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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 21 May 2021

 

विषयसूची

 सामान्य अध्ययन-II

1. ‘व्हाइट फंगस’

2. बिगड़ी हुई स्वास्थ्य अवसंरचना की विभंग रेखाएं

 

सामान्य अध्ययन-III

1. विश्व मधुमक्खी दिवस

2. माईलैब कोविसेल्फ

3. ग्लेशियरों के निवर्तन से अंटार्कटिका से विश्व का सबसे बड़ा हिम-शैल, आइसबर्ग A-76 टूटकर अलग

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. ‘कॉर्प्स फ्लावर’

2. ‘न्यू बिग फाइव प्रोजेक्ट्स’

3. चीन द्वारा तिब्बत राजमार्ग का कार्य समाप्त

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

‘व्हाइट फंगस’


(White fungus)

संदर्भ:

हाल ही में, बिहार के पटना में ‘व्हाइट फंगस’ (White fungus) अर्थात ‘कैंडिडियासीस’ (Candidiasis) के कम से कम चार मामलों का पता चला है।

व्हाइट फंगस’ और इसके लक्षण:

  • यह संक्रमण, व्यक्तियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण अथवा पानी जैसे द्रव्यों अथवा पदार्थों में यह फफूँद होता है उसके संपर्क में आने से व्यक्तियों में फ़ैल सकता है
  • ‘व्हाइट फंगस’ के मरीजों में कोविड जैसे लक्षण दिखाई देते हैं लेकिन इनका टेस्ट नेगेटिव आता है; इस संक्रमण की पहचान सीटी-स्कैन या एक्स-रे के माध्यम से की जा सकती है।

प्रभाव:

‘व्हाइट फंगस’ मनुष्य के फेफड़ों के साथ नाखून, त्वचा, पेट, किडनी, मस्तिष्क, गुप्तांग और मुंह को भी  संक्रमित कर सकता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘ब्लैक फंगस’ और ‘व्हाइट फंगस’ के बीच अंतर
  2. कारण और लक्षण
  3. उपचार।

मेंस लिंक:

केंद्र सरकार द्वारा राज्यों से ‘ब्लैक फंगस’ को संक्रामक रोग (Epidemic) के रूप में अधिसूचित करने के लिए क्यों कहा गया है, चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

बिगड़ी हुई स्वास्थ्य अवसंरचना की विभंग रेखाएं


संदर्भ: कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर ने देश के स्वास्थ्य ढांचे की बेहद खराब स्थिति को उजागर कर दिया है।

भारत की स्वास्थ्य अवसंरचना की वर्तमान स्थिति- विश्व बैंक आंकड़े:

  1. वर्ष 2017 में, भारत में प्रति 1,00,000 की आबादी पर 85.7 चिकित्सक थे। जबकि, इसी वर्ष, समान आबादी पर चिकित्सकों की संख्या पाकिस्तान में 98, श्रीलंका में 100 तथा जापान में 241 थी।
  2. भारत में प्रति 1,00,000 की आबादी पर 53 बिस्तर थे, जबकि यह संख्या पाकिस्तान में 63, बांग्लादेश में 79.5, श्रीलंका में 415 और जापान में 1,298 थी ।
  3. भारत में प्रति 1,00,000 की आबादी पर दाईयों और नर्सों की संख्या 172.7 थी, जबकि इनकी संख्या श्रीलंका में 220, बांग्लादेश में 40, पाकिस्तान में 70 और जापान में 1,220 थी।
  4. विश्व के सभी देशों की तुलना में, भारत में, स्वास्थ्य व्यय पर सर्वाधिक ‘जेब से खर्च’ (out-of-pocket- OOP) होता है। भारत में कुल स्वास्थ्य व्यय का 62% ‘जेब से खर्च’ (OOP) होता है।

इसके तर्क और कारण:

  1. निम्न सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय- वर्ष 2013-14 में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 1% तथा वर्ष 2017-18 में GDP का मात्र 1.28% (केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं पर किए गए व्यय सहित)।
  2. सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रबंधन में केंद्र सरकार की प्रमुख भूमिका है, क्योंकि तकनीकी विशेषज्ञता वाली सभी प्रमुख संस्थाएं केंद्रीय नियंत्रण में हैं। राज्यों में ‘राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र’ या ‘भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिष’द जैसे विशेषज्ञ निकायों की कमी है।
  3. ‘प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य व्यय’ में काफी भिन्नता होने के कारण नोवेल कोरोनावायरस महामारी से निपटने के लिए राजकोषीय स्तर पर भी राज्यों के मध्य काफी अंतर है।

प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य देखभाल व्यय में अंतर-राज्यीय भिन्नता (2010-11 से 2019-20 के मध्य):

  • इन वर्षों के दौरान प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य देखभाल व्यय में, केरल और दिल्ली शीर्ष स्थान के करीब रहे हैं।
  • इन वर्षों में, बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश लगातार रैंकिंग में सबसे नीचे स्थान पर रहे हैं।
  • ओडिशा ने इस मामले में उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्ष 2010 में इसका प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य व्यय उत्तर प्रदेश के समान था, लेकिन अब यह उत्तर प्रदेश के दोगुने से भी अधिक है।

आवश्यक कार्रवाईयां:

  • महामारी से निपटने हेतु केंद्रीय स्तर पर एक समन्वित राष्ट्रीय योजना बनाई जानी चाहिए।
  • केंद्र सरकार को अंतरराष्ट्रीय बाजार से टीकों की खरीद सहित अन्य जिम्मेदारियों को संभालना चाहिए।
  • टीकों के भारत में आ जाने के बाद, इन्हें जरूरत-आधारित और पारदर्शी तरीके से राज्यों में समान रूप से वितरित किया जा सकता है।

स्रोत: द हिंदू।

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्य, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशु पालन संबंधी अर्थशास्त्र।

विश्व मधुमक्खी दिवस


(World Bee Day)

  • 20 मई को प्रतिवर्ष ‘विश्व मधुमक्खी दिवस’ (World Bee Day) के रूप में मनाया जाता है।
  • आज ही के दिन वर्ष 1734 में ‘मधुमक्खी पालन’ के प्रणेता एंटोन जानसा (Anton Janša) का जन्म हुआ था।
  • संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2017 में 20 मई को विश्व मधुमक्खी दिवस के रूप में घोषित किया। यह प्रस्ताव स्लोवेनिया (Slovenia) द्वारा पेश किया गया था।

विश्व मधुमक्खी दिवस 2021 का विषय- “बी एंगेज्ड: बिल्ड बैक बेटर फॉर बीज़ (Bee engaged: Build Back Better for Bees)” है।

सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास:

  • सरकार, किसानों की आय दोगुनी करने के अपने लक्ष्य के अंतर्गत, मधुमक्खी पालन को बढ़ावा दे रही है।
  • सरकार द्वारा ‘आत्मनिर्भर अभियान’ के तहत मधुमक्खी पालन के लिए 500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
  • ‘राष्ट्रीय मधुमक्खीपालन व शहद मिशन’ (National Beekeeping and Honey Mission- NBHM) के एक भाग के रूप में प्रशिक्षण प्रदान करने हेतु ‘राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड’ द्वारा चार मॉड्यूल बनाए गए हैं और 30 लाख किसानों को मधुमक्खी पालन में प्रशिक्षित किया गया है। इनको सरकार की ओर से आर्थिक सहायता भी प्रदान की जा रही है।
  • सरकार द्वारा ‘मीठी क्रांति’ के भाग के रूप में हनी मिशन शुरू किया गया है।
  • भारत, विश्व के शीर्ष पांच शहद उत्पादक देशों में शामिल है।
  • वर्ष 2005-06 की तुलना में शहद का उत्पादन 242% बढ़ा है और इसके निर्यात में 265% की वृद्धि हुई है।

‘मधुमक्खी पालन’ का महत्व:

  • ‘खाद्य एवं कृषि संगठन’ के आंकड़ों के अनुसार, 2017-18 में, भारत, शहद उत्पादन (9 हजार टन) के मामले में, विश्व में आठवें स्थान पर था, जबकि चीन, 551 हजार टन शहद उत्पादन स्तर के साथ पहले स्थान पर था।
  • इसके अलावा, वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने के लक्ष्य को प्राप्त करने में मधुमक्खी पालन का महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. विश्व मधुमक्खी दिवस का महत्व
  2. भारत में मधुमक्खी पालन
  3. प्रौद्योगिकी मिशन

मेंस लिंक:

भारत में मधुमक्खी पालन के महत्व और आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी।

 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

माईलैब कोविसेल्फ


(Mylab Coviself)

संदर्भ:

यह, हाल ही में ‘भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद’ (ICMR) द्वारा अनुमोदित भारत की पहली कोविड –19 स्व-परीक्षण (सेल्फ-टेस्टिंग) किट है।

  • इसका अर्थ है, कि कोई भी व्यक्ति खुद ही अपनी नाक से नमूनों को एकत्र कर सकता है और SARS-CoV-2 की जांच के लिए इन नमूनों का परीक्षण कर सकता है।
  • इस प्रकार की सेल्फ-टेस्ट किट को सबसे पहले, पिछले वर्ष नवंबर माह में अमेरिका ने मंजूरी दी थी। यूरोप और दक्षिण कोरिया में भी इसी तरह की किट को मंजूरी दी जा चुकी है।

‘कोविसेल्फ’ के बारे में:

  • ‘कोविसेल्फ’ (CoviSelf) को माईलैब डिस्कवरी साल्युशंस (MyLab Discovery Solutions) नामक पुणे स्थित एक मॉलिक्यूलर कंपनी द्वारा विकसित किया गया है।
  • इसमें ‘रैपिड एंटीजन टेस्ट’ का उपयोग किया जाता है, जिसमें वायरस की जांच करने के लिए नाक से लिए गए में नमूने का परीक्षण किया जाता है और यह 15 मिनट के भीतर परिणाम बता देता है।
  • इस परीक्षण में मुश्किल से दो मिनट का समय लगता है।

क्रियाविधि:

उपयोग में आसान यह परीक्षण, माईलैब के ‘आर्टिफीसिअल इंटेलिजेंस-सक्षम मोबाइल ऐप’ के साथ जुड़ा होता है। उपयोगकर्ताओं का परीक्षण-परिणाम ‘पॉजिटिव’ आने पर इसे सीधे ICMR को भेजा जा सकता है, जहाँ से उन्हें आगे की जाने वाली कार्रवाई के लिए दिशा-निर्देश प्राप्त होंगे।

इसके पक्ष में तर्क:

  1. संक्रमण की जांच के लिए किसी अस्पताल अथवा ‘प्रयोगशाला’ जाने, या किसी तकनीशियन को घर पर बुलाने के बजाय, किसी व्यक्ति द्वारा घर पर स्वयं ही अपनी जांच करने से दूसरों में वायरस फैलने का जोखिम कम होता है।
  2. इस मामले में फाहा- नमूना (Swab) लेना काफी सरल और त्वरित होता है, और इससे, परीक्षण पर होने वाले व्यय तथा ‘लैब’ में अपॉइंटमेंट बुक कराने आदि का झंझट कम होता है।
  3. सेल्फ-टेस्टिंग से वर्तमान में, अपनी पूरी क्षमता के साथ 24 घंटे काम कर रही प्रयोगशालाओं पर भार कम होगा।

इसके विपक्ष में तर्क:

  1. इस प्रकार की गई जाचों के परिणामों की विश्वसनीयता चिंता का एक प्रमुख विषय बनी हुई है। इसमें, सही ढंग से नमूना एकत्र नहीं होने या स्वाब स्टिक के दूषित होने की संभावना अधिक होती है।
  2. इसके अलावा, त्वरित एंटीजन परीक्षणों के ‘गलत – नकारात्मक’ (False Negatives) होने की संभावना अधिक होती है। यदि कोई कोविड-संक्रमित व्यक्ति लक्षणहीन (Asymptomatic) है और इसके परीक्षण का परिणाम ‘नकारात्मक’ आ जाता है, तो इससे उसे सुरक्षा की झूठी भावना मिल सकती है।
  3. मोबाइल ऐप की तकनीकी त्रुटियां भी पूरी जांच और रिपोर्टिंग प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न कर सकती हैं।

