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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 24 May 2021

 

 

विषयसूची

 सामान्य अध्ययन-I

1. चक्रवात यास

 

सामान्य अध्ययन-II

1. कोवैक्सिन के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूरोपीय संघ की मंजूरी हासिल करने का प्रयास

2. ब्रिटेन द्वारा ‘डिजिटल सीमा’ बनाए जाने की योजना

3. चीन के 17+1 कोऑपरेशन फोरम से लिथुआनिया का इस्तीफा

4. अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. माउंट न्यारागोंगो

2. भारत जैव विविधता पुरस्कार 2021

3. गलवान घाटी

4. ब्रिक्स खगोल विज्ञान कार्यसमूह (BAWG)

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, भौगोलिक विशेषताएँ और उनके स्थान आदि।

चक्रवात यास


(Cyclone Yaas)

संदर्भ:

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा 22 मई के आसपास उत्तरी अंडमान सागर और उसके निकटवर्ती पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक निम्न दाब का क्षेत्र निर्मित होने की जानकारी दी गई है।

24 मई तक, इस निम्नदाब क्षेत्र के तीव्र होकर एक चक्रवाती तूफान में बदलने की संभावना है। इस तूफ़ान को ‘चक्रवात यास’ (Cyclone Yaas) नाम दिया गया है।

इसका नामकरण:

  • ‘यास’ नाम का सुझाव ‘ओमान’ द्वारा दिया गया था और इसका नामकरण एक अच्छी सुगंध वाले ‘वृक्ष’ के ऊपर किया गया है, तथा इसका अर्थ अंग्रेजी भाषा के ‘जैस्मीन’ शब्द के समान होता है।
  • अगले चक्रवात – यास के बाद – का नाम ‘गुलाब’ रखा जा सकता है, जिसे पाकिस्तान द्वारा सुझाया गया है।

चक्रवातों का निर्माण किस प्रकार होता है?

उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में समुद्रीय जल के ऊपर चक्रवातों का निर्माण होता है।

इन क्षेत्रों में सौर-प्रकाश की मात्रा सर्वाधिक होती है, जिसके परिणामस्वरूप स्थलीय  और जलीय भागों की ऊपरी सतह गर्म हो जाती हैं। सतह के गर्म होने के कारण, समुद्र के ऊपर स्थित उष्ण-आर्द्र वायु ऊपर की ओर उठने लगती है, जिसके बाद इस रिक्त स्थान को भरने के लिए तेजी से झपट्टा मारकर आगे बढ़ती है, फिर ये भी गर्म होकर ऊपर की उठ जाती है, और यह चक्र जारी रहता है।

वायु-चक्रण निर्मित होने का कारण:

  • वायु, सदैव उच्च दाब क्षेत्र से निम्न दाब वाले क्षेत्रों की ओर प्रवाहित होती है। उच्च दाब क्षेत्रों का निर्माण ठंडे क्षेत्र में होता है, जबकि निम्न दाब की स्थिति उष्ण या गर्म क्षेत्रों में बनती है। ध्रुवीय क्षेत्रों में सौर-प्रकाश की मात्रा उष्ण-कटिबंधीय क्षेत्रों की तुलना में काफी कम होती है, अतः ये सामान्यतः उच्च दाब के क्षेत्र होते हैं। और इसीलिए वायु का संचरण प्रायः ध्रुवीय क्षेत्रों से उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों की ओर होता है।
  • इसके बाद, पृथ्वी की गति अपनी भूमिका अदा करती है, जोकि पश्चिम से पूर्व की ओर होती है। पृथ्वी के अपनी धुरी पर परिक्रमा करने की वजह से, दोनों धुर्वों की ओर से बहने वाली हवा का उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में विक्षेपण होता है, क्योंकि गोलाकार होने के कारण पृथ्वी के घूर्णन की गति ध्रुवों की तुलना में उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में अधिक होती है। आर्कटिक क्षेत्र से आने वाली हवा, दायीं ओर विक्षेपित हो जाती है तथा अंटार्कटिकक्षेत्र से चलने वाली हवा बायीं ओर विक्षेपित हो जाती है।
  • इस प्रकार, पहले से ही निश्चित दिशाओं में प्रवाहित हो रही वायु, जब किसी गर्म स्थान पर पहुँचने के पश्चात् ऊपर उठती है, तो रिक्त स्थान को भरने के लिए ठंडी हवा, केंद्र की ओर आकर्षित होने लगती है। केंद्र की ओर बढ़ते समय, ठंडी हवा विक्षेपित होती रहती है जिसके परिणामस्वरूप वायु-संचरण में परिवलन होने लगता है, और प्रक्रिया, चक्रवात के स्थल से टकराने तक जारी रहती है।

