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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 28 July 2021

 

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-I

1. हड़प्पा कालीन नगर ‘धौलावीरा’ को ‘विश्व धरोहर स्थल’ का दर्जा

2. भगत सिंह पर चलाए गए मुकदमे के कागजात पाकिस्तान से हासिल करने हेतु याचिका

 

सामान्य अध्ययन-II

1. स्वास्थ्य के अधिकार’ को अनदेखा करने संबंधी याचिका पर केंद्र से जवाब की मांग

2. महामारी के दौरान अनाथ हुए सभी बच्चों की सहायता हेतु ‘पीएम-केयर्स फंड’

3. फैक्टरिंग रेगुलेशन (संशोधन) विधेयक 2020

4. चीन के समुद्री दावों पर अमेरिका का प्रत्युत्तर

5. गाजा हमलों में इजरायली युद्ध अपराध स्पष्ट दिखाई देते हैं: ह्यूमन राइट्स वॉच

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

हड़प्पा कालीन नगर ‘धौलावीरा’ को ‘विश्व धरोहर स्थल का दर्जा


संदर्भ:

हाल ही में, गुजरात में स्थित ‘धौलावीरा’ (Dholavira) को यूनेस्को के ‘विश्व धरोहर स्थल’ का दर्जा प्रदान किया गया है।

  • यह यूनेस्को ‘विश्व धरोहर स्थल’ का दर्जा पाने वाला भारत का 40वां विरासत स्थल है।
  • यह ‘विश्व धरोहर स्थल’ का दर्जा पाने वाला भारत में ‘प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता’ (Indus Valley Civilisation – IVC) की पहली साइट है।
  • विश्व में अब तक, भारत के अलावा, इटली, स्पेन, जर्मनी, चीन और फ्रांस में 40 या अधिक ‘विश्व धरोहर स्थल’ घोषित किए गए हैं।

धौलावीरा के बारे में:

  • धौलावीरा, एक हड़प्पा-कालीन नगर है, जो कच्छ के रण के फैले द्वीपों में से ‘खादिर’ (Khadir) नामक द्वीप पर 100 हेक्टेयर में बसा हुआ है।
  • इसका समयकाल तीसरी और मध्य दूसरी सहस्राब्दी ईसा पूर्व के बीच का माना जाता है।
  • धौलावीरा, सिंधु घाटी सभ्यता के पांच सबसे बड़े नगरों में से एक है और गुजरात में वर्तमान ‘भुज’ से लगभग 250 किमी दूर स्थित है, और दो मौसमी नदियाँ, ‘मानसर’ और ‘मनहर’ इससे होकर बहती हैं।

धौलावीरा की विशिष्टताएं:

  • वर्तमान पाकिस्तान में स्थित मोहनजोदड़ो (Mohen-jo-Daro), गणवारीवाला (Ganweriwala) और हड़प्पा तथा भारत के हरियाणा में स्थित राखीगढ़ी के पश्चात ‘धौलावीरा’, सिंधु घाटी सभ्यता का पांचवा सबसे बड़ा महानगर है।
  • धौलावीरा साइट पर, किलेबंदी युक्त गढ़, बीच में एक शहर और एक निचला शहर पाया गया है, इनकी दीवारें बलुआ पत्थर या चूना पत्थर से निर्मित है, जबकि अन्य हड़प्पा स्थलों में दीवारें मिट्टी की ईंटों से बनी पायी गईं हैं।
  • यह अपनी, जल प्रबंधन प्रणाली, बहुस्तरीय सुरक्षा प्रणाली, विनिर्माण में पत्थरों का व्यापक उपयोग और शवाधान की विशेष पद्धति जैसी अनूठी विशेषताओं के लिए जाना जाता है।
  • यहाँ से उत्खनन के दौरान तांबे, पत्थर, टेराकोटा के आभूषण, सोने और हाथी दांत से बनी कलाकृतियां मिली हैं।
  • सिंधु घाटी सभ्यता’ (IVC) के अन्य स्थलों में पायी गई कब्रों के विपरीत, धौलावीरा में मनुष्यों के कोई मृत-अवशेष नहीं मिले है।
  • यहाँ पर मिले तांबा पिघलाने वाली भट्टियोँ के अवशेषों से इस बात का संकेत मिलता है कि धौलावीरा में रहने वाले हड़प्पावासियों को धातु विज्ञान के बारे में जानकारी थी।
  • यह, गोमेद और सीपियों जैसे अर्ध-कीमती रत्नों से बने आभूषणों के निर्माण का भी एक केंद्र था और यहाँ से लकड़ी का निर्यात भी किया जाता था।

