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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 27 July 2021

 

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

1. प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (PMJVK)

2. अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा और भारत

 

सामान्य अध्ययन-III

1. बृहस्पति ग्रह पर एक्स-रे ऑरोराज़ का रहस्य

2. ‘नउका’: अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए एक रूसी मॉड्यूल

3. स्वच्छ गंगा निधि

4. असम-मिजोरम सीमा विवाद

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. त्रिपुरा अगरवुड नीति

2. एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स हेतु राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र

3. 84 कोस परिक्रमा मार्ग

4. KASEZ, भारत का ‘पहला हरित औद्योगिक शहर’

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (PMJVK)


(Pradhan Mantri Jan Vikas Karyakaram)

संदर्भ:

अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा देश के चिन्हित अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों (Minority Concentration AreasMCAs) में ‘प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम’ (Pradhan Mantri Jan Vikas Karyakaram – PMJVK) का कार्यान्वयन किया जा रहा है।

PMJVK के बारे में:

केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2018 में पूर्ववर्ती ‘बहु-क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम’ (Multi-sectoral Development Programme-MsDP) के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु इसका नाम बदलकर ‘प्रधान मंत्री जन विकास कार्यक्रम’ (PMJVK) के रूप में इसका पुनर्गठन कर दिया गया था।

इसका उद्देश्य, अल्पसंख्यक समुदायों को बेहतर सामाजिक-आर्थिक अवसंरचना सुविधाएं प्रदान करना है।

कार्यक्रम के तहत विशेष फोकस क्षेत्रों हेतु निधियों का आवंटन:

  1. ‘प्रधान मंत्री जन विकास कार्यक्रम’ के तहत 80% संसाधन, शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास से संबंधित परियोजनाओं के लिए निर्धारित किए गए हैं।
  2. कार्यक्रम के तहत 33% से 40% संसाधन, विशेष रूप से महिला केंद्रित परियोजनाओं के लिए आवंटित किए जाएंगे।

‘प्रधान मंत्री जन विकास कार्यक्रम’ के लाभार्थी:

  • ​​ PMJVK के संदर्भ में, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 की धारा 2 (c) के तहत अल्पसंख्यक समुदायों के रूप में अधिसूचित समुदायों को अल्पसंख्यक समुदाय माना जाएगा।
  • इस अधिनियम के अंतर्गत, वर्तमान में छह समुदायों अर्थात् ‘मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, पारसी और जैन’ को अल्पसंख्यक समुदायों के रूप में अधिसूचित किया गया है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि भारतीय संविधान में “अल्पसंख्यक” शब्द को परिभाषित नहीं किया गया है? हालाँकि, संविधान धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों को मान्यता देता है। इस संबंध में प्रमुख प्रावधान क्या हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘प्रधान मंत्री जन विकास कार्यक्रम’ के प्रमुख बिंदु
  2. लाभार्थी
  3. पात्रता

मेंस लिंक:

‘प्रधान मंत्री जन विकास कार्यक्रम’ के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी।

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा और भारत


संदर्भ:

यदि ‘पाकिस्तान-अफगानिस्तान-उजबेकिस्तान रेलवे’ (Pakistan-Afghanistan-Uzbekistan – PAKAFUZ railway) का निर्माण करने की योजना से, ‘मध्य एशियाई आउटरीच प्रयासों’ के संदर्भ में, भारत का अंतर्राष्ट्रीय उत्तर- दक्षिण परिवहन कॉरिडोर (International North-South Transport Corridor – INSTC) निरर्थक हो जाता है, तो भारत को अपनी रणनीति फिर से तैयार करने पड़ सकती है।

संबंधित प्रकरण:

  • ‘पाकिस्तान-अफगानिस्तान-उजबेकिस्तान’ (PAKAFUZ) प्रस्ताव के तहत 573 किमी लंबी एक रेलवे परियोजना प्रस्तावित की गयी है।
  • यह रेल परियोजना, उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद को अफगानिस्तान की राजधानी काबुल और पाकिस्तान के उत्तरी शहर पेशावर से जोड़ेगी।
  • इस परियोजना से भारतीय हितों पर असर पड़ने की संभावना है, क्योंकि यह योजना, ईरान के चाबहार बंदरगाह के माध्यम से अफगानिस्तान में अपने प्रभाव का विस्तार करने के लिए बनाई जा रही है।
  • भारत के लिए अब सबसे बड़ी चिंता यह है, कि PAKAFUZ में अफगानिस्तान के शामिल होने से, यह देश अब हिंद महासागर तक पहुंच के लिए INSTC पर निर्भर नहीं रहेगा। PAKAFUZ, मुख्यतः चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) की उत्तरी शाखा के रूप में कार्य करेगा, जिसे अब N-CPEC भी कहा जा सकता है।
  • इसका परिणाम यह होगा कि भारत, मध्य एशिया में चीनी प्रभाव को “संतुलित” करने में कम सक्षम होगा, जिससे भारत को अपनी प्रासंगिक रणनीति का फिर से मूल्यांकन करना पड़ेगा।

भारत के लिए आगे की राह:

  1. मध्य एशिया पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, भारत को तार्किक रूप से, अपना अधिक समय, ध्यान और प्रयास, भारत-प्रशांत क्षेत्र के ‘एफ्रो-यूरेशियन रिमलैंड’ में अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए समर्पित करना चाहिए। इस क्षेत्र में भारत के पास यूरेशियन हार्टलैंड की तुलना में काफी अधिक अवसर हैं।
  2. इज़राइल द्वारा दिसंबर 2019 में भारत के साथ अपनी ‘पार-क्षेत्रीय संपर्क योजना’- “ट्रांस-अरेबियन कॉरिडोर” (Trans-Arabian Corridor – TAC) – को साझा किया गया था। भारत को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।
  3. कुछ साल पहले से लगभग भुलाए जा चुके ‘भारत-जापान के संयुक्त ‘एशिया-अफ्रीका ग्रोथ कॉरिडोर’ (Asia-Africa Growth CorridorAAGC) को पुनर्जीवित किया जा सकता है।
  4. भारत पहले से ही व्लादिवोस्तोक-चेन्नई मैरीटाइम कॉरिडोर (VCMC) के माध्यम से रूस के संबंध में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस कॉरिडोर की घोषणा वर्ष 2019 में प्रधान मंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन द्वारा ‘ईस्टर्न इकोनोमिक फोरम’ के आयोजन के दौरान की गई थी।

‘अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा’ (INSTC) के बारे में:

  • अंतर्राष्‍ट्रीय उत्‍तर-दक्षिण परिवहन गलियारा- INSTC, माल ढुलाई के लिए जहाज, रेल और सड़क मार्ग का 7,200 किलोमीटर लंबा बहु-विधिक (मल्टी-मोड) नेटवर्क है।
  • सम्मिलित क्षेत्र: भारत, ईरान, अफगानिस्तान, अजरबैजान, रूस, मध्य एशिया और यूरोप।

इस गलियारे का महत्व:

  1. ‘अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा’ (INSTC) की परिकल्पना, चीन की ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ (BRI) से काफी पहले की गयी थी। INSTC के माध्यम से, भारत से ईरान के रास्ते रूस और यूरोप के लिए भेजे जाने वाले माल की परिवहन लागत और समय की बचत होगी और साथ ही में, यूरेशियन देशों के साथ संपर्कों के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा।
  2. यह मध्य एशिया और फारस की खाड़ी तक माल-परिवहन हेतु एक अंतरराष्ट्रीय परिवहन और पारगमन गलियारा बनाने के लिए, भारत, ओमान, ईरान, तुर्कमेनिस्तान, उजबेकिस्तान और कजाकिस्तान द्वारा हस्ताक्षरित एक बहुउद्देशीय परिवहन समझौते, जिसे ‘अश्गाबात समझौता’ कहा जाता है, के साथ भी तालमेल स्थापित करेगा।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘ग्रेट एशियन हाईवे’ के रूप में विख्यात ‘एशियन हाईवे नेटवर्क’ (Asian Highway Network) के बारे में जानते हैं? यह ‘एशियाई भू परिवहन अवसंरचना विकास’ (Asian Land Transport Infrastructure Development – ALTID) परियोजना से किस प्रकार भिन्न है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा’ (INSTC) के बारे में
  2. भागीदार देश
  3. ‘अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा’ पर महत्वपूर्ण शहर
  4. INSTC से संबंधित प्रमुख बंदरगाह

