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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 13 May 2021

 

विषयसूची

 सामान्य अध्ययन-II

1. ‘किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम’, 2015

2. टीकाकरण में हिचकिचाहट

 

सामान्य अध्ययन-III

1. राष्ट्रीय उन्नत रासायनिक सेल बैटरी भंडारण कार्यक्रम

2. डिजिटल वित्तीय समावेशन पर नीति आयोग की रिपोर्ट

3. इज़राइल का ‘आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम’

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. विश्व खाद्य पुरस्कार

2. अंतर्राष्ट्रीय नर्स एवं प्रसाविका दिवस

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

‘किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम’, 2015


(Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act)

संदर्भ:

हाल ही में, विशेषज्ञों ने चेतावनी देते हुए कहा है, कि कोविड-19 के दौरान अनाथ हुए बच्चों को गोद लेने की अपील करने वाली सोशल मीडिया पोस्ट गैरकानूनी हैं।

  • कार्यकर्ताओं ने आगाह किया है, कि इस प्रकार विज्ञापन अथवा पोस्ट, ‘किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम’, 2015 (जेजे एक्ट- JJ Act) की धारा 80 और 81 के तहत गैरकानूनी हैं।
  • जेजे एक्ट की उपरोक्त धाराओं में, अधिनियम के तहत निर्धारित प्रक्रिया के अलावा, किसी अन्य प्रकार से बच्चों को गोद लेने अथवा देने संबंधी प्रस्तावों को प्रतिबंधित किया गया है। इसके साथ ही बच्चों की बिक्री और खरीद पर भी रोक लगाई गई है।
  • अधिनियम में, इस प्रकार के कृत्यों के लिए तीन से पांच साल की जेल अथवा 1 लाख रुपए जुर्माने की सजा दिए जाने का प्रावधान किया गया है।

अनाथ हो चुके बच्चों के संदर्भ में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया:

यदि किसी व्यक्ति को किसी ऐसे बच्चे के बारे में जानकारी मिलती है, जिसे देखभाल की जरूरत है, तो उस व्यक्ति के द्वारा निम्नलिखित चार एजेंसियों में से किसी एक से संपर्क किया जाएगा:

  1. चाइल्डलाइन 1098,
  2. जिला बाल कल्याण समिति (CWC),
  3. जिला बाल संरक्षण अधिकारी (DCPO) अथवा
  4. बाल अधिकार संरक्षण राज्य आयोग की हेल्पलाइन।

इसके बाद, बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee- CWC) उस बच्चे का आकलन करेगी तथा और उसे तत्काल ही ‘विशेष दत्तक ग्रहण’ एजेंसी की देखभाल में रखेगी।

जब किसी बच्चे का कोई परिवार नहीं होता है, तो राज्य, उस बच्चे का अभिभावक बन जाता है।

बच्चों की देखभाल हेतु अन्य उपलब्ध विकल्प:

गोद लेना, कई विकल्पों में से मात्र एक विकल्प है, यह एकमात्र विकल्प नहीं है। ऐसे अनाथ बच्चों की देखभाल करने के लिए उनके चाचा-चाची अथवा अन्य कोई निकट संबंधी भी हो सकते हैं। बच्चे अपने स्वयं के परिवार के साथ संपर्क करने और अपनी पैतृक संपति में ही रहने की मांग कर सकते हैं। ऐसी परिस्थितियों में संबंधित बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना अति महत्वपूर्ण हो जाता है।

समय की मांग:

यह समय, रिश्तेदारों द्वारा देखभाल उपलब्ध कराए जाने पर ध्यान केंद्रित करने का है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और सभी संबंधित राज्य विभागों को तत्काल ही रिश्तेदार-देखभाल कार्यक्रम (kinship care programme) शुरू कर देना चाहिए और इसे ‘जेजे अधिनियम’ के तहत ‘पालक-देखभाल प्रावधानों’ (foster care provisions) का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

‘जेजे एक्ट’ के बारे में:

  1. उद्देश्य: विधि का अभिकथित उल्लंघन करते पाए जाने वाले बालकों और देखरेख तथा संरक्षण की आवश्यकता वाले बालकों से संबंधित मामलों का व्यापक रूप से समाधान करना।
  2. अधिनियम के तहत, प्रत्येक जिले में ‘किशोर न्याय बोर्ड’ और ‘बाल कल्याण समितियां’ स्थापित करने का निर्देश दिया गया है। इन संस्थाओं में कम से कम एक महिला सदस्य होनी अनिवार्य है।
  3. इसके अलावा, इसके तहत ‘केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण’ (Central Adoption Resource Authority– CARA) को वैधानिक निकाय का दर्जा दिया गया है, जिससे यह प्राधिकरण अपने कार्यों को प्रभावी ढंग से करने में सक्षम होगा।
  4. इस अधिनियम में बालकों के खिलाफ होने वाले कई नए अपराधों (जैसे, अवैध रूप से गोद लेना, आतंकवादी समूहों द्वारा बालकों का उपयोग, विकलांग बालकों के खिलाफ अपराध, आदि), जो किसी अन्य कानून के तहत पर्याप्त रूप से आच्छादित नहीं है, को शामिल किया गया है।
  5. राज्य सरकार द्वारा, स्वैच्छिक या गैर-सरकारी संगठनों द्वारा संचालित होने वाले सभी बाल देखभाल संस्थानों के लिए क़ानून के प्रारंभ होने की तारीख से 6 महीने के भीतर अधिनियम के तहत अनिवार्य रूप से पंजीकृत होना आवश्यक है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘जेजे एक्ट’ के प्रमुख प्रावधान
  2. CARA के बारे में
  3. अधिनियम के अनुसार बाल-देखभाल संस्थानों का पंजीकरण
  4. अधिनियम में नवीनतम प्रस्तावित संशोधन

मेंस लिंक:

‘किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम’ के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

टीकाकरण में हिचकिचाहट


(Vaccine Hesitancy)

संदर्भ:

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और दूरदराज के जिलों के अधिकारी, कोविड के खिलाफ लड़ाई में ग्रामीणों की टीकाकरण कराने के प्रति हिचकिचाहट (Vaccine Hesitancy) को दूर करने के लिए, एक रणनीति के रूप में अन्य लोगों के साथ-साथ आदिवासी कार्यकर्ताओं को भी शामिल कर रहे हैं।

संबंधित प्रकरण:

आजकल, लोग सही जानकारी की तुलना में मिथ्या एवं भ्रामक खबरों (fake news) पर जल्दी से विश्वास कर लेते हैं। ये मानते है, कि यह वैक्सीन या तो उन्हें मार डालेगी या उन्हें नपुंसक बना देगी।

इस संबंध में की जा रही कार्रवाईयां:

  • प्रशासन, पोस्टर और लोकगीतों के जरिए ग्रामीण और आदिवासी आबादी को आकर्षित करने का प्रयास कर रहा है।
  • प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा, गाँव के पंच और अन्य ग्राम प्रतिनिधियों के लिए उनका और उनके परिवार का टीकाकरण कराना, अनिवार्य किया जा रहा है।
  • इसी तरह, सभी नियोक्ताओं के लिए अपने कर्मचारियों का टीकाकरण कराना अनिवार्य किया गया है।

टीकाकरण में हिचकिचाहट: संकट में पीढ़ी

  • WHO द्वारा टीकाकरण में हिचकिचाहट को ‘टीकाकरण सेवाओं की उपलब्धता के बावजूद टीके की स्वीकृति में देरी या मनाही’ के रूप में परिभाषित किया गया है।
  • ‘टीकाकरण में हिचकिचाहट’ को वैश्विक स्वास्थ्य के लिए इस वर्ष घोषित किए गए 10 खतरों में शामिल किया गया है।

संबंधित चिंताएं:

महामारी के खिलाफ लड़ाई में वैक्सीन, ‘चिकित्सीय साधनों’ (Armamentarium) के आवश्यक हथियारों में से एक है। टीका लगवाने में किसी भी तरह की हिचकिचाहट, महामारी को नियंत्रित करने के प्रयासों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।

समय की मांग:

  1. इस झिझक के पीछे के कारणों का उचित समाधान।
  2. दवा / टीके के निर्माण में शामिल विभिन्न प्रक्रियाओं-नैदानिक ​​परीक्षण डिजाइन, संचालन, निगरानी, ​​विश्लेषण, रिपोर्टिंग और स्वीकृत होने से पहले होने वाली नियामक समीक्षा- पर विस्तार से चर्चा करके जनता को विश्वास दिलाना।
  3. इससे जनता, नैदानिक ​​परीक्षणों के दौरान की जाने वाली कठोर प्रक्रियाओं और नियामकों द्वारा किए जाने वाले अनुमोदन के बारे में जागरूक होगी।

प्रीलिम्स और मेंस लिंक:

टीकाकरण-हिचकिचाहट (Vaccine Hesitancy) का तात्पर्य, चिंताएं, चुनौतियां और इनका समाधान करने के तरीके।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

राष्ट्रीय उन्नत रासायनिक सेल बैटरी भंडारण कार्यक्रम


(National Programme on Advanced Chemistry Cell Battery Storage)

संदर्भ:

केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन योजना (PLI Scheme) “राष्ट्रीय उन्नत रासायनिक सेल बैटरी भंडारण कार्यक्रम” (National Programme on Advanced Chemistry Cell Battery Storage) को लागू करने की मंजूरी दे दी गई है। इस योजना का प्रस्ताव भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा पेश किया गया था। इस योजना के तहत पचास (50) गीगावॉट ऑवर्स और पांच गीगावॉट ऑवर्स की “उपयुक्त” उन्नत रासायनिक सेल (Advanced Chemistry Cell– ACC) बैटरी निर्माण क्षमता प्राप्त करने का लक्ष्य है।

योजना के बारे में:

  • यह टेस्ला-स्टाइल गीगा फैक्ट्रीज के लिए बैटरियों का निर्माण करने के लिए 18,100 करोड़ रुपए की उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन योजना (PLI Scheme) है।
  • इस कार्यक्रम के तहत, लगभग 45,000 करोड़ रुपये का सीधा निवेश आकर्षित करके कुल 50 गीगावॉट ऑवर्स की ‘उन्नत रासायनिक सेल’ (ACC) बैटरी निर्माण सुविधा की स्थापना करने की योजना है।
  • योजना के भाग के रूप में, प्रत्येक चयनित ACC बैटरी भंडारण निर्माता को कम से कम पांच गीगावॉट ऑवर्स की निर्माण सुविधा स्थापित करना और पांच सालों के भीतर 60 प्रतिशत तक घरेलू मूल्य संवर्धन करना होगा।

‘उन्नत रासायनिक सेल’ (ACC) क्या हैं?

उन्नत रासायनिक सेल (Advanced Chemistry Cell- ACC), उन्नत भंडारण प्रौद्योगिकी की नई पीढ़ी है, जिसके तहत बिजली को इलेक्ट्रो-कैमिकल या रासायनिक ऊर्जा के रूप में सुरक्षित किया जा सकता है तथा जरूरत पड़ने पर, इसे फिर से विद्युत् उर्जा में बदला जा सकता है।

योजना का महत्व:

  • ‘उन्नत रासायनिक सेल’ (ACC) की मांग भारत में इस समय आयात के जरिये पूरी की जा रही है।
  • “राष्ट्रीय उन्नत रासायनिक सेल (ACC) बैटरी भंडारण कार्यक्रम” से आयात पर निर्भरता कम होगी। इससे आत्मनिर्भर भारत को भी मदद मिलेगी।
  • ACC बैटरी भंडारण निर्माता का चयन एक पारदर्शी प्रतिस्पर्धात्मक बोली प्रक्रिया के जरिये किया जाएगा। चयन के बाद निर्माणक इकाई को दो वर्ष के भीतर काम चालू करना होगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. उन्नत रासायनिक सेल’ (ACC) क्या हैं?
  2. अनुप्रयोग
  3. ‘पीएलआई योजनाओं’ के बारे में
  4. “राष्ट्रीय उन्नत रासायनिक सेल (ACC) बैटरी भंडारण कार्यक्रम” का अवलोकन

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय।

डिजिटल वित्तीय समावेशन पर नीति आयोग की रिपोर्ट


संदर्भ:

हाल ही में नीति आयोग और मास्टरकार्ड ने ‘संयोजित वाणिज्य: डिजिटल रूप से समावेशी भारत के लिए दिशा-निर्देशों का निर्माण’ अर्थात कनेक्टेड कॉमर्स: क्रिएटिंग ए रोडमैप फॉर ए डिजिटल इन्क्लूसिव भारत’ (Connected Commerce: Creating a Roadmap for a Digitally Inclusive Bharat) शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की।

यह रिपोर्ट, भारत में ‘डिजिटल वित्तीय समावेशन’ (Digital Financial Inclusion) की राह में आने वाली चुनौतियों की पहचान करती है और साथ ही 1.3 अरब नागरिकों के लिए डिजिटल सेवाओं तक पहुँच सुगम बनाने हेतु आवश्यक सिफारिशें करती है।

डिजिटल वित्तीय समावेशन में तेजी लाने की राह में चुनौतियां:

  1. डिजिटल अपवर्जन (Digital Exclusions)
  2. प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के बारे में अज्ञानता
  3. व्याप्त भ्रष्टाचार
  4. अपर्याप्त ग्रामीण बैंकिंग सुविधाएँ
  5. असफल बैंकिंग प्रतिनिधि मॉडल
  6. जवाबदेही संबंधी मामले

रिपोर्ट में शामिल मुख्य सिफारिशें:

  1. एनबीएफसी और बैंकों को एक समान अवसर उालब्ध कराने के लिए पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना।
  2. एमएसएमई को अवसरों भुनाने में सक्षम करने के लिए पंजीयन और अनुपालन प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण करना और क्रेडिट स्रोतों में विविधता लाना।
  3. ‘फ्रॉड रिपॉजिटरी’ सहित सूचना साझाकरण प्रणाली का निर्माण और यह सुनिश्चित करना कि ऑनलाइन डिजिटल कॉमर्स प्लेटफॉर्म उपभोक्ताओं को धोखाधड़ी के जोखिम के प्रति सचेत करने के लिए चेतावनी भेजी जानी चाहिए।
  4. कृषि एनबीएफसी को कम लागत वाली पूंजी तक पहुंच बनाने के लिए सक्षम करना और बेहतर दीर्घकालिक डिजिटल परिणामों को प्राप्त करने के लिए एक ‘फिजिटल’ (भौतिक+डिजिटल) [physical + digital : phygital] मॉडल को विस्तार करना। भू-अभिलेखों का डिजिटलीकरण भी इस क्षेत्र के लिए प्रोत्साहित करेगा।
  5. न्यूनतम भीड़-भाड़ वाले शहरों में आवागमन को सुलभ बनाने के लिए मौजूदा स्मार्टफोन और कॉन्टेक्टलेस कार्ड का लाभ उठाते हुए, एक समावेशी, इंटरऑपरेबल, और पूरी तरह से खुले सिस्टम जैसे कि लंदन ‘ट्यूब’ का निर्माण करना।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव।

इज़राइल का ‘आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम’


संदर्भ:

इजरायल और फिलिस्तीन के बीच जारी संघर्ष में दोनों पक्षों द्वारा हवाई हमले और रॉकेट हमले किए गए हैं।

हाल ही में, गाजा पट्टी से दागे जाने वाले रॉकेटों को इजरायली ‘आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम’ (Iron Dome air defence system) द्वारा बीच में ही रोक दिया गया। ऐसा प्रतीत हो रहा था, कि जैसे रॉकेट किसी अदृश्य ढाल से टकरा रहे हों।

‘आयरन डोम’ क्या है?

‘लौह गुंबद’ अर्थात ‘आयरन डोम’ (Iron Dome), वर्ष 2011 में तैनात की गई एक कम दूरी की, सतह  से हवाई सुरक्षा करने वाली ‘वायु रक्षा प्रणाली’ है।

  • यह प्रणाली ‘रडार’ और ‘तामिर (Tamir) इंटरसेप्टर मिसाइल’ से लैस है, जो इजरायल पर हमला करने वाली मिसाइलों या रॉकेटो को ट्रैक करके बेअसर कर देती है।
  • इसका उपयोग विमानों, हेलीकॉप्टर, मानव रहित हवाई वाहनों के साथ-साथ रॉकेट, तोपों और मोर्टार का प्रतिरोध (Countering Rockets, Artillery & Mortars: C-RAM) करने के लिए किया जाता है।
  • इसकी सफलता दर 90% से अधिक है।

इसकी कार्यविधि एवं प्रभाविकता:

  • आयरन डोम में तीन मुख्य प्रणालियाँ होती है, जो अपनी तैनाती-क्षेत्र को सुरक्षा-कवच प्रदान करने तथा विभिन्न खतरों को संभालने के लिए एक साथ कार्य करती हैं।
  • इसमें, आने वाले किसी भी खतरे की सूचना देने और उसका पीछा करने के लिए एक ‘रडार’, एक युद्ध प्रबंधन और हथियार नियंत्रण प्रणाली (battle management and weapon control system- BMC), तथा एक ‘मिसाइल फायरिंग यूनिट’ लगी होती है।
  • ‘आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम’, दिन-रात और सभी मौसम में कार्य करने में सक्षम है।

भारत के पास इस तरह की कौन सी प्रणाली है?

