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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 26 July 2021

 

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-I

1. रामप्पा मंदिर को ‘विश्व धरोहर स्थल’ का दर्जा

2. चंद्रशेखर आजाद

 

सामान्य अध्ययन-II

1. ओसीआई कार्ड धारक

2. ‘पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन’ योजना

3. चीन और पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान की रणनीतियों के अनुरूप ‘संयुक्त कार्रवाई’ की रूपरेखा

4. चीन की वुल्फ वॉरियर डिप्लोमेसी

 

सामान्य अध्ययन-III

1. जल जीवन मिशन (JJM)

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. कृषि उत्पाद निर्यातकों की शीर्ष 10 सूची में भारत

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: भारतीय संस्कृति प्राचीन से आधुनिक काल तक कला रूपों, साहित्य और वास्तुकला के प्रमुख पहलुओं को कवर करेगी।

रामप्पा मंदिर को विश्व धरोहर स्थल’ का दर्जा


संदर्भ:

हाल ही में, ‘विश्व धरोहर समिति’ (World Heritage Committee – WHC) द्वारा तेलंगाना के वारंगल के पालमपेट में स्थित 13 वीं शताब्दी के ‘रामप्पा मंदिर’ (Ramappa Temple) को यूनेस्को के ‘विश्व धरोहर स्थल’ के रूप में घोषित किया गया है।

पृष्ठभूमि:

रामप्पा मंदिर को ‘विश्व धरोहर स्थल’ सूची में शामिल किए जाने से पहले, ‘अंतर्राष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल परिषद’ (International Council on Monuments and Sites- ICOMOS) द्वारा 2019 में इस मंदिर का पहली बार भ्रमण किया गया और इसमें नौ कमियों का उल्लेख किया था।

इस मंदिर को ‘विश्व धरोहर स्थल’ का दर्जा देने का विरोध करने वाला एकमात्र देश ‘नॉर्वे’ था।, ‘नॉर्वे’ ने इस कदम का विरोध करने के लिए ICOMOS के निष्कर्षों का हवाला दिया।

‘रामप्पा मंदिर’ के बारे में:

  1. ‘रामप्पा मंदिर’ का निर्माण 13 वीं शताब्दी में काकतीय राजा गणपतिदेव के सेनापति ‘राचेरला रुद्रय्या’ (Racherla Rudrayya) द्वारा करवाया गया था।
  2. मंदिर आधार “सैंडबॉक्स तकनीक” (Sandbox Technique) से तैयार किया गया है, इसका फर्श ग्रेनाइट और स्तंभ बेसाल्ट पत्थर से निर्मित किए गए हैं।
  3. मंदिर का निचला हिस्सा लाल बलुआ पत्थर से बना है, जबकि इसका सफेद रंग का ‘गोपुरम’ कम भार वाली हल्की ईंटों से निर्मित है। ये ईंटे कथित तौर पर पानी पर तैर सकती हैं।

‘सैंडबॉक्स तकनीक’ क्या होती है?

‘सैंडबॉक्स’, भवन का निर्माण करने से पहले तैयार की जाने वाली एक प्रकार की नींव होते हैं। सैंडबॉक्स तकनीक में, नींव तैयार करने के लिए खोदे गए गड्ढे को, ‘रेत के चूने’ (Sand Lime) व गुड़ तथा करक्काया (काले हरड़ फल) के मिश्रण से (पकड़ बनाने के लिए) भरा जाता है।

भूकंप जैसी घटनाएं होने पर, नींव में तैयार किए गए सैंडबॉक्स एक ‘तकिया / कुशन’ (Cushion) के रूप में कार्य करते हैं।

विश्व धरोहर समिति:

(World Heritage Committee)

‘विश्व धरोहर समिति’ / ‘वर्ल्ड हेरिटेज कमेटी’ की बैठक साल में एक बार होती है, और इस समिति में ‘अभिसमय के पक्षकार’ देशों से 21 प्रतिनिधि शामिल होते हैं। इन प्रतिनिधि सदस्यों का चुनाव ‘छह साल’ तक के लिए किया जाता है।

  1. इस समिति का मुख्य कार्य, ‘विश्व विरासत अभिसमय’ का कार्यान्वयन करना और ‘विश्व विरासत कोष’ से वित्तीय सहायता आवंटित करना है। किसी ‘स्थल’ को ‘विश्व विरासत सूची’ में शामिल किए जाने के संबंध में ‘विश्व धरोहर समिति’ का निर्णय अंतिम होता है।
  2. यह समिति, ‘विश्व विरासत सूची’ में शामिल स्थलों के संरक्षण की स्थिति पर रिपोर्ट की जांच करती है और इन स्थलों को ‘संकटापन्न विश्व विरासत’ (World Heritage in Danger) की सूची में रखने या हटाने के विषय पर निर्णय करती है।

