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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 07 May 2021

 

विषयसूची

 सामान्य अध्ययन-I

1. शुक्र ग्रह के बारे में नवीनतम खोजें

 

सामान्य अध्ययन-II

1. मीडिया रिपोर्टों पर रोक लगाने संबंधी निर्वाचन आयोग की याचिका खारिज

 

सामान्य अध्ययन-III

1. NPCI द्वारा भारत में क्रिप्टोकरेंसी के व्यापार पर प्रतिबंध लगाने से इंकार

2. कोविड-19 वैक्सीन हेतु ‘बौद्धिक संपदा’ छूट

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. फेसबुक का निगरानी बोर्ड

2. दहला बांध

 


सामान्य अध्ययन-I


 

विषय: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, भौगोलिक विशेषताएँ और उनके स्थान।

शुक्र ग्रह के बारे में नवीनतम खोजें


संदर्भ:

हाल ही में, वैज्ञानिकों ने शुक्र (Venus) ग्रह से टकरा कर लौटने वाली रेडियो तरंगों के माध्यम से शुक्र ग्रह के बारे में नए आंकड़े प्राप्त किए हैं।

शोधकर्ताओं द्वारा कैलिफोर्निया के मोजावे मरुस्थल (Mojave Desert) में अवस्थित नासा के गोल्डस्टोन एंटीना (Goldstone Antenna) से वर्ष 2006 से 2020 के मध्य शुक्र ग्रह की ओर 21 बार रेडियो तरंगें प्रेषित की गईं तथा रेडियो अनुनाद (radio echo) का अध्ययन किया गया, जिससे कुछ ग्रहीय विशेषताओं के बारे में जानकारी प्राप्त हुई है।

नवीनतम निष्कर्ष:

  1. अध्ययन के दौरान शुक्र ग्रह के अक्षीय झुकाव तथा ग्रह की क्रोड़ (core) के आकार को मापा गया।
  2. शुक्र ग्रह का एक घूर्णन, पृथ्वी के 243.0226 दिनों में पूरा होता है। इसका मतलब है कि शुक्र ग्रह पर एक दिन, ग्रह के एक वर्ष से अधिक लंबा होता है। शुक्र ग्रह, सूर्य के चारों ओर पूरा चक्कर पृथ्वी के 225 दिनों में पूरा करता है।
  3. वीनस ग्रह की क्रोड़ (core) का व्यास, पृथ्वी के कोर की तुलना में, 4,360 मील (7,000 किमी) है।
  4. अध्ययन में की गई गणना के अनुसार, शुक्र ग्रह के अक्षीय झुकाव लगभग 2.64 डिग्री है। जबकि पृथ्वी का अक्षीय झुकाव लगभग 23.5 डिग्री है।

शुक्र ग्रह के बारे में:

  • शुक्र (Venus), सूर्य से दूसरा ग्रह है तथा संरचना में पृथ्वी के समान, किंतु आकार में पृथ्वी से थोड़ा छोटा है।
  • इसके पूर्वाभासी परिदृश्य के ऊपर एक स्थूल एवं विषाक्त वातावरण की परत है, जो मुख्यतः कार्बन डाइऑक्साइड और सल्फ्यूरिक एसिड की बूंदों के समूह से बना है।
  • अनियंत्रित ग्रीनहाउस प्रभाव सहित, इसकी सतह का तापमान 880 डिग्री फ़ारेनहाइट (471 डिग्री सेल्सियस) तक पहुंच जाता है, जोकि सीसा (lead) को पिघलाने के लिए पर्याप्त होता है।
  • शुक्र ग्रह, हमारे सौर मंडल के अन्य सभी ग्रहों, यूरेनस को छोड़कर, के विपरीत दिशा में, पूर्व से पश्चिम की ओर अर्थात दक्षिणावर्त घूर्णन करता है।
  • इस ग्रह की एक और विचित्रता इसके दिन-रात का चक्र अर्थात ‘एक परिक्रमण में लगे समय के विपरीत दो क्रमिक सूर्योदयों के मध्य समय’ है। शुक्र पर दिन-रात का एक चक्र पूरा होने में पृथ्वी के 117 दिन का समय लगता है, क्योंकि यह सूर्य के चारों ओर अपने कक्षीय पथ के विपरीत दिशा में घूर्णन करता है।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थान।

 मीडिया रिपोर्टों पर रोक लगाने संबंधी निर्वाचन आयोग की याचिका खारिज


संदर्भ:

हाल ही में, उच्चतम न्यायालय ने, मद्रास उच्च न्यायालय की खंडपीठ द्वारा की गई मौखिक टिप्पणी पर रिपोर्टिंग करने से मीडिया को प्रतिबंधित करने हेतु भारत के निर्वाचन आयोग द्वारा दायर की गई याचिका को खारिज कर दिया है।

संबंधित प्रकरण:

उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों ने कहा था, कि तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के दौरान रैलियों और सामूहिक समारोहों की अनुमति देने के लिए मतदान अधिकारियों पर “हत्या” का आरोप लगाया जाना चाहिए। न्यायाधीशों ने आलोचना करते हुए कहा, कि कोविड महामारी की तीव्रता के लिए केवल निर्वाचन आयोग जिम्मेदार है।

उच्चतम न्यायालय द्वारा की गई टिप्पणियाँ:

  • न्यायाधीशों और वकीलों के बीच अदालतों में मौखिक आदान-प्रदान सहित अदालती कार्यवाही की यथासमय रिपोर्ट करना, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का हिस्सा है।
  • प्रौद्योगिकी के आगमन से, सोशल मीडिया मंचों के माध्यम से रिपोर्टिंग का प्रसार हो रहा है, और इन मंचो से बड़े स्तर पर लोगों को रियल-टाइम अपडेट मिल रहे हैं। यह वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का एक विस्तार है जो मीडिया के लिए उपलब्ध है। यह ओपन कोर्ट का एक आभासी विस्तार भी है।
  • अदालती कार्यवाही की ऐसी लाइव रिपोर्टिंग, किसी प्रकार की शंका के बजाय उत्सव का कारण है।
  • बाल यौन शोषण और वैवाहिक मुद्दों संबंधी मामलों को छोड़कर, मुक्त प्रेस के लिए अदालत की कार्यवाही तक विस्तारित किया जाना चाहिए।
  • अदालत ने कहा, कि सुनवाई के दौरान की गई मौखिक टिप्पणियां पक्षकारों पर बाध्य नहीं होती हैं और फैसले का हिस्सा नहीं बनती हैं। विचारों का आदान-प्रदान, दिमाग की प्रयोज्यता और न्याय की प्रक्रिया के लिए अंतर्भूत तत्व होता है।
  • मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा की गई टिप्पणी की प्रकृति पर, शीर्ष अदालत ने कहा कि “कुछ सर्तकता और सावधानी से वर्तमान मामले में समस्याओं को दूर किया जा सकता था।

समय की मांग:

न्यायाधीशों के लिए खुली अदालत में बिना सोचे-समझे टिप्पणी करने में सावधानी बरतने की आवश्यकता पर हमें जोर देना चाहिए, क्योंकि इनकी गलत व्याख्या की जा सकती है।

खंडपीठ द्वारा प्रयुक्त भाषा और निर्णयों की भाषा, न्यायिक शिष्टाचार के अनुकूल होनी चाहिए। भाषा, न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण उपकरण है, जोकि संवैधानिक मूल्यों के प्रति संवेदनशील भी होती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के बीच शक्तियों का विभाजन।
  2. रिट याचिकाएँ
  3. उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ अपील

मेंस लिंक:

मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा था कि तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के दौरान रैलियों और सामूहिक समारोहों की अनुमति देने के लिए मतदान अधिकारियों पर “हत्या” का आरोप लगाया जाना चाहिए। टिप्पणी कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

NPCI द्वारा भारत में क्रिप्टोकरेंसी के व्यापार पर प्रतिबंध लगाने से इंकार

संदर्भ:

हाल ही में, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (National Payments Corporation of IndiaNPCI) ने क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन पर प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया है।

इसके अलावा, NPCI ने  क्रिप्टोकरेंसी ट्रेड के विनिमय पर प्रतिबंध लगाने अथवा नहीं लगाने के संबंध में निर्णय लेने का दायित्व बैंकों पर छोड़ दिया है, और बैंकों से अपने कानूनी और अनुपालन विभागों की सलाह के आधार पर फैसला लेने के लिए कहा है।

‘भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम’ क्या है?

