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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 01 May 2021

 

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

1. दिल्ली में राष्ट्रपति शासन की मांग

2. अनुसूचित दवाओं की सूची

3. विधिक माप-पद्धति (पैक की हुई वस्तुएं), नियम 2011

4. नेटवर्क फॉर ग्रीनिंग फाइनैन्शल सिस्टम (NGFS)

5. चार अन्य मसालों के लिए गुणवत्ता मानकों का निर्धारण

 

सामान्य अध्ययन-III

1. वैश्विक वन लक्ष्य रिपोर्ट 2021: संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस

2. ऑपरेशन समुद्र सेतु- II

3. राहत कार्यों हेतु सशस्त्र बलों को आपातकालीन वित्तीय शक्तियां

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

दिल्ली में राष्ट्रपति शासन की मांग


संदर्भ:

हाल ही में, कोविड-19 मामलों की संख्या में भारी वृद्धि को देखते हुए, ‘आम आदमी पार्टी’ (AAP) विधायक शोएब इकबाल ने दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है।

संबंधित प्रकरण:

इनका कहना है, कि न तो वह खुद और न ही सरकार, कोविड-19 की दूसरी लहर से प्रभावित लोगों की कोई मदद कर पाने में सक्षम है। इसलिए, दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लागू किया जाना चाहिए।

वर्तमान स्थिति पर उच्च न्यायालय द्वारा की गई टिप्पणियाँ:

  • एक कोविड-19 से संक्रमित मरीज की मृत्यु पर वेदना व्यक्त करते हुए, दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि “राज्य, नागरिकों के जीवन के अधिकार की रक्षा करने में विफल हो चुका है”। उक्त मरीज का परिवार पिछले तीन दिनों से ICU बिस्तर के लिए विनती कर रहा था।
  • अदालत ने कहा, कि राज्य, संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्रत्याभूत ‘नागरिकों को जीवन का अधिकार’ की रक्षा करने में विफल हो चुका है।

भारतीय संदर्भ में राष्ट्रपति शासन:

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 356 के अनुसार-

राष्ट्रपति, यदि इस तथ्य से संतुष्ट होते हैं कि, किसी राज्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गयी है, कि राज्य सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार शासन नहीं चला पा रही है, तो अनुच्छेद 356 के तहत भारत के राष्ट्रपति, राज्य सरकार को निलंबित कर सकते हैं और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा सकते है।

  • इसे राज्य आपातकाल (State Emergency) अथवा संवैधानिक आपातकाल(Constitutional Emergency) भी कहा जाता है।
  • अनुच्छेद 356 लागू होने पर राज्य में कोई मंत्रिपरिषद नहीं होती है।
  • राज्य का प्रशासन सीधे केंद्र सरकार के नियंत्रण में आ जाता है, और भारत के राष्ट्रपति के प्रतिनिधि रूप में राज्यपाल, राज्य के प्रशासन का सञ्चालन करते है।

राष्ट्रपति शासन के लिए संसदीय अनुमोदन और अवधि:

  • राष्ट्रपति शासन लागू करने की घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा इसके जारी होने की तिथि से दो महीने के भीतर अनुमोदित किया जाना आवश्यक होता है।
  • राष्ट्रपति शासन का अनुमोदन सदन में साधारण बहुमत, अर्थात सदन के उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के बहुमत, से किया जाता है।
  • किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन छह माह के लिए वैध होता है, हालांकि इसे प्रति छह महीने में संसद की मंजूरी के साथ अधिकतम तीन साल तक के लिए बढ़ाया जा सकता है।

राज्यपाल की रिपोर्ट:

अनुच्छेद 356 के तहत,  राष्ट्रपति को राज्यपाल से रिपोर्ट प्राप्त करने अथवा इस तथ्य से संतुष्ट होने पर कि,  राज्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गयी है, कि राज्य सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार शासन नहीं चला पा रही है, राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है।

राष्ट्रपति शासन का निरसन:

  • राज्य में जारी राष्ट्रपति शासन की घोषणा राष्ट्रपति द्वारा किसी भी समय रद्द की जा सकती है।
  • इसके लिए किसी प्रकार के संसदीय अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. राष्ट्रपति शासन लागू करना
  2. संबंधित प्रावधान
  3. राज्यपाल की रिपोर्ट
  4. संसदीय अनुमोदन और अवधि
  5. निरसन
  6. राष्ट्रपति शासन के तहत राज्य विधायिका की स्थिति

मेंस लिंक:

‘राष्ट्रपति शासन’ क्या है? यह विवादास्पद क्यों है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सरकार की नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास और उनके डिजाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न मुद्दों के लिए हस्तक्षेप।

अनुसूचित दवाओं की सूची


(Scheduled drugs’ list)

संदर्भ:

बॉम्बे हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से, ‘रेमेडिसविर’ के लिए अनुसूचित दवाओं की सूची (Scheduled drugs’ list) में शामिल करने और इसकी कीमत को विनियमित करने के लिए कहा है।

अदालत ने यह निर्देश, खंडपीठ द्वारा, नागपुर जिले में ऑक्सीजन की कमी, रेमेडिसविर, टोसिलिजुमैब इंजेक्शन, और अस्पताल में चिकत्सीय विस्तरों की कमी पर स्वतः संज्ञान लेते हुए दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करने के दौरान जारी किया।

अदालत द्वारा सुझाए गए अन्य उपाय:

अदालत ने यह भी कहा है, कि यदि औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम’ (Drugs and Cosmetics Act- DCA) के प्रावधानों की उदार व्याख्या की जाए तो दवाओं के मूल्य निर्धारण को विनियमित करना संभव है।

  • ‘ड्रग और कास्मेटिक अधिनियम’ अर्थात DCA के अंतर्गत, किसी प्राकृतिक आपदा या महामारी के दौरान आवश्यक दवाओं के मूल्यों को प्रतिबंधित करने अथवा विनियमित करने का प्रावधान किया गया है।
  • ‘औषधि नियंत्रण अधिनियम’ (Drugs Control Act) तथा ‘औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम’ (DCA) के अंतर्गत, किसी महामारी के दौरान, केंद्र सरकार को आवश्यक दवाओं का मूल्य तय करने हेतु अधिसूचना जारी करने की शक्ति प्रदान की गई है।

आवश्यकता:

यदि केंद्र सरकार, अपने लिए प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करती है, तो इसके दूरगामी प्रभाव होंगे। इसके द्वारा, कोविड-19 से संक्रमित मरीजों के परिवारों से की जाने वाली धन की उगाही समाप्त हो जाएगी और दवाओं की कालाबाजारी पर भी पूर्ण विराम लगेगा।

पृष्ठभूमि:

‘ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स’, 1945 में, दी गई अनुसूचियों के तहत दवाओं का वर्गीकरण करने संबंधी प्रावधान हैं और इनमे प्रत्येक अनुसूची की दवाओं के लिए भंडारण, बिक्री, प्रदर्शन और औषध विधि के लिए दिशानिर्देश दिए गए हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. भारत में दवाओं का वर्गीकरण।
  2. अनुसूची H बनाम अनुसूची X दवाएं।
  3. महत्वपूर्ण अनुसूचित दवाएं।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

विधिक माप-पद्धति (पैक की हुई वस्तुएं), नियम 2011


(The Legal Metrology (Packaged Commodities) Rules, 2011)

संदर्भ:

विशेष रूप से कोविड-19 रोगियों को ऑक्सीजन सहायता प्रदान करने में काम आने वाले चिकित्सीय उपकरणों के आयातकों के लिए, अगले तीन महीनों तक, इन उपकरणों के लिए आवश्यक पूर्व घोषणा किये वगैर आयात करने की अनुमति प्रदान की गई है।

पृष्ठभूमि:

‘विधिक माप-पद्धति’ (पैक की हुई वस्तुएं), नियम 2011 अर्थात ‘लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) नियम, 2011 के अंतर्गत, आयात करने से पहले अनुमोदन प्राप्त करना अनिवार्य किया गया है।