‘विश्व धरोहर स्थलों’ का संरक्षण

‘संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन’ (United Nations Educational, Scientific and Cultural Organization- UNESCO) अर्थात ‘यूनेस्को’ का उद्देश्य, मानवता के लिए महत्वपूर्ण समझी जाने वाले, पूरे विश्व में सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत स्थलों की पहचान, सुरक्षा और संरक्षण को प्रोत्साहित करना है।

‘विश्व धरोहर स्थलों’ का संरक्षण, ‘विश्व सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण से संबंधित अभिसमय (Convention concerning the Protection of the World Cultural and Natural Heritage) नामक एक अंतरराष्ट्रीय संधि में सन्निहित है। इस संधि को यूनेस्को द्वारा वर्ष 1972 में अपनाया गया था।

‘विश्व धरोहर स्थल’ हेतु नामांकन प्रक्रिया:

  1. सबसे पहले, किसी देश द्वारा अपने महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और प्राकृतिक स्थलों को एक दस्तावेज में सूचीबद्ध किया जाता है, इस ‘दस्तावेज’ को ‘संभावित सूची’ (Tentative List) कहते है।
  2. इसके बाद, इस सूची से कुछ स्थलों का चयन करके इन्हें एक ‘नामांकन फ़ाइल’ (Nomination File) में रखा जाता है। फिर, ‘स्मारक एवं स्थलों पर अंतर्राष्ट्रीय परिषद’ तथा ‘विश्व संरक्षण संघ’ (World Conservation Union) द्वारा ‘नामांकन फ़ाइल’ में शामिल स्थलों का आंकलन किया जाता है।
  3. किसी भी देश के द्वारा, संभावित सूची में शामिल स्थलों से भिन्न स्थलों को नामित नहीं किया जा सकता है।
  4. आंकलन के पश्चात, ये संस्थाए ‘विश्व धरोहर समिति’ को अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करती हैं।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि 2004 के अंत तक, विश्व धरोहर स्थलों का चयन, छह सांस्कृतिक और चार प्राकृतिक मानदंडों के आधार पर किया जाता था। विश्व विरासत अभिसमय के कार्यान्वयन हेतु संशोधित परिचालन दिशानिर्देशों को लागू करने के पश्चात, वर्तमान में इसके लिए केवल दस मानदंड निर्धारित किए गए है। इन मानदंडों के बारे में बताइए?

क्या आप जानते हैं, कि अब तक केवल तीन स्थलों को ही, विश्व विरासत सूची से हटाया गया है? ये कौन से स्थल हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘विश्व धरोहर स्थल’ के बारे में
  2. चयन मानदंड
  3. ‘विश्व धरोहर समिति’ (WHC) के बारे में
  4. UNESCO के बारे में
  5. ICOMOS के बारे में

मेंस लिंक:

‘विश्व धरोहर स्थलों’ को मान्यता दिए जाने की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

चंद्रशेखर आजाद


संदर्भ:

23 जुलाई को ‘चंद्रशेखर आजाद’ की जयंती मनाई गई।

‘चंद्रशेखर आजाद’ के बारे में:

  • इनका जन्म 23 जुलाई, 1906 को वर्तमान मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के भावरा में हुआ था।
  • 15 साल की उम्र में ही ‘चंद्रशेखर आजाद’ असहयोग आंदोलन में कूद पड़े।
  • 1922 में गांधी जी द्वारा ‘असहयोग आंदोलन’ को समाप्त करने के बाद, चंद्रशेखर, ‘हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन’ (HRA) में शामिल हो गए।
  • उन्होंने 1928 में ‘हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन’ को ‘हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी’ (HSRA) के रूप में पुनर्गठित किया गया था।
  • आजाद ने वर्ष 1925 के काकोरी षडयंत्र में भाग लिया था।
  • 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद के आजाद पार्क में उनका निधन हो गया।
  • आजाद, 1926 में वाइसराय की ट्रेन को उड़ाने का प्रयास और 1928 में जे.पी. सॉन्डर्स हत्याकांड में भी शामिल थे। सॉन्डर्स की हत्या, लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने के लिए की गई थी।

उन्हें “आजाद” क्यों कहा जाता है?

