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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 12 June 2021

 

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

1. ‘वन नेशन वन राशन कार्ड’ योजना

2. पाकिस्तान में जाधव को अपील करने का अधिकार देने हेतु विधेयक पारित

3. वाहन कबाड़ नीति

 

सामान्य अध्ययन-III

1. शुक्र ग्रह के लिए यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी का एनविज़न मिशन

2. ‘धरोहर वृक्षों’ के संरक्षण हेतु महाराष्ट्र सरकार द्वारा संशोधन प्रस्तावित

3. CHIME टेलीस्कोप द्वार अभूतपूर्व परिणाम

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. चीन-श्रीलंका मैत्री अस्पताल

2. उमलिंग ला

3. राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG)

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: सार्वजनिक वितरण प्रणाली के उद्देश्य, कार्यप्रणाली, सीमाएं, सुधार; बफर स्टॉक और खाद्य सुरक्षा के मुद्दे; प्रौद्योगिकी मिशन; पशुपालन का अर्थशास्त्र।

वन नेशन वन राशन कार्ड’ योजना


संदर्भ:

हाल ही में, उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल सरकार से ‘वन नेशन वन राशन कार्ड’ (One Nation One Ration Card) योजना तत्काल लागू करने को कहा है, इससे योजना के लाभार्थी, विशेषकर प्रवासी श्रमिकों को, देश भर में कहीं से भी रियायती खाद्य वस्तुओं को पाने का लाभ उठाने में सहायता मिलेगी।

पश्चिम बंगाल के अलावा, असम, छत्तीसगढ़ और दिल्ली राज्यों में अभी यह योजना शुरू नहीं की गयी है।

पृष्ठभूमि:

शीर्ष अदालत “प्रवासी श्रमिकों की समस्याओं और दुखों” से संबंधित एक स्वत: संज्ञान (suo motu) मामले पर सुनवाई की जा रही है।

योजना के बारे में:

एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड या ‘वन नेशन वन राशन कार्ड’ (ONORC), सभी लाभार्थियों, विशेषकर प्रवासी श्रमिकों के लिए, ‘सार्वजनिक वितरण प्रणाली’ (PDS) का लाभ उठाने हेतु, देश भर में अपनी पसंद की किसी भी ‘सार्वजनिक वितरण प्रणाली’ दुकान का उपयोग करना सुनिश्चित करता है।

लाभ: इस योजना के लागू होने पर कोई भी गरीब व्यक्ति, एक स्थान से दूसरे स्थान पर प्रवास करने पर खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत सब्सिडी वाले खाद्यान्न प्राप्त करने से वंचित नहीं होगा। इसका उद्देश्य विभिन्न राज्यों से लाभ उठाने के लिये एक से अधिक राशन कार्ड रखने वाले व्यक्तियों पर रोक लगाना भी है।

महत्व: यह योजना लाभार्थियों को स्वतंत्रता प्रदान करती है, क्योंकि इसके तहत वे किसी एक सार्वजानिक वितरण प्रणाली (PDS) दुकान से बंधे नहीं होंगे तथा दुकान मालिकों पर इनकी निर्भरता भी कम होगी। इस योजना के लागू होने पर PDS संबधित भ्रष्टाचार के मामलों पर अंकुश भी लगेगा।

‘वन नेशन वन राशन कार्ड’ का मानक प्रारूप

  1. राष्ट्रीय पोर्टेबिलिटी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकारों को द्वि-भाषी प्रारूप में राशन कार्ड जारी करने के लिए कहा गया है। इसमें स्थानीय भाषा के अतिरिक्त, अन्य भाषा के रूप में हिंदी अथवा अंग्रेजी को सम्मिलित किया जा सकता है।
  2. राज्यों को 10 अंकों का राशन कार्ड नंबर जारी करने के लिए कहा गया है, जिसमें पहले दो अंक राज्य कोड होंगे और अगले दो अंक राशन कार्ड नंबर होंगे।
  3. इसके अतिरिक्त, राशन कार्ड में परिवार के प्रत्येक सदस्य के लिए यूनिक मेंबर आईडी बनाने के लिए राशन कार्ड नंबर के साथ दो अंक जोड़े जायेंगे।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम’ और ‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन’ के बीच अंतर जानते हैं? यहां पढ़ें , यहां पढ़ें 

