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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 16 June 2021

 

 

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-I

1. राम प्रसाद बिस्मिल

 

सामान्य अध्ययन-II

1. सुप्रीम कोर्ट द्वारा इतालवी नौसैनिकों के खिलाफ आपराधिक मामला बंद

2. खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) सम्मेलन

 

सामान्य अध्ययन-III

1. पासिफए प्रोजेक्ट और इसका महत्व

2. ‘मरुस्थलीकरण, भू-क्षरण तथा सूखा’ पर उच्च स्तरीय वार्ता

3. विधिविरूद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम, 1967

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. ओडिशा का ‘रज-पर्व’ उत्सव

2. भारत के लिए ऑक्‍सीजन परियोजना

3. ‘दक्षिणी महासागर’ को विश्व के पांचवें महासागर के रूप में मान्यता

4. वर्ल्ड गिविंग इंडेक्स 2021

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

राम प्रसाद बिस्मिल


संदर्भ:

राम प्रसाद बिस्मिल का जन्म 11 जून 1897 को उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के एक गुमनाम से गांव में हुआ था।

वह उन सर्वाधिक उल्लेखनीय भारतीय क्रांतिकारियों में से एक हैं, जिन्होंने ब्रिटिश उपनिवेशवाद से लड़ाई लड़ी और साम्राज्यवादी ताकतों के खिलाफ सदियों के संघर्ष के बाद, राष्ट्र को स्वतंत्रता की हवा में सांस लेना संभव बनाया।

महत्वपूर्ण संगठनों / कार्यों से जुड़ाव:

  1. रामप्रसाद बिस्मिल, कम उम्र में ही आर्य समाज से जुड़ गए थे।
  2. बिस्मिल ने, औरैया के एक स्कूल शिक्षक गेंदा लाल दीक्षित के साथ, अपने संगठनों, मातृवेदी और शिवाजी समिति को मजबूत करने के लिए इटावा, मैनपुरी, आगरा और शाहजहांपुर जिलों के युवाओं को संगठित किया।
  3. उन्होंने 28 जनवरी 1918 को देशवासियों के नाम शीर्षक से एक पत्रिका की और अपनी ‘मैनपुरी की प्रतिज्ञा’ शीर्षक वाली कविता के साथ वितरित किया। उन्होंने क्रांतिकारी संगठनों के लिए धन इकट्ठा करने हेतु सरकारी खजाने को लूटा।
  4. कांग्रेस पार्टी के साथ परस्पर विरोधी विचारों और बढ़ती नाराजगी के बाद, उन्होंने हिंदुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन का गठन किया, जिसमें शीघ्र ही भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे नेता भी शामिल हो गए।

इनसे संबंधित घटनाएँ:

  • इन्होने वर्ष 1918 के मैनपुरी षड्यंत्र में भाग लिया।
  • 9 अगस्त 1925 को राम प्रसाद बिस्मिल ने अशफाकउल्ला खान और अन्य साथियों के साथ लखनऊ के निकट काकोरी में ट्रेन को लूटने की योजना को अंजाम दिया।

विचारधारा:

स्वतंत्रता संग्राम के उनके आदर्श महात्मा गांधी के बिल्कुल विपरीत थे और तथाकथित रूप से उनका कहना था, “स्वतंत्रता अहिंसा के माध्यम से प्राप्त नहीं की जा सकती”।

राज घाट:

19 दिसंबर 1927 को गोरखपुर जेल में उन्हें फांसी पर लटका दिया गया और राप्ती नदी के तट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। बाद में यह स्थान राजघाट के नाम से जाना जाने लगा।

इंस्टा जिज्ञासु:

काकोरी षडयंत्र में कौन शामिल थे और इसका उद्देश्य क्या था? यहां पढ़ें, 

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. रामप्रसाद बिस्मिल की विचारधारा
  2. संबंधित संगठन
  3. स्वतंत्रता संग्राम में योगदान
  4. महत्वपूर्ण साहित्यिक कृतियाँ

मेंस लिंक:

राम प्रसाद बिस्मिल के स्वतंत्रता संग्राम के आदर्श महात्मा गांधी के आदर्शों के बिल्कुल विपरीत थे, टिप्पणी कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा इतालवी नौसैनिकों के खिलाफ आपराधिक मामला बंद


