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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 05 June 2021

 

विषयसूची

 सामान्य अध्ययन-II

1. एसडीजी इंडिया इंडेक्स 2020-21

2. ‘क्लीन एनर्जी मिनिस्ट्रियल – इंडस्ट्रियल डीप डीकार्बनाइजेशन इनीशियेटिव’

 

सामान्य अध्ययन-III

1. LEO उपग्रहों के माध्यम से इंटरनेट सेवा

2. ‘वाटर बियर’ और ‘बेबी स्क्विड’ को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर भेजने का कारण

3. हिमाचल प्रदेश द्वारा ओलावृष्टि रोधी बंदूक परीक्षण

4. ब्लैक कार्बन पर सुदृढ़ नीतियां, हिमनदों के पिघलने में तेजी से कमी लाने में सक्षम: विश्व बैंक

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. शिक्षक पात्रता परीक्षा

2. SAGE पोर्टल

3. ऑपेरशन सागर आरक्षा II

4. आईएनएस संधायक

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

 एसडीजी इंडिया इंडेक्स 2020-21


(SDG India Index)

संदर्भ:

हाल ही में, नीति आयोग द्वारा आज ‘सतत् विकास लक्ष्य भारत सूचकांक’ (Sustainable Development Goals India Index), 2020-21 अर्थात ‘एसडीजी इंडिया इंडेक्स 2020-21 जारी किया गया।

सतत विकास लक्ष्य सूचकांक (एसडीजी सूचकांक) के बारे में:

दिसंबर 2018 में शुरु होने के बाद से, यह सूचकांक भारत में व्यापक रूप से ‘सतत विकास लक्ष्यों’ (एसडीजी) को प्राप्त करने की दिशा की गई प्रगति की निगरानी के लिए प्राथमिक उपकरण बन गया है।

  • यह सूचकांक, राज्यों और केन्द्र-शासित प्रदेशों के लिए वैश्विक लक्ष्यों पर रैंकिंग देकर उनके बीच प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देता है।
  • एसडीजी इंडिया इंडेक्स 2020-21, भारत में संयुक्त राष्ट्र के सहयोग से विकसित किया गया है।
  • यह, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के राष्ट्रीय संकेतक फ्रेमवर्क (National Indicator Framework– NIF) के साथ संरेखित 115 संकेतकों पर सभी राज्यों और केन्द्र – शासित प्रदेशों की प्रगति को आंकता है।

राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों की रैंकिंग किस प्रकार की जाती है?

एसडीजी इंडिया इंडेक्स प्रत्येक राज्य और केन्द्र-शासित प्रदेश के लिए 16 एसडीजी पर लक्ष्य-वार स्कोर की गणना करता है। एसडीजी इंडिया इंडेक्स स्कोर, 0-100 के बीच होते हैं। किसी राज्य/केन्द्र – शासित प्रदेश का स्कोर जितना अधिक होगा, उतनी ही अधिक दूरी तक लक्ष्य हासिल कर लिया होते हैं।

राज्यों और केन्द्र- शासित प्रदेशों को उनके एसडीजी इंडिया इंडेक्स स्कोर के आधार पर निम्नलिखित तरीके से वर्गीकृत किया जाता है:

  1. प्रतियोगी (Aspirant): 0–49
  2. प्रदर्शन करने वाला (Performer): 50-64
  3. सबसे आगे चलने वाला (Front-Runner): 65-99
  4. लक्ष्य हासिल करने वाला (Achiever): 100

वर्तमान में, प्रतियोगी और लक्ष्य हासिल करने वाली श्रेणी में कोई राज्य शामिल नहीं है।

सूचकांक के नवीनतम निष्कर्ष:

  • देश के समग्र एसडीजी स्कोर में 6 अंकों का सुधार हुआ है, और यह वर्ष 2019 में 60 अंकों से बढ़कर 2020-21 में 66 हो गया है।
  • यह सुधार, साफ पानी एवं स्वच्छता, और ‘सस्ती एवं स्वच्छ ऊर्जा’ लक्ष्यों के तहत सुविधाएं प्रदान करने में प्रदर्शन में सुधार का परिणाम है।
  • केरल ने 75 अंक हासिल करते हुए अपनी शीर्ष रैंक बरकरार रखी, इसके बाद हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु दोनों ने 74 अंक हासिल करते दूसरा स्थान हासिल किया।
  • इस वर्ष के भारत सूचकांक में बिहार, झारखंड और असम सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले राज्य थे।
  • चंडीगढ़ ने 79 अंक हासिल करते हुए केंद्र-शासित प्रदेशों में अपना शीर्ष स्थान बनाए रखा, इसके बाद दिल्ली (68) का स्थान रहा।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं- सहस्राब्दी विकास लक्ष्यों (Millennium Development Goals- MDG) को मुख्यतः गरीब देशों पर ध्यान केंद्रित करते हुए और एसडीजी लक्ष्यों को सार्वभौमिक रूप हासिल करने के लिए अभिकल्पित किया गया है। यहां पढ़ें

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. SDG बनाम MDG- समानताएं, अंतर और समय अवधि।
  2. इन लक्ष्यों को अपनाना और इनका कार्यान्वयन करना
  3. संयुक्त राष्ट्र मानव पर्यावरण सम्मेलन तथा पृथ्वी शिखर सम्मेलन
  4. अदीस अबाबा एक्शन
  5. गरीबी और पर्यावरण से संबंधित लक्ष्य
  6. राष्ट्रीय स्तर पर अभिप्रेत निर्धारित योगदान (INDC)
  7. ADG इंडिया इंडेक्स क्या है?

मेंस लिंक:

सतत विकास लक्ष्यों के प्रमुख उद्देश्यों और लक्ष्यों को सूचीबद्ध कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

क्लीन एनर्जी मिनिस्ट्रियलइंडस्ट्रियल डीप डीकार्बनाइजेशन इनीशियेटिव’


संदर्भ:

भारत ने यूनाइटेड किंगडम के साथ मिलकर, ऊर्जा प्रमुखों की 12 वीं बैठक में ‘क्लीन एनर्जी मिनिस्ट्रियल (CEM) – इंडस्ट्रियल डीप डीकार्बनाइजेशन इनीशियेटिव’ (IDDI) के तहत औद्योगिक ऊर्जा दक्षता को प्रोत्साहन देने के लिये नई कार्य-प्रक्रियाओं की शुरुआत की है।

इंडस्ट्रियल डीप डीकार्बोनाइजेशन इनिशिएटिव (IDDI) क्या है?

  • IDDI, सार्वजनिक और निजी संगठनों का एक वैश्विक गठबंधन है, जो निम्न-कार्बन वाली औद्योगिक सामग्री की मांग को प्रोत्साहित करने के लिए कार्य करता है।
  • राष्ट्रीय सरकारों के सहयोग से, आईडीडीआई कार्बन आकलन को मानकीकृत करने, सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के महत्वाकांक्षी खरीद लक्ष्यों को निर्धारित करने, निम्न-कार्बन उत्पाद विकास में निवेश को प्रोत्साहित करने और उद्योग दिशानिर्देशों को डिजाइन करने के लिए कार्य करता है।
  • यह संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन (UNIDO) द्वारा समन्वित होता है।
  • सदस्य: आईडीडीआई का नेतृत्व, यूनाइटेड किंगडम और भारत द्वारा संयुक्त रूप से किया जाता है और जर्मनी और कनाडा इसके वर्तमान सदस्यों में शामिल हैं।

क्लीन एनर्जी मिनिस्ट्रियल (CEM):