धौलावीरा का पतन:

  • मेसोपोटामिया के पतन के साथ ही धौलावीरा का भी पतन हो गया, इससे इन अर्थव्यवस्थाओं के एकीकरण का संकेत मिलता है।
  • हड़प्पावासी, समुद्री मार्ग से व्यापार करते थे और मेसोपोटामिया के पतन के बाद इनका एक बड़ा बाजार खो गया और इनका स्थानीय खनन, विनिर्माण, विपणन और निर्यात व्यवसाय काफी प्रभावित हुआ।
  • 2000 ईसा पूर्व से, धौलावीरा में जलवायु परिवर्तन और सरस्वती जैसी नदियों के सूखने के कारण गंभीर सूखे का दौर शुरू हुआ। सूखा और अन्य विषम परिस्थितियों के कारण, यहाँ के निवासी गंगा घाटी, दक्षिण गुजरात और महाराष्ट्र से आगे की ओर पलायन करने लगे।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

सबसे पुराने, और सर्वाधिक महत्वपूर्ण, सुविधायुक्त पोताश्रय ‘लोथल’ को हड़प्पावासियों द्वारा एक बड़े वाणिज्य-केंद्र और मरम्मत-केंद्र रूप में विकसित किया गया थाहै। क्या आप जानते हैं कि यह कहाँ स्थित है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. धौलावीरा के बारे में
  2. सिंधु घाटी सभ्यता’ (IVC) के बारे में
  3. प्रमुख विशेषताएं
  4. नगर-योजना
  5. उत्खनन के दौरान प्राप्त कलाकृतियाँ
  6. पूजा पद्धति और रहन सहन
  7. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

मेंस लिंक:

विश्व धरोहर स्थलों के महत्व और उनके संरक्षण की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: स्वतंत्रता संग्राम- इसके विभिन्न चरण और देश के विभिन्न भागों से इसमें अपना योगदान देने वाले महत्त्वपूर्ण व्यक्ति/उनका योगदान।

 भगत सिंह पर चलाए गए मुकदमे के कागजात पाकिस्तान से हासिल करने हेतु याचिका


संदर्भ:

हाल ही में, पंजाब सरकार से, भगत सिंह के अदालती मामलों से संबंधित फाइलों को पाकिस्तान से हासिल करने संबंधी मामला देखने के लिए कहा गया है। वर्तमान में, ये फाइलें लाहौर के अनारकली मकबरे में स्थित पंजाब अभिलेखागार में रखी हुई हैं।

पृष्ठभूमि:

पाकिस्तान द्वारा भगत सिंह की विरासत को उचित तरीके से संरक्षित किया जा रहा है और वह इन फाइलों पर विदेशी विद्वानों को परामर्श करने की अनुमति भी दे रहा है।

भगत सिंह पर मुकदमा और फांसी:

  • भगत सिंह के लिए 23 मार्च 1931 को राजगुरु और सुखदेव के साथ लाहौर सेंट्रल जेल में फांसी दी गयी थी।
  • भगत सिंह और बी.के. दत्त ने ‘बहरों के कानो तक अपनी आवाज पहुचाने’ के लिए ‘सेंट्रल असेंबली’ में एक ‘जोखिम-रहित’ बम फेका था और अपनी गिरफ्तारी दी थी।
  • 8 अप्रैल, 1929 को दिल्ली में सेंट्रल असेंबली से भगत सिंह को गिरफ्तार किया गया था, इसके बाद जेल में बिताया गया समय, उनके जीवन का सर्वाधिक महत्वपूर्ण भाग है।
  • इन लोगों पर पहला मुकद्दमा ‘दिल्ली बम’ मामले में चलाया गया, जिसमे दोनों को दोषी ठहराया गया और मृत्युदंड की सजा सुने गई।
  • भगत सिंह पर सॉन्डर्स की हत्या से जुड़े लाहौर षड्यंत्र मामले में भी मुकदमा चलाया गया था।
  • वह जेल में कैदियों को राजनीतिक बंदी का दर्जे देने की मांग को लेकर हुई भूख हड़ताल में भी शामिल थे।

‘भगत सिंह’ के बारे में:

भगत सिंह का जन्म 28 सितम्बर 1907 को हुआ था।

  • गांधी जी का प्रभाव: प्रारंभ में, उन्होंने महात्मा गांधी और असहयोग आंदोलन का समर्थन किया। किंतु गांधी जी द्वारा, चौरी चौरा की घटना के मद्देनजर, आंदोलन वापस लिए जाने पर भगत सिंह ने क्रांतिकारी राष्ट्रवाद की ओर रुख कर लिया।
  • राजनीतिक विचारधारा: उनके लिए आजादी का अर्थ अंग्रेजों को देश से बाहर खदेड़ने तक ही सीमित नहीं था; इसके बजाय वह गरीबी, अस्पृश्यता, सांप्रदायिक झगड़ों और हर तरह के भेदभाव और शोषण से आजादी चाहते थे।
  • भगत सिंह वर्ष 1923 में, लाला लाजपत राय और भाई परमानंद द्वारा स्थापित किए गए नेशनल कॉलेज, लाहौर में भर्ती हो गए।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

कृपया, भगत सिंह और उनके मुकदमे से संबंधित मामले के बारे में अधिक जानकारी हेतु इस लेख को पढ़ें।

 

प्रीलिम्स लिंक:

निम्नलिखित के बारे में जानिए:

  1. HRA
  2. HSRA
  3. नौजवान भारत सभा
  4. काकोरी षडयंत्र कांड
  5. लाहौर षडयंत्र का मामला

मेंस लिंक:

भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में क्रांतिकारी और समाजवादी, भगत सिंह का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है। चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थान।

स्वास्थ्य के अधिकार’ को अनदेखा करने संबंधी याचिका पर केंद्र से जवाब की मांग


संदर्भ:

सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका में कहा गया है, कि ‘स्वास्थ्य के मौलिक अधिकार’ को अनदेखा किया जा रहा है, क्योंकि मरीजों को, विशेषकर कोविड-19 महामारी के दौरान, महंगी निजी चिकित्सा सुविधाओं या “अपर्याप्त” सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में से चयन करने के लिए मजबूर किया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस याचिका पर जवाब मांगा है।

याचिकाकर्ताओं की मांग:

याचिकाकर्ताओं द्वारा चिकित्सीय​​ संस्थान (पंजीकरण एवं विनियमन) अधिनियम, 2010 (Clinical Establishments (Registration and Regulation) Act- CEA, 2010) तथा चिकित्सीय​​ संस्थान (केंद्र सरकार) नियमावली, 2012 (Clinical Establishment (Central Government) Rules of 2012) और ‘पेशेंट्स राइट्स चार्टर’ को सही तरीके से लागू करने की मांग की गई है।

कोविड महामारी के दौरान “स्वास्थ्य के अधिकार” की किस प्रकार अनदेखी की गई?

  1. लगभग दो दशक पूर्व, भारत सरकार द्वारा ‘चिकित्सीय संस्थानों में मानकों के विनियमन’ को राष्ट्रीय नीति के लक्ष्य के रूप में अपनाया गया था, इन मानकों को अभी तक पूरे देश में प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया गया है। यह ‘गरिमामय जीवन के अधिकार’ (Right to a dignified life) का हनन है।
  2. संविधान के अनुच्छेद 21, 41 और 47 तथा विभिन्न ‘अंतरराष्ट्रीय अनुबंधों’ के अंतर्गत, न्यूनतम स्वास्थ्य- देखभाल प्रदान किया जाना सुनिश्चित किया गया है। अपर्याप्त सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण आम नागरिकों के लिए यह अधिकार उपलब्ध नहीं हैं।
  3. आज स्थिति यह है, कि 70% से अधिक स्वास्थ्य देखभाल निजी क्षेत्र द्वारा प्रदान की जाती है और 30% से भी कम रोगी सार्वजनिक क्षेत्र में अपना इलाज कराते हैं।

आवश्यकता:

कोविड-19 के उपचार हेतु निजी अस्पतालों द्वारा आसमान छूने वाली फीस वसूल किए जाने की अक्सर खबरे आती रहती हैं।

  • अतः मरीजों के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर ‘शिकायत निवारण तंत्र’ उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
  • यह तंत्र, विभिन्न स्तरों पर मरीजों की शिकायतों की जांच-पड़ताल करे।
  • इसमें, अस्पतालों/क्लीनिकों द्वारा मरीजों को उनके अधिकारों से वंचित करना और ‘चिकित्सीय​​ संस्थान अधिनियम और नियमों’ के तहत प्रदत्त न्यूनतम चिकत्सीय देखभाल और सुविधाएं प्रदान करने में विफलता को शामिल किया जाए।

‘स्वास्थ्य के अधिकार’ का आधार:

  1. भारतीय संविधान का ‘अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार की गारंटी देता है। ‘स्वास्थ्य का अधिकार’, ‘गरिमामय जीवन के अधिकार’ में अंतर्निहित है।
  2. राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत (DPSP): संविधान के अनुच्छेद 38, 39, 42, 43, और 47 के अंतर्गत, ‘स्वास्थ्य के अधिकार’ को प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने का दायित्व राज्य के लिए सौंपा गया है।
  3. पश्चिम बंगाल खेत मजदूर समिति मामले (1996) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है, कि कल्याणकारी राज्य में, सरकार का प्राथमिक कर्तव्य लोगों के कल्याण को सुरक्षित करना है और इसके अलावा, अपने नागरिकों के लिए पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करना सरकार का दायित्व है।
  4. भारत, संयुक्त राष्ट्र के ‘मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा’ (1948) पर एक हस्ताक्षरकर्ता भी है, इसके तहत, सभी मनुष्यों को भोजन, कपड़े, आवास और चिकित्सा देखभाल और आवश्यक सामाजिक सेवाओं सहित स्वास्थ्य एवं कल्याण हेतु एक जीवन स्तर का अधिकार प्रदान किया गया है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

भारतीय संविधान के तहत ‘स्वास्थ्य’ राज्य का विषय है। हाल ही में, कोविड महामारी के दौरान यह साबित हुआ है कि ‘स्वास्थ्य’ के विषय में भारतीय राज्य, केंद्र सरकार पर निर्भर है, इसलिए क्या इसे समवर्ती सूची में ले जाया जाना चाहिए?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. भारतीय संविधान के तहत ‘स्वास्थ्य का अधिकार’
  2. संबंधित संवैधानिक प्रावधान
  3. मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा (1948) के बारे में
  4. सुप्रीम कोर्ट के संबंधित फैसले

मेंस लिंक:

वर्तमान में ‘स्वास्थ्य के अधिकार’ की प्रासंगिकता पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

महामारी के दौरान अनाथ हुए सभी बच्चों की सहायता हेतु ‘पीएम-केयर्स फंड’


(PM-CARES funds to help all orphaned children during pandemic)

संदर्भ:

सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गई एक मौखिक टिप्पणी के अनुसार, ‘प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और आपातकालीन स्थिति में राहत कोष’ (PM CARES Fund) जैसी अनाथों के लिए घोषित कल्याणकारी योजनाओं के तहत केवल कोविड-19 के कारण अनाथ हुए बच्चों को कवर करने की बजाय कोविड-19 के दौरान अनाथ होने वाले सभी बच्चों को कवर किया जाना चाहिए।

संबंधित प्रकरण:

  • सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वत: संज्ञान लेकर उठाया गया यह मामला, मार्च 2020 में कोविड-19 महामारी की शुरुआत के बाद अनाथ होने वाले बच्चों से संबंधित है।
  • सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गई टिप्पणियों में कहा गया है, कि अदालत ‘पीएम केयर्स’ के तहत शुरू की गई योजनाओ के तहत सभी अनाथों को शामिल करने के लिए नहीं कह रही है, बल्कि वह महामारी के दौरान अनाथ होने वाले बच्चों को सुरक्षा प्रदान करने की आवश्यकता को उजागर कर रही है।

आवश्यकता:

अदालत ने कहा है, कि भारत, संयुक्त राष्ट्र के ‘बाल अधिकारों पर अभिसमय’ पर एक हस्ताक्षरकर्ता है और इसलिए अनाथों की देखभाल करना राज्य का दायित्व है।

पृष्ठभूमि:

  • 28 मई को, शीर्ष अदालत ने केंद्र और राज्यों को मार्च, 2020 के बाद, महामारी अथवा किसी अन्य कारणवश, अनाथ होने वाले बच्चों को चिह्नित करने और इनकी जानकारी को ‘राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग’ के ‘बाल स्वराज’ पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश जारी किए गया था।
  • शीर्ष अदालत की पीठ द्वारा इन अनाथ बच्चों को अवैध रूप से गोद लेने पर नियंत्रण करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

अनाथों की देखभाल और समय की मांग:

कोविड महामारी के दौरान 75,000 से अधिक बच्चे अनाथ हो चुके हैं, परित्यकत कर दिए गए हैं या उनके माता या पिता की मौत हो चुकी है। इनमे से कई बच्चे मानव तस्करी रैकेट के शिकार हो सकते हैं या अपराध में उतर सकते हैं।

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की रिपोर्ट के अनुसार:

  1. 1 अप्रैल 2020 से 23 जुलाई 2021 के बीच 6,855 बच्चे अनाथ हो चुके हैं।
  2. इस साल 23 जुलाई तक, महामारी के दौरान 68,218 बच्चों ने अपने माता या पिता में से किसी एक को खो दिया। पूरे देश में अन्य 247 बच्चों को परित्यक्त किया जा चुका है।

इन बच्चों की सहायता हेतु उपाय:

  1. राज्य सरकारों द्वारा मौजूदा स्कूलों में ही अनाथ बच्चों की शिक्षा जारी रखने के लिए एक व्यवस्था तैयार की जा सकती हैं।
  2. जिन पात्र बच्चों ने किसी स्कूल में दाखिला नहीं लिया है या स्कूल छोड़ दिया है, उन्हें स्कूलों में नामांकित किया जाना चाहिए।
  3. अधिकारियों को इन अनाथ बच्चों के अभिभावकों से संपर्क करना चाहिए और यह पता लगाना चाहिए कि क्या वे वास्तव में इन बच्चों की जिम्मेवारी उठा सकते हैं और इसके लिए क्या उन्हें वित्तीय सहायता की आवश्यकता है।
  4. विभिन्न मौजूदा योजनाओं के तहत इन बच्चों के लिए सरकारी आर्थिक संरक्षण की सीमा को बढाया जा सकता है।
  5. मौजूदा योजनाओं का उचित क्रियान्वयन किया जाना चाहिए।

‘बाल अधिकार अभिसमय’ के बारे में:

  • ‘बाल अधिकार अभिसमय’ (Convention on the Rights of ChildCRC) एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है और यह पक्षकार सदस्यों पर कानूनी रूप से बाध्यकारी है।
  • इस अभिसमय को संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 1989 में अपनाया गया था, और अभिसमय पर न्यूनतम 20 सदस्यों द्वारा संपुष्टि किए जाने के बाद, इसे 1990 में लागू किया गया था।
  • इसके तहत, 18 साल से कम उम्र के हर इंसान को एक बच्चे के रूप में माना जाता है।
  • ‘बाल अधिकार अभिसमय’ में, किसी प्रजाति, धर्म या योग्यता पर ध्यान दिए बगैर प्रत्येक बच्चे के नागरिक, राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों को निर्धारित किया गया है।

‘बाल अधिकार अभिसमय’ के 4 प्रमुख सिद्धांत:

  1. गैर-भेदभाव
  2. जीवन, अस्तित्व और विकास का अधिकार
  3. बच्चे का सर्वोत्तम हित
  4. बच्चे के विचारों का सम्मान

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘सभी के लिए शिक्षा’ संबंधी वैश्विक घोषणा के बारे में जानते हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘बाल अधिकार अभिसमय’ के बारे में
  2. राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के बारे में
  3. बाल स्वराज
  4. भारत में गोद लेने की प्रक्रिया

मेंस लिंक:

कोविड महामारी के दौरान अनाथ हुए बच्चों से जुड़े मुद्दों पर प्रकाश डालिए। उनके संरक्षण की आवश्यकता और राज्य के हस्तक्षेप की चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

फैक्टरिंग रेगुलेशन (संशोधन) विधेयक 2020


संदर्भ:

हाल ही में, फैक्टरिंग रेगुलेशन (संशोधन) विधेयक 2020 (Factoring Regulation (Amendment) Bill 2020) को लोकसभा में पारित कर दिया गया है। यह विधेयक फैक्टरिंग बिजनेस करने वाली इकाइयों के दायरे को बढ़ाता है।

‘फैक्टरिंग’ क्या है?

‘फैक्टरिंग’ (Factoring) एक ऐसा व्यवसाय होता है, जिसमे किसी इकाई (MSMEs की तरह) द्वारा तत्काल धन के बदले (आंशिक या पूर्ण), अपनी ‘प्राप्य राशियोँ या वस्तुओं’ (ग्राहक से बकाया रूप में हासिल होने वाली) को तीसरे पक्ष (बैंक या NBFC की तरह एक ‘फैक्टर’) को बेचा जाता है।

  • वर्तमान में, ‘फैक्टरिंग’ का अधिकांश व्यवसाय, सात ‘गैर-बैंक वित्तीय कंपनियों’ द्वारा प्रमुख व्यावसायिक शर्तों के माध्यम से किया जाता है।
  • इन ‘गैर-बैंक वित्तीय कंपनियों’ को ‘NBFC फैक्टर’ कहा जाता है।