‘भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम’ (National Payments Corporation of India- NPCI), देश में खुदरा भुगतान और निपटान प्रणाली के परिचालन हेतु एक अम्ब्रेला संगठन है।

  • इसे भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा भारतीय बैंक संघ (IBA) के साथ मिलकर ‘भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम’, 2007 (The Payment and Settlement Systems Act, 2007) के प्रावधानों के तहत स्थापित किया गया था।
  • वर्तमान में, ‘भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम’ (NPCI), को दस प्रमुख प्रवर्तक बैंकों द्वारा प्रोन्नत किया जाता है।

NPCI को निम्नलिखित भुगतान प्रणालियों के परिचालन की शक्ति प्राप्त है:

  1. नेशनल फाइनेंशियल स्विच (National Financial Switch-NFS)
  2. तत्काल भुगतान सेवा (Immediate Payment Service-IMPS)
  3. बैंकों द्वारा जारी RuPay कार्ड (डेबिट कार्ड / प्रीपेड कार्ड) और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) या रिज़र्व बैंक द्वारा अनुमोदित किसी अन्य इकाई द्वारा जारी किए गए को-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड्स का संबद्धीकरण।
  4. नेशनल ऑटोमेटेड क्लियरिंग हाउस (NACH)
  5. आधार समर्थकृत भुगतान प्रणाली (Aadhaar Enabled Payments System- AEPS)
  6. चेक ट्रंकेशन सिस्टम परिचालन (Operation of Cheque Truncation System)

‘भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम’ (NPCI) के उत्पाद:

  1. RuPay
  2. नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (National Common Mobility Card- NCMC)
  3. भीम एप (Bharat Interface for Money-BHIM)
  4. एकीकृत भुगतान प्रणाली (United Payments Interface-UPI)
  5. भारत बिल भुगतान प्रणाली (Bharat Bill Payment System-BBPS)

क्रिप्टोकरेंसी के व्यापार पर प्रतिबंध लगाने से इंकार का कारण:

‘भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम’ का यह फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा मार्च 2020 में दिए गए निर्णय के अनुरूप है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने अपने उस फैसले में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा अप्रैल 2018 में जारी उस निर्देश को रद्द कर दिया था, जिसमें बैंकों और फाइनेंस कंपनियों को वर्चुअल करेंसी में डील करने से या किसी को ऐसी डिजिटल करेंसी में डील करने के लिए सर्विस मुहैया कराने से प्रतिबंधित किया गया गया था।
  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, आरबीआई की ओर से कोई नया निर्देश जारी नहीं हुआ है। इसलिए NPCI ने अभी तक क्रिप्टोकरेंसी के व्यापार को प्रतिबंधित नहीं किया है।

‘क्रिप्टोकरेंसी’ क्या होती हैं?

क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrencies) एक प्रक्रार की डिजिटल करेंसी होती है, जिसमे मुद्रा इकाइयों के उत्पादन को विनियमित करने तथा निधियों के अंतरण को सत्यापित करने के लिए कूटलेखन (Encryption) तकनीकों का उपयोग किया जाता है, और यह बगैर किसी केंद्रीय बैंक के अधीन, स्वतन्त्र रूप से संचालित होती हैं।

यह ब्लॉकचेन तकनीक पर कार्य करती हैं। उदाहरण: बिटकॉइन, एथेरियम आदि।

क्रिप्टोकरेंसी की मांग के कारण:

  1. बिना किसी थर्ड पार्टी जैसेकि क्रेडिट / डेबिट कार्ड या बैंकों की जरूरत के, दो पार्टियों के मध्य निधि-अंतरण में आसानी।
  2. अन्य ऑनलाइन लेनदेन की तुलना में एक सस्ता विकल्प।
  3. भुगतान सुरक्षित और प्रत्याभूत होते हैं और पहचान जाहिर नहीं करने की बेमिसाल सुविधा उपलब्ध होती है।
  4. आधुनिक क्रिप्टोकरेंसी सिस्टम में उपयोगकर्ता “वॉलेट” या अकाउंट एड्रेस का विकल्प होता है, जिसे केवल एक सार्वजनिक कुंजी और निजी कुंजी (private key) द्वारा खोला जा सकता है।
  5. निजी कुंजी की जानकारी केवल ‘वॉलेट’ के मालिक को होती है।
  6. निधि-अंतरण, करने के लिए प्रोसेसिंग फीस न्यूनतम होती है।

क्रिप्टोकरेंसी के नुकसान:

  • क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन की लगभग गुप्त प्रकृति के कारण, यह अवैध गतिविधियों जैसे कि मनी-लांड्री, कर-चोरी और संभवतः आतंक-वित्तपोषण के लिए आसान बना सकती है।
  • इसके तहत किये गए भुगतान अपरिवर्तनीय नहीं होते हैं।
  • क्रिप्टोकरेंसी, हर जगह स्वीकार नहीं की जाती है और अन्य जगहों पर इसका मूल्य सीमित होता है।
  • यह चिंता व्यक्त की जाती है, कि बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी का आधार किसी भी भौतिक वस्तु से संबद्ध नहीं होता है। हालाँकि, कुछ शोधों से पता चला है, कि बिटकॉइन के उत्पादन की लागत, जिसके लिए बड़ी मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होती है, का सीधा संबंध इसके बाजार मूल्य से होता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. विभिन्न क्रिप्टोकरेंसी।
  2. विभिन्न देशों द्वारा शुरू की गई क्रिप्टोकरेंसी।
  3. ब्लॉकचेन तकनीक क्या है?

मेंस लिंक:

क्रिप्टोकरेंसी क्या हैं? इसके विनियमन की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

कोविड-19 वैक्सीन हेतु ‘बौद्धिक संपदा’ छूट


संदर्भ:

हाल ही में, संयुक्त राज्य अमेरिका ने, ‘असाधारण परिस्थितियों के लिए असाधारण उपायों’ की आवश्यकता बताते हुए कोविड-19 टीकों हेतु बौद्धिक संपदा संरक्षण में छूट देने के लिए अपना समर्थन देने की घोषणा की है।

अमेरिका, विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organization- WTO) में ‘पाठ्य-आधारित समझौते’ (text-based negotiations) का अनुसरण करेगा।

‘पाठ्य-आधारित समझौता’ क्या होता हैं?

‘पाठ्य-आधारित समझौते’ (text-based negotiations) के तहत वार्ताकार, अपने पसंदीदा शब्दों का प्रयोग करते करते हुए तैयार किये गए प्रस्ताव-लेखों का परस्पर आदान-प्रदान करते हैं तथा इसके बाद काफी लंबे समय से चले आ रहे विषय के समाधान पर एक आम सहमति बनाते हैं।

कोविड-19 वैक्सीन हेतु ‘बौद्धिक संपदा’ छूट का तात्पर्य:

‘बौद्धिक संपदा’ छूट (Intellectual Property Waiver- IP waiver), मध्य-आय वर्ग के देशों में बड़े स्तर पर, फाइजर, मॉडर्ना, एस्ट्राजेनेका, नोवावैक्स, जॉनसन एंड जॉनसन और भारत बायोटेक द्वारा विकसित किये गए कोविड टीकों, आपातकालीन उपयोग अधिकार (emergency use authorisations- EUA) सहित, के उत्पादन करने का अवसर मिल सकता है।

वर्तमान में, इन टीकों का उत्पादन अधिकांशतः उच्च आय वाले देशों में केंद्रित है; तथा मध्यम आय वाले देशों में लाइसेंसिंग या प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौतों के माध्यम से इन टीकों का उत्पादन किया जा रहा है।

भारत और दक्षिण अफ्रीका द्वारा पहले प्रस्तुत किया गया प्रस्ताव क्या था?

अक्टूबर 2020 में, भारत और दक्षिण अफ्रीका ने विश्व व्यापार संगठन से, कोविड -19 से निपटने हेतु सस्ते चिकित्सा उत्पादों तक समय पर पहुंच को बाधित करने वाले, ‘बौद्धिक संपदा अधिकारों के व्यापार संबंधी पहलुओं’ (Trade Related Aspects of Intellectual Property Rights-TRIPS) समझौते के कुछ प्रावधानों से छूट देने के लिए कहा था।

  • इन देशों ने TRIPS काउंसिल से, ‘शीघ्रातिशीघ्र’ इस समझौते के दूसरे भाग में चार अनुच्छेदों के कार्यान्वयन, उपयोग और प्रवर्तन से छूट देने की सिफारिश करने के लिए कहा था।
  • TRIPS समझौते के ये चार अनुच्छेद – 1, 4, 5, और 7 – कॉपीराइट और संबंधित अधिकारों, औद्योगिक डिजाइन, पेटेंट और अघोषित जानकारी के संरक्षण से संबंधित हैं।

पेटेंट और ‘बौद्धिक संपदा अधिकार’ क्या होते हैं?

