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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 19 April 2021

 

विषयसूची

 सामान्य अध्ययन-I

1. श्री रामानुजाचार्य

 

सामान्य अध्ययन-II

1. गोवा की नागरिक संहिता

2. अंतर्राष्ट्रीय स्मारक एवं पुरातत्व स्थल दिवस

 

सामान्य अध्ययन-III

1. राष्ट्रीय जलवायु भेद्यता आकलन रिपोर्ट

2. कैरेबियाई ज्वालामुखी से उत्सर्जित सल्फर डाइऑक्साइड के भारत पहुचने की पुष्टि

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. डिस्क-फुटेड चमगादड़

2. चोलिस्तान मरुस्थल

3. टिकी विन्यास

 


सामान्य अध्ययन-I


 

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

श्री रामानुजाचार्य


संदर्भ:

18 अप्रैल, 2021 को श्री रामानुजाचार्य की 1004 वीं जयंती मनाई गई।

श्री रामानुजाचार्य के बारे में:

  • इनका जन्म 1017 ईस्वी में तमिलनाडु में हुआ था।
  • इन्हें श्री वैष्णववाद दर्शन का सबसे सम्मानित आचार्य माना जाता है।
  • इन्हें इलाया पेरूमल (Ilaya Perumal) के रूप में भी जाना जाता है जिसका अर्थ होता है प्रकाशमान।
  • इनके भक्तिवाद के दार्शनिक तत्वों से भक्ति आंदोलन पर गहरा प्रभाव पड़ा था।
  • ये वेदान्त दर्शन परंपरा में ‘विशिष्टाद्वैत’ के प्रवर्तक के रूप में प्रसिद्ध हैं।
  • उन्होंने ब्रह्म सूत्र और भगवत गीता पर भाष्य जैसे कई महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना की, इनकी सभी रचनाएं संस्कृत भाषा में लिखी गई हैं।

‘विशिष्टाद्वैत’ क्या है?

  • यह वेदांत दर्शन की एक अद्वैतवादी परंपरा है। यह सर्वगुण-संपन्न परमसत्ता का अद्वैतवाद है, जिसमे मात्र ब्रह्म का असितत्व माना जाता है, लेकिन इसकी अभिव्यक्ति विविध रूपों में होती है।
  • इसे परिमित वेदांत, अथवा सर्वगुण-संपन्न अद्वैतवाद अथवा या योग्य गैर-द्वैतवाद या गुण-सूचक अद्वैतवाद के रूप में भी वर्णित किया जाता है।
  • वेदांत दर्शन की इस परंपरा यह मानती है, कि संपूर्ण जगत की विविधता अथवा बहुरूपता एक ही मूलभूत सत्ता में समाहित होती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. श्री रामानुजाचार्य के बारे में
  2. अद्वैत दर्शन के बारे में
  3. भक्ति आंदोलन के बारे में

मेंस लिंक:

द्वैत और अद्वैत दर्शन परम्पराओं के मध्य भिन्नता।

स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

गोवा की नागरिक संहिता


(Goa’s Civil Code)

संदर्भ:

हाल ही में, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) एस ए बोबडे ने हाल ही में गोवा की ‘समान नागरिक संहिता’ (Uniform Civil Code- UCC) की सराहना करते हुए, इसे लागू करने वाला एकमात्र राज्य बताया था।

मुख्य न्यायाधीश ने ‘बुद्धिजीवियों’ से गोवा की ‘समान नागरिक संहिता’ का गंभीरता से अध्ययन करने का आग्रह भी किया था।

गोवा की ‘समान नागरिक संहिता’ के बारे में:

  1. गोवा की पुर्तगाली नागरिक संहिता, 1867, मूलतः पुर्तगालियों द्वारा बनाया गया एक विदेशी संहिता / कोड है।
  2. गोवा की ‘नागरिक संहिता’ / सिविल कोड के चार भाग हैं, जो ‘नागरिकों की धारण शक्ति’ (Civil Capacity), ‘अधिकारों का अधिग्रहण’, ‘संपत्ति का अधिकार’ और ‘अधिकारों और उपचारों का उल्लंघन’ से संबंधित हैं।
  3. इसकी शुरुआत, ‘गॉड और डोम लुइस, पुर्तगाल के राजा और अल्गार्वे’ के नाम से होती है।
  4. यह संहिता, गोवा, दमन और दीव प्रशासन अधिनियम, 1962 की धारा 5 (1) के कारण अभी भी लागू है, इस अधिनियम के तहत गोवा की ‘नागरिक संहिता’ को जारी रखने की अनुमति दी गई थी।

संबंधित संवैधानिक प्रावधान:

संविधान के अनुच्छेद 44 में कहा गया है, कि देश में एक ‘समान नागरिक संहिता’ (UCC) होनी चाहिए। इस अनुच्छेद के अनुसार, ‘राज्य, भारत के समस्त राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक ‘समान सिविल संहिता’ सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा।‘ चूंकि ‘नीति-निदेशक सिद्धांत’ प्रकृति में केवल दिशा-निर्देशीय हैं, अतः राज्यों के लिए इनका पालन करना अनिवार्य नहीं है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘समान नागरिक संहिता’ (UCC) के बारे में।
  2. ‘राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत’ (DPSP) क्या हैं।
  3. DPSP का प्रवर्तन।
  4. शाह बानो केस किससे संबंधित है?

