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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 20 May 2021

 

विषयसूची 

सामान्य अध्ययन-I

1. यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल

 

सामान्य अध्ययन-II

1. न्यायाधीशों का सुनवाई से इंकार

2. प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PMSSY)

3. समुदाय आधारित समावेशी विकास कार्यक्रम (CBID)

 

सामान्य अध्ययन-III

1. NASA-ESA का ‘सोलर ऑर्बिटर अंतरिक्षयान’

2. चीन में क्रिप्टोकरेंसी पर बीजिंग द्वारा की गई कार्रवाई का तात्पर्य

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. जीआई प्रमाणित घोलवड सपोटा (चीकू)

2. राजस्थान में ‘ब्लैक फंगस’ अर्थात ‘म्यूकोर्मिकोसिस’ को महामारी घोषित

3. प्रदर्शनी और सम्मेलन केंद्रों के लिए ‘अवसंरचना’ दर्जा

4. ताइवान जलडमरूमध्य

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: भारतीय संस्कृति प्राचीन से आधुनिक काल तक कला रूपों, साहित्य और वास्तुकला के प्रमुख पहलुओं को कवर करेगी।

यूनेस्को ‘विश्व धरोहर स्थल’


(UNESCO world heritage sites)

संदर्भ:

हाल ही में, भारत की ‘यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों’ (UNESCO world heritage sites) की संभावित सूची में छह नए स्थलों को जोड़ा गया है।

इसमे शामिल है:

  1. मराठा सैन्य स्थापत्य, महाराष्ट्र
  2. हिरेबेनकल मेगालिथिक साइट, कर्नाटक
  3. मध्य प्रदेश में नर्मदा घाटी का भेड़ाघाट-लम्हेटा घाट
  4. वाराणसी के गंगा घाट
  5. कांचीपुरम के मंदिर, तमिलनाडु
  6. मध्य प्रदेश का सतपुड़ा टाइगर रिजर्व

इन छह स्थलों को शामिल करने के साथ ही, यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों की संभावित सूची में भारत के प्रस्तावित स्थलों की संख्या 48 हो गई है।

इसके आगे की कार्रवाई:

ये प्रस्ताव एक साल के लिए विश्व धरोहर स्थलों की संभावित सूची में रहेंगे, इसके बाद सरकार द्वारा यूनेस्को के लिए भेजे जाने वाली अंतिम फ़ाइल में शामिल किए जाने वाले नामों पर निर्णय किया जाएगा।

‘विश्व धरोहर स्थल’ क्या होते हैं?

‘विश्व धरोहर स्थल’ या ‘विश्व विरासत स्थल’ (World Heritage site), को अंतर्राष्ट्रीय महत्व तथा विशेष सुरक्षा की आवश्यकता वाले प्राकृतिक अथवा मानव निर्मित क्षेत्रों या संरचनाओं के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।

  • इन स्थलों को ‘संयुक्त राष्ट्र’ (UN) तथा संयुक्त राष्ट्र शैक्षणिक वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) द्वारा आधिकारिक तौर पर मान्यता प्राप्त होती है।
  • यूनेस्को, विश्व धरोहर के रूप में वर्गीकृत स्थलों को मानवता के लिए महत्वपूर्ण मानता हैं, क्योंकि इन स्थलों का सांस्कृतिक और भौतिक महत्व होता है।

प्रमुख तथ्य:

  1. विश्व धरोहर स्थलों की सूची, यूनेस्को की ‘विश्व विरासत समिति’ द्वारा प्रशासित ‘अंतर्राष्ट्रीय विश्व धरोहर कार्यक्रम’ द्वारा तैयार की जाती है। इस समिति में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा निर्वाचित यूनेस्को के 21 सदस्य देश शामिल होते है।
  2. प्रत्येक विश्व धरोहर स्थल, जहाँ वह अवस्थित होता है, उस देश के वैधानिक क्षेत्र का भाग बना रहता है, और यूनेस्को, इसके संरक्षण को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के हित में मानता है।
  3. विश्व विरासत स्थल के रूप में चयनित होने के लिए, किसी स्थल को पहले से ही भौगोलिक एवं ऐतिहासिक रूप से विशिष्ट, सांस्कृतिक या भौतिक महत्व वाले स्थल के रूप में अद्वितीय, विशिष्ट स्थल चिह्न अथवा प्रतीक के रूप में वर्गीकृत होना चाहिए।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. किसी स्थल को ‘विश्व विरासत स्थल’ किसके द्वारा घोषित किया जाता है?
  2. संकटग्रस्त सूची क्या है?
  3. संभावित सूची क्या है?
  4. भारत में ‘विश्व विरासत स्थल’ और उनकी अवस्थिति

