HINDI INSIGHTS STATIC QUIZ 2020-2021
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Question 1 of 5
1. Question
कई बैक्टीरिया के बहु-दवा प्रतिरोधी (MDR) स्ट्रेन के खिलाफ संभावित थेरेपी के रूप में बैक्टिरियोफेज को क्यों देखा जाता है?
- ये सर्वव्यापी वायरस हैं, जहाँ कहीं भी बैक्टीरिया मौजूद होते हैं वहां ये मौजूद होते हैं और बैक्टीरिया को मार सकते हैं।
- इनमें कोई RNA या DNA नहीं होता है और इस तरह यह बैक्टीरिया से संक्रमित नहीं हो सकते हैं।
सही उत्तर कूट का चयन कीजिए:
Correct
उत्तर: a)
एक बैक्टीरियोफेज एक प्रकार का वायरस है जो बैक्टीरिया को संक्रमित करता है। वास्तव में, “बैक्टीरियोफेज” शब्द का शाब्दिक अर्थ “बैक्टीरिया खाने वाला” है, क्योंकि बैक्टीरियोफेज अपने मेजबान कोशिकाओं को नष्ट कर देते हैं। सभी बैक्टीरियोफेज एक न्यूक्लिक एसिड अणु से बने होते हैं जो प्रोटीन संरचना से घिरा होता है। दूसरे शब्दों में, वे एक RNA या DNA जीनोम के आसपास प्रोटीन से युक्त होते हैं।
Incorrect
उत्तर: a)
एक बैक्टीरियोफेज एक प्रकार का वायरस है जो बैक्टीरिया को संक्रमित करता है। वास्तव में, “बैक्टीरियोफेज” शब्द का शाब्दिक अर्थ “बैक्टीरिया खाने वाला” है, क्योंकि बैक्टीरियोफेज अपने मेजबान कोशिकाओं को नष्ट कर देते हैं। सभी बैक्टीरियोफेज एक न्यूक्लिक एसिड अणु से बने होते हैं जो प्रोटीन संरचना से घिरा होता है। दूसरे शब्दों में, वे एक RNA या DNA जीनोम के आसपास प्रोटीन से युक्त होते हैं।
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Question 2 of 5
2. Question
CRISPR-Cas9 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- CRISPR तकनीक द्वारा डीएनए अनुक्रमों को आसानी से परिवर्तित और जीन फ़ंक्शन को संशोधित किया जा सकता है।
- इसका उपयोग सिकल सेल एनीमिया, एक आनुवंशिक रक्त विकार के उपचार के लिए किया जा सकता है।
- जीन एडिटिंग सिस्टम जीवों में प्राकृतिक रूप से मौजूद नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: a)
भारतीय वैज्ञानिकों ने वर्तमान में लोकप्रिय जीन एडिटिंग उपकरण, CRISPR-Cas9 (Clustered regularly interspaced short palindromic repeats and CRISPR-associated protein 9) का एक नया संस्करण विकसित किया है, और यह दिखाया है कि यह संस्करण डीएनए में अनपेक्षित परिवर्तनों से बचने के लिए एडिटिंग जीनोम में परिशुद्धता को बढ़ा सकता है।
शोधकर्ताओं ने यह भी दिखाया है कि इस प्रकार की जीन एडिटिंग का उपयोग सिकल सेल एनीमिया, एक आनुवंशिक रक्त विकार के उपचार के लिए किया जा सकता है।
प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले जीन एडिटिंग सिस्टम – CRISPR-Cas9 – बैक्टीरिया में पाया जाता है, जिसे पुन: तैयार करने और उपयोग करने के लिए विश्वभर के वैज्ञानिक विभिन्न जीवों के ‘एडिटिंग’ जीनोम के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। इस प्रोटीन को जीनोम में एक वांछित स्थान स्थापित करने और डीएनए के दोषपूर्ण स्ट्रैंड (जैसे कि कुछ बीमारियों में होते हैं) को ठीक करने के लिए प्रोग्राम किया जा सकता है।
यह तकनीक, जब पूर्ण होगी, तो इसका उपयोग कई आनुवंशिक विकारों के उपचार के लिए किया जा सकेगा।
Incorrect
उत्तर: a)
भारतीय वैज्ञानिकों ने वर्तमान में लोकप्रिय जीन एडिटिंग उपकरण, CRISPR-Cas9 (Clustered regularly interspaced short palindromic repeats and CRISPR-associated protein 9) का एक नया संस्करण विकसित किया है, और यह दिखाया है कि यह संस्करण डीएनए में अनपेक्षित परिवर्तनों से बचने के लिए एडिटिंग जीनोम में परिशुद्धता को बढ़ा सकता है।
शोधकर्ताओं ने यह भी दिखाया है कि इस प्रकार की जीन एडिटिंग का उपयोग सिकल सेल एनीमिया, एक आनुवंशिक रक्त विकार के उपचार के लिए किया जा सकता है।
प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले जीन एडिटिंग सिस्टम – CRISPR-Cas9 – बैक्टीरिया में पाया जाता है, जिसे पुन: तैयार करने और उपयोग करने के लिए विश्वभर के वैज्ञानिक विभिन्न जीवों के ‘एडिटिंग’ जीनोम के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। इस प्रोटीन को जीनोम में एक वांछित स्थान स्थापित करने और डीएनए के दोषपूर्ण स्ट्रैंड (जैसे कि कुछ बीमारियों में होते हैं) को ठीक करने के लिए प्रोग्राम किया जा सकता है।
यह तकनीक, जब पूर्ण होगी, तो इसका उपयोग कई आनुवंशिक विकारों के उपचार के लिए किया जा सकेगा।
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Question 3 of 5
3. Question
डीएनए प्रोफाइलिंग का प्रयोग निम्नलिखित में से किस क्षेत्र में किया जाता है?
