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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 12 May 2021

 

विषयसूची

 सामान्य अध्ययन-III

1. चीन की जनसंख्या वृद्धि दर कई दशकों में सबसे कम

 

सामान्य अध्ययन-III

1. बेंगलूरु में गठित DETER समितियों की भूमिका

2. WHO द्वारा ‘वायरस के भारतीय वेरिएंट’ का ‘वैश्विक रूप से चिंताजनक’ के रूप में वर्गीकरण

3. यरूशलेम में होने वाली वर्तमान घटनाओं का कारण

 

सामान्य अध्ययन-III

1. जल जीवन मिशन (JJM)

  

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन, जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और उनके रक्षोपाय।

 चीन की जनसंख्या वृद्धि दर कई दशकों में सबसे कम


संदर्भ:

हाल ही में, चीन में सातवीं जनगणना की गई थी। चीन में, प्रति दस वर्षों में एक-बार जनगणना की जाती है।

प्रमुख निष्कर्ष:

  • पिछले वर्ष 12 मिलियन बच्चों ने जन्म लिया, यह एक वर्ष में पैदा होने वाले बच्चों की, वर्ष 1961 के बाद से, सबसे कम संख्या है। वर्ष 1961 की जनगणना के समय, चीन, माओत्से तुंग द्वारा वर्ष 1958 में लागू की गई ‘ग्रेट लीप फॉरवर्ड’ नीति के कारण पड़ने वाले चार-वर्षीय अकाल के दौर से गुजर रहा था। इस नीति की वजह से कृषि क्षेत्र तबाह हो गया था और लाखों लोगों की जान चली गई थी।
  • वर्ष 2020 में चीन की जनसंख्या 1.41 बिलियन दर्ज की गई थी, जोकि वर्ष 2010 में की गई पिछली जनगणना से 72 मिलियन अधिक थी और इसमें 5.38% की वृद्धि  हुई। इस दौरान जनसँख्या में औसत वार्षिक वृद्धि 0.53% रही।
  • जनगणना में धीमी जनसंख्या वृद्धि दर दर्ज की गई है, जिससे वर्ष 2025 तक चीन के ‘जनसंख्या शिखर’ पर पहुचने की संभावना है।

चीन के लिए चिंता का विषय:

  • जनसंख्या की धीमी वृद्धि दर, दशकों से चली आ रहे चीन के कड़े परिवार नियोजन नियमों का परिणाम है- जिन्हें ‘वन चाइल्ड पॉलिसी’ (One Child Policy) के रूप में जाना जाता है।
  • इस कारण चीन में तेजी से बूढ़े होते समाज तथा श्रम शक्ति पर पड़ने वाले प्रभाव की चिंता उत्पन्न हो गयीं है, इसके साथ ही कुछ विशेषज्ञों के अनुसार, चीन के ‘समृद्ध होने से पहले ही बूढा होने’ का भय पैदा हो गया है ।
  • श्रम शक्ति और स्वास्थ्य सेवा पर पड़ने वाला प्रभाव, विशेष चिंता का विषय है।

बदलाव की दिशा में प्रयास:

चीन द्वारा ‘परिवार नियोजन नियमों’ को शिथिल कर दिया गया है, और वर्ष 2016 में दंपतियों को दो बच्चे पैदा करने की अनुमति भी दी गई थी, लेकिन, खासकर बड़े शहरों में बदलती जीवनशैली और बड़े परिवारों की घटती प्राथमिकताओं के चलते इसका कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ रहा है।

चीन में ‘वन चाइल्ड पॉलिसी’ लागू किए जाने का कारण:

  • चीन में ‘वन चाइल्ड पॉलिसी’ मुख्यतः ‘माल्थस सिद्धांत’ के भय की वजह से लागू की गई थी। इस सिद्धांत के अनुसार, अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि के परिणामस्वरूप आर्थिक और पर्यावरणीय विनाश हो सकता है।
  • ‘वन चाइल्ड पॉलिसी’ लागू किए जाने का एक कारण भोजन के अभाव से संबंधित चिंताएं भी थीं।

‘माल्थसियन सिद्धांत’ (Malthusian theory) क्या है?

