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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 08 May 2021

 

विषयसूची 

सामान्य अध्ययन-II

1. सोशल स्टॉक एक्सचेंज (SSE)

 

सामान्य अध्ययन-III

1. गाँठदार त्वचा रोग (LSD)

2. स्पेसएक्स के अंतरिक्षयान स्टारशिप की लैंडिंग

3. यूरेनियम और इसके उपयोग

4. मानव जनित मीथेन उत्सर्जन पर संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. काबासुरा कुडिनीर

2. ई-संजीवनी ओपीडी

3. पुलयार समुदाय

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

सोशल स्टॉक एक्सचेंज (SSE)


संदर्भ:

हाल ही में, सेबी के तकनीकी समूह (Technical Group- TG) द्वारा ‘सोशल स्टॉक एक्सचेंजों’ (Social stock exchanges- SSE) पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है।

इस विशेषज्ञ समिति की अध्यक्षता नाबार्ड के पूर्व अध्यक्ष हर्ष भानवाला द्वारा की गई थी।

समिति की प्रमुख सिफारिशें:

  1. पात्रता: लाभकारी (for-profit: FP) तथा गैर-लाभकारी संगठनों (not-for-profit organisations- NPO), दोनों के लिए ‘सोशल स्टॉक एक्सचेंजों’ (Social stock exchanges- SSE) में संभावनाओं की तलाश करने की अनुमति दी जानी चाहिए, बशर्ते वे यह साबित करें कि सामाजिक उद्देश्य और सामाजिक प्रभाव उनका प्रमुख लक्ष्य है।

कॉर्पोरेट फाउंडेशन, राजनीतिक और धार्मिक संगठनों के लिए ‘सोशल स्टॉक एक्सचेंज’ (SSE) तंत्र का उपयोग करके धन जुटाने के लिए अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए।

  1. अनुदान संचयन हेतु उपलब्ध प्रणालियाँ:

गैर-लाभकारी संगठनों (NPO) के लिए, इक्विटी, जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल बांड (ZCZP), विकास प्रभाव  इम्पैक्ट बांड, वर्तमान में 100 प्रतिशत अनुदान सहित साथ सोशल वेंचर फ़ंड (SVP) के रूप में प्रचलित सामाजिक प्रभाव बांड (Social Impact Bond), तथा म्यूचुअल फंड्स के माध्यम से निवेशकों द्वारा दान के माध्यम से अनुदान संचयन (Fundraising) की अनुमति है।

लाभकारी (for-profit: FP) उद्यम, इक्विटी, ऋण, विकास प्रभाव बांड और सामाजिक उद्यम निधि के माध्यम से अनुदान संचयन (Fundraising) कर सकते है।

  1. फंड का आकार: इस प्रकार के फंडों के लिए न्यूनतम राशि को 20 करोड़ से घटाकर 5 करोड़ रुपये और इनकी न्यूनतम सदस्यता राशि को 1 करोड़ रुपये से घटाकर 2 लाख रु की जानी चाहिए।
  2. ‘सोशल स्टॉक एक्सचेंज’ के लिए क्षमता निर्माण निधि:

इसमें 100 करोड़ रुपये की राशि होनी चाहिए। इस फंड को नाबार्ड के अधीन रखा जाना चाहिए। एक्सचेंजों और सिडबी जैसी अन्य विकास एजेंसियों को इस फंड में योगदान करने के लिए कहा जाना चाहिए।

  1. सतत विकास लक्ष्यों के तहत नीति आयोग द्वारा चिह्नित की गई व्यापक गतिविधियों की सूची, जिनमे ‘सोशल स्टॉक एक्सचेंज’ भाग ले सकते है:

इन गतिविधियों में,  भुखमरी-उन्मूलन (Eradicating Hunger); गरीबी, कुपोषण और असमानता; LGBTQIA+ समुदायों और महिला सशक्तिकरण के माध्यम से लैंगिक समानता को बढ़ावा देना; ग्रामीण खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण; और स्लम एरिया डेवलपमेंट, किफायती आवास शामिल हैं।

‘सोशल स्टॉक एक्सचेंज’ (SSE) क्या है?

