HINDI INSIGHTS STATIC QUIZ 2020-2021
Quiz-summary
0 of 5 questions completed
Questions:
- 1
- 2
- 3
- 4
- 5
Information
Welcome to Insights IAS Static Quiz in HINDI. We have already outlined details of this New Initiative HERE.
You have already completed the quiz before. Hence you can not start it again.
Quiz is loading...
You must sign in or sign up to start the quiz.
You have to finish following quiz, to start this quiz:
Results
0 of 5 questions answered correctly
Your time:
Time has elapsed
You have reached 0 of 0 points, (0)
Categories
- Not categorized 0%
- 1
- 2
- 3
- 4
- 5
- Answered
- Review
-
Question 1 of 5
1. Question
संसदीय समितियों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- संसदीय समितियों को संविधान से अधिकार प्राप्त हैं।
- संसदीय समितियां सांसदों को कार्यकारी प्रक्रियाओं को बारीकी से समझने में सक्षम बनाती हैं।
- संसदीय समितियों की सिफारिशे संसद पर बाध्यकारी होती हैं।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: a)
विधायिका के लिए कार्यकारी जवाबदेही संसद में सवालों के माध्यम से लागू की जाती है, जिनका जवाब मंत्रियों द्वारा दिया जाता है। यह तंत्र सांसदों को कार्यकारी प्रक्रियाओं को बारीकी से समझने में सक्षम बनाता है।
संसदीय समितियां अनुच्छेद 105 (संसद सदस्यों के विशेषाधिकारों से संबंधित) और अनुच्छेद 118 (संसद की अपनी प्रक्रिया और कार्य का संचालन के लिए नियम बनाने की शक्ति) से अपना अधिकार प्राप्त करती हैं। समिति की रिपोर्टें आमतौर पर विस्तृत होती हैं और शासन से संबंधित मामलों पर प्रामाणिक जानकारी प्रदान करती हैं। समितियों को संदर्भित बिलों को महत्वपूर्ण फीडबैक के साथ सदन को वापस प्रेषित कर दिता जाता हैं। संसदीय समितियों की सिफारिशे संसद पर बाध्यकारी नहीं होती हैं।
Incorrect
उत्तर: a)
विधायिका के लिए कार्यकारी जवाबदेही संसद में सवालों के माध्यम से लागू की जाती है, जिनका जवाब मंत्रियों द्वारा दिया जाता है। यह तंत्र सांसदों को कार्यकारी प्रक्रियाओं को बारीकी से समझने में सक्षम बनाता है।
संसदीय समितियां अनुच्छेद 105 (संसद सदस्यों के विशेषाधिकारों से संबंधित) और अनुच्छेद 118 (संसद की अपनी प्रक्रिया और कार्य का संचालन के लिए नियम बनाने की शक्ति) से अपना अधिकार प्राप्त करती हैं। समिति की रिपोर्टें आमतौर पर विस्तृत होती हैं और शासन से संबंधित मामलों पर प्रामाणिक जानकारी प्रदान करती हैं। समितियों को संदर्भित बिलों को महत्वपूर्ण फीडबैक के साथ सदन को वापस प्रेषित कर दिता जाता हैं। संसदीय समितियों की सिफारिशे संसद पर बाध्यकारी नहीं होती हैं।
-
Question 2 of 5
2. Question
न्यायिक समीक्षा के ढांचे के तहत, सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय को निम्नलिखित में से किन परिस्थितियों में किसी भी कानून को असंवैधानिक घोषित करने की शक्ति प्राप्त है?
- यदि यह अल्ट्रा वायर्स है
- यदि यह किसी मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है
- यदि यह एक ही विषय पर केंद्रीय कानून के प्रतिकूल होता है
- यदि इसे विधायी अधिकार क्षेत्र के बिना अधिनियमित किया गया है
सही उत्तर कूट का चयन कीजिए:
Correct
उत्तर: d)
यदि संसद या राज्य विधानसभाओं द्वारा बनाया गया कोई कानून संविधान के किसी प्रावधान का उल्लंघन करता है, तो सर्वोच्च न्यायालय के पास ऐसे कानून को अमान्य या अल्ट्रा वायर्स घोषित करने की शक्ति है।
अनुच्छेद 254: यदि किसी राज्य के विधान-मंडल द्वारा बनाई गई विधि का कोई उपबंध संसद द्वारा बनाई गई विधि के, जिसे अधिनियमित करने के लिए संसद सक्षम है, किसी उपबंध के या समवर्ती सूची में प्रगणित किसी विषय के संबंध में विद्यमान विधि के किसी उपबंध के विरुद्ध है तो खंड (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, यथास्थिति, संसद द्वारा बनाई गई विधि, चाहे वह ऐसे राज्य के विधान-मंडल द्वारा बनाई गई विधि से पहले या उसके बाद में पारित की गई हो, या विद्यमान विधि, अभिभावी होगी और उस राज्य के विधान-मंडल द्वारा बनाई गई विधि उस विरोध की मात्रा तक शून्य होगी।
Incorrect
उत्तर: d)
यदि संसद या राज्य विधानसभाओं द्वारा बनाया गया कोई कानून संविधान के किसी प्रावधान का उल्लंघन करता है, तो सर्वोच्च न्यायालय के पास ऐसे कानून को अमान्य या अल्ट्रा वायर्स घोषित करने की शक्ति है।
अनुच्छेद 254: यदि किसी राज्य के विधान-मंडल द्वारा बनाई गई विधि का कोई उपबंध संसद द्वारा बनाई गई विधि के, जिसे अधिनियमित करने के लिए संसद सक्षम है, किसी उपबंध के या समवर्ती सूची में प्रगणित किसी विषय के संबंध में विद्यमान विधि के किसी उपबंध के विरुद्ध है तो खंड (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, यथास्थिति, संसद द्वारा बनाई गई विधि, चाहे वह ऐसे राज्य के विधान-मंडल द्वारा बनाई गई विधि से पहले या उसके बाद में पारित की गई हो, या विद्यमान विधि, अभिभावी होगी और उस राज्य के विधान-मंडल द्वारा बनाई गई विधि उस विरोध की मात्रा तक शून्य होगी।
-
Question 3 of 5
3. Question
निम्नलिखित में से कौन-से विषयों के संवैधानिक संशोधन हेतु आधे से अधिक राज्यों के अनुसमर्थन की आवश्यकता होती है?