थॉमस रॉबर्ट माल्थस, जनसंख्या का सुनियोजित सिद्धांत प्रस्तावित करने वाले पहले अर्थशास्त्री थे। उन्होंने तर्क दिया था, कि यदि जनसंख्या वृद्धि को अनियंत्रित छोड़ दिया जाता है, तो एक समय के बाद जनसंख्या उपलब्ध संसाधनों से अधिक हो जाएगी, जिससे कई समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।

‘वन चाइल्ड पॉलिसी’ के लाभ:

  1. अति जनसंख्या के कारण होने वाली समस्याओं को कम करने में सहायक है।
  2. इसे कुछ परिवारों द्वारा इसे व्यावहारिक माना जाता है।
  3. निर्धनता दर कम करती है।

‘वन चाइल्ड पॉलिसी’ की खामियां:

  1. ‘वन चाइल्ड पॉलिसी’ का असमान प्रवर्तन।
  2. यह एक मानवाधिकार उल्लंघन है।
  3. काम करने वाली आबादी में कमी।
  4. श्रम और अन्य कार्यों के लिए लड़कों के लिए सांस्कृतिक प्राथमिकता के कारण लैंगिक असंतुलन।
  5. गर्भपात और कन्या भ्रूण हत्या में वृद्धि।
  6. अतिरिक्त शिशुओं पर जुर्माना लगाए जाने के कारण, इनके लिए अवैध माना जाता है और कभी भी नागरिक का दर्जा नहीं दिया जाता है।
  7. लोगों के व्यक्तिगत मूल्यों और विचारों पर हस्तक्षेप।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. जनसंख्या माल्थसियन सिद्धांत’ के बारे में।
  2. चीन की ‘वन चाइल्ड पॉलिसी’
  3. भारत के किन राज्यों में ‘बच्चों की संख्या पर प्रतिबंध’ से संबंधित नीतियां लागू हैं।

मैंस लिंक:

चीन की ‘वन चाइल्ड पॉलिसी’ का परीक्षण कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: विकास प्रक्रिया तथा विकास उद्योग- गैर-सरकारी संगठनों, स्वयं सहायता समूहों, विभिन्न समूहों और संघों, दानकर्ताओं, लोकोपकारी संस्थाओं, संस्थागत एवं अन्य पक्षों की भूमिका।

बेंगलूरु में गठित DETER समितियों की भूमिका


संदर्भ:

स्थानीय स्तर पर कोविड महामारी का प्रबंधन करने हेतु लिए, कर्नाटक राज्य सरकार द्वारा बेंगलुरू में वार्ड-स्तर पर ‘विकेंद्रीकृत गंभीर रोगियों की छँटाई और आपातकालीन प्रतिक्रिया’ (Decentralized Triage and Emergency Response DETER) समितियों का गठन किया गया है।

DETER समितियों के बारे में:

  • इसका उद्देश्य कोरोनोवायरस महामारी के संदर्भ में सरकारी प्रतिक्रिया और प्रबंधन को मजबूत करना है।
  • ये दल, आपदा प्रतिक्रिया की विकेंद्रीकृत प्रणाली में स्थानीय कार्रवाई के वितरण पर जोर देंगे।
  • ये समितियां, अधिकारियों, वार्ड समिति के सदस्यों, सरकारी अधिकारियों, जन प्रतिनिधियों, निवासी- कल्याण संघों के स्वयंसेवकों, नागरिक समाज संगठनों और आपदा-सहायता पहल के साथ तालमेल से कार्य करेंगे।

भूमिकाएँ एवं कार्य:

  • ये समितियाँ, कोविड-19 से संक्रमित लोगों के लिए सर्वप्रथम संपर्क-केंद्र के रूप में कार्य करेंगी।
  • कर्नाटक सरकार ने ‘वार्ड DETER समितियों’ (Ward DETER Committees- WDC) के लिए व्यापक स्तर पर सूक्ष्मता से कोविड-19 का प्रबंधन करने के लिए ‘3E रणनीति’ (3E Strategy) तैयार की है।

‘3E रणनीति’ के तहत निम्नलिखित कार्यों को शामिल किया गया है:

  1. सामुदायिक आपातकाल में कार्यवाही की प्राथमिकता का निर्धारण करने वाली सेवाओं (Triage Services) से युक्त अस्पतालों में सफलता पूर्वक भर्ती कराना;
  2. प्रभावशाली तरीके से विस्तरों को बदलने हेतु अस्पतालों से सफलतापूर्वक छुट्टी;
  3. अस्पतालों, डॉक्टरों और उनके प्रबंधन के लिए सहायक पर्यवेक्षण उपलब्ध कराना।