  • ‘क्लीन एनर्जी मिनिस्ट्रियल’ की स्थापना दिसंबर 2009 में कोपेनहेगन में आयोजित पार्टियों के जलवायु परिवर्तन सम्मेलन पर संयुक्त राष्ट्र के फ्रेमवर्क कन्वेंशन में की गई थी।
  • यह, स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी को आगे बढ़ाने वाली नीतियों और कार्यक्रमों को बढ़ावा देने, अनुभव और सर्वोत्तम पद्धतियों को साझा करने तथा वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा अर्थव्यवस्था में पारगमन करने को प्रोत्साहित करने हेतु एक उच्च स्तरीय वैश्विक मंच है।
  • भारत सहित 29 देश क्लीन एनर्जी मिनिस्ट्रियल (CEM) में शामिल हैं।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

जलवायु परिवर्तन का सामना करने हेतु ‘औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन’ भारत के लिए एक अवसर के रूप में क्यों है? यहां पढ़ें: 

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. CEM के बारे में
  2. IDDI के बारे में
  3. जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र का फ्रेमवर्क कन्वेंशन
  4. UNIDO क्या है?

मेंस लिंक:

इंडस्ट्रियल डीप डीकार्बोनाइजेशन इनिशिएटिव (IDDI) क्या है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

LEO उपग्रहों के माध्यम से इंटरनेट सेवा


संदर्भ:

हाल ही में, वनवेब (OneWeb) नामक, पृथ्वी की निचली कक्षा (Lower Earth Orbit- LEO) में स्थापित संचार उपग्रहों का परिचालन करने वाली एक कंपनी द्वारा अपने 36 उपग्रहों की एक अगली खेप रूस से प्रक्षेपित की गई है।

इसके साथ ही, पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थित OneWeb के कुल उपग्रहों की संख्या 218 हो गई है। ये सभी उपग्रह वनवेब के 648 LEO उपग्रह बेड़े का एक भाग होंगे।

वनवेब का LEO इंटरनेट प्रोग्राम:

  • वनवेब का उद्देश्य, एलईओ उपग्रहों के माध्यम से यूनाइटेड किंगडम, अलास्का, उत्तरी यूरोप, ग्रीनलैंड, आर्कटिक समुद्र और कनाडा में इंटरनेट कनेक्टिविटी का विकल्प उपलब्ध कराना है।
  • कंपनी ने इस साल के अंत से पहले इंटरनेट सेवा चालू किए जाने की संभावना व्यक्त की है।
  • वनवेब ने इस कार्यक्रम को ‘फाइव टू 50’ सर्विस का नाम दिया है, इसके तहत 50 डिग्री अक्षांश के उत्तर में स्थित सभी क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी सेवाएं प्रदान की जाएंगी।

LEO उपग्रह आधारित इंटरनेट के लाभ:

  • LEO उपग्रह, पृथ्वी से लगभग 36,000 किमी की दूरी पर स्थित भू-स्थैतिक कक्षा उपग्रहों की तुलना में, लगभग 500 किमी से 2000 किमी की दूरी पर स्थित होते हैं।
  • LEO उपग्रह पृथ्वी का नजदीक से परिक्रमण करते हैं अतः ये, पारंपरिक स्थिर-उपग्रह प्रणालियों की तुलना में सशक्त सिग्नल और तेज गति प्रदान करने में सक्षम होते हैं।
  • चूंकि, सिग्नल, फाइबर-ऑप्टिक केबल प्रणाली की तुलना में, अंतरिक्ष के माध्यम से अधिक तेजी से गति करते हैं, इसलिए भले ही ये मौजूदा जमीन-आधारित नेटवर्क से आगे न निकल सकें, फिर भी इसका मुकबला करने में सक्षम होंगे।

चुनौतियां:

LEO उपग्रह 27,000 किमी प्रति घंटा की गति से यात्रा करते हैं और 90-120 मिनट में पृथ्वी का एक पूर्ण परिपथ पूरा कर लेते हैं। नतीजतन, एक उपग्रह, पृथ्वी पर स्थापित ट्रांसमीटर के साथ बहुत कम ले लिए संपर्क स्थापित कर पाता है, अतः इस प्रणाली को सफलतापूर्वक कार्य करने हेतु LEO उपग्रहों के एक विशाल बेड़े की आवश्यकता होती है और इसके लिए बड़े पूंजी निवेश की जरूरत होती है।

LEO उपग्रहों की आलोचनाएँ:

  1. चूंकि, इन परियोजनाओं को अधिकांशतः निजी कंपनियों द्वारा संचालित किया जा रहा है, अतः शक्ति संतुलन, देशों से हटकर कंपनियों में स्थानांतरित हो गया है। इन निजी परियोजनाओं में कई राष्ट्रों की भागेदारी भी होती है, इसे देखते हुए इन कंपनियों को नियंत्रित करने से संबंधित सवाल उत्पन्न हो रहे हैं।
  2. जटिल नियामक ढांचा: इन कंपनियों में विभिन्न देशों के हितधारक शामिल होते हैं। इस प्रकार प्रत्येक देश में इन सेवाओं के संचालन हेतु अपेक्षित लाइसेंस प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
  3. प्राकृतिक उपग्रहों को कभी-कभी रात के समय आसमान में देखा जा सकता है, इन कृत्रिम उपग्रहों की वजह से खगोलविदों के लिए मुश्किलें हो सकती हैं।
  4. निचली कक्षा में भ्रमण करने वाले उपग्रह, अपने ऊपर परिक्रमा करने वाले उपग्रहों की आवृत्तियों को बाधित कर सकते हैं।
  5. बोलचाल की भाषा में ‘स्पेस जंक’ कहे जाने वाले पिंडों से अंतरिक्ष यानो को क्षति पहुंचने या अन्य उपग्रहों से टकराने की संभावना रहती है।

संभावनाएं:

जिन स्थानों पर फाइबर और स्पेक्ट्रम सेवाओं की पहुँच नहीं होती है, वहां LEO सैटेलाइट ब्रॉडबैंड बेहतर कार्य करने में सक्षम हो सकते हैं। अतः इसके लिए लक्षित बाजार, ग्रामीण आबादी और शहरी क्षेत्रों से दूर तैनात सैन्य इकाइयाँ होंगी।

इस प्रकार की अन्य परियोजनाएं:

‘वनवेब’ की मुख्य प्रतियोगी स्टारलिंक (Starlink) कंपनी है, जो एलोन मस्क की स्पेसएक्स कंपनी के नेतृत्व वाला एक उद्यम है। स्टारलिंक के पास वर्तमान में 1,385 उपग्रह हैं जो पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित हैं। स्टारलिंक द्वारा पहले से ही उत्तरी अमेरिका में बीटा परीक्षण शुरू किया जा चुका है, और इसने भारत जैसे देशों में प्री-ऑर्डर भी शुरू कर दिया है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

आप कक्षाओं के कितने प्रकारों के बारे में जानते हैं? यहां देखें, 

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. LEO के बारे में।
  2. स्टारलिंक परियोजना
  3. LEO उपग्रह आधारित इंटरनेट के लाभ

मेंस लिंक:

उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवाओं से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

‘वाटर बियर’ और ‘बेबी स्क्विड’ को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर भेजने का कारण


संदर्भ:

हाल ही में, नासा द्वारा अँधेरे में चमकने वाले बेबी स्क्विड (Baby Squids) तथा 5,000 टार्डिग्रेड्स (Tardigrades), जिन्हें ‘वाटर बियर’ (Water Bear) भी कहा जाता है, को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर भेजा गया है।

ये जीव, 22वें स्पेसएक्स कार्गो पुनःआपूर्ति मिशन का एक भाग थे।

इन नए प्रयोगों का उद्देश्य:

  1. लंबी अंतरिक्ष यात्राओं पर जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के लिए बेहतर संरक्षात्मक उपायों को तैयार करने में वैज्ञानिकों की मदद करना।
  2. लाभकारी रोगाणुओं तथा जानवरों के मध्य अंतःक्रिया को समझना, जिससे पृथ्वी पर मानव स्वास्थ्य को बेहतर बनाने हेतु महत्वपूर्ण खोजें की सके।

सूक्ष्मजीवों को अंतरिक्ष में भेजने का कारण:

  • सूक्ष्मजीव (Microbes), जानवरों में ऊतकों के सामान्य विकास और मानव स्वास्थ्य के अनुरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सूक्ष्मजीवों पर किए जाने वाले इन शोधों से, वैज्ञानिकों को गुरुत्व-हीन स्थितियों में लाभकारी रोगाणुओं तथा जानवरों के मध्य अंतःक्रिया को समझने का अवसर मिलेगा।
  • मानव शरीर में सूक्ष्मजीव, पाचन क्रिया, प्रतिरक्षा प्रणाली विकसित करने और हानिकारक रसायनों को गैर-विषाक्त करने, जैसी क्रियाओं में महत्वपूर्ण योगदान करते हैं। इन रोगाणुओं तथा मानव शरीर के मध्य संबंधों में व्यवधान, बीमारियों का कारण बन सकता है।

‘अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन’

  • ‘अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन’ (International Space Station- ISS), मुख्यतः एक बड़े आकार का अंतरिक्ष यान है जो काफी लंबी अवधि के लिए पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थित है।
  • आईएसएस, वर्ष 1998 से अंतरिक्ष में कार्यरत है।
  • यह पांच भागीदार अंतरिक्ष एजेंसियों, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA), NASA (संयुक्त राज्य अमेरिका), ROSCOSMOS (रूस), JAXA (जापान), और CSA (कनाडा) के मध्य अंतरराष्ट्रीय सहयोग का परिणाम है।
  • आईएसएस, लगभग 93 मिनट में पृथ्वी की परिक्रमा करता है तथा प्रति दिन 5 चक्कर पूरे करता है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि सोवियत संघ तथा इसके बाद रूस द्वारा भेजे गए साल्युत (Salyut), अल्माज़, और मीर स्टेशनों, तथा अमेरिका द्वारा भेजे गए ‘स्काईलैब’ के बाद आईएसएस नौवां अंतरिक्ष स्टेशन है जिस पर चालक दल निवास करता है। यहां पढ़ें, 

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन’ (ISS) के बारे में।
  2. आईएसएस में शामिल देश
  3. उद्देश्य
  4. पूर्ववर्ती अंतरिक्ष स्टेशन
  5. अन्य अंतरिक्ष स्टेशन।

मेंस लिंक:

‘अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन’ पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

हिमाचल प्रदेश द्वारा ओलावृष्टि रोधी बंदूक परीक्षण


संदर्भ:

ओलावृष्टि के कारण फसल को ख़राब होने से बचाने के लिए वाले बागवानों की सहायता हेतु, हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित ‘ओलावृष्टि रोधी बंदूक’ अर्थात ‘एंटी-हेल गन’ (Anti-Hail Guns) के उपयोग का परीक्षण किया जाएगा।

‘ओला’ क्या होता है?

ओलों (Hail) का निर्माण ‘कपासी वर्षा मेघों’ (Cumulonimbus Clouds) के द्वारा होता है। कपासी वर्षा मेघ, आमतौर पर काफी विस्तृत और काले बादल होतें हैं, जिनमे गरज के साथ बिजली चमकती है।