मेंस लिंक:

‘अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा’ के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी।

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

बृहस्पति ग्रह पर एक्स-रे ऑरोराज़ का रहस्य


संदर्भ:

बृहस्पति (Jupiter) ग्रह के दोनों ध्रुवों के नजदीक ‘धुर्वीय ज्योति’ / ‘ऑरोरा’ (Auroras) पाए जाते हैं और इनसे एक्स-किरणों का उत्सर्जन होता है। इन एक्स-रे उत्सर्जन के पीछे के कारण को लेकर वैज्ञानिकों में काफी हैरानी थी।

अब, ‘जूनो मिशन’ (Juno mission) और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के ‘एक्सएमएम-न्यूटन मिशन’ (XMM-Newton mission) के आंकड़ों को मिलाकर नासा ने इस पहेली को सुलझा लिया है।

इस घटना के पीछे का कारण:

बृहस्पति ग्रह के धुर्वों पर ‘ऑरोरा’ की उत्पत्ति, इसके वायुमंडल में आयनों के टकराने से होती है। ये ‘आयन’ (ions) ग्रह के वायुमंडल में प्रवेश करने हेतु बृहस्पति के चुंबकीय क्षेत्र में विद्युत चुम्बकीय तरंगों में ‘सर्फिंग’ करते हैं।

‘जूनो मिशन’ के बारे में:

जूनो (Juno) अंतरिक्ष यान, वर्ष 2011 में बृहस्पति की संरचना और उद्भव का अध्ययन करने के मिशन हेतु लॉन्च किया गया था। गैलीलियो के बाद बृहस्पति की परिक्रमा करने वाला यह पहला अंतरिक्ष यान है।

जूनो का मुख्य उद्देश्य, बृहस्पति ग्रह की अवसंरचना और इसके उद्भव की कहानी को स्पष्ट करना है।

XMM-न्यूटन मिशन:

‘एक्सएमएम-न्यूटन मिशन’ (XMM-Newton mission) को ‘हाई थ्रूपुट एक्स-रे स्पेक्ट्रोस्कोपी मिशन’ (High Throughput X-ray Spectroscopy Mission) और ‘एक्स-रे मल्टी-मिरर मिशन’ (X-ray Multi-Mirror Mission) के रूप में भी जाना जाता है।

  • ‘एक्सएमएम-न्यूटन’ दिसंबर 1999 में ‘यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी’ द्वारा शुरू की गई एक ‘एक्स-रे अंतरिक्ष वेधशाला’ (X-ray space observatory) है।
  • यह यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के ‘होराइजन 2000’ (Horizon 2000) कार्यक्रम का एक हिस्सा है।
  • इस अंतरिक्ष यान का कार्य, अंतर-तारकीय एक्स-रे स्रोतों की जांच करना, संकीर्ण एवं व्यापक श्रेणीक्रम में स्पेक्ट्रोस्कोपी करना, और एक्स-रे तथा ऑप्टिकल (दृश्यमान और पराबैंगनी) तरंग दैर्ध्य, दोनों में, वस्तुओं का पहली बार एक साथ चित्रण करना है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं, कि हाल ही में, संयुक्त अरब अमीरात के ‘होप अंतरिक्ष यान’ (UAE’s Hope spacecraft) द्वारा मंगल ग्रह के वायुमंडल में ‘विच्छिन्न ज्योति पुंज’ या ‘डिस्क्रीट ऑरोरा’ (Discrete Auroras) के चित्र उतारे हैं? ‘डिस्क्रीट ऑरोरा’ क्या होते हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘धुर्वीय ज्योति’ या ऑरोरा क्या हैं?
  2. प्रकार?
  3. इनका निर्माण?
  4. प्रभाव
  5. सौर-पवन क्या होती हैं?
  6. कोरोना द्रव्य उत्क्षेपण (CME) क्या है?
  7. ऑरोरा की उत्पत्ति पर सौर-लपटों का प्रभाव

मेंस लिंक:

धुर्वीय ज्योति की उत्पत्ति प्रक्रिया पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

‘नउका’: अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए एक रूसी मॉड्यूल


संदर्भ:

21 जुलाई को रूस द्वारा कजाकिस्तान के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से ‘प्रोटॉन रॉकेट’ से ‘नउका’ लैब मॉड्यूल (Nauka Lab Module) को प्रक्षेपित किया गया है।

यह मॉड्यूल 29 जुलाई को ‘अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन’ (ISS) से जुड़ जाएगा।

‘नौका’ क्या है?

