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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 05 May 2021

 

विषयसूची

 सामान्य अध्ययन-II

1. पश्चिम बंगाल का ‘रियल एस्टेट’ को विनियमित करने संबंधी क़ानून रद्द

2. ऑक्सीजन आपूर्ति के संदर्भ में दिल्ली हाईकोर्ट के अवमानना ​​नोटिस के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट में अपील

3. मतों की पुनर्गणना हेतु ‘निर्वाचन अधिकारी’ का निर्णय अंतिम

4. जानवरों और मनुष्यों को लक्षित ‘वन हेल्थ’ उपागम

5. G7 द्वारा चीन के खिलाफ एक सामूहिक मोर्चा बनाने का प्रयास

 

सामान्य अध्ययन-III

1. प्रयुक्त खाद्य तेल आधारित बायोडीजल

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. ‘मूरहन योगा मैट‘

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थान।

पश्चिम बंगाल का ‘रियल एस्टेट’ को विनियमित करने संबंधी क़ानून रद्द


संदर्भ:

उच्चतम न्यायालय ने राज्य में ‘भूमि भवन बिक्री व्यापार’ (Real Estate) क्षेत्र को विनियमित करने वाले पश्चिम बंगाल के कानून को ‘असंवैधानिक’ बताते हुए रद्द कर दिया है।

  • शीर्ष अदालत ने कहा है, कि राज्य का यह क़ानून केंद्र के ‘रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम’ का अतिक्रमण कर रहा था।
  • इसके अलावा, अनुच्छेद 142 के तहत अपने क्षेत्राधिकार का प्रयोग करते हुए अदालत ने निर्देश दिया है, कि इस कानून के रद्द होने से, इस फैसले की तारीख से पहले किए गए पंजीकरण, अनुशास्ति और अनुमति प्रभावित नहीं होंगी।

उच्चतम न्यायालय द्वारा इस क़ानून के रद्द करने का कारण:

  • शीर्ष अदालत ने कहा कि ‘पश्चिम बंगाल हाउसिंग इंडस्ट्री रेगुलेशन एक्ट’ (WB-HIRA), 2017 को लागू करके, राज्य विधायिका ने “समानांतर प्रशासन” समेत अपना समानांतर कानून स्थापित करने का प्रयास किया है।
  • अदालत के अनुसार, राज्य विधायिका ने संसद के विधायी अधिकार का अतिक्रमण किया है। सातवीं अनुसूची की समवर्ती सूची में आने वाले विषयों के दायरे में, संसद द्वारा बनाये गए कानून का वर्चस्व होता है।

संविधान के अंतर्गत प्रावधान:

1949 के भारतीय संविधान में अनुच्छेद 254(1) के अनुसार-

“यदि किसी राज्य के विधान-मंडल द्वारा बनाई गई विधि का कोई उपबंध संसद द्वारा बनाई गई विधि के, जिसे अधिनियमित करने के लिए संसद सक्षम है, किसी उपबंध के या समवर्ती सूची में प्रगणित किसी विषय के संबंध में विद्यमान विधि के किसी उपबंध के विरुद्ध है तो यथास्थिति, संसद द्वारा बनाई गई विधि, चाहे वह ऐसे राज्य के विधान-मंडल द्वारा बनाई गई विधि से पहले या उसके बाद में पारित की गई हो,  अभिभावी होगी और उस राज्य के विधान-मंडल द्वारा बनाई गई विधि उसके विरोध की मात्रा तक शून्य होगी।“

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अनुच्छेद 142 के बारे में
  2. अनुच्छेद 254 के बारे में
  3. सातवीं अनुसूची के अंतर्गत विषय।
  4. केंद्रीय कानूनों के साथ असंगत राज्यों के क़ानून का परिणाम

मेंस लिंक:

भारत के संविधान में अनुच्छेद 254 (1) के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थान।

ऑक्सीजन आपूर्ति के संदर्भ में दिल्ली हाईकोर्ट के अवमानना ​​नोटिस के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट में अपील


संदर्भ:

हाल ही में, उच्चतम न्यायालय ने, राष्ट्रीय राजधानी में कोविड-19 रोगियों के इलाज हेतु ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित करने संबंधी निर्देशों का पालन न करने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा अवमानना ​​नोटिस जारी करने और अपने अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थिति होने के आदेश के खिलाफ, केंद्र-सरकार द्वारा दायर की गई एक याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति व्यक्त की है।

संबंधित प्रकरण:

दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को इसका कारण स्पष्ट करने का निर्देश दिया, कि कोविड​​-19 रोगियों के इलाज के लिए दिल्ली को ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित करने संबंधी अदालत के आदेश का पालन करने में विफल रहने के लिए इसके खिलाफ अवमानना ​​क्यों नहीं शुरू की जानी चाहिए।

अदालत की अवमानना दो प्रकार की हो सकती है: सिविल अवमानना तथा आपराधिक अवमानना।

  1. सिविल अवमानना: सिविल अवमानना को किसी भी फैसले, आदेश, दिशा, निर्देश, रिट या अदालत की अन्य प्रक्रिया अथवा अदालत में दिए गए वचन के जानबूझ कर किये गए उल्लंघन के रूप में परिभाषित किया गया है।
  2. आपराधिक अवमानना: आपराधिक अवमानना के तहत, किसी भी ऐसे विषय (मौखिक या लिखित शब्दों से, संकेतों, दृश्य प्रतिबिंबो, अथवा किसी अन्य प्रकार से) के प्रकाशन द्वारा अदालत की निंदा करने अथवा न्यायिक कार्यवाही में हस्तक्षेप करने अथवा बाधा डालने के प्रयास को सम्मिलित किया जाता है।

प्रासंगिक प्रावधान:

  1. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 129 और 215 में क्रमशः सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय को न्यायालय की अवमानना के लिए दोषी व्यक्तियों को दंडित करने की शक्ति प्रदान की गयी है।
  2. 1971 के अवमानना अधिनियम की धारा 10 में उच्च न्यायालय द्वारा अपने अधीनस्थ न्यायालयों को अवमानना करने पर दंडित करने संबंधी शक्तियों को परिभाषित किया गया है।
  3. संविधान में लोक व्यवस्था तथा मानहानि जैसे संदर्भो सहित अदालत की अवमानना के रूप में, अनुच्छेद 19 के अंतर्गत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उचित प्रतिबंध को भी सम्मिलित किया गया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अवमानना के संदर्भ में उच्चत्तम न्यायालय तथा उच्च न्यायलय की शक्तियां
  2. इस संबंध में संवैधानिक प्रावधान
  3. न्यायलय की अवमानना (संशोधन) अधिनियम, 2006 द्वारा किये गए परिवर्तन
  4. सिविल बनाम आपराधिक अवमानना
  5. अनुच्छेद 19 के तहत अधिकार
  6. 1971 की अवमानना अधिनियम की धारा 10 किससे संबंधित है?

मेंस लिंक:

भारत में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अवमानना मामलों को किस प्रकार हल किया जाता है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की मुख्य विशेषताएँ।

मतों की पुनर्गणना हेतु ‘निर्वाचन अधिकारी’ का निर्णय अंतिम


संदर्भ:

भारत के निर्वाचन आयोग द्वारा, हाल ही में, पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र में मतों की पुनर्गणना पर मीडिया रिपोर्टों का संज्ञान लेते हुए स्पष्ट किया गया है, कि इस तरह के मामले पर निर्णय लेने हेतु निर्वाचन-समिति द्वारा नियुक्त निर्वाचन अधिकारी (Returning Officer-RO) कानून के अंतर्गत अंतिम प्राधिकरण होता है।

संबंधित प्रकरण:

नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके पूर्व सहयोगी, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता सुवेंदु अधिकारी के बीच एक कड़ा, रोमांचक मुकबला हुआ था।

  • अंत में, निर्वाचन आयोग द्वारा सुवेंदु अधिकारी को 1,956 मतों के अंतर से विजयी घोषित कर दिया गया। इसके पश्चात, ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने तत्काल पुनर्गणना कराए जाने की मांग की, लेकिन इसे चुनाव आयोग ने ठुकरा दिया था।

जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के अंतर्गत ‘निर्वाचन अधिकारी’ की भूमिका एवं शक्तियां:

  • किसी विधानसभा क्षेत्र का निर्वाचन अधिकारी (Returning Officer-RO), जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के अंतर्गत, अर्ध-न्यायिक हैसियत से स्वतंत्र रूप से वैधानिक कार्य करता है।
  • चाहे वह नामांकन, मतदान या मतगणना हो, निर्वाचन अधिकारी (RO), भारत के निर्चाचन आयोग (ECI) के विद्यमान चुनावी कानूनों, निर्देशों और दिशानिर्देशों के अनुसार सख्ती से कार्य करता है।
  • जब कभी मतों की पुनर्गणना के लिए आवेदन किया जाता है, तो निर्वाचन अधिकारी (रिटर्निंग ऑफिसर) के लिए इस मामले पर निर्णय लेने की शक्ति प्राप्त होती है, तथा वह इस प्रकार के आवेदन पर पूर्ण अथवा आंशिक अनुमति प्रदान कर सकता है, अथवा सारहीन या अनुचित प्रतीत होने पर ऐसे आवेदनों को पूर्णतयः खारिज कर सकता है।

