Print Friendly, PDF & Email

INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 23 April 2021

 

विषयसूची

 सामान्य अध्ययन-I

1. भारत में विज्ञापनों में लैंगिक पक्षपात और समावेशन

2. अर्मेनियाई नरसंहार

 

सामान्य अध्ययन-II

1. स्वाइन फीवर

2. ‘कोडेक्स कमेटी ऑन स्पाइसेस एंड कलिनरी हर्ब्स’ का पाँचवाँ सत्र

 

सामान्य अध्ययन-III

1. नासा के परसिवरेंस मिशन द्वारा मंगल पर ऑक्सीजन का निष्कर्षण

2. पृथ्वी दिवस 2021

3. ‘व्हाट्सएप की निजता नीति’

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. # FOSS4GOV इनोवेशन चैलेंज

2. केआरआई नंग्गाला

 


सामान्य अध्ययन-I


 

विषय: महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन, जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और उनके रक्षोपाय।

भारत में विज्ञापनों में लैंगिक पक्षपात और समावेशन


संदर्भ:

हाल ही में, यूनिसेफ (UNICEF) तथा ‘जीना डेविस इंस्टिट्यूट ऑन जेंडर इन मीडिया’  (Gender in Media on Gender in Media) द्वारा ‘भारत में विज्ञापनों में लैंगिक पक्षपात और समावेशन’ (Gender bias and inclusion in advertising in India) शीर्षक से एक अध्ययन रिपोर्ट जारी की गई है।

इस शोध अध्ययन में, वर्ष 2019 के दौरान संपूर्ण भारत में प्रसारित किए गए 1,000 से अधिक टेलीविज़न और यू ट्यूब (YouTube) विज्ञापनों का आकलन किया गया है। अध्ययन में, सर्वाधिक पहुँच हासिल करने वाले विज्ञापनों का विश्लेषण किया गया है।

प्रमुख निष्कर्ष (संक्षिप्त अवलोकन):

  • यद्यपि, जहाँ तक कि स्क्रीन और बोलने के समय के संदर्भ में, लड़कियों और महिलाओं के प्रतिनिधित्व की समानता की बात की जाए तो ये विज्ञापन, वैश्विक मानदंडो से बेहतर हैं, किंतु इनका चित्रण समस्यात्मक है, क्योंकि ये लैंगिक रूढ़िवादिताओं को बढ़ावा देते हैं।
  • इन विज्ञापनों में, पुरुष पात्रों की तुलना में, महिला पात्रों को विवाहित के रूप में अधिक, किसी आय अर्जित करने वाले व्यवसाय में कम, तथा देखभाल करने वाले और ‘माता-पिता’ के रूप में संभवतः अधिक चित्रित किया जाता है।
  • महिला पात्रों को पुरुष पात्रों की तुलना में निम्नलिखित गतिविधियां करते हुए दिखाने की अधिक संभावना है – खरीदारी (3% पुरुष पात्रों की तुलना में 4.1%); सफाई (2.2% के मुकाबले 4.8%); और भोजन के लिए खरीदारी या बनाने की तैयारी (3.9% के खिलाफ 5.4%)।
  • जिन पात्रों में, अधिक होशियार होने का गुण दिखाया जाता है, विज्ञापन में, उन पात्रों को अभिनीत करने के लिए पुरुष पात्रों को महिला पात्रों की तुलना में अधिक स्मार्ट दिखाया जाता है (2% महिला पात्रों की तुलना में 32.2%)।
  • भारतीय विज्ञापनों में दो-तिहाई महिला पात्रों (9%) की में त्वचा का रंग उजला अथवा मध्यम-उजला होता है, और इनमे स्त्री पात्र हमेशा पतले होते हैं।

संबंधित मुद्दे एवं चिंताएं:

यद्यपि हम भारतीय विज्ञापनों में महिला प्रतिनिधित्व को हावी देखते हैं, फिर भी इनको रंगवाद, अत्यधिक लैंगिकीकरण के कारण, घर के बाहर आजीविका अथवा आकांक्षाओं को पूरा करने में हाशिए पर रहना पड़ता है।

  • विज्ञापनों में महिलाओं की की गई गलत व्याख्या और हानिकारक रूढ़िवादिता का, महिलाओं और युवा लड़कियों पर इस संदर्भ में महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है- कि वे खुद को किस प्रकार देखती हैं, तथा समाज में उनका क्या महत्व है?
  • एक समतामूलक समाज सुनिश्चित करने के लिए इस कठोर असमानता का समाधान किया जाने की आवश्यकता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. यूनिसेफ के बारे में।
  2. इसके कार्य और सदस्य।
  3. रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु।

मेंस लिंक:

विज्ञापनों में महिलाओं की की गई गलत व्याख्या और हानिकारक रूढ़िवादिता का महिलाओं और युवा लड़कियों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। टिप्पणी कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: विश्व के इतिहास में 18वीं सदी तथा बाद की घटनाएँ यथा औद्योगिक क्रांति, विश्व युद्ध।

अर्मेनियाई नरसंहार


(Armenian Genocide)

संदर्भ:

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन, अर्मेनियाई नरसंहार (Armenian Genocide) को औपचारिक रूप से ‘नरसंहार’ मानने की तैयारी कर रहे हैं।

प्रतिवर्ष, 24 अप्रैल को ‘अर्मेनियाई नरसंहार स्मृति दिवस’ के रूप में आयोजित किया जाएगा।

‘अर्मेनियाई नरसंहार’ क्या है?

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान, वर्ष 1915 से 1922 के बीच, ओटोमन तुर्कों द्वारा आर्मेनियाई आबादी को पूर्वी अनातोलिया से निर्वासित कर दिया गया था, इस दौरान हुए ‘आर्मेनियाई नरसंहार’ में हजारों आर्मीनियाई लोग, हत्याओं, भुखमरी और बीमारी के कारण मारे गए थे। तुर्की, इस घटना पर भिन्न राय रखता है, जबकि इतिहासकारों के बीच इतिहास की इस घटना पर आम सहमति है।

इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ जेनोसाइड’ के विद्वानों का अनुमान है, कि इस प्रकरण में 1 मिलियन से अधिक आर्मेनियाई लोग मारे गए थे।

इस स्वीकृति का महत्व:

शोधकर्ताओं का कहना है कि अमेरिकी सरकार द्वारा इस स्वीकृति का तुर्की पर बहुत कम कानूनी प्रभाव पड़ेगा, इससे तुर्की के लिए मात्र शर्मिंदगी का सामना करना पड़ सकता है। फिर भी अमेरिका के इस कदम से, अन्य देश इस ‘नरसंहार’ को स्वीकार करने के लिए प्रेरित हो सकते हैं।

तथापि, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में यह स्वीकृति, तुर्की के लिए अवांछनीय और अरुचिकर हो सकती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. प्रथम विश्व युद्ध के बारे में
  2. युद्ध के दौरान प्रमुख घटनाएँ
  3. अर्मेनियाई नरसंहार क्या है?

मेंस लिंक:

अर्मेनियाई नरसंहार की स्वीकृति, तुर्की को किस प्रकार प्रभावित कर सकती है। चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

स्वाइन फीवर


(swine fever)

संदर्भ:

मिजोरम के चार जिलों में कुछ क्षेत्रों को अफ्रीकी स्वाइन फीवर (African swine fever- ASF) के उत्केंद्रों (Epicentres) के रूप में घोषित कर दिया गया है। इस बीमारी से एक महीने में अब तक 1,119 सुअरों की मौत हो चुकी है।

अफ्रीकी स्वाइन फीवर (ASF) के बारे में:

  1. ASF एक अत्यधिक संक्रामक और घातक पशु रोग है, जो घरेलू और जंगली सूअरों को संक्रमित करता है। इसके संक्रमण से सूअर एक प्रकार के तीव्र रक्तस्रावी बुखार (Hemorrhagic Fever) से पीड़ित होते है।
  2. इसे पहली बार 1920 के दशक में अफ्रीका में देखा गया था।
  3. इस रोग में मृत्यु दर 100 प्रतिशत के करीब होती है, और चूंकि इस बुखार का कोई इलाज नहीं है, अतः इसके संक्रमण को फैलने से रोकने का एकमात्र तरीका जानवरों को मारना है।
  4. अफ्रीकी स्वाइन फीवर से मनुष्य के लिए खतरा नहीं होता है, क्योंकि यह केवल जानवरों से जानवरों में फैलता है।
  5. FAO के अनुसार, यह रोग अत्याधिक संक्रामक है तथा इसकी सीमापार संक्रमण क्षमता से इस क्षेत्र के सभी देशों में संकट उत्पन्न हो गया है, इसके साथ ही एक बार फिर इस रोग का भूत अफ्रीका से बाहर पाँव पसार रहा है। यह रोग, वैश्विक खाद्य सुरक्षा तथा घरेलू आय के लिए महत्वपूर्ण संकट उत्पन्न कर सकता है।

swine_fever

प्रीलिम्स लिंक:

  1. स्वाइन फीवर और स्वाइन फ्लू में अंतर?
  2. क्या स्वाइन फीवर मनुष्यों को संक्रमित कर सकता है?
  3. क्या यह एक वायरल बीमारी है?
  4. इसकी खोज सबसे पहले कहाँ हुई थी?
  5. 2020 में कौन से देश इससे प्रभावित हुए हैं?
  6. क्या इसके खिलाफ कोई टीका उपलब्ध है?

मेंस लिंक:

अफ्रीकी स्वाइन स्वाइन फीवर, लक्षण और इसके प्रसरण पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

कोडेक्स कमेटी ऑन स्पाइसेस एंड कलिनरी हर्ब्स का पाँचवाँ सत्र


संदर्भ:

हाल ही में, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा ‘मसालों और ‘मसालों और पाक–कला में काम आने वाली जड़ी-बूटियों’ पर कोडेक्स समिति’ (Codex Committee on Spices and Culinary Herbs- CCSCH) के पाँचवें सत्र का उद्घाटन किया गया।

‘कोडेक्स कमेटी ऑन स्पाइसेस एंड कलिनरी हर्ब्स’ (CCSCH) का गठन कोडेक्स एलेमेंट्रिस कमीशन (Codex Alimentarius Commission) के अंतर्गत किया गया है।

‘कोडेक्स कमेटी ऑन स्पाइसेस एंड कलिनरी हर्ब्स’ (CCSCH) के बारे में:

वर्ष 2013 में गठन किया गया।

  • इसका मुख्य कार्य, ‘मसालों और पाक–कला में काम आने वाली जड़ी-बूटियों’ के सूखे हुए, निर्जलित साबुत अवस्था, पिसे, टूटे एवं कुटे हुए, प्रकारों के लिए वैश्विक मानकों का विकास एवं प्रचार करना है।
  • यह, आवश्यकता पड़ने पर, इन मसालों एवं जड़ी-बूटियों का प्रतिरूपण करने से बचाव हेतु मानकों के विकास की प्रक्रिया में अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ परामर्श भी करेगी।
  • इस कमिटी के सत्रों का आयोजन भारत की मेजबानी में किया गया, तथा इसके लिए मसाला बोर्ड (वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय) द्वारा इस आयोजन के लिए सचिवालय के रूप दायित्व निभाया गया था।

‘कोडेक्स एलेमेंट्रिस कमीशन’ (CAC) के बारे में:

‘कोडेक्स एलेमेंट्रिस कमीशन’ (Codex Alimentarius Commission-CAC), संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा संयुक्त रूप से स्थापित एक अंतर-सरकारी निकाय है।

