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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 28 April 2021

 

विषयसूची

 सामान्य अध्ययन-II

1. संविधान का अनुच्छेद 223

2. आपूर्ति श्रृंखला बेहतर बनाने संबंधी पहल (SCRI)

3. ‘वैश्विक सैन्य-व्यय के रुझान’ पर रिपोर्ट

4. ह्यूमन राइट्स वॉच

 

सामान्य अध्ययन-III

1. वृहत क्षेत्र प्रमाणीकरण योजना

2. ‘पायरासोल’ परियोजना

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: विभिन्न संवैधानिक पदों पर नियुक्ति और विभिन्न संवैधानिक निकायों की शक्तियाँ, कार्य और उत्तरदायित्व।

संविधान का अनुच्छेद 223


(Article 223 of the Constitution)

संदर्भ:

भारत के राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 223 में निहित अधिकारों का प्रयोग करते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायमूर्ति श्री राजेश बिंदल को कलकत्ता उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया है।

अनुच्छेद 223 के बारे में:

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति”

किसी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूार्ति का पद रिक्त होने की स्थिति में, अथवा जब मुख्य न्यायमूार्ति, अनुपस्थिति या अन्य किसी कारणवश अपने पद के कर्तव्यों का निर्वहन करने में असमर्थ होते है, तब राष्ट्रपति द्वारा, न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों में से, इस प्रयोजन के लिए नियुक्त न्यायाधीश, उस पद के कर्तव्यों का निर्वहन करेगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अनुच्छेद 223 किससे संबंधित है?
  2. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति प्रक्रिया।
  3. शक्तियाँ और कार्य।

मेंस लिंक:

उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करते समय अपनाई जाने वाली प्रक्रिया पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

आपूर्ति श्रृंखला बेहतर बनाने संबंधी पहल (SCRI)


(Supply Chain Resilience Initiative)

संदर्भ:

हाल ही में, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के व्यापार मंत्रियों द्वारा औपचारिक रूप से आयोजित त्रिपक्षीय मंत्रिस्तरीय बैठक में ‘आपूर्ति श्रृंखला बेहतर बनाने संबंधी पहल’ (Supply Chain Resilience InitiativeSCRI) की औपचारिक शुरुआत की गई है।

SCRI के बारे में:

  • ‘आपूर्ति श्रृंखला बेहतर बनाने संबंधी पहल’ (SCRI) का लक्ष्य इस क्षेत्र में अंततः मजबूत, स्थायी, संतुलित और समावेशी विकास हासिल करने की दृष्टि से आपूर्ति श्रृंखला में वृद्धि करने हेतु एक कुशल चक्र का निर्माण करना है।
  • SCRI के तहत, शुरुआत में, आपूर्ति श्रृंखला की प्रत्यास्थता संबंधी सर्वोत्तम पद्धतियों को साझा को साझा करने, निवेश-प्रोत्साहन करने वाले कार्यक्रमों तथा हितधारकों को अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं के विविधता की संभावना का पता लगाने का अवसर प्रदान करने हेतु क्रेता-विक्रेता सम्मलेन कार्यक्रमों का आयोजन करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

इस पहल के अंतर्गत संभावित नीतिगत उपाय:

  1. डिजिटल प्रौद्योगिकी के संवर्धित उपयोग का समर्थन करना और
  2. व्यापार और निवेश के विविधीकरण पर जोर देना।

महत्व:

  • ‘आपूर्ति श्रृंखला बेहतर बनाने संबंधी पहल’ का उद्देश्य, कोविड -19 महामारी के दौरान इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आपूर्ति श्रृंखला को फिर से शुरू करने की संभावनाओं के बीच चीन पर निर्भरता में कमी करना है।
  • इसका उद्देश्य, आसियान-जापान आर्थिक सुनम्य कार्य योजना (Asean-Japan Economic Resilience Action Plan) और भारत-जापान औद्योगिक प्रतिस्पर्धा भागीदारी (India-Japan Industrial Competitiveness Partnership) जैसी मौजूदा द्विपक्षीय फ्रेमवर्क का निर्माण करना और इस क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को आकर्षित करना है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘आपूर्ति श्रृंखला बेहतर बनाने संबंधी पहल’ के बारे में
  2. प्रतिभागी
  3. उद्देश्य

