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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 14 April 2021

 

विषयसूची

 सामान्य अध्ययन-I

1. ‘स्काईमेट’ द्वारा ‘अच्छे मानसून’ का पूर्वानुमान

 

सामान्य अध्ययन-II

1. मुख्य निर्वाचन आयुक्त

2. चंडीगढ़ का साइकिलिंग नीति मसौदा

3. नागालैंड के स्थानीय नागरिकों का रजिस्टर (RINN)

4. बाजार में जीवित वन्य स्तनधारी जीवों की बिक्री पर रोक लगाने का आग्रह

 

सामान्य अध्ययन-III

1. इंडियन राइनो विज़न 2020

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. ‘उरुका’ क्या है?

2. ‘ईवीआर पेरियार सलाई’ का नाम ग्रैंड वेस्टर्न ट्रंक (GWT) रोड

3. सेरोजा (Seroja)

4. पोषण ज्ञान

5. ई-सांता (e-SANTA)

6. नवजात, छोटे बच्चे तथा उनकी देखभाल करने वाले लोगों के अनुकूल पड़ोस प्रशिक्षण तथा क्षमता सृजन कार्यक्रम

7. आहार क्रांति

 


सामान्य अध्ययन-I


 

विषय: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, भौगोलिक विशेषताएँ और उनके स्थान।

स्काईमेटद्वारा ‘अच्छे मानसून’ का पूर्वानुमान


संदर्भ:

स्काईमेट (एक निजी मौसम पूर्वानुमान कंपनी) की मौसम संबंधी रिपोर्ट:

  1. इस वर्ष, मानसून की अवधि, ‘औसतन दीर्घावधि’ (long period average– LPA) की 103% रहने की संभावना है। ‘औसतन दीर्घावधि’ (LPA) का तात्पर्य ‘अखिल भारतीय मानसूनी वर्षा’ के औसत (88 सेमी) से है, जोकि 50 वर्षों की औसतन ‘मानसूनी वर्षा’ के आधार पर निर्धारित किया गया है
  2. इस वर्ष, ‘अल-नीनो’ की संभावना काफी कम है। ‘अल-नीनो’ के दौरान, भूमध्यरेखीय मध्य प्रशांत महासागर के तापमान में आधे डिग्री से अधिक की वृद्धि हो जाती है। वर्तमान में, प्रशांत महासागर में [विपरीत] ‘ला-नीना’ की स्थिति व्याप्त है।
  3. पूर्वोत्तर भारत के कुछ भागों सहित, उत्तर भारत के मैदानी इलाकों इलाकों में मानसून के दौरान कम वर्षा होने की आशंका है।
  4. इस वर्ष ‘हिंद महासागरीय द्विध्रुव’ (Indian Ocean Dipole- IOD), जो पश्चिमी और पूर्वी हिंद महासागर में ‘तापमान प्रवणता’ को व्यक्त करता है, के कुछ हद तक ‘नकारात्मक’ रहने की संभावना है। सकारात्मक ‘हिंद महासागर द्विध्रुव’ (IOD), आमतौर पर मानसून के लिए सहायक होता है।
  5. वर्ष 2019 और 2020 में मानसून के दौरान भारत में, लगातार वर्षों में, सदी में केवल तीसरी बार, सामान्य वर्षा औसतन से अधिक (अर्थात सामान्य वर्षा के 5% से अधिक अथवा 105%) होगी।

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‘हिंद महासागरीय द्विध्रुव’ (IOD) क्या है?