महत्व:

इससे बेहतर वार्ड-स्तर पर कोविड के प्रबंधन हेतु पर्यवेक्षण में सुधार होने की अपेक्षा है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. DETER समितियों के बारे में।
  2. उनकी भूमिकाएं और जिम्मेदारियां।

मेंस लिंक:

‘नागरिक समाज समूह’ कोविड महामारी के प्रसार को प्रबंधित करने में किस प्रकार मदद कर सकते हैं? चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

  

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

WHO द्वारा ‘वायरस के भारतीय वेरिएंट’ का ‘वैश्विक रूप से चिंताजनक’ के रूप में वर्गीकरण


(WHO classifies India variant as being of global concern)

संदर्भ:

हाल ही में, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा ‘कोरोनावायरस वेरिएंट, B.1.617, को ‘वैश्विक चिंता का विषय’ के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

  • वायरस का यह ‘प्रकार’ (वेरिएंट) सबसे पहले भारत में देखा गया था। इसलिए इसे ‘भारतीय वेरिएंट’ कहा जा रहा है।
  • इस वायरस वेरिएंट को मई माह में ब्रिटेन के अधिकारियों द्वारा ‘अन्वेषणाधीन वेरिएंट’ (variant under investigation VUI) के रूप में वर्गीकृत किया गया था।
  • अभी तक यह वेरिएंट, 17 से अधिक देशों में फैल चुका है।

भारत के लिए चिंता का विषय:

पिछले हफ्ते, भारत सरकार ने कहा है, कि कुछ राज्यों में कोरोनावायरस मामलों की हालिया वृद्धि का कारण “डबल म्यूटेंट वैरिएंट” कहा जाने वाला यह वायरस वैरिएंट हो सकता है

वायरस का रूपांतरण किस प्रकार और क्यों होता है?

  1. वायरस के प्रकारों में एक या एक से अधिक उत्परिवर्तन (Mutations) होते हैं, जो इस नए रूपांतरित प्रकार को, माजूदा अन्य वायरस वेरिएंटस से अलग करते हैं।
  2. दरअसल, वायरस का लक्ष्य एक ऐसे चरण तक पहुंचना होता है जहां वह मनुष्यों के साथ रह सके, क्योंकि उसे जीवित रहने के लिए एक पोषक (Host) की जरूरत होती है।
  3. विषाणुजनित RNA में होने वाली त्रुटियों को उत्परिवर्तन कहा जाता है, और इस प्रकार उत्परिवर्तित वायरस को ‘वेरिएंट’ कहा जाता है। एक या कई उत्परिवर्तनों से निर्मित हुए ‘वेरिएंट’ परस्पर एक-दूसरे से भिन्न हो सकते हैं।

SARS-CoV-2 वायरस:

पूरे विश्व में इस वायरस से बड़े स्तर पर लोग संक्रमित हो चुके हैं, और इसी वजह से यह अधिक तेजी से फ़ैल रहा है।

  • बड़े स्तर पर वायरस के फैलने का तात्पर्य यह है, कि वायरस अपनी प्रतिकृतियां तेजी से बनाने में सक्षम होता है, जिससे इसे रूपांतरण करने में आसानी होती है है।
  • 1.617 वेरिएंट के E484Q और L425R, नामक दो ‘उत्परिवर्तनों’ (Mutations) की पहचान की चुकी है।
  • ये दोनों उत्परिवर्तन, कई अन्य कोरोनोवायरस वेरिएंट में अलग-अलग पाए जाते हैं, लेकिन भारत में यह दोनों पहली बार एक साथ देखे गए हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ‘चिंताजनक वेरिएंट’ को किस प्रकार परिभाषित करता है?