सेल्फ-टेस्टिंग किट के लॉन्च होने से कोविड –19 प्रबंधन में क्रांतिकारी परिवर्तन होने की संभावना:

वर्तमान में कई राज्य संक्रमण के दूसरे दौर से गुजर रहे हैं, जिससे डायग्नोस्टिक लैबोरेट्रीज पर दबाव बना हुआ है। कोविड -19 परीक्षण के लिए सर्वोत्कृष्ट मानक समझे जाने वाले आरटी-पीसीआर परीक्षण का परिणाम आने में 3-4 दिन लगते हैं, जिससे अस्पताल में भर्ती होने और उपचार शुरू होने में देरी होती है।

  • ‘स्व-परीक्षण’ किट, भारत में कोविड-19 प्रबंधन के लिए संभावित रूप से गेम-चेंजर साबित हो सकती हैं। ये किट्स, प्रयोगशालाओं के सामने लगने वाली लंबी कतारों में कमी, परीक्षण-व्यय में कमी, घरों से नमूना संग्रह करने में लगने वाले जन-बल पर पड़ने वाले भार में कमी कर सकती है।
  • इसके साथ ही, ‘स्व-परीक्षण’ किट्स के माध्यम से 15 मिनट के भीतर त्वरित परिणाम मिल सकेगा, जिससे संक्रमित व्यक्ति को तत्काल आइसोलेशन में रखकर उपचार शुरू किया जा सकता है।
  • इस परीक्षण किट की कीमत 250 रुपये है, जबकि आरटी-पीसीआर परीक्षण की लागत 400 रुपये से 1,500 रुपये के बीच आती है। विभिन्न राज्यों में, प्रयोगशाला में किए जाने वाले रैपिड एंटीजन परीक्षण की लागत भी 300-900 रुपये आती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. कोविसेल्फ क्या है?
  2. यह किस प्रकार कार्य करता है?
  3. एंटीजन और एंटीबॉडी के बीच अंतर।

मेंस लिंक:

कोविड की जांच करने हेतु ‘स्वयं-सहायता किट’ के फायदे और नुकसान पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

ग्लेशियरों के निवर्तन से अंटार्कटिका से विश्व का सबसे बड़ा हिम-शैल, आइसबर्ग A-76 टूटकर अलग


संदर्भ:

आइसबर्ग A-76, अंटार्कटिका में रॉन आइससेल्फ (Ronne Ice Shelf) के पश्चिमी भाग से टूटकर, वेडेल सागर (Weddell Sea) में तैर रहा है।

  • उपग्रहों और विमानों द्वारा की गई माप के अनुसार, यह दुनिया का सबसे बड़ा हिमशैल है।
  • यह आकार में लगभग 170 किलोमीटर (105 मील) लंबा और 25 किलोमीटर (15 मील) चौड़ा है।

संबंधित चिंताएं:

अंटार्कटिका में बर्फ की चादर, शेष ग्रह की तुलना में तेजी से गर्म हो रही है, जिसकी वजह से हिम तथा हिमावरण पिघल रहे हैं और साथ ही हिमानियों / ग्लेशियरों, विशेषकर वेडेल सागर के आसपास, का निवर्तन (Retreat) हो रहा है।

ग्लेशियरों का निवर्तन होने अर्थात पीछे हटने के साथ ही, सतह से हिमखंड टूटने लगते हैं और नजदीकी सागर में तैरते हुए अथवा किसी स्थलीय क्षेत्र से टकराकर बिखर जाते हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. आइसबर्ग A-76 की अवस्थिति
  2. अंटार्कटिका के बारे में
  3. वेडेल सागर
  4. रॉन आइससेल्फ

मेंस लिंक:

अंटार्कटिका पर जलवायु परिवर्तन के पड़ने वाले प्रभाव की विवेचना कीजिए।

स्रोत: द हिंदू।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


‘कॉर्प्स फ्लावर

(Corpse flower)

वैज्ञानिक नाम: अमोर्फोफैलस टाइटेनियम (Amorphophallus titanum)।

  • यह अति दुर्लभ पौधा हर सात से दस सालों में केवल एक बार खिलता है।
  • इस फूल को दुनिया के सबसे बड़े फूलों में से एक माना जाता है।
  • हालांकि, यह पौधा स्थानिक रूप से इंडोनेशिया में खिलता है, किंतु इसकी पौध को सालों से पूरे विश्व के चिड़ियाघरों, वनस्पति उद्यानों और ग्रीनहाउसों में उगाए जाता रहा है।
  • एक औसत ‘कॉर्प्स फ्लावर’ / शव फूल का जीवनकाल लगभग तीन-चार दशक होता है।
  • यह फूल, सड़ते हुए मांस या सड़ते हुए शव के समान तीखी बदबू के लिए जाना जाता है।
  • इसे अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (International Union for Conservation of Nature-IUCN) द्वारा 2018 में एक ‘लुप्तप्राय’ पौधे के रूप में सूचीबद्ध किया गया था।

‘न्यू बिग फाइव प्रोजेक्ट्स’

(New Big 5 project)

  • यह विश्व के 250 से अधिक वन्यजीव फोटोग्राफरों, संरक्षणवादियों और वन्यजीव धर्मार्थ संस्थाओं द्वारा शुरू की गई एक अंतरराष्ट्रीय पहल है।
  • इसे ब्रिटिश फोटोग्राफर ग्रैम ग्रीन (Graeme Green) द्वारा तैयार किया गया है।
  • इसका उद्देश्य विश्व के वन्यजीवों के समक्ष आने वाले संकटों, जैसेकि, इनके आवासों का नष्ट होना, मानव-वन्यजीव संघर्ष, अवैध शिकार, अवैध वन्यजीव व्यापार और जलवायु परिवर्तन आदि के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।
  • अप्रैल 2020 में लॉन्च हुई इस परियोजना के तहत वन्यजीव प्रेमियों के 50,000 से अधिक वोट हासिल करने वाले जानवरों को सूचीबद्ध किया जाएगा।

चर्चा का कारण:

  • इस परियोजना के तहत, पांचों जानवरों, हाथी, ध्रुवीय भालू, गोरिल्ला, बाघ और शेर को फायरिंग के बजाय फ्रेमिंग के लिए नामित किया गया है।
  • ये सभी पांचो बड़े जानवर कीस्टोन (आधारिक) प्रजातियां हैं, जो अपने आवासों, जैव विविधता वाले पारिस्थितिक तंत्रों और मनुष्यों सहित अन्य प्रजातियों के अस्तित्व के लिए प्रकृति-संतुलन हेतु आवश्यक हैं।

चीन द्वारा तिब्बत राजमार्ग का कार्य समाप्त

  • यह हाईवे, भारत के अरुणाचल प्रदेश के साथ लगी विवादित सीमा पर दूरदराज के क्षेत्रों में चीन की पहुंच को सक्षम बनाएगा।
  • यह यारलुंग जांगबो नदी की विशाल घाटी ‘ग्रांड कैनियन’’ से होकर गुजरती है। ब्रह्मपुत्र को तिब्बत में यारलुंग जांगबो (Yarlung Zangbo) कहा जाता है।
  • यह, अरुणाचल की सीमा पर स्थित ‘मेडॉग काउंटी’ (Medog county) तक जाने के लिए “दूसरा महत्वपूर्ण मार्ग” है तथा यह न्यिंगची (Nyingchi) की पैड टाउनशिप को ‘मेडॉग काउंटी’ के बैबंग (Baibung) से जोड़ता है।
  • इस राजमार्ग से, न्यिंगची शहर और मेडॉग के बीच की दूरी को 346 किमी से घटकर 180 किमी हो जाएगी तथा यात्रा के समय में भी आठ घंटे की बचत होगी।

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