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. पीडीएस क्या है?
  2. NFSA क्या है? पात्रता? लाभ?
  3. उचित मूल्य की दुकानें (fair price shops) कैसे स्थापित की जाती हैं?
  4. वन नेशन वन राशन कार्ड (ONORC) योजना की प्रमुख विशेषताएं

मेंस लिंक:

वन नेशन वन राशन कार्ड योजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

 पाकिस्तान में जाधव को अपील करने का अधिकार देने हेतु विधेयक पारित


संदर्भ:

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली द्वारा मौत की सजा पाए कैदी कुलभूषण जाधव को अपील करने का अधिकार प्रदान करने के लिए ‘अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (समीक्षा और पुनर्विचार) विधेयक, 2020 (ICJ (Review and Re-consideration) Bill, 2020) पारित किया गया है।

इस विधेयक का उद्देश्य, जाधव को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (International Court of Justice- ICJ) के फैसले के अनुरूप ‘कांसुलर एक्सेस’ अर्थात वकील करने की अनुमति प्रदान करना है।

संबंधित प्रकरण:

  1. अप्रैल 2017 में एक 51 वर्षीय सेवानिवृत्त भारतीय नौसेना अधिकारी कुलभूषण जाधव को एक पाकिस्तानी सैन्य अदालत ने जासूसी और आतंकवाद के आरोप में मौत की सजा सुनाई थी।
  2. भारत ने जाधव को वकील उपलब्ध कराने पर रोक लगाने तथा ‘मौत की सजा’ को चुनौती देने के लिए पाकिस्तान के खिलाफ ‘अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय’ (ICJ) में अपील की।
  3. हेग स्थित ‘अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय’ ने जुलाई 2019 में इस मामले पर फैसला सुनाते हुए कहा कि, पाकिस्तान, जाधव की दोष-सिद्धि तथा सुनाई गयी सजा की ‘प्रभावी समीक्षा तथा पुनर्विचार’ करे तथा बिना देरी किए भारत के लिए जाधव को वकील की सेवा उपलब्ध कराने की अनुमति प्रदान करे।

‘अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय’ की महत्वपूर्ण टिप्पणियां:

  • पाकिस्तान सेना द्वारा जाधव को हिरासत में लेने के तुरंत बाद उसकी गिरफ्तारी के बारे में भारत को सूचित नहीं करने पर, इस्लामाबाद ने ‘वियना कन्वेंशन ऑन कॉन्सुलर रिलेशंस’ (Vienna Convention on Consular Relations) के अनुच्छेद 36 का उल्लंघन किया है।
  • भारत को जाधव से संपर्क करने और हिरासत के दौरान उससे मिलने तथा उसके लिए कानूनी प्रतिनिधित्व की व्यवस्था करने के अधिकार से वंचित किया गया है।

‘अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय’ (ICJ) के बारे में:

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय’ (International Court of JusticeICJ)  की स्थापना वर्ष 1945  में संयुक्त राष्ट्र के एक चार्टर द्वारा की गई थी और इसके द्वारा अप्रैल 1946 में कार्य आरंभ किया गया था।

  • यह संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख न्यायिक अंग है तथा हेग (नीदरलैंड) के पीस पैलेस में स्थित है।
  • यह, संयुक्त युक्त राष्ट्र की छह प्रमुख संस्थाओं के विपरीत एकमात्र ऐसी संस्था है जो न्यूयॉर्क में स्थित नहीं है।
  • यह राष्ट्रों के बीच कानूनी विवादों का निपटारा करता है और अधिकृत संयुक्त राष्ट्र के अंगों तथा विशेष एजेंसियों द्वारा इसके लिए निर्दिष्ट किये गए कानूनी प्रश्नों पर अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार सलाह देता है।

संरचना:

  • अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में 15 न्यायाधीश होते हैं जिन्हें संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद द्वारा नौ वर्ष के कार्यकाल हेतु चुना जाता है। ये दोनों संस्थाएं एक ही समय पर, लेकिन अलग-अलग मतदान करती हैं।
  • न्यायाधीश के रूप में निर्वाचित होने के लिये किसी उम्मीदवार को दोनों संस्थाओं में पूर्ण बहुमत प्राप्त होना चाहिये।
  • अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में निरंतरता सुनिश्चित करने हेतु न्यायालय की कुल संख्या के एक-तिहाई सदस्य, प्रति तीन साल में चुने जाते हैं और ये सदस्य न्यायाधीश के रूप में पुन: निर्वाचित होने के पात्र होते हैं।
  • ‘अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय’ के लिए एक लेखागार (रजिस्ट्री), जो उसका स्थायी प्रशासनिक अंग होती है, द्वारा सहायता प्रदान की जाती है। अंग्रेज़ी और फ्रेंच इसकी आधिकारिक भाषाएँ हैं।

