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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 29 June 2021

 

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

1. महान्यायवादी

2. कोविड महामारी की दूसरी लहर के बाद सरकार द्वारा ₹6.28 लाख करोड़ की प्रोत्साहन राशि की घोषणा

3. नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस 2021

 

सामान्य अध्ययन-III

1. सांख्यिकी दिवस

2. साइबर कैपेबिलिटी एंड नेशनल पावर रिपोर्ट: आईआईएसएस

3. अमेरिका का ‘डिजिटल मिलेनियम कॉपीराइट एक्ट’

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. बैहतान बांध

2. 2-DG ऑरल ड्रग

3. कोविन

4. अग्नि-पी (प्राइम) मिसाइल

5. फुकुओका ग्रैंड पुरस्कार

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: विभिन्न संवैधानिक पदों पर नियुक्ति और विभिन्न संवैधानिक निकायों की शक्तियाँ, कार्य और उत्तरदायित्व।

महान्यायवादी


(Attorney General of India)

संदर्भ:

केंद्र सरकार द्वारा ‘भारत के महान्यायवादी’ (अटॉर्नी-जनरल) के.के. वेणुगोपाल का कार्यकाल एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया गया है। अब वह 30 जून, 2022 तक सरकार के शीर्ष कानून अधिकारी के रूप में कार्यरत  रहेंगे।

भारत के महान्यायवादी – तथ्य:

  • भारत के महान्यायवादी, केंद्र सरकार के मुख्य कानूनी सलाहकार होते है, और भारत के उच्चत्तम न्यायलय में इसके प्रधान अधिवक्ता होते हैं।
  • वह, संघीय कार्यकारिणी का एक भाग होते है।

नियुक्ति और पात्रता:

महान्यायवादी की नियुक्ति, भारत के राष्ट्रपति द्वारा संविधान के अनुच्छेद 76(1) के तहत की जाती है तथा वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारित करता है।

  • वह उच्चत्तम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने के लिए योग्य व्यक्ति होना चाहिए।
  • उसके लिए एक भारतीय नागरिक होना चाहिए।
  • उसे भारत के किसी राज्य के उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पांच वर्ष कार्य करने का अनुभव हो अथवा किसी उच्च न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में 10 साल पूरे कर चुका हो।
  • राष्ट्रपति के मतानुसार, वह न्यायायिक मामलों का विशेषज्ञ व्यक्ति होना चाहिए।

कार्य एवं शक्तियां:

भारत सरकार के मुख्य क़ानून अधिकारी के रूप में महान्यायवादी के निम्नलिखित कर्तव्य हैं:

  1. वह भारत सरकार को विधि संबंधी निर्दिष्ट कानूनी मामलों में सलाह प्रदान करता है। वह राष्ट्रपति द्वारा सौंपे गए अन्य विधिक कर्तव्यों का पालन भी करता है।
  2. महान्यायवादी को भारत के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार है। इसके अतिरिक्त संसद के दोनों सदनों में बोलने अथवा कार्यवाही में भाग लेने का अधिकार है, उसे संसद की कार्यवाही में मतदान का अधिकार नहीं है।
  3. महान्यायवादी, उच्चत्तम न्यायालय में सभी मामलों (मुकदमों, अपीलों और अन्य कार्यवाही सहित) भारत सरकार की ओर से पेश होता है।
  4. वह संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति द्वारा संदर्भित मामलों में सर्वोच्च न्यायालय में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करता है।
  5. अटॉर्नी जनरल, भारत सरकार के खिलाफ कोई सलाह अथवा विश्लेषण नहीं कर सकते।
  6. बिना भारत सकरार की अनुमति के वह किसी आपराधिक मामले में किसी अभियुक्त का बचाव नहीं कर सकता तथा सरकार की अनुमति के बगैर किसी परिषद या कंपनी के निदेशक का पद ग्रहण नहीं कर सकता है।
  7. महान्यायवादी को दो महाधिवक्ता (सॉलिसिटर जनरल) तथा चार अपर महाधिवक्ताओं द्वारा सहायता प्रदान की जाती है।

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि संघ की कार्यकारिणी में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद और भारत के महान्यायवादी शामिल होते हैं?

