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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 30 April 2021

 

विषयसूची

 सामान्य अध्ययन-III

1. दिल्ली सरकार की जिम्मेदारियाँ पूर्ववत रहेंगी: केंद्र सरकार

2. करेन विद्रोही

 

सामान्य अध्ययन-III

1. नेट ज़ीरो उत्पादक मंच

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. तियान्हे मॉड्यूल

2. विश्व का प्राचीनतम पानी

3. MACS 1407

4. ब्रिटेन, स्व-चालक वाहनों के उपयोग हेतु नियम-निर्धारण करने वाला पहला देश

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

दिल्ली सरकार की जिम्मेदारियाँ पूर्ववत रहेंगी: केंद्र सरकार


संदर्भ:

हाल ही में, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा है, कि ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (संशोधन) अधिनियम’, 2021 (Government of National Capital Territory (GNCTD) Amendment Act, 2021), स्वास्थ्य और शिक्षा संबंधी क्षेत्रों में आवश्यक कार्रवाई करने हेतु, निर्वाचित सरकार की संवैधानिक और कानूनी जिम्मेदारियों में किसी भी तरह का परिवर्तन नहीं करता है।

पृष्ठभूमि:

24 मार्च को संसद द्वारा पारित ‘GNCTD अधिनियम’ दिल्ली के उपराज्यपाल (Lieutenant Governor – LG) को अधिक शक्तियां प्रदान करता है।

संशोधन अधिनियम का उद्देश्य, इसे राजधानी की जरूरतों के लिए अधिक प्रासंगिक बनाना; निर्वाचित सरकार और उपराज्यपाल (एलजी) के उत्तरदायित्व को परिभाषित करना; और, विधायिका तथा कार्यपालिका के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध बनाना है।

संशोधन अधिनियम के प्रमुख प्रावधान:

  1. इस अधिनियम के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में सरकार का तात्पर्य ‘उपराज्यपाल’ होगा।
  2. यह क़ानून, जिन मामलों पर दिल्ली विधानसभा को कानून बनाने की शक्ति प्राप्त है, उन मामलों में ‘उपराज्यपाल’ को विवेकाधीन शक्तियाँ प्रदान की गयी हैं।
  3. इसके तहत, मंत्रिपरिषद (या दिल्ली मंत्रिमंडल) द्वारा लिए गए किसी निर्णय को लागू करने से पहले ‘उपराज्यपाल’ को अनिवार्य रूप से ‘अपनी राय प्रदान करने के लिए’ अवसर देना सुनिश्चित किया गया है।

संबंधित चिंताएं:

राजधानी-नगर को प्रशासित करने के संदर्भ में, इस अधिनियम के तहत मुख्यमंत्री की तुलना में उपराज्यपाल को अधिक शक्तियां प्रदान की गई हैं।

  • विशेषज्ञों द्वारा इस विषय पर भिन्न राय वयक्त की गई हैं, कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि, महामारी से निपटने की वर्तमान चुनौती को देखते हुए यह एक सही कदम है।
  • जबकि कुछ विशेषज्ञों ने इस अधिनियम को लागू करने के समय पर सवाल उठाते हुए कहा है, कि इस क़ानून से, एक ही झटके में निर्वाचित जन-प्रतिनिधियों को शक्तिहीन कर देने और एक गैर-निर्वाचित, केंद्र सरकार द्वारा नियुक्‍त गए व्यक्‍ति के मध्य टकराव का कारण बनने की संभावना है।

दिल्ली की प्रशासन पद्धति:

वर्ष 1991 में संविधान (उनहत्तरवां संशोधन) अधिनियम, 1991 के द्वारा संविधान में अनुच्छेद 239AA को जोड़ा गया था, इसके तहत एक विधायिका सहित केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली का गठन किया गया था।

मौजूदा अधिनियम के अनुसार, दिल्ली विधान सभा को लोक व्यवस्था, पुलिस और भूमि को छोड़कर सभी मामलों में कानून बनाने की शक्ति प्राप्त है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अनुच्छेद 239A बनाम 239AA
  2. दिल्ली सरकार बनाम उपराज्यपाल की शक्तियाँ
  3. दिल्ली का प्रशासन, विधायिका वाले अन्य राज्यों के प्रशासन से किस प्रकार भिन्न है?
  4. दिल्ली को विधायिका कब प्रदान की गयी?
  5. दिल्ली उपराज्यपाल की नियुक्ति किस प्रकार की जाती है?

