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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 31 March 2021

 

विषयसूची

 

सामान्य अध्ययन-II

  1. धर्म की स्वतंत्रता
  2. समान नागरिक संहिता
  3. प्रवासी भारतीय नागरिक (OCI)
  4. आदर्श आचार संहिता
  5. न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB)

 

सामान्य अध्ययन-III

  1. केंद्र सरकार द्वारा ‘विदेश व्यापार नीति’ का विस्तार किए जाने की संभावना
  2. मानवाधिकार रिपोर्ट, 2020

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. साबरमती रिवर फ्रंट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट
  2. तेलंगाना में सेवानिवृत्ति की आयु में वृद्धि
  3. नकदुबा सिंहाला रामस्वामी सदाशिवन
  4. ‘आनंदम: प्रसन्नता केंद्र’

 


सामान्य अध्ययन-II


विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

 

धर्म की स्वतंत्रता

(Freedom of Religion)

 

 

संदर्भ:

हाल ही में, सर्वोच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमे कुरान की 26 आयतों को, इस आधार पर कि ये चरमपंथ और आतंकवाद को बढ़ावा देती हैं, तथा देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करती है; असंवैधानिक, निष्प्रभावी और गैर-कार्यात्मक घोषित करने की मांग की गयी है।

क्या किसी ‘आस्था’ को ‘धर्म की स्वतंत्रता’ के अंतर्गत रक्षित किया जा सकता है?

  • निश्चित रूप से नहीं, क्योंकि अनुच्छेद 25 के अंतर्गत ‘धर्म की स्वतंत्रता’, लोक व्यवस्था, स्वास्थ्य, नैतिकता और अन्य मूल अधिकारों का विषय है।
  • कोई भी व्यक्ति किसी अन्य की जान नहीं ले सकता क्योंकि यह ‘सभी को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार’ की गारंटी प्रदान करने वाले अनुच्छेद 21 का उल्लंघन होगा।

वर्तमान प्रकरण:

  • याचिकाकर्ता द्वारा केंद्र सरकार के तीन सचिवों को प्रतिवादी के रूप में नामित किया गया है। किंतु, विशुद्ध रूप से कानूनी शब्दों में, ‘रिट’ (Writ) का अधिकार-क्षेत्र केवल राज्य तक सीमित होता है, अर्थात ‘रिट’ केवल ‘राज्य’ के विरुद्ध दायर की जा सकती है, और अनुच्छेद 12 की व्याख्या के अनुसार, उपरोक्त ‘रिट’ में प्रतिवादी के रूप में नामित कोई भी व्यक्ति निश्चित रूप से ‘राज्य’ नहीं है।
  • इसके अलावा, भारतीय कानून के तहत, केवल किसी “कानून” की असंवैधानिकता (अनुच्छेद 13 (3) के अंतर्गत परिभाषित) को चुनौती दी जा सकती है। कुरान सहित किसी भी धार्मिक ग्रंथ को कानून नहीं माना जाता है। ईश्वरीय पुस्तकें किसी कानून का स्रोत हो सकती हैं लेकिन स्वयं में कानून नहीं होती हैं।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अनुच्छेद 12 के अंतर्गत ‘राज्य’ की परिभाषा।
  2. अनुच्छेद 13 (3) किससे संबंधित है?
  3. सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों का अधिकार क्षेत्र।
  4. अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 25 का अवलोकन।

 

मेंस लिंक:

भारतीय संविधान के अंतर्गत ‘धर्म की स्वतंत्रता’ के महत्व पर चर्चा कीजिए।

https://indianexpress.com/article/explained/quran-unconstitutional-pil-wasim-rizvi-case-judicial-review-7249760/lite/.

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

 

 

 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

 

समान नागरिक संहिता

(Uniform Civil Code)

 

 

संदर्भ:

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) एस ए बोबडे ने हाल ही में गोवा की ‘समान नागरिक संहिता’ की सराहना की, और इस विषय पर ‘शैक्षणिक-चर्चाओं’ में भाग लेने वाले ‘बुद्धिजीवियों’ को इसके बारे में अधिक जानने हेतु राज्य की यात्रा करने को प्रोत्साहित किया।

गोवा में सभी धर्मों के लोगों के लिए, विवाह एवं उत्तराधिकार संबंधी मामलों में, ‘समान नागरिक संहिता’ (Uniform Civil CodeUCC) में लागू है।

पृष्ठभूमि:

हालांकि, राज्य के नीति के निर्देशक सिद्धांतों से संबंधित संविधान के भाग IV के अनुच्छेद 44 में संविधान-निर्माताओं द्वारा ये उम्मीद और अपेक्षा की गई है, कि राज्य, भारत के संपूर्ण भू-भाग में नागरिकों के लिए एक ‘समान नागरिक संहिता’ सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे, किंतु इस दिशा में अब तक कोई कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

‘समान नागरिक संहिता’ क्या है?

समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code), सभी नागरिकों के लिए, एक धर्म-निरपेक्ष रूप से अर्थात धर्म को ध्यान में रखे बिना, तैयार किये गए शासकीय कानूनों का एक व्यापक समूह होती है।

संबंधित संवैधानिक प्रावधान:

संविधान के अनुच्छेद 44 में कहा गया है, कि देश में एक ‘समान नागरिक संहिता’ (UCC) होनी चाहिए। इस अनुच्छेद के अनुसार, ‘राज्य, भारत के समस्त राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक ‘समान सिविल संहिता’ सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा।‘ चूंकि ‘नीति-निदेशक सिद्धांत’ प्रकृति में केवल दिशा-निर्देशीय हैं, अतः राज्यों के लिए इनका पालन करना अनिवार्य नहीं है।

भारत में निम्नलिखित कारणों से एक ‘समान नागरिक संहिता’ की आवश्यकता है:

  • एक धर्मनिरपेक्ष गणराज्य में धार्मिक प्रथाओं के आधार पर विभेदित नियमों के बजाय सभी नागरिकों के लिए ‘एक समान कानून’ की आवश्यकता होती है।
  • ‘लैंगिक न्याय’: धार्मिक कानूनों के अतर्गत, चाहे वे हिंदू हो या मुस्लिम, आमतौर पर महिलाओं के अधिकार काफी सीमित होते हैं। धार्मिक परम्पराओं के अंतर्गत प्रचलित कई प्रथाएं भारतीय संविधान में प्रदत्त ‘मौलिक अधिकारों की गारंटी’ के विपरीत होती हैं।
  • न्यायालयों ने भी, अक्सर, शाह बानो मामले में दिए गए फैसले सहित, अपने निर्णयों में कहा है कि सरकार के लिए एक ‘समान नागरिक संहिता’ लागू करने की दिशा में अग्रसर होना चाहिए।

क्या भारत में पहले से ही नागरिक मामलों में ‘एक समान संहिता’ नहीं है?

भारतीय कानून के अंतर्गत, अधिकांश नागरिक मामलों, जैसे कि- भारतीय अनुबंध अधिनियम, नागरिक प्रक्रिया संहिता, माल बिक्री अधिनियम, संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम, भागीदारी अधिनियम, साक्ष्य अधिनियम आदि- में एक समान संहिता का पालन किया जाता है। हालांकि, राज्यों द्वारा इन कानूनों में सैकड़ों संशोधन किए गए हैं और इसलिए कुछ मामलों में, इन धर्मनिरपेक्ष नागरिक कानूनों के अंतर्गत भी काफी विविधता है।

इस बिंदु पर ‘समान नागरिक संहिता’ (UCC) वांछनीय क्यों नहीं है?

  • धर्मनिरपेक्षता, देश में फ़ैली हुई बहुलता / अनेकता के प्रतिकूल नहीं हो सकती है।
  • सांस्कृतिक विविधता को इस हद तक जोखिम में नहीं डाला जा सकता है, जिससे ‘एकरूपता’ के लिए हमारा आग्रह ही राष्ट्र की क्षेत्रीय अखंडता के लिए खतरा बन जाए।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘समान नागरिक संहिता’ (UCC) के बारे में।
  2. ‘राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत’ (DPSP) क्या हैं।
  3. DPSP का प्रवर्तन।
  4. शाह बानो केस किससे संबंधित है?

 

मेंस लिंक:

इस बिंदु पर ‘समान नागरिक संहिता’ (UCC) वांछनीय क्यों नहीं है? चर्चा कीजिए।

https://indianexpress.com/article/explained/explained-after-cji-bobdes-remarks-on-uniform-civil-code-a-look-at-its-status-debate-around-it-7249410/lite/.