संदर्भ:

सुप्रीम कोर्ट ने केरल तट पर दो मछुआरों की हत्या करने के आरोपी दो इतालवी नौसैनिकों के खिलाफ जारी आपराधिक मामले को बंद कर दिया है। इसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण द्वारा दिए गए फैसले के अनुसार इतालवी सरकार द्वारा अपने देश में ही इन नौसैनिकों पर मुकदमा चलाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

शीर्ष अदालत ने वर्ष 2012 में केरल तट के पास हुई समुद्री गोलीबारी में मारे गए मछुआरों के परिजनों को इटली गणराज्य द्वारा जमा की गई 10 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि को स्वीकार कर लिया है।

अनुच्छेद 142:

चूंकि, ‘संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि’ (United Nations Convention on Law of Seas – UNCLOS) के तहत अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण द्वारा सुनाए गए फैसले के अनुसार, इतालवी नौसैनिकों पर आपराधिक मुकदमा चलाना भारत के अधिकार क्षेत्र में नहीं है, अतः भारत सरकार ने शीर्ष अदालत से, इन इतालवी नौसैनिकों के खिलाफ आपराधिक मामलों को रद्द करने हेतु संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत प्राप्त असाधारण शक्ति का प्रयोग करने का आग्रह किया गया था।

अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण द्वारा सुनाया गया फैसला:

  • 3: 2 के नजदीकी वोट के साथ, अधिकरण ने फैसला सुनाते हुए कहा कि, इतालवी नौसनिकों को ‘संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि’ (UNCLOS) के तहत इतालवी राज्य-अधिकारियों के रूप में राजनयिक प्रतिरक्षा हासिल थी।
  • इस घटना की आपराधिक जांच फिर से शुरू करने के लिए “इटली द्वारा व्यक्त की गई प्रतिबद्धता” को ध्यान में रखते हुए, अधिकरण ने कहा कि, इस मामले में, भारत को अपने अधिकार क्षेत्र का उपयोग नहीं करना चाहिए।

इंस्टा जिज्ञासु:

‘नौवहन स्वतंत्रता कार्यवाही’ अर्थात ‘फ्रीडम ऑफ़ नैविगेशन ऑपरेशन’ (FONOP) क्या है? यहां पढ़ें,

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. PCA- रचना, कार्य और सदस्य
  2. UNCLOS क्या है?
  3. UNCLOS के अनुच्छेद 87, 90 और 100 किससे संबंधित हैं?
  4. इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फॉर लॉ ऑफ द सी (ITLOS) के बारे में
  5. NIA क्या है?
  6. स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA) के बारे में
  7. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 253

मेंस लिंक:

PCA के कार्यों और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

 खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO)  सम्मेलन


संदर्भ:

हाल ही में, ‘खाद्य एवं कृषि संगठन’ (Food and Agriculture Organization- FAO) सम्मेलन के 42वें सत्र का आयोजन किया गया था।

यह पहली बार है, जब FAO सम्मलेन वर्चुअल मोड में आयोजित किया गया है।

सम्मेलन के बारे में:

  1. खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) सम्मेलन प्रति दो वर्ष में आयोजित होता है और यह FAO का सर्वोच्च शासी निकाय (Governing Body) है।
  2. सम्मलेन में, संगठन की नीतियों का निर्धारण, बजट के लिए मंजूरी और खाद्य एवं कृषि मुद्दों पर सदस्य देशों के लिए सिफारिशें देने जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जाते हैं।

FAO की रणनीतिक रूपरेखा 2022-2031:

इस वर्ष के सम्मेलन में FAO के सदस्य देशों द्वारा ‘रणनीतिक रूपरेखा’ (Strategic Framework) 2022-2031 अपनाई जाएगी।