आगे की कार्रवाई:

ऐसे मामले में, उच्च न्यायालय के समक्ष चुनाव याचिका (election petition- EP) दायर करना एकमात्र कानूनी उपाय होता है।

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों के अनुसार, निर्वाचन अधिकारी के निर्णय को केवल अधिनियम की धारा 80 के अंतर्गत एक चुनाव याचिका के माध्यम से चुनौती दी जा सकती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रमुख प्रावधान
  2. निर्वाचन अधिकारी की भूमिका और शक्तियां
  3. चुनाव आयोग के आदेशों के खिलाफ अपील

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

जानवरों और मनुष्यों को लक्षित ‘वन हेल्थ’ उपागम


(A ‘One Health’ approach that targets people, animals)

संदर्भ:

विभिन्न अध्ययनों से संकेत मिलता है कि मौजूदा और उभरते संक्रामक रोगों में से दो-तिहाई से अधिक बीमारियाँ पशुजन्य (जूनोटिक- zoonotic) हैं, अथवा किसी खतरनाक रोगज़नक़ (pathogen) किसी जीवन रूप में उत्पन्न होने और इसके द्वारा प्रजातिगत प्रतिबंधों को तोड़ देने से, यह बीमारियाँ जानवरों से मनुष्यों या इसके विपरीत मनुष्यों से जानवरों में स्थानांतरित हुई हो सकती है।

  • हाल के वर्षों में फैले, निपाह वायरस, इबोला, सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (SARS), मिडल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (MERS) और एवियन इंफ़्लुएंज़ा जैसे वायरल प्रकोपों के संक्रमण ने हमारे लिए पर्यावरण, पशु और मानव स्वास्थ्य के मध्य अंतर्संबंधों की जांच करने और समझने की आवश्यकता को प्रबल किया है।
  • यह हमें जानवरों, मनुष्यों और पर्यावरण के परस्पर संबंध को स्वीकार करने पर विवश करता है, और इसे “वन हेल्थ” (One Health) उपागम / दृष्टिकोण कहा जाता है।

‘वन हेल्थ’ अवधारणा क्या है?

  • वन हेल्थ इनिशिएटिव टास्क फोर्स द्वारा दी गई परिभाषा के अनुसार, ‘वन हेल्थ’, मनुष्यों, जानवरों और हमारे पर्यावरण के लिए सर्वोत्कृष्ट स्वास्थ्य हासिल करने के लिए स्थानीय, राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर काम कर रही कई व्यवस्थाओं का सहयोगी प्रयास है।
  • ‘वन हेल्थ मॉडल’, रोग नियंत्रण करने हेतु बहुविषयक दृष्टिकोण को सरल बनाता है ताकि उभरते और मौजूदा जूनोटिक खतरों को नियंत्रित किया जा सके।

भारत का वन हेल्थ फ्रेमवर्क एवं  योजनाएं:

भारत की ‘वन हेल्थ’ विज़न की रूपरेखा (Blueprint), एक विश्व-एक स्वास्थ्य‘ (One World-One Health) के अति महत्वपूर्ण लक्ष्य में योगदान करने हेतु, ‘त्रिपक्षीय प्लस गठबंधन’ (tripartite-plus alliance) के मध्य हुए एक समझौते से तैयार की गई है।

  • इस गठबंधन में, संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (OIE), विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), तथा संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) द्वारा समर्थित एक वैश्विक पहल संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और विश्व बैंक शामिल हैं।
  • भारत द्वारा दीर्घकालिक उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए 1980 के दशक के रूप में जूनोज़िस (Zoonoses) पर एक राष्ट्रीय स्थायी समिति की स्थापना की गई थी।
  • इसी वर्ष, नागपुर में एक वन हेल्थ केंद्र स्थापित करने के लिये धनराशि स्वीकृत की गई है।
  • पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD) द्वारा, वर्ष 2015 से पशु-रोगों की व्यापकता को समाप्त करने के लिए कई योजनाएं शुरू की जा रही हैं; जिनके लिए केंद्र तथा राज्य के मध्य 60:40, पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 90:10 के अनुपात में तथा केंद्रशासित प्रदेशों के लिए 100% वित्त पोषण किया जा रहा है।

