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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 20 April 2021

 

विषयसूची

 सामान्य अध्ययन-I

1. खजुराहो मंदिर

 

सामान्य अध्ययन-II

1. आरबीआई द्वारा ‘एआरसी’ के कामकाज की समीक्षा हेतु एक समिति का गठन

2. स्टार्टअप इंडिया सीड फंड योजना

3. शिनजियांग अपराधों के लिए चीन की जांच: ह्यूमन राइट्स वॉच

4. यूरोपीय संघ परिषद द्वारा इंडो-पैसिफिक रणनीति के निष्कर्षों का अनुमोदन

 

सामान्य अध्ययन-III

1. नासा के मंगल हेलीकॉप्टर की दूसरे ग्रह पर पहली उड़ान

2. भारत और जर्मनी के मध्य ‘समुद्री पर्यावरण में प्लास्टिक कचरे की समस्‍या’ पर समझौता

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. वंदे भारत मिशन

 


सामान्य अध्ययन-I


 

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

खजुराहो मंदिर


संदर्भ:

हाल ही में, पर्यटन मंत्रालय द्वारा देखो अपना देशश्रृंखला के अंतर्गत खजुराहो में बने मंदिरों की वास्तुशिल्पीय भव्यता पर वेबिनार का आयोजन किया गया था।

देखो अपना देशवेबिनार श्रृंखला, एक भारत-श्रेष्ठ भारत‘ अभियान के अंतर्गत भारत की समृद्ध विविधता को प्रदर्शित करने का प्रयास है।

 ‘खजुराहो मंदिरों’ के बारे में:

  • खजुराहो के मंदिर देश के सबसे खूबसूरत मध्यकालीन स्मारकों में शामिल हैं।
  • इन मंदिरों का निर्माण 950-1050 ईस्वी के मध्य चंदेल शासकों द्वारा कराया गया था।
  • इन स्मारक मंदिरों में, हिंदू और जैन धर्म से संबंधित मंदिर शामिल हैं।
  • ये मंदिर स्थल, विंध्य पर्वत श्रृंखला के भीतर स्थित है, और नागर शैली के वास्तुशिल्प प्रतीक के रूप में प्रसिद्ध हैं।
  • इन मंदिरों को यूनेस्को द्वारा वर्ष 1986 में ‘विश्व धरोहर स्थल’ का दर्जा प्रदान किया गया।
  • ये मंदिर, अपनी कामोद्दीपक मूर्तियों के लिए विश्व-विख्यात हैं।
  • खजुराहो मंदिरों का पहली बार लिखित रूप से उल्लेख, ईस्वी सन् 1022 में अबू रिहान अल बिरूनी तथा 1335 ईस्वी में अरब यात्री इब्न बतूता के विवरणों में मिलता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. खजुराहो मंदिरों के बारे में।
  2. ‘वास्तुकला की नागर शैली’ क्या है?
  3. नागर और द्रविड़ शैलियों के मध्य अंतर?
  4. यूनेस्को की ‘विश्व धरोहर सूची’ क्या हैं?

स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

आरबीआई द्वारा ‘एआरसी’ के कामकाज की समीक्षा हेतु एक समिति का गठन


संदर्भ:

हाल ही में, भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा ‘सुदर्शन सेन’ की अध्यक्षता में, वित्तीय क्षेत्र पारितंत्र में ‘आस्ति पुनर्संरचना कंपनियों’ (Asset Reconstruction CompaniesARCs) के कामकाज की व्यापक समीक्षा करने तथा क्षेत्र की बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा करने में ऐसी संस्थाओं को सक्षम बनाने हेतु उपयुक्त उपायों की सिफारिश करने के लिए एक समिति का गठन किया गया है।

संदर्भ शर्तें (Terms of reference):

  • ‘आस्ति पुनर्संरचना कंपनियों’ ( ARCs) पर लागू मौजूदा कानूनी और विनियामक ढांचे की समीक्षा और ‘एआरसी’ की प्रभावकारिता में सुधार के उपायों हेतु सिफारिश करना।
  • दिवालिया एवं शोधन अक्षमता कोड (IBC), 2016 सहित तनावग्रस्त परिसंपत्तियों के समाधान में ‘एआरसी’ की भूमिका की समीक्षा करना।

‘आस्ति पुनर्संरचना कंपनी’ (ARC) क्या है?