प्रीलिम्स लिंक:

  1. संविधान का अनुच्छेद 143
  2. महान्यायवादी और महाधिवक्ता की नियुक्ति कौन करता है?
  3. संसद की कार्यवाही में भाग लेने के लिए महान्यायवादी का अधिकार?
  4. महान्यायवादी के रूप में किसे नियुक्त किया जा सकता है?
  5. संविधान का अनुच्छेद 76 (1)
  6. संघीय की कार्यकारिणी में कौन सम्मिलित होता है?

मेंस लिंक:

भारत के महान्यायवादी की भूमिका और कार्यों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

 कोविड महामारी की दूसरी लहर के बाद सरकार द्वारा ₹6.28 लाख करोड़ की प्रोत्साहन राशि की घोषणा


संदर्भ:

हाल ही में, सरकार द्वारा अर्थव्यवस्था के लिए कुछ नए राहत उपायों की घोषणा की गई है, यह कोविड-19 की दूसरी लहर के बाद इस तरह का पहला पैकेज है।

नवीनतम पैकेज का फोकस:

महामारी प्रभावित क्षेत्रों के लिए ऋण गारंटी और रियायती ऋण प्रदान करना तथा स्वास्थ्य सेवा क्षमताओं को बढ़ाने हेतु निवेश करना।

वित्तीय निहितार्थ: ₹6,28,993 करोड़ की राशि, कुल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के लगभग 3% भाग के बराबर है।

राहत उपायों का विवरण:

  • मौजूदा आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ECLGS) के तहत ऋण सीमा में 1.5 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त विस्तार।
  • सूक्ष्म-वित्त संस्थानों के माध्यम से छोटे ऋणकर्ताओं को ₹1.25 लाख तक का ऋण प्रदान करने हेतु ₹7,500 करोड़ राशि की एक नई योजना।
  • गैर-महानगरीय क्षेत्रों और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में स्वास्थ्य देखभाल निवेश हेतु ₹1.1 लाख करोड़ की नई ऋण गारंटी सुविधा।
  • बाल चिकित्सा पर ध्यान केंद्रित करते हुए सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए अलग से 23,220 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इस राशि का उपयोग आईसीयू बेड, ऑक्सीजन की आपूर्ति और चिकित्सा विज्ञान के अंतिम वर्ष के छात्रों और प्रशिक्षुओं की भर्ती कर चिकित्सा कर्मियों की संख्या में वृद्धि करने के लिए भी किया जाएगा।
  • अगले पांच वर्षों में ₹1.21 लाख करोड़ के निर्यात के लिए अप्रत्यक्ष सहायता।
  • पांच लाख पर्यटकों को एक महीने का मुफ्त वीजा
  • किसानों के लिए बीजों की नई किस्में।

इन उपायों के लाभ/निहितार्थ:

  1. कोविड0 के बाद उद्यमों को बचाए रखने हेतु उपाय।
  2. ECLGS के दायरे और कवरेज के विस्तार से दबावग्रस्त क्षेत्रों में नकदी प्रवाह को महत्वपूर्ण सहायता मिलने की उम्मीद है।
  3. पर्यटन, कोविड0 की वजह से सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक है और यह पैकेज, इस क्षेत्र में अति-आवश्यक चल-राशि के लिए राह दिखाएगा और इस रोजगार-गहन क्षेत्र को पुनर्जीवित करने में मदद करेगा।
  4. इस पैकेज के तहत, बाल चिकित्सा हेतु जनबल और ढांचागत संसाधनों को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना एक स्वागत योग्य कदम और एक नई शुरुआत है।

इन उपायों की यथेष्टता:

विशेषज्ञों के अनुसार, इन उपायों से मांग में कमी, निम्न जीडीपी, उच्च मुद्रास्फीति और बेरोजगारी से निपटने में मदद नहीं मिलेगी।

क्या किया जाना चाहिए?