  • लेकिन, कोविड​​-19 महामारी की स्थिति को देखते हुए को देखते हुए और चिकित्सा उपकरणों की मांग को पूरा करने के लिए भारत सरकार के उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा चिकित्सा उपकरणों के आयातकों को तीन महीने के लिए, कुछ निश्चित चिकित्सा उपकरणों के आयात की अनुमति दी गई है।

‘लीगल मेट्रोलॉजी अधिनियम’ 2009 के बारे में:

  • लीगल मेट्रोलॉजी अधिनियम 2009 का प्रबंधन उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा किया जाता है।
  • यह अधिनियम, मापक और माप उपकरणों पर वैधानिक अनिवार्यताओं को लागू करने का प्रावधान करता है।
  • लीगल मेट्रोलॉजी का उद्देश्य, तोल और माप की सटीकता एवं सुरक्षा की दृष्टि से सार्वजनिक गारंटी सुनिश्चित करना है।
  • लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज), नियम 2011 मुख्य रूप से यह सुनिश्चित करने के लिए है, कि उपभोक्ता पूर्व-पैक वस्तुओं को खरीदने से पहले इन पर लिखी आवश्यक घोषणाओं के बारे में पढ़े और सही विकल्प चुनने में सक्षम हो।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अधिनियम का अवलोकन
  2. पूर्व अनुमति
  3. छूट

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

 नेटवर्क फॉर ग्रीनिंग फाइनैन्शल सिस्टम (NGFS)


(Network For Greening Financial System)

संदर्भ:

हाल ही में, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ‘सेंट्रल बैंक्स एंड सुपरवाइजर्स नेटवर्क फॉर ग्रीनिंग द फाइनैन्शल सिस्टम’ (NGFS) का सदस्य बन गया है।

NGFS के बारे में:

  • इसकी शुरुआत 12 दिसंबर 2017 को ‘पेरिस वन प्लैनेट समिट’ (Paris One Planet Summit) में की गयी थी।
  • यह, सर्वोतम पद्धतियों को साझा करने तथा वित्तीय क्षेत्र में पर्यावरण और जलवायु जोखिम प्रबंधन के विकास में योगदान देने के लिए इच्छुक केंद्रीय बैंकों और पर्यवेक्षकों का एक समूह है।
  • यह, संवहनीय अथवा स्थाई अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ने हेतु सहयोग देने के लिए मुख्यधारा विषयक वित्त उपलब्ध कराने का प्रयास भी करता है।
  • संरचना: इसमें केंद्रीय बैंक और वित्तीय पर्यवेक्षक सम्मिलित होते हैं।
  • सचिवालय: इसके सचिवालय का प्रबंधन ‘बंक डी फ्रांस’ (Banque de France) द्वारा किया जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. नेटवर्क फॉर ग्रीनिंग फाइनैन्शल सिस्टम (NGFS) के बारे में
  2. संरचना
  3. उद्देश्य
  4. कार्य
  5. सदस्य

स्रोत: इकॉनोमिक टाइम्स

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

चार अन्य मसालों के लिए गुणवत्ता मानकों का निर्धारण


संदर्भ:

‘मसालों और ‘मसालों और पाक–कला में काम आने वाली जड़ी-बूटियों’ पर कोडेक्स समिति’ (Codex Committee on Spices and Culinary Herbs- CCSCH)  द्वारा लौंग, अजवायन, तुलसी और अदरक के लिए गुणवत्ता मानकों को अंतिम रूप देकर उसे लागू करने के लिए सिफारिश की गई है।

‘समिति’ ने इन चार नए मानकों को ‘कोडेक्स एलेमेंट्रिस कमीशन’ (CAC) के पास अंतिम मंजूरी और उसको लागू करने के लिए भेज दिया है।

‘कोडेक्स कमेटी ऑन स्पाइसेस एंड कलिनरी हर्ब्स’ (CCSCH) के बारे में:

वर्ष 2013 में गठित CCSCH, कोडेक्स कमोडिटी समितियों में सबसे नई है।

  • ‘कोडेक्स कमेटी ऑन स्पाइसेस एंड कलिनरी हर्ब्स’ का अध्यक्ष भारत है, और मसाला बोर्ड (वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय) इसके सचिवालय का दायित्व निभाता है।
  • इस समिति का मुख्य कार्य, उपभोक्ता संरक्षण संबंधी कोडेक्स सिद्धांतों और निष्पक्ष व्यापार पद्धतियों के अनुसार, ‘मसालों और पाक–कला में काम आने वाली जड़ी-बूटियों’ के सूखे हुए, निर्जलित साबुत अवस्था, पिसे, टूटे एवं कुटे हुए, प्रकारों के लिए वैश्विक मानकों का विकास एवं प्रचार करना है।

‘कोडेक्स एलेमेंट्रिस कमीशन’ (CAC) के बारे में:

वर्ष 1963 में स्थापित, ‘कोडेक्स एलेमेंट्रिस कमीशन’ (Codex Alimentarius Commission-CAC), संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा संयुक्त रूप से स्थापित एक अंतर-सरकारी निकाय है।

इसका गठन, उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा और खाद्य व्यापार में उचित व्यवहार सुनिश्चित करने के लिये किया गया था।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. कोडेक्स एलेमेंट्रिस के बारे में।
  2. ‘कोडेक्स एलेमेंट्रिस कमीशन’ (CAC) के बारे में।
  3. CCSCH क्या है?

मेंस लिंक:

मसालों और ‘मसालों और पाक–कला में काम आने वाली जड़ी-बूटियों’ पर कोडेक्स समिति’ ( CCSCH) पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

वैश्विक वन लक्ष्य रिपोर्ट 2021: संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट


(The Global Forest Goals Report 2021: UN Report)

संदर्भ:

हाल ही में जारी, ‘वैश्विक वन लक्ष्य रिपोर्ट’ (The Global Forest Goals Report), 2021 संयुक्त राष्ट्र के ‘आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग’ द्वारा तैयार की गई है।

इस रिपोर्ट में, ‘संयुक्त राष्ट्र की वनों के लिए रणनीतिक योजना’-2030 (United Nations Strategic Plan for Forests 2030) के उद्देश्यों और लक्ष्यों की प्रगति का शुरुआती विवरण दिया गया है।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष:

  • विभिन्न देशों के लिए वनों का प्रबंधन करने आने वाली चुनौतियों को कोविड-19 महामारी ने और बढ़ा दिया है।
  • समग्र प्रभाव: कोविड-19, केवल एक स्वास्थ्य संकट ही नहीं है, बल्कि इसकी वजह से कई जिंदिगियाँ और आजीविकाएं समाप्त हो चुकी हैं, अत्यधिक गरीबी, असमानता और खाद्य असुरक्षा की स्थितियां भी उत्पन्न हुई हैं, और इसने ‘हमारे इच्छित भविष्य’ (Future We Want) को हमारी पहुंच से और दूर कर दिया है।
  • वैश्विक उत्पादन पर प्रभाव: ऐसा अनुमान है, कि वर्ष 2020 में, विश्व सकल उत्पाद में लगभग 3% तक की गिरावट हुई है। यह वैश्विक महामंदी के बाद से वैश्विक उत्पादन में सर्वाधिक तीक्ष्ण गिरावट है।
  • आर्थिक मोर्चे पर: वनों पर निर्भर आबादी को नौकरी-खोने, आय में कमी, बाजारों और ख़बरों तक पहुँच में कमी, और कई महिलाओं और युवाओं के लिए मौसमी रोजगार में कमी का सामना करना पड़ा है।
  • कई वन-आश्रित समुदायों, विशेष रूप से दूरदराज अथवा दुर्गम स्थानों में रहने वाली आबादी को स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है और इनके लिए चलाये जा रहे सरकारी सहायता कार्यक्रम और बुनियादी सेवाएं भी बाधित हुई हैं।
  • महामारी के कारण उत्पन्न हुए स्वास्थ्य और सामाजिक-आर्थिक परिणामों से वनों पर दबाव बढ़ा है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि स्थानीय लोग और स्थानीय समुदायों के साथ-साथ वापस लौटने वाले प्रवासियों और शहरी श्रमिक, अपनी बढ़ती हुई अतिसंवेदनशीलता को राहत देने, भोजन, ईंधन, आश्रय और कोविड-19 के जोखिमों से सुरक्षा की तलाश में जंगलों में काफी भीतर तक शरण ले चुके हैं।
  • एक मिलियन प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा उत्पन्न हो चुका है और वर्ष 1980 से 2000 तक उष्णकटिबंधीय वनों का 100 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्रफल नष्ट हो चूका है।