समन्वय की आवश्यकता:

वैज्ञानिकों के अनुसार, वन्यजीवों में लगभग 1.7 मिलियन से अधिक वायरस पाए जाते हैं, जिनमें से अधिकतर के ज़ूनोटिक होने की संभावना है। इसका तात्पर्य है कि समय रहते अगर इन वायरसों का पता नहीं चलता है तो भारत को आने वाले समय में कई महामारियों का सामना करना पड़ सकता है।

आवश्यक कार्रवाईयां:

  1. मौजूदा पशु स्वास्थ्य और रोग निगरानी प्रणालियों, जैसेकि पशु उत्पादकता और स्वास्थ्य हेतु सूचना नेटवर्क और राष्ट्रीय पशु रोग रिपोर्टिंग प्रणाली को समेकित करने की आवश्यकता है।
  2. अनौपचारिक बाज़ार और स्लॉटरहाउस ऑपरेशन (जैसे, निरीक्षण, रोग प्रसार आकलन) के लिये सर्वोत्तम दिशा-निर्देशों को तैयार किया जाना चाहिए।
  3. ग्रामीण स्तर तक प्रत्येक चरण में ‘वन हेल्थ’ के संचालन के लिये तंत्र बनाया जाना चाहिए।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. राष्ट्रीय जैव विविधता एवं मानव कल्याण मिशन के तहत ‘वन हेल्थ’ घटक।
  2. ज़ूनोटिक रोग बनाम वेक्टर-जनित रोग।
  3. ‘वन हेल्थ’ से संबंधित आम मुद्दे।

मेंस लिंक:

‘वन हेल्थ मॉडल’, महामारी विज्ञान, निदान और ज़ूनोटिक रोगों पर नियंत्रण हेतु अनुसंधान के लिए एक विश्व स्तर पर स्वीकृत मॉडल है। चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

G7 द्वारा चीन के खिलाफ एक सामूहिक मोर्चा बनाने का प्रयास


संदर्भ:

हाल ही में, विश्व के सात समृद्ध लोकतांत्रिक देशों द्वारा, विदेश मंत्रियों की, दो वर्षो में पहली बार हुई वैयक्तिक रूप से वार्ता में उत्तरोत्तर आक्रमक होते चीन के खिलाफ एक सामूहिक मोर्चा बनाने पर चर्चा की गई।

इस हाल की बैठक में ईरान और उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रमों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।

संबंधित प्रकरण:

चीन के बढ़ते सैन्य और आर्थिक दबदबे तथा देश और विदेश में अपने प्रभाव को बढ़ाने की इच्छा के कारण पश्चिमी लोकतंत्रों में बेचैनी बढ़ रही है।

बैठक के परिणाम:

  1. अम्रीका ने शिनजियांग (Xinjiang) क्षेत्र तथा हांगकांग में नागरिक अधिकारों के खिलाफ कठोर नीति को लेकर चीन पर दबाव बनाने के लिए ब्रिटेन के साथ “मजबूत सहयोग” का वादा किया। शिनजियांग क्षेत्र में चीन द्वारा एक मिलियन उइघुर तथा अन्य मुस्लिमों को कैद किया गया है, जिसे वाशिंगटन ने नरसंहार की कार्रवाई बताया है।
  2. ब्रिटेन ने बीजिंग से उसकी प्रतिबद्धताओं का पालन करने की मांग की, जिसमे हांगकांग पर किये गए वादे भी शामिल हैं। लंदन द्वारा वर्ष 1997 में अपने उपनिवेश हांगकांग को चीन के लिए सौंपे जाने से पहले, चीन ने हांगकांग के लिए एक अलग प्रणाली का वादा किया था।
  3. बैठक में शामिल देशों ने ‘चीन के साथ काम करने के लिए, जलवायु परिवर्तन सहित, जहाँ भी संभव हो, रचनात्मक तरीके खोजने के लिए समझदारी और सकारात्मक तरीके खोजने की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की।

G7 क्या है?