हमारी अर्थव्यवस्था, निर्यात-संचालित (Export-Driven) अर्थव्यवस्था नहीं है, बल्कि यह उपभोग-संचालित (Consumption-Driven) अर्थव्यवस्था है। हमारे सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 55% भाग ‘उपभोग’ से प्राप्त होता है। और खपत / उपभोग को बढाने के लिए, हमें लोगों के हाथों में पैसा पहुचाने की जरूरत है।

  • इसलिए, इस समय मांग में नई वृद्धि पैदा करने की आवश्यकता है और इसके लिए हमें खपत को बढ़ाना होगा।
  • अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों को इस समय, ‘ऋण-विस्तार की नहीं, बल्कि हाथ पकड़कर रखने” की आवश्यकता है।

इन उपायों की आवश्यकता:

विभिन्न अध्ययनों से प्राप्त निष्कर्षों के अनुसार, वर्ष 2020 के दौरान भारत का मध्यम वर्ग सिमट कर 3.2 करोड़ तक पहुँच गया है और लगभग 7.5 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे पहुँच गए हैं। इसके लिए काफी हद तक महामारी का प्रभाव जिम्मेदार है।

इंस्टा जिज्ञासु:

अर्थव्यवस्था ठप होने से बाजार में सरकार के पास उधार लेने हेतु पर्याप्त धन उपलब्ध नहीं है। ऐसी स्थिति में, क्या सरकार, आरबीआई से अतिरिक्त मुद्रा छापने के लिए कह सकती है? इसके लिए क्या प्रक्रिया है, और इसके खिलाफ क्या तर्क दिए जाते हैं? यहां पढ़ें (संक्षेप में), 

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. घोषित उपायों का अवलोकन
  2. ECLGS के बारे में
  3. मुद्रा योजना के बारे में

मेंस लिंक:

घोषित उपायों के महत्व के बारे में चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस 2021


संदर्भ:

7 दिसंबर 1987 को ‘संयुक्त राष्ट्र महासभा’ द्वारा ‘26 जून’ के लिए ‘नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस’ (International Day against Drug Abuse and Illicit Trafficking) के रूप में चुना गया था।

उद्देश्य: नशीली दवाओं से संबंधित मुद्दों के बारे में जागरूकता पैदा करना तथा स्वास्थ्य, समाज और प्रशासन पर पड़ने वाले इसके प्रभावों का मुकाबला करने हेतु अंतर्राष्ट्रीय सहयोग प्राप्त करना।

विषय और उसका महत्व:

इस वर्ष की थीम: ‘शेयर फैक्ट्स ऑन ड्रग्स, सेव लाइव्स’ (Share Facts On Drugs, Save Lives) है।

‘संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ और अपराध कार्यलय’ (United Nations Office on Drugs and Crime – UNODC) के अनुसार, इस थीम का उद्देश्य, स्वास्थ्य जोखिम और विश्व ड्रग्स समस्या के समाधान से लेकर साक्ष्य-आधारित रोकथाम, उपचार और देखभाल तक, नशीली दवाओं संबंधी वास्तविक तथ्यों को साझा करके गलत सूचना को रोकना है।

‘वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट’ 2021

(World Drug Report)

  1. पिछले वर्ष, वैश्विक स्तर पर लगभग 275 मिलियन लोगों द्वारा नशीली दवाओं इस्तेमाल किया गया, और 36 मिलियन से अधिक लोग, नशीली दवाओं के उपयोग संबंधी विकारों से पीड़ित थे।
  2. अधिकांश देशों में महामारी के दौरान ‘भांग’ के उपयोग में वृद्धि देखी गई है।
  3. इसी अवधि में फार्मास्युटिकल दवाओं के गैर-चिकित्सा उपयोग में भी वृद्धि हुई है।
  4. नवीनतम वैश्विक अनुमानों के अनुसार, 15 से 64 वर्ष आयु वर्ग की लगभग 5.5 प्रतिशत आबादी द्वारा पिछले वर्ष के दौरान, कम से कम एक बार नशीली दवाओं का उपयोग किया गया है।
  5. अनुमान है, कि वैश्विक स्तर पर 11 मिलियन से अधिक लोग दवाओं का इंजेक्शन लगाते हैं – इनमे से आधे लोग ‘हेपेटाइटिस सी’ से पीड़ित हैं।
  6. नशीली दवाओं के उपयोग के कारण होने वाली बिमारियों के लिये ‘ओपिओइड’ (Opioids) पदार्थ सर्वाधिक जिम्मेदार बने हुए है।

मादक पदार्थों की तस्करी की समस्या से निपटने हेतु भारत सरकार की नीतियाँ और पहलें:

  1. विभिन्न स्रोतों से उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर, देश के 272 जिलों में नशा मुक्त भारत अभियान या ड्रग्स-मुक्त भारत अभियान को 15 अगस्त 2020 को हरी झंडी दिखाई गई।
  2. सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा वर्ष 2018-2025 की अवधि के लिए ‘नशीली दवाओं की मांग में कमी लाने हेतु राष्ट्रीय कार्ययोजना’ (National Action Plan for Drug Demand Reduction- NAPDDR) का कार्यान्वयन शुरू किया गया है।
  3. सरकार द्वारा नवंबर, 2016 में नार्को-समन्वय केंद्र (NCORD) का गठन किया गया है।
  4. सरकार द्वारा नारकोटिक ड्रग्स संबंधी अवैध व्यापार, व्यसनी / नशेड़ियों के पुनर्वास, और नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खिलाफ जनता को शिक्षित करने आदि में होने वाले व्यय को पूरा करने हेतु “नशीली दवाओं के दुरुपयोग नियंत्रण हेतु राष्ट्रीय कोष” (National Fund for Control of Drug Abuse) नामक एक कोष का गठन किया गया है ।

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि भारत, संयुक्त राष्ट्र के ‘सिंगल कन्वेंशन ऑन नारकोटिक्स ड्रग्स’ 1961, कन्वेंशन ऑन साइकोट्रोपिक सब्सटेंस-1971 और ‘कन्वेंशन ऑन इलीसिट ट्रैफिक ऑन नारकोटिक ड्रग्स एँड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस’, 1988 पर हस्ताक्षरकर्ता है? इन अभिसमयों के बारे में संक्षेप में जाने।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. UNODC के बारे में
  2. “नारकोटिक्स नियंत्रण हेतु राज्यों को वित्तीय सहायता” की योजना का अवलोकन
  3. नार्को-समन्वय केंद्र (NCORD) की संरचना
  4. नशीली दवाओं के दुरुपयोग नियंत्रण हेतु राष्ट्रीय कोष
  5. नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के बारे में
  6. नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस और इस वर्ष की थीम

मेंस लिंक:

भारत, मादक पदार्थों की तस्करी की चपेट में है। इसके कारणों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। नशीली दवाओं की समस्या से निपटने में सरकार की भूमिका पर भी टिप्पणी करिए।

स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

सांख्यिकी दिवस


(Statistics day)

संदर्भ:

भारत में राष्ट्रीय सांख्यिकी प्रणाली (National Statistical System) की स्थापना करने में प्रो. प्रशांत चंद्र महालनोबिस के अमूल्य योगदान की स्मृति में, उनकी जयंती पर प्रतिवर्ष 29 जून को ‘राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस’ (Statistics day) मनाया जाता है।

सांख्यिकी दिवस, 2021 की थीम: सतत् विकास लक्ष्य (SDG) – 2 (भुखमरी उन्मूलन, खाद्य सुरक्षा और बेहतर पोषण हासिल करना तथा सतत् खेती को प्रोत्साहन)

पीसी महालनोनोबिस का सांख्यिकी में योगदान (1893-1972):

  1. उन्हें भारतीय सांख्यिकीय प्रणाली के मुख्य वास्तुकार और भारत में सांख्यिकीय विज्ञान के जनक के रूप में जाना जाता है।
  2. उन्होंने 1931 में कोलकाता में भारतीय सांख्यिकी संस्थान (Indian Statistical Institute-ISI) की स्थापना की।
  3. संस्थान ने कार्ल पियर्सन की बायोमेट्रिका (Biometrika) की तर्ज पर ‘सांख्य’ पत्रिका का प्रकाशन आरंभ किया।
  4. 1959 में ISI को सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था बनाया गया था।
  5. उन्होंने केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO), नेशनल सैंपल सर्वे (NSS) और एनुअल सर्वे ऑफ़ इंडस्ट्रीज (ASI) की स्थापना में भी मदद की।
  6. उन्होंने सांख्यिकीय प्रतिरूपों पर संयुक्त राष्ट्र उप-आयोग के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया।
  7. 1936 में उन्होंने महालनोबिस दूरी नाम का एक सांख्यिकीय पद्यति प्रस्तुत की। इसका व्यापक रूप से क्लस्टर विश्लेषण और वर्गीकरण तकनीकों में उपयोग किया जाता है।
  8. महालनोबिस मॉडल को द्वितीय पंचवर्षीय योजना में लागू किया गया था, जिसने भारत में तेजी से औद्योगिकीकरण की दिशा में वृद्धि हेतु कार्य किया।

