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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 02 April 2021

 

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

1. हरियाणा में विधानसभा कार्य-संचालन नियमों में संशोधन

2. पुलिस सुधारों पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वर्ष 2006 में दिया गया फैसला

3. बिम्सटेक

 

सामान्य अध्ययन-III

1. बैकाल-जीवीडी

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. ‘क्यूलेक्स’ या आम घरेलू मच्छर

2. छोटी बचतों पर ब्याज दरों में कोई कटौती नहीं

3. सैन्य अभ्यास शांतिर ओग्रोशेना 2021

4. मुंबई में तीसरा संयुक्त लॉजिस्टिक नोड (JLN)

5. दादा साहब फाल्के पुरस्कार

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: संसद और राज्य विधायिका- संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।

हरियाणा में विधानसभा कार्य-संचालन नियमों में संशोधन 


संदर्भ:

हाल ही में, हरियाणा सरकार द्वारा राज्य की ‘विधानसभा की प्रक्रिया तथा कार्य-संचालन नियमों’ (Rules of Procedure and Conduct of Business in the Legislative Assembly) के अंतर्गत कई प्रावधानों में संशोधन किया गया है।

साथ ही, इनमे कई नए प्रावधान जोड़े भी गए हैं।

संशोधित प्रावधानों के अंर्तगत नए नियम तथा उनकी आवश्यकता:

  1. सदन में प्रत्येक बैठक / अधिवेशन के दौरान, न्यूनतम दो मंत्रियों की उपस्थिति अनिवार्य होगी, जिसका समय-समय पर, कुछ ध्यानाकर्षण प्रस्तावों (Calling Attention Motions) पर होने वाली चर्चा अथवा सदन के अन्य कार्यों के दौरान पालन नहीं किया जाता था।
  2. विधानसभा सदस्यों द्वारा ‘विरोध प्रकट करते हुए सदन में दस्तावेजों को नहीं फाड़ा जाएगा’। ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं जहां विपक्ष के सदस्यों द्वारा विरोध के प्रतीक में, सदन में दस्तावेजों की प्रतियां फाड़ दी जाती थीं।
  3. विधानसभा अध्यक्ष द्वारा किसी अनुपूरक प्रश्न को ‘नियमविरुद्ध’ घोषित कर दिया जाएगा, यदि उनके विचार में, (i) कोई प्रश्न, मुख्य प्रश्न अथवा इसके उत्तर से संबंधित नहीं है; (ii) कोई प्रश्न, जानकारी मांगने के बजाय, जानकारी प्रदान करता है; (iii) कोई प्रश्न, किसी राय की पुष्टि या खंडन करने की मांग करता है; और (iv) कोई प्रश्न, सवालों के संबंध में किसी भी नियम का उल्लंघन करता है।
  4. विधानसभा अध्यक्ष द्वारा किसी भी प्रश्न पर दो से अधिक अनुपूरक प्रश्न पूछे जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

‘नेता-प्रतिपक्ष’ की नई परिभाषा:

‘नेता-प्रतिपक्ष’ अथवा विपक्ष के नेता (Leader of Opposition) का तात्पर्य, विधानसभा में सत्ताधारी दल अथवा गठबंधन के अलावा सर्वाधिक सदस्यों की संख्या तथा सदन की गणपूर्ति संख्या के बराबर सदस्यों वाले दल के नेता, और विधानसभा अध्यक्ष द्वारा ‘नेता-प्रतिपक्ष’ के रूप में मान्यता प्राप्त नेता से है।

  • बशर्ते, यदि विधानसभा में ‘नेता-प्रतिपक्ष’ के रूप में मान्यता पाने हेतु प्रतिस्पर्धा करने के लिए एक से अधिक दलों के पास सदस्यों की समान संख्या होती है, तो ऐसी स्थिति में, विधानसभा चुनावों में अधिक मत हासिल करने वाले दल को आधिकारिक विपक्ष और उसके नेता के रूप में मान्यता दी जाएगी।
  • यदि प्रतिस्पर्धा करने वाले दलों को विधानसभा चुनावों में समान मत हासिल होने पर ‘नेता-प्रतिपक्ष’ का पद बारी-बारी से दोनों दलों को सौंपा जाएगा और इसके लिए ‘ड्रा’ के माध्यम से निर्णय लिया जाएगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. नए नियमों का अवलोकन।
  2. संसद में ‘नेता-प्रतिपक्ष’ कौन होता है?
  3. राज्य विधानसभाओं में ‘नेता-प्रतिपक्ष’।
  4. विधानसभा तथा संसद में सदन की प्रक्रिया और कार्य-संचालन नियम।