‘अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय’ के 15 न्यायाधीश निम्नलिखित क्षेत्रों से चुने जाते हैं:

  1. अफ्रीका से तीन
  2. लैटिन अमेरिका और कैरेबियन देशों से दो
  3. एशिया से तीन
  4. पश्चिमी यूरोप और अन्य राज्यों से पाँच
  5. पूर्वी यूरोप से दो

न्यायाधीशों की स्वतंत्रता:

अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के अन्य निकायों के विपरीत, अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में सरकार के प्रतिनिधि नहीं होते है। न्यायालय के सदस्य ‘स्वतंत्र न्यायाधीश’ होते हैं, और अपने कर्तव्यों की शपथ लेने से पूर्व, जिनका पहला काम खुली अदालत में यह घोषणा करना होता है, कि वे अपनी शक्तियों का निष्पक्षता और शुद्ध अंतःकरण से उपयोग करेंगे।

अधिकार क्षेत्र और कार्य:

  • ‘अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय’ दोहरे अधिकार क्षेत्र सहित एक ‘विश्व न्यायालय’ के रूप में कार्य करता है अर्थात् देशों के मध्य कानूनी विवादों का निपटारा करना (विवादास्पद मामले), जिनके लिए पक्षकार देशों द्वारा अदालत में लाया जाता है, तथा संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न अंगों और विशेष एजेंसियों द्वारा उसके लिए निर्दिष्ट किये गए कानूनी प्रश्नों पर सलाह प्रदान करना (सलाहकार कार्यवाही)।
  • केवल संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश तथा ‘अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय’ अधिनियम पर हस्ताक्षरकर्ता देश अथवा विशेष शर्तों के तहत ‘न्यायालय’ के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार करने वाले देश ही ‘विवादास्पद मामलों’ (Contentious Cases) के निपटान हेतु ‘अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय’ में पक्षकार हो सकते हैं।
  • ‘अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय’ का निर्णय अंतिम और पक्षकार देशों के लिए बाध्यकारी होता है, तथा इसके फैसले के खिलाफ अपील नहीं की जा सकती है (ज्यादा से ज्यादा, मामले से संबंधित किसी नए तथ्य की खोज पर, इसके फैसले की फिर से व्याख्या की जा सकती है)।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

राजनयिक उन्मुक्ति के बारे में आप क्या जानते हैं? Click here

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ICJ और ICC के बीच अंतर।
  2. इन संगठनों की भौगोलिक अवस्थिति स्थिति और आसपास के देशों का अवलोकन।
  3. यूएस और तालिबान के बीच दोहा समझौता।
  4. रोम संविधि क्या है?

मेंस लिंक:

‘अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय’ (ICJ) पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

वाहन कबाड़ नीति


(Vehicle Scrappage Policy)

वित्त और कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने ‘वाहन कबाड़ नीति’ (Vehicle Scrappage Policy) के कार्यान्वयन में तेजी लाने को कहा है।

‘वाहन कबाड़ नीति’ के बारे में:

  • इस नीति के अनुसार, पुराने वाहनों का फिर से पंजीकरण किए जाने से पहले इनके लिए एक फिटनेस टेस्ट पास करना होगा, और 15 साल से अधिक पुराने सरकारी वाहनों तथा 20 साल से अधिक पुराने निजी वाहनों को तोड़ दिया जाएगा।
  • हतोत्साहन उपाय के रूप में, 15 वर्ष या इससे पुराने वाहनों का फिर से पंजीकरण करने पर, इनके शुरुआती पंजीकरण से ज्यादा शुल्क लिया जाएगा।
  • नीति के तहत, पुराने वाहनों के मालिकों द्वारा पुराने और अनफिट वाहनों को हटाने के लिए प्रोत्साहन देने हेतु, निजी वाहनों पर 25% तक और व्यावसायिक वाहनों पर 15% तक रोड-टैक्स में छूट देने के लिए राज्य सरकारों से कहा जा सकता है।

 नई नीति से जुडी समस्याएं:

  1. ट्रकों के लिए सीमित प्रोत्साहन और कम कीमत देने वाली अर्थनीति।
  2. चिह्नित करने योग्य अन्य श्रेणियों के वाहनों की कम संख्या।
  3. 15 साल पुरानी एक शुरुआती श्रेणी की छोटी कार को स्क्रैप करने से लगभग 70,000 रुपए प्राप्त होंगे, जबकि इसे बेचने पर लगभग 95,000 रुपए मिल सकते हैं। इस कारण स्क्रैपिंग अनाकर्षक बन जाती है।

समय की मांग:

इन सब कारणों को देखते हुए, स्क्रैपिंग नीति को पूरी तरह से लागू करने के लिए, हमें ‘जिन वाहनों का जीवन समाप्त हो चुका है, अर्थात ‘एंड ऑफ़ लाइफ व्हीकल्स’ (ELV) को सड़क से हटाने के संदर्भ में एक व्यापक योजना तैयार करनी चाहिए। माल-भाडा ट्रांसपोर्टर्स को एक पर्याप्त एवं उत्साही वित्तीय सहायता दिए जाने की आवश्यकता है। हालांकि,  यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि जब तक पुराने वाहनों के बेड़े सड़क से नहीं हटाए जाएंगे, तब तक  बीएस-VI (BS-VI) वाहन लागू करने का लाभ पूरी तरह से नहीं मिल पाएगा।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप ‘इंटरनेशनल शिप रिसाइकलिंग कन्वेंशन’, जिसे ‘हांगकांग कन्वेंशन’ भी कहा जाता है, के बारे में जानते हैं? यहां पढ़ें,

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. इस नीति की मुख्य विशेषताएं
  2. प्रयोज्यता
  3. नीति के तहत दिया जाने वाला प्रोत्साहन

मेंस लिंक:

‘वाहन कबाड़ नीति’ से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

शुक्र ग्रह के लिए यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी का एनविज़न मिशन


(European Space Agency’s EnVision mission to Venus)

संदर्भ:

हाल ही में, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (European Space Agency- ESA) द्वारा ‘एनविज़न’ (EnVision) को अपने अगले ‘ऑर्बिटर’ (Orbiter) के रूप में चुने जाने की घोषणा की गई है। इसे 2030 के दशक में किसी भी समय शुक्र ग्रह की यात्रा पर भेजा जाएगा।

एनविज़न’ क्या है?

एनविज़न’ (EnVision), यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के नेतृत्व में एक अंतरिक्ष अभियान है, इसमें नासा (NASA) की भी भागीदारी है।

  • इस मिशन को ‘एरियन 6’ रॉकेट द्वारा प्रक्षेपित किया जाएगा। इस अंतरिक्ष यान को शुक्र ग्रह तक पहुंचने में लगभग 15 महीने का समय लगेगा और परिक्रमा कक्षा में स्थापित होने में 16 महीने और लगेंगे।
  • उद्देश्य: शुक्र ग्रह के वायुमंडल और सतह का अध्ययन करना, इसके वायुमंडल में पाई जाने वाली गैसों (trace gases) की निगरानी करना तथा ग्रह की सतही संरचना का विश्लेषण करना।
  • नासा द्वारा उपलब्ध कराया गया एक रडार, ग्रह की सतह का चित्रण करने और उसका मानचित्र तैयार करने में सहायता करेगा।

शुक्र ग्रह के लिए अन्य मिशन:

  • हाल ही में, नासा द्वारा, शुक्र ग्रह के लिए, डाविंसी प्लस (DAVINCI +) तथा वेरिटास (VERITAS) नामक दो मिशनों का चयन किया गया है।
  • इससे पहले, ESA के नेतृत्व में ‘वीनस एक्सप्रेस’ (Venus Express) (2005-2014) नामक एक मिशन भेजा गया था। इसका उद्देश्य वायुमंडलीय अनुसंधान करना और ग्रह की सतह पर ज्वालामुखीय हॉटस्पॉट का पता लगाना था।
  • शुक्र ग्रह के लिए भेजा जाने वाला पहला अंतरिक्ष यान, सोवियत संघ द्वारा विकसित ‘वेनेरा सीरीज’ (Venera series) का था, इसके बाद नासा के मैगलन (Magellan) मिशन (1990-1994) ने शुक्र ग्रह का अध्ययन किया।
  • फ़िलहाल, जापान का अकात्सुकी मिशन (Akatsuki mission) अपनी कक्षा से शुक्र ग्रह का अध्ययन कर रहा है।