  • इस फ्रेमवर्क का उद्देश्य, किसी को भी पीछे नहीं छोड़ते हुए, बेहतर उत्पादन, बेहतर पोषण, बेहतर पर्यावरण और बेहतर जीवन के लिए, कृषि-खाद्य प्रणालियों को अधिक कुशल, समावेशी, लचीला, और संवहनीय प्रकार में परिवर्तन करने के माध्यम से सतत विकास एजेंडा 2030 में सहयोग करना है।
  • ये चार बेहतर (Four Betters) उद्देश्य, सतत विकास लक्ष्यों (SDGs), विशेषकर SDG 1 (निर्धनता-उन्मूलन), SDG 2 (भुखमरी-उन्मूलन), और SDG 10 (असमानता में कमी) को हासिल करने में सहयोग करने हेतु, FAO द्वारा लागू किये जाने वाले कार्य संयोजन-सिद्धांतो को अभिवयक्त करते हैं।

खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO):

(Food and Agriculture Organization)

यह, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भुखमरी-उन्मूलन हेतु किये जाने वाले प्रयासों का नेतृत्व करने वाली संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है।

  • मुख्यालय: रोम, इटली
  • स्थापना: 16 अक्टूबर 1945
  • FAO का लक्ष्य: खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) का लक्ष्य सभी के लिए खाद्य सुरक्षा प्राप्त करना, तथा लोगों तक सक्रिय, स्वस्थ जीवन जीने हेतु पर्याप्त उच्च गुणवत्ता वाले भोजन की नियमित पहुंच सुनिश्चित कराना है।

महत्वपूर्ण रिपोर्ट और कार्यक्रम (संक्षिप्त विवरण):

  1. खाद्य संकट पर वैश्विक रिपोर्ट
  2. प्रति दो वर्ष में, वैश्विक वन-स्थिति का प्रकाशन
  3. वर्ष 1961 में FAO और विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा खाद्य मानकों तथा दिशानिर्देशों को विकसित करने हेतु कोडेक्स एलेमेंट्रिस आयोग (Codex Alimentarius Commission) का गठन
  4. वर्ष 1996 में, FAO ने विश्व खाद्य सम्मलेन (World Food Summit) का आयोजन किया। इस शिखर सम्मेलन रोम घोषणा (Rome Declaration) पर हस्ताक्षर किये गए, जिसके तहत वर्ष 2015 तक भूख से पीड़ित लोगों की संख्या को आधा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।
  5. वर्ष 1997 में, FAO ने भूख से लड़ने में सहायता प्राप्त करने हेतु टेलीफूड, संगीत, खेल कार्यक्रमों और अन्य गतिविधियों का एक अभियान शुरू किया।
  6. वर्ष 1999 में FAO सद्भावना राजदूत कार्यक्रम शुरू किया गया था। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लगभग 1 अरब लोग भरपूर खाद्य सामग्री होने के दौरान भी भूख और कुपोषण से पीड़ित व्यक्तियों की ओर जनता और मीडिया का ध्यान आकर्षित करना है।
  7. वर्ष 2004 में भोजन के अधिकार संबंधी दिशा-निर्देशों को अपनाया गया, जिसके तहत राष्ट्रों के लिए ‘भोजन के अधिकार’ संबंधी उनके दायित्वों को पूरा करने हेतु मार्गदर्शन दिए गया।
  8. FAO ने 1952 में ‘इंटरनेशनल प्लांट प्रोटेक्शन कन्वेंशन’ (International Plant Protection Convention IPPC) गठित किया।
  9. 29 जून 2004 को ‘खाद्य एवं कृषि हेतु पादप आनुवांशिक संसधानों पर अन्तराष्ट्रीय संधि’ (International Treaty on Plant Genetic Resources for Food and Agriculture, also called Plant TreatyITPGRFA), जिसे ‘सीड ट्रीटी’ (Seed Treaty) भी कहा जाता है, लागू की गयी।
  10. दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में सतत विकास पर विश्व शिखर सम्मेलन के दौरान 2002 में विश्व स्तर पर महत्वपूर्ण कृषि विरासत प्रणाली (Globally Important Agricultural Heritage SystemsGIAHS) भागीदारी पहल की अवधारणा तैयार की गई थी।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. FAO, स्थापना और उद्देश्यों के बारे में
  2. महत्वपूर्ण रिपोर्ट और कार्यक्रम

मेंस लिंक:

विश्व खाद्य कार्यक्रम पर एक टिप्पणी लिखिए।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि भारत ने FAO की 75वीं वर्षगांठ (16 अक्टूबर 2020) के उपलक्ष्य में 75 रुपये का स्मारक सिक्का जारी किया था?

