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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 04 May 2021

 

सामान्य अध्ययन-II

1. कांगो में हालिया इबोला प्रकोप का अंत होने की घोषणा

2. संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग (UNHCR)

3. एशियाई विकास बैंक (ADB)

 

सामान्य अध्ययन-III

1. पार्कर सोलर प्रोब

 

सामान्य अध्ययन-IV

1. कोविड- प्रभावित परिवारों के बच्चों को पुलिस की मदद

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. काचिन जनसमूह

2. सूत्र मॉडल

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

कांगो में हालिया इबोला प्रकोप का अंत होने की घोषणा

संदर्भ:

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) ने आधिकारिक तौर पर देश में 12वें इबोला प्रकोप का अंत होने की घोषणा कर दी है।

  • 7 फरवरी, 2021 को देश में इबोला प्रकोप घोषित किये जाने के बाद से, कुल 12 मामले सामने आए हैं।
  • कांगो की प्रतिक्रिया टीम और स्वास्थ्य भागीदारों के अनुभवों की बदौलत, महामारी पर, इसकी घोषणा के तीन महीने से भी कम समय में नियंत्रण पा लिया गया है।

‘इबोला’ के बारे:

इबोला विषाणु रोग (Ebola virus disease– EVD), मनुष्यों में फैलने वाली एक घातक बीमारी है। इसके लिए पहले ‘इबोला रक्तस्रावी बुखार’ (Ebola haemorrhagic fever) के रूप में जाना जाता था।

इबोला का प्रसरण: यह विषाणु, वन्यजीवों से मनुष्यों में फैलता है और फिर मानव आबादी में मानव-से-मानव संचरण के माध्यम से फैलता है।

औसतन इबोला विषाणु रोग (EVD) मामलों में मृत्यु दर लगभग 50% होती है। इस बीमारी के पिछले प्रकोपों ​​के दौरान संक्रमित मामलों में मृत्यु दर 25% से 90% तक परिवर्तित होती रही है।

निवारण / रोकथाम: इस बीमारी के प्रकोप को सफलतापूर्वक नियंत्रित करने के लिए सामुदायिक भागीदारी अति महत्वपूर्ण है। प्रकोप पर अच्छे तरीके से नियंत्रण, संक्रमित मामलों का प्रबंधन, निगरानी और संपर्क में आने वाले लोगों की पहचान करना, उपयुक्त प्रयोगशाला सेवाएँ, और सामाजिक जागरूकता पर निर्भर करता है।

उपचार: पुनर्जलीकरण (rehydration) सुविधा प्रदान करने के साथ-साथ प्रारंभिक सहायक देखभाल और लाक्षणिक उपचार, रोगी के जीवित रहने में अवसरों में सुधार करता है। अभी तक, इस विषाणु को निष्प्रभावी करने के कोई भी प्रमाणिक उपचार उपलब्ध नहीं है। हालांकि, रक्त- चिकित्सा, प्रतिरक्षा और ड्रग थेरेपी आदि रोगोपचार विकसित किए जा रहे हैं।

xEbola

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘इबोला’ बीमारी किस प्रकार फैलती है?
  2. ‘ज़ूनोटिक रोग’ क्या होते हैं?
  3. वायरस, बैक्टीरिया और अन्य रोगजनकों के मध्य अंतर
  4. ‘कांगो’ की अवस्थिति?
  5. इबोला प्रकोप से ग्रसित होने वाले अफ्रीकी क्षेत्र?

मेंस लिंक:

कांगो गणराज्य द्वारा इबोला महामारी पर किस प्रकार नियंत्रण पाया गया? चर्चा कीजिए।

स्रोत: इकॉनोमिक टाइम्स

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग (UNHCR)


(United Nations High Commissioner for Refugees)

संदर्भ:

हाल ही में, मणिपुर उच्च न्यायालय द्वारा, फरवरी माह में हुए सैन्य तख्तापलट के बाद गुप्त रूप से भारत में प्रवेश करने वाले म्यांमार के सात नागरिकों को, संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग (United Nations High Commissioner for Refugees-UNHCR) से सुरक्षा हासिल करने हेतु नई दिल्ली की यात्रा करने की अनुमति दी गई है।

अदालत द्वारा की गई टिप्पणियाँ:

  • यद्यपि भारत, संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी अभिसमयों का पक्षकार देश नहीं है, किंतु यह ‘मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा’ (Universal Declaration of Human Rights- UDHR), 1948 तथा ‘अंतर्राष्ट्रीय नागरिक एवं राजनीतिक अधिकार नियम’ (International Covenant on Civil and Political Rights), 1966 पर हस्ताक्षरकर्ता है।
  • हमारे संविधान के अनुच्छेद 21 में अंतर्निहित दूरगामी और विविध सुरक्षा, जैसा कि हमारे सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इसकी कई बार व्याख्या की जा चुकी है और इस को अस्पष्ट रूप समझाया जा चुका है, के अंतर्गत ‘शरणार्थियों को उनके मूल-देश में वापस नहीं भेजे जाने’ (non-refoulement) का अधिकार सुनिश्चित रूप से शामिल किया जाएगा।

‘नॉन-रेफौलमेंट’ अर्थात ‘शरणार्थियों को उनके मूल-देश में वापस भेजे जाने से मुक्ति’ क्या है?

यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अंतर्गत एक सिद्धांत है, जिसके अनुसार, अपने देश में होने वाले उत्पीड़न से बचने के लिए, किसी दूसरे देश में शरण मागने आये हुए व्यक्ति को वापस लौटने के लिए विवश नहीं किया जाना चाहिए।

‘संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग’ (UNHCR) के बारे में:

  • संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (United Nations High Commissioner for Refugees- UNHCR), संयुक्त राष्ट्र की एक शरणार्थी संस्था और एक वैश्विक संगठन है, जो शरणार्थियों के जीवन बचाने, उसके अधिकारों की रक्षा करने और उनके लिये बेहतर भविष्य के निर्माण के प्रति समर्पित है।
  • इसे वर्ष 1950 में, उन लाखों यूरोपियों की मदद करने के लिए गठित किया गया था, जिनके घर द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान तबाह हो गए थे या उन्हें अपने घर छोड़कर पलायन करना पड़ा था।
  • इसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में स्थित है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. UNHCR के बारे में
  2. ‘नॉन-रेफौलमेंट’ क्या है?
  3. संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी अभिसमय
  4. 1948 के मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा
  5. ‘अंतर्राष्ट्रीय नागरिक एवं राजनीतिक अधिकार नियम’ 1966

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

एशियाई विकास बैंक (ADB)


संदर्भ:

केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामले मंत्री तथा एशियाई विकास बैंक (Asian Development Bank- ADB) की भारत की गवर्नर श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज यहां “लचीले भविष्य के लिए सहयोग” (Cooperation for a Resilient Future) विषय पर गवर्नरों की संगोष्ठी में भाग लिया।

श्रीमती सीतारमण ने कोविड एवं ग़ैर-कोविड संबंधी परियोजनाओं के लिए समयबद्ध वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए एशियाई विकास बैंक की सराहना की।

एशियाई विकास बैंक के बारे में:

  • यह एक क्षेत्रीय विकास बैंक है।
  • 19 दिसंबर 1966 को स्थापित किया गया।
  • मुख्यालय – मनीला, फिलीपींस।
  • इसे संयुक्त राष्ट्र प्रेक्षक का आधिकारिक दर्जा प्राप्त है।

एशियाई विकास बैंक की सदस्यता:

एशियाई विकास बैंक में, एशिया एवं प्रशांत के लिये आर्थिक तथा सामाजिक आयोग (United Nations Economic and Social Commission for Asia and the Pacific – UNESCAP) के सदस्य, तथा गैर-क्षेत्रीय विकसित देशों को सदस्य के तौर पर सम्मिलित होते है। UNESCAP को पहले ‘एशिया एवं सुदूर-पूर्व के लिए आर्थिक आयोग’ (Economic Commission for Asia and the Far East ECAFE)  कहा जाता था।

  • वर्तमान में ADB में 68 सदस्य हैं, जिनमें से 49 एशिया-प्रशांत क्षेत्र के हैं।

एशियाई विकास बैंक में मताधिकार (Voting rights):

  • एशियाई विकास बैंक को विश्व बैंक की तर्ज पर स्थापित किया गया है। इसमें विश्व बैंक के समान ही भारित मतदान प्रणाली होती है, जिसमे किसी सदस्य राष्ट्र के मताधिकार का निर्धारण बैंक की अधिकृत पूंजी में उस राष्ट्र के अंश के आधार पर किया जाता है।
  • 31 दिसंबर 2019 तक, ADB के पांच सबसे बड़े शेयरधारक, जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका (दोनों देशों में प्रत्येक के पास कुल शेयरों का 6%), पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (6.4%), भारत (6.3%), और ऑस्ट्रेलिया (5.8%) हैं।

भूमिकाएँ एवं कार्य:

  • एशियाई विकास बैंक, एशिया और प्रशांत क्षेत्र में समावेशी आर्थिक विकास, पर्यावरणीय रूप से संवहनीय विकास और क्षेत्रीय एकीकरण के माध्यम से गरीबी को कम करने के लिए समर्पित है।
  • इन कार्यों को, ऋण, अनुदान और सूचना की साझेदारी – बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं, वित्तीय और सार्वजनिक प्रशासन प्रणालियों, राष्ट्रों को जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के लिए तैयार करने में सहयोग तथा प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर प्रबंधन आदि क्षेत्रों में निवेश, के माध्यम से कार्यान्वित किया जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ADB के अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष की नियुक्ति कौन करता है?
  1. ADB का मुख्यालय
  2. ADB सदस्यों के वोटिंग अधिकार
  3. यह विश्व बैंक से किस प्रकार भिन्न है?
  4. ADB के सदस्य कौन हो सकते हैं।

स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

पार्कर सोलर प्रोब


(Parker Solar Probe)

संदर्भ:

अल्पकाल के लिए शुक्र ग्रह के निकट से गुजरने के दौरान, नासा के पार्कर सोलर प्रोब ने एक प्राकृतिक रेडियो सिग्नल का पता लगाया, जिससे, अंतरिक्ष यान के शुक्र ग्रह के ऊपरी वायुमंडल से होकर उड़ान भरने के बारे में ज्ञात हुआ। यह, लगभग 30 वर्षों में शुक्र ग्रह के वातावरण का पहला प्रत्यक्ष प्रमाण था।

निष्कर्ष:

पृथ्वी की भांति, शुक्र ग्रह के वायुमंडल के ऊपरी भाग में विद्युत आवेशित परत पायी जाती है, जिसे  आयनमंडल (Ionosphere) कहा जाता है। आवेशित गैसों, अथवा प्लाज्मा के इस महासागर से प्राकृतिक रूप से रेडियो तरंगों का उत्सर्जन होता रहता है।

निहितार्थ:

इस खोज से इस बात की पुष्टि होती है, कि शुक्र का ऊपरी वायुमंडल भी ‘सौर चक्र’ (Solar Cycle) के दौरान पेचीदा परिवर्तनों से गुजरता है।

  • सौर-चक्र (Solar Cycle), सूर्य की प्रति 11 साल में होने वाली गतिविधियों का एक चक्र होता है।
  • यह शुक्र और पृथ्वी की भिन्नता और इसके कारणों को सुलझाने हेतु सबसे नवीनतम संकेत प्राप्त होते है।

पृष्ठभूमि:

समान प्रक्रियाओं से निर्मित हुए, पृथ्वी और शुक्र को जुड़वां ग्रह कहा जाता है। दोनों ग्रहों पर चट्टानी धरातल, समान आकार और संरचना पायी जाती है। लेकिन, उत्पत्ति के समय से ही दोनों ग्रहों के मार्ग भिन्न थे। शुक्र ग्रह पर चुंबकीय क्षेत्र का अभाव है, और इसकी सतह का तापमान, सीसा को पिघलाने के लिए आवश्यक तापमान से अधिक है।

‘पार्कर सोलर प्रोब मिशन’ के बारे में:

  • नासा का ऐतिहासिक पार्कर सोलर प्रोब मिशन सूर्य के बारे में अब तक ज्ञात जानकारी में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा, जहाँ पर बदलती हुई परिस्थितियां, पृथ्वी तथा अन्य दुनियाओं को प्रभावित करती हुई संपूर्ण सौर प्रणाली में प्रसारित होती है।
  • पार्कर सोलर प्रोब, किसी भी अंतरिक्ष यान की तुलना में, अत्याधिक ताप एवं विकिरण का सामना करते हुए सूर्य की सतह से सर्वाधिक नजदीक से होकर सूर्य के वायुमंडल से गुजरेगा और अंततः मानवता के लिए तारे का अब तक सबसे निकटतम पर्यवेक्षण प्रदान करेगा।

पार्कर सोलर प्रोब की यात्रा:

  • सूर्य के वातावरण के रहस्यों को उजागर करने के क्रम में, पार्कर सोलर प्रोब लगभग सात वर्षों में सात परिभ्रमणों के दौरान शुक्र के गुरुत्वाकर्षण का उपयोग करेगा तथा धीरे-धीरे अपनी कक्षा को सूर्य के नजदीक स्थापित करेगा।
  • पार्कर सोलर प्रोब अंतरिक्ष यान, सूर्य की सतह से 9 मिलियन मील की दूरी पर और बुध ग्रह की कक्षा के भीतर से से होकर सूर्य के वायुमंडल से गुजरेगा।

मिशन का लक्ष्य:

पार्कर सोलर प्रोब के तीन विस्तृत वैज्ञानिक उद्देश्य हैं:

  1. सौर कोरोना और सौर हवा को गर्म करने और गति प्रदान करने वाली ऊर्जा के प्रवाह का पता लगाना।
  2. सौर हवा के स्रोतों पर प्लाज्मा और चुंबकीय क्षेत्र की संरचना और गतिशीलता का निर्धारण करना।
  3. ऊर्जा कणों को गति प्रदान करने और इनका परिवहन करने वाली प्रणाली का अन्वेषण करना।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. पार्कर सोलर प्रोब के बारे में
  2. सोलर फ्लेयर्स क्या हैं?
  3. सूर्य का कोरोना

मेंस लिंक:

सोलर फ्लेयर्स पृथ्वी के पर्यावरण को किस प्रकार प्रभावित करती हैं? चर्चा कीजिए।

स्रोत: नासा

 


सामान्य अध्ययन-IV


 

कोविड- प्रभावित परिवारों के बच्चों को पुलिस की मदद


संदर्भ:

गौतम बुद्ध नगर में कोविड-19 का कहर जारी है, और हजारों परिवार किसी न किसी रूप में प्रभावित हो रहे हैं।

  • ऐसे में, नोएडा में महिला सुरक्षा प्रभारी के रूप में तैनात एक युवा आईपीएस अधिकारी पुलिस उपायुक्त (महिला सुरक्षा) वृंदा शुक्ला- अपने अधिकार में आने वाले संसाधनों को कोविड- प्रभावित परिवारों के बच्चों की मदद करने में उपयोग कर रही है, इन बच्चों के परिवार में इनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है।
  • इस अधिकारी द्वारा, जिन बच्चों के माता-पिता ‘होम-आइसोलेशन’ में हैं, उनको जिला अस्पतालों में कोविड-परीक्षण कराने हेतु लाने-ले जाने के लिए टीमें भेजी गई हैं, प्रति दिन कई बार भोजन प्रदान किया जाता है, और यहां तक कि इन बच्चों के शैक्षणिक भविष्य और महामारी के कहर की वजह से अनाथ हुए भाई-बहनों को संभावित रूप से गोद लेने वालों का भी प्रबंध करने के उदाहरण देखे गए हैं।
  • सुश्री शुक्ला ने, ऐसे परिवारों की सहायता करने को आगे आने के लिए स्वयंसेवकों से और सोशल मीडिया पर अनुरोध कर रही हैं। इनकी अपील के बाद, इनके पास 35 ऐसे स्वयंसेवकों की एक टीम बन चुकी है।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


काचिन जनसमूह

(Kachin people)

ये, उत्तरी म्यांमार के काचिन राज्य की काचिन पहाड़ियों और पड़ोसी देश चीन के युन्नान प्रांत तथा पूर्वोत्तर भारत के अरुणाचल प्रदेश, असम में निवास करने वाले जातीय समूहों का एक संघ हैं।

‘काचिन जनसमूह’ शब्द का उपयोग प्रायः चीन के जिंगपो (Jingpo) लोगों के एक उप-समूह के रूप में किया जाता है।

चर्चा का कारण:

म्यांमार की सैन्य सरकार के खिलाफ काचिन राज्य और देश में अन्य जगहों पर विरोध जारी है।

सूत्र मॉडल

(SUTRA model)

भारत में कोविड- प्रक्षेपवक्र का पूर्वानुमान लगाने के लिए कानपुर और हैदराबाद के आइआइटी के वैज्ञानिकों द्वारा ‘ससेप्टेबल, अनडिटेक्टिड, टेस्टेड (पॉजिटिव), एंड रिमूव्ड अप्रोच’ (SUTRA) मॉडल का उपयोग किया गया है।

कोविड- प्रक्षेपवक्र का पूर्वानुमान लगाने के लिए यह मॉडल तीन मुख्य मापदंडों का उपयोग करता है।

  • पहले मानक को बीटा (beta) या संपर्क दर कहा जाता है, जो किसी संक्रमित व्यक्ति द्वारा अन्य लोगों के संक्रमित होने के बारे में बताता है। यह R0 मान से संबंधित होता है, जो किसी संक्रमित व्यक्ति के द्वारा उसके संक्रमण के दौरान वायरस से संक्रमित होने वाले अन्य लोगों की संख्या होती है।
  • दूसरा मानक ‘पहुंच’ होता है जो महामारी के प्रति आबादी के जोखिम के स्तर को मापता है।
  • तीसरा मानक ‘एप्सिलॉन’ (epsilon) होता है, जो पता लगाए गए और गैर-पता लगाए गए मामलों का अनुपात होता है।

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