Print Friendly, PDF & Email

INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 06 April 2021

 

विषयसूची

 सामान्य अध्ययन-II

1. अधिकरण सुधार (सुव्यवस्थीकरण और सेवा शर्तें) अध्यादेश, 2021

2. ई 9 पहल

3. उइगर कौन हैं?

 

सामान्य अध्ययन-III

1. इस वर्ष वसंत काल में वनाग्नि और उनकी बारंबारता

2. चीन की डिजिटल मुद्रा

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. चिनाब ब्रिज: विश्व का सबसे ऊंचा रेलवे पुल

2. ‘ला पेरॉस’ सैन्याभ्यास

3. ‘इंटरनेशनल वर्चुअल इलेक्शन विजिटर्स प्रोग्राम’ (IVEP) 2021

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्द्ध-न्यायिक निकाय।

अधिकरण सुधार (सुव्यवस्थीकरण और सेवा शर्तें) अध्यादेश, 2021


(Tribunals Reforms (Rationalisation and Conditions of Service) Ordinance, 2021)

संदर्भ:

हाल ही में, भारत के राष्ट्रपति द्वारा ‘अधिकरण सुधार (सुव्यवस्थीकरण और सेवा शर्तें) अध्यादेश’, 2021 (Tribunals Reforms (Rationalisation and Conditions of Service) Ordinance, 2021) लागू कर दिया गया है।

अद्ध्यादेश के तहत किए गए परिवर्तन, ‘मद्रास बार एसोसिएशन मामले’ में पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों पर आधारित हैं।

मुख्य परिवर्तन:

  • अध्यादेश के द्वारा, कुछ मौजूदा अपीलीय निकायों को भंग करके, तथा उनके कार्यों को अन्य मौजूदा न्यायिक निकायों के लिए स्थानांतरित किया गया है।
  • इसके द्वारा, केंद्र सरकार को, अधिकरण के सदस्यों की, अहर्ता, नियुक्ति, कार्यकाल, वेतन और भत्ते, पदत्याग, निष्कासन तथा अन्य सेवा शर्तों संबंधी नियम बनाने का अधिकार दिया गया है।
  • इसके तहत, खोज-एवं-चयन समिति की सिफारिश पर अधिकरण (ट्रिब्यूनल) के अध्यक्ष और सदस्यों को केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त करने का प्रावधान किया गया है।
  • इसके प्रावधानों के अनुसार, समिति की अध्यक्षता, भारत के मुख्य न्यायाधीश या उनके द्वारा नामित सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा की जाएगी।
  • कार्यकाल: अधिकरण का अध्यक्ष, 4 वर्षों की अवधि तक अथवा 70 वर्ष की आयु पूरी करने तक, जो भी पहले हो, पद धारित करेगा। अधिकरण के अन्य सदस्य 4 वर्ष की अवधि अथवा 67 वर्ष की आयु पूरी होने तक, जो भी पहले हो अपने पद पर कार्य करेंगे।

अध्यादेश में निम्नलिखित अधिकरणों / अपीलीय प्राधिकारियों को वित्त अधिनियम के दायरे से बाहर किया गया है:

  1. एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया एक्ट, 1994 के तहत स्थापित ‘एयरपोर्ट अपीलीय न्यायाधिकरण’।
  2. ट्रेड मार्क अधिनियम, 1999 के अंतर्गत स्थापित अपीलीय बोर्ड।
  3. आयकर अधिनियम, 1961 के तहत स्थापित ‘अग्रिम आदेश प्राधिकरण’ (Authority for Advance Ruling)।
  4. सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 के तहत गठित ‘फिल्म प्रमाणन अपीलीय न्यायाधिकरण’।

‘अधिकरण’ क्या होते हैं?

‘अधिकरण’ (Tribunal), एक अर्ध-न्यायिक संस्था होते है, जिन्हें प्रशासनिक विवादों अथवा कर-संबंधी विवादों को हल करने जैसी समस्याओं का निपटारा करने के लिए गठित किया जाता है। यह, विवादों का फैसला करने, दावा करने वाले पक्षों के मध्य अधिकारों का निर्धारण करने, प्रशासनिक निर्णय लेने, मौजूदा प्रशासनिक निर्णय की समीक्षा करने, जैसे आदि कार्य करते हैं।

संवैधानिक प्रावधान:

‘अधिकरण’, मूल रूप से संविधान का भाग नहीं थे।

‘स्वर्ण सिंह समिति’ की सिफारिशों के आधार पर, 42 वें संशोधन अधिनियम के माध्यम से इन प्रावधानों को संविधान में शामिल किया गया।

इस संशोधन के अंतर्गत, संविधान में ‘अधिकरणों’ से संबंधित ‘भाग XIV-A जोड़ा गया तथा इसमें दो अनुच्छेद शामिल किये गए:

  1. अनुच्छेद 323A: प्रशासनिक अधिकरणों से संबंधित है। प्रशासनिक अधिकरण, लोक-सेवा में नियुक्त व्यक्तियों की भर्ती और सेवा शर्तों से संबंधित विवादों को हल करने वाली अर्ध-न्यायिक संस्थाएं हैं।
  2. अनुच्छेद 323B: अन्य विषयों जैसे कि कराधान, औद्योगिक एवं श्रम विवाद, विदेशी मुद्रा, आयात और निर्यात, भूमि सुधार, खाद्य सामग्री, नगर संपत्ति की अधिकतम सीमा, संसद और राज्य विधानमंडलों के लिये निर्वाचन, किराया और किराएदार के अधिकार, आदि का समाधान करने हेतु अधिकरणों के गठन से संबंधित है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अधिकरण क्या होते हैं?
  2. इस संबंध में संवैधानिक प्रावधान।
  3. संरचना और कार्य।
  4. नवीनतम अध्यादेश का अवलोकन।

मेंस लिंक:

क्या ‘अधिकरण’, न्यायिक दक्षता के लिए रामबाण के समान होते हैं? क्या ‘न्याय’ हेतु अधिकरणों का गठन करना हमारे संविधान में निर्धारित सिद्धांतों को कमजोर करता है? जांच कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

9 पहल


(E9 initiative)

संदर्भ:

‘ई 9 पहल’ पर ‘ई 9 देशों’ के शिक्षा मंत्रियों की परामर्श बैठक, शीघ्र ही आयोजित होने जा रही है।

यह परामर्श बैठक वंचित रह जाने वाले बच्चों व युवाओं, विशेषकर लड़कियों को लक्ष्य करती डिजिटल लर्निंग और कौशल पर पहल के निर्माण की तीन चरणीय प्रक्रिया का पहला चरण है।

‘ई 9 पहल’ क्या है?

इस पहल का प्रमुख उद्देश्य 2020 में आयोजित ‘वैश्विक शिक्षा सम्मलेन’ की तीन प्राथमिकताओं, (i) शिक्षकों को सहयोग (ii) कौशल में निवेश और (iii) डिजिटल विभाजन को कम करना, में तेजी से बदलाव करके शिक्षा प्रणाली में बदलाव के माध्यम से ‘सतत विकास लक्ष्य-4 एजेंडा को आगे बढ़ाना और सुधार में तेजी लाना है।

प्रतिभागी:

संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व वाली इस पहल के तहत, E9 देशों में बांग्लादेश, ब्राजील, चीन, मिस्र, भारत, इंडोनेशिया, मैक्सिको, नाइजीरिया और पाकिस्तान शामिल हैं।

लाभ:

E9 देशों के मध्य स्थापित भागीदारी पर निर्मित यह पहल, इन नौ देशों को इस वैश्विक पहल से लाभान्वित होने और सतत विकास लक्ष्य-4: गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा को हासिल करने की दिशा में डिजिटल शिक्षा और कौशल-विकास संबंधी प्रगति में तेजी लाने का अवसर प्रदान करती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. E9 पहल क्या है?
  2. E9 देश।
  3. सतत विकास लक्ष्य-4’ किससे संबंधित है?
  4. क्या भारत इस पहल का हिस्सा है?

मेंस लिंक:

‘E9 पहल’ के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

‘उइघुर’ कौन हैं?


(Who are Uighurs?)

संदर्भ:

हाल ही में, जापानी विदेश मंत्री ‘तोशिमित्सु मोतेगी’ (Toshimitsu Motegi) ने चीन के उइघुर अल्पसंख्यकों के मानवाधिकारों की स्थिति के बारे में अपने चीनी समकक्ष से कड़ी चिंता व्यक्त की है।

उइगर:

  • ‘उइघुर’ अथवा ‘उइगर’, चीन के उत्तर-पश्चिमी शिनजियांग प्रांत में निवास करने वाले अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय हैं।
  • उइगर, चीन की तुलना में तुर्की तथा अन्य मध्य एशियाई देशों से करीबी नृजातीय संबंधों का दावा करते हैं।

चीन उइगरों को क्यों निशाना बना रहा है?

