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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 08 June 2021

 

विषयसूची

 सामान्य अध्ययन-II

1. उच्चतम न्यायालय द्वारा अवैध दत्तक ग्रहण पर रोक लगाने का आग्रह

2. G7 कॉर्पोरेट टैक्स समझौता

3. चीन द्वारा आसियान विदेश मंत्रियों की मेजबानी

4. संयुक्त राष्ट्र महासभा’ (UNGA) के अध्यक्ष पद पर मालदीव की जीत

 

सामान्य अध्ययन-III

1. राष्ट्रीय आस्ति पुनर्संरचना कंपनी लिमिटेड (NARCL)

2. तुर्की में ‘सी स्‍नॉट’ का प्रकोप

3. हरियाणा की “प्राण वायु देवता पेंशन योजना” और ऑक्सी वन (ऑक्सीजन वन)

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

 उच्चतम न्यायालय द्वारा अवैध दत्तक ग्रहण पर रोक लगाने का आग्रह


संदर्भ:

कोविड महामारी की वजह से अनाथ हुए बच्चों को निजी व्यक्तियों और संगठनों के द्वारा अवैध रूप से गोद लेने संबंधी बड़ी संख्या में शिकायतें प्राप्त हो रही हैं, इस विषय पर ‘राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग’ (National Commission for Protection of Child Rights – NCPCR) द्वारा खतरे की घंटी बजाने के बाद सुप्रीम कोर्ट इस मामले में हस्तक्षेप करने के लिए सहमत हो गया है।

संबंधित प्रकरण:

‘राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग’ (NCPCR) के आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल, 2021 से 5 जून, 2021 के दौरान 3,621 बच्चे अनाथ हो गए, 26,176 बच्चों ने माता या पिता को खो दिया और 274 बच्चों का परित्यक्त कर दिया गया है। इस अवधि के दौरान महामारी की दूसरी लहर अपने सबसे विकराल रूप में थी और यह पूरे देश में मौत के निशान छोड़ गई है।

  • NCPCR को मई माह में, निजी व्यक्तियों और संगठनों द्वारा, गोद लेने के लिए परिवारों और बच्चों की सहायता करने का दिखावा करते हुए, इन बच्चों के संदर्भ में जानकारी एकत्र करने की कई शिकायतें मिली थीं।
  • सोशल मीडिया पर बच्चों को गोद लेने संबंधी पोस्ट प्रसारित की जा रही हैं। यह स्पष्ट रूप से गैर-कानूनी है और किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम’ अर्थात ‘जेजे एक्ट’ 2015 का उल्लंघन है।
  • इस अधिनियम के तहत, बच्चों के नाम, स्कूल, उम्र, पता या किसी भी जानकारी के संबंध में पहचान को उजागर करने को निषिद्ध किया गया है।

अनाथ हो चुके बच्चों के संदर्भ में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया:

यदि किसी व्यक्ति को किसी ऐसे बच्चे के बारे में जानकारी मिलती है, जिसे देखभाल की जरूरत है, तो उस व्यक्ति के द्वारा निम्नलिखित चार एजेंसियों में से किसी एक से संपर्क किया जाएगा:

  1. चाइल्डलाइन 1098,
  2. जिला बाल कल्याण समिति (CWC),
  3. जिला बाल संरक्षण अधिकारी (DCPO) अथवा
  4. बाल अधिकार संरक्षण राज्य आयोग की हेल्पलाइन।

इसके बाद, बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee– CWC) उस बच्चे का आकलन करेगी तथा और उसे तत्काल ही ‘विशेष दत्तक ग्रहण’ एजेंसी की देखभाल में रखेगी।

जब किसी बच्चे का कोई रिवार नहीं होता है, तो राज्य, उस बच्चे का अभिभावक बन जाता है।

‘जेजे एक्ट’ 2015 के बारे में:

  1. उद्देश्य: विधि का अभिकथित उल्लंघन करते पाए जाने वाले बालकों और देखरेख तथा संरक्षण की आवश्यकता वाले बालकों से संबंधित मामलों का व्यापक रूप से समाधान करना।
  2. अधिनियम के तहत, प्रत्येक जिले में ‘किशोर न्याय बोर्ड’ और ‘बाल कल्याण समितियां’ स्थापित करने का निर्देश दिया गया है। इन संस्थाओं में कम से कम एक महिला सदस्य होनी अनिवार्य है।
  3. इसके अलावा, इसके तहत ‘केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण’ (Central Adoption Resource Authority– CARA) को वैधानिक निकाय का दर्जा दिया गया है, जिससे यह प्राधिकरण अपने कार्यों को प्रभावी ढंग से करने में सक्षम होगा।
  4. राज्य सरकार द्वारा, स्वैच्छिक या गैर-सरकारी संगठनों द्वारा संचालित होने वाले सभी बाल देखभाल संस्थानों के लिए क़ानून के प्रारंभ होने की तारीख से 6 महीने के भीतर अधिनियम के तहत अनिवार्य रूप से पंजीकृत होना आवश्यक है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप भावी दत्तक माता-पिता के लिए पात्रता मानदंड के बारे में जानते हैं? यहां पढ़ें, 

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘जेजे एक्ट’ के प्रमुख प्रावधान
  2. CARA के बारे में
  3. अधिनियम के अनुसार बाल-देखभाल संस्थानों का पंजीकरण
  4. अधिनियम में नवीनतम प्रस्तावित संशोधन

मेंस लिंक: ‘.

किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम’ के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

  

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

G7 कॉर्पोरेट टैक्स समझौता


संदर्भ:

हाल ही में, समृद्ध देशों के समूह G7 के वित्त मंत्रियों द्वारा एक नए वैश्विक कॉर्पोरेट कर समझौते (Global Corporate Tax Deal) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

इस समझौते पर अब जुलाई में होने वाली G20 समूह के वित्तीय मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों की बैठक में विस्तार से चर्चा की जाएगी।

नए समझौते के प्रमुख बिंदु:

  • इस समझौते का उद्देश्य, कर-परिहार (Tax Avoidance) रोकना है, और इसके लिए नए समझौते के अनुसार, कंपनियों को उन देशों में करों का भुगतान करना होगा, जहाँ वे व्यापार करती हैं।
  • इस समझौते के तहत, सभी देशों को, परस्पर एक-दूसरे के खिलाफ करों में कटौती करने से बचने हेतु, वैश्विक न्यूनतम कॉर्पोरेट टैक्स दर को 15% रखने के लिए प्रतिबद्ध किया गया है।

न्यूनतम टैक्स दर की आवश्यकता:

  • 15% फ्लोर रेट की अभिपुष्टि करने का निर्णय, अमेरिका द्वारा पूरे विश्व में ‘निम्न-कर वाले इलाकों’ (टैक्स हेवन्स) पर हमले की घोषणा करने के बाद लिया गया है।
  • इस कदम के पीछे का तर्क, बहुराष्ट्रीय परिचालन और मुनाफे को विदेशों में स्थानांतरित करने को हतोत्साहित करना है।

योजना का केंद्र-बिंदु:

  • न्यूनतम टैक्स दर को, ऐप्पल, अल्फाबेट और फेसबुक जैसे डिजिटल दिग्गजों सहित विश्व की कुछ सबसे बड़ी कंपनियों द्वारा प्रभावी कर-दरों का पारगमन किए जाने का हल निकालने हेतु तैयार किया गया है।
  • ये कंपनियां, आम तौर पर, विश्व के प्रमुख बाजारों से अर्जित लाभों को, आयरलैंड या कैरेबियाई देशों जैसे निम्न-टैक्स वाले देशों में भेजने के लिए सहायक कंपनियों के जटिल जाल का सहारा लेती हैं।

इस योजना से संबंधित मुद्दे/समस्याएं:

  1. यह योजना, संप्रभु राष्ट्रों के अपने देश की कर-नीति निर्धारित करने के अधिकार का अतिक्रमण करती है।
  2. एक ‘वैश्विक न्यूनतम दर’, मुख्य रूप से देशों के उस उपकरण से वंचित कर देगी, जिसका उपयोग वे अपने अनुकूल नीतियों को आगे बढ़ाने के लिए करते हैं।
  3. साथ ही, कर-चोरी से निपटने के लिए ‘वैश्विक न्यूनतम टैक्स दर’ की भूमिका बहुत कम रहेगी।

क्या इससे ‘टैक्स हैवन’ का अंत हो जाएगा?