  • इसकी स्थापना वर्ष 1963 में की गई थी।
  • CAC का सचिवालय, रोम में स्थित ‘खाद्य एवं कृषि संगठन’ (FAO) मुख्यालय से कार्य करता है।
  • इसका गठन, उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा और खाद्य व्यापार में उचित व्यवहार सुनिश्चित करने के लिये किया गया था।
  • ‘कोडेक्स एलेमेंट्रिस कमीशन’ वर्ष में एक बार, जिनेवा और रोम में, बारी-बारी से, नियमित बैठकें करता है।
  • वर्तमान में, इसमें 189 कोडेक्स सदस्य शामिल हैं।

कोडेक्स एलेमेंट्रिस:

  • ‘कोडेक्स एलेमेंट्रिस’ (Codex Alimentarius), CAC द्वारा अपनाया गया अंतर्राष्ट्रीय खाद्य मानकों का एक संग्रह है।
  • ये मानक सभी प्रमुख खाद्य पदार्थों (प्रसंस्कृत, अर्ध-प्रसंस्कृत, कच्चे अथवा खाद्य उत्पादों के दोबारा प्रसंस्करण में प्रयुक्त सामग्री ) को कवर करते हैं
  • कोडेक्स प्रावधानों में सूक्ष्मजीव-विज्ञानी मानदंडों, खाद्य योजकों, कीटनाशक, पशु औषधीय अवशिष्टों सहित खाद्य पदार्थों की स्वच्छता व पोषण संबंधी गुणवत्ता को शामिल किया गया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. कोडेक्स एलेमेंट्रिस के बारे में।
  2. ‘कोडेक्स एलेमेंट्रिस कमीशन’ (CAC) के बारे में।
  3. CCSCH क्या है?

मेंस लिंक:

मसालों और ‘मसालों और पाक–कला में काम आने वाली जड़ी-बूटियों’ पर कोडेक्स समिति’ ( CCSCH) पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

नासा के परसिवरेंस मिशन द्वारा मंगल पर ऑक्सीजन का निष्कर्षण


संदर्भ:

हाल ही में, ‘परसिवरेंस रोवर’ (Perseverance rover) पर लगे एक उपकरण को पहली बार मंगल ग्रह के विरल वातावरण से ऑक्सीजन का उत्पादन करने में सफलता हासिल मिली।

यह सफलता, भविष्य में चालक-दलों सहित भेजे जाने वाले अभियानों के लिए एक उम्मीद प्रदान करती है कि अंतरिक्ष यात्री, मिशन के दौरान सांस लेने और पृथ्वी पर वापस लौटने के लिए इस तकनीक पर विश्वास कर सकते हैं।

मंगल ग्रह के वायुमंडल की संरचना:

मंगल ग्रह के वायुमंडल में पायी जाने वाले गैसों में कार्बन डाइऑक्साइड लगभग 96 प्रतिशत है, तथा ऑक्सीजन की मात्रा केवल 0.13% है। जबकि पृथ्वी के वायुमंडल में 21% ऑक्सीजन पाई जाती है।

मंगल ग्रह पर परसिवरेंस द्वारा ऑक्सीजन का उत्पादन किस प्रकार किया गया:

‘मार्स ऑक्सीजन इन-सीटू रिसोर्स यूटिलाइज़ेशन एक्सपेरिमेंट’ (MOXIE) द्वारा मंगल ग्रह के वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड से 5 ग्राम ऑक्सीजन का उत्पादन किया गया। यह मात्रा एक अंतरिक्ष-यात्री के लिए 10 मिनट तक सांस लेने के लिए पर्याप्त होती है।

  • पृथ्वी पर एक वृक्ष की भांति, MOXIE का कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण करती है और ऑक्सीजन का उत्सर्जन करता है।
  • ऑक्सीजन का उत्पादन करने के लिए, MOXIE कार्बन डाइऑक्साइड अणुओं से ऑक्सीजन परमाणुओं को पृथक करता है। यह प्रक्रिया, लगभग 800 डिग्री सेल्सियस तापमान पर ऊष्मा का उपयोग करके पूरी की गई।