  • भारत में सोशल स्टॉक एक्सचेंज एक नवीन अवधारणा है। इस स्टॉक एक्सचेंज पर सामाजिक उद्यमों और स्वैच्छिक संगठनों को सूचीबद्ध कराया जाएगा। इसके तहत सामाजिक संगठन इक्विटी और बांड और म्यूचुअल फंड की तरह यूनिट जारी कर कोष जुटा सकेंगे।
  • प्रस्ताव के अनुसार, ‘सोशल स्टॉक एक्सचेंज’ मौजूदा स्टॉक एक्सचेंज जैसे BSE और / या नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में रखा जा सकते है।

महत्व:

  • इसके साथ, सामाजिक कल्याण उद्यमों और गैर-लाभकारी संस्थाओं के लिए एक पारदर्शी इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म पर तथाकथित सामाजिक पूंजी जुटाने में सक्षम हो सकेंगी, जिससे वे कोरोनोवायरस महामारी के कारण तबाह हुए रोजगार के साधनों का पुनर्निर्माण करने में सहयोग कर सकते हैं।
  • समिति की इन सिफारिशों को यदि एक पैकेज के रूप में लागू किया जाता हैं, तो एक जीवंत और सहायक पारिस्थितिकी तंत्र हो सकता है, जिससे गैर-लाभकारी क्षेत्र द्वारा सामाजिक प्रभाव का निर्माण करने के लिए अपनी पूरी क्षमता का उपयोग किया जा सकेगा।

सामाजिक पूंजी की आवश्यकता:

  • भारत के लिए उन रोजगार के साधनों, जो उसकी अर्थव्यवस्था के आधार हैं, को दुरस्त करने और उनके पुनर्निर्माण के लिए सहनशील पूंजी (Patient Capital) की एक महत्वपूर्ण राशि की आवश्यकता होगी। वित्तीय लाभ को प्राथमिकता देने वाली ‘परम्परागत पूंजी’ (Conventional capital) इस तरह का बोझ उठाने में पूरी तरह से सक्षम नहीं हो पाएगी।
  • दूसरी ओर, इस भूमिका के लिए सामाजिक पूंजी (Social capital) अधिक अनुकूल है। यह न केवल सहनशील है, बल्कि इसका लक्ष्य, कोविड-19 की वजह से ढहने के कगार पर पहुँच चुकी सामाजिक संरचनाओं के लिए सहायता देना और इनका सुदृढ़ीकरण करना है।

‘सामाजिक उद्यम’ क्या है?

  • ‘सामाजिक उद्यम’ (social enterprise) राजस्व निर्माण करने वाले व्यवसाय होते है। इसका मुख्य लक्ष्य एक सामाजिक उद्देश्य, जैसे स्वास्थ्य सेवा या स्वच्छ ऊर्जा की प्राप्ति करना है।
  • इसका कोई अर्थ नहीं है कि एक सामाजिक उद्यम, अत्यधिक लाभदायक नहीं हो सकता है। वास्तव में, अधिकांश सामाजिक उद्यम पारंपरिक व्यवसायों की तरह दिखते और संचालित होते हैं। इनमे एकमात्र अंतर यह होता है कि इन संस्थाओं द्वारा उत्पन्न लाभ का उपयोग आवश्यक रूप से हितधारकों के भुगतान के लिए नहीं किया जाता है, इसके स्थान पर उनके सामाजिक कार्यक्रमों में पुनर्निवेश किया जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. सामाजिक उद्यम क्या है?
  2. SSE क्या है?
  3. सामाजिक पूंजी क्या है?
  4. सेबी- प्रमुख कार्य।

मेंस लिंक:

भारत को अपनी अर्थव्यवस्था के आधारभूत कार्मिकों की आजीविका को सुधारने तथा पुनर्निर्माण करने हेतु काफी सामाजिक पूंजी की आवश्यकता होगी। चर्चा कीजिए।

स्रोत: इकोनॉमिक टाइम्स

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय:  प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्य, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशु पालन संबंधी अर्थशास्त्र।

गाँठदार त्वचा रोग (LSD)


(Lumpy Skin Disease)

यह क्या है?