- आपराधिक जांच
- पेरेंटेज परीक्षण
- वंशावली सम्बन्धी अनुसंधान
- जानवरों और पौधों की आबादी का अध्ययन
सही उत्तर कूट का चयन कीजिए:
Correct
उत्तर: d)
डीएनए प्रोफाइलिंग (जिसे डीएनए फिंगरप्रिंटिंग भी कहा जाता है) किसी व्यक्ति की डीएनए विशेषताओं को निर्धारित करने की प्रक्रिया है।
आपराधिक जांच में डीएनए प्रोफाइलिंग एक फॉरेंसिक तकनीक है, जिसमें आपराधिक संदिग्धों के प्रोफाइल की डीएनए साक्ष्यों से तुलना की जाती है ताकि अपराध में उनकी संलिप्तता की संभावना का आकलन किया जा सके। इसका उपयोग पेरेंटेज परीक्षण, आव्रजन पात्रता स्थापित करने और वंशावली एवं चिकित्सा
सम्बन्धी अनुसंधान में भी किया जाता है। प्राणी विज्ञान, वनस्पति विज्ञान और कृषि के क्षेत्र में जानवरों और पौधों की आबादी के अध्ययन में भी डीएनए प्रोफाइलिंग का उपयोग किया गया है।
Incorrect
उत्तर: d)
डीएनए प्रोफाइलिंग (जिसे डीएनए फिंगरप्रिंटिंग भी कहा जाता है) किसी व्यक्ति की डीएनए विशेषताओं को निर्धारित करने की प्रक्रिया है।
आपराधिक जांच में डीएनए प्रोफाइलिंग एक फॉरेंसिक तकनीक है, जिसमें आपराधिक संदिग्धों के प्रोफाइल की डीएनए साक्ष्यों से तुलना की जाती है ताकि अपराध में उनकी संलिप्तता की संभावना का आकलन किया जा सके। इसका उपयोग पेरेंटेज परीक्षण, आव्रजन पात्रता स्थापित करने और वंशावली एवं चिकित्सा
सम्बन्धी अनुसंधान में भी किया जाता है। प्राणी विज्ञान, वनस्पति विज्ञान और कृषि के क्षेत्र में जानवरों और पौधों की आबादी के अध्ययन में भी डीएनए प्रोफाइलिंग का उपयोग किया गया है।
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Question 4 of 5
4. Question
निम्नलिखित में से किसे एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध (antimicrobial resistance) के मुख्य चालक के रूप में माना जाता है?