मेंस लिंक:

इस बिंदु पर ‘समान नागरिक संहिता’ (UCC) वांछनीय क्यों नहीं है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

अंतर्राष्ट्रीय स्मारक एवं पुरातत्व स्थल दिवस


(International Day for Monuments and Sites)

संदर्भ:

प्रतिवर्ष संयुक्त राष्ट्र द्वारा 18 अप्रैल को ‘अंतर्राष्ट्रीय स्मारक एवं पुरातत्व स्थल दिवस’ (International Day for Monuments and Sites) के रूप में घोषित किया गया है।

  • कई देशों में इस दिन को ‘विश्व विरासत दिवस’ (World Heritage Day) के रूप में भी मनाया जाता है।
  • इस वर्ष के ‘विश्व विरासत दिवस’ का विषय है: “मिश्रित भूत: विविधतापूर्ण भविष्य” (Complex Pasts: Diverse Futures)।
  • वैश्विक स्तर पर, इस दिवस को अंतर्राष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल परिषद’ (International Council on Monuments and SitesICOMOS) द्वारा आयोजित किया जाता है।

‘विश्व विरासत स्थल’ क्या है?

  • ये संयुक्त राष्ट्र और संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (United Nations Educational, Scientific and Cultural Organization- UNESCO) अर्थात यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त स्थल होते हैं। विश्व धरोहर के रूप में वर्गीकृत स्थलों को, यूनेस्को मानवता के लिए महत्वपूर्ण मानता हैं, क्योंकि ये स्थल सांस्कृतिक और भौतिक रूप से महत्वपूर्ण होते हैं।
  • विश्व धरोहर स्थलों की सूची, यूनेस्को की ‘विश्व विरासत समिति’ द्वारा प्रशासित ‘अंतर्राष्ट्रीय विश्व धरोहर कार्यक्रम’ द्वारा तैयार की जाती है। इस समिति में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा निर्वाचित यूनेस्को के 21 सदस्य देश शामिल होते है।
  • प्रत्येक विश्व धरोहर स्थल, जहाँ वह अवस्थित होता है, उस देश के वैधानिक क्षेत्र का भाग होता है तथा यूनेस्को द्वारा इसके संरक्षण को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के हित में माना जाता है।

‘विश्व विरासत स्थल’ के लिए अर्हता:

विश्व विरासत स्थल के रूप में चयनित होने के लिए, किसी स्थल को पहले से ही भौगोलिक एवं ऐतिहासिक रूप से विशिष्ट, सांस्कृतिक या भौतिक महत्व वाले स्थल के रूप में अद्वितीय, विशिष्ट स्थल चिह्न अथवा प्रतीक के रूप में वर्गीकृत होना चाहिए।

भारत में विश्व विरासत स्थल:

पूरे विश्व में यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त 1121 विश्व धरोहर स्थलों में से, 38 विश्व विरासत संपत्तियां 38 विश्व विरासत परिसंपत्तियां भारत में अवस्थित है।

  • इनमें से 30 धरोहर स्थलों को ‘सांस्कृतिक’ तथा 7  को ‘प्राकृतिक विरासत स्थलों’ के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इसके अलावा, एक विरासत स्थल “खांग्चेंडज़ोंगा राष्ट्रीय उद्यान” (Khangchendzonga National Park) को ‘मिश्रित’ विरासत स्थल के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
  • वर्ष 2019 में, ’जयपुर सिटी’, भारत के विश्व धरोहर स्थलों की ‘सांस्कृतिक’ सूची के तहत 38 वाँ विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था।
  • अब तक, भारत की तुलना में केवल चीन, इटली, स्पेन, जर्मनी और फ्रांस की विश्व विरासत सूचियों में अधिक स्थान शामिल हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. किसी स्थल को ‘विश्व विरासत स्थल’ किसके द्वारा घोषित किया जाता है?
  2. संकटग्रस्त सूची क्या है?
  3. संभावित सूची क्या है?
  4. भारत में ‘विश्व विरासत स्थल’ और उनकी अवस्थिति