यदि यह समझौता टैक्स हेवन्स को पूरी तरह से खत्म नहीं करता है, तो अपने टैक्स-बिल में कटौती करने की तरकीब लगाने वाली कंपनियों के लिए, इन टैक्स हेवन्स को कम-लाभदायक अवश्य बना देगा और साथ ही, पर्यावरण, सामाजिक और कॉर्पोरेट प्रशासन पर ध्यान देने वाले निवेशकों में इन कंपनियों की साख को भी कम करेगा।

भारत पर प्रभाव:

  • चूंकि भारत की प्रभावी कर-दर, वैश्विक न्यूनतम कर-दर से अधिक है, इसलिए यह भारत में कारोबार करने वाली कंपनियों को प्रभावित नहीं करेगी।
  • वैश्विक न्यूनतम दर, निम्न वैश्विक कर लागत हासिल करने के लिए, निम्न-टैक्स वाले देशों का उपयोग करने वाली कंपनियों को प्रभावित करेगी।
  • इसके अलावा, भारत, अपने बड़े आंतरिक बाजार, प्रतिस्पर्धी दरों पर गुणवत्तापूर्ण श्रम, निर्यात हेतु रणनीतिक अवस्थिति और एक संपन्न निजी क्षेत्र के कारण विदेशी निवेश को आकर्षित करता है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

कॉर्पोरेट टैक्स, भारत में एक प्रत्यक्ष कर है। क्या आप प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों में अंतर जानते हैं? यहां पढ़ें:

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. G7 राष्ट्रों के बारे में।
  2. G20 और G8 समूह क्या हैं।
  3. भारत में कॉर्पोरेट टैक्स संरचना
  4. भारत में समकारी लेवी

मेंस लिंक:

वैश्विक न्यूनतम कॉर्पोरेट टैक्स की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

चीन द्वारा आसियान विदेश मंत्रियों की मेजबानी


संदर्भ:

चीन, हाल ही में प्रस्तावित, आसियान समूह के दस देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी कर रहा है। यह बैठक चीन और आसियान के संबंधों के 30 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित की जा रही है।

आसियान को एक ऐसे प्रमुख स्थान के रूप में देखा जा रहा है जहां चीन और क्वाड पहल, एक-दूसरे को अपना प्रभाव दिखा सकते हैं।

चीन की चिंताएं:

चूंकि दक्षिण पूर्व एशिया अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, अतः ऐसी संभावनाएं हैं, कि चीन का मुकाबला करने के लिए, क्वाड सदस्य, आसियान राष्ट्रों को अपने समूह में शामिल कर सकते हैं।

हाल ही में, चीन ने क्वाड को ‘एशियाई NATO भी बताया था।

आसियान (ASEAN) क्या है?

दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्रों का संघ (Association of Southeast Asian Nations- ASEAN) अर्थात एक क्षेत्रीय संगठन है। इसकी स्थापना एशिया-प्रशांत क्षेत्र के उत्तर-औपनिवेशिक देशों के मध्य बढ़ते हुए तनाव के बीच राजनीतिक और सामाजिक स्थिरता को बढ़ावा देने हेतु की गई थी।

आसियान का आदर्श वाक्य “एक दृष्टि, एक पहचान, एक समुदाय” (One Vision, One Identity, One Community) है।

आसियान का सचिवालय –जकार्ता, इंडोनेशिया में है।

उत्पत्ति (Genesis):

आसियान का गठन वर्ष 1967 में इसके संस्थापक सदस्यों द्वारा आसियान घोषणा (बैंकॉक घोषणा) पर हस्ताक्षर करने के साथ हुआ था।

आसियान के संस्थापक सदस्य: इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर और थाईलैंड।

आसियान के दस सदस्य: ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम।

भारत के लिए आसियान का महत्व:

  • लद्दाख गतिरोध सहित चीन के आक्रामक रवैए की पृष्ठभूमि में, भारत द्वारा ‘आसियान’ को ‘भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी (India’s Act East policy) के केंद्र में रखा गया है। भारत का मानना है, कि इस क्षेत्र में सभी की सुरक्षा और विकास हेतु एक संसक्त और उत्तरदायी आसियान का होना आवश्यक है।
  • क्षेत्र में सभी की सुरक्षा और विकास’ (Security And Growth for All in the Region– SAGAR) अर्थात ‘सागर’ विजन की सफलता के लिए आसियान की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है।
  • कोविड-19 महामारी का अंत होने के बाद, आर्थिक सुधार हेतु आपूर्ति श्रृंखलाओं के विविधीकरण और लचीलेपन के लिए यह क्षेत्र काफी महत्वपूर्ण है।
  • आसियान, भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है, तथा इसके साथ लगभग 86.9 बिलियन अमरीकी डालर का व्यापार होता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. आसियान देशों की भौगोलिक अवस्थिति
  2. आसियान देशों की कुल जनसंख्या
  3. आसियान की अध्यक्षता
  4. आसियान शिखर सम्मेलन कब और कहाँ आयोजित किए जाते हैं?
  5. मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) क्या हैं?