  • रूसी भाषा में ‘नउका’ (Nauka), का अर्थ “विज्ञान” होता है, और यह रूस द्वारा लॉन्च की गई अब तक की सबसे बड़ी अंतरिक्ष प्रयोगशाला है।
  • यह ‘अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन’ (International Space Station – ISS) पर लगे एक रूसी मॉड्यूल ‘पीर’ (Pirs) की जगह लेगा। आईएसएस पर ‘पीर’ मॉड्यूल का उपयोग अंतरिक्ष यानों के लिए ‘डॉकिंग पोर्ट’ के रूप में तथा अंतरिक्ष यात्रियों के लिए ‘स्पेस वाक’ पर जाने हेतु एक दरवाजे के रूप में किया जाता है।
  • अब, ‘नउका’ अंतरिक्ष स्टेशन पर रूस की ‘मुख्य अनुसंधान सुविधा’ के रूप में कार्य करेगी।
  • ‘नउका’ लैब मॉड्यूल की लंबाई 42 फीट और भार 20 टन है।
  • ‘नउका लैब मॉड्यूल’ के साथ ‘अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन’ के लिए एक ऑक्सीजन जनरेटर, एक अतिरिक्त बिस्तर, एक शौचालय और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) द्वारा निर्मित रोबोट कार्गो क्रेन भी भेजी जा रही है।
  • आईएसएस पर, ‘नउका’ को एक महत्वपूर्ण ज़वेज़दा (Zvezda) मॉड्यूल से जोड़ा जाएगा। यह मॉड्यूल अंतरिक्ष स्टेशन पर सभी प्रकार की ‘जीवन-अवलंबन प्रणाली’ (life support systems) उपलब्ध करता है, और आईएसएस के रूसी भाग, अर्थात ‘रशियन ऑर्बिटल सेगमेंट’ (ROS) के संरचनात्मक और कार्यात्मक केंद्र के रूप में कार्य करता है।

अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन’ के बारे में:

  • ‘अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन’ (International Space Station- ISS), मुख्यतः एक बड़े आकार का अंतरिक्ष यान है जो काफी लंबी अवधि के लिए पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थित है।
  • आईएसएस, वर्ष 1998 से अंतरिक्ष में कार्यरत है।
  • यह पांच भागीदार अंतरिक्ष एजेंसियों, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA), NASA (संयुक्त राज्य अमेरिका), ROSCOSMOS (रूस), JAXA (जापान), और CSA (कनाडा) के मध्य अंतरराष्ट्रीय सहयोग का परिणाम है।
  • आईएसएस, लगभग 93 मिनट में पृथ्वी की परिक्रमा करता है तथा प्रति दिन 5 चक्कर पूरे करता है।
  • आईएसएस, ‘माइक्रोग्रैविटी’ और ‘अंतरिक्ष पर्यावरण अनुसंधान प्रयोगशाला’ के रूप में कार्य करता है, और इस पर खगोलीय जीव विज्ञान, खगोल विज्ञान, मौसम विज्ञान, भौतिकी और अन्य क्षेत्रों में वैज्ञानिक प्रयोग किए जाते हैं।

क्या आप जानते हैं, कि सोवियत संघ तथा इसके बाद रूस द्वारा भेजे गए साल्युत (Salyut), अल्माज़, और मीर स्टेशनों, तथा अमेरिका द्वारा भेजे गए ‘स्काईलैब’ के बाद ‘आईएसएस’, नौवां अंतरिक्ष स्टेशन है और इस पर चालक दल निवास करता है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन’ (ISS) के बारे में।
  2. आईएसएस में शामिल देश
  3. उद्देश्य
  4. पूर्ववर्ती अंतरिक्ष स्टेशन
  5. अन्य अंतरिक्ष स्टेशन।