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

राष्ट्रीय जलवायु भेद्यता आकलन रिपोर्ट


(National climate vulnerability assessment)

संदर्भ:

  • हाल ही में, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा ‘राष्ट्रीय जलवायु भेद्यता आकलन (National climate vulnerability assessment) रिपोर्ट जारी की गई है।
  • इस रिपोर्ट का शीर्षक है, ‘उभयनिष्ठ रूपरेखा के माध्यम से भारत में अनुकूलन योजना तैयार करने हेतु जलवायु भेद्यता आकलन’ (Climate Vulnerability Assessment for Adaptation Planning in India Using a Common Framework)।
  • इस रिपोर्ट में वर्तमान जलवायु संबंधी जोखिमों और भेद्यता के प्रमुख चालकों के लिहाज से भारत के सबसे संवेदनशील राज्यों और जिलों की पहचान की गई है।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष:

  • रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन की दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील राज्यों के रूप में, ‘झारखंड, मिजोरम, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, असम, बिहार, अरुणाचल प्रदेश, और पश्चिम बंगाल’ को चिंहित किया है।
  • अधिकांशतः, देश के पूर्वी हिस्से में स्थित इन राज्यों में अनुकूलन संबंधी उपायों को प्राथमिकता देने की जरूरत है।

भेद्यता आकलन की आवश्यकता:

  • बदलावों के प्रतिसंवेदनशील माने जाने वाले भारत के हिस्सों को मानचित्र पर चिन्हित कर लेने से जमीनी स्तर पर जलवायु से संबंधित कार्रवाइयों को शुरू करने में मदद मिलेगी।
  • यह आकलन जलवायु परिवर्तन से संबंधित उपयुक्त कार्रवाइयों को शुरू करने में नीति निर्माताओं की मदद करेगा।
  • यह बेहतर तरीके से डिज़ाइन किए गए जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन से संबंधित परियोजनाओं के विकास के जरिए पूरे भारत में जलवायु परिवर्तन के लिहाज से कमजोर समुदायों को लाभान्वित करेगा।
  • इन आकलनों का उपयोग पेरिस समझौते के तहत राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदानों से जुड़ी भारत की रिपोर्टिंग के लिए किया जा सकता है। और अंत में, ये आकलन जलवायु परिवर्तन से संबंधित भारत की राष्ट्रीय कार्य योजना को मदद देंगे।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष
  2. रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिवर्तन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील राज्य कौन से है।

मेंस लिंक:

जलवायु परिवर्तन भेद्यता क्या है? यह महत्वपूर्ण क्यों है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

कैरेबियाई ज्वालामुखी से उत्सर्जित सल्फर डाइऑक्साइड के भारत पहुचने की पुष्टि


संदर्भ:

हाल ही में, विश्व मौसम विज्ञान संगठन (World Meteorological OrganizationWMO) ने पुष्टि की है, कि कैरिबियन क्षेत्र में हुए एक ज्वालामुखी विस्फोट (ला सौफ्रिएरे वल्कैनो- La Soufriere volcano) से उत्सर्जित होने वाली सल्फर डाइऑक्साइड (SO2), 16 अप्रैल 2021 को भारतीय वायुमंडल में पहुँच चुकी है, जिससे देश के उत्तरी भागों में प्रदूषण-स्तर बढ़ने तथा अम्लीय वर्षा (acid rain) की आशंका तीव्र हो गई है।

वैज्ञानिकों को, पृथ्वी के वायुमंडल की दूसरी परत, ‘समताप मंडल’ में भी ‘सल्फेट के ऐरोसॉल कणों’ (सल्फ्यूरिक एसिड के पूर्ववर्ती कण) के पहुँचने संबंधी साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। संभवतः इसी वजह से ये कण भारत तक पहुंचे हैं और इनके दक्षिण पूर्व एशिया के वायुमंडल तक पहुंचने की संभावना है।

प्रभाव और निहितार्थ:

  • ‘समताप मंडल’ में ज्वालामुखीय अंत:क्षेपण का सबसे महत्वपूर्ण जलवायु प्रभाव, सल्फर डाइऑक्साइड का सल्फ्यूरिक एसिड में रूपांतरण होने से होता है। सल्फ्यूरिक एसिड ‘समताप मंडल’ में तेजी से संघनित होकर सल्फेट के ऐरोसॉल (aerosols) कणों का निर्माण करता है।
  • ऐरोसॉल कण, सौर विकरण के वापस अंतरिक्ष में होने वाले परावर्तन को तीव्र कर देते है, जिससे पृथ्वी के निचले वायुमंडल अर्थात ‘क्षोभमंडल’ (Troposphere) सामान्य से ठंडा हो जाता है।

