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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 6 July 2021

 

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

 1. भारत का महाधिवक्ता

2. निपुण भारत कार्यक्रम

3. चीन को मलेरिया मुक्त होने का प्रमाणपत्र

 

सामान्य अध्ययन-III

1. एंटी-मिथेनोजेनिक फीड सप्लीमेंट: हरित धारा

2. मंगल ग्रह पर ‘विच्छिन्न ज्योति पुंज’

3. नए आईटी नियम

4. आईटी अधिनियम की धारा 66A

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. बिहार का ‘वाल्मीकि टाइगर रिजर्व’ (VTR)

2. ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC)

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्द्ध-न्यायिक निकाय।

 भारत का महाधिवक्ता


(Solicitor General)

संदर्भ:

हाल ही में, तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल द्वारा राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद से मुलाकात कर “आपराधिक कदाचार” और “घोर अनुपयुक्तता” के आधार ‘भारत के महाधिवक्ता’ / सॉलिसिटर जनरल (Solicitor General of India) के रूप में ‘तुषार मेहता’ को हटाए जाने की मांग की गयी। इस प्रतिनिधिमंडल ने महाधिवक्ता तुषार मेहता द्वारा भाजपा विधायक सुवेंदु अधिकारी के साथ बैठक करने का आरोप लगाया।

संबंधित प्रकरण:

सुवेंदु अधिकारी 2016 के ‘नारदा टेप मामले’ (Narada tapes case) में एक आरोपी हैं, और मि. मेहता इस मामले में टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ सीबीआई की जांच में सर्वोच्च न्यायालय और कलकत्ता उच्च न्यायालय में एजेंसी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

  1. विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के सर्वोच्च सेवारत विधि अधिकारियों में से एक, सॉलिसिटर जनरल, जिसे सीबीआई के लिए विशेष लोक अभियोजक के रूप में भी नियुक्त किया गया है, तथा एक आरोपी व्यक्ति, जिसकी जांच उसी एजेंसी द्वारा की जा रही है, के बीच बैठक अनुपयुक्तता संबंधी अत्यंत गंभीर संदेह पैदा करती है।
  2. साथ ही, इस तरह की बैठकें ‘आपराधिक न्याय प्रणाली’ का मजाक बनाती हैं और न्यायपालिका में आम आदमी के विश्वास को नष्ट करने का काम करेंगी।

‘महाधिवक्ता’ / सॉलिसिटर जनरल- प्रमुख तथ्य:

  1. ‘महाधिवक्ता’ देश का दूसरा सबसे बड़ा विधि अधिकारी होता है।
  2. वह, देश के सर्वोच्च विधि अधिकारी अर्थात ‘भारत के महान्यायवादी’ (अटॉर्नी जनरल) का अधीनस्थ होता है और उसके अधीन कार्य करता है।
  3. वह कानूनी मामलों में सरकार को परामर्श भी देता है।
  4. ‘महाधिवक्ता’ की नियुक्ति, प्रधान मंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की ‘नियुक्ति समिति’ द्वारा तीन साल की अवधि के लिए की जाती है।

कर्तव्य:

  1. भारत सरकार द्वारा निर्दिष्ट या सौंपे गए, विधिक मामलों पर भारत सरकार को परामर्श देना, और विधिक प्रवृत्ति के निर्दिष्ट या सौंपे गए अन्य कर्तव्यों का पालन करना।
  2. जिन मामलों (मुकदमों, रिट याचिकाओं, अपील और अन्य कार्यवाहियों सहित) में भारत सरकार एक पक्षकार के रूप में संबंधित है, उन मामलों में भारत सरकार की ओर से, जब भी आवश्यक हो, उच्चतम न्यायालय या किसी उच्च न्यायालय में पेश होना।
  3. संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के लिए संदर्भित किसी भी मामले में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करना।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

अटॉर्नी जनरल के पद और कर्तव्य, संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार गठित एवं निर्धारित किए गए है, जबकि सॉलिसिटर जनरल और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल का पद संविधानकी बजाय ‘विधि अधिकारी (सेवा शर्तें) नियम, 1987 (Law Officers (Conditions of Service) Rules, 1987) द्वारा प्रशासित होता है। इस बारे में अधिक जानने हेतु पढ़ें:

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. सॉलिसिटर जनरल के बारे में
  2. कर्तव्य
  3. नियुक्ति और पद-मुक्ति
  4. महान्यायवादी बनाम महाधिवक्ता

मेंस लिंक:

भारत के महान्यायवादी की भूमिकाओं और कार्यों की विवेचना कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

निपुण भारत कार्यक्रम


संदर्भ:

हाल ही में, केंद्रीय शिक्षा मंत्री द्वारा ‘निपुण भारत कार्यक्रम’ (NIPUN Bharat Programme) का शुभारंभ किया गया।

कार्यक्रम के बारे में:

निपुण कार्यक्रम का अर्थ ‘समझ के साथ पढ़ने तथा संख्या गणना में निपुणता हेतु राष्ट्रीय पहल’ (National Initiative for Proficiency in Reading with Understanding and Numeracy NIPUN) है।

  • यह कार्यक्रम, शिक्षा मंत्रालय द्वारा शुरू की गई एक पहल है।
  • निपुण भारत को स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग द्वारा क्रियान्वित किया जाएगा।
  • लक्ष्य: इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है, कि देश का प्रत्येक बच्चा वर्ष 2026-27 तक ग्रेड-3 के अंत तक मूलभूत साक्षरता और संख्या-गणना कौशल आवश्यक रूप से प्राप्त कर सके।
  • यह कार्यक्रम, 3 से 9 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों की सीखने संबंधी जरूरतों को पूरा करेगा।

कार्यान्वयन:

इस पहल को लागू करने के लिए, केंद्र द्वारा प्रायोजित समग्र शिक्षा योजना के तहत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राष्ट्रीय-राज्य-जिला-ब्लॉक-स्कूल स्तर पर एक पांच स्तरीय क्रियान्वन तंत्र स्थापित किया जाएगा।

कार्यक्रम के केंद्र बिंदु:

  1. मिशन के तहत, बच्चे के शारीरिक और सामाजिक-भावनात्मक विकास, साक्षरता और संख्यात्मक विकास, संज्ञानात्मक विकास, जीवन कौशल आदि जैसे परस्पर संबंधित और परस्पर निर्भर विकास के विभिन्न क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
  2. निपुण भारत कार्यक्रम में, अपने स्कूलों, शिक्षकों, माता-पिता और समुदायों के साथ-साथ छात्रों को हर संभव तरीके से, बच्चों की वास्तविक क्षमता प्राप्त करने और देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मदद करने के लिए समर्थन और प्रोत्साहित करने की परिकल्पना की गई है।

निपुण भारत मिशन के प्रमुख घटक और अपेक्षित परिणाम:

  1. प्राथमिक कौशल, बच्चों को कक्षा में रखने में सक्षम होते हैं जिससे बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों को पढाई जारी रखने के लिए रोका जा सकता है और प्राथमिक से उच्च प्राथमिक व माध्यमिक चरणों में पढ़ाई छोड़ने की दर में कमी आती है।
  2. गतिविधि आधारित शिक्षण और सीखने के अनुकूल माहौल से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा।
  3. खिलौना आधारित और अनुभवात्मक शिक्षण जैसी नवीन अभिनव अध्यापन विधियों का उपयोग कक्षा-कार्यों में किया जाएगा, जिससे शिक्षण एक आनंदमय और आकर्षक गतिविधि बना रहेगा।
  4. शिक्षकों का गहन क्षमता निर्माण, उनके लिए सशक्त बनाएगा और शिक्ष्ण विधि चुनने के लिए अधिक स्वायत्तता प्रदान करेगा।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप शिक्षा से संबंधित ‘सतत विकास लक्ष्यों’ के बारे में जानते हैं? सतत विकास लक्ष्‍य 4 – गुणवत्तापूर्ण शिक्षा (un.org)

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. निपुण भारत कार्यक्रम के बारे में
  2. प्रमुख विशेषताएं
  3. कार्यान्वयन

मेंस लिंक:

निपुण भारत कार्यक्रम के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी।

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

चीन को मलेरिया मुक्त होने का प्रमाणपत्र


संदर्भ:

70 साल के प्रयासों के बाद, चीन को ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ (WHO) द्वारा मलेरिया-मुक्त होने का प्रमाण पत्र दिया गया है। यह 1940 के दशक में हर साल 30 मिलियन मलेरिया मामले दर्ज करने वाले देश के लिए एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।

  • ‘WHO पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र’ में चीन पहला देश है जिसे तीन दशकों से ज्यादा समय में मलेरिया मुक्त प्रमाणन से सम्मानित किया गया है।
  • इस दर्जे को हासिल करने वाले ‘WHO पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र’ के अन्य देशों में ऑस्ट्रेलिया (1981), सिंगापुर (1982) और ब्रुनेई दारुस्सलाम (1987) शामिल हैं।
  • विश्व स्तर पर, 40 देशों और क्षेत्रों को WHO से मलेरिया-मुक्त प्रमाणन प्रदान गया है। हाल ही में, यह प्रमाणन हासिल करने वाले देशों में अल सल्वाडोर (2021), अल्जीरिया (2019) शामिल हैं।