  • इन बादलों में, हवाएं, जल-बूदों को उस ऊंचाई तक अपने साथ उड़ा ले जाती हैं, जहाँ जल-बूंदे बर्फ के रूप में जम जाती हैं। ये जमी जमी हुई जल-बूंदें, वर्षा के रूप में नीचे गिरने लगती हैं, किंतु शीघ्र ही हवाओं द्वारा इन्हें वापस ऊपर की ओर धकेल दिया जाता हैं और इन पर अधिक बूंदें जम जाती हैं, परिणामस्वरूप जमी हुई जल-बूंदों अर्थात ओलों पर बर्फ की कई परतें चढ़ जाती हैं।
  • इन जमी हुई जल-बूंदों के नीचे गिरने और फिर से ऊपर जाने की प्रक्रिया तब तक दोहराई जाती रहती है, और जब तक ये ओले भारी होकर, ओलावृष्टि के रूप में पृथ्वी पर नीचे नहीं गिरने लगते।

एंटी-हेल गनक्या हैं?

एंटी-हेल गन (Anti-Hail Gun), बादलों में ओलों के विकास को बाधित करने के लिए ‘आघात तरंगें’ अर्थात शॉक वेव्स (Shock Waves) उत्पन्न करने वाली एक मशीन है।

  • यह एक उल्टे टावर से मिलता-जुलता कई मीटर ऊँचा एक स्थिर ढांचा होता है और इसमें आकाश की ओर खुलने वाली एक लंबी और संकीर्ण शंक्वाकार नली लगी होती है।
  • बंदूक के निचले हिस्से में एसिटिलीन गैस और हवा का विस्फोटक मिश्रण भरकर, इसे दागा जाता है, जिसके परिणामस्वरूप ‘शॉक वेव्स’ निकलती हैं। इन ‘शॉक वेव्स’ की गति सुपरसोनिक विमान से निकलने वाली तरंगों की भांति ध्वनि की गति से तेज होती है।
  • ये शॉक वेव्स बादलों में जल-बूंदों को ओलों में बदलने से रोक देगी, जिससे कि ये साधारण बारिश की बूंदों के रूप में नीचे गिरेंगी।

हिमाचल प्रदेश में ओलावृष्टि एक बड़ा मुद्दा क्यों है?

हर बार गर्मियों में, मार्च से मई तक, हिमाचल के फल उत्पादक क्षेत्रों में होने वाली लगातार ओलावृष्टि से सेब, नाशपाती और अन्य फसलें नष्ट हो जाती है, जिससे किसानों को भारी नुकसान होता है। नारकंडा और ठियोग (Theog) जैसे कुछ ओला प्रवण क्षेत्रों में, कभी-कभी इस प्रकार के तूफानों से किसी बाग में सेब की पूरी फसल नष्ट हो जाती है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

क्या आप जानते हैं कि कपासी वर्षा बादलों के ऊपरी हिस्से में, किसी भी बादल की तुलना में तरल पानी की सर्वाधिक सांद्रता होती है? यहां पढ़ें, 

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. एंटी-हेल गन की परिचालन प्रक्रिया
  2. ओलावृष्टि के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ।
  3. कपासी वर्षा बादल क्या हैं?
  4. देश में सेब उगाने वाले क्षेत्र

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

ब्लैक कार्बन पर सुदृढ़ नीतियां, हिमनदों के पिघलने में तेजी से कमी लाने में सक्षम: विश्व बैंक


संदर्भ:

हाल ही में, विश्व बैंक द्वारा हिमालय, काराकोरम और हिंदुकुश (Himalaya, Karakoram and Hindu-Kush: HKHK) पर्वत श्रृंखलाओं पर ब्लैक कार्बन के प्रभाव जानने हेतु एक शोध अध्ययन कराया गया था। ज्ञातव्य है, कि इन पर्वत श्रंखलाओं में हिमनदों के पिघलने के गति, विश्व के औसत हिमक्षेत्रों की तुलना में काफी अधिक है।

इस शोध रिपोर्ट का शीर्षक “हिमालय के ग्लेशियर, जलवायु परिवर्तन, ब्लैक कार्बन और क्षेत्रीय लचीलापन” (Glaciers of the Himalayas, Climate Change, Black Carbon and Regional Resilience) है।