सल्फर डाइऑक्साइड- स्रोत:

  • वातावरण में उपस्थित ‘सल्फर डाइऑक्साइड’ (SO2) का सबसे बड़ा स्रोत विद्युत् संयंत्रों और अन्य औद्योगिक कारखानों द्वारा जीवाश्म ईंधन का दहन होता है।
  • ‘सल्फर डाइऑक्साइड’ उत्सर्जन के छोटे स्रोतों में, अयस्कों से धातु निष्कर्षण जैसी औद्योगिक प्रक्रियाएँ; प्राकृतिक स्रोत जैसे ज्वालामुखी; और रेल-इंजन, जहाज और अन्य वाहन तथा अधिक मात्रा में सल्फर युक्त ईधन का दहन करने वाले भारी उपकरण आदि शामिल होते हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. सल्फर डाइऑक्साइड के बारे में।
  2. पर्यावरण पर स्रोत और प्रभाव।
  3. ला सौफ्रिएरे ज्वालामुखी।
  4. ज्वालामुखी विस्फोट से उत्पन्न होने वाले विभिन्न प्रदूषक।

स्रोत: डाउन टू अर्थ

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


डिस्क-फुटेड चमगादड़

(Disc-footed bat)

हाल ही में, मेघालय में बांस के वृक्षों पर रहने वाले भारत के पहले चमगादड़ को देखा गया है, इसके डिस्क (पंजो का आंतरिक भाग) चिपचिपा होता है।

  • ये डिस्क-फुटेड चमगादड़ (यूडिसकोपस डेंटिकुलस- Eudiscopus denticulus), म्यांमार के अपने निकटतम ज्ञात निवास स्थान से लगभग 1,000 किमी पश्चिम में स्थित नोंगखिल्लेम वन्यजीव अभयारण्य (Nongkhyllem Wildlife Sanctuary) के निकट मेघालय के लाईलाड क्षेत्र (Lailad area) में डिस्क-फुट बैट (यूडिसकोपस डेंटिकुलस) देखा गया है।
  • डिस्क-फुट चमगादड़ को पाए जाने के बाद मेघालय में चमगादडों की संख्या 66 हो गई है, जो भारत के किसी भी राज्य में सर्वाधिक है। इससे भारत में पाए जाने वाली चमगादड़ प्रजातियों में एक और प्रजाति बढ़ी है।

चोलिस्तान मरुस्थल

(Cholistan desert)

  • पाकिस्तान में अवस्थित है।
  • हाल ही में, इस मरुस्थल में ‘दो ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ (GIBs) का शिकार किया गया था, इस कारण से यह चर्चा में था।
  • ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ राजस्थान का राज्य पक्षी है, और भारत का सर्वाधिक गंभीर रूप से लुप्तप्राय पक्षी माना जाता है।
  • ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ की आबादी राजस्थान में 100 से कम है और यह इसकी कुल आबादी का 95% है।
  • अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (International Union for Conservation of Nature-IUCN) द्वारा वर्ष 1994 में ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ को ‘संकटग्रस्त’ के रूप में वर्गीकृत किया गया था, किंतु इन बड़े पक्षियों को अस्तित्व के लिए लगातार खतरों को देखते हुए, इस प्रजातियों को, वर्ष 2011 में “गंभीर रूप से संकटग्रस्त” की श्रेणी में शामिल करना पड़ा।
  • राजस्थान में वन्यजीव अधिकारियों द्वारा एक लंबी बहस के बाद वर्ष 2019 में देहरादून स्थित वन्यजीव संस्थान द्वारा निष्पादित परियोजना के माध्यम से राजस्थान के डेजर्ट नेशनल पार्क (DNP) में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ की कैप्टिव प्रजनन की अनुमति प्रदान की गई थी।

टिकी विन्यास

(Tiki Formation)

टिकी विन्यास, मध्य प्रदेश में पाया गया एक ट्राइसिक भूगर्भिक काल के अंतिम दौर का एक ‘विन्यास’ है। यह कशेरुक जीवाश्मों का एक खजाना है।

जीवाश्मों के इस खजाने में डायनासोर के अवशेष पाए गए है, हालांकि इनमे से अभी तक किसी भी विशिष्ट प्रजाति का निर्धारण नहीं किया गया है।

चर्चा का कारण:

मध्य प्रदेश में टिकी फॉर्मेशन / विन्यास, कशेरुकी जीवाश्मों का खजाना है, जिसमे लगभग 220 मिलियन साल पहले जीवित रहने वाली एक नई प्रजाति और सिनॉडोन प्रजाति के दो जीनस, छोटे चूहे जैसे जानवर आदि के जीवश्म पाए गए हैं।


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