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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 03 May 2021

 

विषयसूची

 सामान्य अध्ययन-I

1. जलवायु परिवर्तन के कारण पृथ्वी के अक्ष में विस्थापन

2. अवैतनिक देखभाल कार्यों का मापन एवं इसकी असमानताओं का समाधान

सामान्य अध्ययन-II

1. मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा की गई टिप्पणियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील

2. राज्यों को पूंजीगत व्यय के लिए वित्तीय सहायता योजना

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. अनुच्छेद 311

2. पी-8 आई गश्ती विमान

3. जाइलोफिस दीपकी

4. विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस

5. वोरुख (Vorukh)

6. ओडिशा में पत्रकार ‘फ्रंटलाइन कोविड-19 वारियर्स’ घोषित

 


सामान्य अध्ययन-I


 

विषय: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, भौगोलिक विशेषताएँ और उनके स्थान आदि।

जलवायु परिवर्तन के कारण पृथ्वी के अक्ष में विस्थापन

संदर्भ:

एक अध्ययन के अनुसार, वैश्विक तापमान में वृद्धि के कारण ग्लेशियरों के अत्यधिक मात्रा में पिघलने की वजह से, 1990 के दशक के बाद से, हमारे ग्रह का घूर्णन अक्ष (axis of rotation) सामान्य से अधिक गति कर रहा है।

निहितार्थ:

यद्यपि इस परिवर्तन से दैनिक जीवन पर कोई विशेष प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है, फिर भी इससे दिन की लंबाई में कुछ मिलीसेकंड का बदलाव हो सकता है।

‘पृथ्वी का अक्ष’ क्या है?

पृथ्वी का घूर्णन अक्ष (axis of rotation) वह रेखा होती है, जिसके सहारे पृथ्वी, सूर्य की परिक्रमा करने के दौरान अपनी धुरी पर चक्कर काटती है। जिन स्थानों पर यह अक्ष ग्रह की सतह को प्रतिच्छेदित (intersects) करते हैं, भौगोलिक रूप से उत्तर और दक्षिणी ध्रुव होते हैं।

अक्ष की विस्थापन प्रक्रिया

पृथ्वी की सतह पर ध्रुवों का स्थान नियत नहीं होता है, हालाँकि, पृथ्वी पर कुल द्रव्यमान के वितरण में होने वाले परिवर्तन के अनुसार, इसके अक्ष में विस्थापन होता है।

  • इस प्रकार, अक्ष के विस्थापन होने पर धुर्वों की अवस्थिति में परिवर्तन होता है, और इस परिवर्तन को “ध्रुवीय गति” (polar motion) कहा जाता है।
  • नासा के अनुसार, 20 वीं शताब्दी के आंकड़ों से पता चलता है कि पृथ्वी के चक्रण अक्ष (spin axis) में प्रति वर्ष लगभग 10 सेंटीमीटर का विस्थापन होता है। अर्थात, एक सदी में, धुर्वों की अवस्थिति में 10 मीटर से अधिक का परिवर्तन हो जाता है।
  • आम तौर पर, ध्रुवीय गति का कारण, जलमंडल, वायुमंडल, महासागरों या ठोस पृथ्वी में होने वाले परिवर्तन होते हैं।

नए अध्ययन के निष्कर्ष:

  • 1990 के दशक से, जलवायु परिवर्तन के कारण अरबों टन हिमाच्छादित बर्फ, पिघल कर महासागरों में बह चुकी है। इस कारण, पृथ्वी के ध्रुवों का नई दिशाओं में विस्थापन हुआ है।
  • अध्ययन के अनुसार, 1990 के दशक से, जलमंडल (Hydrosphere) में होने वाले परिवर्तन से उत्तरी ध्रुव, एक नई दिशा में पूर्व की ओर स्थानांतरित हो चुका है।
  • वर्ष 1995 से 2020 तक, ध्रुवों के विस्थापन की औसत गति, वर्ष 1981 से 1995 तक की औसत गति से 17 गुना तीव्र थी।

इस परिवर्तन के पीछे नवीनतम कारक:

  • जलवायु परिवर्तन के कारण हिमनदों के तीव्रता से पिघलने तथा गैर-हिमनद क्षेत्रों में परिवर्तित होने, सिंचाई तथा अन्य मानवजनित गतिविधियों के लिए भूजल की अरक्षणीय अर्थात अंधाधुंध उपभोग।
  • पीने, उद्योगों या कृषि के लिए भूमि के अधः स्तर से हर साल लाखों टन पानी बाहर निकाला जाता है, और अंततः यह जल समुद्र में प्रवाहित हो जाता है। इस प्रकार, इससे ग्रह के द्रव्यमान का पुनर्वितरण होता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. पृथ्वी के ध्रुव।
  2. भौगोलिक और चुंबकीय ध्रुवों के मध्य अंतर।
  3. पृथ्वी के अक्ष में विस्थापन के कारण।
  4. निहितार्थ।

मेंस लिंक:

जलवायु परिवर्तन के परिणामस्वरूप पृथ्वी के अक्ष में किस प्रकार विस्थापन होता है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन, जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और उनके रक्षोपाय।

अवैतनिक देखभाल कार्यों का मापन एवं इसकी असमानताओं का समाधान


संदर्भ:

हालिया चुनावी घोषणापत्रों में गृहणियों को विभिन्न प्रकार के भुगतान का वादा किया गया था, इस प्रकार, महिलाओं द्वारा किए जाने वाले ‘अवैतनिक घरेलू कार्य’ (Unpaid Domestic Work) सुर्खियों में आ गए।

‘अवैतनिक देखभाल कार्य’ क्या है?

आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (Organization for Economic Co-operation and Development- OECD) के अनुसार, किसी परिवार में इसके सदस्यों के लिए प्रदान की जाने वाली सभी अवैतनिक सेवाओं, जिसमें व्यक्तियों की देखभाल, गृहकार्य और स्वैच्छिक सामुदायिक कार्य शामिल होते है, को ‘अवैतनिक देखभाल कार्य’ (Unpaid Care Work) के रूप में संदर्भित किया गया है।

इन गतिविधियों को ‘काम’ माना जाता है क्योंकि सैद्धांतिक रूप से, किसी व्यक्ति के लिए, इन कार्यो को किसी तीसरे व्यक्ति द्वारा कराए जाने पर उसको भुगतान करना पड़ सकता है।

वर्तमान मुद्दा:

  • इन कार्यों के एक बड़े भाग को, जिसे अधिकांशतः महिलाओं और लड़कियों द्वारा किया जाता है, आर्थिक गतिविधियों के मानकों में शामिल नहीं किया जाता है।
  • मैक्किंज़े (McKinsey) की रिपोर्ट के मुताबिक, विश्व के कुल अवैतनिक देखभाल कार्य का 75% हिस्सा महिलाओं द्वारा किया जाता है।
  • भारत की जीडीपी में महिलाओं का आर्थिक योगदान 17% है – जोकि वैश्विक औसत के आधे से भी कम है।
  • इस असमानता का औपचारिक अर्थव्यवस्था में भागीदारी के साथ सीधा संबंध है।

भारत के लिए निहितार्थ:

  • ‘विश्व आर्थिक मंच’ / ‘वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम’ (WEF) द्वारा ‘वैश्विक लैंगिक अंतराल रिपोर्ट’ (Global Gender Gap Report), 2021 में भारत, 156 देशों की सूची में, 28 स्थान लुढ़ककर 140 वें स्थान पर पहुंच गया है।
  • भारत की रैंकिंग में इस गिरावट का प्रमुख कारण महिलाओं की श्रम शक्ति भागीदारी दर में कमी है, जो 24.8 प्रतिशत से गिरकर 22.3 प्रतिशत हो गई है।
  • भारत में महिलाओं की अनुमानित उपार्जित आय, पुरुषों की आय के मात्र पांचवे हिस्से के बराबर है, जिससे इस सूचकांक में भारत का स्थान, वश्विक रूप से निचले दस देशों के मध्य पहुँच गया है।

आवश्यकता:

  1. देखभाल कार्यों की बढ़ती जरूरतों का समाधान करने तथा महिलाओं और पुरुषों की देखभाल जिम्मेदारियों के बीच बड़ी असमानता से निपटने हेतु नीतियों का निर्माण किया जाना चाहिए।
  2. आँकड़ो को अधिक मात्रा में एकत्र किये जाने से, अधिक अवैतनिक देखभाल कार्य सामने आएंगे, जिससे लक्षित नीतियों को तैयार करने, तथा नीतियों एवं निवेश के प्रभाव की बेहतर निगरानी करने में मदद मिलेगी।
  3. स्वच्छ पानी और स्वच्छता, ऊर्जा और सार्वजनिक परिवहन, जैसे भौतिक बुनियादी ढांचे तथा देखभाल, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा जैसे सामाजिक बुनियादी ढांचे में निवेश के माध्यम से ‘अवैतनिक देखभाल कार्य’ को कम किया जाना चाहिए।
  4. पुरुषों और महिलाओं के मध्य, तथा परिवारों और राज्य के बीच देखभाल कार्यों का पुनर्वितरण सकारात्मक सामाजिक मानदंडों और आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करेगा।

देखभाल कार्यों का मापन और मुद्रीकरण:

अवैतनिक कार्यों के मूल्य का अनुमान, इन पर खर्च किए गए समय की मात्रा की गणना (समय-उपयोग सर्वेक्षणों के माध्यम से) करके किया जा सकता है।  इसके पश्चात, अवसर लागत या प्रतिस्थापन लागत की गणना करके या उस गतिविधि में लगने वाले श्रम को मापकर, उस कार्य की कीमत निर्धारित की जा सकती है। हालांकि, इसमें भी कई चुनौतियां हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट- प्रमुख विशेषताएं।
  2. भारत का प्रदर्शन।

मेंस लिंक:

आर्थिक गतिविधियों के मानकों में, देखभाल कार्यों के एक बड़े भाग को, जिसे अधिकांशतः महिलाओं और लड़कियों द्वारा किया जाता है, शामिल नहीं किया जाता है। इसके निहितार्थ पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थान।

मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा की गई टिप्पणियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील


संदर्भ:

भारत के ‘मुख्य निर्वाचन आयुक्त’ (Chief Election Commissioner- CEC) द्वारा मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों द्वारा की गई मौखिक टिप्पणी के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में एक ‘विशेष अनुमति याचिका’ (Special Leave Petition) के माध्यम से अपील की गई है। अपील में कहा गया है, कि मद्रास उच्च न्यायालय ने, चुनाव निकाय तथा इसके अधिकारियों को कोविड​​-19 महामारी की लहर के लिए जिम्मेदार बताया था।

‘मुख्य निर्वाचन आयुक्त’ (CEC) ने अदालत से, उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों द्वारा की गई मौखिक टिप्पणियों का हवाला देते हुए मीडिया रिपोर्टों के आधार पर, निर्वाचन अधिकारियों के खिलाफ हत्या के मामले दर्ज नहीं करने तथा कोई प्रतिरोधी कार्रवाई नहीं करने के लिए, पुलिस को निर्देश देने का आग्रह किया है।

संबंधित प्रकरण:

  • हाल ही में, मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा चुनाव निकाय तथा इसके अधिकारियों के खिलाफ कुछ मौखिक टिप्पणियां की गई थीं, जिनमे अदालत ने, इनके लिए कोविड​​-19 महामारी में वृद्धि के लिए जिम्मेदार ठहराया था।
  • यह भी बताया गया है, कि न्यायाधीशों ने संबंधित अधिकारियों पर हत्या के आरोप लगाए जाने को कहा था।
  • इसके बाद, निर्वाचन आयोग ने, चुनाव से संबंधित मामलों की सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों द्वारा की गई मौखिक टिप्पणियों के संदर्भ में, मीडिया द्वारा की जाने वाली रिपोर्टिंग पर प्रतिबंध लगाने हेतु मद्रास उच्च न्यायालय से एक आदेश जारी करने की मांग की थी।