मेंस लिंक:

सदन की प्रक्रिया और कार्य-संचालन नियमों के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: लोकतंत्र में सिविल सेवाओं की भूमिका।

पुलिस सुधारों पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वर्ष 2006 में दिया गया फैसला


संदर्भ:

उच्चतम न्यायालय ने कहा है, कि प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ (2006)  मामले में, पुलिस सुधारों से संबंधित दिए गए ऐतिहासिक निर्णय का उपयोग, समय-समय पर, जब भी ऐसी कोई स्थिति उत्पन्न होती है तो उसे हल करने के लिए एक मंत्र के रूप में किया जाता है।

संबंधित प्रकरण:

महाराष्ट्र में कई आईपीएस अधिकारियों द्वारा लॉबिंग किए जाने के आरोप और सरकार की मिलीभगत से नियुक्तियों पर निर्णय लेने वाले सत्ता के दलालों से संबंधित नवीनतम प्रकरण सामने आने से पता चलता है कि सिस्टम में मामूली बदलाव आया है।

‘पुलिस सुधारों पर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला’ क्या है?

कई अन्य पदों पर नियुक्त रहने के अलावा उत्तरप्रदेश पुलिस तथा असम पुलिस के डीजीपी के रूप में काम करने के पश्चात, प्रकाश सिंह ने सेवानिवृत्ति के बाद वर्ष 1996 में पुलिस सुधारों की मांग करते हुए उच्चतम न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की थी।

उच्चतम न्यायालय ने इस याचिका पर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सितंबर 2006 में सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पुलिस सुधार लागू करने का निर्देश दिया था।

उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए सुझाव:

  1. कुछ महीनों में सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों को ‘पुलिस महानिदेशक’ (DGP) के पद पर नियुक्ति करने जैसी स्थिति से बचने के लिए डीजीपी का कार्यकाल और चयन प्रक्रिया निर्धारित की जानी चाहिए।
  2. कोई राजनीतिक हस्तक्षेप न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए ‘पुलिस महानिरीक्षक’ के लिए एक न्यूनतम कार्यकाल निर्धारित होना चाहिए, जिससे राजनेताओं द्वारा बीच में ही इनका स्थानांतरण नहीं किया जा सके।
  3. अधिकारियों की नियुक्तियों से संबंधित निर्णय, राजनीतिक नेताओं की पोस्टिंग और स्थानान्तरण करने संबंधी शक्तियों को पृथक करते हुए, पुलिस अधिकारी और वरिष्ठ नौकरशाहों से मिलकर बने ‘पुलिस स्थापना बोर्ड’ (Police Establishment BoardsPEB) द्वारा किये जाने चाहिए।
  4. पुलिस कार्रवाई से पीड़ित आम लोगों की सुनवाई के लिए ‘राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण’ (State Police Complaints Authority– SPCA) की स्थापना की जाए।
  5. पुलिसिंग को बेहतर बनाने के लिए जांच तथा कानून और व्यवस्था संबंधी कार्य अलग किये जाएँ।
  6. राज्य सुरक्षा आयोगों (State Security Commissions– SSC) का गठन किया जाए, और इनमे सिविल सोसायटी के सदस्य शामिल किये जाएँ।
  7. एक ‘राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग (National Security Commission) का गठन किया जाए।

इन सुझावों पर राज्यों की प्रतिक्रिया:

  • वर्ष 2006 में दिए गए फैसले के बाद से किसी भी राज्य ने शीर्ष अदालत के निर्देशों का पूरी तरह से अनुपालन नहीं किया है।
  • 18 राज्यों द्वारा इस दौरान अपने पुलिस अधिनियमों को पारित या संशोधित किया गया है, लेकिन इनमे से कोई भी पुलिस अधिनियम पूरी तरह से विधायी मॉडल के अनुरूप नहीं है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. राष्ट्रीय पुलिस आयोग की स्थापना कब की गई थी?
  2. रिबेरो समिति का संबंध किससे है?
  3. मलिमथ समिति द्वारा की गई प्रमुख सिफारिशें।
  4. भारतीय संविधान की 7 वीं अनुसूची के तहत पुलिस।
  5. प्रकाश सिंह मामला किससे संबंधित है?