  • G7 की स्थापना वर्ष 1975 में मूलतः G8 के रूप में हुई थी, यह विश्व के अग्रणी औद्योगिक देशों को एक साथ लाने वाला एक अनौपचारिक फोरम है।
  • जी-7 शिखर सम्मेलन में यूरोपीय संघ (European Union -EU)) तथा निम्नलिखित देशों के प्रतिनधि एकत्र होते हैं: कनाडा, फ्रांस,जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका।
  • जी –7 का प्रमुख उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मुद्दों पर चर्चा और विचार-विमर्श करना है। समय-समय यह आर्थिक मुद्दों पर विशेष ध्यान देने के अलावा अन्य वैश्विक समस्याओं का समाधान करने के लिए सहमति से कार्य करता है।

G7 का G8 में रूपांतरण

  • वर्ष 1998 में रूस को औपचारिक रूप से G-7 समूह में एक सदस्य के रूप में सम्मिलित किया गया था, इसके पश्चात G-7 समूह G-8 में परिवर्तित हो गया।
  • वर्ष 2014 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा पूर्वी उक्रेन में रूसी सैनिकों की तैनाती तथा क्रीमिया पर कब्जे को लेकर अन्य जी 8 राष्ट्रों ने इन कार्यवाहियों की कड़ी आलोचना की।
  • G-8 समूह के अन्य राष्ट्रों द्वारा रूस की इन कार्यवाहियों परिणामस्वरूप रूस को जी-8 समूह से निलंबित करने का निर्णय किया गया तथा वर्ष 2014 में पुनः जी-7 समूह बन गया।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. G7, G8, G10, G15, G20, G24 समूह देश।
  2. सदस्य देशों की भौगोलिक स्थिति

मेंस लिंक:

वर्तमान में जी-7 देशों की प्रासंगिकता पर चर्चा कीजिए। समूह को अधिक प्रभावी बनाने के लिए क्या सुधार आवश्यक हैं?

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

प्रयुक्त खाद्य तेल आधारित बायोडीजल


संदर्भ:

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री द्वारा ‘प्रयुक्त खाद्य तेल’ (Used Cooking Oil- UCO) आधारित बायोडीजल मिश्रित डीजल की पहली आपूर्ति आरंभ की गई।

पृष्ठभूमि:

यूसीओ को बायोडीजल में परिवर्तित करने और उद्यमिता के अवसरों को विकसित करने को लेकर एक इकोसिस्टम बनाने के लिए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 10 अगस्त, 2019 को विश्व जैव ईंधन दिवस के अवसर पर “प्रयुक्त खाद्य तेल से उत्पादित बायोडीजल” की खरीद के लिए अपनी दिलचस्पी व्यक्त की थी।

  • इस पहल के तहत, तेल विपणन कंपनियां (OMCs) पांच साल के लिए समय-समय पर वृद्धिशील मूल्य की गारंटी देती हैं और संभावित उद्यमियों को दस साल के लिए ऑफ-टेक गारंटी देती हैं।

‘प्रयुक्त खाद्य तेल’ (UCO) के उपभोग से संबंधित चिंताएं:

  • तलने के दौरान, तेल के कई गुणों में परिवर्तन हो जाता है, जैसेकि बार-बार तलने पर, कुल ध्रुवीय यौगिकों (Total Polar Compounds-TPC) का निर्माण होता है।
  • इन यौगिकों की विषाक्तता के कारण, उच्च रक्तचाप, एथेरोस्क्लेरोसिस, (atherosclerosis) अल्जाइमर रोग, यकृत रोगों जैसे कई रोगों हो सकते हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘जैव ईंधन’ क्या होता है?
  2. जैव ईंधन का वर्गीकरण
  3. राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति का अवलोकन
  4. इथेनॉल क्या है? इसका उत्पादन कैसे किया जाता है?

मेंस लिंक:

भारत के लिए जैव ईंधन के महत्व पर चर्चा कीजिए? क्या राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति, भारत को जैव ईंधन क्षमता का पूरा उपयोग करने में मदद करेगी? आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


‘मूरहन योगा मैट‘

(Moorhen Yoga Mat)

  • असम के मछुआरे समुदाय की छह युवा लड़कियों द्वारा जलकुंभी से विकसित बायोडिग्रेडेबल तथा कंपोस्टेबल मैट (चटाई) है।
  • यह, इस जलीय पौधे को समस्या से संपदा में बदल सकती है।

पृष्ठभूमि:

इस कदम की शुरुआत भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के तहत एक स्वायत्तशासी निकाय पूर्वोत्तर प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग एवं पहुंच केंद्र (North East Centre for Technology Application and ReachNECTAR) की एक पहल के जरिये हुई, जिससे कि जल कुंभी से संपदा बनाने के लिए छह लड़कियों के नेतृत्व में एक सामूहिक ‘सिमांग‘ अर्थात स्वप्न से जुड़े समस्त महिला समुदाय को इसमें शामिल किया जा सके।


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