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि हर साल 22 दिसंबर को श्रीनिवास रामानुजन की जयंती को राष्ट्रीय गणित दिवस के रूप में मनाया जाता है। उनके योगदान के बारे में यहां पढ़ें

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. सांख्यिकी दिवस के बारे में
  2. पीसी महालनोबिस के बारे में
  3. ISO और CSO के बारे में
  4. इंटर पेनेट्रेटिंग नेटवर्क ऑफ़ सब-सैंपल (IPNS) तकनीक क्या है?
  5. ‘महालनोबिस दूरी’ क्या है?

स्रोत: पीआईबी।

 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

साइबर कैपेबिलिटी एंड नेशनल पावर रिपोर्ट: आईआईएसएस


संदर्भ:

हाल ही में, ‘इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज’ (International Institute for Strategic Studies IISS) द्वारा जारी की गई ‘साइबर कैपेबिलिटी एंड नेशनल पावर रिपोर्ट’ जारी की गयी थी।

इस रिपोर्ट में, हर देश के ‘साइबर परितंत्र’ और इस परितंत्र के अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक प्रतिस्पर्धा और सैन्य मामलों के साथ संबंधो का विश्लेषण किया गया है।

रिपोर्ट में देशों का मूल्यांकन सात श्रेणियों में किया जाता है:

  1. रणनीति और सिद्धांत
  2. प्रशासन, आदेश और नियंत्रण
  3. कोर साइबर-खुफिया क्षमता
  4. साइबर सशक्तिकरण और निर्भरता
  5. साइबर सुरक्षा और लचीलापन
  6. साइबरस्पेस मामलों में वैश्विक नेतृत्व
  7. आक्रामक साइबर क्षमता

रिपोर्ट में देशों को साइबर शक्ति के तीन स्तरों में विभाजित किया गया है:

  1. प्रथम श्रेणी: कार्यप्रणाली की सभी श्रेणियों में विश्व-अग्रणी ताकत रखने वाले देश। इस स्तर में, अमेरिका एकमात्र देश शामिल है।
  2. द्वितीय श्रेणी: कुछ श्रेणियों में विश्व-अग्रणी ताकत रखने वाले देश। इस श्रेणी में, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, चीन, फ्रांस, इज़राइल, रूस और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं।
  3. तृतीय श्रेणी: वे देश, जो कुछ श्रेणियों में ताकत रखते हैं या उनमे क्षमता है, किंतु अन्य श्रेणियों में काफी हद तक पिछड़े हुए हैं। इस श्रेणी में, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, जापान, मलेशिया, उत्तर कोरिया और वियतनाम शामिल हैं।

रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु:

  • हैकरों द्वारा किए जाने वाले रैंसमवेयर (Ransomware) हमलों के बढ़ते जोखिम की वजह से अमेरिका एकमात्र शीर्ष स्तरीय साइबर शक्ति है।
  • अपने अद्वितीय डिजिटल-औद्योगिक आधार, क्रिप्टोग्राफिक विशेषज्ञता और ‘विरोधियों’ के खिलाफ ‘परिष्कृत एवं सर्जिकल’ साइबर हमलों को अंजाम देने की क्षमता के कारण, साइबर सुरक्षा के मामले में, अमेरिका, शीर्ष स्तर पर एकमात्र देश है।
  • दूसरे स्तर के देशों में शामिल चीन, साइबर पावर के मामले में अमेरिका से कम से कम एक दशक पीछे है।

भारत विशिष्ट अवलोकन:

  1. अपने क्षेत्र की भू-रणनीतिक अस्थिरता और साइबर खतरे के बारे में गहन जागरूकता के बावजूद, भारत ने साइबरस्पेस सुरक्षा के लिए अपनी नीति और सिद्धांत विकसित करने में केवल “मामूली प्रगति” की है।
  2. जून 2020 में, लद्दाख में विवादित सीमा क्षेत्र में चीन के साथ हुए सैन्य टकराव के बाद, भारतीय नेटवर्क के खिलाफ चीनी गतिविधियों की तीव्र वृद्धि से साइबर सुरक्षा के प्रति भारतीय चिंताएं बढ़ गयी हैं।
  3. वर्तमान में भारत का लक्ष्य,अमेरिका, ब्रिटेन और फ्राँस सहित प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय भागीदारों की मदद से नई क्षमता का निर्माण करके तथा संयम मानदंडों को विकसित करने हेतु ठोस अंतर्राष्ट्रीय कार्रवाई की तलाश में अपनी कमज़ोरियों को दूर करना है।
  4. साइबर गवर्नेंस में संस्थागत सुधार करने के प्रति भारत का दृष्टिकोण “धीमा और वृद्धिशील” रहा है, और सिविल और सैन्य डोमेन में साइबर सुरक्षा के लिए प्रमुख समन्वय प्राधिकरण, क्रमशः 2018 और 2019 के अंत तक स्थापित किए गए हैं।

भारत के लिए आगे की राह:

रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास अपनी महत्त्वपूर्ण डिजिटल-औद्योगिक क्षमता का उपयोग करने और अपनी साइबर सुरक्षा रणनीति में सुधार हेतु एक संपूर्ण समाजिक दृष्टिकोण अपनाकर, साइबर शक्तियों की दूसरी श्रेणी में पहुँचने का एक बेहतरीन अवसर है।

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप 2004 में स्थापित ‘राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन’ (NTRO) के बारे में जानते हैं? यह प्रधान मंत्री कार्यालय के तहत, ‘राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार’ के अधीन कार्य करता है और इसका मुख्य कार्य खुफिया जानकारी एकत्र करना है। NTRO के बारे में अद्धिक जानकारी के लिए पढ़ें: 

 

प्रीलिम्स और मेंस लिंक:

भारत के संबंध में रिपोर्ट प्रमुख निष्कर्ष, चिंताएं और प्रदर्शन

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

अमेरिका का ‘डिजिटल मिलेनियम कॉपीराइट एक्ट’


संदर्भ:

हाल ही में, अमेरिका के ‘डिजिटल मिलेनियम कॉपीराइट एक्ट’ (Digital Millennium Copyright Act- DMCA), 1998 के उल्लंघन के लिए कथित रूप से प्राप्त एक नोटिस पर ‘केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री’ के ट्विटर अकाउंट से एक घंटे के लिए लॉक कर दिया गया था।

‘डिजिटल मिलेनियम कॉपीराइट एक्ट’ क्या है?

DMCA, अमेरिका में पारित एक कानून है और इंटरनेट पर बौद्धिक संपदा (Intellectual Property- IP) को मान्यता देने वाले विश्व के पहले कानूनों में से एक है।

  • यह, विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (World Intellectual Property Organisation- WIPO) के सदस्य देशों द्वारा वर्ष 1996 में हस्ताक्षरित दो संधियों, ‘कॉपीराइट संधि’ और ‘प्रदर्शन और फोनोग्राम संधि’ (Performances and Phonograms Treaty) के कार्यान्वयन की निगरानी करता है।
  • इस दोनों संधियों के तहत, सदस्य राष्ट्रों और हस्ताक्षरकर्त्ताओं को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में, संधि पर सह-हस्ताक्षरकर्त्ता देशों के नागरिकों द्वारा निर्मित, ‘बौद्धिक संपदा’ (IP) को सुरक्षा प्रदान करना अनिवार्य है।
  • यह क़ानून, संधि के हस्ताक्षरकर्त्ताओं को कॉपीराइट किए गए कार्य की सुरक्षा हेतु तकनीकी उपायों के माध्यम से धोखाधड़ी को रोकना सुनिश्चित करने हेतु बाध्य करती है।
  • साथ ही, यह डिजिटल सामग्री के लिए आवश्यक अंतर्राष्ट्रीय कानूनी सुरक्षा भी प्रदान करती है।

DMCA नोटिस जारी करने की शक्ति और प्रक्रिया:

  1. कोई भी सामग्री निर्माता जो यह मानता है, कि उसकी मूल सामग्री को किसी भी रूप में किसी उपयोगकर्त्ता या वेबसाइट द्वारा बिना अनुमति अथवा अधिकार के कॉपी किया गया है, वह अपनी बौद्धिक संपदा की चोरी या उल्लंघन का हवाला देते हुए एक आवेदन कर सकता है।
  2. फेसबुक, इंस्टाग्राम या ट्विटर जैसे सोशल मीडिया मध्यस्थो के मामले में, सामग्री निर्माता, अपने मूल- निर्माता होने के प्रमाण के साथ सीधे संबंधित प्लेटफ़ॉर्म से संपर्क कर सकते हैं।
  3. चूंकि ये कंपनियां, WIPO संधि पर हस्ताक्षरकर्ता देशों में कार्य करती हैं, अतः वैध और कानूनी DMCA टेकडाउन नोटिस (Takedown Notice) प्राप्त होने पर, ये उक्त सामग्री को हटाने के लिए बाध्य होती हैं।

‘विश्व बौद्धिक संपदा संगठन’ (WIPO) क्या है?

‘विश्व बौद्धिक संपदा संगठन’ (World Intellectual Property Organization- WIPO) संयुक्त राष्ट्र की 17 विशिष्ट एजेंसियों में से एक है।

  • इसकी स्थापना, वर्ष 1967 में “रचनात्मक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने और विश्व भर में बौद्धिक संपदा की सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए” की गई थी।
  • वर्तमान में, भारत सहित विश्व के 193 देश WIPO के सदस्य हैं।

‘बौद्धिक संपदा’ क्या होती है?

(Intellectual Property- IP)

  • यह संपत्तियों की एक श्रेणी होती है, जिसमें मानव बुद्धि द्वारा रचित अमूर्त कृतियाँ और मुख्यतः कॉपीराइट, पेटेंट तथा ट्रेडमार्क शामिल होते हैं।
  • इसमें, ट्रेड सीक्रेट, प्रचार अधिकार, नैतिक अधिकार और अनुचित प्रतिस्पर्द्धा के खिलाफ अधिकार, जैसे अन्य प्रकार के अधिकार भी शामिल होते हैं।

इंस्टा जिज्ञासु:

  1. WIPO संधियों के अलावा, बौद्धिक संपदा (IP) को ‘बौद्धिक संपदा अधिकारों के व्यापार संबंधी पहलुओं’ (Trade Related Aspects of Intellectual Property Rights-TRIPS) समझौते के तहत भी संरक्षण शामिल है। TRIPS के बारे में जानने हेतु संक्षेप में पढ़ें, 
  2. क्या आप जानते हैं कि ‘ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स’, कॉर्नेल यूनिवर्सिटी, INSEAD और विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) द्वारा जारी किया जाता है? इसके नवीनतम संस्करण के निष्कर्षों के बारे में जानने हेतु देखें:

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. TRIPS क्या है?
  2. भारतीय पेटेंट अधिनियम, 2005
  3. भारत में पेटेंट प्रशासन
  4. अनिवार्य लाइसेंसिंग क्या है?
  5. DMCA के बारे में
  6. WIPO संधियों के बारे में

मेंस लिंक:

अनिवार्य लाइसेंसिंग पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


बैहतान बांध

(Baihetan Dam)

यह दक्षिण-पश्चिमी चीन में निर्माणाधीन, विश्व का दूसरा सबसे बड़ा जलविद्युत (हाइड्रोइलेक्ट्रिक) बांध है।

  • इसे यांग्त्ज़ी की एक सहायक नदी, ‘जिंशा नदी’ पर बनाया जा रहा है।
  • 289 मीटर ऊंचे बैहेतन बांध में 16 उत्पादन इकाइयां होंगी, जिनमें से प्रत्येक की क्षमता 10 लाख किलोवाट होगी।
  • यांग्त्ज़ी पर वर्ष 2003 में शुरू किया गया ‘थ्री गोरजेस डैम’ (Three Gorges Dam), विश्व का सबसे बड़ा हाइड्रोइलेक्ट्रिक डैम है।

2-DG ऑरल ड्रग

(2-DG oral drug)

  • हाल ही में, डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज ने दवा 2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज (2-DG) को वाणिज्यिक रूप से लॉन्च करने की घोषणा की है।
  • यह, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित एक कोविड-रोधी दवा है।
  • अस्पतालों में कोरोनावायरस रोगियों के उपचार हेतु 2-DG दवा को सहायक चिकित्सा थेरपी के रूप में आपातकालीन उपयोग करने की अनुमति प्रदान की गई है।

यह किस प्रकार कार्य करती है?