शिनजियांग तकनीकी रूप से चीन का एक स्वायत्त क्षेत्र है। शिनजियांग, चीन का सबसे बड़ा क्षेत्र है तथा खनिजों से समृद्ध है इसके साथ ही इस प्रांत की सीमायें भारत, पाकिस्तान, रूस और अफगानिस्तान सहित आठ देशों के साथ मिलती है।

  1. पिछले कुछ दशकों में, शिनजियांग प्रांत आर्थिक रूप से समृद्ध हुआ है, इसके साथ ही बड़ी संख्या में बहुसंख्यक ‘हान चीनी’ (Han Chinese) इस क्षेत्र में आकर बस गए तथा बेहतर नौकरियों पर कब्जा कर लिया है। हान चीनीयों ने उइगरों के लिए आजीविका तथा पहचान के लिए संकट उत्पन्न कर दिया है।
  2. इन्ही कारणों से, छिटपुट हिंसा की शुरुआत हुई तथा वर्ष 2009 में शिनजियांग प्रांत की राजधानी उरुमकी में 200 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर हान चीनी थे। तब से कई अन्य हिंसक घटनाएं हुई हैं।
  3. बीजिंग का कहना है कि उइगर समुदाय एक स्वतंत्र राज्य स्थापित करना चाहता है और, उइगरों के तुर्की तथा अन्य मध्य एशियाई देशों से सांस्कृतिक संबंधों के कारण, चीनी नेताओं को डर है कि पाकिस्तान जैसी जगहों से संचालित होने वाले उग्रवादी तत्व शिनजियांग में अलगाववादी आंदोलन को प्रोत्साहन व सहयोग दे सकते हैं।
  4. इसलिए, चीन की नीति पूरे समुदाय को संदिग्ध मानने तथा उइगरों की अलग पहचान को समाप्त करने हेतु एक व्यवस्थित परियोजना के आरम्भ करने की प्रतीत होती है।

 प्रीलिम्स लिंक:

  1. उइगर कौन हैं?
  2. शिनजियांग कहाँ है?
  3. हान चीनी कौन हैं?
  4. शिनजियांग प्रांत की सीमा से लगे भारतीय राज्य।

 मेंस लिंक:

उइगर कौन है तथा ये समुदाय किन कारणों से चर्चा में है?

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

 इस वर्ष वसंत काल में वनाग्नि और उनकी बारंबारता


(Forest fires in the spring and their frequency throughout this year)

संदर्भ:

वर्ष 2021 की शुरुआत से, हिमाचल प्रदेश, नगालैंड-मणिपुर सीमावर्ती क्षेत्रों, ओडिशा, मध्य प्रदेश और गुजरात, तथा वन्यजीव अभयारण्यों में ‘वनाग्नि’ (Forest fires) का क्रम जारी रहा है।

  • आमतौर पर, अप्रैल-मई के मौसम में, देश के विभिन्न हिस्सों में ‘वनाग्नि’ की घटनाएँ देखी जाती है।
  • हालांकि, अब तक, उत्तराखंड में ‘वनाग्नि’ की घटनाएँ सामान्य से अधिक बार घटित हुई हैं, और यहाँ तक कि, सर्दियों के दौरान भी, राज्य के वनों में आग लगने की घटनाएँ देखी गई। इसका एक कारण मानसून के दौरान कम वर्षा होने की वजह से ‘मृदा में शुष्कता’ माना जा रहा है।

भारत के जंगलों में आग लगने का खतरा कितना है?

  • सर्वाधिक संवेदनशील क्षेत्र (Most vulnerable areas): उत्तर-पूर्व और मध्य भारत के क्षेत्र, वनाग्नि के प्रति सर्वाधिक संवेदनशील एवं असुरक्षित क्षेत्र हैं।
  • ‘अत्यधिक प्रवण’ क्षेत्र (‘Extremely prone’ areas): असम, मिजोरम और त्रिपुरा के जंगलों को वनाग्नि के प्रति ‘अत्यधिक प्रवण क्षेत्र’ के रूप में चिह्नित किया गया है।
  • अति उच्च-प्रवण श्रेणी (‘Very highly prone’ category): विस्तृत वन क्षेत्रों वाले राज्यों, जैसे कि, आंध्र प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, महाराष्ट्र, बिहार और उत्तर प्रदेश को ‘अति उच्च-प्रवण श्रेणी’ में शामिल किया गया है।
  • ‘अत्यधिक प्रवण’ श्रेणी (‘Extremely prone’ category): ओडिशा के मध्य क्षेत्रों सहित, पश्चिमी महाराष्ट्र, दक्षिणी छत्तीसगढ़ और तेलंगाना और आंध्र प्रदेश, वनाग्नि के प्रति ‘अत्यधिक प्रवण’ हॉटस्पॉट में परिवर्तित होते जा रहे हैं।