‘आस्ति पुनर्संरचना कंपनी’ (Asset Reconstruction Companies- ARC), ऐसे विशेष वित्तीय संस्थान होते है जो बैंकों और वित्तीय संस्थानों से ‘गैर-निष्पादित आस्तियों’ (Non Performing Assets- NPAs) खरीदते हैं, ताकि वे अपनी बैलेंसशीट को साफ कर सकें।

  • इससे बैंकों को सामान्य बैंकिंग गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है।
  • बैंक, बकाएदारों पर अपना समय और प्रयास बर्बाद करने के बजाय, ‘आस्ति पुनर्संरचना कंपनी’ (ARC) को पारस्परिक रूप से सहमत कीमत पर अपनी ‘गैर-निष्पादित आस्तियों’ (NPAs) को बेच सकते हैं।
  • ‘आस्ति पुनर्संरचना कंपनी’ अथवा ‘एआरसी’ (ARC), आरबीआई के अंतर्गत पंजीकृत होती हैं।

कानूनी आधार:

  • ‘वित्तीय आस्तियों का प्रतिभूतिकरण और पुनर्रचना एवं प्रतिभूति हित प्रवर्तन’ (Securitization and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Security Interest -SARFAESI) अधिनियम 2002, भारत में ‘आस्ति पुनर्संरचना कंपनियों’ ( ARCs) का गठन करने हेतु वैधानिक आधार प्रदान करता है।
  • SARFAESI अधिनियम न्यायालयों के हस्तक्षेप के बगैर ‘गैर-निष्पादित अस्तियों’ की पुनर्संरचना में मदद करता है।
  • तब से, इस अधिनियम के तहत, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के अधीन पंजीकृत बड़ी संख्या में ARCs का गठन किया गया है। आरबीआई के लिए ARCs को विनियमित करने की शक्ति प्राप्त है।

ARCs के लिये पूंजी आवश्यकताएँ:

  • SARFAESI अधिनियम में, वर्ष 2016 में किये गए संशोधनों के अनुसार, किसी ‘आस्ति पुनर्संरचना कंपनी’ (ARC) के पास न्यूनतम 2 करोड़ रुपए की स्वामित्व निधि होनी चाहिये।
  • रिज़र्व बैंक द्वारा वर्ष 2017 में इस राशि को बढ़ाकर 100 करोड़ रुपए कर गिया गया था। ‘आस्ति पुनर्संरचना कंपनी’ के लिए अपनी जोखिम भारित आस्तियों / परिसंपत्तियों के 15% का पूंजी पर्याप्तता अनुपात बनाए रखना आवश्यक है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘एआरसी’ क्या हैं?
  2. ‘SARFAESI अधिनियम’ क्या है?
  3. ‘सुदर्शन सेन समिति’ किससे संबंधित है?

मेंस लिंक:

‘आस्ति पुनर्संरचना कंपनी’ (ARC) की भूमिकाओं और कार्यों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

स्टार्टअप इंडिया सीड फंड योजना


(Startup India Seed Fund Scheme)

संदर्भ:

हाल ही में, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री द्वारा ‘स्टार्टअप इंडिया सीड फंड योजना’ (Startup India Seed Fund Scheme- SISFS) की शुरूआत की गई है।

‘स्टार्टअप सीड फंड’ के बारे में:

  • इस फंड का उद्देश्य स्टार्टअप्स की अवधारणा, प्रोटोटाइप विकास, उत्पाद परीक्षणों, बाजार में प्रवेश और व्यावसायीकरण के प्रमाणीकरण को वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
  • पूरे भारतवर्ष में पात्र इनक्यूबेटरों के माध्यम से पात्र स्टार्टअप्स को बीज का वित्तपोषण प्रदान करने के लिए 945 करोड़ की राशि का विभाजन अगले 4 वर्षों में किया जाएगा।
  • इस योजना में 300 इनक्यूबेटर (incubators) के माध्यम से अनुमानित रूप से 3,600 स्टार्टअप्स को सहायता प्रदान करने की संभावना है।
  • नोडल विभाग: उद्योग संवर्द्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT)।