मेंस लिंक:

‘आपूर्ति श्रृंखला बेहतर बनाने संबंधी पहल’ के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

 ‘वैश्विक सैन्य-व्यय के रुझान’ पर रिपोर्ट


(Report on trends in global military expenditure)

संदर्भ:

आल ही में, ‘स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट’ (SIPRI)  द्वारा वर्ष 2020 में वैश्विक सैन्य व्यय के रुझानों पर एक रिपोर्ट जारी की गई है।

प्रमुख निष्कर्ष:

  1. वर्ष 2020 में, सबसे बड़े पाँच सैन्य व्यय-कर्ता क्रमशः संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, भारत, रूस और यूनाइटेड किंगडम थे। कुल वैश्विक सैन्य व्यय का 62 % संयुक्त रूप से इन देशों द्वारा किया गया।
  2. विश्व के शीर्ष सैन्य व्यय-कर्ताओं द्वारा, महामारी के दौरान भी, वर्ष 2019 की तुलना में अधिक सैन्य-व्यय किया गया।
  3. वर्ष 2020 में, अमेरिका द्वारा कुल $ 778 बिलियन, चीन द्वारा $ 252 बिलियन और भारत द्वारा  72.9 बिलियन डॉलर का सैन्य-व्यय किया गया।
  4. कुल मिलाकर, पिछले वर्ष वैश्विक सैन्य-व्यय बढ़कर 1981 बिलियन डॉलर हो गया, जोकि वर्ष 2019 के सैन्य-व्यय से 2.6 प्रतिशत अधिक है।

SIPRI के बारे में:

स्वीडन स्थित, स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI), युद्ध तथा संघर्ष, युद्धक सामग्रियों, हथियार नियंत्रण तथा निरस्त्रीकरण के क्षेत्र में अनुसंधान के लिए समर्पित एक स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय संस्थान है।

  • वर्ष 1966 में, स्वीडिश संसद के एक निर्णय के आधार पर इसकी स्थापना की गई थी, तथा इसके लिए स्वीडिश सरकार से वार्षिक अनुदान के रूप में, इसकी कुल निधि का एक बड़ा हिस्सा प्राप्त होता है।
  • यह संस्था नीति निर्माताओं, शोधकर्त्ताओं, मीडिया और इच्छुक लोगों को आँकड़ों का विश्लेषण और सुझाव उपलब्ध कराती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. SIPRI के बारे में
  2. रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष
  3. रिपोर्ट में भारत का सैन्य-व्यय विश्लेषण

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय:महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

‘ह्यूमन राइट्स वॉच’


(Human Rights Watch)

संदर्भ:

हाल ही में, एक अंतर्राष्ट्रीय NGO ‘ह्यूमन राइट्स वॉच’ ने कहा है, कि इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों और अपनी अरब आबादी पर “यहूदी वर्चस्व” बनाए रखने के उद्देश्य से “रंगभेद” (Apartheid) संबंधी अपराध किये जा रहे हैं।

  1. ‘ह्यूमन राइट्स वॉच’ ने आवागमन पर प्रतिबंध, भूमि की जब्ती करने, जबरन जनसंख्या-स्थानांतरण, निवास अधिकारों से वंचित करने और नागरिक अधिकारों के स्थगन सहित कई कार्रवाईयों की ओर इशारा किया है।
  2. इसकी रिपोर्ट में पाया गया है कि जॉर्डन नदी और भूमध्य सागर के बीच के क्षेत्र पर एकमात्र इजरायल सरकार का नियंत्रण है।

इजरायल की प्रतिक्रिया:

इजराइल ने ‘ह्यूमन राइट्स वॉच’ (HRW) के आरोपों को ‘निरर्थक और मिथ्या’ कहते हुए खारिज कर दिया है, इस पर काफी लम्बे समय से ‘इजराइल-विरोधी एजेंडा’ चलाने का आरोप लगाया है। ज्ञातव्य हो, कि वर्तमान में, इजराइल पर लगे कथित युद्ध अपराधों के आरोपों की जांच अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) द्वारा की जा रही है।

‘ह्यूमन राइट्स वॉच’ (HRW) के बारे में:

  • वर्ष 1978 में स्थापित, यह एक गैर-सरकारी संगठन है। इसका मुख्यालय न्यूयॉर्क शहर में है और यह मानव अधिकारों के संबंध में अनुसंधान और इनका समर्थन करता है।
  • यह समूह, विभिन्न सरकारों, नीति निर्माताओं, कंपनियों और निजी तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन करने वालों पर मानवाधिकारों का सम्मान करने के लिए दबाव डालता है, और यह समूह अक्सर. शरणार्थियों, बच्चों, प्रवासियों और राजनीतिक कैदियों के प्रतिनिधि के तौर पर कार्य करता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘ह्यूमन राइट्स वॉच’ (HRW) के बारे में
  2. कार्य
  3. उद्देश्य

मेंस लिंक:

इज़राइल – फिलिस्तीन संघर्ष पर टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: मुख्य फसलें- देश के विभिन्न भागों में फसलों का पैटर्न- सिंचाई के विभिन्न प्रकार एवं सिंचाई प्रणाली- कृषि उत्पाद का भंडारण, परिवहन तथा विपणन, संबंधित विषय और बाधाएँ; किसानों की सहायता के लिये ई-प्रौद्योगिकी।

वृहत क्षेत्र प्रमाणीकरण योजना


(‘Large Area Certification’ scheme)

संदर्भ:

केंद्र शासित प्रदेश अंडमान और निकोबार के 14,491 हेक्टेयर एरिया, व्यापक क्षेत्र प्रमाणीकरण योजना अर्थात ‘लार्ज एरिया सर्टिफिकेशन’ स्कीम के तहत ‘जैविक प्रमाणीकरण’ हासिल करने वाला पहला वृहत संस्पर्शी क्षेत्र (large contiguous territory) बन गया गया है।

‘वृहत क्षेत्र प्रमाणीकरण योजना’ के बारे में:

  • ‘कृषि और किसान कल्याण विभाग’ द्वारा अपनी प्रमुख योजना ‘परंपरागत कृषि विकास योजना’ (PKVY) के तहत इन संभावित क्षेत्रों का इस्तेमाल करने के लिए एक अनूठा त्वरित प्रमाणन कार्यक्रम ‘वृहत क्षेत्र प्रमाणीकरण’ अर्थात “लार्ज एरिया सर्टिफिकेशन” (LAC) शुरू किया गया है।
  • LAC के तहत, क्षेत्र के प्रत्येक गांव को एक क्लस्टर/ग्रुप के रूप में माना जाता है।
  • अपने निजी खेत और पशुधन रखने वाले सभी किसानों को मानक आवश्यकताओं का पालन करना होता है और प्रमाणित होने के बाद उन्हें परिवर्तन अवधि तक इंतजार नहीं करना होता है।
  • PGS -इंडिया के अनुसार मूल्यांकन की एक प्रक्रिया द्वारा वार्षिक सत्यापन के माध्यम से वार्षिक आधार पर प्रमाणन का नवीनीकरण किया जाता है।

‘वृहत क्षेत्र प्रमाणीकरण’ (LAC) के लाभ:

  1. जैविक उत्पादन के मानक नियम के तहत, रासायनिक इस्तेमाल वाले क्षेत्रों को जैविक के रूप में अर्हता प्राप्त करने के लिए न्यूनतम 2-3 वर्षों का समय लगता है।
  2. इस अवधि के दौरान, किसानों को मानक जैविक कृषि मानकों को अपनाने और प्रमाणन प्रक्रिया के तहत अपने खेतों को रख-रखाव करना होता है। सफलता पूर्वक समापन होने पर, ऐसे खेतों को 2-3 वर्षों के बाद जैविक के रूप में प्रमाणित किया जा सकता है।
  3. प्रमाणन प्रक्रिया को प्रमाणीकरण अधिकारियों द्वारा विस्तृत डोक्यूमेंटेशन और समय-समय पर सत्यापन की भी आवश्यकता होती है।
  4. LAC के तहत आवश्यक प्रकिया काफी सरल होती है और क्षेत्र को लगभग तुरंत प्रमाणित किया जा सकता है।

प्रीलिम्स और मेंस लिंक:

योजना की प्रमुख विशेषताएं और महत्व।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

‘पायरासोल’ परियोजना


(Project ‘Pyrasol’)

संदर्भ:

हाल ही में, चेन्नई में, एकीकृत सौर ड्रायर और पायरोलिसिस पायलट (Integrated Solar Dryer and Pyrolysis pilot) प्लांट की आधारशिला रखी गई।

  • यह पायलट इंडो-जर्मन परियोजना ‘पायरासोल’ का हिस्सा है, जिसका शुभारंभ स्मार्ट शहरों के शहरी जैविक कचरे को बायोचार और ऊर्जा में बदलने के लिए किया गया है।
  • यह ‘पायरासोल’ प्रोजेक्ट, इंडो-जर्मन साइंस एंड टेक्नोलॉजी सेंटर द्वारा सीएसआईआर-सीएलआरआई को प्रदान किया गया था।
  • यह परियोजना अंततः भारतीय स्मार्ट शहरों के ‘फैब्रीस ऑर्गेनिक वेस्ट’ (FOW) और ‘सीवेज स्लज’ (SS) के संयुक्त प्रसंस्करण के लिए प्रौद्योगिकी विकास के साथ-साथ ऊर्जा रिकवरी, कार्बन अनुक्रमीकरण और पर्यावरण सुधार से संबंधित अत्यधिक उपयोगी बायोचार और स्वच्छतापूर्ण व्यवस्था को बढ़ावा देगी।

‘पायरासोल’ प्रोजेक्ट के बारे में:

यह परियोजना भारतीय स्मार्ट शहरों के साथ-साथ अन्य शहरी केंद्रों में एकीकृत और संवादात्मक दृष्टिकोण के साथ शहरी कचरे के संग्रह, उपचार और निपटान प्रणालियों के प्रबंधन और आयोजन पर केन्द्रित है।

इंडो-जर्मन साइंस एंड टेक्नोलॉजी सेंटर (IGSTC) के बारे में:

इंडो-जर्मन साइंस एंड टेक्नोलॉजी सेंटर (IGSTC) की स्थापना भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) और जर्मन सरकार द्वारा की गई थी।

  • इसका उद्देश्य भारत-जर्मन की अनुसंधान और प्रौद्योगिकी नेटवर्किंग का उपयोग करते हुए अनुप्रयुक्त अनुसंधान और प्रौद्योगिकी विकास एवं उद्योग में भागीदारी की सुविधा प्रदान करने पर जोर देना है।
  • IGSTC अपने प्रमुख कार्यक्रम ‘2+2 परियोजनाओं’ के माध्यम से, भारत और जर्मनी से अनुसंधान और अकादमिक संस्थानों एवं सार्वजनिक/निजी उद्योगों की क्षमता को समन्वित करके नवाचार केंद्रित अनुसंधान और विकास परियोजनाओं को उत्प्रेरित करता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘2 + 2 परियोजना’ कार्यक्रम के बारे में
  2. इंडो-जर्मन साइंस एंड टेक्नोलॉजी सेंटर (IGSTC) के बारे में।
  3. प्रोजेक्ट ‘पायरासोल’

स्रोत: पीआईबी


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