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

 

प्रवासी भारतीय नागरिक (OCI)

(Overseas Citizens of India)

 

संदर्भ:

हाल ही में जारी एक सरकारी अधिसूचना के अनुसार, भारतीय मूल के लोगों तथा ‘प्रवासी भारतीय नागरिक’ / ‘ओवरसीज सिटीजन ऑफ़ इंडिया’ (OCI) कार्ड धारक भारतीय प्रवासियों को भारत की यात्रा करने के लिए अपने पुराने, समाप्त हो चुके पासपोर्ट को साथ में नहीं लाना होगा। ज्ञातव्य हो, कि इससे पहले OCI कार्ड धारकों को अपने भारत की यात्रा हेतु अपने पुराने पासपोर्ट को दिखाना अनिवार्य था।

‘प्रवासी भारतीय नागरिक’ (OCI) कार्डधारक कौन होते हैं?

  • भारत सरकार द्वारा अगस्त, 2005 में नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन करते हुए प्रवासी भारतीय नागरिकता (Overseas Citizenship of IndiaOCI) योजना आरंभ की गई थी।
  • भारत सरकार द्वारा 09 जनवरी 2015 को भारतीय मूल के नागरिक (PIO) कार्ड को समाप्त करते हुए इसे ‘प्रवासी भारतीय नागरिक’ (OCI) कार्ड के साथ संयुक्त कर दिया गया।

पात्रता:

भारत सरकार द्वारा निम्नलिखित श्रेणियों के विदेशी नागरिकों को प्रवासी भारतीय नागरिकता कार्ड हेतु आवेदन करने की अनुमति दी गयी है:

  1. जो दूसरे देश का नागरिक है, किन्तु संविधान के लागू होने के समय, 26 जनवरी 1950 या उसके पश्चात् किसी समय भारत का नागरिक थे; या
  2. जो दूसरे देश का नागरिक है, किन्तु 26 जनवरी 1950 को भारत का नागरिक होने के लिए पात्र थे; या
  3. जो दूसरे देश का नागरिक है, किन्तु ऐसे राज्यक्षेत्र से संबद्ध थे, जो 15 अगस्त, 1947 के पश्चात् भारत का भाग बन गया था; या
  4. जो किसी ऐसे नागरिक का पुत्र/पुत्री या पौत्र/पौत्री, दौहित्र/दौहित्री या प्रपौत्र/प्रपौत्री, प्रदौहित्र/प्रदौहित्री है; या
  5. किसी ऐसे व्यक्ति को, जो खंड (क) में वर्णित किसी व्यक्ति का अप्राप्तवय पुत्र/पुत्री है।

 

 

अपवाद:

  • ‘प्रवासी भारतीय नागरिक’ (OCI) कार्ड के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति के पास किसी अन्य देश का वैध पासपोर्ट होना अनिवार्य है।
  • ऐसे व्यक्ति जिनके पास किसी अन्य देश की नागरिकता नहीं है, वे ‘प्रवासी भारतीय नागरिक’ का दर्जा प्राप्त करने के पात्र नहीं हैं।
  • ऐसे व्यक्ति जिनके माता-पिता या दादा-दादी पाकिस्तान और बांग्लादेश के नागरिक हैं, वे प्रवासी भारतीय नागरिक’ कार्ड हेतु आवेदन करने के पात्र नहीं हैं।

ओसीआई कार्डधारकों के लिए लाभ:

  1. भारत आने के लिए जीवनपर्यंत वीजा।
  2. प्रवास के दौरान विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी (FRRO) या विदेशी पंजीकरण अधिकारी (FRO) के पास पंजीकरण करने की आवश्यकता नहीं होती है।
  3. अनिवासी भारतीयों (NRI) को मिलने वाली आर्थिक, वित्तीय, शैक्षिक, सुविधा उपलब्ध होती है, किंतु कृषि, संपत्ति या बागान खरीदने की छूट नहीं होती है।
  4. भारतीय बच्चों के अंतर-देशीय गोद लेने के संबंध में अनिवासी भारतीयों के समान व्यवहार।
  5. राष्ट्रीय स्मारकों में प्रवेश शुल्क, डॉक्टरों, दंत चिकित्सकों, नर्सों, अधिवक्ताओं, वास्तुकारों, चार्टर्ड एकाउंटेंट और फार्मासिस्ट जैसे व्यवसाय अपनाने पर अनिवासी भारतीयों के समान व्यवहार।
  6. अखिल भारतीय प्री-मेडिकल परीक्षाओं एवं इस तरह की अन्य परीक्षाओं में भाग लेने के लिए अनिवासी भारतीयों समान व्यवहार।
  7. भारतीय घरेलू क्षेत्रों में वायु-यातायात के मामलों में भारतीय नागरिकों के समान व्यवहार।
  8. भारत के राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों में प्रवेश हेतु भारतीयों के लिए समान प्रवेश शुल्क।
  9. प्रवासी भारतीय नागरिक (OCI) बुकलेट का उपयोग सेवाओं का लाभ उठाने के लिए पहचान के रूप में किया जा सकता है। OCI कार्ड को स्थानीय पता और एक शपथपत्र लगाकर आवासीय प्रमाण के रूप में संलग्न किया जा सकता है।