प्रमुख निष्कर्ष:

  • मानव गतिविधियों से निर्मित उत्पादित ब्लैक कार्बन (BC) निक्षेपों की वजह से हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर और बर्फ के पिघलने की गति तेज होती है।
  • HKHK पर्वत श्रंखलाओं के हिमनदों / ग्लेशियरों के पीछे हटने की दर, पश्चिमी क्षेत्रों में 3 मीटर प्रति वर्ष और पूर्वी क्षेत्रों में 1.0 मीटर प्रति वर्ष होने का अनुमान है। ब्लैक कार्बन, जलवायु परिवर्तन से पड़ने वाले प्रभावों को भी तीव्र करता है।
  • ब्लैक कार्बन के निक्षेप, ग्लेशियर के पिघलने की गति को तेज करने के लिए दो प्रकार से कार्य करते हैं: सतह से होने वाले सौर-परावर्तन को कम करके और हवा के तापमान में वृद्धि करके।

सुझाव:

  1. ब्लैक कार्बन (Black Carbon) को कम करने हेतु मौजूदा नीतियों के पूर्ण कार्यान्वयन से हिमनदों के पिघलने के गति में 23% की कमी हो सकती है, लेकिन, नई नीतियों को लागू करने और संबंधित देशों के मध्य क्षेत्रीय सहयोग के माध्यम से इनकों कार्यान्वित करने से अधिक लाभ प्राप्त हो सकता है।
  2. ग्लेशियरों के पीछे हटने की दर को, नई तथा वर्तमान में व्यवहार्य नीतियों के माध्यम से मौजूदा स्तर के अलावा 50% तक अधिक तेजी से कम किया जा सकता है।
  3. रसोई-चूल्हे, डीजल इंजन और खुले में दहन से होने वाले ब्लैक कार्बन उत्सर्जन को कम करने से विशेष रूप से हिमालय में सर्वाधिक अधिक प्रभाव पड़ेगा और इससे विकिरण बलों को भी काफी कम किया जा सकता है।

ब्लैक कार्बन के बारे में:

  • ब्लैक कार्बन, एक अल्पकालिक प्रदूषक है, तथा कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) के बाद पृथ्वी को गर्म करने में दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता है।
  • अन्य ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के विपरीत, ब्लैक कार्बन शीघ्रता से साफ़ हो जाता है और यदि इसका उत्सर्जन बंद कर दिया जाए तो इसे वातावरण से समाप्त किया जा सकता है।
  • ऐतिहासिक कार्बन उत्सर्जन के विपरीत, यह स्थानीय स्रोतों से उत्पन्न होता है, और इसका स्थानीय क्षेत्रों पर अत्यधिक प्रभाव पड़ता है।
  • यह जीवाश्म ईंधन, जैव ईंधन और बायोमास के अधूरे दहन के माध्यम से उत्पन्न होता है, और मानवजनित और प्राकृतिक रूप से पाई जाने वाली कालिख, दोनों से फैलता होता है।

हिमालय, काराकोरम और हिंदुकुश (HKHK) क्षेत्रों में ब्लैक कार्बन के स्रोत:

क्षेत्रीय मानवजनित ब्लैक कार्बन जमाव में, उद्योग (मुख्य रूप से ईंट भट्टों) और स्थानीय निवासियों द्वारा ठोस ईंधन के दहन का 45-66% योगदान होता है, इसके बाद परिवहन वाहनों द्वारा डीजल ईंधन (7-18%) और खुले में दहन (3% से कम) का योगदान होता है।

 

इंस्टा जिज्ञासु:

ब्लैक कार्बन पर जलवायु और स्वच्छ वायु गठबंधन के विचार: Read here

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. टारबॉल क्या हैं?
  2. ब्लैक कार्बन और ब्राउन कार्बन के बीच अंतर
  3. टारबॉल के स्रोत
  4. प्रभाव