‘वेरिएंट ऑफ इंटरेस्ट’ (VOI), दो तरीकों से ‘वेरिएंट ऑफ कंसर्न (VOC) में परिवर्तित किया जाता है:

  1. सबसे पहले, यदि एक तुलनात्मक आकलन के माध्यम से यह प्रदर्शित होता है, कि वेरिएंट, कोविड-19 महामारी विज्ञान में हानिकारक परिवर्तनों अथवा इसकी संक्रमणीयता में वृद्धि, इसकी विषाक्तता में वृद्धि अथवा नैदानिक ​​रोग प्रस्तुति में परिवर्तन, सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक उपायों अथवा उपलब्ध नैदानिकी, टीकों, थेरेपी की प्रभावशीलता में कमी से संबद्ध है।
  2. फिर इसके बाद, WHO के SARS-CoV-2 वायरस इवोल्यूशन वर्किंग ग्रुप’ के परामर्श से विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), द्वारा इस वेरिएंट को ‘वेरिएंट ऑफ कंसर्न (VOC) के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

यरूशलेम में होने वाली वर्तमान घटनाओं का कारण


संदर्भ:

अप्रैल के मध्य में रमजान शुरू होने के बाद से इजरायल की सेना और फिलिस्तीनियों के बीच यरूशलेम में तनाव बढ़ता जा रहा है।

  • हाल ही में, इजरायली सशस्त्र बलों ने यरूशलेम के हरम अश-शरीफ (Haram esh-Sharif) में स्थित अल-अक्सा मस्जिद पर हमला कर दिया था।
  • इसकी जवाबी कार्रवाई में, इस्लामिक आतंकवादी समूह ‘हमास’ (Hamas) द्वारा दर्जनों रॉकेट दागे गए। ज्ञातव्य है, कि गाजा पट्टी पर ‘हमास’ का नियंत्रण है।

यरूशलेम, वर्तमान घटनाओं का केंद्र:

यरूशलम, शुरू से ही इजरायल-फिलिस्तीनी संघर्ष के केंद्र में रहा है।

  • 1947 की संयुक्त राष्ट्र विभाजन योजना (UN Partition Plan) के मूल दस्त्वेजों के अनुसार, यरूशलेम को एक अंतरराष्ट्रीय शहर बनाया जाना प्रस्तावित था।
  • किंतु, वर्ष 1948 में हुए पहले अरब-इजरायल युद्ध में, इजरायलियों ने शहर के पश्चिमी आधे हिस्से पर कब्जा कर लिया, और जॉर्डन ने पूर्वी हिस्से पर अपना अधिकार जमा लिया। शहर के पूर्वी भाग में ‘ओल्ड सिटी’ भी शामिल है जिसमे ‘हरम अश-शरीफ’ स्थित है।
  • अल-अक्सा मस्जिद (Al-Aqsa Mosque), इस्लाम धर्म का तीसरा सबसे पवित्र स्थल है और ‘हरम अश-शरीफ’ के भीतर ‘चट्टानी गुंबद’ (Dome of the Rock) स्थित है।
  • इज़राइल ने वर्ष 1967 हुए छह-दिवसीय युद्ध में, जॉर्डन के अधिकार में आने वाले पूर्वी यरूशलेम पर कब्ज़ा कर लिया और बाद में इसे अपने राज्य में शामिल कर लिया।

नागरिकता संबंधी मुद्दे:

  • अपने राज्य में शामिल करने के बाद से, इज़राइल द्वारा पूर्वी यरुशलम में बस्तियों का विस्तार किया गया है, जिनमे अब लगभग 220,000 यहूदी निवास करते हैं।
  • पूर्वी येरुशलम में पैदा होने वाले यहूदियों को इजरायली नागरिकता प्रदान की जाती हैं, जबकि शहर में रहने वाले फिलिस्तीनियों को सशर्त निवास परमिट दिए जाते हैं।
  • इजरायली कब्जे वाले वेस्ट बैंक के अन्य हिस्सों के विपरीत, पूर्वी यरुशलम में फिलिस्तीनीयों को, इजरायल की नागरिकता के लिए आवेदन करने की अनुमति है।
  • हालांकि, बहुत कम फिलिस्तीनियों द्वारा इजरायल की नागरिकता के लिए आवेदन किया गया है।

समस्या का मूल कारण:

  • इज़राइल पूरे यरुशलम शहर को “एकीकृत, अपरिवर्तनशील राजधानी” मानता है। इज़राइल के इस दावे का पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने समर्थन किया था, यद्यपि अधिकांश अन्य देश इस दावे को मान्यता नहीं देते हैं।
  • संपूर्ण राजनीतिक विस्तार के फिलिस्तीनी नेताओं का कहना है कि, जब तक पूर्वी यरुशलम को फिलिस्तीन की राजधानी नहीं घोषित किया जाता है, तब तक, वे भविष्य में बनने वाले फिलिस्तीनी राष्ट्र के लिए किसी भी समझौता फार्मूला को स्वीकार नहीं करेंगे।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. यरूशलेम के बारे में
  2. छह दिन का युद्ध
  3. इज़राइल फिलिस्तीन संघर्ष
  4. गाजा पट्टी
  5. अल-अक्सा मस्जिद कहाँ स्थित है?

