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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 21 April 2021

 

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

1. ‘अमेरिकी मुद्रा निगरानी सूची’ नीतियों में अनुचित हस्तक्षेप है: अधिकारी

2. ‘ट्रैवल बबल’

3. दक्षिण चीन सागर विवाद

4. बोआओ फोरम

5. ‘ग्लोबल यूथ मोबलाइज़ेशन लोकल सॉल्यूशंस’ अभियान

 

सामान्य अध्ययन-III

1. वर्ष 2025 में रूस का निजी अंतरिक्ष स्टेशन

2. इंटरनेट से अपमानजनक सामग्री को हटाने हेतु दिल्ली उच्च न्यायालय के दिशानिर्देश

 

सामान्य अध्ययन-IV

1. बंदर के भ्रूण में विकसित मानव कोशिकाओं पर नैतिकता संबंधी बहस

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. यूरोपीय परिषद

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

‘अमेरिकी मुद्रा निगरानी सूची’ नीतियों में अनुचित हस्तक्षेप है: अधिकारी


संदर्भ:

भारतीय वाणिज्य सचिव अनूप वाधवान ने अमेरिकी सरकार द्वारा भारत को ‘मुद्रा-हेरफेर करने वाले देशों या करंसी मैन्युपुलटेर्स’ (Currency Manipulators) निगरानी सूची में शामिल करने संबंधी फैसले के औचित्य पर सवाल उठाया है।

इसके अलावा, यह सूची दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों के लिए अपने अधिदेशों को पूरा करने हेतु आवश्यक नीति-विस्तार में अनुचित हस्तक्षेप करती है।

संबंधित प्रकरण:

हाल ही में, अमेरिकी राजकोष विभाग (U.S. Treasury Department) ने, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा भारी मात्रा में डॉलर की गई खरीद (सकल घरेलू उत्पाद का 5% के लगभग) का हवाला देते हुए, अमेरिकी कांग्रेस में पेश की गयी ‘करंसी मैन्युपुलटेर्स’ निगरानी सूची में भारत को बनाए रखा है।

भारत को मुद्रा निगरानी सूची में शामिल करने का एक और कारण  20 बिलियन डॉलर या इससे अधिक का व्यापार अधिशेष भी है।

पृष्ठभूमि:

केंद्रीय बैंक के प्रमुख अधिदेशों में ‘मुद्रा में स्थिरता’ लाना शामिल होता है, इसके लिए केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा का क्रय और विक्रय करते हैं।

‘मुद्रा-हेरफेर’ / करंसी मैन्युपुलेशन’ क्या है?

‘किसी देश द्वारा ‘अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में अनुचित प्रतिस्पर्धात्मक लाभ’ हासिल करने के लिए जानबूझकर अपनी मुद्रा और अमेरिकी डॉलर के बीच विनिमय दर को प्रभावित करने’ को अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा ‘मुद्रा हेरफेर’ (Currency Manipulation) के रूप में परिभाषित किया जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अमेरिका की ‘करंसी मैन्युपुलटेर्स’ सूची
  2. निगरानी सूची में शामिल देश
  3. मानदंड
  4. निहितार्थ
  5. भारत का स्थान

मेंस लिंक:

‘अमेरिकी मुद्रा निगरानी सूची’ के संदर्भ में भारत की चिंताओं पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

‘ट्रैवल बबल’


संदर्भ:

भारत में कोविड-19 मामलों में हालिया उछाल के मद्देनजर, श्रीलंका ने भारत के साथ प्रस्तावित ‘यात्रा बुलबुला’ अर्थात ‘ट्रैवल बबल’ (Travel Bubble) शुरू करने का फैसला स्थगित कर दिया है।

‘ट्रैवल बबल’ क्या होता है?