‘असहयोग आंदोलन’ में भाग लेने के कारण ब्रिटिश पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने पर, उन्होंने गर्व से अपना नाम ‘आजाद’, अपने पिता का नाम ‘स्वतंत्रता’ और अपने निवास स्थान को ‘जेल’ बताया। तभी से उनके साथ ‘आजाद’ नाम जुड़ गया।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं, कि 19 दिसंबर को काकोरी षडयंत्र में शामिल तीन क्रांतिकारियों की पुण्यतिथि के रूप में मनाया जाता है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. चंद्रशेखर आजाद के बारे में
  2. भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में उनका योगदान
  3. वह किन संगठनों से जुड़े हुए थे?
  4. काकोरी षडयंत्र केस के बारे में

स्रोत: पीआईबी।

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

ओसीआई कार्ड धारक


(OCI Card Holders)

संदर्भ:

हाल ही में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है, कि पति या पत्नी में से किसी एक के ‘प्रवासी भारतीय नागरिकता’ (Overseas Citizenship of India OCI) कार्ड आवेदन पर कार्यवाही करने के लिए, ‘विदेशी व्यक्ति क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय’ (Foreigners Regional Registration Office FRRO) पति-पत्नी दोनों को भौतिक या वर्चुअल रूप से उपस्थित होने पर जोर नहीं दे सकता है।

संबंधित प्रकरण:

उच्च न्यायालय ने यह आदेश एक ईरानी महिला द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिका में महिला ने अदालत से ‘विदेशी व्यक्ति क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय’ (FRRO) को उसका ओसीआई कार्ड आवेदन को स्वीकार करने हेतु निर्देश देने की मांग की गई थी। यह महिला अपने अपने पति, एक भारतीय नागरिक, के साथ संबंधों में खटास आने के बाद बेंगलुरु में अलग रह रही है।

प्रवासी भारतीय नागरिक’ (OCI) कार्डधारक कौन होते हैं?

  • भारत सरकार द्वारा अगस्त, 2005 में नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन करते हुए प्रवासी भारतीय नागरिकता (Overseas Citizenship of India-OCI) योजना आरंभ की गई थी।
  • भारत सरकार द्वारा 09 जनवरी 2015 को भारतीय मूल के नागरिक (PIO) कार्ड को समाप्त करते हुए इसे ‘प्रवासी भारतीय नागरिक’ (OCI) कार्ड के साथ संयुक्त कर दिया गया।

पात्रता:

भारत सरकार द्वारा निम्नलिखित श्रेणियों के विदेशी नागरिकों को प्रवासी भारतीय नागरिकता कार्ड हेतु आवेदन करने की अनुमति दी गयी है:

  1. जो दूसरे देश का नागरिक है, किन्तु संविधान के लागू होने के समय, 26 जनवरी 1950 या उसके पश्चात् किसी समय भारत का नागरिक थे; या
  2. जो दूसरे देश का नागरिक है, किन्तु 26 जनवरी 1950 को भारत का नागरिक होने के लिए पात्र थे; या
  3. जो दूसरे देश का नागरिक है, किन्तु ऐसे राज्यक्षेत्र से संबद्ध थे, जो 15 अगस्त, 1947 के पश्चात् भारत का भाग बन गया था; या
  4. जो किसी ऐसे नागरिक का पुत्र/पुत्री या पौत्र/पौत्री, दौहित्र/दौहित्री या प्रपौत्र/प्रपौत्री, प्रदौहित्र/प्रदौहित्री है; या
  5. किसी ऐसे व्यक्ति को, जो खंड (क) में वर्णित किसी व्यक्ति का अप्राप्तवय पुत्र/पुत्री है।

अपवाद:

  • ‘प्रवासी भारतीय नागरिक’ (OCI) कार्ड के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति के पास किसी अन्य देश का वैध पासपोर्ट होना अनिवार्य है।
  • ऐसे व्यक्ति जिनके पास किसी अन्य देश की नागरिकता नहीं है, वे ‘प्रवासी भारतीय नागरिक’ का दर्जा प्राप्त करने के पात्र नहीं हैं।
  • ऐसे व्यक्ति जिनके माता-पिता या दादा-दादी पाकिस्तान और बांग्लादेश के नागरिक हैं, वे प्रवासी भारतीय नागरिक’ कार्ड हेतु आवेदन करने के पात्र नहीं हैं।

ओसीआई कार्डधारकों के लिए लाभ:

  1. भारत आने के लिए जीवनपर्यंत वीजा।
  2. प्रवास के दौरान विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी (FRRO) या विदेशी पंजीकरण अधिकारी (FRO) के पास पंजीकरण करने की आवश्यकता नहीं होती है।
  3. अनिवासी भारतीयों (NRI) को मिलने वाली आर्थिक, वित्तीय, शैक्षिक, सुविधा उपलब्ध होती है, किंतु कृषि, संपत्ति या बागान खरीदने की छूट नहीं होती है।
  4. भारतीय बच्चों के अंतर-देशीय गोद लेने के संबंध में अनिवासी भारतीयों के समान व्यवहार।
  5. राष्ट्रीय स्मारकों में प्रवेश शुल्क, डॉक्टरों, दंत चिकित्सकों, नर्सों, अधिवक्ताओं, वास्तुकारों, चार्टर्ड एकाउंटेंट और फार्मासिस्ट जैसे व्यवसाय अपनाने पर अनिवासी भारतीयों के समान व्यवहार।
  6. अखिल भारतीय प्री-मेडिकल परीक्षाओं एवं इस तरह की अन्य परीक्षाओं में भाग लेने के लिए अनिवासी भारतीयों समान व्यवहार।
  7. भारतीय घरेलू क्षेत्रों में वायु-यातायात के मामलों में भारतीय नागरिकों के समान व्यवहार।
  8. भारत के राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों में प्रवेश हेतु भारतीयों के लिए समान प्रवेश शुल्क।
  9. प्रवासी भारतीय नागरिक (OCI) बुकलेट का उपयोग सेवाओं का लाभ उठाने के लिए पहचान के रूप में किया जा सकता है। OCI कार्ड को स्थानीय पता और एक शपथपत्र लगाकर आवासीय प्रमाण के रूप में संलग्न किया जा सकता है।

ओसीआई कार्ड धारकों पर प्रतिबंध:

  1. वोट देने का अधिकार नहीं है।
  2. किसी भी सार्वजनिक सेवा / सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने के पात्र नहीं है।
  3. प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, उप-प्रधान, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश और उच्च न्यायालय, संसद के सदस्य या राज्य विधान सभा या परिषद के सदस्य – के पद पर नियुक्त का अधिकार नहीं होता है।
  4. कृषि संपत्ति को नहीं खरीद सकते हैं।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

भारत का संविधान, किसी व्यक्ति को एक साथ, भारतीय नागरिकता और किसी अन्य देश की नागरिकता रखने की अनुमति नहीं देता है। क्या आप जानते हैं, किन देशों में ‘दोहरी नागरिकता’ रखने की अनुमति दी गई है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. नागरिक की परिभाषा।
  2. POI बनाम OCI बनाम NRI
  3. नागरिकता प्रदान करने और निरस्त करने की शक्ति?
  4. भारत में दोहरी नागरिकता।
  5. ओसीआई कार्ड धारकों के लिए चुनाव में वोट देने और चुनाव लड़ने का अधिकार।
  6. क्या ओसीआई धारक कृषि भूमि खरीद सकते हैं?
  7. ओसीआई कार्ड किसे जारी नहीं किए जा सकते हैं?

मेंस लिंक:

भारत के प्रवासी नागरिक कौन होते हैं? ओसीआई कार्ड धारकों के लिए क्या लाभ उपलब्ध हैं? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन- कोविड से प्रभावित बच्चों का सशक्तिकरण


संदर्भ:

हाल ही में, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा ‘पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रेन’ (PM CARES for Children) योजना के तहत आवेदन जमा करने तथा सहायता हासिल करने योग्य पात्र बच्चों की पहचान करने की सुविधा के लिए वेब-आधारित पोर्टल pmcaresforchildren.in लॉन्च किया गया है।

‘पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन’ योजना के बारे में:

यह योजना कोविड से प्रभावित बच्चों की सहायता और सशक्तिकरण के लिए शुरू की गई है।

पात्रता: कोविड 19 के कारण माता-पिता दोनों या माता-पिता में से किसी जीवित बचे अभिभावक या कानूनी अभिभावक/दत्तक माता-पिता को खोने वाले सभी बच्चों को ‘पीएम-केयर्स फॉर चिल्ड्रन’ योजना के तहत सहायता दी जाएगी।

इस योजना के प्रमुख बिंदु:

  1. बच्चे के नाम पर सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट): 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले प्रत्येक बच्चे के लिए 10 लाख रुपये का एक कोष गठित किया जाएगा।
  2. स्कूली शिक्षा: 10 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए नजदीकी केंद्रीय विद्यालय या निजी स्कूल में डे स्कॉलर के रूप में प्रवेश दिलाया जाएगा।
  3. स्कूली शिक्षा: 11 -18 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए केंद्र सरकार के किसी भी आवासीय विद्यालय जैसेकि सैनिक स्कूल, नवोदय विद्यालय आदि में प्रवेश दिलाया जाएगा।
  4. उच्च शिक्षा के लिए सहायता: मौजूदा शिक्षा ऋण के मानदंडों के अनुसार भारत में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों / उच्च शिक्षा के लिए शिक्षा ऋण दिलाने में बच्चे की सहायता की जाएगी।
  5. स्वास्थ्य बीमा: ऐसे सभी बच्चों को ‘आयुष्मान भारत योजना’ (PM-JAY) के तहत लाभार्थी के रूप में नामांकित किया जाएगा, जिसमें 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर होगा।

इन उपायों की आवश्यकता:

  • भारत, वर्तमान में कोविड-19 महामारी की दूसरी प्रचंड लहर से जूझ रहा है और इस महामारी के कारण कई बच्चों के माता-पिता की मृत्यु होने के मामलों में वृद्धि हो रही है।
  • इसके साथ ही, इन बच्चों को गोद लेने की आड़ में बाल तस्करी की आशंका भी बढ़ गई है।
  • कोविड-19 के कारण लागू लॉकडाउन के दौरान ‘बाल विवाह’ संबंधी मामलों में भी वृद्धि हुई है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

‘पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन’ (PMNRF) योजना ‘पीएम केयर्स’ (PM CARES) से किस प्रकार भिन्न है?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘सार्वजनिक खाता’ क्या होता है?
  2. PM CARES फंड का संचालन कौन करता है?
  3. किन संगठनों को आरटीआई अधिनियम के दायरे से छूट दी गई है?
  4. भारत की समेकित निधि क्या है?
  5. चैरिटेबल ट्रस्ट क्या है?
  6. पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन- कोविड प्रभावित बच्चों का सशक्तिकरण- पात्रता और लाभ।

मेंस लिंक:

PM CARES फंड को आरटीआई अधिनियम के दायरे में क्यों लाया जाना चाहिए? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

चीन और पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान की रणनीतियों के अनुरूप संयुक्त कार्रवाईकी रूपरेखा


संदर्भ:

अफगानिस्तान में बदलते हालातों के बीच, चीन और पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान के साथ घनिष्ठ सहयोग और मिलकर काम करने की घोषणा की गई है।

पृष्ठभूमि:

चीन और पाकिस्तान दोनों ही, अफगानिस्तान के पड़ोसी देश हैं और अफगानिस्तान के हालातों से प्रत्यक्ष रूप से सर्वाधिक प्रभावित हो सकते हैं। अतः दोनों देशों के लिए, अफगानिस्तान में बदल रहे हालातों से निपटने के लिए, परस्पर सहयोग को मजबूत करना अति आवश्यक है।

इस हेतु, इन दोनों देशों ने अफगानिस्तान में काम करने के लिए एक पांच सूत्री संयुक्त योजना की रूपरेखा तैयार की है। इसमें निम्नलिखित बिंदु भी शामिल किए गए है:

  1. युद्ध के विस्तार से बचना और अफगानिस्तान को विस्तृत गृहयुद्ध में गिरने से रोकना।
  2. काबुल और तालिबान के बीच ‘अंतः-अफगान वार्ता’ (intra-Afghan negotiations) को बढ़ावा देना तथा ‘एक व्यापक और समावेशी राजनीतिक ढांचा’ स्थापित करना।
  3. आतंकवादी ताकतों का डटकर मुकाबला करना।
  4. अफगानिस्तान के पड़ोसी देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना और उनके मध्य आपसी सहयोग हेतु एक मंच तैयार करने की संभवना तलाश करना।
  5. अफगान मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिलकर काम करना।

अफगानिस्तान के वर्तमान हालातों की पृष्ठभूमि:

हाल ही में अमेरिका द्वारा अफगानिस्तान से अपने सैनिकों की वापसी की घोषणा करने के बाद से तालिबान ने देश कई भागों पर अपना कब्ज़ा करना शुरू कर दिया है।

विश्व के कई देशों द्वारा जल्दबाजी में अमेरिकी सैनिकों की वापसी की आलोचना की गयी है, इन देशों का कहना है कि, अमेरिका द्वारा न तो आतंकवाद से लड़ने के उद्देश्य को पूरा किया गया है, और न ही अफगानिस्तान में शांति स्थापित की जा सकी है। किंतु अपने सैनिकों को वापस बुलाकर, अफगानिस्तान में सुरक्षा का एक नया ब्लैक होल जरूर बना दिया है।