चक्रवात के स्थल से टकराने के पश्चात:

चक्रवात, स्थलीय क्षेत्रों पर पहुचने के बाद बिखर कर समाप्त हो जाता है, क्योंकि उष्ण जल के संपर्क में आने के कारण वायु गर्म होकर ऊपर उठती है और ठंडी वायु के लिए रिक्त स्थान बनाती है, किंतु स्थल पर इसका अभाव होता है। इसके अलावा, ऊपर उठने वाली आर्द्र हवा से बादलों का निर्माण का निर्माण होता है, जिससे चक्रवातों के दौरान तेज हवाओं के साथ तीव्र बारिश होती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. चक्रवातों के निर्माण के लिए उत्तरदायी कारक
  2. विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में चक्रवातों का नामकरण
  3. भारत के पूर्वी तट पर अधिक चक्रवात आने का कारण
  4. कोरिओलिस बल क्या है?
  5. संघनन की गुप्त ऊष्मा क्या है?

मेंस लिंक:

उष्ण कटिबंधीय चक्रवातों के निर्माण के लिए उत्तरदायी कारकों की विवेचना कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

कोवैक्सिन के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूरोपीय संघ की मंजूरी हासिल करने का प्रयास


संदर्भ:

कोवैक्सीन (Covaxin) टीके को ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ की तरफ से ‘आपातकालीन उपयोग सूची’ (EUL) में अभी शामिल नहीं किया गया है, इस कारण कोवैक्सीन टीका लगवा चुके लोगों को विदेश यात्रा करने के लिए अभी इंतजार करना पड़ सकता है।

  • अतः भारत सरकार द्वारा हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक को ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ (WHO) तथा बाद में यूरोपीय संघ की ‘यूरोपीय मेडिसिन एजेंसी’ (EMA) दोनों से मंजूरी हासिल करने में मदद करने का फैसला किया गया है ।
  • विदेश मंत्रालय (MEA) को मामले का अध्ययन करने और कोवैक्सीन को WHO की आपातकालीन उपयोग सूची (EUL) में जगह दिलाने में सहायता करने का काम सौंपा गया है।

आवश्यकता:

  • हाल ही में, यूरोपीय संघ के सदस्य देशों द्वारा, कुछ शर्तों के अधीन, यूरोप से बाहर के देशों के “पूरी तरह से टीकाकरण करवाए हुए” पर्यटकों को अपने देशों में प्रवेश करने की अनुमति देने संबंधी प्रस्ताव को पारित कर दिया गया है।
  • यदि भारत से यात्रा-सेवाएं शुरू की जाती हैं, तो एस्ट्राजेनेका-कोविशील्ड टीका लगवाए हुए यात्रियों को WHO और यूरोपीय संघ की सूची में शामिल किया जाएगा, किंतु जिन लोगों को कोवैक्सिन टीका लगाया गया है, उन्हें इस यात्रा सूची में जगह नहीं दी जाएगी।

‘आपातकालीन उपयोग सूची’ में शामिल होने के लाभ:

कोवैक्सिन को ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ की तरफ से ‘आपातकालीन उपयोग सूची’ (Emergency Use Listing EUL) शामिल किए जाने से, भारत द्वारा विकसित और उत्पादित वैक्सीन के लिए काफी प्रोत्साहन मिलेगा, तथा यह सूची में शामिल होंने वाली भारत की पहली वैक्सीन होगी।

WHO की आपातकालीन उपयोग सूची (EUL) के बारे में:

विश्व स्वास्थ्य संगठन’ की ‘आपातकालीन उपयोग सूची’ (Emergency Use Listing- EUL), गैर- लाइसेंसशुदा टीकों, चिकित्साविधानों (Therapeutics) तथा ‘शरीर के बाहर किसी परखनली में किए गए निदानों’ (in vitro diagnostics) का आकलन करने और सूचीबद्ध करने के लिए एक जोखिम-आधारित प्रक्रिया है।

