की घोषणा कई गयी थी। यह घोषणा, रोम स्थित संयुक्त राष्ट्र की तीन संस्थाओं – खाद्य और कृषि संगठन (FAO), ‘अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष’ (International Fund for Agricultural Development) तथा ‘विश्व खाद्य कार्यक्रम’ के संयुक्त नेतृत्व में, जुलाई 2019 में, आयोजित एक उच्च स्तरीय राजनीतिक मंच पर वार्ता के पश्चात् की गयी थी।

‘शिखर सम्मेलन’ के बारे में:

  • ‘खाद्य प्रणाली शिखर सम्मेलन’ (Food Systems Summit) का आयोजन ‘सतत विकास लक्ष्यों’ (SDGs) को वर्ष 2030 तक हासिल करने के लिए ‘कार्रवाई-दशक’ (Decade of Action) के एक भाग के रूप में किया जाता है।
  • इस शिखर सम्मेलन में सभी 17 ‘सतत विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने हेतु नई और साहसिक कार्रवाइयों की शुरुआत करेगा, जिनमे से प्रत्येक कार्रवाई कुछ हद तक, स्वस्थ, अधिक संवहनीय और न्यायसंगत खाद्य प्रणालियों पर निर्भर होगी।
  • पांच कार्रवाई तरीकों द्वारा निर्देशित, यह शिखर सम्मेलन विज्ञान, व्यापार, नीति, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जगत के प्रमुख अभिकर्ताओं के साथ-साथ किसानों को भी एक साथ लाएगा।

‘खाद्य प्रणाली’ का तात्पर्य:

‘खाद्य प्रणाली’ (Food Systems) शब्द का तात्पर्य, खाद्य पदार्थों के उत्पादन, प्रसंस्करण, परिवहन और उपभोग करने में शामिल गतिविधियों के समूहन से होता है।

  • खाद्य प्रणालियाँ. मानव-जीवन के हर पहलू को स्पर्श करती हैं।
  • हमारी खाद्य प्रणालियों का दुरुस्त होना, हमारे शरीर के स्वास्थ्य के साथ-साथ हमारे पर्यावरण, अर्थव्यवस्थाओं और संस्कृतियों के स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव डालता है।
  • जब ये सुचारू रूप से कार्य करते हैं, तो खाद्य प्रणालियां हमें परिवारों, समुदायों और राष्ट्रों के रूप में एक साथ लाने में सक्षम होती हैं।

चिंताएं / चुनौतियां:

  • कोविड-19 महामारी के दौरान लाखों लोगों द्वारा प्रत्यक्ष रूप से खाद्य-संकट का सामना करना पड़ रहा है विश्व की कई खाद्य प्रणालियाँ, नाजुक, बिना जांच-पड़ताल वाली और ढहने की कगार पर पहुँच चुकी हैं।
  • जब हमारी खाद्य प्रणालियाँ विफल हो जाती हैं, तो यह हमारी शिक्षा, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था के साथ-साथ मानव अधिकार, शांति और सुरक्षा के लिए खतरा बन जाता है। खाद्य प्रणालियों के विफल होने पर, जैसा कि कई मामलों देखने को मिलता है कि, जो पहले से ही गरीब या हाशिए पर रहने वाले व्यक्ति सर्वाधिक असुरक्षित हो जाते है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

‘सतत विकास लक्ष्यों’ (SDGs) से पहले, हमने ‘सहस्राब्दी विकास लक्ष्यों’ का निर्धारण किया था। ये ‘सहस्राब्दी विकास लक्ष्य’ क्या हैं और SDG से किस प्रकार भिन्न हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. शिखर सम्मेलन के बारे में
  2. उद्देश्य
  3. ‘खाद्य प्रणालियाँ’ क्या होती हैं?
  4. ‘सतत विकास लक्ष्य’ (SDG) क्या हैं?