मेंस लिंक:

भारत की आर्थिक, भू-रणनीतिक और सुरक्षा अनिवार्यताओं के लिए आसियान के महत्व का परीक्षण कीजिए?

स्रोत: द हिंदू।

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

 संयुक्त राष्ट्र महासभा’ (UNGA) के अध्यक्ष पद पर मालदीव की जीत


संदर्भ:

मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद को वर्ष 2021-22 के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा का अध्यक्ष चुना गया है। मालदीव के लिए यह उपलब्धि पहली बार हासिल हुई है।

नोट: इस विषय को हम हाल ही में विस्तार से कवर कर चुके हैं। इसके लिए कृपया देखें: Click here

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय।

राष्ट्रीय आस्ति पुनर्संरचना कंपनी लिमिटेड (NARCL)


(National Asset Reconstruction Company Ltd.)

संदर्भ:

ऋणदाताओं द्वारा शुरुआत में 89,000 करोड़ रुपये के 22 खराब ऋण खातों को प्रस्तावित ‘राष्ट्रीय आस्ति पुनर्संरचना कंपनी लिमिटेड’ (National Asset Reconstruction Company Ltd. – NARCL) में अंतरित करने का निर्णय लिया गया है। इससे ऋणदाताओं के लिए अपनी बैलेंस शीट को साफ़ करने में मदद मिलेगी।

NARCL में अंतरित किए जाने वाले अशोध्य ऋणों की कुल राशि लभगग ₹2 ट्रिलियन होगी।

राष्ट्रीय आस्ति पुनर्संरचना कंपनी लिमिटेड’ (NARCL) क्या है?

ऋणदाताओं की तनावग्रस्त आस्तियों की जिम्मेवारी लेने हेतु प्रस्तावित बैड बैंक अर्थात ‘राष्ट्रीय आस्ति पुनर्संरचना कंपनी लिमिटेड’ (National Asset Reconstruction Company Ltd. – NARCL) की स्थापना की घोषणा 2021-22 के बजट में की गई थी।

  • घोषणा के अनुसार, 500 करोड़ और उससे अधिक के बुरे ऋणों को सँभालने हेतु एक बैड बैंक (Bad Bank) की सथापना की जाएगी, तथा इसमें एक ‘आस्ति पुनर्संरचना कंपनी’ (Asset Reconstruction Company- ARC) और एक ‘आस्ति प्रबंधन कंपनी’ (Asset Management Company- AMC) भी शामिल होगी जो बेकार संपत्तियों का प्रबंधन और वसूली करेगी।
  • यह नई इकाई सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्र के बैंकों के सहयोग से स्थापित की जा रही है।

NARCL, मौजूदा ‘आस्ति पुनर्संरचना कंपनियों’ (ARCs) से किस प्रकार भिन्न होगा?

  1. चूंकि, यह विचार सरकार द्वारा प्रस्तुत किया गया है और इसका अधिकाँश स्वामित्व, राज्य के स्वामित्व वाले बैंकों के पास रहने की संभावना है, अतः इस प्रस्तावित बैड बैंक का स्वरूप सार्वजनिक क्षेत्र का होगा।
  2. वर्तमान में, ‘आस्ति पुनर्संरचना कंपनियां’ आमतौर पर ऋणों पर भारी छूट चाहती हैं। चूंकि यह एक सरकारी पहल है, अतः प्रस्तावित बैड बैंक के साथ आकलन संबंधी मुद्दा नहीं होगा।
  3. सरकार समर्थित ‘आस्ति पुनर्संरचना कंपनी’ के पास बड़े खातों को खरीदने के लिए पर्याप्त क्षमता होगी और इस प्रकार बैंकों के लिए इन बुरे खातों को अपने खाता-विवरण में रखने से मुक्त किया जाएगा।

‘आस्ति पुनर्संरचना कंपनी’ (ARC) क्या है?