  • ‘ट्रैवल बबल’ व्यवस्था के अंतर्गत, घरेलू स्तर पर नॉवेल कोरोनवायरस महामारी को नियंत्रित करने में अच्छा प्रदर्शन करने देशों या राज्यों के मध्य फिर से संपर्क स्थापित किया जाता है।
  • इस प्रकार के बबल में, समूह में शामिल देशों के मध्य परस्पर व्यापार संबंधों को फिर से जोड़ने तथा यात्रा और पर्यटन जैसे किकस्टार्ट क्षेत्रों (kickstart sectors) को पुनः खोलने की सुविधा होती है।

महत्व और संभावनाएं:

विश्व भर में बेहतर प्रदर्शन करने वाले देशों के मध्य संभावित ‘ट्रैवल बबल’ का आकार, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद के लगभग 35 प्रतिशत के बराबर होगा। इस तरह की व्यवस्था छोटे देशों द्वारा विशेष रूप से पसंद की जा रही है, जिसके तहत ये देश बड़े भागीदारों के साथ फिर से व्यापार करने में सक्षम होंगे, परिणामस्वरूप इन्हें अधिक लाभ हासिल करने की संभावना होती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘ट्रैवल बबल’ क्या है?
  2. ‘ट्रैवल बबल’ और सामाजिक बुलबुले के मध्य अंतर।
  3. ‘ट्रैवल बबल’ के उदाहरण।

मेंस लिंक:

‘ट्रैवल बबल’ की आवश्यकता और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

दक्षिण चीन सागर विवाद


(South China Sea dispute)

संदर्भ:

फिलीपींस द्वारा समुद्री जलधारा के एक विवादित क्षेत्र में संचित तेल-भंडार पर अपना दावा जताने के लिए दक्षिण चीन सागर में सैन्य जहाजों को तैनात करने की योजना बनाई जा रही है।

पृष्ठभूमि:

फिलीपींस के राष्ट्रपति रोड्रिगो डुटर्टे को, फिलीपींस के दावाकृत जलक्षेत्र में चीनी गतिविधियों को लेकर, उसका सामना करने से अनिच्छा के लिए बढ़ती घरेलू आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

‘दक्षिण चीन सागर’ की अवस्थिति:

  • दक्षिण चीन सागर, दक्षिण पूर्व एशिया में पश्चिमी प्रशांत महासागर की एक भुजा है।
  • यह, चीन के दक्षिण, वियतनाम के पूर्व और दक्षिण, फिलीपींस के पश्चिम और बोर्नियो द्वीप के उत्तर में अवस्थित है।
  • यह, ताइवान जलडमरूमध्य द्वारा ‘पूर्वी चीन सागर’ और ‘लूजॉन स्ट्रेट’ के माध्यम से ‘फिलीपीन सागर’ से जुड़ा हुआ है।
  • सीमावर्ती देश और भू-भाग: जनवादी चीन गणराज्य, चीन गणराज्य (ताइवान), फिलीपींस, मलेशिया, ब्रुनेई, इंडोनेशिया, सिंगापुर और वियतनाम।

सामरिक महत्व:

  • ‘दक्षिणी चीन सागर’ अपनी अवस्थिति के कारण सामरिक रूप से अत्यधिक महत्वपूर्ण है, यह हिंद महासागर और प्रशांत महासागर (मलक्का जलसन्धि) के बीच संपर्क-कड़ी है।
  • ‘संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास अभिसमय’ (United Nations Conference on Trade And DevelopmentUNCTAD) के अनुसार, वैश्विक नौपरिवहन का एक-तिहाई भाग ‘दक्षिणी चीन सागर’ से होकर गुजरता है, जिसके द्वारा अरबों का व्यापार होता है। इस कारण भी यह एक महत्वपूर्ण भूराजनीतिक जल निकाय है।

दक्षिणी चीन सागर में अवस्थित द्वीपों पर विभिन्न देशों के दावे:

  • पारसेल द्वीप समूह’ (Paracels Islands) पर चीन, ताइवान और वियतनाम द्वारा दावा किया जाता है।
  • स्प्रैटली द्वीप समूह’ (Spratley Islands) पर चीन, ताइवान, वियतनाम, ब्रुनेई और फिलीपींस द्वारा दावा किया जाता है।
  • स्कारबोरो शोल (Scarborough Shoal) पर फिलीपींस, चीन और ताइवान द्वारा दावा किया जाता है।
  • वर्ष 2010 से, चीन द्वारा निर्जन टापुओं को, ‘यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑफ द लॉ ऑफ द सी’ (United Nations Convention on the Law of the Sea- UNCLOS) के अंतर्गत लाने के लिए, कृत्रिम टापुओं में परिवर्तित किया जा रहा है। (उदाहरण के लिए, हेवन रीफ, जॉनसन साउथ रीफ और फेरी क्रॉस रीफ)।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. विवाद में शामिल देश
  2. नाइ-डैश लाइन क्या है?
  3. इस क्षेत्र में स्थित महत्वपूर्ण खाड़ियाँ, मार्ग एवं सागर
  4. विवादित द्वीप और उनकी अवस्थिति
  5. UNCLOS क्या है?
  6. ताइवान स्ट्रेट और लूजॉन स्ट्रेट की अवस्थिति