- रोगाणुरोधी का दुरुपयोग और अति प्रयोग
- पशुओं के लिए स्वच्छ जल और स्वच्छता तक पहुंच का अभाव
- स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं में निम्न स्तरीय संक्रमण और बीमारी की रोकथाम की व्यवस्था
सही उत्तर कूट का चयन कीजिए:
Correct
उत्तर: d)
एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध (antimicrobial resistance: AMR) समय साथ के आमतौर पर आनुवंशिक परिवर्तनों के माध्यम से स्वाभाविक रूप से होता है। रोगाणुरोधी प्रतिरोधी जीव लोगों, जानवरों, भोजन, पौधों और पर्यावरण (पानी, मृदा और वायु में) में पाए जाते हैं। वे पशु मूल के भोजन से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति या लोगों और जानवरों के बीच संचरित हो सकते हैं। रोगाणुरोधी प्रतिरोध के मुख्य चालकों में रोगाणुरोधी के दुरुपयोग और अति प्रयोग; मनुष्यों और जानवरों दोनों के लिए स्वच्छ जल, सफाई एवं स्वच्छता (WASH) तक पहुंच का अभाव; स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं और खेतों में निम्न स्तरीय संक्रमण और बीमारी की रोकथाम एवं नियंत्रण की व्यवस्था; गुणवत्ता, सस्ती दवाओं, टीकों और डायग्नोस्टिक्स की खराब पहुंच; जागरूकता और ज्ञान की कमी; और कानून के प्रवर्तन का अभाव शामिल हैं।
Incorrect
उत्तर: d)
एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध (antimicrobial resistance: AMR) समय साथ के आमतौर पर आनुवंशिक परिवर्तनों के माध्यम से स्वाभाविक रूप से होता है। रोगाणुरोधी प्रतिरोधी जीव लोगों, जानवरों, भोजन, पौधों और पर्यावरण (पानी, मृदा और वायु में) में पाए जाते हैं। वे पशु मूल के भोजन से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति या लोगों और जानवरों के बीच संचरित हो सकते हैं। रोगाणुरोधी प्रतिरोध के मुख्य चालकों में रोगाणुरोधी के दुरुपयोग और अति प्रयोग; मनुष्यों और जानवरों दोनों के लिए स्वच्छ जल, सफाई एवं स्वच्छता (WASH) तक पहुंच का अभाव; स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं और खेतों में निम्न स्तरीय संक्रमण और बीमारी की रोकथाम एवं नियंत्रण की व्यवस्था; गुणवत्ता, सस्ती दवाओं, टीकों और डायग्नोस्टिक्स की खराब पहुंच; जागरूकता और ज्ञान की कमी; और कानून के प्रवर्तन का अभाव शामिल हैं।
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Question 5 of 5
5. Question
ग्राफीन (Graphene) की कौन-सी विशेषताएँ वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के लिए इसे विशेष बनाती हैं?
- यह एक परमाणु के समान मोटा होता है।
- यह उच्च चालकता वाली कार्बन पदार्थ है।
- यह अब तक की सबसे मजबूत पदार्थ है।
- यह अत्यधिक अपारदर्शी होता है।
सही उत्तर कूट का चयन कीजिए:
Correct
उत्तर: a)
ग्राफीन कार्बन का एक अलॉट्रोप (रूप) है जिसमें एक हेक्सागोनल जालक में व्यवस्थित कार्बन परमाणुओं की एक परत होती है। यह लगभग पारदर्शी होता है।
यह कार्बन के कई अन्य अलॉट्रोप का मूल संरचनात्मक तत्व है, जैसे कि ग्रेफाइट, चारकोल, कार्बन नैनोट्यूब और फुलरीन।
इसकी पतली रचना और उच्च चालकता का मतलब है कि इसका उपयोग सूक्ष्म इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर बायोमेडिकल डिवाइसों तक में किया जाता है।
इस] गुण के कारण सूक्ष्म वायर कनेक्शन भी निर्मित किये जा सकते हैं; जैसे कंप्यूटर, सौर पैनल, बैटरी, सेंसर और अन्य उपकरण।
कार्बन की एक-परमाणु के समान मोटी चादरें सिलिकॉन से बेहतर इलेक्ट्रॉनों का संचालन करती हैं और उन्हें तेज, लो-पॉवर ट्रांजिस्टर के रूप में विकसित किया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने पुष्टि की है कि ग्राफीन अब तक का सबसे मजबूत पदार्थ है।
Incorrect
उत्तर: a)
ग्राफीन कार्बन का एक अलॉट्रोप (रूप) है जिसमें एक हेक्सागोनल जालक में व्यवस्थित कार्बन परमाणुओं की एक परत होती है। यह लगभग पारदर्शी होता है।
यह कार्बन के कई अन्य अलॉट्रोप का मूल संरचनात्मक तत्व है, जैसे कि ग्रेफाइट, चारकोल, कार्बन नैनोट्यूब और फुलरीन।
इसकी पतली रचना और उच्च चालकता का मतलब है कि इसका उपयोग सूक्ष्म इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर बायोमेडिकल डिवाइसों तक में किया जाता है।
इस] गुण के कारण सूक्ष्म वायर कनेक्शन भी निर्मित किये जा सकते हैं; जैसे कंप्यूटर, सौर पैनल, बैटरी, सेंसर और अन्य उपकरण।
कार्बन की एक-परमाणु के समान मोटी चादरें सिलिकॉन से बेहतर इलेक्ट्रॉनों का संचालन करती हैं और उन्हें तेज, लो-पॉवर ट्रांजिस्टर के रूप में विकसित किया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने पुष्टि की है कि ग्राफीन अब तक का सबसे मजबूत पदार्थ है।
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