स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

पासिफए प्रोजेक्ट और इसका महत्व


(PASIPHAE Project and its importance)

‘पोलर-एरियाज़ स्टेलर-इमेजिंग इन पोलेराइज़ेशन हाई-एक्यूरेसी एक्सपेरीमेंट’ (Polar-Areas Stellar-Imaging in Polarisation High-Accuracy Experiment – PASIPHAE) अर्थात ‘पासिफए’ एक अंतर्राष्ट्रीय सहयोगी आकाश सर्वेक्षण परियोजना है।

इस प्रोजेक्ट के तहत, वैज्ञानिकों का लक्ष्य लाखों तारों से निकलने वाले प्रकाश में होने वाले ध्रुवीकरण या ध्रुवण (Polarisation) का अध्ययन करना है।

पृष्ठभूमि:

ध्रुवीकरण, प्रकाश का एक गुण होता है, जो प्रकाश तरंग के दोलन करने की दिशा को दर्शाता है।

सर्वेक्षण की क्रिया-विधि:

सर्वेक्षण में में उत्तरी और दक्षिणी आसमान को एक साथ देखने के लिए दो हाई-टेक ऑप्टिकल पोलरिमीटर्स (Polarimeters) का उपयोग किया जाएगा।

  • सर्वेक्षण में, काफी धुंधले तारों से निकलने वाले प्रकाश के ध्रुवीकरण पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। ये तारे बहुत अधिक दूरी पर स्थित है और अभी तक इनके ध्रुवीकरण संकेतों का व्यवस्थित रूप से अध्ययन नहीं किया गया है।
  • इन तारों की दूरी GAIA उपग्रह द्वारा की गई माप से ज्ञात की जाएगी।
  • इन आंकड़ों का संयोजन करके, खगोलविद WALOP (वाइड एरिया लीनियर ऑप्टिकल पोलारिमीटर) नामक एक अत्याधुनिक पोलरिमीटर उपकरण के द्वारा विस्तृत आकाश क्षेत्रों के अंतर-तारकीय माध्यम की पहली चुंबकीय क्षेत्र टोमोग्राफी मैपिंग (magnetic field tomography mapping) करेंगे।

परियोजना का महत्व:

सिद्धांत के अनुसार, ब्रह्मांड के तीव्र स्फीतिकारी चरण के दौरान उत्सर्जित CMB विकिरण के एक अल्पांश के चिह्न एक विशिष्ट प्रकार के ध्रुवीकरण पर मिलने चाहिए, इस ध्रुवीकरण को तकनीकी रूप से बी-मोड सिग्नल के रूप में जाना जाता है।

  • इन बी-मोड सिग्नलों की उत्पत्ति, ब्रह्मांड-स्फीति के दौरान देखी जाने वाली शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण तरंगों के परिणामस्वरूप मानी जाती है।
  • हमारी अपनी आकाशगंगा में पाए जाने वाले धूल के विस्तृत बादलों के कारण, इसमें मौजूद भारी मात्रा में ध्रुवीकृत विकिरण और इन संकेतों को अलग करना मुश्किल हो जाता है।
  • संक्षेप में, PASIPHAE प्रोजेक्ट के तहत इन बाधाओं के प्रभाव का पता लगाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि अंततः हम ब्रह्मांड की शुरुआत में घटित घटनाओं के बारे में जान सकें।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

प्रकाश के विभिन्न गुणों के बारे में जानने हेतु देखें: Click here

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ध्रुवीकरण क्या होता है?
  2. PASIPHAE के बारे में
  3. GAIA सैटेलाइट के बारे में

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

‘मरुस्थलीकरण, भू-क्षरण तथा सूखा’ पर उच्च स्तरीय वार्ता


(High-Level Dialogue on Desertification, Land Degradation and Drought– DLDD)

संदर्भ:

हाल ही में, भू-क्षरण को रोकने हेतु किए जा रहे प्रयासों की प्रगति का आकलन करने तथा अच्छी जमीनों का जीर्णोद्धार करने तथा उन्हें पूर्व रूप में लाने के लिए वैश्विक प्रयासों पर आगे का रास्ता तय करने हेतु ‘संयुक्‍त राष्‍ट्र मरुस्‍थलीकरण रोकथाम अभिसमय’ (United Nations Convention to Combat Desertification – UNCCD) के सहयोग से ‘मरुस्थलीकरण, भू क्षरण और सूखा (Desertification, Land Degradation and Drought – DLDD) पर उच्च-स्तरीय वार्ता का आयोजन किया गया था।

प्रधानमंत्री मोदी ‘संयुक्‍त राष्‍ट्र मरुस्‍थलीकरण रोकथाम अभिसमय’ (UNCCD) के ‘कॉन्फ्रेंस ऑफ़ पार्टीज़’ अर्थात ‘पक्षकारों के सम्मेलन’ के 14 वें सत्र के अध्यक्ष हैं।

स्वस्थ भूमि की आवश्यकता:

भूमि हमारे समाज की नींव है तथा वैश्विक खाद्य सुरक्षा और पर्यावरणीय स्वास्थ्य, भूखमरी-उन्मूलन, गरीबी उन्मूलन और सस्ती ऊर्जा के लिए आधारशिला है। यह, सतत विकास हेतु एजेंडा 2030 की सफलता को आधार प्रदान करती है।

चुनौतियां:

  • विश्व स्तर पर, पृथ्वी के स्थल क्षेत्र का पांचवां भाग – 2 बिलियन हेक्टेयर से अधिक – निम्नीकृत है, और इसमें कुल कृषि भूमि का आधे से अधिक भाग शामिल है।
  • यदि हम मृदा प्रबंधन की पद्धतियों में बदलाव नहीं करते हैं तो वर्ष 2050 तक 90% से अधिक भूमि का निम्नीकरण हो सकता है।
  • भूमि-क्षरण से पृथ्वी के स्थल भाग क्षेत्र का पांचवा भाग और 2 अरब लोगों अर्थात लगभग 40% वैश्विक आबादी की आजीविका पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • भूमि-क्षरण की वजह से जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता-क्षति की गति तीव्र होती है, और यह सूखा, वनाग्नि, अनैच्छिक प्रवास और जूनोटिक संक्रामक रोगों के उद्भव में महत्वपूर्ण कारक की भूमिका निभाता है।

संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम अभिसमय (UNCCD) के बारे में:

  • UNCCD की स्थापना वर्ष 1994 में की गयी थी।
  • यह, पर्यावरण और विकास को स्थायी भूमि प्रबंधन से संबद्ध करने वाला, क़ानूनी रूप से बाध्यकारी एकमात्र अंतरराष्ट्रीय समझौता है।
  • यह, रियो पृथ्वी सम्मेलन के दौरान एजेंडा 21 के अंतर्गत प्रत्यक्ष सिफारिशों के अंतर्गत स्थापित एकमात्र अभिसमय है।
  • फोकस क्षेत्र: UNCCD, सर्वाधिक संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्र और मानव आबादी वाले, विशेष रूप से शुष्क, अर्ध-शुष्क और शुष्क उप-आर्द्र क्षेत्रों को संबोधित करता है, जिसे शुष्क भूमि के रूप में जाना जाता है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

इस अभिसमय का प्रसार करने हेतु, वर्ष 2006 को “अंतर्राष्ट्रीय रेगिस्तान और मरुस्थलीकरण वर्ष” घोषित किया गया था।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. UNCCD के बारे में
  2. उद्देश्य
  3. कार्य

मेंस लिंक:

भूमि-क्षरण और मरुस्थलीकरण में अंतर बताइए? पारिस्थितिकी पर मरुस्थलीकरण के प्रभाव पर चर्चा करें।

स्रोत: पीआईबी।

 

विषय: सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियाँ एवं उनका प्रबंधन- संगठित अपराध और आतंकवाद के बीच संबंध।

 विधिविरूद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम, 1967


(Unlawful Activities Prevention Act)

संदर्भ:

विधिविरूद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम (Unlawful Activities Prevention Act- UAPA), 1967 की एक अन्य रूप से “अस्पष्ट” धारा 15 की रूपरेखा को परिभाषित करते हुए, दिल्ली उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने एक निर्णय देते हुए, अधिनियम की धारा 18, 15, 17 को लागू करने पर कुछ महत्वपूर्ण सिद्धांत निर्धारित किए हैं।

संबंधित प्रकरण:

नागरिकता विरोधी (संशोधन) अधिनियम, 2019 का विरोध के दौरान किसी “बड़ी साजिश” का हिस्सा होने के आरोपों का सामना करने वाले, दिल्ली-दंगों के आरोपियों को जमानत देते समय यह मुद्दा सामने आया। इनमें से कुछ विरोध-प्रदर्शन हिंसक रूप में परिवर्तित हो गए थे, जिसके परिणामस्वरूप उत्तर-पूर्वी दिल्ली में कई मौतें हो गयी थी।

UAPA की धारा 15, 17 और 18:

  1. अधिनियम की धारा 15, ‘आतंकवादी कृत्यों’ से संबंधित अपराधों को आरोपित करती है।
  2. धारा 17 के तहत आतंकवादी कृत्यों के लिए धन जुटाने पर दण्डित करने का प्रावधान किया गया है।
  3. धारा 18, के अंतर्गत ‘आतंकवादी कृत्य करने हेतु साजिश आदि रचने’ या आतंकवादी कृत्य करने हेतु तैयारी करने वाले किसी भी कार्य’ संबंधी अपराधों के लिए आरोपित किया जाता है।

अदालत द्वारा की गई प्रमुख टिप्पणियां:

  1. “आतंकवादी अधिनियम” (Terrorist Act) को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।
  2. अदालत ने ‘हितेंद्र विष्णु ठाकुर मामले’ में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि, ‘आतंकवादी गतिविधियां’ वे होती है, जिनसे निपटना, सामान्य दंड कानूनों के तहत कानून प्रवर्तन एजेंसियों की क्षमता से बाहर होता है। ।
  3. हर आतंकवादी एक अपराधी हो सकता है लेकिन हर अपराधी को आतंकवादी नहीं कहा जा सकता (हितेंद्र विष्णु ठाकुर निर्णय)।
  4. आतंकवादी कृत्यों की तुलना, राज्य में सामान्य कानून व्यवस्था की समस्या से नहीं की जानी चाहिए।
  5. “आतंकवादी अधिनियम” को आईपीसी के तहत पारंपरिक अपराधों के अंतर्गत आने वाले मामलों में लापरवाही से लागू नहीं किया जा सकता है।

इस फैसले के निहितार्थ:

  1. इस फैसले के साथ ही, अदालत ने राज्य के लिए UAPA के तहत आतंकवाद के आरोप में व्यक्ति को हिरासत में लेने के लिए मानदंड ऊँचे कर दिए हैं।
  2. फैसले में व्यक्तियों के खिलाफ, अनिवार्य रूप से “आतंकवाद” मामलों की श्रेणी में नहीं आने वाले मामलों में भी UAPA के कथित दुरुपयोग की ओर संकेत किया गया है।
  3. छत्तीसगढ़ में आदिवासियों के खिलाफ, जम्मू और कश्मीर में प्रॉक्सी सर्वर के माध्यम से सोशल मीडिया का उपयोग करने वालों, मणिपुर में पत्रकारों तथा अन्य लोगों के खिलाफ, विस्तृत श्रेणी के कथित अपराधों के लिए, राज्य द्वारा इस प्रावधान का उपयोग करने में तीव्र वृद्धि को देखते हुए अदालत द्वारा वयक्त की गई यह सर्तकता अति महत्वपूर्ण है।

पृष्ठभूमि:

वर्ष 2019 में UAPA के तहत कुल 1126 मामले दर्ज किए गए,  जबकि वर्ष 2015 में इन मामलों की संख्या 897 थी।

UAPA के बारे में अधिक जानकारी के लिए देखें: Click here

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. विधिविरूद्ध क्रियाकलाप की परिभाषा
  2. अधिनियम के तहत केंद्र की शक्तियां
  3. क्या ऐसे मामलों में न्यायिक समीक्षा लागू है?
  4. 2004 और 2019 में संशोधन द्वारा किए गए बदलाव।
  5. क्या विदेशी नागरिकों को अधिनियम के तहत आरोपित किया जा सकता है?