MOXIE के बारे में:

  • एक तकनीकी प्रदर्शक, MOXIE प्रति घंटे 10 ग्राम ऑक्सीजन उत्पन्न करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, और इसे परसिवरेंस रोवर के भीतर लगाया जाता है।
  • यह एक कार की बैटरी का आकार है, और इसका वजन पृथ्वी पर 7 पाउंड (17.1 किलोग्राम) तथा मंगल ग्रह पर मात्र 14.14 पाउंड (6.41 किलोग्राम) है।
  • अगले दो वर्षों में, MOXIE द्वारा नौ बार ऑक्सीजन निष्कर्षण किए जाने की उम्मीद है।

लाल ग्रह पर ऑक्सीजन का उत्पादन इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

मंगल ग्रह पर भेजे जाने वाले चालक-दल सहित अभियानों के लिए ऑक्सीजन की आपूर्ति अति महत्वपूर्ण है। ऑक्सीजन, अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा सांस लेने के साथ-साथ, पृथ्वी पर वापस आने के लिए प्रयुक्त राकेट में ईंधन के रूप में उपयोग हेतु आवश्यक होगी।

  • नासा के अनुसार, एक भविष्य के मिशन में, चार अंतरिक्ष यात्रियों के लिए मंगल ग्रह से उड़ान भरने हेतु लगभग 7 मीट्रिक टन रॉकेट ईंधन और 25 मीट्रिक टन ऑक्सीजन- लगभग पूरे अंतरिक्ष यान के भार के बराबर- की जरूरत होगी।
  • इसके विपरीत, मंगल पर रहने और काम करने वाले अंतरिक्ष यात्रियों को सांस लेने के लिए बहुत कम ऑक्सीजन, लगभग एक मीट्रिक टन, की आवश्यकता होगी।
  • इस प्रकार, वापसी यात्रा के लिए, पृथ्वी से मंगल तक 25 मीट्रिक टन ऑक्सीजन को ढोना एक बड़ी चुनौती होगी, और यदि लाल ग्रह पर ही तरल ऑक्सीजन का उत्पादन किया जा सकता है, तो वैज्ञानिकों का काम काफी आसान हो जाएगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. मंगल ग्रह के लिए भेजे जाने वाले मिशन
  2. पर्सविरन्स रोवर – उद्देश्य
  3. पर्सविरन्स रोवर पर लगे उपकरण
  4. MOXIE के बारे में
  5. UAE के ‘होप’ मिशन तथा चीन के तियानवेन -1 अंतरिक्ष यान के बारे में
  6. पाथफाइंडर मिशन

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

पृथ्वी दिवस 2021


(Earth Day)

संदर्भ:

प्रतिवर्ष 22 अप्रैल को मनाया जाता है।

इस वर्ष अर्थात् 22 अप्रैल, 2021 को ‘पृथ्वी दिवस’ 51 वीं वर्षगांठ है।

पृथ्वी दिवस- 2021 का विषय: ‘अपनी धरती को पहले जैसा करें’ (Restore Our Earth) है।

‘पृथ्वी दिवस’ के बारे में:

  • ‘पृथ्वी दिवस’, वर्ष 1970 में पहली बार मनाया गया था।
  • यह कार्यक्रम वर्ष 1969 में हुए ‘सांता बारबरा तेल-रिसाव’ की घटना तथा साथ ही स्मॉग और प्रदूषित नदियों जैसे अन्य मुद्दों के कारण शुरू किया गया था।
  • वर्ष 2009 में, संयुक्त राष्ट्र द्वारा 22 अप्रैल को ‘अंतर्राष्ट्रीय पृथ्वी मातृ दिवस’ (International Mother Earth Day) के रूप में अभिहित किया गया।
  • वर्तमान में, पृथ्वी दिवस, वैश्विक स्तर पर ORG, एक गैर-लाभकारी संगठन, द्वारा समन्वित किया जाता है।
  • पृथ्वी दिवस 2016 के दिन ही पेरिस समझौते पर भी हस्ताक्षर किए गए थे।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. पृथ्वी दिवस के बारे में
  2. महत्व
  3. उद्देश्य
  4. पेरिस समझौते के बारे में
  5. ‘अंतर्राष्ट्रीय पृथ्वी मातृ दिवस’ के उद्देश्य