अफगानिस्तान में अब तक का घटनाक्रम:

  • 9/11 के हमलों के एक महीने बाद, अमेरिका द्वारा ‘ऑपरेशन एंड्योरिंग फ्रीडम’ (Operation Enduring Freedom) के तहत अफगानिस्तान के खिलाफ हवाई हमले शुरू किए गए।
  • इन हमलों के बाद, नाटो गठबंधन के सैन्य-बलों द्वारा अफगानिस्तान के साथ युद्ध की घोषणा की गई।
  • अमेरिका ने तालिबान शासन को उखाड़ फेंका और अफगानिस्तान में एक संक्रमणकालीन सरकार की स्थापना की।
  • अब, जुलाई 2020 में, 20 साल के लंबे युद्ध के बाद अमेरिकी सैनिकों ने, अफगानिस्तान के सबसे बड़े एयरबेस को खाली कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप देश में अमेरिकी सैन्य अभियान, प्रभावी ढंग से समाप्त हो गए हैं।

भारत के लिए आगे की राह:

  • वर्तमान में भारत की अफगान नीति एक महत्पूर्ण चौराहे पर आ पहुँची है; अफगानिस्तान में अपनी नागरिक संपत्तियों की रक्षा करने के साथ-साथ, देश में और उसके आसपास चल रहे ‘प्रधान खेल’ में प्रासंगिक बने रहने हेतु, भारत को अपनी अफगानिस्तान नीति को मौलिक रूप से रीसेट करना होगा।
  • भारत को, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, अपने राष्ट्रीय हित में तालिबान के साथ ‘खुली वार्ता’ शुरू करनी चाहिए। झिझकने वाले, पिछले रास्ते से होने वाली आधे-अधूरी वार्ताओं का समय समाप्त हो गया है।
  • यदि भारत, कम से कम अभी अफगानिस्तान में सक्रिय नहीं हुआ, तो रूस, ईरान, पाकिस्तान और चीन अफगानिस्तान के राजनीतिक और भू-राजनीतिक भाग्य के निर्माता के रूप में उभरेंगे, जो आगे आने वाले निश्चित रूप से भारतीय हितों के लिए हानिकारक होगा।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

भारत द्वारा अफगानिस्तान की ‘जरांज- डेलाराम राजमार्ग परियोजना’ और ‘सलमा बांध’ जैसी कुछ परियोजनाओं में निवेश किया गया है। अफगानिस्तान में भारत द्वारा निवेशित अन्य परियोजनाओं के बारे में जानिए।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. भारत की अफगान परियोजनाओं के बारे में
  2. INSTC के बारे में
  3. भारत से अफगानिस्तान के लिए उपलब्ध रास्ते

मेंस लिंक:

अमेरिकी वापसी के भारत-अफगान संबंधों पर पड़ने वाले प्रभाव की विवेचना कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

चीन की वुल्फ वॉरियर डिप्लोमेसी


(China’s wolf warrior diplomacy)

संदर्भ:

‘शी जिनपिंग’ के समय में, चीन के हठधर्मी नए राजनयिक दृष्टिकोण को “वुल्फ वॉरियर डिप्लोमेसी” (wolf warrior diplomacy) कहा जाने लगा है। यह चीन के हितों को आगे बढ़ाने में एक ‘शक्तिशाली हाव-भाव’ से स्पष्ट होती है।

‘वुल्फ वॉरियर कूटनीति’ या दृष्टिकोण से क्या तात्पर्य है?

‘वुल्फ वॉरियर कूटनीति’ (wolf warrior diplomacy), चीनी कूटनीति का यह नामकरण प्रसिद्ध चीनी फिल्मों के नाम पर किया गया है, और यह चीन के राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए, किसी चीनी राजनयिक (Chinese diplomat) की हमलावर प्रवृत्ति, अक्सर टकराव के तरीकों की अभिव्यक्त करती है।

यह, चीनी कूटनीति के रूढ़िवादी, अप्रतिरोधी और कम- हठधर्मी दृष्टिकोण से परिवर्तित होकर मुखर, अति-सक्रिय और हाई-प्रोफाइल में बदलने की परिकल्पना की पुष्टि करती है।

उदाहरण:

पिछले एक साल के दौरान, चीनी विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राज्य अमेरिका, भारत, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया हुआ है।