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

 नौचालन हेतु सामुद्रिक सहायता विधेयक’ 2021


(Marine Aids to Navigation Bill 2021)

संदर्भ:

हाल ही में ‘संसद’ द्वारा, पारंपरिक नौचालन सहायता, अर्थात ‘लाइटहाउस’ को नियंत्रित करने वाले, नौ दशक पुराने कानून ‘प्रकाश स्तंभ अधिनियम’ 1927 (Lighthouse Act, 1927) को निरस्त करने और उसका स्थान लेने के लिए ऐतिहासिक ‘नौचालन हेतु सामुद्रिक सहायता विधेयक’ 2021 (Marine Aids to Navigation Bill 2021) को पारित किया गया है।

विधेयक के प्रमुख प्रावधान:

  • विधेयक का विस्तार: यह विधेयक, क्षेत्रीय जल, महाद्वीपीय शेल्फ और विशेष आर्थिक क्षेत्र सहित विभिन्न समुद्री क्षेत्रों को शामिल करते हुए पूरे भारत में लागू होगा।
  • नौचालन सहायता महानिदेशालय: विधेयक में केंद्र सरकार द्वारा ‘नौचालन सहायता महानिदेशक’ (Director General of Aids to Navigation) को नियुक्त करने का प्रावधान किया गया है। महानिदेशक नौचालन सहायता संबंधी मामलों में केंद्र सरकार को सलाह देगा।
  • केंद्रीय सलाहकार कमिटी: केंद्र सरकार ‘केंद्रीय सलाहकार कमिटी’ (Central Advisory CommitteeCAC) की नियुक्ति कर सकती है। इसमें विधेयक से प्रभावित हितों का प्रतिनिधित्व करने वाले या क्षेत्र की विशेष जानकारी रखने वाले शामिल होंगे।
  • सरकार, निम्नलिखित मामलों के संबंध में ‘केंद्रीय सलाहकार कमिटी’ (CAC) से सलाह ले सकती है: (i) नौचालन सहायता / नैविगेशन एड्स की स्थापना, (ii) इन एड्स में वृद्धि करना, उनमें फेरबदल या उन्हें हटाना, (iii) इन एड्स से संबंधित किसी प्रस्ताव की लागत, या (iv) किसी उप समिति की नियुक्ति।
  • नौचालन सहायता एवं पोत परिवहन सेवाओं का प्रबंधन: केंद्र सरकार नौचालन सहायता एवं पोत परिवहन सेवाओं के विकास, रखरखाव तथा प्रबंधन के लिए जिम्मेदार होगी।
  • प्रशिक्षण तथा प्रमाणन: बिल में प्रावधान है कि वैध प्रशिक्षण सर्टिफिकेट के बिना किसी व्यक्ति को किसी स्थान पर नौचालन सहायता (सहायक गतिविधियों सहित) या पोत परिवहन सेवा के संचालन की अनुमति नहीं होगी।
  • विवाद निवारण: नौवहन बकाया, खर्च या लागत हेतु समुद्री सहायता से संबंधित किसी भी विवाद पर, विवाद उत्पन्न होने वाले स्थान पर क्षेत्राधिकार वाले, एक सिविल कोर्ट द्वारा सुनवाई और फैसला किया जाएगा।

नए कानून की आवश्यकता:

नौचालन से संबंधित गतिविधियों को एक उपयुक्त वैधानिक ढांचा प्रदान करने के लिए एक ऐसे नए अधिनियम के अधिनियमन की आवश्यकता है जो कि नौचालन के लिए सामुद्रिक सहायता की आधुनिक भूमिका को दर्शाए और अंतर्राष्ट्रीय करारों के तहत भारत के दायित्वों के अनुरूप हो।

नए कानून के लाभ:

  1. नौचालन के लिए सहायता एवं पोत परिवहन सेवाओं से संबद्ध मामलों के लिए बेहतर कानूनी ढांचा।
  2. नौवहन की सुरक्षा एवं दक्षता बढ़ाने और पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए पोत परिवहन सेवाओं का प्रबंधन।
  3. अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ‘नौचालन के लिए सहायता’ और पोत परिवहन सेवाओं के ऑपरेटरों के लिए प्रशिक्षण और प्रमाणन के माध्यम से कौशल विकास।
  4. सुरक्षित और प्रभावी नौचालन के उद्देश्य से डूबे हुए/फंसे हुए जहाजों की पहचान करने के लिए सामान्य जल में “मलबे” चिन्हित करना।
  5. शिक्षा, संस्कृति और पर्यटन के उद्देश्य से प्रकाश स्तम्भों का विकास, जोकि तटीय क्षेत्रों की पर्यटन क्षमता का दोहन करते हुए उनकी अर्थव्यवस्था में योगदान देगा।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. विधेयक का अवलोकन
  2. प्रकाशस्तंभ अधिनियम, 1927 के बारे में
  3. अंतरराष्ट्रीय शिपिंग से संबंधित नियम और कानून

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


राजा मिर्च

(Raja Mircha)

  • नागालैंड की इस मिर्च को ‘भूत जोलोकिया’ (Bhoot Jolokia) और ‘घोस्ट पेपर’ / ‘भूतिया मिर्च’ भी कहा जाता है।
  • इसे 2008 में जीआई सर्टिफिकेशन मिला था।
  • नागा ‘राजा मिर्च’ को विश्व की सबसे तीखी मिर्च माना गया है और यह ‘स्कोविल हीट यूनिट्स’ (SHUs) के आधार पर दुनिया की सबसे तीखी मिर्च की सूची में शीर्ष पांच में लगातार बनी हुई है।

 

सैन्याभ्यास इंद्र-2021

  • इंद्र-2021 (INDRA 2021), भारत-रूस के मध्य ‘संयुक्त सैन्य अभ्यास’ है।
  • संयुक्त सैन्याभ्यास का यह 12वां संस्करण रूस के वोल्गोग्राड में आयोजित किया जाएगा।
  • इस सैन्याभ्यास में ‘अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी समूहों के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई’ संबंधी संयुक्त राष्ट्र के अधिदेश के अनुरूप दोनों देशों की सेनायें आतंक-रोधी सैन्याभ्यास करेंगी।

 

ओडिशा के ‘पुरी’ शहर में ‘नल से शुद्ध पीने का पानी’ की सुविधा

हाल ही में, ओडिशा सरकार ने ‘पुरी’ को ‘नल से शुद्ध पीने का पानी’ की सुविधा प्रदान करने वाला देश का पहला ऐसा शहर घोषित किया है।

  • ‘पुरी’ शहर में नल से आने वाला पूरी तरह से शुद्ध और सुरक्षित है, जिसका इस्तेमाल, बिना किसी फिल्टर के या बगैर उबाले, सीधे ही पीने और खाना पकाने के लिए किया जा सकता है।
  • ‘ड्रिंक फ्रॉम टैप-सुजल मिशन’ के तहत पुरी के निवासी पीने के लिए सीधे नल से पानी ले सकेंगे। इस पानी के भंडारण या फ़िल्टर करने की कोई आवश्यकता नहीं है। नल का पानी चौबीसों घंटे उपलब्ध रहेगा।
  • लाभ: राज्य सरकार के इस कदम से, शहर में 3 करोड़ प्लास्टिक की पानी की बोतलों का उपयोग समाप्त हो जाएगा। अर्थात, अब शहर लगभग 400 टन प्लास्टिक कचरे से मुक्त हो जाएगा।

‘सुजल मिशन’:

  • ‘सुजल मिशन’ पिछले साल 13 अक्टूबर को शुरू किया गया था, इसका उद्देश्य राज्य के 15 से अधिक शहरी क्षेत्रों में 15 लाख से अधिक लोगों के लिए पीने के पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करना था।
  • इस मिशन में ‘शिकायत निवारण’ हेतु आईवीआरएस सहित 24/7 हेल्पलाइन केंद्र, एक मोबाइल जल परीक्षण प्रयोगशाला और जल आपूर्ति शिकायतों के त्वरित निवारण हेतु एक त्वरित प्रतिक्रिया टीम शामिल की गयी हैं।

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