मेंस लिंक:

‘अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन’ पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

स्वच्छ गंगा निधि


(Clean Ganga Fund)

‘राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन’ (National Mission for Clean Ganga – NMCG) को वर्ष 2014 में गंगा नदी को साफ करने हेतु 20,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ एक कार्यक्रम के रूप में परिकल्पित किया गया था। इसके तहत अब तक 15,074 करोड़ रुपये आवंटित किए जा चुके हैं।

  • इसमें से केवल ₹10,972 करोड़, या लगभग दो-तिहाई राशि, वित्त मंत्रालय द्वारा, ‘राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन’ को जारी की गई है।
  • इसके अंतर्गत, उत्तर प्रदेश को सर्वाधिक 3,535 करोड़ रुपये दिए गए हैं, इसके बाद बिहार (₹2,631 करोड़), बंगाल (₹1,030 करोड़) और उत्तराखंड (₹1001 करोड़) का स्थान है।

पृष्ठभूमि:

यह फंडिंग काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि 30 जून तक, नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत NMCG के पास मात्र 1,040.63 करोड़ रुपये की राशि बची थी।

नदी की सफाई और पुनरुद्धार के लिए, घरेलू सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट और ठोस अपशिष्ट का नदी में प्रवाह किए जाने से पहले इसका उपचार एवं प्रबंधन, पारिस्थितिक प्रवाह को बनाए रखना, ग्रामीण स्वच्छता, वनीकरण, जैव विविधता संरक्षण, और सार्वजनिक भागीदारी जैसे कई तरह के हस्तक्षेप करने की आवश्यकता है।

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन’ के बारे में:

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) को सोसाइटी पंजीकरण अधिनियमन, 1860 के अंतर्गत 12 अगस्त 2011 को एक सोसाइटी के रुप में पंजीकृत किया गया था।

  • यह ‘पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम’ (EPA), 1986 के प्रावधानों के तहत गठित ‘राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण’ (NGRBA) की कार्यान्वयन शाखा के रूप में कार्य करता था।
  • कृपया ध्यान दें: ‘राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण’ (NGRBA) को ‘गंगा नदी के पुनरुद्धार, संरक्षण और प्रबंधन हेतु राष्ट्रीय परिषद’ (National Council for Rejuvenation, Protection and Management of River Ganga), जिसे ‘राष्ट्रीय गंगा परिषद’ (National Ganga Council – NGC) भी कहा जाता है, का गठन किए जाने बाद 7 अक्टूबर 2016 को भंग कर दिया गया था।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि गंगा नदी का डेल्टा, पूर्व में हुगली नदी से आगे मेघना नदी तक फैला हुआ है? मेघना नदी कहाँ बहती है? इसकी सहायक नदियाँ कौन-सी हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. राष्ट्रीय गंगा परिषद’ (NGC) की संरचना
  2. राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण’ (NGRBA) के बारे में
  3. राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा अभियान (NMCG) क्या है?
  4. नमामि गंगे कार्यक्रम के घटक
  5. विश्व बैंक समूह

मेंस लिंक:

‘राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन’ की भूमिकाओं और कार्यों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।

असम-मिजोरम सीमा विवाद


संदर्भ:

इस साल जून की शुरुआत में, मिजोरम-असम सीमा पर बसे दो परित्यक्त / खाली घरों को अज्ञात व्यक्तियों द्वारा जला दिया गया था, जिसकी वजह से इस परिवर्तनशील अंतर-राज्यीय सीमा पर तनाव बढ़ गया था।

इस घटना के बाद, जुलाई की शुरुआत में दोनों पड़ोसी राज्यों के बीच सीमा विवाद फिर से बढ़ गया है और दोनों राज्य एक-दूसरे पर अपने-अपने क्षेत्रों में अतिक्रमण करने का आरोप लगा रहे है।

विवाद का तात्कालिक कारण:

मिजोरम पक्ष के अनुसार, असम के लोगों ने वर्तमान संकट को भड़काने के लिए ‘नों मेंस लैंड’ में यथास्थिति का उल्लंघन किया है। विदित हो कि कुछ वर्ष पहले दोनों राज्य सरकारों के मध्य अंतर-राज्यीय सीमा पर ‘किसी का भी अधिकार नहीं वाले क्षेत्र’ अर्थात ‘नों मेंस लैंड’ पर सहमति हुई थी।