  • पिछले साल अप्रैल में, एक चीनी तटरक्षक जहाज ने कथित तौर पर पैरासेल द्वीप समूह नजदीक एक वियतनामी मछली पकड़ने वाले ट्रॉलर को डुबो दिया था। जब वियतनाम ने विरोध किया, तो चीनी विदेश मंत्रालय ने यह कहकर जवाब दिया कि इस क्षेत्र में वियतनाम के दावा ‘गैर-कानूनी’ है।
  • फिर, चीन ने दक्षिण चीन सागर में 80 द्वीपों, रीफ़स, सीमाउंट, शोल और कटकों का नामकरण करने की घोषणा की, जिससे इन संरचनाओ के अन्य दावेदारों द्वारा क्रोध-युक्त विरोध का प्रदर्शन किया गया।
  • चीन ने भारत में भी भी कई जगहों पर घुसने का प्रयास किया है।

चीन द्वारा ‘वुल्फ वॉरियर कूटनीति’ अपनाने का क्या कारण है?

  • उभरता राष्ट्रवाद: वर्ष 2010 में, चीन की जीडीपी ने, विश्व के दूसरे सबसे बड़े देश के रूप में ‘जापान’ को पछाड़ दिया था। इसके बाद से, चीनियों का आत्मविश्वास काफी बढ़ गया है और चीन की विदेश नीति अधिक मुखर हो गई है।
  • चीन, एक प्रमुख शक्ति के रूप में: चीन द्वारा लगातार किए जा रहे हालिया कूटनीतिक हमले भी, चीन को कोविड-19 के खिलाफ वैश्विक लड़ाई का नेतृत्व कर रही एक प्रमुख शक्ति के रूप में पेश करने के आधिकारिक प्रयास का हिस्सा है। महामारी-संकट के दौरान, चीन की छवि, शुरुआती चरण में प्रकोप से निपटने के गोलमाल तरीके अपनाने के कारण खराब हुई थी।
  • अपनी जोरदार और महत्वाकांक्षी ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ और ‘मैरीटाइम सिल्क रोड’ परियोजनाओं के साथ, चीन ने भारत के पड़ोसी देशों पर अपना प्रभाव मजबूत कर लिया है। भूटान को छोड़कर भारत के लगभग सभी पड़ोसी देशों ने इन परियोजनाओं में शामिल होने में गहरी दिलचस्पी दिखाई है।

समग्र रूप से यह दृष्टिकोण कितना सफल रहा है?

  1. यह ‘वुल्फ वॉरियर डिप्लोमेसी’ चीन की विदेश नीति को पहले से ही नुकसान पहुंचा रही है और इसकी वजह से कई नकारात्मक ‘पुशबैक’ सामने आ रहे हैं। जैसेकि चीन के खिलाफ, ऑस्ट्रेलिया द्वारा कोरोनोवायरस की उत्पत्ति के स्रोत की स्वतंत्र जांच कराए जाने की मांग की गयी है।
  2. चीन की सॉफ्ट पावर, वैश्विक स्तर पर कमजोर है; चीन का यह हमलावर रवैया, इसकी वैश्विक छवि को और नुकसान पहुंचाएगा।
  3. चीन-भारत सीमा पर महत्वपूर्ण सैन्य दबाव सहित ‘वुल्फ वॉरियर डिप्लोमेसी’ की वजह से, भारत, अमेरिका के काफी नजदीक पहुँच गया है, और चीन की एक अरब से अधिक आबादी वाली अर्थव्यवस्था से अलग होता जा रहा है।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

जल जीवन मिशन (JJM)


संदर्भ:

‘जल जीवन मिशन’ के तहत, 2 अक्टूबर, 2020 को, सरकारी स्कूलों और आंगनवाड़ियों को नल का पानी उपलब्ध कराने के लिए 100 दिवसीय अभियान शुरू किया गया था।

  • हालांकि, एक तिहाई से अधिक सरकारी स्कूलों और आंगनवाड़ियों में अभी भी नल का पानी नहीं उपलब्ध है।
  • इसके अलावा, विभिन्न राज्यों के मध्य व्यापक तौर पर असमानता है। इस तथ्य के बावजूद, कि नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा पहले ही ‘जल जीवन मिशन’ के तहत 100% कवरेज हासिल कर लिया गया है, किंतु कुछ पिछड़े राज्यों की वजह से राष्ट्रीय औसत नीचे जा रहा है।

पृष्ठभूमि:

‘जल जीवन अभियान’ का उद्देश्य शत-प्रतिशत कवरेज हासिल करना और हर स्कूल, आंगनवाड़ी और आश्रमशाला या आवासीय आदिवासी स्कूल में, पीने और खाना पकाने हेतु पीने योग्य पानी की आपूर्ति हेतु तथा शौचालय में हाथ धोने हेतु नल का पानी उपलब्ध कराना है।

 

‘जल जीवन मिशन’ के बारे में:

  • ‘जल जीवन मिशन’ के तहत वर्ष 2024 तक सभी ग्रामीण घरों में, कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (Functional House Tap Connections- FHTC) के माध्यम से प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 55 लीटर जल की आपूर्ति की परिकल्पना की गई है।
  • यह अभियान, जल शक्ति मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।

इसके अंतर्गत निम्नलिखित कार्यो को शामिल किया गया है:

  1. गुणवत्ता प्रभावित क्षेत्रों, सूखा प्रवण और रेगिस्तानी क्षेत्रों के गांवों, सांसद आदर्श ग्राम योजना (SAGY) के अंतर्गत आने वाले गांवों, आदि में कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) लगाए जाने को प्राथमिकता देना।
  2. स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों, ग्राम पंचायत भवनों, स्वास्थ्य केंद्रों, कल्याण केंद्रों और सामुदायिक भवनों के लिए कार्यात्मक नल कनेक्शन की सुविधा प्रदान करना।
  3. जल-गुणवत्ता की समस्या वाले स्थानों को प्रदूषण-मुक्त करने के लिए तकनीकी हस्तक्षेप।

कार्यान्वयन:

  • ‘जल जीवन मिशन’, जल के प्रति सामुदायिक दृष्टिकोण पर आधारित है और इसके तहत मिशन के प्रमुख घटक के रूप में व्यापक जानकारी, शिक्षा और संवाद को शामिल किया गया है।
  • इस मिशन का उद्देश्य, जल के लिए एक जन-आंदोलन तैयार करना है, जिसके द्वारा यह हर किसी की प्राथमिकता में शामिल हो जाए।
  • इस मिशन के लिए, केंद्र और राज्यों द्वारा, हिमालयी और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 90:10; अन्य राज्यों के लिए 50:50 के अनुपात में; और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए केंद्र सरकार द्वारा 100% वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

शहरी परिवारों को जलापूर्ति प्रदान करने के लिए भी इसी तरह का एक मिशन शुरू किया गया है। इस मिशन को कब लॉन्च किया गया और इसके क्या उद्देश्य हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘जल जीवन मिशन’ का लक्ष्य
  2. कार्यान्वयन
  3. राशि आवंटन

मेंस लिंक:

‘जल जीवन मिशन’ के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


कृषि उत्पाद निर्यातकों की शीर्ष 10 सूची में भारत

विश्व व्यापार संगठन (WTO) द्वारा पिछले 25 वर्षों में विश्व कृषि व्यापार के रुझानों पर जारी एक रिपोर्ट के अनुसार:

  • भारत, वर्ष 2019 में कृषि उत्पाद निर्यात करने वाले देशों की शीर्ष 10 सूची में शामिल हो गया है।
  • भारत और मेक्सिको की वैश्विक कृषि निर्यात में क्रमशः 3.1% और 3.4% हिस्सेदारी है, और इसके साथ ही इन दोनों देशों ने, विश्व के सबसे बड़े निर्यातक के रूप में न्यूजीलैंड (9वें) और मलेशिया (7वें) को प्रतिस्थापित कर दिया है।
  • वर्ष 2019 में, भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा कपास निर्यातक (7.6%) रहा और साथ ही चौथा सबसे बड़ा आयातक (10%) भी रहा था।
  • हालांकि, भारत विश्व कृषि निर्यात में ‘मूल्य वर्धन करने वाले योगदानकर्ता’ के रूप में पिछड़ गया है।
  • वर्ष 1995 में अमेरिका (22.2%) विश्व कृषि निर्यात सूची में शीर्ष स्थान पर था किंतु वर्ष 2019 में यूरोपीय संघ (16.1%) ने इसे पीछे छोड़ दिया है।
  • चीन का वर्ष 1995 में विश्व कृषि निर्यात सूची में छठा स्थान (4%) था, और यह वर्ष 2019 में चौथे स्थान (5.4%) पर पहुँच गया है।
  • वर्ष 1995 और 2019 में, वैश्विक स्तर पर शीर्ष 10 निर्यातकों का कुल कृषि निर्यात में 96% से अधिक हिस्सा रहा है।

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