शुक्र ग्रह का अध्ययन करने में वैज्ञानिकों की दिलचस्पी का कारण:

शुक्र ग्रह के अध्ययन की आवश्यकता

  • शुक्र ग्रह को अक्सर आकार, द्रव्यमान, घनत्व, बनावट और गुरुत्वाकर्षण में समानता के कारण पृथ्वी की ‘जुड़वां बहन’ के रूप में वर्णित किया जाता है।
  • ऐसा माना जाता है कि दोनों ग्रह 5 बिलियन वर्ष पूर्व एक सघन गैस के बादल से एक ही समय पर निर्मित हुए है, जिससे दोनों की उत्‍पत्ति में समानता प्रतीत होती है।
  • शुक्र ग्रह, पृथ्वी की तुलना में सूर्य से लगभग 30 प्रतिशत अधिक नजदीक है, जिसके परिणामस्वरूप इस ग्रह पर सौर प्रवाह की तीव्रता काफी अधिक है।

मोटे तौर पर, पृथ्वी और शुक्र का आकार और संरचना लगभग एक समान है, फिर भी दोनों ग्रह, एक दूसरे से काफी भिन्न रूप में विकसित हुए हैं। शुक्र के चारो और घने बादलों का आवरण पाया जाता है, जिसकी वजह से ऊष्मा वायुमंडल में बाहर की और नहीं निकल पाती है, परिणामतः यह सौरमंडल का सबसे गर्म ग्रह है।

इन अभियानों के दौरान, वैज्ञानिक निम्नलिखित प्रश्नों का समाधान करना चाहते हैं:

  1. शुक्र को अपनी वर्तमान अवस्था में पहुचने के लिए किन स्थितियों से गुजरना पड़ा है और क्या यह क्या कोई भविष्य-संकेत देता है कि, पृथ्वी को भी ऐसे ही विनाशकारी ग्रीनहाउस प्रभाव से गुजरना पड़ेगा?
  2. क्या शुक्र ग्रह अभी भी भूगर्भीय रूप से सक्रिय है?
  3. क्या इस ग्रह पर कभी कोई महासागर या किसी प्रकार का कोई जीवन था?
  4. जब हम पृथ्वी जैसे अन्य बाह्य ग्रहों की खोज करते हैं, तो स्थलीय ग्रहों के विकास के बारे में सामान्यतः क्या सबक सीखा जा सकता है?

शुक्र ग्रह के बारे में:

  • पृथ्वी वासियों के लिए शुक्र (Venus), आकाश में चंद्रमा के बाद दूसरा सबसे चमकीला पिंड है।
  • यह अपने चारो ओर घने बादलों के आवरण कारण चमकीला दिखाई देता है, इन बादलों से प्रकाश का परावर्तन और प्रकीर्णन हो जाता है।
  • यह सूर्य का दूसरा निकटतम ग्रह है।
  • समान आकार के कारण इसे पृथ्वी का जुड़वां ग्रह कहा जाता है।

शुक्र ग्रह, पृथ्वी से किस प्रकार भिन्न है?

  1. शुक्र ग्रह का वायुमंडल अत्याधिक घना है, जिससे ऊष्मा का प्रवाह बाहर की ओर नही हो पाता है, यही कारण है कि, सूर्य के सबसे नजदीक स्थित ‘बुध’ ग्रह के बाद आने पर भी, यह सौरमंडल का सबसे गर्म ग्रह है।
  2. शुक्र ग्रह पर सतह का तापमान 471 डिग्री सेल्सियस तक पहुच सकता है, जोकि सीसा को पिघलाने के लिए पर्याप्त होता है।
  3. शुक्र अपनी कक्षा में सूर्य के चारों ओर आगे गति करता है, किंतु अपनी धुरी पर धीमी गति से पीछे की ओर घूमता है। इसका मतलब है कि शुक्र ग्रह पर सूर्य पश्चिम में उगता है और पूर्व में अस्त होता है।
  4. शुक्र ग्रह का कोई चंद्रमा नहीं है और न ही इसके चारो ओर कोई वलय है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

  1. वैज्ञानिकों ने शुक्र (Venus) ग्रह से टकरा कर लौटने वाली रेडियो तरंगों के माध्यम से शुक्र ग्रह के बारे में नए आंकड़े प्राप्त किए हैं। इनके बारे में यहाँ पढ़ें: 
  2. शुक्र इतना गर्म ग्रह क्यों है? यहां पढ़ें: here.