मेंस लिंक:

दक्षिण चीन सागर विवाद पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

बोआओ फोरम


(Boao Forum)

संदर्भ:

हाल ही में, दक्षिण चीन में हाइनान प्रांत के ‘बोआओ’ में ‘बोआओ फोरम फॉर एशिया’ (Boao Forum for Asia BFA) वार्षिक सम्मलेन 2021 का उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया था।

  • इस वर्ष के सम्मेलन में 60 से अधिक देशों और क्षेत्रों के 2,600 से अधिक मेहमानों ने भाग लिया।
  • विषय: “ए वर्ल्ड इन चेंज: ज्वाइन हैंड टू स्ट्रेंथ ग्लोबल गवर्नेंस एंड एडवांस बेल्ट एंड रोड कोऑपरेशन।”

कार्यक्रम के दौरान, बोआओ फोरम फॉर एशिया’ (BFA) द्वारा एशियाई अर्थव्यवस्था पर एक वार्षिक रिपोर्ट जारी की गई।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष निम्नलिखित है:

  • ‘क्रय शक्ति समता´( Purchasing Power Parity) के संदर्भ में, वर्ष 2020 के दौरान वैश्विक अर्थव्यवस्था में, एशिया की सामूहिक रूप से हिस्सेदारी 3 प्रतिशत तक पहुँच गई, और यह वर्ष 2019 की हिस्सेदारी से 0.9 प्रतिशत अधिक रही। यह वैश्विक अर्थव्यवस्था में एशिया की बढ़ती भूमिका का संकेत है।
  • सभी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं का त्वरण गति से आर्थिक एकीकरण हो रहा है। फरवरी 2021 तक, एशिया के भीतर और बाहर 186 क्षेत्रीय व्यापार समझौते हो चुके थे, जोकि विश्व के कुल क्षेत्रीय समझौतों का 9 प्रतिशत है।
  • विशेष रूप से, नवंबर 2020 में हस्ताक्षरित ‘क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते’ (RCEP) से क्षेत्रीय और वैश्विक आर्थिक विकास की गति सशक्त एवं तीव्र हुई है। इस समझौते से एशिया में मुक्त व्यापार समझौतों संबंधी वार्ताओं को तीव्र करने हेतु नया प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

‘बोआओ फोरम’ के बारे में:

  • बोआओ फोरम फॉर एशिया’ (BFA) की शुरुआत वर्ष 2001 में 25 एशियाई देशों और ऑस्ट्रेलिया द्वारा की गई थी। वर्ष 2006 में इसके सदस्यों की संख्या बढ़कर 28 हो गई।
  • यह एक गैर-लाभकारी संगठन है।
  • यह, एशिया और विश्व में राजनीतिक, व्यापारिक और शैक्षणिक नेताओं के लिए एक उच्च स्तरीय मंच प्रदान करता है।
  • इसका गठन, दावोस, स्विट्जरलैंड में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले ‘विश्व आर्थिक मंच’ के मॉडल पर किया गया है।
  • यह फोरम, क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देने और एशियाई देशों को अपने विकास लक्ष्यों के नजदीक लाने के लिए प्रतिबद्ध है।
  • इस मंच ने, क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण, सामूहिक विकास और अधिक समृद्ध और सामंजस्यपूर्ण एशिया के निर्माण में सकारात्मक योगदान किया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. बोआओ फोरम के बारे में
  2. प्रतिभागी
  3. उद्देश्य

मेंस लिंक:

बोआओ फोरम फॉर एशिया’ (BFA)  के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

‘ग्लोबल यूथ मोबलाइज़ेशन लोकल सॉल्यूशंस’ अभियान


(Global Youth Mobilization Local Solutions campaign)

संदर्भ:

संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न संस्थाओं तथा और युवा संगठनों द्वारा एक साथ मिलकर एक अनोखा अभियान शुरू किया गया है, जिसमें, नॉवेल कोरोनोवायरस बीमारी (COVID-19) महामारी से प्रभावित युवाओं की जिंदगियों को फिर से पटरी पर लाने के लिए विश्व भर से युवाओं को शामिल किया जाएगा।

‘ग्लोबल यूथ मोबलाइज़ेशन लोकल सॉल्यूशंस’ अभियान के बारे में:

  • इस अभियान की शुरुआत 19 अप्रैल, 2021 को की गई है।
  • इस अभियान का उद्देश्य महामारी से प्रभावित समुदायों में युवाओं को जीवन के पुनर्निर्माण हेतु नवप्रवर्तनशील कार्यक्रम शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
  • इसके तहत, आरंभ में $ 500 से $ 5,000 की सहायता के रूप में कुल $ 2 मिलियन (लगभग 15 करोड़ रुपये) की राशि चार स्तरों में उपलब्ध कराई जाएगी तथा एक “उत्प्रेरक” कार्यक्रम द्वारा सर्वाधिक आशाजनक समाधानों का आकलन किया जाएगा तथा, आगामी महीनों में अधिक धन जुटा कर उन्हें दोहराया जाएगा।

इस अभियान में विश्व के छह सबसे बड़े युवा संगठनों द्वारा सहयोग किया जा रहा है:

  1. वर्ल्ड अलायन्स ऑफ़ यंग मैन’स क्रिस्चियन एसोसिएशन
  2. विश्व युवा महिला क्रिश्चियन एसोसिएशन
  3. स्काउट मूवमेंट का विश्व संगठन
  4. वर्ल्ड एसोसिएशन ऑफ गर्ल गाइड्स एंड गर्ल स्काउट्स
  5. इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट सोसाइटीज
  6. ड्यूक ऑफ एडिनबर्ग इंटरनेशनल अवार्ड

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘ग्लोबल यूथ मोबलाइज़ेशन लोकल सॉल्यूशंस’ अभियान के बारे में।
  2. उद्देश्य
  3. किसके द्वारा शुरू किया गया है?

मेंस लिंक:

‘ग्लोबल यूथ मोबलाइज़ेशन लोकल सॉल्यूशंस’ अभियान की आवश्यकता और महत्व पर चर्चा करें।

स्रोत: डाउन टू अर्थ

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

वर्ष 2025 में रूस का निजी अंतरिक्ष स्टेशन


संदर्भ:

रूस की अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा वर्ष 2025 में अपना निजी ‘ऑर्बिटल स्टेशन’ शुरू किए जाने की योजना बनाई जा रही है।

पृष्ठभूमि:

  • रूस द्वारा ‘अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन’ (International Space Station– ISS) कार्यक्रम से अलग होने तथा अकेले कार्यक्रम शुरू करने पर विचार किया जा रहा है।
  • अमेरिकी कंपनी ‘स्पेस एक्स’ के पहले सफल मिशन के बाद, पिछले वर्ष ‘अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन’ (ISS) पर भेजी जाने वाली मानव रहित उड़ानों के संदर्भ में, रूस का एकाधिकार समाप्त हो गया था।

‘अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन’ के बारे में:

  • ‘अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन’ (International Space Station- ISS) की शुरुआत वर्ष 1998 में शुरू की गयी थी और इसमें यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी सहित रूस, संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, जापान की अंतरिक्ष एजेंसीज शामिल हैं। ‘अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन’ (ISS), मानव इतिहास में सबसे महत्वाकांक्षी अंतरराष्ट्रीय सहयोगों में से एक है।
  • अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन’ (ISS) पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थित एक ‘मॉड्यूलर स्पेस स्टेशन’ (निवास योग्य कृत्रिम उपग्रह) है।
  • आईएसएस, सूक्ष्म-गुरुत्वीय (Microgravity) और अंतरिक्ष पर्यावरण अनुसंधान प्रयोगशाला के रूप में कार्य करता है, जिस पर खगोल-जीवविज्ञान, खगोल विज्ञान, मौसम विज्ञान, भौतिकी और अन्य क्षेत्रों से संबंधित वैज्ञानिक प्रयोग किए जाते हैं।
  • आईएसएस, लगभग 93 मिनट में पृथ्वी की परिक्रमा करता है तथा प्रति दिन 5 चक्कर पूरे करता है।
  • सोवियत संघ तथा इसके बाद रूस द्वारा भेजे गए साल्युत (Salyut), अल्माज़, और मीर स्टेशनों, तथा अमेरिका द्वारा भेजे गए ‘स्काईलैब’ के बाद आईएसएस नौवां अंतरिक्ष स्टेशन है जिस पर चालक दल निवास करता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन’ (ISS) के बारे में।
  2. आईएसएस में शामिल देश
  3. उद्देश्य
  4. पूर्ववर्ती अंतरिक्ष स्टेशन