महत्व:

  • ‘स्टार्टअप इंडिया सीड फंड योजना’ ( SISFS), आवश्यक मूल वित्तपोषण सुनिश्चित करने, नवाचार प्रोत्साहन, परिवर्तनकारी विचारों का समर्थन, कार्यान्वयन को सुविधाजनक बनाने और स्टार्टअप क्रांति की शुरूआत करने की दिशा में महत्वपूर्ण काम करेगी।
  • इस योजना के माध्यम से, विशेष रूप से, भारत के द्वि-स्तरीय और त्रि-स्तरीय शहरों में एक मजबूत स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण होगा, ये शहर प्रायः आवश्यक धन से वंचित रह जाते हैं।

इस योजना की आवश्यकता:

  • किसी उद्यम के विकास के शुरुआती चरणों में उद्यमियों के लिए पूंजी की आसान उपलब्धता अति आवश्यक होती है।
  • स्टार्टअप के लिए, एंजेल निवेशकों और वेंचर कैपिटल फर्मों से वित्त, केवल ‘अवधारणा-प्रमाण’ अर्थात ‘प्रूफ ऑफ़ कांसेप्ट’ देने के बाद ही उपलब्ध होता है। इसी प्रकार, बैंक भी केवल परिसंपत्तियों के दस्तावेज आदि जमा करने वाले आवेदकों को ऋण प्रदान करते हैं।
  • अतः, अवधारणा-प्रमाणों / ‘प्रूफ ऑफ़ कांसेप्ट’ के परीक्षण हेतु नवप्रवर्तक विचारों वाले स्टार्टअप को ‘सीड फंडिंग’ प्रदान करना आवश्यक हो जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘स्टार्टअप इंडिया’ योजना क्या है?
  2. ‘स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम’ (SISFS) के बारे में।
  3. पात्रता
  4. लाभ

मेंस लिंक:

स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम (SISFS) के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

शिनजियांग अपराधों के लिए चीन की जांच: ह्यूमन राइट्स वॉच


संदर्भ:

हाल ही में, एक अंतर्राष्ट्रीय ‘ह्यूमन राइट्स वॉच’ (HRW) द्वारा ‘संयुक्त राष्ट्र’ से चीन सरकार द्वारा शिनजियांग क्षेत्र में उइगर मुसलमानों के खिलाफ किए जा रहे अपराधों के आरोपों की जांच करने की अपील की गई है।

संबंधित प्रकरण:

मानवाधिकार समूह द्वारा पश्चिमोत्तर क्षेत्र में ‘बड़े पैमाने पर मुसलमानों को हिरासत में लिए जाने, धार्मिक प्रथाओं पर कड़ी कर्रवाई तथा अल्पसंख्यकों के खिलाफ अन्य कार्रवाईयों संबंधी रिपोर्ट्स’ का हवाला दिया गया है।

समूह ने इन कार्रवाईयों को, ‘अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय’ की स्थापना करने वाले ‘संधिपत्र’ में परिभाषित ‘मानवता के विरुद्ध अपराध’ के समान बताया है।

आवश्यक कार्यवाही:

चूंकि, चीन, ‘रोम संविधि’ (Rome Statute) पर हस्ताक्षर-कर्ता नहीं है, और इसलिए, चीनी राज्य क्षेत्र में तथाकथित किये जा रहे अपराधों पर ‘अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय’ (ICC) का क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र नहीं है।

  • चीन द्वारा, चीनी अधिकारियों के खिलाफ की जाने वाली किसी भी कार्रवाई को रोकने हेतु ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद’ के सदस्य के रूप में अपनी ‘वीटो पॉवर’ का उपयोग किया जा सकता है।
  • अतः, ‘संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग’ (UNHRC) द्वारा आरोपों की जांच करने, अपराधों के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों को चिह्नित करने तथा उनको जवाबदेह ठहराने हेतु एक रोडमैप बनाने के लिए एक ‘निकाय’ का गठन किया जाना चाहिए।