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थान।

न्यायाधीशों का सुनवाई से इंकार


(Recusal of Judges)

संदर्भ:

मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह की याचिका पर सुनवाई करने वाली उच्चतम न्यायालय की ‘अवकाशकालीन पीठ’ (Vacation Bench) के दो न्यायाधीशों में से एक जस्टिस बी.आर. गवई ने खुद को मामले की सुनवाई से अलग कर लिया है। परमबीर सिंह ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा उनके खिलाफ शुरू की गई विभागीय जांच को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी।

पृष्ठभूमि:

परमबीर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाते हुए कहा है, कि उनके खिलाफ शुरू की गई विभागीय जांच उन्हें फंसाने के लिए की जाने वाली साजिश का हिस्सा है, क्योंकि उन्होंने महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे, और जिसके बाद गृहमंत्री ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था।

परमबीर सिंह ने शीर्ष अदालत से विभागीय जांच को किसी अन्य राज्य में स्थानांतरित करने का आग्रह भी किया है।

‘न्यायिक निरर्हता’ अथवा ‘सुनवाई से इंकार’ का तात्पर्य:

किसी पीठासीन न्यायायिक अधिकारी अथवा प्रशासनिक अधिकारी द्वारा हितों के टकराव के कारण किसी न्यायिक सुनवाई अथवा आधिकारिक कार्रवाई में भागीदारी से इंकार करने को न्यायिक निरर्हता (Judicial disqualification), ‘सुनवाई से इंकार’ करना अथवा ‘रिक्युजल’ (Recusal) कहा जाता है।

‘सुनवाई से इंकार’ करने हेतु सामान्य आधार:

  1. किसी तर्कशील निष्पक्ष पर्यवेक्षक को लगता है कि, न्यायाधीश किसी एक पक्षकार के प्रति सद्भाव रखता है, अथवा अन्य पक्षकार के प्रति द्वेषपूर्ण है, अथवा न्यायाधीश किसी के प्रति पक्षपाती हो सकता है।
  2. न्यायाधीश का मामले में व्यक्तिगत हित है अथवा वह मामले में व्यक्तिगत हित रखने वाले किसी व्यक्ति से संबंध रखता है।
  3. न्यायाधीश की पृष्ठभूमि अथवा अनुभव, जैसे कि न्यायाधीश के वकील के रूप में किये गए पूर्व कार्य।
  4. मामले से संबंधित तथ्यों अथवा पक्षकारों से व्यक्तिगत तौर पर परिचय।
  5. वकीलों या गैर-वकीलों के साथ एक पक्षीय संवाद।
  6. न्यायाधीशों के अधिनिर्णय, टिप्पणियां अथवा आचरण।

 इस संबंध में क़ानून:

न्यायाधीशों द्वारा ‘सुनवाई से इंकार’ करने संबंधी कोई निश्चित नियम निर्धारित नहीं हैं।

हालाँकि, सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों द्वारा पद की शपथ लेने के समय, न्याय करने हेतु ‘बिना किसी डर या पक्षपात, लगाव या वैमनस्य के’ अपने कर्तव्यों को निभाने का वादा किया जाता है ।

सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी:

जस्टिस जे चेलमेश्वर ने सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन बनाम भारत संघ (2015) मामले में अपनी राय दी थी कि ’जहां भी किसी न्यायाधीश के आर्थिक हित प्रतीत होते है, वहां पक्षपात संबंधी किसी ‘वास्तविक खतरे’ अथवा ‘तर्कपूर्ण संदेह’ की जांच की आवश्यकता नहीं है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. न्यायिक निरर्हता के लिए आधार।
  2. सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को शपथ कौन दिलाता है?
  3. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 127 और 128 किससे संबंधित हैं?

मेंस लिंक:

‘सुनवाई से इंकार’ (Recusal), सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के लिए नैतिकता की एक चयनात्मक आवश्यकता बन गया है। चर्चा कीजिए।

स्रोत; हिन्दू।

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PMSSY)


(Pradhan Mantri Swasthya Suraksha Yojana)

संदर्भ:

केंद्र सरकार द्वारा ‘प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना’ (Pradhan Mantri Swasthya Suraksha YojanaPMSSY) के तहत अब तक 22 नए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) स्थापित करने की मंजूरी दी गई है, जिनमें से छह पहले से ही पूर्णतयः क्रियाशील हैं।

PMSSY के बारे में:

प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PMSSY) की घोषणा वर्ष 2003 में, देश के विभिन्न भागों में सस्ती / विश्‍वसनीय तृतीयक स्‍वास्‍थ्‍य सेवा सुविधाओं की उपलब्धता में असंतुलन विसंगतियों को दूर करने तथा देश में गुणवत्तापूर्ण और बेहतर चिकित्सीय शिक्षा के लिये सुविधाओं का विस्तार करने करने के उद्देश्य से की गई थी।

PMSSY का कार्यान्वयन ‘स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय’ द्वारा किया जाता है।

इस योजना के दो घटक हैं:

  • नए एम्स (AIIMS) संस्थानों की स्थापना (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान)।
  • विभिन्न राज्यों में सरकारी मेडिकल कॉलेजों का उन्नयन (Upgradation)।

लागत वहन:

प्रत्येक मेडिकल कॉलेज संस्थान के उन्नयन हेतु परियोजना लागत को, केंद्र और राज्य के मध्य साझा किया जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. PMSSY के तहत घटक
  2. परियोजना लागत वहन
  3. योजना का कार्यान्वयन
  4. योजना के तहत अब तक स्थापित संस्थान

मेंस लिंक:

प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी।

 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

समुदाय आधारित समावेशी विकास कार्यक्रम (CBID)


(Community Based Inclusive Development Program)

संदर्भ:

हाल ही में, केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा दिव्यांगजन पुनर्वास हेतु 6 महीने का ‘समुदाय आधारित समावेशी विकास कार्यक्रम’ (Community Based Inclusive Development Program) शुरू किया गया है।

प्रमुख बिंदु:

  1. कार्यक्रम का उद्देश्य समुदाय स्तर पर जमीनी पुनर्वास कर्मियों का एक पूल बनाना है जो आशा और आंगनवाड़ी कर्मियों के साथ दिव्यांगता से जुड़े विभिन्न विषयों का निपटान कर सकें और समाज में दिव्यांगजनों के समावेश में सहायक हो।
  2. कार्यक्रम इन कर्मियों के दक्षता आधारित ज्ञान और कौशल के आधार पर तैयार किया गया है ताकि सफलतापूर्वक अपना कर्तव्य निभाने में अपनी दक्षता बढ़ा सकें। इन कर्मियों को ”दिव्यांग मित्र“ कहा जाएगा।
  3. भारतीय पुनर्वास परिषद के अधीन ‘राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड’ इस कार्यक्रम के तहत परीक्षाएं आयोजित करेगा और उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र देगा।

स्रोत: पीआईबी।

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

NASA-ESA का ‘सोलर ऑर्बिटर अंतरिक्षयान’


संदर्भ:

हाल ही में, नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (European Space Agency- ESA) के अंतरिक्षयान द्वारा सूर्य की सतह पर पहली बार ‘सौर- विस्फोट’ (Solar Eruption) को दर्ज किया गया है। इन ‘विस्फोटों’ को ‘कोरोना द्रव्य उत्क्षेपण’ (Coronal Mass Ejections- CMEs) के रूप में भी जाना जाता है।

सूर्य की सतह पर होने वाले विस्फोट, यदि काफी बड़े होते हैं, तो ये अरबों टन प्लाज्मा और विद्युत आवेशित कणों का पृथ्वी की ओर क्षेपण कर सकते हैं।

NASA-ESA सोलर ऑर्बिटर अंतरिक्ष यान के बारे में:

सोलर ऑर्बिटर (Solar Orbiter), यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (European Space AgencyESA) और नासा (NASA) के मध्य अंतरराष्ट्रीय सहयोग में शुरू किया गया एक अंतरिक्ष अभियान है।

  • इस अंतरिक्ष यान को फरवरी 2020 में ‘यूनाइटेड लांच अलायन्स’ (United Launch Alliance- ULA) के एटलस- V रॉकेट द्वारा केप कैनावेरल (Cape Canaveral) से प्रक्षेपित किया गया था।
  • इसे ESA के कॉस्मिक विजन 2015-2025 कार्यक्रम के अंतर्गत पहले मीडियम-क्लास मिशन के रूप में चुना गया था।
  • इस मिशन की अवधि सात वर्षो की है, तथा इस दौरान यह सूर्य के निकट 26 मिलियन मील की दूरी तक पहुंचेगा।
  • इस अन्तरिक्ष यान में कैल्शियम फास्फेट में लेपित विशिष्ट टाइटेनियम हीट शील्ड लगी हुई हैं, जिससे यह 970 डिग्री फ़ारेनहाइट तक तापमान सहन कर सकता है।
  • सोलर ऑर्बिटर, नासा और ‘यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी’ द्वारा संयुक्त उद्यम के रूप में 1990 में लॉन्च ‘यूलिसिस अंतरिक्ष यान (Ulysses spacecraft) के बाद सूर्य का अध्ययन करने के लिए शुरू किया गया दूसरा संयुक्त मिशन है।