  • गाँठदार त्वचा रोग या ‘लंपी स्किन डिजीज़’ (Lumpy Skin Disease- LSD) एक वायरल बीमारी है, जिससे गोवंशीय पशु और भैंस दीर्घकालिक रुग्णता का शिकार हो जाते है।
  • यह रोग ‘गाँठदार त्वचा रोग वायरस’ (Lumpy skin disease virus- LSDV) के संक्रमण के कारण फैलता है।

लक्षण:

यह पशुओं के पूरे शरीर में विशेष रूप से सिर, गर्दन, अंगों, थन (मादा मवेशी की स्तन ग्रंथि) और जननांगों के आसपास दो से पाँच सेंटीमीटर व्यास की गाँठ के रूप में दिखाई देता है। यह गाँठ बाद में धीरे-धीरे एक बड़े और गहरे घाव का रूप ले लेती है।

प्रसरण:

यह बीमारी मच्छरों, मक्खियों और जूँओं के साथ-साथ पशुओं की लार तथा दूषित जल एवं भोजन के माध्यम से फैलता है।

प्रभावित देश:

  • गाँठदार त्वचा रोग (LSD), अफ्रीका और पश्चिम एशिया के कुछ हिस्सों में फैलने वाला स्थानीय रोग है। इन जगहों पर, वर्ष 1929 में पहली बार इस रोग के लक्षण को देखे गए थे।
  • दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र में, इस रोग का पहला मामला जुलाई 2019 में बांग्लादेश में देखा गया था।
  • भारत में, इस बीमारी का पहला मामला मई 2019 में ओडिशा के मयूरभंज में दर्ज किया गया था।

उपचार:

अभी इस वायरस का कोई इलाज नहीं खोजा गया है, अतः इसके रोकथाम व नियंत्रण के लिए टीकाकरण ही सबसे प्रभावी साधन है।

संदर्भ:

बिहार सरकार इस बीमारी की आहट से सतर्क हो गई है, और सरकार ने इसके संभावित प्रसार के बारे में एक एडवाइजरी जारी की है।

संबंधित चिंताएं:

  • भारत में मवेशियों की संख्या 303 मिलियन है, जोकि विश्व में सर्वाधिक हैं। मात्र 16 महीनों के भीतर, यह बीमारी देश के 15 राज्यों में फैल चुकी है।
  • इससे देश पर विनाशकारी प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि यहाँ के अधिकांश डेयरी किसान या तो भूमिहीन हैं या सीमांत भूमिधारक हैं तथा उनके लिये दूध सबसे सस्ते प्रोटीन स्रोतों में से एक है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘गाँठदार त्वचा रोग’ के बारे में
  2. लक्षण
  3. उपचार

मेंस लिंक:

भारत के लिए ‘गाँठदार त्वचा रोग’ के प्रसार से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: डाउन टू अर्थ

 

विषय:  सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

स्पेसएक्स के अंतरिक्षयान स्टारशिप की लैंडिंग


संदर्भ:

हाल ही में, एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स द्वारा विकसित सीरियल नंबर 15 (SN15) नामक एक अत्याधुनिक स्टारशिप रॉकेट के प्रारूप (प्रोटोटाइप) ने प्रक्षेपण करने तथा वापस लैंडिंग करने में सफलता हासिल की है, इससे नासा के लिए, अंतरिक्ष अन्वेषण की दिशा में एक नए युग की शुरुआत होगी।

पृष्ठभूमि:

इस सफलतापूर्वक लैंडिग से नासा और स्पेसएक्स के लिए राहत मिली है, क्योंकि इससे पहले स्टारशिप के चार प्रोटोटाइप लैंडिग करने में विफल रहे थे। ये चारो प्रोटोटाइप, टेक्सास के दक्षिणपूर्वी किनारे पर स्थित ब्राउनसनविले के नजदीक सतह पर उतरने के दौरान या तत्काल बाद में नष्ट हो गए थे।

‘स्टारशिप’ के बारे में:

  • ‘स्टारशिप’ (Starship), स्पेसएक्स द्वारा निर्मित पूर्ण आकार का, बंदूक की गोली-नुमा, स्टेनलेस स्टील से बना रॉकेट है।
  • इस अंतरिक्ष यान को अंतरिक्ष यात्रा के लिए एक क्रांतिकारी / गेम- चेंजर (game-changer) बताया जाता है। यह पृथ्वी की कक्षा, चंद्रमा और मंगल ग्रह पर चालक दलों और कार्गो को भेजने और वापस लाने में सक्षम पूर्णतयः पुन: प्रयोज्य (Reusable) परिवहन प्रणाली है।
  • स्पेसएक्स द्वारा स्टारशिप को “विश्व का सबसे शक्तिशाली प्रक्षेपण वाहन” बताया जाता है, और यह पृथ्वी की कक्षा तक 100 मीट्रिक टन से अधिक भार ले जाने में सक्षम है।