मेंस लिंक:

इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

जल जीवन मिशन (JJM)


(Jal Jeevan Mission)

संदर्भ:

केंद्र सरकार के फ्लैगशिप कार्यक्रम, जल जीवन मिशन के तहत हर ग्रामीण घर तक पानी की आपूर्ति करने वाला पुड्डुचेरी चौथा केंद्र शासित प्रदेश बन गया है। इससे पहले गोवा, तेलंगाना और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह इस लक्ष्य पर प्राप्त कर चुके हैं।

‘जल जीवन मिशन’ के बारे में:

  • ‘जल जीवन मिशन’ के तहत वर्ष 2024 तक सभी ग्रामीण घरों में, कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (Functional House Tap Connections- FHTC) के माध्यम से प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 55 लीटर जल की आपूर्ति की परिकल्पना की गई है।
  • यह अभियान, जल शक्ति मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।

इसके अंतर्गत निम्नलिखित कार्यो को शामिल किया गया है:

  1. गुणवत्ता प्रभावित क्षेत्रों, सूखा प्रवण और रेगिस्तानी क्षेत्रों के गांवों, सांसद आदर्श ग्राम योजना (SAGY) के अंतर्गत आने वाले गांवों, आदि में कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) लगाए जाने को प्राथमिकता देना।
  2. स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों, ग्राम पंचायत भवनों, स्वास्थ्य केंद्रों, कल्याण केंद्रों और सामुदायिक भवनों के लिए कार्यात्मक नल कनेक्शन की सुविधा प्रदान करना।
  3. जल-गुणवत्ता की समस्या वाले स्थानों को प्रदूषण-मुक्त करने के लिए तकनीकी हस्तक्षेप।

कार्यान्वयन:

  • ‘जल जीवन मिशन’, जल के प्रति सामुदायिक दृष्टिकोण पर आधारित है और इसके तहत मिशन के प्रमुख घटक के रूप में व्यापक जानकारी, शिक्षा और संवाद को शामिल किया गया है।
  • इस मिशन का उद्देश्य, जल के लिए एक जन-आंदोलन तैयार करना है, जिसके द्वारा यह हर किसी की प्राथमिकता में शामिल हो जाए।
  • इस मिशन के लिए, केंद्र और राज्यों द्वारा, हिमालयी और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 90:10; अन्य राज्यों के लिए 50:50 के अनुपात में; और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए केंद्र सरकार द्वारा 100% वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘जल जीवन मिशन’ का लक्ष्य
  2. कार्यान्वयन
  3. राशि आवंटन

मेंस लिंक:

‘जल जीवन मिशन’ के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस

(National Technology Day)

  • भारत 11 मई को ‘राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस’ (National Technology Day) के रूप में मनाता है।
  • इस दिवस को पहली बार 11 मई, 1999 को मनाया गया था, इसका उद्देश्य भारतीय वैज्ञानिकों, इंजीनियरों की वैज्ञानिक और तकनीकी उपलब्धियों का स्मरण करना है।

इस वर्ष का विषय: ” सतत भविष्य हेतु विज्ञान और प्रौद्योगिकी” (Science and Technology for a Sustainable Future)।

महत्व:

  • इस दिन मई, 1998 में भारत ने पोखरण में परमाणु बमों का सफलतापूर्वक परीक्षण किया था।
  • भारत ने पोखरण- II नामक ऑपरेशन में अपनी शक्ति –1 परमाणु मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया, जिसे ऑपरेशन शक्ति के रूप में भी जाना जाता है।
  • इसी दिन, भारत ने त्रिशूल मिसाइल (सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल) का सफल परीक्षण और पहले स्वदेश निर्मित विमान – ‘हंस- 3’ का परीक्षण किया था।

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