सफलता की कुंजी- चीन द्वारा उठाए गए कदम:

  1. चीन द्वारा अपने देशवासियों को एक बुनियादी सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा पैकेज निःशुल्क प्रदान किया जाता है। इस पैकेज के एक भाग के रूप में, चीन में सभी लोगों के लिए, बगैर किसी विधिक या वित्तीय स्थिति के, मलेरिया के निदान और उपचार के लिए सस्ती सेवाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं।
  2. चीन की इस सफलता के लिए ‘प्रभावी बहु-क्षेत्रीय सहयोग’ ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 2010 में, चीन में स्वास्थ्य, शिक्षा, वित्त, अनुसंधान और विज्ञान, विकास आदि का प्रतिनिधित्व करने वाले 13 मंत्रालयों द्वारा देश भर में मलेरिया को समाप्त करने के लिए संयुक्त रूप से मोर्चा संभाला।
  3. “1-3-7” रणनीति: इस रणनीति के तहत “1” स्वास्थ्य सुविधाओं को मलेरिया निदान की रिपोर्ट करने के लिए एक दिन की समय सीमा को दर्शाता है; “3”, तीसरे दिन के अंत तक, स्वास्थ्य अधिकारियों को मामले की पुष्टि करने और इसके प्रसार संबंधी जोखिम को निर्धारित करना आवश्यक होता है; और “7”, सात दिनों के भीतर बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए उचित उपाय किए जाने को व्यक्त करता है।

WHO का मलेरिया मुक्त प्रमाणपत्र:

  1. किसी देश द्वारा पिछले तीन वर्षो तक लगातार ‘एनोफिलीज मच्छरों’ (Anopheles mosquitoes) द्वारा स्थानीय रूप से मलेरिया संक्रमण श्रृंखला को देशव्यापी स्तर पर समाप्त करने के प्रमाण दिए जाने पर ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ द्वारा ‘मलेरिया मुक्त प्रमाणपत्र’ (Malaria-Free Certification) प्रदान किया जाता है।
  2. इस प्रमाणपत्र को हासिल करने के आकांक्षी किसी देश को बीमारी के पुनः संक्रमण को रोकने की क्षमता भी प्रदर्शित करनी आवश्यक होती है।
  3. ‘मलेरिया मुक्त प्रमाणन प्रदान करने’ का अंतिम निर्णय, एक स्वतंत्र ‘मलेरिया उन्मूलन प्रमाणन समिति’ (Malaria Elimination Certification Panel MECP) की सिफारिश के आधार पर WHO महानिदेशक के द्वारा लिया जाता है।

WHO विश्व मलेरिया रिपोर्ट 2020 के प्रमुख निष्कर्ष:

  • भारत ने मलेरिया के भार को कम करने में काफी प्रगति की है।
  • भारत उच्च स्थानिक मलेरिया वाला एकमात्र देश है, जिसने वर्ष 2018 की तुलना में 2019 में 6% की गिरावट दर्ज की है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि ओडिशा अपनी ‘दमन पहल’ (DAMaN initiative) के माध्यम से, मलेरिया के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में एक प्रेरणा के रूप में उभरा है? इस पहल के बारे में जानने हेतु पढ़ें:  

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. वायरस और बैक्टीरिया के कारण होने वाले विभिन्न रोगों में अंतर और उदाहरण
  2. मलेरिया- कारण और उपचार
  3. डब्ल्यूएचओ प्रमाणन प्रक्रिया के बारे में
  4. डब्ल्यूएचओ विश्व मलेरिया रिपोर्ट 2020 का अवलोकन

मेंस लिंक:

मलेरिया नियंत्रण पर लक्षित भारत के प्रयासों की चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्य, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशु पालन संबंधी अर्थशास्त्र।

एंटी-मिथेनोजेनिक फीड सप्लीमेंट: हरित धारा


(anti-Methanogenic feed supplement ‘Harit Dhara’)

संदर्भ:

हाल ही में, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)  द्वारा ‘हरित धारा’ (Harit Dhara – HD) नामक एक एंटी-मिथेनोजेनिक फीड सप्लीमेंट (Anti-Methanogenic Feed Supplement) विकसित किया गया है।

इस सप्लीमेंट का महत्व:

यह एंटी-मिथेनोजेनिक फीड सप्लीमेंट, मवेशियों से होने वाले मीथेन उत्सर्जन में 17-20% तक की कमी कर सकता है और इसके परिणामस्वरूप दूध का उत्पादन भी बढ़ सकता है।

‘हरित धारा’ क्या है?