नवीनतम उपलब्धि का महत्व:

स्पेसएक्स का मानना ​​है, कि पुन: प्रयोज्यता अंतरग्रहीय यात्रा (Interplanetary Travel) को सुलभ बनाने के के लिए अति महत्वपूर्ण होती है। चूंकि प्रक्षेपण की अधिकाँश लागत, इसके लिए रॉकेट का निर्माण करने में प्रयुक्त होती है, जोकि, पृथ्वी के वायुमंडल में वापस प्रवेश के दौरान अंततः जल जाने के लिए डिज़ाइन किया जाता है।

संभावित अनुप्रयोग:

  • स्टारशिप, फाल्कन प्रक्षेपण वाहनों की तुलना में कम लागत पर और अधिक दूरी तक उपग्रहों (Satellites) को पंहुचा सकता है, तथा यह कार्गो और चालक दल, दोनों को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) तक पहुँचाने और वापस लाने में सक्षम है।
  • एक बार विकसित होने के बाद, स्टारशिप मानव-सहित अंतरिक्ष उड़ानों के विकास एवं अनुसंधान के लिए चंद्रमा तक बड़ी मात्रा में कार्गो ले जाने में सहायक होगा।
  • यह अंतरिक्ष यान, चंद्रमा से आगे, अन्य अंतरग्रहीय अभियानों लिए चालक दल और कार्गो को ले जाने के लिए डिज़ाइन किया जा रहा है।

नासा का आर्टेमिस मिशन:

  • पिछले महीने, नासा द्वारा अपने आर्टेमिस कार्यक्रम के लिए, एक लैंडर का निर्माण करने हेतु ‘स्पेसएक्स’ को चुना गया है। इस मिशन के अंतर्गत, इस दशक में चंद्रमा पर मानव भेजने की योजना बनाई जा रही है।
  • स्टारशिप पर लगे वाहन से, अगले पुरुष तथा पहली महिला को चंद्रमा पर भेजा जाएगा।
  • ‘आर्टेमिस कार्यक्रम’ (Artemis programme) के साथ नासा का लक्ष्य, भविष्य में मंगल ग्रह का अन्वेषण करने हेतु आवश्यक, नई प्रौद्योगिकियों, क्षमताओं और व्यावसायिक दृष्टिकोणों को प्रदर्शित करना है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. आर्टेमिस स्पेस मिशन के बारे में
  2. उद्देश्य
  3. स्टारशिप के बारे में
  4. महत्वपूर्ण इंटरप्लेनेटरी स्पेस मिशन

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय:  आपदा और आपदा प्रबंधन।

यूरेनियम और इसके उपयोग


संदर्भ:

हाल ही में, महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (Anti-Terrorism Squad- ATS) ने लगभग 21 करोड़ रुपये कीमत के 7 किलोग्राम प्राकृतिक यूरेनियम के साथ दो लोगों को गिरफ्तार किया है।

इन दोनों व्यक्तियों को बिना लाइसेंस के यूरेनियम रखने के आरोप में, परमाणु ऊर्जा अधिनियम 1962 के तहत गिरफ्तारी कर लिया गया है।

वास्तव में यूरेनियम क्या है और इसके उपयोग क्या हैं?

यूरेनियम की उपस्थिति: यह प्राकृतिक रूप से, निम्न मात्रा में मृदा, चट्टानों तथा जल में पाया जाता है, तथा व्यवसायिक रूप से, यूरेनियम के अंश वाले खनिजों से इसका निष्कर्षण किया जाता है

अनुप्रयोग:

  1. चांदी के सदृश धूसर धातु के समान दिखने वाला यूरेनियम, अपनी अद्वितीय परमाण्विक विशेषताओं के कारण मुख्यतः परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में उपयोग किया जाता है।
  2. रेडियोधर्मी पदार्थो के परिवहन के दौरान तथा ‘विकिरण चिकित्सा’ (Radiation Therapy) का उपयोग करने वाली चिकित्सा प्रक्रियाओं के दौरान विकरण से बचने के लिए ‘अवक्षयित यूरेनियम’ (Depleted uranium) का उपयोग किया जाता है।
  3. यद्यपि यह खुद एक रेडियोधर्मी तत्व होता है, परंतु यूरेनियम का उच्च घनत्व, विकिरण को अवरुद्ध करने में इसे प्रभावी बनाता है।
  4. इसका उच्च घनत्व, विमानों और औद्योगिक मशीनरी में प्रतिसंतुलन (Counterweights) के रूप में भी इसे उपयोगी बनाता है।