प्रमुख प्रावधान:

  1. विधेयक में, किसी NBFC के लिए फैक्टरिंग व्यवसाय में प्रवेश करने हेतु निर्धारित सीमा को समाप्त कर दिया गया है।
  2. इसमें, फाइनेंसरों के दायरे को बढाया गया है और अन्य गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों को भी फैक्टरिंग व्यवसाय करने तथा ‘सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों’ के ‘चालान’ / ‘बिल’ (invoice) में छूट के लिए ‘ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम प्लेटफॉर्म’ पर भाग लेने के अनुमति दी गई है।
  3. विधेयक में दोहरे वित्तीयन की संभावना से बचने के लिए, ‘चालान’ के पंजीकरण और उस पर लगाए गए शुल्क पर संतुष्टि जाहिर करने के लिए समय अवधि को कम किया गया है।
  4. इसमें ‘भारतीय रिजर्व बैंक’ को ‘फैक्टरिंग व्यवसाय’ के संबंध में नियम बनाने का अधिकार प्रदान किए गए हैं।

महत्व:

  1. गैर- NBFC फैक्टर्स और अन्य संस्थाओं को फैक्टरिंग करने की अनुमति देने से छोटे व्यवसायों के लिए उपलब्ध धन की आपूर्ति में वृद्धि होने की उम्मीद है।
  2. इसकी वजह से ‘निधियों’ की लागत में कमी आ सकती है और ऋण की कमी से जूझ रहे छोटे व्यवसायों तक अधिक पहुंच संभव हो सकती है, जिससे उनकी प्राप्य राशियों के लिए समय पर भुगतान सुनिश्चित हो सकेगा।
  3. GSTN के साथ एकीकरण, सरकारी बकाया की अनिवार्य सूची और शुल्कों को सीधे जमा करने जैसे कदमों से फाइनेंसरों के बीच इस प्लेटफॉर्म की परिचालन दक्षता और स्वीकार्यता में सुधार होगा।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप फ़ैक्टरिंग (factoring) और फ़ॉरफ़ाइटिंग (forfaiting) में अंतर जानते हैं?

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

चीन के समुद्री दावों पर अमेरिका का प्रत्युत्तर


संदर्भ:

अत्यधिक विवादित जल-क्षेत्रों में चीन के बढ़ते दबाव की पृष्ठभूमि में, अमेरिका ने कहा है कि ‘दक्षिणी चीन सागर’ में बीजिंग द्वारा किए जा रहे विस्तारवादी दावों का “अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई आधार नहीं है”।

संबंधित प्रकरण:

बीजिंग द्वारा ‘दक्षिणी चीन सागर’ में दक्षिण पूर्व एशियाई कई देशों के दावों के पर, अतिव्यापी क्षेत्रीय दावे किए जा रहे हैं।

  • चीन द्वारा ब्रुनेई, मलेशिया, फिलीपींस, ताइवान और वियतनाम के दावों के साथ, लगभग संसाधन-समृद्ध पूरे समुद्र पर, प्रतिस्पर्धी दावा किया जा रहा है। इस समुद्री क्षेत्र से अरबों डॉलर सालाना का शिपिंग व्यापार होता है।
  • बीजिंग पर इस क्षेत्र में जहाज-रोधी मिसाइलों और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों सहित सैन्य-उपकरणों को तैनात करने का भी आरोप लगाया गया है।
  • इसके अलावा चीन द्वारा वर्ष 2016 में अंतर्राष्ट्रीय न्यायाधिकरण द्वारा किए गए एक फैसले की अनदेखी की गयी है। इस फैसले में अंतर्राष्ट्रीय न्यायाधिकरण ने इस समुद्री क्षेत्र में चीन के ऐतिहासिक दावों को बिना किसी आधार का बताया था।

हालिया घटनाएं:

  • चीन की सैकड़ों नौकाओं को फिलीपींस के विशेष आर्थिक क्षेत्र के अंदर देखा गया है।
  • चीन के सैन्य विमान मलेशिया के तट पर दिखाई दिए।

अमेरिका-चीन संबंध:

साइबर सुरक्षा और तकनीकी वर्चस्व से लेकर, हांगकांग और शिनजियांग में मानवाधिकारों तक कई मुद्दों पर अमेरिका-चीन संबंध बिगड़ गए हैं। वर्तमान में अमेरिका, चीन को सबसे बड़ी चुनौती के रूप में देखता है।

‘दक्षिणी चीन सागर’ की अवस्थिति:

  • ‘दक्षिणी चीन सागर’, दक्षिण पूर्व एशिया में पश्चिमी प्रशांत महासागर की एक शाखा है।
  • यह, चीन के दक्षिण में, वियतनाम के पूर्व और दक्षिण में, फिलीपींस के पश्चिम में और बोर्नियो द्वीप के उत्तर में विस्तारित है।
  • यह ‘ताइवान जलडमरूमध्य’ द्वारा, पूर्वी चीन सागर और ‘लुजोन जलडमरूमध्य’ द्वारा ‘फिलीपीन सागर’ से जुड़ा हुआ है।
  • सीमावर्ती देश और क्षेत्र: चीन जनवादी गणराज्य, चीन गणराज्य (ताइवान), फिलीपींस, मलेशिया, ब्रुनेई, इंडोनेशिया, सिंगापुर और वियतनाम।

सामरिक महत्व:

  • ‘दक्षिणी चीन सागर’, हिंद महासागर और प्रशांत महासागर (मलक्का जलडमरूमध्य) को जोड़ने वाली कड़ी है, और अपनी अवस्थिति के कारण यह अत्यधिक सामरिक महत्व रखता है।
  • संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास अभिसमय (United Nations Conference on Trade and Development- UNCTAD) के अनुसार, अरबों-खरबों के व्यापार सहित वैश्विक नौवहन का एक-तिहाई हिस्सा इस क्षेत्र से होकर प्रतिवर्ष गुजरता है, जिसकी वजह से यह एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक जल निकाय बन जाता है।

इस क्षेत्र के द्वीपों पर प्रतिस्पर्धी दावे:

  • ‘पारसेल द्वीप समूह’ (Paracel Islands) पर चीन, ताइवान और वियतनाम दावा करते हैं।
  • स्प्रैटली द्वीपों (Spratly Islands) पर चीन, ताइवान, वियतनाम, ब्रुनेई और फिलीपींस द्वारा दावा किया जाता है।
  • स्कारबोरो शोल (Scarborough Shoal) पर फिलीपींस, चीन और ताइवान का दावा है।

2010 के बाद से, चीन के द्वारा निर्जन टापुओं (जैसेकि, हेवन रीफ, जॉनसन साउथ रीफ और फिएरी क्रॉस रीफ) को यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑफ द लॉ ऑफ द सी’ (United Nations Convention on the Law of the Sea- UNCLOS) के दायरे में लाने के लिए कृत्रिम टापुओं में परिवर्तित किया जा रहा है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि ‘पीत सागर’ (yellow sea) उन चार सागरों में से एक है जिसका नाम सामान्य रंगों के आधार पर रखा गया है? इनमे से अन्य सागर कौन से हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. विवाद में शामिल देश
  2. नाइ-डैश लाइन क्या है?
  3. इस क्षेत्र में स्थित महत्वपूर्ण खाड़ियाँ, मार्ग एवं सागर
  4. विवादित द्वीप और उनकी अवस्थिति
  5. UNCLOS क्या है?
  6. ताइवान स्ट्रेट और लूजॉन स्ट्रेट की अवस्थिति

मेंस लिंक:

दक्षिण चीन सागर विवाद पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

गाजा हमलों में इजरायली युद्ध अपराध स्पष्ट दिखाई देते हैं: ह्यूमन राइट्स वॉच


संदर्भ:

‘ह्यूमन राइट्स वॉच’ (Human Rights Watch – HRW) द्वारा की गई जांच से पता चला है, कि इजरायली सैन्य बलों और फिलिस्तीनी सशस्त्र समूहों के मध्य, मई 2021 के दौरान गाजा पट्टी में हुई लड़ाई में इजरायल ने युद्ध के कानूनों का उल्लंघन किया था, और जाहिर तौर पर यह उल्लंघन युद्ध अपराधों के समान थे।

इजरायल द्वारा किए गए इस तरह के हमले, “नागरिकों के खिलाफ जानबूझकर या अंधाधुंध हमलों के खिलाफ प्रतिबंध” संबंधी कानूनों का उल्लंघन करते हैं।

पृष्ठभूमि:

मई 2021 में, गाज़ा पट्टी के एक क्षेत्र पर इजरायल द्वारा किए गए तीन हमलों में 62 फिलिस्तीनी नागरिक मारे गए, जबकि उस क्षेत्र में आसपास भी कोई स्पष्ट सैन्य टारगेट नहीं था।