मेंस लिंक:

पुलिस सुधारों पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

बिम्सटेक


(BIMSTEC)

संदर्भ:

हाल ही में, श्रीलंका की अध्यक्षता में, 17 वीं बिम्सटेक (बहुक्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिये बंगाल की खाड़ी पहल) मंत्रिस्तरीय बैठक आयोजित की गई थी।

  • इस बैठक में म्यांमार सहित सभी सात सदस्य देशों ने भाग लिया। ज्ञातव्य है, कि म्यांमार, वर्तमान में सेना विरोधी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई कर रहा है।

बिम्सटेक (BIMSTEC) क्या है?

बिम्सटेक का पूरा नाम ‘बहुक्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिये बंगाल की खाड़ी पहल’ अर्थात (Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation- BIMSTEC) है।

  • बिम्सटेक, दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया के सात देशों का एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है। वर्ष 1997 में, बंगाल की खाड़ी क्षेत्र को एकीकृत करने के प्रयास में इस समूह की स्थापना की गई थी।
  • मूल रूप से इस समूह में बांग्लादेश, भारत, श्रीलंका और थाईलैंड शामिल थे, बाद में म्यांमार, नेपाल और भूटान भी इसके सदस्य बन गए।
  • बिम्सटेक, में अब दक्षिण एशिया के पांच देश और आसियान के दो देश शामिल हैं तथा यह दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया के मध्य एक सेतु की भूमिका भी निभाता है।
  • इस समूह में मालदीव, अफगानिस्तान और पाकिस्तान को छोड़कर दक्षिण एशिया के सभी प्रमुख देश शामिल हैं।

बिम्सटेक क्षेत्र का महत्व:

  • बिम्सटेक के सात देशों और इसके आसपास में विश्व की कुल आबादी का लगभग पांचवा भाग (22%) निवास करता है, और इनका संयुक्त रूप से सकल घरेलू उत्पाद $ 2.7 ट्रिलियन के करीब है।
  • बंगाल की खाड़ी, प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है, जिसका अभी तक दोहन नहीं किया गया है। विश्व में व्यापार की जाने वाली कुल सामग्री का लगभग एक-चौथाई भाग, प्रतिवर्ष बंगाल की खाड़ी से होकर गुजरता है।

भारत के लिए बिम्सटेक का महत्व:

  • इस क्षेत्र की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में भारत के लिए यह क्षेत्र काफी महत्वपूर्ण है।
  • बिम्सटेक, न केवल दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया के लोगों को जोड़ता है, बल्कि महान हिमालय और बंगाल की खाड़ी की पारिस्थितिकी को परस्पर संबद्ध करता है।
  • भारत के लिए, यह ‘नेबरहुड फर्स्ट’ और ‘एक्ट ईस्ट’ की प्रमुख विदेश नीति प्राथमिकताओं को कार्यान्वित करने के लिए एक प्राकृतिक मंच है।
  • नई दिल्ली के लिए, बिम्सटेक से सम्बद्धता का एक प्रमुख कारण इस क्षेत्र की विशाल संभावनाएं हैं, जो दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया के देशों के साथ महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग खोलती हैं।
  • लगभग 300 मिलियन लोग या भारत की लगभग एक-चौथाई आबादी, बंगाल की खाड़ी से सटे चार तटीय राज्यों (आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल) में निवास करती है।
  • रणनीतिक दृष्टिकोण से, बंगाल की खाड़ी, जोकि मलक्का जलडमरूमध्य के लिए एक कीप (funnel) की भांति है, लगातार प्रभावशाली होते जा रहे चीन के लिए हिंद महासागर तक अपनी पहुँच बनाए रखने के लिए, एक प्रमुख थिएटर के रूप में उभरा है।
  • चूंकि चीन द्वारा हिंद महासागर में पनडुब्बियों तथा जहाजों की आवाजाही में बढ़ोत्तरी सहित बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में प्रभुत्व जमाने वाली गतिविधियाँ की जा रही हैं, ऐसे में बिम्सटेक देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करना भारत के हित में होगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. बिमस्टेक के बारे में।
  2. सदस्य देश।
  3. उद्देश्य।