मेंस लिंक:

हिमालय पर टारबॉल की बढ़ती हुई प्रतिशत-मात्रा से पड़ने वाले प्रभाव की जांच कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


शिक्षक पात्रता परीक्षा

  • शिक्षक पात्रता परीक्षा (Teachers Eligibility Test- TET), भारत में कक्षा I से VIII के लिए शिक्षक के रूप में नियुक्ति के लिए पात्र होने के लिए आवश्यक न्यूनतम योग्यता है।
  • भारत के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने के लिए यह परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य है।
  • टीईटी को भारत की केंद्र और राज्य दोनों सरकारों द्वारा आयोजित किया जाता है।
  • यह परीक्षा नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए आयोजित की जाती है।

चर्चा का कारण:

शिक्षा मंत्रालय ने पूर्व प्रभाव से 2011 से शिक्षक पात्रता परीक्षा अर्हक प्रमाण पत्र की वैधता अवधि सात साल से बढ़ाकर आजीवन करने का निर्णय लिया है।

SAGE पोर्टल

हाल ही में, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री द्वारा बुजुर्ग व्यक्तियों की सहायता करने के लिए ‘सीनियरकेयर एजिंग ग्रोथ इंजन’ पहल (Seniorcare Aging Growth Engine- SAGE) पहल और SAGE पोर्टल लॉन्च किया गया है।

  • यह पोर्टल विश्वसनीय स्टार्ट-अप द्वारा बुजुर्गों की देखभाल संबंधी उत्पादों और सेवाओं के लिए “वन-स्टॉप’ केंद्र होगा।
  • SAGE के तहत चुने गए स्टार्ट-अप स्वास्थ्य, यात्रा, वित्त, कानूनी, आवास, भोजन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में बुजुर्ग व्यक्तियों को नए अभिनव उत्पाद और सेवाएं प्रदान करेंगे।
  • सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, इस योजना के लिए एक सूत्रधार के रूप में कार्य करेगा।
  • प्रत्येक चयनित स्टार्ट-अप को एकमुश्त इक्विटी के रूप में रु.1 करोड़ तक की निधि प्रदान की जाएगी।

ऑपेरशन सागर आरक्षा II

(Operation Sagar Aaraksha II)

  • भारतीय तटरक्षक (ICG) श्रीलंकाई अधिकारियों के साथ समन्वय करते हुए 25 मई 2021 से कोलंबो के करीब समुद्र में रासायन से लदे कंटेनर पोत एमवी एक्स-प्रेस पर्ल पर लगी आग को बुझाने के अथक प्रयास कर रहा है।
  • संभावित पर्यावरणीय खतरे से निपटने के लिए भारत और श्रीलंका के बीच किए गए समन्वित संयुक्त अभियान का नाम सागर आरक्षा-II रखा गया है।

आईएनएस संधायक

(INS Sandhayak)

भारतीय नौसेना का सबसे पुराना हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण जहाज है तथा स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित अपनी श्रेणी का पहला जहाज है।

  • इसे हाल ही में 40 वर्षों की सेवा के बाद कार्यमुक्त कर दिया गया है।
  • भारतीय नौसेना में अपनी 40 वर्षों की शानदार सेवा के दौरान आईएनएस संधायक ने भारतीय प्रायद्वीप के पश्चिमी और पूर्वी तटों, समेत पड़ोसी देशों में 200 प्रमुख हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण किए।

जहाज कई महत्वपूर्ण कार्यों में भी सक्रिय भागीदार रहा है जैसे:

  1. ऑपेरशनपवन – 1987 में श्रीलंका में भारतीय शांति सेना की सहायता
  2. ऑपेरशन रेनबो – 2004 की सुनामी के बाद मानवीय सहायता प्रदान
  3. प्रथम संयुक्त भारत-अमेरिका मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर) अभ्यास ‘टाइगर-ट्रायंफ’ में भागीदारी


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