सौर ऑर्बिटर निम्नलिखित चार प्रमुख सवालों के उत्तरों की खोज करेगा:

  1. सौर हवा किस प्रकार गति करती है तथा कोरोना में चुंबकीय क्षेत्र कहाँ से उत्पन्न होता है?
  2. सौर-अनित्यताओं (Solar Transients) की वजह से होने वाली ‘हेलिओस्फेरिक परिवर्तनशीलता’ (Heliospheric Variability) का कारण?
  3. हेलिओस्फीयर में पाए जाने वाले ऊर्जायुक्त कणों का विकिरण, सौर विस्फोटों से किस प्रकार उत्पन्न होता है?
  4. सौर डायनेमो, किस प्रकार कार्य करता है, और यह सूर्य और हेलियोस्फीयर के मध्य संबंध किस प्रकार स्थापित करता है?

अन्य सौर मिशन:

प्रीलिम्स लिंक:

  1. मर्चिसन वाइडफील्ड ऐरे (Murchison Widefield Array- MWA) रेडियो टेलिस्कोप के बारे में।
  2. रेडियो तरंगें क्या हैं?
  3. सूरज की विभिन्न परतें?
  4. सोलर फ्लेयर्स क्या हैं?
  5. सनस्पॉट्स क्या हैं?
  6. सूर्य के कोरोना के बारे में।

स्रोत: नासा।

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

चीन में क्रिप्टोकरेंसी पर बीजिंग द्वारा की गई कार्रवाई का तात्पर्य


संदर्भ:

हाल ही में, चीनी नियामकों द्वारा ‘क्रिप्टोकरेंसी’ (Cryptocurrency) के उपयोग पर सख्त प्रतिबंध लगा दिए गए हैं।

नए नियमों के द्वारा, ‘क्रिप्टोकरेंसी’ के लिए निषिद्ध सेवाओं के दायरे का काफी विस्तार गया है, और इन्हें ‘बिना किसी वास्तविक कीमत की आभासी मुद्राएं’ बताया गया है।

नवीनतम परिवर्तनों के अनुसार:

  1. बैंकों और ऑनलाइन भुगतान फर्मों के द्वारा क्रिप्टो-संबंधित किसी भी सेवा, जैसेकि खाता खोलना, पंजीकरण, व्यापार, समाशोधन, निपटान और बीमा आदि का प्रस्ताव नहीं किया जाएगा।
  2. नए नियमों में उन सेवाओं को भी शामिल किया गया है, जिनका पहले उल्लेख नहीं किया गया था।
  3. संस्थाओं के लिए, क्रिप्टोकरेंसी बचत, साख (Trust) या गिरवी रखने की सेवाएं प्रदान करने और क्रिप्टो-संबंधित वित्तीय उत्पाद जारी करने से प्रतिबंधित किया गया है। और,
  4. ‘ट्रस्ट तथा फंड उत्पादों’ द्वारा निवेश लक्ष्य के रूप में आभासी मुद्राओं का उपयोग नहीं किया जाएगा।

पृष्ठभूमि:

चीन में क्रिप्टोकरेंसी को ‘कानूनी निविदा’ (legal tender) के रूप में मान्यता नहीं है और बैंकिंग प्रणाली में क्रिप्टोकरेंसी को स्वीकार नहीं किया जाता है और न ही इससे संबंधित कोई सेवाएं प्रदान की जाती हैं।

चीन में क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित नियमों को सख्त किये जाने का कारण:

नए निर्देशों ने चेतावनी दी गई है, कि काल्पनिक बिटकॉइन ट्रेडिंग में फिर से तेजी आ रही है, जिससे लोगों की संपत्ति की सुरक्षा का अतिक्रमण हो सकता है और सामान्य आर्थिक और वित्तीय व्यवस्था में बाधा पहुँच सकती है।

इस कार्रवाई का प्रभाव:

  • चीन द्वारा की गई इस नई कार्रवाई से लोगों के लिए विभिन्न भुगतान चैनलों के माध्यम से क्रिप्टोकरेंसी खरीदना और कठिन हो गया है।
  • इससे क्रिप्टोकरेंसी का युआन में विनियम करना कठिन हो गया है, जिससे क्रिप्टोकरेंसी-खनिकों (Miners) का व्यवसाय प्रभावित हो सकता है।
  • इसके अलावा, बैंकों और भुगतान कंपनियों को भी क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित धन-प्रवाह की पहचान करने संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

‘क्रिप्टोकरेंसी’ क्या होती हैं?