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. शुक्र ग्रह से जुड़े प्रमुख तथ्य
  2. इसे पृथ्वी की जुड़वां ग्रह क्यों कहा जाता है?
  3. नासा द्वारा घोषित नवीनतम मिशनों के बारे में
  4. पिछले ऐतिहासिक मिशन
  5. शुक्र तथा पृथ्वी के मध्य तुलना

मेंस लिंक:

शुक्र ग्रह के लिए नासा के नवीनतम मिशनों के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

‘धरोहर वृक्षों’ के संरक्षण हेतु महाराष्ट्र सरकार द्वारा संशोधन प्रस्तावित


संदर्भ:

हाल ही में, महाराष्ट्र सरकार ने ‘धरोहर वृक्षों’ या ‘हेरिटेज ट्रीज’ (Heritage Trees) के संरक्षण हेतु प्रावधान लागू करने के लिए ‘महाराष्ट्र (शहरी क्षेत्र) वृक्ष सुरक्षा एवं संरक्षण अधिनियम’ 1975 (Maharashtra (Urban Areas) Protection and Preservation of Trees Act of 1975) में संशोधन का प्रस्ताव प्रस्तुत किया है।

धरोहर वृक्ष’ या ‘हेरिटेज ट्री’ क्या हैं?

लगभग 50 वर्ष या उससे अधिक की आयु वाले वृक्ष को ‘धरोहर वृक्ष’ के रूप में परिभाषित किया जाएगा। इनमे, समय-समय पर अधिसूचित, वृक्षों की कई विशिष्ट प्रजातियां शामिल की जा सकती हैं।

धरोहर वृक्ष’ की अवधारणा प्रस्तुत करने का कारण:

  • हेरिटेज ट्री को विशेष सुरक्षा प्रदान की जाएगी।
  • प्रतिपूरक वृक्षारोपण (Compensatory plantation)– किसी ‘धरोहर वृक्ष’ को काटने पर, इसकी आयु के बराबर संख्या में नए वृक्ष लगाने होंगे।
  • प्रतिपूरक वृक्ष लगाने वाले संगठन को सात वर्षों तक इन नए वृक्षों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी और वृक्षों को जियो-टैग (Geo-Tag) करना होगा।
  • यदि प्रतिपूरक वृक्षारोपण संभव नहीं होता है, तो पेड़ काटने वाले को, काटे जा रहे पेड़ों के आर्थिक मूल्यन के बराबर मुआवजा देना होगा।

वृक्ष प्राधिकरण:

  1. प्रस्तावित संशोधनों के अनुसार, स्थानीय नगर निकायों और परिषदों में ‘वृक्ष प्राधिकरण’ (Tree Authority) का गठन किया जाएगा, जो वृक्षों के संरक्षण के संबंध में सभी निर्णय लेगा।
  2. यह प्राधिकरण, हेरिटेज वृक्षों की गिनती के साथ-साथ, हर पांच साल में सभी वृक्षों की गणना भी सुनिश्चित करेगा।
  3. वृक्ष प्राधिकरण को “शहरी क्षेत्रों में वृक्षावरण बढ़ाने और मौजूदा वृक्षों की सुरक्षा करने” का कार्य सौंपा गया है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

किसी वृक्ष की आयु किस प्रकार निर्धारित की जाती है? यहाँ पढ़ें: 

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

CHIME टेलीस्कोप द्वार अभूतपूर्व परिणाम


संदर्भ:

हाल ही में, ‘कैनेडियन हाइड्रोजन इंटेंसिटी मैपिंग एक्सपेरिमेंट’ (Canadian Hydrogen Intensity Mapping Experiment- CHIME) के सहयोग से वैज्ञानिकों ने टेलीस्कोप के पहले FRB कैटलॉग में ‘तीव्र रेडियो प्रस्फोटों’ (Fast Radio Bursts – FRBs) का सबसे बड़ा संग्रह एकत्रित किया है।

इसका महत्व:

रेडियो खगोल विज्ञान के क्षेत्र में एक ‘तीव्र रेडियो प्रस्फोटों’ (FRBs) को देख पाना एक दुर्लभ घटना माना जाता है। रेडियो खगोलविदों ने ‘तीव्र रेडियो प्रस्फोट’ को पहली बार वर्ष 2007 में देखा था, इसके बाद, CHIME प्रोजेक्ट से पहले, वैज्ञानिकों द्वारा अपने टेलीस्कोप में लगभग 140 ‘तीव्र रेडियो प्रस्फोटों’ (FRBs) को ही देखा जा सका था।

‘तीव्र रेडियो प्रस्फोट’ क्या होते हैं?