मेंस लिंक:

संविधान (उनहत्तरवां संशोधन) अधिनियम, 1991 पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

करेन विद्रोही


(Karen rebels)

संदर्भ:

म्यांमार में फ़रवरी 1 को हुए तख्तापलट के पश्चात, जातीय अल्पसंख्यक करेन विद्रोहियों द्वारा म्यांमार सेना की चौकियों की कुछ हमले किये गए, जिसके बाद म्यांमार सेना ने थाई सीमा के नजदीक स्थित एक गाँव और सीमांत बस्ती पर हवाई हमले शुरू कर दिए हैं।

‘करेन नेशनल यूनियन’ (Karen National Union- KNU), म्यांमार का सबसे पुराना विद्रोही समूह है, इसने कहा है कि उसके लड़ाकों ने साल्वीन नदी के पश्चिमी तट पर सेना के कैंप पर कब्ज़ा कर लिया है।

KNU कौन हैं?

  • ‘करेन नेशनल यूनियन’ (KNU) एक प्रमुख राजनीतिक संगठन है, जो थाईलैंड की सीमा पर स्थित करेन, अथवा कायिन (Kayin) राज्य में बसने वाले जातीय अल्पसंख्यक करेन समुदायों का प्रतिनिधित्व करता है।
  • इसका लक्ष्य, जिन राज्यों में करेन समुदाय के लोग बहुसंख्यक है, उनमे आत्म-निर्णय (self-determination) का अधिकार हासिल करना है। करेन समुदाय के लोगों की आबादी लगभग 6 मिलियन हैं, जो मोटे तौर पर बेल्जियम की आबादी के बराबर है।

‘करेन संघर्ष’ का इतिहास:

तत्कालीन बर्मा की आजादी के बाद की राजनीतिक प्रक्रिया में ‘करेन समुदाय’ हाशिए पर चला गया था। इसके बाद, वर्ष 1949 में ‘करेन नेशनल यूनियन’ (KNU) द्वारा एक विद्रोह शुरू किया गया, जो लगभग 70 वर्षों तक जारी रहा।

  • म्यांमार के राज्य और सेना में बहुसंख्यक बामर समुदाय का वर्चस्व, इसकी इसकी प्रमुख शिकायतों में से एक है।
  • इस संघर्ष को, विश्व में सबसे लंबे समय तक जारी रहने वाले गृहयुद्धों में से एक के रूप में वर्णित किया जाता है।

इनकी प्रमुख मांग:

करेन राष्ट्रवादी, वर्ष 1949 से कावथोली (Kawthoolei) नामक एक स्वतंत्र राज्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. करेन कौन हैं?
  2. इनके संघर्ष का कारण
  3. कावथोली क्या है?

 स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

 नेट ज़ीरो उत्पादक मंच


(Net Zero Producers’ Forum)

संदर्भ:

कतर, अमेरिका, सऊदी अरब, कनाडा और नॉर्वे द्वारा सम्मिलित रूप से एक ‘सहकारी मंच’ (कोआपरेटिव फोरम) का निर्माण किया जा रहा है, यह मंच नेट ज़ीरो उत्सर्जन हेतु व्यावहारिक रणनीतियों का विकास करेगा।

ये देश सामूहिक रूप से, 40% वैश्विक तेल और गैस उत्पादन के लिए जिम्मेदार हैं।

‘नेट ज़ीरो उत्पादक मंच’ की भूमिका एवं कार्य:

नेट ज़ीरो प्रोड्यूसर्स फोरम, “मीथेन के न्यूनीकरण (methane abatement), सर्कुलर कार्बन इकोनॉमी दृष्टिकोण को बढ़ावा देने, स्वच्छ-ऊर्जा, कार्बन कैप्चर और भंडारण हेतु प्रौद्योगिकियों का विकास एवं इन्हें लागू करने, हाइड्रोकार्बन राजस्व पर निर्भरता में परिवर्तन, तथा हर देश की राष्ट्रीय परिस्थितियों के हिसाब से अन्य उपायों को शामिल करने वाली” रणनीतियों और तकनीकों पर विचार करेगा।

‘नेट-ज़ीरो’ क्या है?

‘नेट-ज़ीरो’  (Net-Zero), जिसे ‘कार्बन-तटस्थता’ (carbon-neutrality) भी कहा जाता है, का मतलब यह नहीं है, कि कोई देश अपने सकल उत्सर्जन को शून्य तक ले जाएगा। बल्कि, ‘नेट-ज़ीरो’  एक ऐसी स्थिति होती है, जिसमें किसी देश के उत्सर्जन को, ‘वायुमंडल से ग्रीनहाउस गैसों के अवशोषण तथा निराकरण’ के द्वारा क्षतिपूरित (compensated) किया जाता है।