  • इसका प्रमुख उद्देश्य, किसी सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल के दौरान प्रभावित लोगों के लिए इन उत्पादों को उपलब्ध कराने संबंधी प्रकिया को तेज करना होता है।
  • यह सूची, उपलब्ध गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता और प्रदर्शन आंकड़ों के आधार पर विशिष्ट उत्पादों का उपयोग करने संबंधी स्वीकार्यता निर्धारित करने में संयुक्त राष्ट्र की इच्छुक खरीद एजेंसियों और सदस्य देशों की सहायता करती है।

अभ्यर्थी उत्पादों हेतु पात्रता:

  • ‘आपातकालीन उपयोग सूची’ (EUL) तीन उत्पाद-विधाओं (टीका, चिकित्सा-प्रक्रिया और इन विट्रो डायग्नोस्टिक्स) से संबंधित होती है।
  • इनमे से प्रत्येक विधा के लिए ‘आपातकालीन उपयोग सूची’ प्रक्रिया के अंतर्गत मूल्यांकन हेतु अहर्ता हासिल करने के लिए विशिष्ट मानक निर्धारित किये गए हैं।

इसके लिए निम्नलिखित मानदंडों को पूरा करना आवश्यक है:

  • जिस बीमारी के लिए किसी उत्पाद को ‘आपातकालीन उपयोग सूची’ में शामिल करने हेतु आवेदन किया गया है, वह बीमारी, गंभीर, जीवन के लिए तत्काल संकट उत्पन्न करने वाली, प्रकोप, संक्रामक रोग या महामारी फैलाने में सक्षम होनी चाहिए। इसके अलावा, उत्पाद को ‘आपातकालीन उपयोग सूची’ मूल्यांकन हेतु विचार करने हेतु उचित आधार होने चाहिए, जैसेकि बीमारी से निपटने, अथवा आबादी के किसी उपभाग (जैसेकि, बच्चे) के लिए कोई लाइसेंस प्राप्त उत्पाद उपलब्ध नहीं है।
  • मौजूदा उत्पाद, बीमारी को खत्म करने या प्रकोप को रोकने में विफल रहे हैं (टीके और दवाओं के मामले में)।
  • उत्पाद का निर्माण, दवाओं और टीकों के मामले में वर्तमान अच्छी विनिर्माण पद्धतियों (Good Manufacturing Practices- GMP) का अनुपालन करते हुए और ‘इन विट्रो डायग्नोस्टिक्स’ (IVD) के मामले में कार्यात्मक ‘गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली’ (QMS) के तहत किया गया होना चाहिए।
  • आवेदक, उत्पाद के विकास (आईवीडी के मामले में उत्पाद की पुष्टि और सत्यापन) को पूरा करने के लिए वचनबद्ध होना चाहिए तथा लाइसेंस प्राप्त होने के बाद उत्पाद के लिए WHO से पूर्व-योग्यता (prequalification) हासिल करने हेतु आवेदन करना आवश्यक है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. यूरोपीय संघ- संरचना और उद्देश्य।
  2. WHO की आपातकालीन उपयोग सूची (EUL) के बारे में।
  3. लाभ
  4. पात्रता

मेंस लिंक:

WHO की आपातकालीन उपयोग सूची (EUL) पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

 ब्रिटेन द्वारा डिजिटल सीमाबनाए जाने की योजना


संदर्भ:

ब्रिटेन द्वारा अपनी ‘सीमाओं को पूर्णतयः डिजिटल’ घोषित करने की योजना तैयार की जा रही है।

यह योजना, देश की आव्रजन प्रणाली में किए जा रहे व्यापक सुधारों का एक भाग है और इसमें अंक-आधारित प्रवासन प्रणाली (points-based migration system) की शुरूआत भी की जाएगी।

 ‘डिजिटल बॉर्डर’ किस प्रकार का होगा?

इस कदम का अर्थ है, बिना किसी वीजा या आव्रजन दर्जे (Immigration status) के ब्रिटेन में आने वाले लोगों को, अमेरिका में जारी प्रणाली की भांति, एक ‘इलेक्ट्रॉनिक यात्रा अधिकार-पत्र’ (Electronic Travel Authorisation) हासिल करना आवश्यक होगा। ये प्रावधान, वर्ष 2025 के अंत तक लागू की जाने वाली योजनाओं का एक भाग है।

  • इस डिजिटल पहचान (Digital identity) जांच का उपयोग, वीज़ा आवेदन केंद्रों पर जाने की आवश्यकता को कम करने के लिए भी किया जाएगा।
  • सीमा को डिजिटल करने का मतलब होगा, कि अधिकारी ‘अब देश में आने वालों तथा देश से बाहर जाने वालों की गणना कर सकते है’ और इसके साथ ही, आने वाले लोगों के लिए देश में ठहरने संबंधी अनुमति की जांच भी की जा सकती है।