भारत में यूरेनियम खनन:

  • भारत में, यूरेनियम के निक्षेप धारवाड़ की चट्टानों में पाए जाते है।
  • यूरेनियम, झारखंड की सिंहभूमि तांबा पट्टी (Singbhum Copper belt), राजस्थान के उदयपुर, अलवर और झुंझुनू जिले, छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले, महाराष्ट्र के भंडारा और हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में पाया जाता है।
  • हाल ही में, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में शेषाचलम वनों और श्रीशैलम के मध्य (आंध्र प्रदेश के दक्षिणी छोर से तेलंगाना के दक्षिणी किनारे तक), पर्याप्त मात्रा में यूरेनियम के भंडारों की खोज हुई है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. रेडियोधर्मी तत्व बनाम गैर-रेडियोधर्मी तत्व।
  2. तत्व का अर्ध-जीवनकाल क्या होता है? इसे किस प्रकार मापा जाता है?
  3. भू-पर्पटी में पाए जाने वाले प्रचुर तत्व
  4. यूरेनियम, भूजल को किस प्रकार दूषित करता है?
  5. BIS तथा WHO द्वारा निर्धारित यूरेनियम सीमा।

मेंस लिंक:

हाल की एक रिपोर्ट में भारत के भूजल में यूरेनियम संदूषण को उजागर किया गया था। इस मुद्दे को हल करने के तरीकों, इसके कारणों और प्रभावों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

मानव जनित मीथेन उत्सर्जन पर संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट


संदर्भ:

हाल ही में, ‘जलवायु एवं स्वच्छ वायु गठबंधन’ (Climate and Clean Air Coalition) तथा संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) द्वारा ‘वैश्विक मीथेन आकलन: मीथेन उत्सर्जन में कटौती की कीमत और लाभ’ (Global Methane Assessment: Benefits and Costs of Mitigating Methane Emission) शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की गई है।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष:

मुख्य चिंताएँ:

  • 1980 के दशक में रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया परंपरा शुरू होंने के बाद से, वर्तमान में मानव-जनित मीथेन उत्सर्जन, किसी अन्य समय-काल की तुलना में काफी तेजी से बढ़ रहा है।
  • हालांकि, नॉवेल कोरोनवायरस वायरस (COVID-19) महामारी के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर गिरा है। फिर भी, पिछले साल वातावरण में मीथेन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।
  • मीथेन के एक अत्यंत शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस होने की वजह से यह चिंता का विषय है। मीथेन, पूर्व-औद्योगिक काल से वातावरण में लगभग 30 प्रतिशत उष्मन के लिए जिम्मेदार है।

मानव जनित मीथेन उत्सर्जन के स्रोत:

मानव-निर्मित मीथेन का अधिकांश उत्सर्जन तीन क्षेत्रों से होता है: जीवाश्म ईंधन, अपशिष्ट और कृषि।

  1. जीवाश्म ईंधन क्षेत्र में, तेल और गैस निष्कर्षण, प्रसंस्करण और वितरण, 23 प्रतिशत मीथेन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार है। कोयला खनन में 12 प्रतिशत मीथेन उत्सर्जन होता है।
  2. अपशिष्ट क्षेत्र में, अपशिष्ट भरावक्षेत्र और अपशिष्ट जल से लगभग 20 प्रतिशत मीथेन उत्सर्जन होता है।
  3. कृषि क्षेत्र में, मवेशियों के गोबर और आंत्रिक किण्वन से लगभग 32 प्रतिशत तथा धान की खेती से 8 प्रतिशत मीथेन उत्सर्जन होता है।

विभिन्न देशों की उत्सर्जन कटौती क्षमता में अंतर:

  • यूरोप में खेती, जीवाश्म ईंधन परिचालन और अपशिष्ट प्रबंधन से होने वाले मीथेन उत्सर्जन को कम करने की सर्वाधिक क्षमता है।
  • भारत के पास, अपशिष्ट क्षेत्र से होने वाले मीथेन उत्सर्जन को कम करने की सर्वाधिक क्षमता है।
  • कोयला उत्पादन और पशुधन से होने वाले मीथेन उत्सर्जन का शमन करने में चीन, पशुधन और तेल एवं गैस से होने वाले मीथेन उत्सर्जन का शमन करने में अफ्रीका की क्षमता सर्वाधिक है।
  • जीवाश्म ईंधन उद्योग में कम लागत वाली मीथेन कटौती करने की सर्वाधिक क्षमता है।