उत्सर्जन के अवशोषण में वृद्धि करने हेतु अधिक संख्या में कार्बन सिंक, जैसे कि जंगल, तैयार किये जा सकते हैं, जबकि वायुमंडल से गैसों का निराकरण करने अथवा निष्कासित करने के लिए कार्बन कैप्चर और भंडारण जैसी अत्याधुनिक तकनीकों की आवश्यकता होती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘नेट ज़ीरो प्रोड्यूसर्स फोरम’ के बारे में।
  2. ‘जलवायु नेताओं’ के शिखर सम्मेलन के बारे में।
  3. नेट-ज़ीरो क्या है?
  4. नेट-ज़ीरो के लिए प्रतिबद्ध देश।
  5. पेरिस समझौते के बारे में।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


तियान्हे मॉड्यूल

(Tianhe module)

यह चीन द्वारा बनाए जाने वाले अपने निजी ‘अंतरिक्ष स्टेशन’ का पहला मॉड्यूल है।

  • यह कोर मॉड्यूल, वर्तमान में चीन द्वारा विकसित सबसे बड़ा अंतरिक्ष यान है, जिसे ‘लॉन्ग मार्च -5बी’ (Long March-5B rocket) रॉकेट द्वारा पृथ्वी की निचली कक्षा में लॉन्च किया गया है। यह, दो वर्षों में अपने निजी अंतरिक्ष स्टेशन का निर्माण करने की दिशा में चीन के प्रयासों का पहले चरण है।
  • तियान्हे मॉड्यूल, तियांगॉन्ग (Tiangong) स्पेस स्टेशन के प्रबंधन और नियंत्रण केंद्र के रूप में कार्य करेगा।

विश्व का प्राचीनतम पानी

(World’s Oldest Water)

कनाडा में ‘विश्व के सबसे प्राचीन पानी’ की खोज गयी है, इससे ‘जीवन की शुरुआत’ पर कुछ प्रकाश पड़ेगा।

  • वर्ष 2019 में, टोरंटो विश्वविद्यालय की एक भूविज्ञानी और पृथ्वी विज्ञान प्रोफेसर डॉ. बारबरा शेरवुड लोलर को ‘दुनिया के सबसे पुराने पानी की खोज’ करने के लिए, 1 मिलियन डॉलर का गेरहार्ड हर्ज़बर्ग कनाडा गोल्ड मेडल फॉर साइंस एंड इंजीनियरिंग (Gerhard Herzberg Canada Gold Medal for Science and Engineering) का शीर्ष विज्ञान पुरस्कार प्रदान किया गया है।
  • यह पानी, कनाडा की ‘किड क्रीक माइन’ (Kidd Creek Mine) में 4 किलोमीटर की गहराई पर पाया गया था।
  • यह पानी अत्यधिक खारा है तथा समुद्री जल की तुलना में दस गुना अधिक नमकीन है।

MACS 1407

  • एमएसीएस 1407, भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा विकसित सोयाबीन की एक अधिक उपज देने वाली और कीट प्रतिरोधी किस्म है।
  • यह नई विकसित किस्म असम, पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पूर्वोत्तर राज्यों में खेती के लिए उपयुक्त है।
  • नई किस्म को एमएसीएस – अगरकर रिसर्च इंस्टीट्यूट [MACS – Agharkar Research Institute (ARI)], पुणे के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित किया गया है।
  • एमएसीएस 1407 को पारंपरिक क्रॉस ब्रीडिंग तकनीक का उपयोग करके को विकसित किया गया है।
  • इसका मोटा तना, जमीन से ऊपर (7 सेमी) फली आना और फली बिखरने का प्रतिरोधी होना, इसे यांत्रिक कटाई के लिए भी उपयुक्त बनाता है।
  • यह पूर्वोत्तर भारत की वर्षा आधारित परिस्थितियों के लिए उपयुक्त है।

ब्रिटेन, स्व-चालक वाहनों के उपयोग हेतु नियम-निर्धारण करने वाला पहला देश

ब्रिटेन, मोटरमार्गों पर धीमी गति से स्व-चालक (self-driving) वाहनों का उपयोग करने संबंधी नियम-निर्धारण करने वाला पहला देश बन गया है।

  • सरकार द्वारा एक ‘आटोमेटिक लेन कीपिंग सिस्टम’ (ALKS) शुरू किया जाएगा – जिसमे कारों को एक लेन में रखने के लिए सेंसर और सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जाएगा, जिससे स्व-चालक कारें, ड्राईवर के निर्देशों के बगैर, गति तेज कर सकती है, तथा ब्रेक लगा सकती है।
  • उन्हें चालक इनपुट के बिना तेजी और ब्रेक लगाने की अनुमति मिलती है।
  • ALKS का उपयोग मोटरमार्गों तक ही सीमित होगा, और इसकी अधिकतम गति 60 किमी प्रति घंटा होगी।

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