मेंस लिंक:

भारत के लिए बिमस्टेक के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

बैकाल-जीवीडी


(Baikal-GVD)

संदर्भ:

हाल ही में, रूसी वैज्ञानिकों द्वारा साइबेरिया में स्थित दुनिया की सबसे गहरी झील, बैकाल झील के पानी में ‘बैकाल-जीवीडी’ [Baikal-GVD (Gigaton Volume Detector)] नामक विश्व का सबसे बड़ा जलमग्न न्यूट्रिनो टेलिस्कोप स्थापित किया गया है।

‘बैकाल-जीवीडी’ के बारे में:

  • यह विश्व के सबसे बड़े तीन न्यूट्रिनो डिटेक्टर्स में से एक है। अन्य दो न्यूट्रिनो डिटेक्टर्स, दक्षिणी ध्रुव पर स्थापित ‘आइसक्यूब’ (IceCube) तथा भूमध्य सागर में स्थापित ‘एंटेयर्स’ (ANTARES) हैं।
  • इसका उद्देश्य न्यूट्रिनो’ (Neutrinos) नामक दुष्प्राप्य मूलभूत अणुओं के बारे में विस्तार से अध्ययन करना तथा उनके संभावित स्रोतों का पता लगाना है।

न्यूट्रिनो’ क्या हैं?

वर्ष 1930 में स्विस वैज्ञानिक वोल्फगैंग पाउली (Wolfgang Pauli) द्वारा प्रस्तावित ‘न्यूट्रिनो’ (Neutrinos) ब्रह्मांड में, ‘फोटॉन’ अणुओं, जो प्रकाश का निर्माण करते हैं, के पश्चात् सर्वाधिक मात्रा में पाए जाने वाले दूसरे अणु हैं। वास्तव में, न्यूट्रिनो, ब्रह्मांड में, इतनी प्रचुर मात्रा में हैं, कि प्रति सेकंड सैकड़ों ट्रिलियन न्यूट्रिनो हम सब के बीच से होकर गुजरते हैं, और हम उन्हें कभी भी नोटिस नहीं कर पाते हैं।

अध्ययन की आवश्यकता:

चूंकि, कुछ न्यूट्रिनों की उत्पत्ति बिग बैंग के दौरान हुई थी तथा सुपरनोवा विस्फोटों अथवा सूर्य में होने वाली परमाण्विक अभिक्रियाओं के परिणामस्वरूप अन्य न्यूट्रिनों का निर्माण होना जारी रहा, अतः इनका अध्ययन करने से वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड की उत्पत्ति के बारे में समझने में मदद मिलेगी।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘न्यूट्रिनो’ क्या हैं?
  2. प्रमुख विशेषताएं
  3. न्यूट्रिनो वेधशालाएँ क्या हैं? वे कहाँ स्थित हैं?

मेंस लिंक:

भारत के लिए न्यूट्रिनों के बारे में जानकारी और इसके अनुसंधान के महत्व की आलोचनात्मक रूप से जांच कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


क्यूलेक्स’ या आम घरेलू मच्छर

  • क्यूलेक्स मच्छर (Culex mosquitoes) कुछ गंभीर बीमारियों के ज्ञात वाहक होते हैं।
  • ये 1-1.5 किमी की दूरी तक उडान भर सकते हैं।
  • ये गंदे व ठहरे हुए पानी में प्रजनन करते हैं।

चर्चा का कारण:

दिल्ली में कई रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों द्वारा अपने आसपास मच्छरों की संख्या में वृद्धि होने की शिकायत की है, जिससे नगर निगमों को उच्च स्तर की बैठकें बुलानी पड़ रही हैं तथा मच्छरों की वृद्धि पर रोक लगाने के लिए अभियान तेज किये गए हैं।

छोटी बचतों पर ब्याज दरों में कोई कटौती नहीं

इस तिमाही के लिए छोटी बचतों पर ब्याज दरों में महत्वपूर्ण कटौती करने संबंधी अधिसूचना जारी होने के कुछ घंटों बाद ही सरकार द्वारा इसे वापस ले लिए गया और ब्याज दरों में की गई तीव्र कटौती को पलट दिया गया।

‘ब्याज दरें’ किस प्रकार तय की जाती हैं?