मेंस लिंक:

‘अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन’ पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।

इंटरनेट से अपमानजनक सामग्री को हटाने हेतु दिल्ली उच्च न्यायालय के दिशानिर्देश


संदर्भ:

यह देखते हुए कि ‘इंटरनेट न कभी सोता है और न कभी भूलता है’ दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा अश्लील वेबसाइटों से आपत्तिजनक तस्वीरों और वीडियो जैसी अपमानजनक सामग्री को हटाने में आने वाले समस्याओं से निपटने हेतु कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

संबंधित प्रकरण:

यह प्रकरण, एक महिला द्वारा अदालत में दायर की गई याचिका के बाद सामने आया है। याचिका में महिला ने कहा है, कि उसकी कुछ तस्वीरें, जोकि बिल्कुल अश्लील या आपत्तिजनक नहीं थी, उसकी बगैर सहमति के, उसके फेसबुक और इंस्टाग्राम अकाउंट से लेकर एक अश्लील वेबसाइट पर अपमानजनक शीर्षक लगाकर अपलोड कर दी गईं।

उच्च न्यायालय द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देश:

  • किसी अदालत में इस प्रकार की शिकायत आने पर, अदालत द्वारा, जिस वेबसाइट या ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर आपत्तिजनक सामग्री प्रदर्शित की जा रही है, उसे तत्काल इस तरह की सामग्री को हटाने हेतु निर्देश जारी किया जाए। और हर हालत में, अदालत के आदेश की प्राप्ति के 24 घंटे के भीतर आपत्तिजनक सामग्री हट जानी चाहिए।
  • उच्च न्यायालय ने वेबसाइट या ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म को निर्देश जारी करते हुए कहा है, कि आपत्तिजनक सामग्री प्रदर्शित करने वाली वेबसाइट या ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म के लिए, कम से कम 180 दिनों की अवधि के लिए आपत्तिजनक सामग्री से संबंधित सभी जानकारी और संबंधित रिकॉर्ड को, जाँच में उपयोग हेतु, संरक्षित करना अनिवार्य होगा।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-IV


 

विषय: नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा और अभिरुचि

बंदर के भ्रूण में विकसित मानव कोशिकाओं पर नैतिकता संबंधी बहस


संदर्भ:

हाल ही में, अमेरिकी शोधकर्ताओं को पहली बार मानव कोशिकाओं को बंदर के भ्रूण में विकसित करने में सफलता हासिल हुई है।

  • मैकाक बंदरों के भ्रूण में मानव कोशिकाओं को एकीकृत करके, शोधकर्ताओं ने एक नामुमकिन समझा जाने वाला ‘काल्पनिक उपकरण’ (काइमरिक टूल- Chimeric Tool) तैयार किया है।
  • ये काल्पनिक जीव, जिन्हें ‘किमीरा’ (Chimeras) कहा जाता है, दो भिन्न प्रजातियों की कोशिकाओं से मिलकर बने होते हैं। संबंधित मामले में ये ‘किमीरा’ मनुष्य और बंदर प्रजातियों से बने हैं।

‘काइमरिक’ शोध का उद्देश्य:

  • शोधकर्ताओं का मानना ​​है, कि दो अलग-अलग प्रजातियों की कोशिकाओं को एक साथ विकसित करने की यह क्षमता वैज्ञानिकों को अनुसंधान और चिकित्सा के लिए एक शक्तिशाली उपकरण प्रदान करती है, जिससे, प्रारंभिक मानव विकास, बीमारियों का उद्भव, विकास-अनुक्रम तथा उम्रवृद्धि संबंधी मौजूदा जानकारी में वृद्धि होगी।
  • इसके अलावा, इस तरह के शोध से दवाओं के आकलन में भी मदद मिल सकती है और अंग- प्रत्यारोपण जैसी महत्वपूर्ण जरूरतों का समाधान किया जा सकता है।