इसे ‘टैनिन युक्त’ (Tannin-rich) पौधों पर आधारित स्रोतों से तैयार किया गया है। टैनिन, कड़वे और कसैले रासायनिक यौगिकों वाले उष्णकटिबंधीय पौधों को रुमेण (जुगाली करने वाले पशुओं का पहला पेट) से प्रोटोजोआ को मुक्त करने के लिये जाना जाता है।

लाभ:

  • हरित धारा, आमाशय/रुमेण (Rumen) में, हाइड्रोजन निर्माण के लिये ज़िम्मेदार प्रोटोजोआ रोगाणुओं को नष्ट करता है और इसे मीथेन तथा कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) को कम करने के लिए ‘आर्किया’ (बैक्टीरिया के समान एक संरचना) को उपलब्ध कराता है।
  • इस सप्लीमेंट का उपयोग करने के बाद ‘किण्वन’ (Fermentation), अधिक मात्रा में ‘प्रोपियॉनिक अम्ल’ (Propionic Acid) का उत्पादन करने में सहायक होता है। यह अम्ल, लैक्टोज (दूध शर्करा) के उत्पादन और शरीर के वज़न को बढ़ाने के लिये अधिक ऊर्जा प्रदान करता है।
  • मीथेन उत्पादन में कमी: भारत में एक औसत दूध देने वाली गाय या भैंस प्रति दिन लगभग 200 लीटर, युवा बछिया 85-95 लीटर और वयस्क भेड़ 20-25 लीटर मीथेन उत्सर्जित करती है। इन मवेशियों को ‘हरित धारा’ खिलाने से मीथेन उत्सर्जन में इसके पांचवें भाग तक कमी की जा सकती है।

मवेशियों में मीथेन का उत्पादन किस प्रकार और क्यों होता है?

जिन मवेशियों में रुमेण (प्रथम आमाशय) पाया जाता है, वे मीथेन का उत्पादन करते है।

  1. रुमेण (Rumen), मवेशियों के पेट में पाए जाने वाले ‘चार कोष्ठों’ (Stomachs) में से पहला कोष्ठ या पहला अमाशय होता है, जहाँ मवेशी द्वारा खाए गए पदार्थ, सेलूलोज़, फाइबर, स्टार्च, शर्करा आदि का पाचन होता है। इन पदार्थों का, आगे पाचन होने और पोषक तत्त्वों का अवशोषण होने से पहले सूक्ष्मजीवों द्वारा किण्विन कर दिया जाता है।
  2. कार्बोहाइड्रेट के किण्वन से कार्बन डाइऑक्साइड और हाइड्रोजन का उत्पादन होता है। इनका उपयोग रुमेण में मौजूद रोगाणुओं (आर्किया) द्वारा मीथेन का उत्पादन करने के लिये किया जाता है।

संबंधित चिंताएं एवं मवेशियों से होने वाले मीथेन उत्सर्जन को सीमित करने की आवश्यकता:

100 वर्षों में मीथेन की ग्लोबल वार्मिंग क्षमता कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) की 25 गुना हो जाएगी है, जोकि इसके लिए अधिक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस बना देगी।

2019 की पशुधन गणना के अनुसार भारत की मवेशियों की आबादी में 193.46 मिलियन गाय, 109.85 मिलियन भैंसे, 148.88 मिलियन बकरियाँ, 74.26 मिलियन भेड़ें थी।

  1. वैश्विक स्तर पर मवेशियों द्वारा किए जाने वाले कुल 90 मिलियन टन से अधिक मीथेन उत्सर्जन में से, भारत में जुगाली करने वाले मवेशी, भैंस, भेड़ तथा बकरियाँ वार्षिक अनुमानित 25 मिलियन टन से 14.2 मिलियन टन मीथेन का उत्सर्जन करते हैं।
  2. बड़े पैमाने पर कृषि अवशिष्टों जैसे कि- गेहूँ / धान की भूसी और मक्का, ज्वार या बाजरा को चारे के रूप में खिलाए जाने के कारण भारत में जुगाली करने वाले पशु अपने समकक्ष औद्योगिक देशों की तुलना में 50-100% अधिक मीथेन का उत्पादन करते हैं। इन देशों में मवेशियों के लिए अधिक आसानी से किण्वित होने / पचने योग्य सांद्रता, परिरक्षित चारा (silages) और हरा चारा दिया जाता है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप कोलबेड मीथेन के बारे में जानते हैं जोकि एक प्राकृतिक गैस है और जिसे जैविक सामग्री के रूप में उत्पादित किया जाता है? पता करें कि इसका उत्पादन कैसे किया जाता है और इसका उपयोग कहां किया जाता है। Read here 

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. मीथेन क्या है? इसका उत्पादन किस प्रकार किया जाता है?
  2. मीथेन हाइड्रेट क्या है?
  3. कोलबेड मीथेन बनाम शेल गैस।
  4. कोयलाकरण क्या है?
  5. कोलबेड मीथेन निष्कर्षण के दौरान उत्सर्जित ग्रीन हाउस गैसें?