विवाद के बारे में:

  • वर्ष 1972 में मिजोरम को असम से पृथक कर एक केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया था और इसे वर्ष 1987 एक पूर्ण राज्य बना दिया गया।
  • अतीत में भी इन दोनों राज्यों के मध्य 6 किलोमीटर लंबी अंतर-राज्यीय सीमा पर झगड़े होते रहे हैं, जिसमे कभी-कभी हिंसक झड़पें भी हो जाती हैं।

यह विवाद ब्रिटिश काल के दौरान जारी की गई दो अधिसूचनाओं से उपजा है:

  1. पहला, वर्ष 1875 में जारी एक अधिसूचना, जिसके तहत ‘लुशाई पहाड़ियों’ को ‘कछार’ (Cachar) के मैदानी इलाकों से अलग कर दिया गया।
  2. दूसरा, वर्ष 1933 में जारी अधिसूचना, जिसके द्वारा लुशाई पहाड़ियों और मणिपुर के बीच एक सीमा का निर्धारण किया गया।

वर्तमान दावे:

  1. मिजोरम का दावा है कि ‘बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन एक्ट, 1873’ के अंतर्गत, 1875 में जारी अधिसूचना के आधार पर यह जमीन उसकी है।
  2. असम, इस जमीन को अपनी बताता है और इसके लिए यह, लुशाई पहाड़ियों का सीमांकन करने वाली राज्य सरकार द्वारा वर्ष 1933 में जारी अधिसूचना का हवाला देता है। इसमें कहा गया है कि मणिपुर की सीमा लुशाई हिल्स, असम के कछार जिले और मणिपुर राज्य के ट्राइजंक्शन से शुरू होती है। मिज़ो लोग इस सीमांकन को स्वीकार नहीं करते हैं।

औपनिवेशिक काल के दौरान मिजोरम को असम के एक जिले ‘लुशाई हिल्स’ के नाम से जाना जाता था।

अक्सर होने वाले इन झगड़ों की वजह:

इन दोनों पड़ोसी राज्यों के बीच की सीमा एक काल्पनिक रेखा है, जो नदियों, पहाड़ियों, घाटियों और जंगलों के प्राकृतिक अवरोधों के साथ बदलती रहती है। असम और मिजोरम के लोग, सीमा विवाद के लिए इस अस्पष्ट सीमा पर मतभेदों को जिम्मेदार ठहराते है।

सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोग, स्पष्ट सीमांकन के बारे में जानकारी नहीं होने की वजह से, अक्सर सीमा पार कर दूसरी तरफ चले जाते हैं।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि ‘बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन एक्ट 1873’ के तहत, अंग्रेजों ने निर्दिष्ट क्षेत्रों में बाहरी लोगों के प्रवेश और ठहरने को प्रतिबंधित करने हेतु नियम बनाए थे और इन क्षेत्रों में अन्य राज्यों से आने या रहने के लिए भारतीय नागरिकों को ‘इनर लाइन परमिट’ (ILP) लेना आवश्यक होता है? वर्तमान में यह प्रणाली कितने राज्यों में लागू है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. मिजोरम-असम सीमा विवाद के बारे में
  2. पूर्वोत्तर राज्यों की भौगोलिक स्थिति और सीमाएं
  3. 1873 का बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन एक्ट
  4. लुशाई हिल्स और कछार के मैदान की अवस्थिति

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


त्रिपुरा अगरवुड नीति

(Tripura agarwood policy)

हाल ही में, ‘त्रिपुरा अगरवुड नीति 2021’ का मसौदा जारी किया गया है।

  • इस नीति का उद्देश्य वर्ष 2025 तक राज्य में 2000 करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था विकसित करने हेतु राज्य के ‘अगरवुड’ (Agarwood) व्यवसाय को बढ़ावा देना है।
  • 100 करोड़ रुपये के परिव्यय की यह परियोजना, केंद्र सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ पहल के एक भाग के रूप में शुरू की गई है।

‘अगरवुड’ के बारे में:

  • अगरवुड वृक्ष (एक्विलारिया मैलाकेंसिस – Aquilaria malaccensis) के तेल को लिक्विड गोल्ड के नाम से भी जाना जाता है।
  • वैश्विक बाजार में एक लीटर ‘अगर तेल’ की कीमत 5 लाख रुपये है।
  • IUCN ने इस वृक्ष के लिए ‘गंभीर रूप से संकटापन्न श्रेणी’ (critically endangered category) में सूचीबद्ध किया है।
  • अगरवुड का वृक्ष, पूर्वोत्तर भारत, बांग्लादेश, भूटान और दक्षिण पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों की स्थानिक प्रजाति है।
  • यह एक सदाबहार पेड़ है, और यह 40 मीटर तक ऊंचाई में बढ़ सकता है।

 

एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स हेतु राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र

  • केंद्र सरकार द्वारा भारतीय और वैश्विक उद्योग की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, भारत में एक विश्व स्तरीय प्रतिभा पूल बनाने हेतु ‘एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स के लिए एक राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र’ (National Centre of Excellence for Animation, Visual Effects, Gaming & Comics) स्थापित करने का निर्णय लिया गया है।
  • यह ‘उत्कृष्टता केंद्र’, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बॉम्बे के सहयोग से स्थापित किया जाएगा।

 

84 कोस परिक्रमा मार्ग

केंद्र सरकार द्वारा अयोध्या के चारों ओर स्थित “84 कोस परिक्रमा मार्ग” को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने का निर्णय लिया गया है।

  • अयोध्या में की जाने वाली सभी तीन परिक्रमाएं – 5 कोस (लगभग 15 किमी), 14 कोस (42 किमी), और 84 कोस (लगभग 275 किमी) परिक्रमाएं – भगवान राम से जुड़ी हुई हैं।
  • वाल्मीकि रामायण के बाल कांड में उल्लखित प्रसंग के अनुसार, कि अयोध्या को पहले कोशलदेश के नाम से जाना जाता था और शुरू में यह 48 कोस में फैला था, और बाद में इसे 84 कोस तक बढ़ा दिया गया था।
  • “84 कोस परिक्रमा”, इसी कोशलदेश के चारो ओर की सीमा है, जो राम राज्य से जुड़े सभी महत्वपूर्ण स्थानों से होकर गुजरती है।
  • हिंदू मान्यता के अनुसार, ‘84 कोस परिक्रमा’ किसी व्यक्ति को 84 लाख योनियों (जीवन) को पूरा करने के दायित्व से मुक्त करती है। हिंदुओं का मानना ​​​​है कि अयोध्या की परिक्रमा की शुरुआत, लगभग 1 लाख साल पहले, भगवान राम के युग त्रेता युग से हुई थी।

 

KASEZ, भारत का पहला हरित औद्योगिक शहर

कांडला विशेष आर्थिक क्षेत्र (Kandla Special Economic Zone – KASEZ), औद्योगिक शहरों की श्रेणी में ‘IGBC ग्रीन सिटी रेटिंग’ के अंतर्गत प्लैटिनम रेटिंग प्राप्त करने वाला भारत का “पहला हरित औद्योगिक शहर” बन गया है। कांडला विशेष आर्थिक क्षेत्र, देश का सबसे पुराना निर्यात क्षेत्र है।

  • यह विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ), अपने हरित आवरण का विस्तार करने, 68 प्रजातियों के पेड़ उगाने और 28 किस्मों के पक्षियों को आकर्षित करने में कामयाब रहा है। यह क्षेत्र अतीत में लगभग बिना किसी वनस्पति के नमक युक्त खाली जमीन था।
  • इस क्षेत्र में अधिकांश पेड़ मियावाकी वनीकरण पद्धति से वर्ष 2019 के बाद लगाए गए हैं।

‘आईजीबीसी ग्रीन सिटीज रेटिंग प्रणाली’ एक स्वैच्छिक और आम सहमति पर आधारित कार्यक्रम है। शहरों में पर्यावरणीय संवहनीयता का समाधान करने के संदर्भ में, यह भारत में अपनी तरह की पहली रेटिंग है।

इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (IGBC), भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) का एक भाग है और इसका गठन वर्ष 2001 में किया गया था।


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