इससे संबंधित नैतिक चिंताएँ:

  • आमतौर पर, विभिन्न प्रजातियां परस्पर संकर-प्रजनन नहीं करती हैं और यदि वे ऐसा करती हैं, तो इससे उत्पन्न संतान लंबे समय तक जीवित नहीं रहती हैं और इस प्रकिया में कोई संतान न होने की संभावना अधिक होती है। हालांकि, कुछ दुर्लभ संकर जीव, प्राकृतिक रूप से मौजूद पाए गए हैं और ये संभवतः विभिन्न प्रजातियों के जीवों के मध्य अनजाने में हुई क्रॉस ब्रीडिंग का परिणाम होते है।
  • यद्यपि ‘किमीराओं’ के बारे अधिक शोध, प्रगति की ओर अग्रसर कर सकते हैं, जिसका अर्थ होगा कि, इनका उपयोग मनुष्यों के लिए अंगों के स्रोत के रूप में किया जा सकता है। फिर भी, ये ‘किमीरा’, मानव और गैर-मानव कोशिकाओं का मिश्रण होंगे, यह विचार ही कई लोगों के लिए असुविधाजनक हो सकता है।
  • यह शोध “नैतिक स्तर पर दार्शनिक और नैतिकता संबंधी मुद्दे को उठाता है: हमें अन्य जीव-रूपों के प्रति किस प्रकार का व्यवहार करना चाहिए?”।
  • इस शोध के विरोधियों का तर्क है कि, ‘किमीरा शोध’ जानवरों के प्रति होने वाले अन्याय को और बदतर कर सकता है और ये मानव आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए मानव-जानवर अंगो का उपयोग करने के औचित्य की ओर भी ध्यान दिलाते हैं।

अतीत में इस प्रकार के मामले:

  • वर्ष 2018 में, डॉ. हे जियानकुई (He Jiankui) ने जीन एडिटिंग तकनीक ‘CRISPR’ का उपयोग करके आनुवंशिक रूप से संशोधित शिशुओं (Modified Babies) को उत्पन्न करने का दावा किया था।
  • डॉ जियानकुई ने दावा किया, कि उन्होंने एक मानव भ्रूण के जीन को परिवर्तित कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप विशिष्ट वांछित विशेषताओं के साथ जुड़वा लड़कियों का जन्म हुआ है। इस घटना को, इस प्रकार से मानव-संतति की उत्पत्ति का पहला उदाहरण माना जाता है।
  • भारत जैसे विकासशील देशों में, आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलें भी एक विवादास्पद विषय हैं।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


यूरोपीय परिषद

(Council of the European Union or European Council )

यूरोपीय संघ का गठन करने वाली संधि में सूचीबद्ध यूरोपीय संघ (European Union- EU) के सात संस्थानों में तीसरे स्थान पर ‘यूरोपीय परिषद’ अथवा ‘यूरोपीय संघ की परिषद्’ (European Council) है।

  • यह यूरोपीय संघ के तीन विधायी निकायों में से एक है तथा ‘यूरोपीय संसद’ के साथ मिलकर ‘यूरोपीय आयोग’ द्वारा पेश किये जाने वाले, विधायी पहलों से संबंधित, प्रस्तावों, का संशोधन करने और इन्हें अनुमोदित करने का कार्य करती है।
  • इसकी स्थापना 1 जुलाई 1967 को हुई थी।
  • इस परिषद का प्राथमिक उद्देश्य, यूरोपीय संघ की विधायी शाखा के दो वीटो निकायों में से एक के रूप में कार्य करना है। यूरोपीय संघ की विधायी शाखा का दूसरा वीटो निकाय ‘यूरोपीय संसद’ है।
  • ये दोनों निकाय, एक साथ, यूरोपीय आयोग के प्रस्तावों को संशोधित, अनुमोदित या अस्वीकृत करने का कार्य करते हैं। यूरोपीय आयोग, यूरोपीय संघ में कानूनों को प्रस्तावित करने वाला एकमात्र निकाय है।
  • संयुक्त रूप से, यूरोपीय संसद तथा यूरोपीय परिषद के पास, यूरोपीय संघ की बजट संबंधी शक्ति होती है।

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