मेंस लिंक:

मीथेन उत्सर्जन को कम करने के लिए भारत द्वारा उठाए गए कदमों की चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

मंगल ग्रह पर ‘विच्छिन्न ज्योति पुंज’


(Discrete auroras on Mars)

संदर्भ:

हाल ही में, संयुक्त अरब अमीरात के ‘होप अंतरिक्ष यान’ (UAE’s Hope spacecraft) द्वारा मंगल ग्रह के वायुमंडल में ‘देदीप्यमान ज्योतियों’ (glowing lights) के चित्र उतारे हैं, इन रोशनियों को ‘विच्छिन्न ज्योति पुंज’ या ‘डिस्क्रीट ऑरोरा’ (Discrete Auroras) कहा जाता है। विदित हो, कि ‘होप अंतरिक्ष यान’ इस वर्ष फरवरी माह से मंगल ग्रह की परिक्रमा कर रहा है।

इन ऑरोराओं की विशिष्टता:

पृथ्वी पर देखी जाने वाली ‘धुर्वीय ज्योतियों’, जोकि उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों के समीप देखी जाती हैं, के विपरीत ‘विच्छिन्न ज्योति पुंज’ या ‘डिस्क्रीट ऑरोरा’ रात्रि के समय मंगल ग्रह के चारो ओर देखे जाते हैं।

पृथ्वी पर ‘धुर्वीय ज्योतियों’ की उत्पत्ति के कारण:

  1. जब सूर्य की सतह से उत्सर्जित होने वाले आवेशित कण- जिन्हें सौर पवन भी कहा जाता है- पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं, तो पृथ्वी पर ‘धुर्वीय ज्योति’ या ‘ऑरोरा’ का निर्माण होता है।
  2. ये सौर कण हानिकारक होते हैं और पृथ्वी के भू-चुंबकीय क्षेत्र द्वारा इन सौर हवाओं से ग्रह पर जीवन की सुरक्षा की जाती है।
  3. हालांकि, उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों पर, इन सौर हवाओं के कुछ कण लगातार नीचे की ओर प्रवाहित होने में सफल हो जाते हैं, और वातावरण में मौजूद विभिन्न गैसों के साथ परस्पर अभिक्रिया करते हैं, जिससे रात्रि के समय आकाश में रोशनी दिखाई देती है।
  4. इस रोशनी को ‘ऑरोरा’ या धुर्वीय ज्योति कहा जाता है और यह पृथ्वी के उच्च अक्षांश क्षेत्रों (ऑरोरल ओवल- Auroral Oval) से दिखाई देती है। यह प्रक्रिया पूरे वर्ष जारी रहती है।

ऑरोरा बोरेलिस’ और ऑरोरा ऑस्ट्रालिस:

  • हमारे ग्लोब के उत्तरी भाग में, ध्रुवीय ज्योति को ‘ऑरोरा बोरेलिस’ (aurora borealis) या नॉर्दर्न लाइट्स / उत्तर धुर्वीय ज्योति कहा जाता है।
  • जबकि, दक्षिणी भाग में इसे ‘ऑरोरा ऑस्ट्रालिस’ (aurora australis) या साउदर्न लाइट्स दक्षिण धुर्वीय ज्योति कहा जाता है, और इसे अंटार्कटिका, चिली, अर्जेंटीना, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के उच्च अक्षांशों से देखा जा सकता है।

मार्सियन ऑरोरा और पृथ्वी के ऑरोरा में भिन्नता:

  1. पृथ्वी ग्रह के चारो ओर एक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र मौजूद है, जबकि इसके विपरीत मंगल ग्रह का चुंबकीय क्षेत्र काफी हद तक समाप्त हो चुका है। क्योंकि, मंगल ग्रह के आंतरिक भाग में मौजूद पिघला हुआ लोहा ठंडा हो चुका है। ग्रह की कोर में पाए जाने वाला लौह तत्व ही, ग्रह के चुंबकत्व क्षेत्र का निर्माण करते हैं।
  2. हालांकि, अरबों साल पहले जब मंगल पर चुंबकीय क्षेत्र मौजूद था, उसी समय मंगल ग्रह की पर्पटी कठोर हो गई थी, और इसमें अभी भी हल्की मात्रा में चुंबकत्व मौजूद है चुंबकत्व
  3. अतः जहाँ पृथ्वी किसी चुंबक की भांति कार्य करती है, इसके विपरीत मंगल ग्रह पर चुंबकत्व का असमान वितरण पाया जाता है। ये चुम्बकीय क्षेत्र पूरे ग्रह पर क्षेत्र बिखरे हुए हैं और चुम्बकीय दिशा और शक्ति में भिन्न हैं।
  4. ये असंबद्ध चुम्बकीय क्षेत्र, सौर हवाओं को मंगल ग्रह के वायुमंडल के विभिन्न हिस्सों में प्रसारित करते हैं, जिससे आवेशित कण द्वारा, पृथ्वी की भांति, मंगल के वायुमंडल में उपस्थित अणुओं और परमाणुओं से अभिक्रियाएं करते हैं और इसके परिणामस्वरूप, ग्रह की पूरी सतह पर “विचिछ्न्न” ऑरोरा का निर्माण होता है।

महत्व:

मंगल ग्रह के ऑरोरा का अध्ययन वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे मंगल ग्रह पर, जीवन के लिए आवश्यक अन्य तत्वों के अलावा, चुंबकीय क्षेत्र और सघन वातावरण के समाप्त होने के बारे में कुछ सुराग मिल सकते हैं।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

‘धुर्वीय ज्योति’ या ऑरोरा, में आमतौर पर दूधिया हरे रंग की प्रचुरता होती है, लेकिन इनमे लाल, नीले, बैंगनी, गुलाबी और सफेद भी दिखा सकता है। ऑरोरा के रंगों और आकार में भिन्नता के क्या कारण हैं?

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘धुर्वीय ज्योति’ या ऑरोरा क्या हैं?
  2. प्रकार?
  3. इनका निर्माण?
  4. प्रभाव
  5. सौर-पवन क्या होती हैं?
  6. कोरोना द्रव्य उत्क्षेपण (CME) क्या है?
  7. ऑरोरा की उत्पत्ति पर सौर-लपटों का प्रभाव

मेंस लिंक:

धुर्वीय ज्योति की उत्पत्ति प्रक्रिया पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।

नए आईटी नियम


(New IT rules)

संदर्भ:

हाल ही में, केंद्र सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय को सूचित करते हुए कहा है, कि सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी ट्विटर इंक, भारत के नए आईटी नियमों (26 मई को लागू) का पालन करने में विफल रही है। नए आईटी नियम, देश का कानून है और इसका अनिवार्यतः पालन करना आवश्यक है।

निहितार्थ:

  • इन नियमों का किसी तरह से अनुपालन न करना, आईटी नियमों के प्रावधानों का उल्लंघन है, जिसके लिए ‘ट्विटर’ को एक “मध्यस्थ” (Intermediary) के रूप में प्राप्त प्रतिरक्षा को वापस ले लिया गया है।
  • ‘मध्यस्थ’ का दर्जा ‘ट्विटर’ को इसके प्लेटफ़ॉर्म पर किसी भी तृतीय-पक्ष के डेटा पर उत्तरदायित्व से प्रतिरक्षा प्रदान करता है। इस दर्जे के समाप्त होने पर, ‘ट्विटर’ शिकायतों के मामले में आपराधिक कार्रवाई के लिए उत्तरदायी बन जाता है।

नए आईटी नियमों के अनुसार,

  1. ट्विटर इंक, आईटी अधिनियम, 2000 की धारा 2(1)(w) के अर्थ में एक ‘मध्यस्थ’ है और आईटी नियम 2021 के तहत एक ‘महत्वपूर्ण सोशल मीडिया मध्यस्थ’ (Significant Social Media Intermediary – SSMI) है।
  2. आईटी नियमों के अनुसार, SSMI को एक ‘मुख्य अनुपालन अधिकारी’, एक ‘नोडल अधिकारी’ और एक ‘शिकायत अधिकारी’ नियुक्त करना आवश्यक है। इन अधिकारियों के लिए भारत का निवासी होना चाहिए।

पृष्ठभूमि:

25 फरवरी को, केंद्र सरकार द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 87 (2) के तहत शक्तियों के प्रयोग करते हुए और पूर्व के सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ) नियम, 2011 का निवर्तन करते हुए, सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 (The Information Technology (Intermediaries Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021) तैयार किए गए थे।

इन नए नियमों को 26 मई से लागू किया गया था।

नए नियमों का अवलोकन:

  1. इन नियमों के तहत, देश भर में ‘ओवर द टॉप’ (OTT) और डिजिटल पोर्टलों द्वारा एक ‘शिकायत निवारण प्रणाली’ (Grievance Redressal System) गठित करना अनिवार्य किया गया है। उपयोगकर्ताओं के लिए सोशल मीडिया का दुरुपयोग किए जाने के खिलाफ अपनी शिकायत दर्ज कराने हेतु यह आवश्यक है।
  2. महत्वपूर्ण सोशल मीडिया कंपनियों के लिए ‘एक मुख्य अनुपालन अधिकारी’ (Chief Compliance Officer) की नियुक्ति करना अनिवार्य होगा, इसके साथ ही ये कंपनियां एक नोडल संपर्क अधिकारी भी नियुक्त करेंगी, जिससे कानून प्रवर्तन एजेंसियां कभी भी संपर्क कर सकेंगी।
  3. शिकायत अधिकारी (Grievance Officer): सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, एक शिकायत अधिकारी को भी नियुक्त करेंगे, जो 24 घंटे के भीतर कोई भी संबंधित शिकायत दर्ज करेगा और 15 दिनों में इसका निपटारा करेगा।
  4. सामग्री को हटाना (Removal of content): यदि किसी उपयोगकर्ता, विशेष रूप से महिलाओं की गरिमा के खिलाफ शिकायतें- व्यक्तियों के निजी अंगों या नग्नता या यौन कृत्य का प्रदर्शन अथवा किसी व्यक्ति का प्रतिरूपण आदि के बारे में- दर्ज कराई जाती हैं, तो ऐसी सामग्री को, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को शिकायत दर्ज करने के 24 घंटे के भीतर हटाना होगा।
  5. मासिक रिपोर्ट: इनके लिए, हर महीने प्राप्त होने वाली शिकायतों की संख्या और इनके निवारण की स्थिति के बारे में मासिक रिपोर्ट भी प्रकाशित करनी होगी।
  6. समाचार प्रकाशकों के लिए विनियमन के तीन स्तर होंगे – स्व-विनियमन, किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश या एक प्रतिष्ठित व्यक्ति की अध्यक्षता में एक स्व-नियामक निकाय, और ‘प्रथा सहिंता एवं शिकायत समिति’ सहित सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा निगरानी। ​​

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. नए नियमों का अवलोकन
  2. परिभाषा के अनुसार ‘मध्यस्थ’ कौन हैं?
  3. ‘सेफ हार्बर’ संरक्षण क्या है?
  4. नए नियमों के तहत ‘शिकायत निवारण तंत्र’

मेंस लिंक:

नए आईटी नियमों के खिलाफ क्या चिंता जताई जा रही है? इन चिंताओं को दूर करने के तरीकों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।

 आईटी अधिनियम की 66A


(Section 66A of the IT Act)

संदर्भ:

हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने कई साल पहले खत्म की जा चुकी ‘आईटी आधिनियम की धारा 66A’  का इस्तेमाल करने पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही अदालत ने कहा है, कि कानून को खत्म करने वाले फैसले को अभी तक लागू नहीं किया जाना चौंकाने वाला है।

संबंधित प्रकरण:

‘आईटी आधिनियम की धारा 66A’ को समाप्त किए जाने के 7 साल बाद भी, मार्च 2021 तक, 11 राज्यों की जिला अदालतों के समक्ष कुल 745 मामले अभी भी लंबित और सक्रिय हैं, जिनमें आरोपी व्यक्तियों पर आईटी अधिनियम की धारा 66A के तहत अपराधों के लिए मुकदमा चलाया जा रहा है।

पृष्ठभूमि:

धारा 66A  को “क्रूर” करार दिया गया था क्योंकि इसके तहत कई निर्दोष व्यक्तियों की गिरफ्तारी की अनुमति दी गई थी। इस धारा को खत्म करने के लिए एक जन आक्रोश भड़क उठा था। इन सब कारणों से, सुप्रीम कोर्ट द्वारा मार्च, 2015 में, श्रेया सिंघाल बनाम भारत संघ मामले में इसे असंवैधानिक करार देते हुए निरसित कर दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा धारा 66A को हटाए जाने के कारण:

सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, धारा 66A संविधान के अनुच्छेद 19(1) (a) के तहत, मनमाने ढंग से, अतिशय पूर्वक और असमान रूप से ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार’ पर हमला करती है, और इन अधिकारों और इन पर लगाए जाने वाले उचित प्रतिबंधों के बीच संतुलन को बिगाड़ती है। इसके अलावा, प्रावधान के तहत अपराधों की परिभाषा, व्याख्या के लिए ‘खुली हुई’ (open-ended) और अपरिभाषित है।

  • अदालत के अनुसार, प्रावधान में “पूरी तरह से खुले और अपरिभाषित” अभिव्यक्तियों / पदों का इस्तेमाल किया गया है और इस्तेमाल की जाने वाली हर अभिव्यक्ति अर्थ में “अस्पष्ट” है।
  • जो अभिव्यक्ति किसी एक के लिए ‘अपमानजनक’ हो सकती है, वह दूसरे के लिए ‘अपमानजनक’ नहीं भी हो सकती है।
  • जो अभिव्यक्ति किसी को खीज या असुविधा का कारण हो सकती है, वह दूसरे को अभिव्यक्ति या असुविधा का कारण नहीं भी हो सकती है।
  • यहां तक ​​कि ‘लगातार’ (persistently) अभिव्यक्ति / पद भी पूरी तरह से गलत है।

धारा 66A क्या है?