यह, उष्णकटिबंधीय हिंद महासागर में अल-नीनो के समान, वायुमंडल- महासागर के अंतर्संबंध से उत्पन्न की एक परिघटना होती है। ‘हिंद महासागरीय द्विध्रुव’ की स्थिति में सागरीय सतह के तापमान में भिन्नता उत्पन्न होती है।

प्रमुख विशेषताऐं:

  • ‘हिंद महासागरीय द्विध्रुव’ (IOD), पूर्वी हिंद महासागर (बंगाल की खाड़ी) और पश्चिमी हिंद महासागर (अरब सागर) की सतह के तापमान का अंतर होता है।
  • इस तापमान-भिन्नता के परिणामस्वरूप वायुमंडलीय दबाव में अंतर उत्पन्न होता है, जिसके परिणामस्वरूप हिंद महासागर के पूर्वी और पश्चिमी भागों में हवाओं का संचरण होने लगता हैं।
  • ‘सकारात्मक हिंद महासागरीय द्विध्रुव’या केवल ‘हिंद महासागरीय द्विध्रुव’, के दौरान पूर्वी भूमध्यरेखीय हिंद महासागर में समुद्री सतह के सामान्य तापमान से ठंडा, तथा पश्चिमी उष्णकटिबंधीय हिंद महासागर में समुद्री सतह के सामान्य तापमान से अधिक गर्म होता है।
  • इसके विपरीत घटना को नकारात्मक हिंद महासागरीय द्विध्रुव’ कहा जाता है, और इस स्थिति में, पूर्वी भूमध्यरेखीय हिंद महासागर में तापमान सामान्य से अधिक गर्म, तथा पश्चिमी उष्णकटिबंधीय हिंद महासागर में सामान्य से ठंडा होता है।

प्रभाव:

  • अध्ययनों से पता चला है, कि एक ‘पॉजिटिव IOD’ अर्थात ‘सकारात्मक ‘हिंद महासागरीय द्विध्रुव’ के साल, मध्य भारत में सामान्य से अधिक वर्षा होती है।
  • ‘नेगेटिव आईओडी’, अल नीनो की तीव्रता में वृद्धि करता है, और जिससे गंभीर सूखे की स्थिति उत्पन्न होती है।
  • इसी समय, ‘पॉजिटिव आईओडी’ के कारण अरब सागर में सामान्य से अधिक चक्रवात उत्पन्न होते हैं।
  • ‘नेगेटिव आईओडी’ के कारण, बंगाल की खाड़ी में सामान्य से अधिक शक्तिशाली चक्रवात-उत्पत्ति (उष्णकटिबंधीय चक्रवातों का निर्माण) की स्थितियां निर्मित होती हैं। इस दौरान अरब सागर में ‘चक्रवात-उत्पत्ति’ प्रक्रिया मद्धिम हो जाती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘अल नीनो’ क्या है?
  2. ‘ला नीना’ क्या है?
  3. ENSO क्या है?
  4. ये घटनाएँ कब होती हैं?
  5. एशिया, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया पर ENSO का प्रभाव।
  6. ‘हिंद महासागर द्विध्रुव’ क्या है?

मेंस लिंक:

भारत पर ‘ला नीना’ मौसमी घटना के प्रभाव पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: विभिन्न संवैधानिक पदों पर नियुक्ति और विभिन्न संवैधानिक निकायों की शक्तियाँ, कार्य और उत्तरदायित्व।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त


(Chief Election Commissioner)

संदर्भ:

हाल ही में, ‘सुशील चंद्रा’ ने भारत के 24 वें ‘मुख्य निर्वाचन आयुक्त’ के रूप में पदभार ग्रहण किया है।

भारत निर्वाचन आयोग के बारे में:

‘भारत निर्वाचन आयोग’ (Election commission of India- ECI) एक स्‍वायत्त संवैधानिक प्राधिकरण है जो भारत में संघ एवं राज्‍य निर्वाचन प्रक्रियाओं का संचालन करने के लिए उत्तरदायी है।

  • यह निकाय भारत में लोक सभा, राज्‍य सभा, राज्‍य विधान सभाओं, देश में राष्‍ट्रपति एवं उप-राष्‍ट्रपति के पदों के लिए निर्वाचनों का संचालन करता है।
  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत संसद, राज्य विधानमंडल, राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति के पदों के निर्वाचन के लिए संचालन, निर्देशन व नियंत्रण तथा निर्वाचक मतदाता सूची तैयार कराने के लिए निर्वाचन आयोग का प्रावधान किया गया है।