फ़िलिस्तीनी सशस्त्र समूहों द्वारा भी गैरकानूनी हमले किए गए और नागरिकों के खिलाफ जानबूझकर या अंधाधुंध हमलों के खिलाफ प्रतिबंध का उल्लंघन करते हुए 4,360 से अधिक गैर-निर्देशित रॉकेट और मोर्टार को इजरायली आबादी वाले क्षेत्रों की ओर दागा गया।

युद्ध अपराधों के संबंध में अंतरराष्ट्रीय कानून:

  1. अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून, या युद्ध-कानूनों के तहत, युद्धरत पक्ष केवल सैन्य-लक्ष्यों पर हमला कर सकते हैं।
  2. लड़ाई में भाग लेने वाले पक्षों को, हमलों की प्रभावी एवं अग्रिम चेतावनी देते हुए आम नागरिकों को न्यूनतम नुकसान पहुंचने हेतु सभी संभव सावधानी बरतनी चाहिए।
  3. आम नागरिकों और नागरिक वस्तुओं पर जानबूझकर हमला करना निषिद्ध है।
  4. युद्ध के कानून, नागरिकों और सैन्य लक्ष्यों के बीच अंतर नहीं करने वाले अंधाधुंध हमलों को भी प्रतिबंधित करते हैं।
  5. जिन हमलों के परिणामस्वरूप, नागरिकों और नागरिक संपत्ति को अपेक्षित नुकसान, प्रत्याशित सैन्य लाभ के अनुपात में नहीं होता है, उन्हें भी निषिद्ध किया गया हैं।
  6. आपराधिक इरादे से युद्ध-कानूनों का गंभीर उल्लंघन करने वाले व्यक्ति को युद्ध अपराधों के लिए जिम्मेदार मन जाएगा।

इजरायल- फिलस्तीन के मध्य हालिया युद्ध:

रमजान के महीने में, यहूदियों और मुसलमानों के लिए पवित्र स्थल पर बनी ‘अल-अक्सा मस्जिद’ के परिसर के इजरायल के भारी-भरकम पुलिसिंग की गई थी और इसके नजदीक बसी हुई फ़िलिस्तीनी परिवारों को नए बसने वाले यहूदीयों द्वारा बेदखल करने की धमकाया जा रहा था।

  • इसके खिलाफ फिलिस्तीनी विरोध के समर्थन में हमास द्वारा यरुशलम की ओर रॉकेटों की बौछार करने के बाद 10 मई को इजरायल- फिलस्तीन के मध्य युद्ध छिड़ गया।
  • लड़ाई के दौरान, हमास ने इज़राइल की ओर 4,000 से अधिक रॉकेट और मोर्टार दागे, जबकि इज़राइल ने गाज़ापट्टी में 1,000 से अधिक लक्ष्यों को निशाना बनाया था।

‘ह्यूमन राइट्स वॉच’ (HRW) के बारे में:

  • वर्ष 1978 में स्थापित, यह एक गैर-सरकारी संगठन है। इसका मुख्यालय न्यूयॉर्क शहर में है और यह मानव अधिकारों के संबंध में अनुसंधान और इनका समर्थन करता है।
  • यह समूह, विभिन्न सरकारों, नीति निर्माताओं, कंपनियों और निजी तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन करने वालों पर मानवाधिकारों का सम्मान करने के लिए दबाव डालता है, और यह समूह अक्सर. शरणार्थियों, बच्चों, प्रवासियों और राजनीतिक कैदियों के प्रतिनिधि के तौर पर कार्य करता है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं, कि हेग में स्थित ‘अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय’ (ICC), नरसंहार, युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों के अभियोजन के लिए अंतिम न्यायालय है?

क्या आप जानते हैं कि ‘ह्यूमन राइट्स वॉच’ ने 1997 में लैंडमाइंस पर प्रतिबंध लगाने के लिए ‘अंतर्राष्ट्रीय अभियान’ के संस्थापक सदस्य के रूप में नोबेल शांति पुरस्कार जीता था और ‘क्लस्टर युद्ध सामग्री’ पर प्रतिबंध लगाने वाली 2008 की संधि में अग्रणी भूमिका निभाई थी?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. वेस्ट बैंक कहाँ है?
  2. गाजा पट्टी
  3. गोलन हाइट्स
  4. ‘हमास’ कौन हैं?
  5. ‘अल-नकबा’ क्या है?
  6. इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष के बारे में

मेंस लिंक:

लंबे समय से चले आ रहे इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष को समाप्त करने के उपाय सुझाएं।

स्रोत: द हिंदू


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