मेंस लिंक:

क्या आप सहमत हैं कि विधिविरूद्ध क्रियाकलाप (निवारण) संशोधन अधिनियम मौलिक अधिकारों के लिए हानिकारक साबित हो सकता है? क्या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए स्वतंत्रता का बलिदान करना न्यायसंगत है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


ओडिशा का ‘रज-पर्व’ उत्सव

  • ओडिशा में तीन दिनों तक मनाया जाने वाला यह उत्सव, धरती माता (भूमा देवी) तथा महिलाओं के लिए समर्पित है।
  • इस पर्व के पहले दिन को ‘पहिलो रजो’, दूसरे दिन को ‘मिथुन संक्रांति’ तथा तीसरे दिन को ‘भूदाहा’ अथवा ‘बासी रजा’ कहा जाता है।
  • चौथे और अंतिम दिन, त्योहार का समापन वसुमती स्नान अथवा भूमा देवी के स्नान के रूप में होता है जिसे वसुमती गढ़ुआ कहा जाता हैं।
  • यह पर्व ग्रीष्म ऋतु की समाप्ति और मानसून के आगमन से भी जुड़ा हुआ है।

भारत के लिए ऑक्‍सीजन परियोजना

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय की परियोजना ‘प्रोजेक्ट O2 फॉर इंडिया’ अर्थात ‘भारत के लिए ऑक्‍सीजन परियोजना’ चिकित्सा ऑक्सीजन की मांग में हुई इस वृद्धि को पूरा करने के लिए देश की क्षमता को बढ़ाने के लिए काम कर रहे हितधारकों को समर्थ बनाती है।

दक्षिणी महासागरको विश्व के पांचवें महासागर के रूप में मान्यता

हाल ही में, ‘नेशनल ज्योग्राफिक पत्रिका’ द्वारा दक्षिणी महासागर (Southern Ocean) को विश्व के पांचवें महासागर के रूप में मान्यता दी गई है।

  1. दक्षिणी महासागर, एकमात्र ऐसा महासागर है जो ‘तीन अन्य महासागरों को स्पर्श करता है और एक महाद्वीप को पूरी तरह से घेरता है।
  2. इसकी उत्तरी सीमा 60 डिग्री दक्षिण अक्षांश को स्पर्श करती है।
  3. दक्षिणी महासागर को, 34 मिलियन वर्ष पूर्व निर्मित अंटार्कटिक परिधुर्वीय धारा द्वारा भी परिभाषित किया जाता है। यह धारा अंटार्कटिका के चारों ओर पश्चिम से पूर्व की ओर प्रवाहित होती है।

‘इंटरनेशनल हाइड्रोग्राफिक ऑर्गनाइजेशन’’ द्वारा भी वर्ष 1937 में इसके लिए मान्यता दी गई थी, किंतु वर्ष 1953 में इसे निरस्त कर दिया था।

वर्ल्ड गिविंग इंडेक्स 2021

(World Giving Index)

विश्व दाता सूचकांक अर्थात ‘वर्ल्ड गिविंग इंडेक्स’ (WGI), चैरिटीज एड फाउंडेशन (CAF) द्वारा प्रकाशित एक वार्षिक रिपोर्ट है। यह रिपोर्ट दुनिया भर से धर्मार्थ प्रयासों से संबंधित दुनिया का सबसे बड़ा सर्वेक्षण है। इसका पहला संस्करण सितंबर 2010 में जारी किया गया था।

यह रिपोर्ट ‘दान करने की प्रवृत्ति’ के तीन पहलुओं का अवलोकन करती है:

  1. किसी अजनबी की मदद करना
  2. धर्मार्थ हेतु दान किया गया धन
  3. किसी संगठन के लिए दिया गया स्वैच्छिक समय

नवीनतम निष्कर्ष:

  1. इंडोनेशिया, विश्व का सर्वाधिक उदार देश है।
  2. इस साल के सर्वाधिक उदार शीर्ष 10 देशों में केवल ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड, उच्च आय वाले देश हैं।
  3. भारत 14वां सबसे धर्मार्थ देश है।

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