भारत निर्वाचन आयोग की संरचना

संविधान में चुनाव आयोग की संरचना के संबंध में निम्नलिखित उपबंध किये गए हैं:

  1. निर्वाचन आयोग मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा अन्य आयुक्तों से मिलकर बना होता है
  2. मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जायेगी
  3. जब कोई अन्य निर्वाचन आयुक्त इस प्रकार नियुक्त किया जाता है तो मुख्य निर्वाचन आयुक्त निर्वाचन आयोग के अध्यक्ष के रूप में कार्य करेगा।
  4. राष्ट्रपति, निर्वाचन आयोग की सहायता के लिए आवश्यक समझने पर, निर्वाचन आयोग की सलाह से प्रादेशिक आयुक्तों की नियुक्ति कर सकता है।
  5. निर्वाचन आयुक्तों और प्रादेशिक आयुक्तों की सेवा शर्तें तथा पदावधि राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित की जायेंगी।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) तथा अन्य निर्वाचन आयुक्त (EC):

यद्यपि मुख्य निर्वाचन आयुक्त, निर्वाचन आयोग के अध्यक्ष होते हैं,फिर भी उनकी शक्तियाँ अन्य निर्वाचन आयुक्तों के सामान होती हैं। आयोग के सभी मामले, सदस्यों के मध्य बहुमत के द्वारा तय किए जाते हैं। मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा दो अन्य निर्वाचन आयुक्तों को वेतन, भत्ते व अन्य अनुलाभ एक-सामान प्राप्त होते हैं।

पदावधि:

मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा अन्य निर्वाचन आयुक्तों का कार्यकाल छह वर्ष अथवा 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, तक होता है। वे राष्ट्रपति को संबोधित करते हुए किसी भी समय त्यागपत्र दे सकते हैं।

पदत्याग:

  • वे किसी भी समय त्यागपत्र दे सकते हैं या उन्हें कार्यकाल समाप्त होने से पूर्व भी हटाया जा सकता है।
  • मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से उसी रीति से व उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिन पर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को हटाया जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) तथा अन्य निर्वाचन आयुक्त (EC) के बारे में।
  2. नियुक्ति
  3. पदत्याग
  4. कार्यकाल
  5. कार्य
  6. संबंधित संवैधानिक प्रावधान

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

चंडीगढ़ का साइकिलिंग नीति मसौदा


संदर्भ:

हाल ही में, चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा, अपनी तरह का पहला, ‘साइकिल चलाने संबंधी नीति’ अर्थात ‘साइकिलिंग नीति’ का मसौदा जारी किया गया है।

भारत में किसी शहर द्वारा पहली बार साइकिलिंग नीति का मसौदा तैयार किया गया है। यह मसौदा चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा तैयार किया गया है।

मसौदे के प्रमुख बिंदु:

  • महिला साइकिल चालकों के लिए पैनिक बटन से लैस सुरक्षित शरणस्थान।
  • कार्यालयों के बाहर पार्किंग के लिए छतदार जगह।
  • प्रत्येक सात दिनों तक काम पर साइकिल से जाने पर आधे दिन का अवकाश दिया जाएगा।
  • एक विशिष्ट दूरी तक साइकिल से आने-जाने पर मौद्रिक प्रोत्साहन।
  • दुर्घटनाओं की आशंकाओं को कम करने हेतु गैर-मोटर चालित परिवहन लाइनों में वृद्धि।
  • प्रत्येक सरकारी कार्यालय तथा सभी प्रकार के निजी संस्थानों द्वारा काम पर साइकिल से आने को प्रोत्साहित करने हेतु एक अलग नीति तैयार की जाएगी।
  • सुरक्षा बढ़ाने के लिए, महिलाओं और विकलांग व्यक्तियों के लिए, 24X7 सीसीटीवी निगरानी और पैनिक बटन से लैस सुरक्षित शरणस्थान बनाए जाने चाहिए।

नीति की आवश्यकता:

‘साइकिलिंग नीति’, शहर में साइकिल-चलाने को प्रोत्साहित करने हेतु सरकार का एक शक्तिशाली उपकरण हो सकता है। यह पर्यावरण अनुकूल, स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन का एक साधन है। यह, शहरी क्षेत्रों में कम दूरी की यात्रा के लिए कारों का विकल्प हो सकती है। अतः, शहरी परिवहन नीति के तहत, साइकिलिंग पर, शहरी यात्रा और अन्य भूमि उपयोग नीतियों के साथ एकीकृत संदर्भ में विचार करना चाहिए।

साइकिल चलाने के लाभ:

  1. उत्सर्जन और शोर से मुक्त।
  2. लागत प्रभावी- इसे मामूली कीमत पर खरीदा जा सकता है और मरम्मत जा सकती है और यह ऊर्जा-सक्षम भी है।
  3. इसके लिए कम स्थान की जरूरत होती है, और कारों के लिए जरूरी पार्किंग सुविधाएं आदि की तुलना में कम लागत पर साइकिल पथ और पार्किंग सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

नागालैंड के स्थानीय नागरिकों का रजिस्टर (RINN)


(Register of Indigenous Inhabitants of Nagaland)

संदर्भ:

सूचनाओं के अनुसार, नागालैंड सरकार द्वारा ‘नागालैंड के स्थानीय नागरिकों का रजिस्टर’ (Register of Indigenous Inhabitants of Nagaland-RIIN) तैयार करने संबंधी प्रक्रिया को फिर से शुरू करने की कोशिश की जा रही है।

‘नागालैंड के स्थानीय नागरिकों का रजिस्टर’ (RINN) क्या है?

RINN कार्यक्रम, जुलाई 2019 में शुरू किया गया था।

  • इसका उद्देश्य, बाहरी लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने तथा नौकरी हासिल करने के लिए नकली ‘मूल निवासी प्रमाण पत्र’ प्राप्त करने पर रोक लगाना है।
  • ‘नागालैंड के स्थानीय नागरिकों का रजिस्टर’ (RINN), राज्य के सभी मूल निवासियों की प्रधान सूची होगी।
  • यह सूची “एक व्यापक सर्वेक्षण” के आधार पर तैयार की जाएगी।
  • इसमें ग्रामीण और (शहरी) वार्ड स्तर पर मूल निवासियों के आधिकारिक रिकॉर्ड शामिल किए जाएंगे और इसे जिला प्रशासन की देखरेख में तैयार किया जाएगा।

चिंता का विषय:

  • यदि ‘नागालैंड के स्थानीय नागरिकों का रजिस्टर’ (RINN) के समर्थकों द्वारा ‘पहचान प्रक्रिया’ के तहत, 1 दिसंबर, 1963’- नागालैंड को राज्य का दर्जा मिलने की तारीख’– राज्य के ‘स्थाई निवासियों’ का निर्धारण करने की अंतिम तिथि के रूप में लागू किया गया, तो इसके परिणामस्वरूप होने वाले “भयानक नतीजों” के प्रति स्थानीय निवासी में भारी आशंका है।
  • यह तारीख निर्धारित किए जाने से, नागालैंड की सीमाओं से बाहरी क्षेत्रों से आकर बसे ‘नागाओं’ को ‘सूची’ से बाहर किए जाने की संभावना है।
  • उन्हें यह भी डर है, कि गैर-स्थानीय नागाओं को “अवैध आप्रवासियों” के रूप में माना जा सकता है और उनकी भूमि और संपत्ति को जब्त किया जा सकता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. RIIN के बारे में
  2. प्रयोज्यता
  3. RIIN बनाम NRC

मैंस लिंक:

‘नागालैंड के स्थानीय नागरिकों का रजिस्टर’ (RINN)  प्रक्रिया से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

बाजार में जीवित वन्य स्तनधारी जीवों की बिक्री पर रोक लगाने का आग्रह


संदर्भ:

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (World Organisation for Animal Health / OIE) और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (United Nations Environment Programme- UNEP) द्वारा कोविड-19 जैसी नई बीमारियों के पैदा होने से रोकने हेतु खाद्य बाजारों में जीवित वन्य स्तनधारियों की बिक्री को रोकने का आह्वान किया गया है।

आवश्यकता:

  • चूंकि, पारंपरिक बाजार, बड़ी आबादी के लिए भोजन और आजीविका प्रदान करने में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं, जीवित वन्य स्तनधारियों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने से बाजार में काम करने वाले श्रमिकों और ग्राहकों के स्वास्थ्य की रक्षा की जा सकती है।
  • जीव, विशेष रूप से वन्य जीव, मनुष्यों में होने वाले सभी संक्रामक रोगों के 70% से अधिक रोगों का स्रोत होता है, जिसमे से अधिकाँश नए विषाणुओं के कारण होते हैं। वन्य स्तनधारियों से, विशेष रूप से नई बीमारियों के होने का खतरा होता है।

विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (World Organisation for Animal Health / OIE) के बारे में:

वैश्विक स्तर पर पशु रोगों से निपटने की जरूरत के मद्देनजर 25 जनवरी 1924 को एक अंतर्राष्ट्रीय समझौते पर हस्ताक्षर किये गए जिसके तहत ‘द ऑफिस इंटरनेशनल डेस एपीज़ूटीज़’ (the Office International des EpizootiesOIE) का गठन किया गया था।

  • मई 2003 में इस संस्था का नाम ‘विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (World Organisation for Animal Health) कर दिया गया, किंतु ‘संक्षिप्त’ रूप में इसके ‘OIE’ नाम का प्रयोग जारी रहा।
  • ‘OIE’ विश्व भर में पशु स्वास्थ्य से संबंधित सुधारों के लिए जिम्मेदार अंतर सरकारी संगठन है।
  • इसे विश्व व्यापार संगठन (WTO) द्वारा एक संदर्भ संगठन (Reference Organisation) के रूप में मान्यता प्राप्त है।
  • यह संगठन, सभी सदस्य देशों की सरकारों द्वारा नामित प्रतिनिधियों की विश्व प्रतिनिधि सभा के अधिकार और नियंत्रण में कार्य करता है।
  • ‘ओआईई’ का मुख्य उद्देश्य ‘जंतुमारी’ / एपिजूटिक (epizootic) बीमारियों को नियंत्रित करना और उनके प्रसार को रोकना है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. WTO के बारे में
  2. OIE के बारे में
  3. लुप्तप्राय प्रजातियों के व्यापार का प्रशासन करने वाले अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय।

मेंस लिंक:

कोविड-19 जैसी नई बीमारियों के पैदा होने से रोकने हेतु खाद्य बाजारों में जीवित वन्य स्तनधारियों की बिक्री को रोकने की आवश्यकता क्यों है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

इंडियन राइनो विज़न (IRV) 2020


(Indian Rhino Vision)

संदर्भ:

हाल ही में, ‘इंडियन राइनो विज़न’ 2020 (IRV 2020) के तत्वावधान में ‘पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य’ (Pobitora Wildlife Sanctuary) से ‘मानस नेशनल पार्क’ में दो वयस्क एक सींग वाले गैंडों (The Great one-horned Rhinoceros – Indian Rhinoceros) को स्थानांतरित किया गया था।

आईआरवी-2020 के तहत, वन्यजीव से वन्यजीव स्थानांतरण के अंतिम चरण में, कुल 22 गैंडो का ‘मानस नेशनल पार्क’ में स्थानांतरण किया गया है, जिसमे से 12 गैंडे ‘पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य’ से तथा 10 गैंडे ‘काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान’ से भेजे गए हैं।

इंडियन राइनो विज़न (IRV) 2020 के बारे में:

वर्ष 2005 में शुरू किया गया।

  • इंडियन राइनो विज़न 2020, वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड (World Wildlife Fund- WWF) इंडिया, इंटरनेशनल राइनो फाउंडेशन और कई अन्य संगठनों के साथ साझेदारी में वन विभाग, असम सरकार के नेतृत्व में शुरू की गई एक पहल है।
  • आईआरवी-2020 का लक्ष्य असम के नए क्षेत्रों में गैडों की आबादी बढ़ाकर, इनकी कुल संख्या 3,000 तक करना है।
  • वर्तमान में, असम के चार संरक्षित क्षेत्रों- पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य’, राजीव गांधी ओरांग नेशनल पार्क, काजीरंगा नेशनल पार्क और मानस नेशनल पार्क – में गैंडों की आबादी पायी जाती है।

‘एक सींग वाले गैंडे’ के बारे में:

  • भारत में केवल ‘एक सींग वाले गैंडे’ (The Great one-horned Rhinoceros) पाए जाते हैं।
  • इन्हें ‘भारतीय गैंडे’ (Indian Rhinoceros) नाम से भी जाना जाता है और यह गैंडा प्रजाति में सबसे बड़ा होता है।
  • इसे ‘एक काले सींग’ और धूसर-भूरे रंग की त्वचा की सिलवटों से पहचाना जाता है।
  • ये प्रायः चराई के माध्यम से अपना भोजन ग्रहण करते हैं, और इनके आहार में सभी प्रकार की घास, पत्ते, झाड़ियों और पेड़ों की शाखाएं, फल और जलीय पौधे शामिल होते हैं।

संरक्षण स्थिति:

  1. IUCN रेड लिस्ट: असुरक्षित (Vulnerable)
  2. वन्यजीवों और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार अभिसमय (CITES): परिशिष्ट- I (विलुप्त होने के खतरा तथा CITES द्वारा वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे गैर- व्यावसायिक उद्देश्यों को छोड़कर अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए प्रतिबंधित प्रजाति)
  3. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: अनुसूची- I

भारत द्वारा किए जा रहे अन्य संरक्षण प्रयास:

  1. पांच राइनो रेंज देशों (भारत, भूटान, नेपाल, इंडोनेशिया और मलेशिया) द्वारा गैंडा प्रजातियों की सुरक्षा और संरक्षण हेतु ‘ एशियाई गैंडों पर नई दिल्ली घोषणा-2019’ (New Delhi Declaration on Asian Rhinos- 2019) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
  2. पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने देश में सभी गैंडों के डीएनए प्रोफाइल बनाने के लिए एक परियोजना शुरू की गई है।
  3. राष्ट्रीय राइनो संरक्षण रणनीति: इसे 2019 में एक सींग वाले गैंडों के संरक्षण के लिए लॉन्च किया गया था।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. विभिन्न गैंडा प्रजातियां
  2. भारत में एक सींग वाला गैंडा
  3. आवास
  4. संरक्षण की स्थिति
  5. संरक्षण के प्रयास
  6. आईआरवी 2020 के बारे में

मेंस लिंक:

‘इंडियन राइनो विज़न’ 2020 पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


‘उरुका’ क्या है?

  • उरुका (Uruka), से ‘माघ बिहू’ की शुरुआत होती है, यह माघ बिहू त्यौहार के पहले दिन मनाया जाता है।
  • असम में रोंगाली बिहू के अवसर पर उरुका की रस्म अदा की जाती हैं, जो असमिया नव वर्ष की शुरुआत का प्रतीक होती है।

‘ईवीआर पेरियार सलाई’ का नाम ग्रैंड वेस्टर्न ट्रंक (GWT) रोड

  • हाल ही में, साइनबोर्ड्स पर ईवीआर पेरियार सलाई’ को ग्रैंड वेस्टर्न ट्रंक (GWT) रोड के रूप में उल्लेखित किए जाने के बाद से विवाद खड़ा हो गया है।
  • इसके बाद, चेन्नई राजमार्ग विभाग ने स्पष्ट किया कि उनके रिकॉर्ड के अनुसार सड़क का नाम ‘ग्रैंड वेस्टर्न ट्रंक’ (GWT) रोड’ ही है।
  • ‘ग्रैंड वेस्टर्न ट्रंक, का पुराना नंबर NH4 है और इसे पूनमल्ली हाई रोड भी कहा जाता है। इसका निर्माण और नामकरण 1850 में अंग्रेजों द्वारा किया गया था।