ओसीआई कार्ड धारकों पर प्रतिबंध:

  1. वोट देने का अधिकार नहीं है।
  2. किसी भी सार्वजनिक सेवा / सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने के पात्र नहीं है।
  3. प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, उप-प्रधान, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश और उच्च न्यायालय, संसद के सदस्य या राज्य विधान सभा या परिषद के सदस्य – के पद पर नियुक्त का अधिकार नहीं होता है।
  4. कृषि संपत्ति को नहीं खरीद सकते हैं।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. नागरिक की परिभाषा।
  2. POI बनाम OCI बनाम NRI
  3. नागरिकता प्रदान करने और निरस्त करने की शक्ति?
  4. भारत में दोहरी नागरिकता।
  5. ओसीआई कार्ड धारकों के लिए चुनाव में वोट देने और चुनाव लड़ने का अधिकार।
  6. क्या ओसीआई धारक कृषि भूमि खरीद सकते हैं?
  7. ओसीआई कार्ड किसे जारी नहीं किए जा सकते हैं?

 

मेंस लिंक:

भारत के प्रवासी नागरिक कौन होते हैं? ओसीआई कार्ड धारकों के लिए क्या लाभ उपलब्ध हैं? चर्चा कीजिए।

https://epaper.thehindu.com/Home/MShareArticle?OrgId=GDO8E9S6P.1&imageview=0.

स्रोत: द हिंदू

 

 

विषय: जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की मुख्य विशेषताएँ।

 

आदर्श आचार संहिता (MCC)

(Model code of conduct)

‘तृणमूल कांग्रेस’ द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक शिकायत में एक आरोप लगाते हुए कहा गया है, कि प्रधानमंत्री द्वारा बांग्लादेश का हालिया दौरा ‘आदर्श आचार संहिता’ के उल्लंघन के समान है।

पृष्ठभूमि:

प्रधानमंत्री मोदी, 26 मार्च को बांग्लादेश की स्वतंत्रता की 50 वीं वर्षगांठ और ‘बंगबंधु’ शेख मुजीबुर्रहमान की जन्म शताब्दी समारोह में भाग लेने के लिए बांग्लादेश की यात्रा पर गए थे।

आदर्श आचार संहिता (MCC) क्या होती है?

आदर्श आचार संहिता (MCC), भारत के निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए भाषण, मतदान दिवस, मतदान केंद्र, चुनाव घोषणापत्र, जुलूस और सामान्य आचरण के संबंध में जारी किए गए दिशा-निर्देश होते हैं।

  • आदर्श आचार संहिता, संविधान के अनुच्छेद 324 को ध्यान में रखते हुए जारी की जाती है।
  • अनुच्छेद 324 में निर्वाचन आयोग (EC) को संसद और राज्य विधानसभाओं के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की शक्ति प्रदान की गयी है।

उद्देश्य: स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना।

आदर्श आचार संहिता कब लागू की जाती है?

वर्तमान में, निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के तुरंत बाद आदर्श आचार संहिता लागू हो जाती है और यह चुनावी प्रक्रिया के अंत तक लागू रहती है।

आदर्श आचार संहिता का आधार:

स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के हित में इस तरह की संहिता आवश्यक होती है। हालाँकि, आदर्श आचार संहिता का कोई विशिष्ट वैधानिक आधार नहीं है। यह प्रभाव में मात्र प्रत्ययकारी (Persuasive) होती है। इसमें ‘चुनावी नैतिकता के नियम’ समाहित होते हैं। हालांकि, वैधानिक आधार न होने पर भी निर्वाचन आयोग द्वारा इसे लागू किया जाता है।