  • सैद्धांतिक रूप से, वर्ष 2016 के बाद से, सरकारी प्रतिभूतियों पर लाभ तथा तदनुसार, वरिष्ठ नागरिकों के लिए योजनाओं पर कुछ विस्तार सहित, इनकी परिपक्वता के आधार पर ब्याज दरें पुनः निर्धारित की जाती हैं। हालांकि, व्यवहार में, कई अन्य कारकों पर विचार करते हुए ब्याज दरों में बदलाव किया जाता है।
  • छोटी बचत योजनाओं की टोकरी में, बचत जमा, राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (NSC), लोक भविष्य निधि (PPF), किसान विकास पत्र (KVP) और सुकन्या समृद्धि योजना सहित 12 उपकरण शामिल होते हैं।

सैन्य अभ्यास शांतिर ओग्रोशेना 2021

(Exercise SHANTIR OGROSHENA 2021)

  • यह बांग्लादेश में आयोजित होने वाला बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास है।
  • इस वर्ष भारतीय सेना भी इस सैन्य अभ्यास में भाग लेगी।
  • यह सैन्य अभ्यास, बांग्लादेश में वहां के ‘राष्ट्रपिता’ बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान की जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में आयोजित किया जाएगा और यह बांग्लादेश की आज़ादी के शानदार 50 वर्ष पूरे होने का प्रतीक होगा।
  • पूरे अभ्यास के दौरान अमेरिका, ब्रिटेन, तुर्की, सऊदी अरब, कुवैत और सिंगापुर के सैन्य पर्यवेक्षक भी उपस्थित रहेंगे।

मुंबई में तीसरा संयुक्त लॉजिस्टिक नोड (JLN)

(Third joint logistics node (JLN) in Mumbai)

  • संयुक्त लॉजिस्टिक नोड (JLN), द्वारा सशस्त्र बलों को उनके सामरिक प्रयासों में तालमेल स्थापित करने के प्रयास में उनके छोटे हथियारों के गोला-बारूद, राशन, ईंधन, जनरल स्टोर, सिविल क्षेत्र से किराए पर लिए गए परिवहन वाहनों, विमानन में प्रयुक्त होने वाले वस्त्र, पुर्जों और इंजीनियरिंग सहायता हेतु एकीकृत लॉजिस्टिक कवर प्रदान करेंगे।
  • मुंबई, गुवाहाटी और पोर्ट ब्लेयर में संयुक्त लॉजिस्टिक नोड्स (JLN) की स्थापना हेतु सरकारी स्वीकृति पत्र पर 12 अक्टूबर, 2020 को हस्ताक्षर किए गए थे। गुवाहाटी और अंडमान-निकोबार कमान, पोर्ट ब्लेयर के लिए संयुक्त लॉजिस्टिक नोड्स इसी वर्ष जनवरी में शुरू हो गए थे।

दादा साहब फाल्के पुरस्कार

प्रसिद्ध अभिनेता रजनीकांत को वर्ष 2019 के लिए दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

पुरस्कार के बारे में:

  • दादासाहेब फाल्के पुरस्कार भारत का सिनेमा का सर्वोच्च पुरस्कार है।
  • यह पुरस्कार, फिल्म समारोह निदेशालय (सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा स्थापित एक संगठन) द्वारा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में प्रतिवर्ष प्रदान किया जाता है।
  • इस पुरस्कार में एक स्वर्ण कमल, 10 लाख रुपए नकद और एक शॉल प्रदान की जाती है।
  • यह पुरस्कार ‘भारतीय सिनेमा की वृद्धि और विकास में उत्कृष्ट योगदान’ के लिए प्रदान किया जाता है।
  • पहली बार यह पुरस्कार वर्ष 1969 में प्रदान किया गया था। पहली बार ‘भारतीय सिनेमा की प्रथम महिला’ अभिनेत्री देविका रानी को यह पुरस्कार दिया गया था।

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