- राष्ट्रपति का निर्वाचन
- किसी राज्य में विधान परिषद का उन्मूलन
- सातवीं अनुसूची से संबंधित कोई अनुसूची
- संसद में राज्यों का प्रतिनिधित्व
सही उत्तर कूट का चयन कीजिए:
Correct
उत्तर: b)
संविधान के वे प्रावधान जो राजव्यवस्था के संघीय ढांचे से संबंधित हैं, संसद के विशेष बहुमत द्वारा और साथ ही आधे से अधिक राज्यों के बहुमत से संशोधित किए जा सकते हैं।
निम्न प्रावधानों को इसी आधरों पर संशोधित किया जा सकता है:
- राष्ट्रपति का निर्वाचन और उसकी विधि।
- संघ और राज्यों की कार्यकारी शक्ति का विस्तार।
- सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय।
- संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण।
- सातवीं अनुसूची से संबंधित कोई अनुसूची
- संसद में राज्यों का प्रतिनिधित्व।
- संविधान और उसकी प्रक्रिया में संशोधन करने की संसद की शक्ति (अनुच्छेद 368)।
Incorrect
उत्तर: b)
संविधान के वे प्रावधान जो राजव्यवस्था के संघीय ढांचे से संबंधित हैं, संसद के विशेष बहुमत द्वारा और साथ ही आधे से अधिक राज्यों के बहुमत से संशोधित किए जा सकते हैं।
निम्न प्रावधानों को इसी आधरों पर संशोधित किया जा सकता है:
- राष्ट्रपति का निर्वाचन और उसकी विधि।
- संघ और राज्यों की कार्यकारी शक्ति का विस्तार।
- सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय।
- संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण।
- सातवीं अनुसूची से संबंधित कोई अनुसूची
- संसद में राज्यों का प्रतिनिधित्व।
- संविधान और उसकी प्रक्रिया में संशोधन करने की संसद की शक्ति (अनुच्छेद 368)।
-
Question 4 of 5
4. Question
भारतीय संविधान में अनुच्छेद 156 में कहा गया है कि राज्यपाल पद धारण करने से पांच वर्ष के लिए पद धारण करेगा। इस संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए?
- राज्यपाल को उसके कार्यकाल पूरा होने से पूर्व पद से नहीं हटाया जा सकता है।
- राज्यपाल पाँच वर्ष से अधिक की अवधि के लिए पद पर नहीं बने रह सकता है।
सही उत्तर कूट का चयन कीजिए:
Correct
उत्तर: d)
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 156 के अनुसार: राज्यपाल की पदावधि
(1) राज्यपाल, राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करेगा।
(2) राज्यपाल, राष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकेगा।
(3) इस अनुच्छेद के पूर्वगामी उपबंधों के अधीन रहते हुए, राज्यपाल अपने पदग्रहण की तारीख से पाँच वर्ष की अवधि तक पद धारण करेगा:
परन्तु राज्यपाल, अपने पद की अवधि समाप्त हो जाने पर भी, तब तक पद धारण करता रहेगा जब तक उसका उत्तराधिकारी अपना पद ग्रहण नहीं कर लेता है।
Incorrect
उत्तर: d)
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 156 के अनुसार: राज्यपाल की पदावधि
(1) राज्यपाल, राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करेगा।
(2) राज्यपाल, राष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकेगा।
(3) इस अनुच्छेद के पूर्वगामी उपबंधों के अधीन रहते हुए, राज्यपाल अपने पदग्रहण की तारीख से पाँच वर्ष की अवधि तक पद धारण करेगा:
परन्तु राज्यपाल, अपने पद की अवधि समाप्त हो जाने पर भी, तब तक पद धारण करता रहेगा जब तक उसका उत्तराधिकारी अपना पद ग्रहण नहीं कर लेता है।
-
Question 5 of 5
5. Question
यदि किसी राज्य विधानसभा के चुनाव में निर्वाचित घोषित उम्मीदवार अपनी जमा राशि खो देता है, तो इसका अर्थ क्या है
Correct
समाधान: d)
कोई भी उम्मीदवार, जो कुल वैध मतों का छठवें (16.5%) से अधिक प्राप्त करने में विफल रहता है, तो उसकी जमा राशि को जब्त कर लिया जाता है। जब बड़ी संख्या में उम्मीदवार चुनाव लड़ते हैं, तो वोटों के वितरण के कारण, विजयी उम्मीदवार को छठवें भाग से भी कम वैध वोट मिल सकते हैं।
Incorrect
समाधान: d)
कोई भी उम्मीदवार, जो कुल वैध मतों का छठवें (16.5%) से अधिक प्राप्त करने में विफल रहता है, तो उसकी जमा राशि को जब्त कर लिया जाता है। जब बड़ी संख्या में उम्मीदवार चुनाव लड़ते हैं, तो वोटों के वितरण के कारण, विजयी उम्मीदवार को छठवें भाग से भी कम वैध वोट मिल सकते हैं।
Join our Official Telegram Channel HERE for Motivation and Fast Updates
Subscribe to our YouTube Channel HERE to watch Motivational and New analysis videos