सुझाव:

  1. जलवायु परिवर्तन के बुरे प्रभावों से बचने के लिए मानव जनित मीथेन उत्सर्जन में 45 प्रतिशत की कटौती की जानी चाहिए।
  2. इस तरह की कटौती से वर्ष 2045 तक ग्लोबल वार्मिंग में 3 डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि रोकी जा सकती है।
  3. इससे वार्षिक रूप से होने वाली 260,000 असामयिक मौतों, 775,000 अस्थमा से संबंधित अस्पताल के दौरों तथा 25 मिलियन टन फसल-हानि को भी रोका जा सकता है।

तीन व्यवहार परिवर्तन – खाद्य अपशिष्ट और भोजन-सामग्री के नुकसान को कम करना, पशुधन प्रबंधन में सुधार और स्वस्थ आहार (शाकाहारी या कम मांस और डेयरी उत्पाद) को अपनाना – अगले कुछ दशकों में प्रति वर्ष 65-80 मिलियन टन मीथेन उत्सर्जन को कम कर सकते है।

स्रोत: डाउन टू अर्थ

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


काबासुरा कुडिनीर

(Kabasura Kudineer)

  • काबासुरा कुडिनीर, सिद्ध पद्धति चिकित्सकों के द्वारा सामान्य श्वसन प्रक्रीया को स्वस्थ रखने के लिए उपयोग किया जाने वाला एक पारंपरिक सूत्रण है।
  • यह एक हर्बल मिश्रण होता है, जिसमें अदरक, पिप्पली, लौंग, सिरुकनोरी की जड़, मूली की जड़, कडुक्कई, अजवाईन और कई अन्य जड़ी बूटियों की सूखी सामग्री शामिल होती है।
  • इस सारी सामग्री को पाउडर की भांति पीसकर पानी के साथ मिलाया जाता है, फिर इसका काढ़ा बनाने के लिए शुरुआती मात्रा के एक-चौथाई रह जाने तक इसे उबाला जाता है।

संदर्भ:

देश में कोविड संक्रमण की दूसरी लहर का मजबूती से मुकाबला करने के लिए आयुष मंत्रालय आज से अपनी पॉली हर्बल औषधि आयुष-64 और काबासूरा कुडिनीर को कोविड संक्रमित रोगियों को वितरित करने के लिए एक देशव्यापी अभियान शुरू कर रहा है।

ई-संजीवनी ओपीडी

  • ई-संजीवनी ओपीडी (e-Sanjeevani OPD) भारत सरकार का प्रमुख टेलीमेडिसिन प्लेटफ़ॉर्म है जिसे सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ़ एडवांस कंप्यूटिंग (C-DAC), मोहाली, भारत सरकार के तत्वावधान में विकसित किया गया है।
  • यह भारतीय नागरिकों को मुफ्त परामर्श प्रदान करता है।

पुलयार समुदाय

(Pulayar Community)

  • पुलयार, पुलाया, या होल्या या चेरामार, केरल, कर्नाटक और ऐतिहासिक तमिलनाडु या तमिलकम में पाए जाने वाले प्रमुख सामाजिक समूहों में से एक हैं।
  • पुलाया समुदाय, अपने संगीत, शिल्प कौशल और कुछ नृत्यों के लिए प्रसिद्ध हैं जिनमें कोलम-थुल्लाल (एक मुखौटा नृत्य जो उनके झाड़-फूँक अनुष्ठानों का हिस्सा होता है) और मुडी-अट्टम या हेयर-डांस शामिल हैं।
  • महात्मा अय्यंकाली (1863- 1941) को पुलया राजा कहा जाता है।

संदर्भ:

तमिलनाडु में अन्नामलाई टाइगर रिज़र्व की सीमा के भीतर पुलायार समुदाय की दो जनजातीय बस्तियों (कट्टपट्टी और कुज़ीपट्टी) द्वारा स्थानीय देवता वीरपत्तन का वार्षिक उत्सव मनाने के लिए तैयारियां की जा रही हैं।


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