‘आस्ति पुनर्संरचना कंपनी’ (Asset Reconstruction Companies- ARC), ऐसे विशेष वित्तीय संस्थान होते है जो बैंकों और वित्तीय संस्थानों से ‘गैर-निष्पादित आस्तियों’ (Non-Performing Assets- NPAs) खरीदते हैं, ताकि वे अपनी बैलेंसशीट को साफ कर सकें।

‘आस्ति पुनर्संरचना कंपनी’ अथवा ‘एआरसी’ (ARC), आरबीआई के अंतर्गत पंजीकृत होती हैं।

कानूनी आधार:

‘वित्तीय आस्तियों का प्रतिभूतिकरण और पुनर्रचना एवं प्रतिभूति हित प्रवर्तन’ (Securitization and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Security Interest -SARFAESI) अधिनियम 2002, भारत में ‘आस्ति पुनर्संरचना कंपनियों’ ( ARCs) का गठन करने हेतु वैधानिक आधार प्रदान करता है।

ARCs के लिये पूंजी आवश्यकताएँ:

  • SARFAESI अधिनियम में, वर्ष 2016 में किये गए संशोधनों के अनुसार, किसी ‘आस्ति पुनर्संरचना कंपनी’ (ARC) के पास न्यूनतम 2 करोड़ रुपए की स्वामित्व निधि होनी चाहिये।
  • रिज़र्व बैंक द्वारा वर्ष 2017 में इस राशि को बढ़ाकर 100 करोड़ रुपए कर गिया गया था। ‘आस्ति पुनर्संरचना कंपनी’ के लिए अपनी जोखिम भारित आस्तियों / परिसंपत्तियों के 15% का पूंजी पर्याप्तता अनुपात बनाए रखना आवश्यक है।

आवश्यकता:

बैंकिंग प्रणाली में तनावग्रस्त कुल राशि 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक होगी। तनावग्रस्त आस्तियों और सीमित पूंजी के बोझ तले दबे बैंकों के लिए ‘गैर-निष्पादित आस्तियों’ (NPAs)  को मैनेज करना मुश्किल होगा। सरकार भी केवल सीमित पूंजी ही प्रदान कर सकती है। अतः ऐसी स्थिति में बैड बैंक मॉडल, सरकार और बैंकों दोनों की मदद करेगा।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

सुप्रीम कोर्ट द्वारा वर्ष 2020 में दिए गए एक निर्णय के अनुसार, बैंकिंग से संबंधित गतिविधियों में शामिल सहकारी बैंक ‘बैंकिंग कंपनी’ के अंतर्गत आते हैं और संसद के पास SARFAESI अधिनियम के तहत ऋण की वसूली के लिए प्रक्रिया निर्धारित करने की विधायी क्षमता है। यहां पढ़ें: 

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘एआरसी’ क्या हैं?
  2. ‘SARFAESI अधिनियम’ क्या है?
  3. ‘सुदर्शन सेन समिति’ किससे संबंधित है?
  4. NARCL के बारे में।

मेंस लिंक:

‘आस्ति पुनर्संरचना कंपनी’ (ARC) की भूमिकाओं और कार्यों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

तुर्की में ‘सी स्‍नॉट’ का प्रकोप


(‘Sea Snot’ outbreak in Turkey)

संदर्भ:

काला सागर को एजियन सागर से जोड़ने वाले तुर्की के मरमारा सागर में ‘सी स्‍नॉट’ (Sea Snot) का सबसे बड़ा प्रकोप देखा जा रहा है। इस चिपचिपे पदार्थ को निकटवर्ती ‘काले सागर (ब्लैक सी) और एजियन सागर में भी देखा गया है।

सी स्‍नॉट’ क्या है?

यह धूसर या हरे रंग की कीचड़ / पंक की एक चिपचिपी परत होती है, जिससे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को काफी नुकसान पहुंच सकता है।

  • यह, शैवालों में पोषक तत्वों की अति-प्रचुरता हो जाने पर निर्मित होती है।
  • तुर्की में ‘सी स्‍नॉट’ का प्रकोप पहली बार वर्ष 2007 में दर्ज किया गया था। उसी समय, ग्रीस के नजदीक एजियन सागर में भी ‘सी स्‍नॉट’ को देखा गया था।

शैवालों में पोषक तत्वों की अति-प्रचुरता, का कारण मुख्यतः वैश्विक उष्मन, जल प्रदूषण, घरेलू और औद्योगिक कचरे के समुद्र में अनियंत्रित निर्मोचन, आदि की वजह से होने वाला गर्म मौसम होता है।

प्रभाव एवं चिंताएं:

  • ‘सी स्‍नॉट’, समुद्र से होती हुई इस्तांबुल के दक्षिण में फ़ैल चुकी है, और इसने शहर के किनारे समुद्र तटों और बंदरगाहों को ढँक लिया है।
  • इसकी वजह से देश के समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है- ‘सी स्‍नॉट’ के कारण बड़ी संख्या में मछलियों की मौत हो चुकी है, तथा मूंगा (कोरल) और स्पंज जैसे अन्य जलीय जीव भी मरते जा रहे हैं।
  • अगर इसे अनियंत्रित किया गया, तो यह समुद्री सतह के नीचे पहुँच कर समुद्र तल को ढक सकती है, जिससे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के लिए व्यापक क्षति हो सकती है।
  • समय के साथ, यह मछलियों, केकड़ों, सीप (oysters), कौड़ी या मसल्स (mussels) और समुद्री सितारा मछलियों सहित सभी जलीय जीवों को विषाक्त बना सकती है।
  • जलीय जीवन के अलावा, ‘सी स्‍नॉट’ के प्रकोप से मछुआरों की आजीविका भी प्रभावित हो रही है।
  • इससे इस्तांबुल जैसे शहरों में हैजा जैसी जल-जनित बीमारियों का प्रकोप भी फ़ैल सकता है।

इसके प्रसार को रोकने हेतु तुर्की द्वारा उठाए जा रहे कदम:

  • तुर्की ने संपूर्ण मरमरा सागर को संरक्षित क्षेत्र घोषित करने का फैसला किया है।
  • तटीय शहरों और जहाजों से होने वाले प्रदूषण को कम करने और अपशिष्ट जल-उपचार में सुधार हेतु कदम उठाए जा रहे हैं।
  • आपदा प्रबंधन योजना तैयार की जा रही है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि सभी शैवालीय प्रस्फुटन हानिकारक नहीं होते हैं,  बल्कि कुछ वास्तव में फायदेमंद भी हो सकते हैं। यहां पढ़ें, 

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘सी स्‍नॉट’ क्या है?
  2. शैवालीय प्रस्फुटन क्या होते हैं?
  3. काला सागर के बारे में
  4. एजियन सागर के बारे में
  5. मरमारा का समुद्र कहाँ है?

मेंस लिंक:

‘सी स्‍नॉट’ की उत्पत्ति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

 हरियाणा की “प्राण वायु देवता पेंशन योजना” और ऑक्सी वन (ऑक्सीजन वन)


संदर्भ:

हरियाणा सरकार द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर “प्राण वायु देवता पेंशन योजना” (Pran Vayu Devta Pension Scheme- PVDPS) और ऑक्सी वन (ऑक्सीजन वन) योजनाओं की घोषणा की गई।

‘प्राण वायु देवता पेंशन योजना’ (PVDPS):

  • यह 75 वर्ष और उससे अधिक आयु के वृक्षों को सम्मानित करने की एक पहल है, जिन्होंने जीवन भर ऑक्सीजन का उत्पादन, प्रदूषण कम करके, छाया प्रदान करके मानवता की सेवा की है।
  • पूरे राज्य में ऐसे वृक्षों को चिह्नित किया जाएगा और स्थानीय लोगों को इस योजना में शामिल कर इनकी देखभाल की जाएगी।
  • इस योजना के तहत 75 वर्ष से ऊपर के वृक्षों के रखरखाव के लिए PVDPS के नाम से 2,500 रुपये की पेंशन राशि प्रदान की जाएगी। यह ‘वृक्ष पेंशन’, वृद्धावस्था सम्मान पेंशन की तर्ज पर हर साल बढ़ाई जाएगी।
  • शहरी स्थानीय निकाय (ULB) विभाग, वृक्षों के रखरखाव, प्लेट, ग्रिल आदि लगाने के लिए यह पेंशन प्रदान करेंगे।

ऑक्सी वन (ऑक्सीजन वन) क्या है?

  • ऑक्सी वन (Oxy Van), एक चिन्हित की गई भूमि के टुकड़े हैं, जिन पर 3 करोड़ पेड़ लगाए जाएंगे।
  • पूरे हरियाणा की 8 लाख हेक्टेयर भूमि में से 10 प्रतिशत पर ऑक्सी वन लगाए जाएंगे।
  • इन वनों में विभिन्न प्रकार के पौधे और पेड़ होंगे।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

पौधे ऑक्सीजन का उत्पादन किस प्रकार करते हैं? यहां पढ़ें:

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ऑक्सी वन के बारे में
  2. PVDPS के बारे में
  3. इन योजनाओं की प्रमुख विशेषताएं
  4. पौधों द्वारा ऑक्सीजन किस प्रकार उत्पन्न की जाती है?

मेंस लिंक:

इन योजनाओं की आवश्यकता और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस


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