  • 2DG दवा पाउच में पाउडर के रूप में आती है, जिसे पानी में घोलकर मुहँ के माध्यम से लिया जाता है।
  • यह दवा, वायरस से संक्रमित कोशिकाओं में संग्रहीत हो जाती है, तथा वायरल के संश्लेषण और ऊर्जा उत्पादन को रोककर वायरस को विकसित होने से रोक देती है।

प्रभाव: विषाणु से संक्रमित कोशिकाओं में इसका चयनात्मक संग्रहण, इस दवा को अद्वितीय बनाता है। यह दवा, अस्पताल में भर्ती मरीज के ठीक होने में लगने वाले औसत समय को ढाई दिन और ऑक्सीजन की मांग को 40 प्रतिशत तक कम कर देती है।

कोविन (CoWIN)

  • CoWIN, एक इलेक्ट्रॉनिक वैक्सीन इंटेलिजेंस नेटवर्क, eVIN का एक विस्तार है, जिसका उपयोग टीकाकरण कार्यक्रमों की रियल टाइम प्रतिक्रिया एकत्र करने के लिए किया जाता है।
  • यह देश में कोविड-19 टीकाकरण की योजना, कार्यान्वयन, निगरानी और मूल्यांकन के लिए क्लाउड-आधारित आईटी समाधान है।

चर्चा का कारण:

मध्य एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के लगभग 50 देशों ने CoWIN प्रौद्योगिकी में रुचि का संकेत दिया है। भारत शीघ्र ही इन देशों के लिए अपनी CoWIN एप्लिकेशन का एक ओपन-सोर्स संस्करण प्रदान करेगा।

अग्नि-पी (प्राइम) मिसाइल

(Agni-P (Prime) missile)

यह, नई पीढ़ी की परमाणु सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल है।

  • हाल ही में, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा इसका सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया है।
  • अग्नि-पी, अग्नि श्रेणी की नई पीढ़ी की अत्याधुनिक उन्नत मिसाइल है। यह एक कनस्तरीकृत मिसाइल (canisterised missile) है जिसकी मारक क्षमता 1,000 से 2,000 किमी है।
  • मिसाइलों का कनस्तरीकरण मिसाइल को लॉन्च करने में लगने वाले आवश्यक समय को कम करता है और इसके भंडारण और गतिशीलता में सुधार करता है।

अग्नि-V, अग्नि श्रृंखला की सबसे लंबी और अंतर-महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) है, जिसकी मारक सीमा 5,000 किमी से अधिक है। इसका पहले ही कई बार सफलतापूर्वक परीक्षण किया जा चुका है।

फुकुओका ग्रैंड पुरस्कार

(Fukuoka Grand Prize)

हाल ही में, प्रसिद्ध पत्रकार पी. साईनाथ को फुकुओका पुरस्कार 2021 (Fukuoka Prize) के तीन प्राप्तकर्ताओं में से एक के रूप में चुना गया है।

  • साईनाथ को फुकुओका पुरस्कार का ‘ग्रैंड प्राइज’ प्रदान किया जाएगा, जबकि जापान के प्रो. किशिमोतो मियो (Kishimoto Mio) को ‘अकादमिक पुरस्कार’ और थाईलैंड की फिल्म निर्माता प्रबदा यून (Prabda Yoon) को ‘कला और संस्कृति’ पुरस्कार दिया जाएगा।
  • फुकुओका पुरस्कार, एशियाई संस्कृतियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और एशियाई लोगों के बीच आदान-प्रदान तथा आपसी समझ को विकसित करने हेतु एक व्यापक ढांचा तैयार करने के लिए प्रतिष्ठित लोगों को प्रतिवर्ष पुरस्कार दिए जाते हैं।
  • अब तक, ग्यारह भारतीयों को फुकुओका पुरस्कार दिया जा चुका है।
  • यह पुरस्कार वर्ष 1990 में स्थापित किया गया था।

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