सेरोजा (Seroja)

  • यह, हाल ही में, पश्चिमी ऑस्ट्रेलियाई तट के नजदीक उत्पन्न हुआ एक उष्णकटिबंधीय चक्रवात है।
  • ‘सेरोजा’ का इंडोनेशियाई भाषा में अर्थ ‘कमल’ होता है।

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पोषण ज्ञान

  • यह, स्वास्थ्य और पोषण पर आधारित एक राष्ट्रीय डिजिटल कोष है।
  • नीति आयोग द्वारा, बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन तथा सामाजिक एवं व्यवहार परिवर्तन केंद्र, अशोका यूनिवर्सिटी के साथ साझेदारी में, राष्ट्रीय डिजिटल कोष ‘पोषण ज्ञान’ की शुरुआत की गई है।
  • पोषण ज्ञान डिजिटल कोष को एक संसाधन के रूप में अवधारणाबद्ध किया गया, जिसे विभिन्न भाषाओं, स्वास्थ्य प्रकारों, लक्षित उपयोगकर्ताओं और स्रोतों में स्वास्थ्य एवं पोषण के 14 विषयगत क्षेत्रों पर संचार सामग्री की खोज के लिए सक्षम किया गया है।

ई-सांता (eSANTA)

  • यह एक इलेक्ट्रॉनिक मार्केटप्लेस है। यह जल कृषकों और खरीदारों को जोड़ने के लिए एक मंच के रूप में काम करेगा।
  • केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया है।
  • यह किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त करने में सक्षम बनाएगा और इससे निर्यातक सीधे किसानों से गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की खरीद कर सकेंगे, जोकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में एक प्रमुख कारक है।
  • वेबपोर्टल के लिए तैयार किया गया ई-सांता शब्द का अर्थ ‘इलेक्ट्रॉनिक सॉल्यूशन फॉर ऑग्मेंटिंग NaCSA फार्मर्स ट्रेड इन एक्वाकल्चर’ है।
  • ई-सांता, जल कृषकों के लिए आय, जीवनशैली, आत्मनिर्भरता, गुणवत्ता स्तर,पता लगाने की क्षमता और नए विकल्प प्रदान करेगा।

नवजात, छोटे बच्चे तथा उनकी देखभाल करने वाले लोगों के अनुकूल पड़ोस प्रशिक्षण तथा क्षमता सृजन कार्यक्रम

  • राष्ट्रीय शहरी कार्य संस्थान (NIUA) द्वारा ‘बर्नाड वैन लीयर फाउंडेशन’ (BvLF) की साझेदारी में इस कार्यक्रम की शुरुआत की गई है।
  • यह कार्यक्रम भारत के शहरों में बच्चों तथा परिवार अनुकूल पड़ोस विकसित करने के लिए शहर के अधिकारियों तथा युवा पेशेवर लोगों के क्षमता सृजन में सहायता के लिए बनाया गया है।
  • इस कार्यक्रम के अंतर्गत नगर के अधिकारियों तथा युवा पेशेवर लोगों को प्रमाणित प्रशिक्षण तथा क्षमता सृजन मॉड्यूल के माध्यम से कौशल संपन्न बनाया जाएगा।

आहार क्रांति

  • आहार क्रांति, भारत में पोषक संतुलित आहार के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने हेतु एक अभियान है।
  • विज्ञान भारती (Vibha) तथा ग्लोबल इंडियन साइंटिस्ट एंड टैक्नोक्रैट्स फोरम (GIST) ने मिलकर “उत्तम आहार-उत्तम विचार” के लक्ष्य को लेकर यह मिशन शुरू किया है।
  • “आहार क्रांति अभियान” का उद्देश्य भारत और पूरे विश्व के सामने पेश ढेर सारी भूख और बहुत सारी बीमारियों की समस्या का समाधान तलाशना है।


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