इसके लाभ:

इस पद्धति से, संभावित खतरों के सीमा पर पहुंचने से पहले ही इनकी पहचान करना आसान हो जाएगा।

आवश्यकता:

पिछले साल, लगभग 8,500 लोगों ने, विश्व के व्यस्तम जहाज-मार्ग वाले एक चैनल को छोटी नावों में पार कर जोखिम-भरी यात्रा करके ब्रिटेन में प्रवेश किया था।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

चीन के 17+1 कोऑपरेशन फोरम से लिथुआनिया का इस्तीफा


संदर्भ:

हाल ही में, लिथुआनिया, चीन के 17+1 सहयोग मंच (17+1 cooperation forum) से अलग हो गया है। इस फोरम में मध्य और पूर्वी यूरोपीय राज्यों के साथ यूरोपीय संघ के कुछ सदस्य भी शामिल हैं।

कारण:

लिथुआनिया ने इस फोरम को “विभाजनकारी” बताया है। साथ ही, लिथुआनिया ने यूरोपीय संघ के साथी सदस्य देशों से, ‘चीन के साथ, एक अधिक प्रभावी ‘27 + 1 उपागम’ (27+1 approach) अपनाने तथा संवाद जारी रखने’ का भी आग्रह किया है।

17+1 पहल क्या है?

‘17+1’ पहल (17+1 initiative), चीन के नेतृत्व में गठित एक प्रारूप है जिसकी स्थापना वर्ष 2012 में बुडापेस्ट में की गई थी।

  • इसका उद्देश्य ‘मध्य एवं पूर्वी यूरोपीय’ (Central and Eastern European– CEE) क्षेत्र के विकास हेतु निवेश और व्यापार के लिए ‘मध्य एवं पूर्वी यूरोप’ के सदस्य देशों तथा बीजिंग के मध्य सहयोग का विस्तार करना था।
  • इस फ्रेमवर्क के तहत, सदस्य देशों में पुलों, मोटरमार्गों, रेलवे लाइनों और बंदरगाहों के आधुनिकीकरण जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर भी ध्यान केंद्रित किया जाता है।
  • यह मंच को व्यापक तौर पर चीन की महत्वाकांक्षी ‘बेल्ट एंड रोड पहल’ (Belt and Road initiativeBRI) परियोजना के विस्तार के रूप में देखा जाता है।
  • चीन के अनुसार, 17+1 पहल, पश्चिमी यूरोपीय राज्यों की तुलना में कम विकसित यूरोपीय देशों के साथ अपने संबंधों का सुधार करने लिए शुरू की गई है।

गठन:

इस पहल में यूरोपीय संघ के बारह सदस्य देश और पांच बाल्कन राष्ट्र- अल्बानिया, बोस्निया और हर्जेगोविना, बुल्गारिया, क्रोएशिया, चेक गणराज्य, एस्टोनिया, ग्रीस, हंगरी, लातविया, लिथुआनिया, मैसेडोनिया, मोंटेनेग्रो, पोलैंड, रोमानिया, सर्बिया, स्लोवाकिया और स्लोवेनिया- शामिल हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. बाल्टिक राष्ट्र क्या हैं?
  2. “17+1” पहल के बारे में।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA)


(International Atomic Energy Agency)

संदर्भ:

हाल ही में, ईरान की संसद के अध्यक्ष ने कहा है, कि तेहरान और संयुक्त राष्ट्र परमाणु निगरानी संस्था- ‘अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी’ (IAEA ) के मध्य तीन महीने के निगरानी समझौते की अवधि पूरी हो गई है और इसके साथ ही, कुछ ईरानी परमाणु स्थलों के भीतर के चित्रों तक इसकी पहुंच भी समाप्त हो जाएगी।

इस घोषणा के बाद, वर्ष 2015 के ईरान परमाणु समझौते को पुनर्जीवित करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच चल रही अप्रत्यक्ष वार्ता के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लग गया है।

‘निगरानी समझौता’ क्या था?