मेंस लिंक:

पृथ्वी दिवस के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।

‘व्हाट्सएप की निजता नीति’


(WhatsApp privacy policy)

संदर्भ:

हाल ही में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप व्हाट्सएप द्वारा दायर की गई एक याचिका को खारिज कर दिया है। इस याचिका में व्हाट्सएप ने ‘भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग’ (Competition Commission of india- CCI) द्वारा इसकी विवादित नई निजता नीति की जांच करने हेतु दिए गए आदेश को चुनौती दी थी।

संबंधित प्रकरण:

व्हाट्सएप ने याचिका में दावा किया था कि चूंकि उसकी ‘निजता नीति’ का मुद्दा सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष लंबित है, इसलिए ‘भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग’ (CCI) द्वारा इसकी जांच का आदेश देने की आवश्यकता नहीं थी। व्हाट्सएप के मालिक फेसबुक द्वारा भी ‘भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग’ के इस आदेश चुनौती देते हुए इसी तरह की याचिका दायर की गई थी।

‘भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग’ (CCI) का वक्तव्य:

CCI ने तर्क दिया है, कि जांच का आदेश इस बात का पता लगाने के लिए दिया गया है, क्या डेटा तक पहुँच होने से प्रभावी स्थिति का दुरुपयोग किया जा सकता है।

  • नई निजता नीति द्वारा कथित रूप से अत्यधिक डेटा संग्रह करके प्रभावित किया जा रहा है और यह जांचने की जरूरत है कि क्या अत्यधिक डेटा संग्रह से प्रतिस्पर्धा-विरोधी निहितार्थ किसी सीमा के बाहर किसी मुद्दे पर उल्लंघन कर रहा है।
  • आयोग ने कहा, कि वह व्हाट्सएप की ‘नई निजता नीति’ पर काम कर रहा है, जिसका, उपभोक्ताओं का ‘अत्यधिक डेटा संग्रह’ करने तथा उसका प्रतिस्पर्धा-विरोधी संदर्भो में तथा साझा करने में उपयोग किया जा सकता है।

निजता नीति की प्रमुख विशेषताएं:

  1. तीसरे पक्ष की सेवाओं के साथ जानकारी साझा करना: जब उपयोगकर्ता, तीसरे-पक्ष की सेवाओं या व्हाट्सएप सेवाओं के साथ एकीकृत फेसबुक कंपनी के अन्य उत्पादों पर यकीन करते हैं, तो उपयोगकर्ता तथा साझा करने वाले अन्य लोगों के बारे में उन तीसरे-पक्ष की सेवाओं को जानकारी हासिल हो सकती है।
  2. हार्डवेयर की जानकारी: व्हाट्सएप, उपयोगकर्ता के उपकरणों के बैटरी स्तर, सिग्नल शक्ति, ऐप संस्करण, ब्राउज़र जानकारी, मोबाइल नेटवर्क, कनेक्शन जानकारी (फोन नंबर, मोबाइल ऑपरेटर या आईएसपी सहित) आदि एकत्र करता है।
  3. अकाउंट डिलीट करना: यदि कोई उपयोगकर्ता, ऐप में दी गयी प्रक्रिया का उपयोग किए बिना अपने डिवाइस से व्हाट्सएप ऐप को हटा देता है, तो उस उपयोगकर्ता की जानकारी प्लेटफ़ॉर्म में संग्रहीत रहेगी।
  4. डेटा स्टोरेज: व्हाट्सएप कहता है कि वह फेसबुक की वैश्विक अवसंरचनाओं और डेटा केंद्रों का उपयोग करता है। यह भी कहा गया है कि कुछ मामलों में, उपयोगकर्ताओं के डेटा को संयुक्त राज्य अमेरिका अथवा जिन स्थानों पर फेसबुक की सहयोगी कंपनियां है, वहां स्थानांतरित किया जा सकता है।
  5. अवस्थिति: भले ही कोई उपयोगकर्ता अपनी अवस्थिति संबंधी सुविधाओं का उपयोग नहीं करता है, तो भी व्हाट्सएप उसकी सामान्य अवस्थिति (शहर, देश) का अनुमान लगाने के लिए आईपी पते और फोन नंबर क्षेत्र कोड जैसी अन्य जानकारी एकत्र करता है।
  6. भुगतान सेवा: व्हाट्सएप का कहना है कि अगर कोई भी उपयोगकर्ता अपनी भुगतान सेवाओं का उपयोग करता है तो वे आपके बारे में अतिरिक्त जानकारी संसाधित करेंगे, जिसमें भुगतान खाता और लेनदेन की जानकारी शामिल है।

संबंधित चिंताएँ:

  1. व्हाट्सएप की नई नीति, डेटा संरक्षण विधेयक, 2019’ को आधार प्रदान करने वाली ‘श्रीकृष्ण समिति’ की रिपोर्ट की सिफारिशों की अवहेलना करती है।
  2. डेटा स्थानीयकरण के सिद्धांत का उद्देश्य निजी डेटा का देश के बाहर हस्तांतरण पर रोक लगाना है, इससे व्हाट्सएप की नई गोपनीयता नीति के साथ विरोधाभास की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
  3. नई गोपनीयता नीति के लागू होने पर व्हाट्सएप किसी उपयोगकर्ता का मेटाडेटा भी साझा कर सकता है, अर्थात, वार्तालाप के मूल संदेशों के आलावा सबकुछ साझा किया जा सकता है।
  4. यदि उपयोगकर्त्ता व्हाट्सएप की अद्यतन गोपनीयता नीति से असहमत हैं, तो इस नई नीति लागू होने के बाद उनके पास व्हाट्सएप छोड़ना होगा।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


# FOSS4GOV इनोवेशन चैलेंज

  • इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा सरकार में ‘फ्री एंड ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर’ (Free and Open Source SoftwareFOSS) को अपनाने की दिशा में तेज़ी लाने के लिए #FOSS4GOV इनोवेशन चैलेंज की घोषणा की गई है।
  • #FOSS4GOV इनोवेशन चैलेंज के तहत मंत्रालय ने FOSS इनोवेटर्स, प्रौद्योगिकी उद्यमियों और भारतीय स्टार्ट-अप्स से आह्वान किया है, कि वे स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, शहरी शासन आदि में Govtech के लिए संभावित अनुप्रयोगों में इस्तेमाल किए जाने वाले ओपन सोर्स उत्पाद नवाचारों को प्रस्तुत करें।

केआरआई नंग्गाला

(KRI Nanggala)

  • यह एक इंडोनेशियाई पनडुब्बी है, जो हाल ही में लापता हो गई थी।
  • ख़बरों के अनुसार, यह पनडुब्बी, बाली द्वीप के उत्तर में 25 मील की दूरी पर युद्धाभ्यास के लिए तैयारियां कर रही थी।
  • भारतीय नौसेना द्वारा लापता पनडुब्बी को खोज निकालने में इंडोनेशियाई नौसेना की मदद के लिए विशाखापत्तनम से अपने ‘डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू व्हिकल’ (DSRV) को भेजा गया है।

Join our Official Telegram Channel HERE for Motivation and Fast Updates

Subscribe to our YouTube Channel HERE to watch Motivational and New analysis videos