पृष्ठभूमि:

विदेशी सरकारों और शोधकर्ताओं के अनुसार, 1 मिलियन से अधिक लोग शिनजियांग क्षेत्र के शिविरों में कैद हैं।

  • इस क्षेत्र के अधिकारियों पर बलात श्रम करवाने और जन्म-नियंत्रण लागू करने संबंधी आरोप लगाए गए है।
  • चीनी सरकार द्वारा इन सब दुर्व्यवहार संबंधी शिकायतों को खारिज करते हुए कहा जाता है, कि ये शिविर, आर्थिक विकास में सहयोग करने के लिए नौकरी प्रशिक्षण तथा कट्टरपंथ से निपटने हेतु बनाए गए हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. उइगर कौन हैं?
  2. ‘शिनजियांग’ की अवस्थिति?
  3. ‘हान’ चीनी कौन हैं?
  4. शिनजियांग प्रांत की सीमा से लगे भारतीय राज्य।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

यूरोपीय संघ परिषद द्वारा इंडो-पैसिफिक रणनीति के निष्कर्षों का अनुमोदन


संदर्भ:

यूरोपीय संघ परिषद (Council of the European Union) द्वारा ‘बढ़ती चुनौतियों और तनाव’ के दौर में, ‘क्षेत्रीय स्थिरता, सुरक्षा, समृद्धि और सतत विकास में योगदान करने के उद्देश्य से’ अपने रणनीतिक फोकस, उपस्थिति और कार्रवाईयों को सुदृढ़ करने हेतु, यूरोपीय संघ की भारत-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र में सहयोग- रणनीति के निष्कर्ष को मंजूरी प्रदान कर दी गई है।

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र हेतु यूरोपीय संघ की नवीकृत प्रतिबद्धता के अंतर्गत:

  • दीर्घकालिक फोकस रखा जाएगा, और यह प्रतिबद्धता “लोकतंत्र, मानवाधिकारों, कानून के शासन और अंतर्राष्ट्रीय कानून के सम्मान को बनाए रखने” पर आधारित होगी।
  • इसका लक्ष्य, नियम-आधारित प्रभावी बहुपक्षवाद को बढ़ावा देना होगा।
  • कोविड-19 महामारी के आर्थिक और मानवीय प्रभावों को कम करने के लिए एक साथ, समावेशी और स्थाई सामाजिक-आर्थिक सुधार सुनिश्चित करने की दिशा, में काम किया जाएगा।

इसकी आवश्यकता के पीछे कारण:

इंडो-पैसिफिक में वर्तमान गतिशीलता के चलते गहन भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा उत्पन्न हो रही है, जिस कारण व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं के साथ-साथ तकनीकी, राजनीतिक और सुरक्षा क्षेत्रों में भी तनाव बढ़ा है। इन घटनाक्रमों से इस क्षेत्र ओर इसके आप-पास के क्षेत्रों की स्थिरता और सुरक्षा के लिए संकट बढ़ता जा रहा है, जिसका यूरोपीय संघ के हितों पर सीधे प्रभाव पड़ता है।

‘इंडो-पैसिफिक’ क्या है?

एकल रणनीतिक क्षेत्र के रूप में ‘इंडो-पैसिफिक’ (Indo- Pacific) की अवधारणा, हिंद महासागर क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव के परिणाम है। यह, हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के मध्य परस्पर संपर्क तथा सुरक्षा और वाणिज्य के लिए महासागरों के महत्व का प्रतीक है।

‘इंडो-पैसिफिक क्षेत्र’ का महत्व:

  1. क्षेत्रीय संतुलन को बनाए रखने हेतु।
  2. भारत की रणनीतिक स्थिति में बढ़त के लिए, अमेरिका के साथ मजबूत संबंधों को एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में देखा जाता है।
  3. राष्ट्रीय हितों के लिए दीर्घकालिक परिकल्पना।
  4. हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की तेजी से बढ़ती उपस्थिति, व्यापार और सेना के माध्यम से एशिया त्तथा उससे आगे भूराजनीतिक पहुंच का विस्तार करने के चीनी प्रयास।
  5. नौ-परिवहन की स्वतंत्रता, क़ानून-आधारित व्यवस्था का पालन करने तथा व्यापार हेतु सुव्यवस्थित माहौल का निर्माण करने हेतु।
  6. मुक्त समुद्र एवं मुक्त हवाई मार्गो तथा कनेक्टिविटी के लिए; और अंतरराष्ट्रीय नियमों और मानकों को बनाए रखने के लिए।

भारत के लिए ‘इंडो-पैसिफिक क्षेत्र’ की भूमिका एवं निहितार्थ:

  • इंडो-पैसिफिक / हिंद-प्रशांत क्षेत्र, जैसा कि, राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में वर्णित है, विश्व के सबसे अधिक आबादी वाले और आर्थिक रूप से गतिमान हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। यह, भारत के पश्चिमी तट से संयुक्त राज्य के पश्चिमी तट तक विस्तृत है।
  • भारत, सदैव से गंभीर राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं वाला देश रहा है और “इंडो-पैसिफिक स्ट्रैटेजी” अवधारणा का सबसे महत्वपूर्ण पैरोकार है।
  • मुक्त अर्थव्यवस्था के साथ, भारत, हिंद महासागर में आने निकटवर्ती देशों और विश्व की प्रमुख समुद्री शक्तियों के साथ संबंध स्थापित कर रहा है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘प्रशांत क्षेत्र’ के बारे में।
  2. ‘हिंद महासागर क्षेत्र’ का अवलोकन।
  3. इन क्षेत्रों में अवस्थित महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य, खाड़ियाँ और मार्ग।

मेंस लिंक:

भारत के लिए ‘इंडो-पैसिफिक क्षेत्र’ के सामरिक महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

नासा के मंगल हेलीकॉप्टर की दूसरे ग्रह पर पहली उड़ान


संदर्भ:

19 अप्रैल को नासा ने मंगल ग्रह पर अपने छोटे ‘इंजेन्युटी हेलीकॉप्टर’ (Ingenuity Helicopter) को सफलतापूर्वक उड़ाया। किसी अन्य ग्रह पर यह पहली मशीनी उड़ान थी।

‘इंजेन्युटी’ का लक्ष्य इसके तकनीकी कार्यों का प्रदर्शन करना है, और यह ‘परसिवरेंस रोवर’ के वैज्ञानिक उद्देश्यों में कोई योगदान नहीं करेगा।

 

‘परसिवरेंस रोवर’ के बारे में:

  • परसिवरेंस रोवर (Perseverance rover) को, जुलाई 2020 में लॉन्च किया गया था।
  • मंगल ग्रह पर परसिवरेंस अभियान का मुख्य उद्देश्य खगोल-जीवविज्ञान (astrobiology) का अध्ययन तथा प्राचीन सूक्ष्मजीवीय जीवन के खगोलीय साक्ष्यों की खोज करना है।
  • यह रोवर, ग्रह के भूविज्ञान और अतीत के जलवायु के बारे में विवरण उपलब्ध कराएगा तथा मानव जाति के लिए लाल ग्रह के अन्वेषण का मार्ग प्रशस्त करेगा। यह, मंगल ग्रह की चट्टानों तथा रेगोलिथ अर्थात विखंडित चट्टानों और धूल (Reglolith) के नमूने एकत्र करने वाला पहला मिशन होगा।
  • इसमें ईधन के रूप में, प्लूटोनियम के रेडियोधर्मी क्षय से उत्पन्न ताप द्वारा जनित विद्युत शक्ति का उपयोग किया गया है।
  • परसिवरेंस रोवर में MOXIE अथवा मार्स ऑक्सीजन ISRU एक्सपेरिमेंट नामक एक विशेष उपकरण लगा है, जो मंगल ग्रह पर कार्बन-डाइऑक्साइड-समृद्ध वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करके पहली बार आणविक ऑक्सीजन का निर्माण करेगा। (ISRU- In Situ Resource Utilization, अर्थात स्व-स्थानिक संशाधनो का उपयोग)