देश में, वनाग्नि के प्रति ‘अत्यधिक प्रवण’ तथा ‘मध्यम प्रवण’ श्रेणियों के अंतर्गत, कुल वन आवरण क्षेत्र का 26.2%  अर्थात 1,72,374 वर्ग किमी क्षेत्र आता है।

वनाग्नि के कारण:

  1. मृदा में आर्द्रता की कमी।
  2. वर्षा की कमी।
  3. प्राकृतिक कारण; जैसे, बिजली गिरना, उच्च वायुमंडलीय तापमान और निम्न आर्द्रता
  4. मानव निर्मित कारण, जैसे लौ, सिगरेट, विद्युत् की चिंगारी या किसी प्रकार का दहन भी जंगल में आग लगने का कारण बन जाता है।
  5. मानव और मवेशियों की बढ़ती आबादी और व्यक्तियों और समुदायों द्वारा चराई, झूम खेती और वन उत्पादों संबंधी मांग में वृद्धि के साथ यह समस्या और बढ़ गई है।

वनाग्नि पर नियंत्रण पाना कठिन क्यों होता है?

  • वनों की अवस्थिति और उन तक पहुँच, अग्निशमन प्रयासों को शुरू करने में बाधा उत्पन्न करती है।
  • व्यस्‍ततम अवधि के दौरान, अग्निशमन टीमों को भेजने के लिए, कर्मियों की कमी भी एक चुनौती है।
  • घने जंगलों के बीच से होकर, वन्य-कर्मियों, ईंधन और उपकरणों का समय पर भेजना, ‘आग के प्रकार’ पर निर्भर करता है, और अग्निशमन प्रयासों के लिए यह भी एक चुनौती है।
  • चूंकि घने जंगलों में पानी से भरे हुए, भारी वाहनों को परिवहन असंभव होता है, इसलिए ब्लोअर और इसी तरह के उपकरणों का उपयोग करके आग बुझाने का काम, साधारण तरीके से शुरू किया जाता है।
  • हवा की गति और दिशा, जंगल में लगी आग पर नियंत्रण पाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आमतौर पर, आग, हवाओं की दिशा में और ऊंचाई की ओर फैलती है।

जंगलों को आग से बचाने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं?

  1. वर्ष 2004 के बाद से, ‘भारतीय वन सर्वेक्षण’ (FSI) द्वारा वास्तविक समय में वनाग्नि पर निगरानी करने हेतु ‘फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम’ विकसित किया गया है।
  2. जनवरी 2019 में इसका उन्नत संस्करण लॉन्च किया गया था, जिसके तहत, यह सिस्टम अब, नासा और इसरो द्वारा उपग्रह के माध्यम से एकत्रित जानकारी का उपयोग करता है।
  3. चिह्नित किए गए फायर हॉटस्पॉट्स से ‘रियल टाइम फायर इन्फॉर्मेशन’ MODIS सेंसर (1*1 किमी ग्रिड) के माध्यम से एकत्र की जाती है और इलेक्ट्रॉनिक रूप से ‘भारतीय वन सर्वेक्षण’ को भेज दी जाती है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।

चीन की डिजिटल मुद्रा


(China’s digital currency)

संदर्भ:

चीन द्वारा फरवरी माह में, अपनी नई डिजिटल मुद्रा के प्रयोगिक परीक्षणों का नवीनतम दौर शुरू किया गया है। खबरों के अनुसार, चीन के द्वारा इस वर्ष के अंत तक तथा फरवरी 2022 में होने वाले बीजिंग विंटर ओलम्पिक से पहले इस नई डिजिटल मुद्रा को व्यापक स्तर पर शुरू करने की योजना है।

चीनी डिजिटल मुद्रा की क्रियाविधि:

आधिकारिक तौर पर ‘डिजिटल मुद्रा इलेक्ट्रॉनिक भुगतान’ (Digital Currency Electronic PaymentDCEP) के रूप में घोषित, डिजिटल RMB अथवा रॅन्मिन्बी (Renminbi), चीन की मुद्रा का एक डिजिटल संस्करण है। ज्ञातव्य है, रॅन्मिन्बी या RMB चीन की मुद्रा को कहा जाता है।

इसे, चीन के केंद्रीय बैंक, ‘पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना’ (PBOC) द्वारा अधिकृत ‘एप्लिकेशन’ के माध्यम से डाउनलोड और एक्सचेंज किया जा सकता है।

चीनी डिजिटल मुद्रा की प्रमुख विशेषताएं:

  • यह केंद्रीय बैंक द्वारा प्रत्याभूत एक ‘वैध मुद्रा’ (legal tender) है, न कि किसी थर्ड-पार्टी ऑपरेटर द्वारा गारंटीकृत भुगतान।
  • इसमें कोई थर्ड-पार्टी लेनदेन नहीं होता है, और इसलिए, इस पर कोई लेनदेन शुल्क नहीं लगता है।
  • ई-वॉलेट के विपरीत, डिजिटल मुद्रा को इंटरनेट कनेक्टिविटी की आवश्यकता नहीं है। इसके द्वारा ‘नियर-फील्ड कम्युनिकेशन’ (NFC) तकनीक के माध्यम से भुगतान किया जाता है।
  • गैर-बैंक भुगतान प्लेटफार्मों, जिन पर उपयोगकर्ताओं को बैंक खातों को लिंक करने की आवश्यकता होती है, के विपरीत, ‘डिजिटल मुद्रा’ संबंधी खातों को एक ‘निजी पहचान संख्या’ के साथ खोला जा सकता है।

 प्रीलिम्स लिंक:

  1. विभिन्न क्रिप्टोकरेंसी
  2. विभिन्न देशों द्वारा शुरू की गई क्रिप्टोकरेंसी
  3. ब्लॉकचेन तकनीक क्या है?

मेंस लिंक:

‘क्रिप्टोकरेंसी’ क्या होती हैं? इनके विनियमन की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


चिनाब ब्रिज: विश्व का सबसे ऊंचा रेलवे पुल

भारतीय रेलवे द्वारा ‘चिनाब पुल का मेहराब बंदी’ (आर्क निर्माण) का कार्य पूरा कर लिया गया है।

  • चिनाब पुल ‘उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला’ रेल लिंक परियोजना (USBRL) का हिस्सा है।
  • यह भारतीय रेलवे द्वारा ‘जम्मू और कश्मीर’ में बनाया जाने वाला विश्व का सबसे ऊंचा रेलवे ब्रिज है।
  • चिनाब पुल की लंबाई 1,315 मीटर होगी।
  • यह नदी तल के स्तर से 359 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह पुल, पेरिस में एफिल टॉवर से 35 मीटर ऊंचा है।

‘ला पेरॉस’ सैन्याभ्यास

(LA PEROUSE)

  • यह एक बहुपक्षीय समुद्री सैन्याभ्यास है, जिसे इस वर्ष पूर्वी हिंद महासागर क्षेत्र में आयोजित किया जा रहा है।
  • इसका नेतृत्व फ्रांसीसी नौसेना द्वारा किया जाता है।
  • भारत, इस सैन्याभ्यास में भाग ले रहा है।

‘इंटरनेशनल वर्चुअल इलेक्शन विजिटर्स प्रोग्राम’ (IVEP) 2021

  • हाल ही में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा ‘इंटरनेशनल वर्चुअल इलेक्शन विजिटर्स प्रोग्राम’ 2021 की मेजबानी की गयी।
  • 26 देशों की चुनाव प्रबंधन संस्थाओं (ईएमबी)/संगठनों और तीन अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।
  • IEVP 2021 में प्रतिभागियों के लिए भारतीय चुनाव प्रक्रिया के व्यापक परिदृश्य, मतदाता सुविधा के लिए ECI द्वारा उठाये गए कदम, चुनावी प्रणाली की पारदर्शिता और पहुंच, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण की बदलती जरूरतों के बारे में समीक्षाएं प्रस्तुत की जायेंगी।

Join our Official Telegram Channel HERE for Motivation and Fast Updates

Subscribe to our YouTube Channel HERE to watch Motivational and New analysis videos