पेटेंट (patent), एक सशक्त बौद्धिक संपदा अधिकार होता है, तथा किसी देश की सरकार द्वारा आविष्कारक के लिए एक निश्चित तथा पूर्व-निर्दिष्ट समय के लिए दिए जाने वाला विशिष्ट एकाधिकार होता है। यह, किसी दूसरे के द्वारा आविष्कार की नकल करने से रोकने के लिए एक प्रवर्तनीय कानूनी अधिकार प्रदान करता है।

पेटेंट के प्रकार:

पेटेंट, मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं: प्रक्रिया पेटेंट (Process Patents) अथवा उत्पाद पेटेंट (Product Patents)।

  1. उत्पाद पेटेंट (Product Patents), अंतिम उत्पाद के अधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित करता है, तथा इसके तहत, निर्दिष्ट अवधि के दौरान पेटेंट धारक के अलावा किसी अन्य के द्वारा ‘पेटेंट की गई वस्तु’ का उत्पादन करने पर रोक लगाई जा सकती है, भले ही दूसरे लोग किसी अलग प्रक्रिया का प्रयोग कर रहे हों।
  2. प्रक्रिया पेटेंट (Process Patents) के तहत, पेटेंट धारक के अलावा किसी भी व्यक्ति को, विनिर्माण प्रक्रिया में कुछ संशोधन करके पेटेंट उत्पाद का निर्माण करने की अनुमति होती है।

भारत में पेटेंट व्यवस्था:

भारत, 1970 के दशक से ‘उत्पाद पेटेंट’ के बजाय ‘प्रक्रिया पेटेंट’ प्रचलित है, जिसकी वजह से, भारत वैश्विक स्तर पर जेनेरिक दवाओं का एक महत्वपूर्ण उत्पादक बन गया, और 1990 के दशक में सिप्ला जैसी कंपनियों के लिए अफ्रीका को एचआईवी-विरोधी दवाएं प्रदान करने की अनुमति दी जा सकी थी।

  • लेकिन TRIPS समझौते के अंतर्गत निर्धारित दायित्वों के कारण, भारत को वर्ष 2005 में पेटेंट अधिनियम में संशोधन करना पड़ा, और फार्मा, रसायन, और बायोटेक क्षेत्रों में ‘उत्पाद पेटेंट’ व्यवस्था लागू करनी पड़ी।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. TRIPS क्या है?
  2. भारतीय पेटेंट अधिनियम, 2005
  3. भारत में पेटेंट व्यवस्था
  4. अनिवार्य लाइसेंसिंग क्या है?

मेंस लिंक:

अनिवार्य लाइसेंसिंग पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


फेसबुक का निगरानी बोर्ड

(Facebook’s Oversight Board)

  • इस निगरानी बोर्ड स्थापना एक स्वतंत्र निकाय के रूप में की गई है, यह फेसबुक को यह पता लगाने में मदद करेगा कि प्लेटफॉर्म पर किस सामग्री की पोस्ट करने अनुमति दी जा सकती है और किसे हटाया जाना चाहिए।
  • फेसबुक के अलावा इसके उपयोगकर्ता भी इस बोर्ड के लिए मामलों को संदर्भित कर सकते हैं। बोर्ड के फैसले फेसबुक पर बाध्यकारी होते हैं।
  • इस बोर्ड की घोषणा वर्ष 2018 में की गई थी और इसने 22 अक्टूबर, 2020 को आधिकारिक रूप से अपना काम शुरू कर दिया था।
  • निगरानी बोर्ड की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए, फेसबुक ने $ 130 मिलियन की शुरुआती फंडिंग सहित एक अपरिवर्तनीय ट्रस्ट गठित किया गया है, यह राशि आधे से अधिक दशक के लिए बोर्ड की परिचालन लागत को कवर करने के लिए पर्याप्त होगी।
  • एक अमेरिकी कानूनी फर्म बेकर मैकेंजी (Baker McKenzie) द्वारा संचालित एक अनुशंसा पोर्टल के माध्यम से कोई भी व्यक्ति इस बोर्ड की सदस्यता के लिए किसी उम्मीदवार को नामित कर सकता है।

चर्चा का कारण:

फेसबुक के निगरानी बोर्ड ने 7 जनवरी को सोशल मीडिया नेटवर्क द्वारा, तत्कालीन यू.एस. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपने मंच पर ब्लॉक करने संबंधी, दिए गए फैसले को बरकरार रखा है।

दहला बांध

(Dahla Dam)

  • यह अफगानिस्तान का दूसरा सबसे बड़ा बांध है।
  • महीनों तक चली भीषण लड़ाई के बाद तालिबान ने इस पर कब्जा कर लिया है।
  • यह अफगानिस्तान में कंधार प्रांत में अवस्थित है।
  • दहला बांध अरगंडाब नदी पर निर्मित है।

 


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