धारा 66A (Section 66A), कंप्यूटर या किसी अन्य संचार उपकरण जैसे मोबाइल फोन या टैबलेट के माध्यम से “आपत्तिजनक” संदेश भेजने पर सजा को परिभाषित करती है। इसके तहत दोषी को अधिकतम तीन साल की जेल और जुर्माना हो सकता है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि ‘न्यायिक समीक्षा’ की शक्ति का स्रोत ‘भारत के संविधान’ में ही निहित है (संविधान के अनुच्छेद 13, 32, 136, 142 और 147)? ‘न्यायिक समीक्षा के बारे में और अधिक जानने के लिए पढ़ें।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. आईटी एक्ट की धारा 66A के बारे में
  2. कार्यान्वयन
  3. छूट
  4. सुप्रीम कोर्ट ने इसे क्यों रद्द कर दिया?

मेंस लिंक:

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की धारा 66ए को असंवैधानिक क्यों ठहराया? इस फैसले के संवैधानिक और व्यावसायिक निहितार्थों की जांच कीजिए। आलोचनात्मक चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


बिहार का ‘वाल्मीकि टाइगर रिजर्व’ (VTR)

हाल ही में, बिहार के ‘वाल्मीकि टाइगर रिजर्व’ (वीटीआर) के संरक्षित क्षेत्र में 150 गिद्धों को देखा गया था, इसके बाद ‘वीटीआर’ के अधिकारियों ने संरक्षित क्षेत्र में गिद्धों के संरक्षण की योजना बनाना शुरू कर दिया है।

  • ‘वाल्मीकि टाइगर रिजर्व’ में देखे गए 150 गिद्धों में मिस्री गिद्ध (Egyptian vulture), ग्रिफॉन गिद्ध (Griffon vulture), सफ़ेद पूँछ वाला गिद्ध (White-rumped vulture) और हिमालयी ग्रिफॉन सहित गिद्धों की विभिन्न प्रजातियां शामिल थी।
  • ‘वाल्मीकि टाइगर रिजर्व’, भारत में हिमालयी तराई वनों की सबसे पूर्वी सीमा बनाता है और यह देश में गंगा के मैदानों के जैव-भौगोलिक क्षेत्र में स्थित जंगलों में, भाबर और तराई क्षेत्रों का संयोजन है।
  • यह बिहार के पश्चिमी चंपारण ज़िले में भारत-नेपाल सीमा पर स्थित है।
  • इसमें उड़ने वाली भारतीय लोमड़ियों को भी देखा जा सकता है।

भारत में गिद्धों की नौ प्रजातियां पाई जाती हैं – ओरिएंटल व्हाइट बैकड (Oriental White Backed), लॉन्ग बिल्ड (Long Billed), स्लेंडर-बिल्ड (Slender Billed), हिमालयन (Himalayan), रेड हेडेड (Red Headed), मिस्र देशीय (Egyptian), बियरडेड (Bearded), सिनेरियस (Cinereous) और यूरेशियन ग्रिफॉन (Eurasian Griffon)।

ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC)

हाल ही में, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) ने ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (Open Network for Digital Commerce – ONDC) पर एक परियोजना शुरू की है।

  • यह कार्य भारतीय गुणवत्ता परिषद (QCI) को सौंपा गया है।
  • ONDC का उद्देश्य किसी विशिष्ट प्लेटफॉर्म के स्वतंत्र ओपन नेटवर्क प्रोटोकॉल और ओपन स्पेसिफिकेशंस का उपयोग करते हुए ओपन सोर्स्‍ड पद्धति पर विकसित ओपन नेटवर्क को बढ़ावा देना है।
  • ओएनडीसी से पूरी मूल्य श्रृंखला को डिजिटाइज करने, परिचालन का मानकीकरण करने, आपूर्तिकर्ताओं के समावेशीकरण को बढ़ावा देने, लॉजिस्टिक्‍स में दक्षता हासिल करने और उपभोक्ताओं के लिए मूल्य में सुधार होने की उम्मीद है।

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