‘आदर्श आचार संहिता’ का विकास

‘आदर्श आचार संहिता’ पहली बार निर्वाचन आयोग द्वारा वर्ष 1971 (5वें आम चुनाव) में जारी की गयी थी और इसके पश्चात समय-समय पर इसमें संशोधन किए जाते रहे हैं। चुनावी मानदंडों का यह समुच्चय राजनीतिक दलों की सर्वसम्मति के साथ विकसित किया गया है। राजनीतिक दलों के द्वारा संहिता में सन्निहित सिद्धांतों का पालन करने की सहमति दी गयी है और यह सहमति, संहिता को को संपूर्ण रूप से पालन करने को बाध्य भी करती है।

संहिता में प्रावधान

आदर्श आचार संहिता में राजनीतिक दलों, चुनाव में उम्मीदवार और सत्ताधारी दलों के लिए चुनाव प्रक्रिया के दौरान आचरण के संबंध में दिशा-निर्देशों का विवरण होता है, अर्थात सभाओं और जुलूसों को आयोजित करने, मतदान के दिन की गतिविधियों और सत्ताधारी दलों की कार्यप्रणाली के संबंध में दिशा-निर्देश होते है।

आचार संहिता का प्रवर्तन:

निर्वाचन आयोग द्वारा संहिता के उल्लंघन पर ध्यान देने हेतु कई तंत्र तैयार किए गए हैं, जिसमें प्रवर्तन एजेंसियां और फ्लाइंग स्क्वॉड के संयुक्त कार्य बल शामिल हैं। हाल ही में, ‘cVIGIL’ नामक मोबाइल ऐप की शुरूआत की गयी है, जिसके माध्यम से चुनावों के दौरान होने वाली किसी भी गड़बड़ी ऑडियो-विजुअल साक्ष्यों को रिपोर्ट किया जा सकता है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. MCC क्या है?
  2. MCC का वैधानिक आधार
  3. ‘आदर्श आचार संहिता’ कौन जारी करता है?
  4. ‘आदर्श आचार संहिता’ का उल्लंघन होने पर प्रक्रिया
  5. ‘आदर्श आचार संहिता’ का विकास

 

मेंस लिंक:

‘आदर्श आचार संहिता’ की आवश्यकता और महत्व पर चर्चा कीजिए।

https://epaper.thehindu.com/Home/MShareArticle?OrgId=GDO8E9S81.1&imageview=0.

स्रोत: द हिंदू

 

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

न्यू डेवलपमेंट बैंक

(New Development Bank- NDB)

 

 

संदर्भ:

वित्त और कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने ‘न्यू डेवलपमेंट बैंक’ (New Development Bank- NDB) से भारत के ‘अवसंरचना वित्तपोषण हेतु नए विकास वित्तपोषण संस्थान’ के साथ मिलकर कार्य करने पर विचार करने का आग्रह किया है।

पृष्ठभूमि:

न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) द्वारा, भारत के लिए, अब तक, कोविड-19 महामारी के प्रभाव से निपटने हेतु स्वास्थ्य संबंधी व्यय और आर्थिक सुधार में सहयोग करने $ 2 बिलियन के आपातकालीन ऋण दिए जाने सहित 18 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है।

न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) के बारे में:

  • यह ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका – BRICS) देशों द्वारा संचालित एक बहुपक्षीय विकास बैंक है।
  • वर्ष 2013 में, दक्षिण अफ्रीका के डरबन में आयोजित 5 वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान ब्रिक्स नेताओं द्वारा ‘न्यू डेवलपमेंट बैंक’ की स्थापना करने के संबंध में सहमति व्यक्त की गई थी।
  • इसकी स्थापना वर्ष 2014 में, ब्राजील के फोर्टालेजा में आयोजित 6 वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान की गई थी।
  • इस बैंक की स्थापना का उद्देश्य, पांच उभरते हुए बाजारों में वित्तीय और विकास सहयोग को बढ़ावा देना है।
  • इसका मुख्यालय: शंघाई, चीन में स्थित है।

वर्ष 2018 में, ‘न्यू डेवलपमेंट बैंक’ को, संयुक्त राष्ट्र के साथ सक्रिय और लाभप्रद सहयोग हेतु एक मजबूत आधार स्थापित करते हुए, संयुक्त राष्ट्र महासभा में पर्यवेक्षक का दर्जा प्रदान किया गया।