(Fast Radio Burst- FRB)

  • एफआरबी, विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के रेडियो बैंड में प्रकट होने वाली प्रकाश की अजीब तरह से चमकीली दीप्ति होती है, जो केवल कुछ मिलीसेकंड के लिए प्रदीप्ति होती है, फिर बिना किसी निशान छोड़े गायब हो जाती है।
  • ये संक्षिप्त और रहस्यमयी प्रकाश-दीप्तियाँ, ब्रह्मांड के विभिन्न और दूरस्थ हिस्सों के साथ-साथ हमारी अपनी आकाशगंगा में भी देखे जाती हैं।
  • इनकी उत्पत्ति के बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं है और उनका प्रकटन अत्यधिक अप्रत्याशित है।

CHIME प्रोजेक्ट के बारे में:

  1. यह ब्रिटिश कोलंबिया, कनाडा में स्थित एक विशाल स्थैतिक रेडियो दूरबीन है।
  2. पृथ्वी के परिघूर्णन के दौरान यह दूरबीन, आकाश के आधे भाग से प्रतिदिन रेडियो संकेत प्राप्त करती है।
  3. इस दूरबीन का कोई भी हिस्सा चलायमान नहीं है और यह, पृथ्वी के चक्कर काटने पर, हर दिन आकाश के आधे भाग का अवलोकन करती रहती है।
  4. CHIME प्रोजेक्ट में, ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय, मैकगिल विश्वविद्यालय, टोरंटो विश्वविद्यालय और कनाडाई राष्ट्रीय अनुसंधान परिषद की ‘डोमिनियन रेडियो एस्ट्रोफिजिकल ऑब्जर्वेटरी’ की भागीदारी है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

दुनिया का सबसे बड़ा रेडियो टेलीस्कोप ‘स्क्वायर किलोमीटर एरे’ क्या है? यहां पढ़ें,

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. रेडियो तरंगें क्या होती हैं?
  2. विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम क्या होता है?
  3. ‘मैग्नेटर’ क्या हैं?
  4. न्यूट्रॉन तारा क्या है?

मेंस लिंक:

‘तीव्र रेडियो प्रस्फोटों’ (FRBs) पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


चीन-श्रीलंका मैत्री अस्पताल

  • हाल ही में, श्रीलंका के उत्तर मध्य प्रांत में स्थित पोलोन्नारुवा में ‘चीन-श्रीलंका मैत्री अस्पताल’ का उद्घाटन किया गया।
  • इसे 60 मिलियन डॉलर के चीनी अनुदान से तैयार किया गया है।

 

उमलिंग ला

(Umling La)

समुद्र तल से 5793 मीटर (19,005 फीट) की ऊंचाई पर, उमलिंग ला (Umling La) विश्व की सबसे ऊंची मोटर योग्य सड़कों में से एक है।

  • यह, जम्मू और कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र में स्थित है।
  • उमलिंग ला दर्रे से गुजरने वाली 54 किमी लंबी सड़क चिसुमले (Chisumle) और डेमछोक (Demchok) गांवों को जोड़ती है।
  • इस सड़क का निर्माण परियोजना हिमांक के तहत बीआरओ द्वारा किया गया है, और इसके निर्माण में छह वर्ष का समय लगा है।

राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG)

NSG एक आतंकवाद-रोधी इकाई है, जिसे औपचारिक रूप से 1986 में संसद के एक अधिनियम- राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड अधिनियम, 1986′ द्वारा गठित किया गया था।

  • यह गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करता है और एक कार्य-उन्मुख (task-oriented) बल है।
  • इसे एक ‘संघीय आकस्मिक बल’ माना जाता है, और इसे भारत में सभी प्रकार के आतंकवाद से निपटने का विशिष्ट कार्य सौंपा गया है।
  • NSG कार्मिको को उनकी काली वर्दी और उनकी वर्दी पर काली बिल्ली के प्रतीक चिन्ह के कारण ‘ब्लैक कैट’ भी कहा जाता है।

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