प्रीलिम्स लिंक:

  1. मंगल मिशन
  2. पर्सविरन्स रोवर – उद्देश्य
  3. पर्सविरन्स रोवर पर उपकरण
  4. UAE के ‘होप’ मिशन तथा चीन के तियानवेन -1 अंतरिक्ष यान के बारे में
  5. पाथफाइंडर मिशन

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

भारत और जर्मनी के मध्य ‘समुद्री पर्यावरण में प्लास्टिक कचरे की समस्‍या’ पर समझौता


संदर्भ:

हाल ही में आयोजित एक वर्चुअल समारोह में, भारत और जर्मनी ने ‘समुद्री पर्यावरण में प्रवेश कर रहे प्लास्टिक कचरे की समस्‍या का सामना कर रहे शहरों’ के बारे में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

प्रमुख तथ्य:

  • इस परियोजना की परिकल्पना, भारत और जर्मनी गणराज्‍य के बीच ‘समुद्री कचरे की रोकथाम’ (Prevention of Marine Litter) के क्षेत्र में सहयोग के उद्देश्‍य से हस्ताक्षरित संयुक्त घोषणापत्र की रूपरेखा के तहत वर्ष 2019 में की गई थी।
  • इस परियोजना को, समुद्री पर्यावरण में प्‍लास्टिक को रोकने की व्‍यवस्‍था बढ़ाने के उद्देश्‍य से, राष्ट्रीय स्तर (MoHUA), चुनिंदा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (उत्तर प्रदेश, केरल और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह) और कानपुर, कोच्चि और पोर्ट ब्लेयर शहरों में साढ़े तीन साल की अवधि के लिए चालू किया जाएगा।
  • इस परियोजना के परिणाम पूरी तरह से स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के उद्देश्यों के अनुरूप हैं, जिसमें निरंतर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

समुद्री कचरे के प्रभाव:

  1. समुद्री कूड़ा पर्यावरण के लिए खतरा है और दुनिया भर में मत्स्य और पर्यटन उद्योगों पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।
  2. अर्थव्‍यवस्‍था पर नकारात्मक प्रभाव डालने के अलावा, यह सूक्ष्म प्‍लास्टिक के बारे में बढ़ती चिंताओं और खाद्य श्रृंखला में प्रवेश करने वाले कणों के जोखिम के साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।
  3. अनुमानतः सभी प्लास्टिक का 15-20% नदियों के बहते पानी के रास्‍ते महासागरों में प्रवेश कर रहा है, जिनमें से 90% योगदान दुनिया की 10 सबसे प्रदूषित नदियां करती हैं। इनमें से दो नदियां गंगा और ब्रह्मपुत्र भारत में प्रवाहित होती हैं।

स्रोत: पीआईबी

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


वंदे भारत मिशन

वंदे भारत मिशन (Vande Bharat Mission- VBM), जिसके तहत कोविड-19 और परिणामी लॉकडाउन के कारण विदेशों में फंसे भारतीयों को, पिछली 7 मई से वापस लाना शुरू किया गया था, किसी भी देश द्वारा शुरू किए गए नागरिकों के सबसे बड़े निर्वातन / निकासी (evacuations) में से एक बन गया है।

अब तक, एयर इंडिया (AI) समूह द्वारा 18,19,734 यात्रियों को वापस लाने के लिए 11,523 अंतर्गामी (inbound) उड़ाने भरी गई हैं तथा 13,68,457 यात्रियों को देश से बाहर ले जाने के लिए 11,528 अन्य देश को जाने वाली / निर्गामी (outbound) उड़ाने भरी गई हैं।

वंदे भारत मिशन के तहत, इस बड़ी संख्या में हवाई मार्ग से स्थानांतरण करने वाले राष्ट्रीय वाहक को इसके बजट कैरियर एयर इंडिया एक्सप्रेस द्वारा सहायता प्रदान की गई है।


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