आवश्यकता:

  • मौखिक टिप्पणियों से, चुनाव निकाय तथा लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति आम जनमानस का विश्वास प्रभावित या कम होगा।
  • किसी एक स्वतंत्र संवैधानिक प्राधिकरण द्वारा किसी दूसरी संस्था के खिलाफ उसकी छवि को प्रभावी रूप से धूमिल करने वाले आरोप लगाए जाना, कदापि उचित नहीं है।

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 136:

अपील के लिए उच्चतम न्यायालय की विशेष इजाजत:

  1. अनुच्छेद 136 के अनुसार, उच्चतम न्यायालय अपने विवेकानुसार भारत के राज्यक्षेत्र में किसी न्यायालय या अधिकरण द्वारा किसी वाद या मामले में पारित किए गए या दिए गए किसी निर्णय, डिक्री, अवधारण, दंडादेश या आदेश की अपील के लिए विशेष इजाजत दे सकता है।
  2. खंड (1) की कोई बात सशस्त्र बलों से संबंधित किसी विधि द्वारा या उसके अधीन गठित किसी न्यायालय या अधिकरण द्वारा पारित किए गए या दिए गए किसी निर्णय, अवधारण, दंडादेश या आदेश पर लागू नहीं होगी।

 प्रीलिम्स लिंक:

  1. विशेष अनुमति याचिका’ (Special Leave Petition) क्या है?
  2. अनुच्छेद 136
  3. ‘मुख्य निर्वाचन आयुक्त’ (CEC) के बारे में।

मेंस लिंक:

‘विशेष अनुमति याचिका’ पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

राज्यों को पूंजीगत व्यय के लिए वित्तीय सहायता योजना


(Scheme of Financial Assistance to States for Capital Expenditure)

संदर्भ:

वित्त मंत्रालय ने राज्यों को पूंजीगत परियोजनाओं पर खर्च करने के लिए 50 वर्षों के लिए ब्याज मुक्त ऋण के रूप में 15,000 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त रकम प्रदान करने का फैसला किया है।

व्यय विभाग ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए “राज्यों को पूंजीगत व्यय के लिए वित्तीय सहायता की योजना” (Scheme of Financial Assistance to States for Capital Expenditure) हेतु नए दिशानिर्देश जारी किए है।

योजना के तहत आवंटन:

  1. योजना का पहले भाग में उत्तर-पूर्व और पहाड़ी राज्यों के लिए 2600 करोड़ रुपये की रकम निर्धारित की गई है।
  2. योजना का दूसरा भाग, पहले भाग में शामिल राज्यों को छोड़कर सभी राज्यों के लिए है। इसके लिए 7400 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। यह रकम इन राज्यों के बीच वर्ष 2021-22 के लिए 15वें वित्त आयोग के निर्णय के अनुरूप केंद्रीय करों के अपने हिस्से के अनुपात में आवंटित की गई है।
  3. योजना का तीसरा भाग बुनियादी ढांचे की परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण/पुनर्चक्रण एवं राज्य सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (एसपीएसई) में विनिवेश के लिए राज्यों को प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए है। इस भाग के लिए 5,000 करोड़ रुपये आवंटित किये गये है।

पृष्ठभूमि:

इस योजना के तहत राज्य सरकारों को 50 वर्षों के लिए ब्याज मुक्त ऋण के रूप में वित्तीय सहायता प्रदान की जानी है।

  • वित्तीय वर्ष 2020-21 में इस योजना के लिए अधिकतम 12,000 करोड़ रुपये की रकम निर्धारित की गई थी और राज्यों को 11,830.29 करोड़ रुपये की रकम जारी की गई थी।
  • इससे महामारी वर्ष में राज्य स्तर के पूंजीगत व्यय को बनाए रखने में मदद मिली थी।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


अनुच्छेद 311

हाल ही में, जम्मू-कश्मीर के एक सरकार शिक्षक को, अनुच्छेद 311 के तहत, बिना किसी जांच के पदच्युत कर दिया गया।