फरवरी में, अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी और तेहरान के मध्य एक तीन महीने के निगरानी समझौते पर हस्ताक्षर किये गए थे।

  • इस समझौते का उद्देश्य, ईरान द्वारा एजेंसी के साथ अपने सहयोग को कम करने से लगे झटके को राहत प्रदान करना था।
  • इस समझौते के तहत, एजेंसी को ईरान की कुछ गतिविधियों की निगरानी करने की अनुमति दी गई थी, ऐसा नहीं करने पर इन गतिविधियों को प्रतिबंधित कर दिया जाता।

पृष्ठभूमि:

ईरान और वैश्विक शक्तियों के मध्य अप्रैल से ऑस्ट्रिया के विएना शहर में कई दौर की वार्ता की जा चुकी है।

  • इसके तहत, तेहरान और वाशिंगटन द्वारा, प्रतिबंधों और परमाणु गतिविधियों, परमाणु समझौते के पूर्ण अनुपालन पर वापस लौटने, हेतु लिए जाने वालों फैसलों पर कार्य किया जा रहा है।
  • पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा 2018 में अमेरिका को समझौते से अलग करने और प्रतिबंधों को फिर से लागू करने के बाद से ईरान ने विश्व शक्तियों के साथ 2015 के समझौते की शर्तों को धीरे-धीरे तोड़ना शुरू कर दिया था।

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के बारे में:

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की स्थापना, वर्ष 1957 में संयुक्त राष्ट्र संघ भीतर ‘वैश्विक शांति के लिए परमाणु संगठन’ के रूप की गयी थी।

  • यह एक अंतरराष्ट्रीय स्वायत संगठन है।
  • IAEA, संयुक्त राष्ट्र महासभा तथा सुरक्षा परिषद दोनों को रिपोर्ट करती है।
  • इसका मुख्यालय वियना, ऑस्ट्रिया में स्थित है।

प्रमुख कार्य:

  1. IAEA, अपने सदस्य देशों तथा विभिन्न भागीदारों के साथ मिलकर परमाणु प्रौद्योगिकियों के सुरक्षित, सुदृढ़ और शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कार्य करता है।
  2. इसका उद्देश्य परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना तथा परमाणु हथियारों सहित किसी भी सैन्य उद्देश्य के लिए इसके उपयोग को रोकना है।

IAEA द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रम:

  1. कैंसर थेरेपी हेतु कार्रवाई कार्यक्रम (Program of Action for Cancer Therapy- PACT)
  2. मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम
  3. जल उपलब्धता संवर्धन परियोजना
  4. नवोन्मेषी परमाणु रिएक्टरों और ईंधन चक्र पर अंतर्राष्ट्रीय परियोजना, 2000

प्रीलिम्स लिंक:

  1. IAEA क्या है? संयुक्त राष्ट्र के साथ संबंध
  2. IAEA के सदस्य
  3. IAEA के कार्यक्रम।
  1. बोर्ड ऑफ गवर्नर- संरचना, मतदान और कार्य
  2. यूरेनियम संवर्धन क्या है?

मेंस लिंक:

ईरान परमाणु समझौते को फिर से लागू करने संबंधी आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


माउंट न्यारागोंगो

(Mount Nyiragongo)

हाल ही में, कांगो के ‘माउंट न्यारागोंगो’ ज्वालामुखी में विस्फोट हुआ है, और इसकी दहशत में हजारों लोगों अपने घरों से पलायन कर गए हैं।

  • माउंट न्यारागोंगो, अल्बर्टाइन रिफ्ट (Albertine Rift) से लगे हुए विरुंगा पर्वत में 3,470 मीटर की ऊंचाई का एक सक्रिय विवृत ज्वालामुखी (stratovolcano) है।
  • यह ज्वालामुखी, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में विरुंगा राष्ट्रीय उद्यान के भीतर है।
  • न्यारागोंगो और इसका निकटवर्ती ‘न्यामुरागिरा’ (Nyamuragira), संयुक्त रूप से अफ्रीका में होने वाले 40 प्रतिशत ऐतिहासिक ज्वालामुखी विस्फोटों के लिए जिम्मेदार हैं।

भारत जैव विविधता पुरस्कार 2021

(India Biodiversity Award)

हाल ही में, केरल के एक किसान, शाजी एन.एम को पालतू प्रजातियों के संरक्षण की व्यक्तिगत श्रेणी में ‘भारत जैव विविधता पुरस्कार’ 2021 से सम्मानित किया गया है।