क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrencies) एक प्रक्रार की डिजिटल करेंसी होती है, जिसमे मुद्रा इकाइयों के उत्पादन को विनियमित करने तथा निधियों के अंतरण को सत्यापित करने के लिए कूटलेखन (Encryption) तकनीकों का उपयोग किया जाता है, और यह बगैर किसी केंद्रीय बैंक के अधीन, स्वतन्त्र रूप से संचालित होती हैं।

यह ब्लॉकचेन तकनीक पर कार्य करती हैं। उदाहरण: बिटकॉइन, एथेरियम आदि।.

प्रीलिम्स लिंक:

  1. विभिन्न क्रिप्टोकरेंसी।
  2. विभिन्न देशों द्वारा शुरू की गई क्रिप्टोकरेंसी।
  3. ब्लॉकचेन तकनीक क्या है?

मेंस लिंक:

क्रिप्टोकरेंसी क्या हैं? इसके विनियमन की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


जीआई प्रमाणित घोलवड सपोटा (चीकू)

(GI-certified Gholvad Chikoo)

महाराष्ट्र से ब्रिटेन के लिए जीआई प्रमाणित घोलवड सपोटा (चीकू) का निर्यात प्रारंभ।

  • घोलवड सपोटा का जीआई प्रमाणीकरण महाराष्ट्र राज्य चीकू उत्पादक संघ के पास है और यह फल अपने मीठे और बेहतरीन स्वाद के लिए जाना जाता है।
  • ऐसा माना जाता है कि घोलवड गांव की कैल्शियम समृद्ध मिट्टी से इसमें अद्वितीय स्वाद उत्पन्न होता है।
  • सपोटा को कई राज्यों- कर्नाटक, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश में उगाया जाता है।
  • कर्नाटक को फल का सबसे अधिक उत्पादक माना जाता है, इसके बाद महाराष्ट्र का स्थान आता है।
  • इसका उपयोग फलों के सलाद में, दूध या दही में मिश्रित करके, चटनी के रूप में अथवा जैम बनाने के रूप में किया जा सकता है।

 राजस्थान में ‘ब्लैक फंगस’ अर्थात ‘म्यूकोर्मिकोसिस’ को महामारी घोषित

राजस्थान सरकार ने कोरोना वायरस संक्रमण से ठीक होने वाले मरीजों को प्रभावित करने वाली म्यूकोर्मिकोसिस’ (Mucormycosis) अर्थात ‘ब्लैक फंगस’ को महामारी और सूचनीय बीमारी (Notifiable Disease) घोषित कर दिया है।

  • म्यूकोर्मिकोसिस को एक महामारी के रूप में घोषित करने से, कोविड-19 के इलाज के साथ-साथ इस बीमारी का भी “एकीकृत और समन्वित” उपचार सुनिश्चित होगा।
  • यह अधिसूचना ‘राजस्थान महामारी अधिनियम’, 2020 के तहत जारी की गई है।

प्रदर्शनी और सम्मेलन केंद्रों के लिए ‘अवसंरचना’ दर्जा

हाल ही में, वित्त मंत्रालय द्वारा ‘प्रदर्शनी और सम्मेलन केंद्रों’ के लिए ‘इन्फ्रास्ट्रक्चर’ का दर्जा प्रदान किया गया है।

  • सरकार के इस कदम से, ऐसी परियोजनाओं के लिए बैंक वित्तपोषण सुगम होने की संभावना है।
  • पात्रता: इस निर्णय का लाभ, केवल विशेष प्रदर्शनी स्थल या सम्मेलन स्थल या संयुक्त रूप से, 1,00,000 वर्ग मीटर का न्यूनतम निर्मित फर्श-क्षेत्र रखने वाली परियोजनाओं के लिए मिल सकेगा।

ताइवान जलडमरूमध्य

  • ताइवान जलडमरूमध्य (Taiwan Strait), जिसे फॉर्मोसा जलडमरूमध्य (Formosa Strait) भी कहा जाता है, ताइवान और चीन की मुख्य भूमि को अलग करने वाला 180 किमी चौड़ा जलडमरूमध्य है।
  • यह जलडमरूमध्य वर्तमान में दक्षिण चीन सागर का एक भाग है और उत्तर में पूर्वी चीन सागर से जुड़ता है। इसके सबसे संकरे हिस्से की चौड़ाई 130 किमी है।
  • संपूर्ण जलडमरूमध्य, एशिया महाद्वीपीय शेल्फ के ऊपर अवस्थित है।


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