  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 311, संघ या राज्य के अधीन नागरिक सेवाओं में कार्यरत किसी व्यक्ति को पदच्युत करने या पद से हटाये जाने अथवा रैंक में अवनत करने से संबंधित है।
  • अनुच्छेद 311 (2), उपखंड (ग) के अनुसार, जहाँ, यथास्थिति, राष्ट्रपति या राज्यपाल का यह समाधान हो जाता है कि राज्य की सुरक्षा के हित में, इस तरह की जांच करना समीचीन नहीं है, तब व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच करना आवश्यक नहीं होगा।

पी-8 आई गश्ती विमान

(P-8I patrol aircraft)

हाल ही में, अमेरिका द्वारा भारत को छह ‘पी-8 आई गश्ती विमान’ बेचे जाने की मंजूरी दे दी गई है।

  • पी-8 आई विमान, भारतीय नौसेना के लिए, बोइंग द्वारा निर्मित लंबी दूरी का बहु-उद्देशीय समुद्री गश्ती विमान है।
  • पी-8 आई विमान, भारत के विशाल समुद्र तट और क्षेत्रीय जल की सुरक्षा हेतु निर्मित किया गया है।
  • यह एयरक्राफ्ट, पनडुब्बी-रोधी युद्ध, खुफिया मिशन, समुद्री गश्त, निगरानी और टोही मिशन आदि में प्रयुक्त किये जा सकते हैं।

जाइलोफिस दीपकी

(Xylophis deepaki)

‘जाइलोफिस दीपकी’, तमिलनाडु में, हाल ही में, खोजी गई एक नई साँप प्रजाति है।

  • यह इंद्रधनुष की भांति चमकीली शल्क (उपरी त्वचा) वाला मात्र 20 सेमी लंबाई का एक छोटा सांप है।
  • इस प्रजाति का नामकरण, भारतीय सरीसृप विज्ञानवेत्ता दीपक वीरप्पन के सम्मान में किया गया है, इन्होने ‘वुड स्नेक’ (Wood snakes) को समायोजित करने के लिए एक नए उप-वर्ग जाइलोफिनाइने (Xylophiinae) का निर्माण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
  • ‘वुड स्नेक’ हानिरहित, खुदाई करने वाली प्रजातियों के उपवर्ग के जीव होते हैं, इन्हें प्रायः पश्चिमी घाट के जंगलों में लकड़ी के लट्ठो के नीचे और खेतों में मिट्टी खोदते पाया जाता है।

विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस

  • प्रतिवर्ष, 3 मई, ‘विंडहोक घोषणा’ (Declaration of Windhoek) की वर्षगाँठ को ‘विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।
  • यूनेस्को की जनरल कांफ्रेंस की सिफारिश के बाद, दिसंबर 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने ’विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस’ की घोषणा की थी।
  • विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस- 2021 का विषय: “सूचना से जनकल्‍याण” (Information as a Public Good)।

वोरुख (Vorukh)

  • यह उत्तरी ताजिकिस्तान में एक ‘जमोट’ (jamoat), (रूसी भाषा में समुदाय) है। ‘वोरुख जमोट’ किर्गिस्तान से घिरा हुआ एक बहि:क्षेत्र है तथा सुघ्द (Sughd) क्षेत्र के इस्फ़ारा (Isfara) शहर का एक भाग है।
  • ‘जमोट’ मध्य एशियाई देश ताजिकिस्तान में, कम्यून या नगरपालिकाओं की भांति तृतीय स्तर की प्रशासनिक इकाई होते है।

चर्चा का कारण:

किर्ग़िज़स्तान तथा ताजिकिस्तान के मध्य सीमा-तनाव।

ओडिशा में पत्रकार ‘फ्रंटलाइन कोविड-19 वारियर्स’ घोषित

हाल ही में, ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने, राज्य में कार्यरत पत्रकारों को ‘फ्रंटलाइन कोविड-19 वारियर्स’ घोषित कर दिया है, तथा कोरोनावायरस के संक्रमण की वजह से जान गंवाने वाले पत्रकार के परिजनों को 15,00,000 रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है।


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