आवश्यकता:

  • शुरुआती के तौर पर, संवहनीय रूप से संसाधन-संपन्न तथा प्रबंधित वनों के माध्यम से रोजगार, आपदा जोखिम में कमी, खाद्य सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा विस्तार को बढाया जा सकता है।
  • वैश्विक स्वास्थ्य के संबंध में, वनों की सुरक्षा और इनकी पुनर्स्थापना, भविष्य में होने वाली जूनोटिक बीमारियों के प्रकोप के जोखिम को कम करने में सक्षम, पर्यावरणीय कार्यक्रमों में से एक है।
  • रिपोर्ट में, कोविड-19 के खतरों, जलवायु परिवर्तन और वनों के सामने आने वाले जैव विविधता संकट से निपटने के लिए, अधिक संवहनीयता तथा हरित एवं अधिक समावेशी अर्थव्यवस्था को शामिल करते हुए भविष्य के लिए कार्रवाई कार्यक्रम निर्धारित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।

स्रोत: डाउन टू अर्थ

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस

(International Labour Day)

1 मई को वर्ष भर में ‘अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस’ मनाया जाता है।

  • इसे ‘मई दिवस’ (May Day) के रूप में जाना जाता है।
  • इस तिथि को समाजवादी और कम्युनिस्ट राजनीतिक दलों के एक पैन-नेशनल संगठन द्वारा चुना गया था।
  • इस दिवस को, 4 मई 1886 को शिकागो की एक ‘सूखीघास के बाजार में हुई घटनाओं’ (Haymarket affair) की स्मृति में मनाया जाता है।

ऑपरेशन समुद्र सेतु- II

  • भारतीय नौसेना ने ऑक्सीजन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए राष्ट्रीय अभियान को आगे बढ़ाने के लिए ऑपरेशन समुंद्र सेतु- II (Operation Samudra Setu-II) लॉन्च किया है।
  • पिछले वर्ष, भारतीय नौसेना ने वंदे भारत मिशन (Vande Bharat Mission) के एक भाग के रूप में ऑपरेशन समुद्र सेतु लांच किया था और मालदीव, श्रीलंका और ईरान के फंसे हुए और परेशान भारतीय नागरिकों को लगभग वापस देश में लाया गया था।

राहत कार्यों हेतु सशस्त्र बलों को आपातकालीन वित्तीय शक्तियां

  • रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने विशेष प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए सशस्त्र बलों को आपातकालीन वित्तीय शक्तियां प्रदान कीं हैं, ताकि इन्हें देश में वर्तमान कोविड-19 महामारी से लड़ने के प्रयासों के लिए सशक्त किया जा सके।
  • आपातकालीन वित्तीय शक्तियां, फॉर्मेशन कमांडरों के लिए, महामारी के खिलाफ चल रहे प्रयासों के लिए विभिन्न सेवाओं और कार्यों के प्रावधान के अलावा क्वारंटीन सुविधाएं/ अस्पताल स्थापित और संचालित करने, उपकरण / वस्तुओं / सामग्रियों / दुकानों की खरीद और उपकरणों की मरम्मत के कार्य संबंधी गतिविधियों हेतु मदद करेंगी।

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