  • शाजी एन.एम. को केरल का ट्यूबर मैन कहा जाता है।
  • शाजी एन.एम., लगभग 200 कंद फसलों (tuber crops) की एक विस्तृत श्रृंखला को संरक्षित करते हैं, जिनमें बड़ी अरबी (Yam), छोटी अरबी, जिमीकंद, अरारोट, शकरकंद, मीठे आलू, कसावा और चाइनीज़- आलू शामिल हैं।
  • इनके लिए PPV&FR प्राधिकरण, नई दिल्ली द्वारा स्थापित ‘प्लांट जीनोम सेवियर रिवॉर्ड’ 2015 सहित कई राज्य पुरस्कार भी मिल चुके हैं।

‘भारत जैव विविधता पुरस्का’र के बारे में:

  • 2012 में, भारत सरकार द्वारा UNDP इंडिया के साथ साझेदारी में, जमीनी स्तर पर जैव विविधता संरक्षण, सतत उपयोग और प्रशासन के उत्कृष्ट मॉडलों की पहचान करने और उन्हें सम्मानित करने के लिए भारत जैव विविधता पुरस्कार शुरू किया गया था।
  • इस पुरस्कार में ₹2 लाख नकद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र दिया जाता है।

गलवान घाटी

मई के पहले सप्ताह में पूर्वी लद्दाख में स्थित गलवान घाटी के ‘नो-पेट्रोलिंग ज़ोन’ में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच मामूली झड़प हुई थी।

पृष्ठभूमि:

15 जून, 2020 को चीनी सैनिकोण के साथ हुए मुठभेड़ में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद होने के बाद गलवान घाटी के वाई-जंक्शन (Y-junction) के समीप मुठभेड़ स्थल के दोनों ओर लगभग 1.5 किमी अर्थात कुल 3 किमी की दूरी तक ‘नो-पेट्रोलिंग ज़ोन’ बनाया गया था। इसके बाद इस क्षेत्र में ‘पैदल गश्त’ करने पर 30 दिनों का विराम भी लागू किया गया था।

गलवान नदी घाटी ( GRV) की अवस्थिति:

  • गलवान घाटी क्षेत्र लद्दाख़ और अक्साई चीन के मध्य भारत-चीन सीमा के निकट है। इसी क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा अक्साई चीन को भारत से विभाजित करती है।
  • गलवान नदी का स्रोत नियंत्रण सीमा पार चीन की ओर स्थित अक्साई चिन में है, और यह पूर्व से लद्दाख की ओर बहती है, जहां यह नियंत्रण सीमा के पार भारत की ओर श्योक नदी से मिलती है।
  • गलवान घाटी, पश्चिम में लद्दाख और पूर्व में अक्साई चिन (वर्तमान में चीन द्वारा नियंत्रित) के बीच रणनीतिक रूप से स्थित है।
  • इसके पश्चिमी छोर पर श्योक नदी और ‘दरबुक-श्योक-दौलेट बेग ओल्डी’ (DSDBO) सड़क मार्ग स्थितहै।

galwan_valley

ब्रिक्स खगोल विज्ञान कार्यसमूह (BAWG)

संदर्भ:

हाल ही में, भारत द्वारा ब्रिक्स 2021 के कैलेंडर में, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और इनोवेशन की दिशा में ब्रिक्स खगोल विज्ञान कार्य समूह (BRICS Astronomy Working Group- BAWG) की 7वीं बैठक की ऑनलाइन माध्यम से मेजबानी की गई।

BAWG के बारे में:

ब्रिक्स खगोल विज्ञान कार्यसमूह (BAWG), ब्रिक्स सदस्य देशों को खगोल विज्ञान के क्षेत्र में सहयोग करने के लिए एक मंच प्रदान करता है।

  • इसने प्रत्येक देश द्वारा ये जा रहे कार्यों के वैज्ञानिक नतीजों को सामने रखने की सिफारिश की है।
  • इसके परिणामस्वरूप, जब भी ब्रिक्स की धन उपलब्ध कराने वाली सस्थायें फंडिंग के अवसरों का ऐलान करेंगी, तब प्रमुख परियोजना को शुरू करने के लिए आर्थिक मदद पाने में सहायता मिलेगी।

बैठक के परिणाम:

BAWG ने ब्रिक्स देशों के खगोलशास्त्रियों की बीच सहयोग बढ़ाने के महत्व को स्वीकार किया है और सदस्य देशों में दूरबीनों की नेटवर्किंग और एक क्षेत्रीय डेटा नेटवर्क बनाने की सिफारिश की है।


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