  • भारत के पास S-400 प्रणाली है, जो रॉकेट, मिसाइल और क्रूज मिसाइल के तीन खतरों से निपटने में सक्षम है। किंतु इनकी रेंज काफी अधिक होती है। S400 प्रणाली, लगभग 300 से 400 किमी रेंज से दागी जाने वाली मिसाइलों, विमानों को मार गिराती है।
  • फिलहाल इस समय, भारत के पास कम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली आकाश मिसाइल, और एक रूसी प्रणाली ‘पिकोरा’ (Pechora) है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. आयरन डोम तथा इसकी कार्यविधि के बारे में
  2. भारत की आकाश मिसाइल प्रणाली
  3. ‘पिकोरा’ (Pechora) के बारे में
  4. गाजा पट्टी की अवस्थिति

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


विश्व खाद्य पुरस्कार

(World Food Prize)

भारतीय मूल की ‘वैश्विक पोषण विशेषज्ञ’ डॉ शकुंतला हरकसिंह थिलस्टेड (Dr Shakuntala Haraksingh Thilsted) को, जलीय कृषि और खाद्य प्रणालियों हेतु समग्र, पोषण-संवेदनशील पद्धति विकसित करने संबंधी अपने अभूतपूर्व अनुसंधान के लिए प्रतिष्ठित “विश्व खाद्य पुरस्कार” 2021 प्रदान किया गया है।

‘विश्व खाद्य पुरस्कार’ के बारे में:

विश्व खाद्य पुरस्कार, विश्व में भोजन-गुणवत्ता, मात्रा या उपलब्धता में सुधार करके मानव विकास करने संबंधी कार्य करने वाले व्यक्तियों की विशिष्ट उपलब्धियों को मान्यता प्रदान करने हेतु दिया जाने वाला सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय सम्मान है।

  • पुरस्कार के अंतर्गत कवर किए जाने वाले क्षेत्र: पादप, पशु और मृदा विज्ञान; खाद्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी; पोषण, ग्रामीण विकास, आदि सहित विश्व खाद्य आपूर्ति से संबंधित सभी क्षेत्र।
  • पात्रता: यह पुरस्कार, सभी नृजातियों, धर्मों, राष्ट्रीयता या राजनीतिक मान्यताओं के किसी भी व्यक्ति को दिया जा सकता है।
  • नकद पुरस्कार: $ 2,50,000।
  • यह पुरस्कार, ‘विश्व खाद्य पुरस्कार फाउंडेशन’ द्वारा प्रदान किया जाता है। इस फाउंडेशन में लगभग 80 से अधिक कंपनियां और निजी व्यक्ति दानकर्ता के रूप में शामिल हैं।
  • इस पुरस्कार की परिकल्पना, वैश्विक कृषि में अपने कार्यों के लिए वर्ष 1970 में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता डॉ. नॉर्मन ई बोरलॉग (Norman E. Borlaug) द्वारा की गयी थी। इनके लिए हरित क्रांति के जनक के रूप में भी जाना जाता है।
  • विश्व खाद्य पुरस्कार का गठन वर्ष 1986 में किया गया था, इसके प्रायोजक ‘जनरल फ़ूड कॉर्पोरेशन’ थे।
  • इसे “खाद्य और कृषि क्षेत्र का नोबेल पुरस्कार” के रूप में भी जाना जाता है।
  • यह पुरूस्कार सर्वप्रथम वर्ष 1987 में, भारत में हरित क्रांति के जनक , डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन को दिया गया था।

 

अंतर्राष्ट्रीय नर्स एवं प्रसाविका दिवस

(International Nurses and Midwives Day)

प्रतिवर्ष 12 मई को मनाया जाता है।

  • इस वर्ष का विषय: नर्स: ए वॉयस टू लीड- ए विजन फॉर फ्यूचर हेल्थकेयर।
  • इसकी शुरुआत वर्ष 1965 में ‘इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ नर्स’ (ICN) द्वारा की गई थी।
  • यह दिवस, प्रसिद्ध नर्स ‘फ्लोरेंस नाइटिंगेल’ के जन्मदिन पर मनाया जाता है।
  • ‘फ्लोरेंस नाइटिंगेल’ एक अंग्रेजी नर्स, समाज सुधारक और सांख्यिकीविद् थीं। क्रीमिया युद्ध के दौरान, उन्होंने नर्सों के प्रबंधक और प्रशिक्षक के रूप में कार्य करते हुए प्रसिद्धि हासिल की, और वे आधुनिक नर्सिंग की संस्थापक भी थीं।

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