मतदान:

विश्व बैंक, जिसमे पूंजी शेयर के आधार पर ‘वोट’ का निर्धारण होता है, के विपरीत ‘न्यू डेवलपमेंट बैंक’ में प्रत्येक भागीदार देश को एक ‘वोट’ निर्धारित किया जाता है, तथा किसी भी देश के पास ‘वीटो पावर’ नहीं होती है।

भूमिकाएँ एवं कार्य:

‘न्यू डेवलपमेंट बैंक’, वैश्विक वृद्धि और विकास हेतु बहुपक्षीय और क्षेत्रीय वित्तीय संस्थानों के मौजूदा प्रयासों में सहायता करने हेतु ब्रिक्स देशों, अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों में बुनियादी ढांचे और सतत विकास परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाने का कार्य करता है।

 

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) – सदस्य और मतदान शक्तियाँ।
  2. NDB द्वारा कहां निवेश किया जा सकता है?
  3. भारत में NDB द्वारा वित्त पोषित परियोजनाएं कौन सी हैं?
  4. फोर्टालेजा घोषणा किससे संबंधित है?
  5. NDB की स्थापना कब की गई थी?
  6. NDB बनाम World Bank बनाम AIIB

 

मेंस लिंक:

न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) के उद्देश्यों और महत्व पर चर्चा कीजिए।

https://epaper.thehindu.com/Home/MShareArticle?OrgId=GHO8E9ODB.1&imageview=0.

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव।

केंद्र सरकार द्वारा ‘विदेश व्यापार नीति’ का विस्तार किए जाने की संभावना

 

संदर्भ:

सरकार द्वारा, इस साल 1 अप्रैल को समाप्त होने वाली मौजूदा ‘विदेश व्यापार नीति’ (Foreign Trade Policy- FTP) को आगामी कुछ महीनों के लिए बढाए जाने की संभावना है।

महामारी और तालाबंदी के दौरान, 31 मार्च, 2020 को, केंद्र सरकार द्वारा ‘विदेश व्यापार नीति’ (2015-20) को एक वर्ष के लिए अर्थात 31 मार्च, 2021 तक बढ़ा दिया गया था।

‘विदेश व्यापार नीति’ (2015-20):

  • विदेश व्यापार नीति’ (FTP), 2015-20 के अंतर्गत ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के अनुरूप, माल और सेवाओं के निर्यात में वृद्धि के साथ-साथ देश में रोज़गार सृजन और मूल्यवर्धन करने हेतु एक रूपरेखा प्रदान की गयी है।
  • एफ़टीपी 2015-20 के तहत, निर्दिष्ट बाजारों में विशिष्ट वस्तुओं के निर्यात के लिए ‘मर्चेंडाइज़ एक्सपोर्ट्स फ्रॉम इंडिया स्कीम’ (Merchandise Exports from India Scheme- MEIS) तथा अधिसूचित सेवाओं के निर्यात में वृद्धि हेतु ‘सर्विस एक्सपोर्ट्स फ्रॉम इंडिया स्कीम’ (Service Exports from India Scheme- SEIS) नामक दो योजनाएँ शुरू की गई हैं।
  • MEIS और SEIS के तहत जारी किए गए ‘शुल्क जमा पावती पत्र’ अर्थात ‘ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप’ तथा इन ‘पावती पत्रों’ के सहारे आयातित सामान पूरी तरह से हस्तांतरणीय होता है।
  • पूंजीगत वस्तुओं को स्वदेशी निर्माताओं से खरीदे जाने संबंधी मामलों में, निर्यात संवर्द्धन पूंजीगत वस्तुओं (Export Promotion Capital Goods – EPCG) योजना के तहत विशिष्ट निर्यात बाध्यता को, घरेलू पूंजीगत सामान विनिर्माण उद्योग को बढ़ावा देने के लिए, ‘सामान्य निर्यात बाध्यता’ के 75% तक घटा दिया गया है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. विदेश व्यापार नीति’ (2015-20) का अवलोकन।
  2. ‘ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप्स’ क्या हैं?
  3. EPCG योजना के बारे में।
  4. MEIS के बारे में।
  5. SEIS के बारे में।

 

मेंस लिंक:

विदेश व्यापार नीति की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।

https://epaper.thehindu.com/Home/MShareArticle?OrgId=GHO8E9OD7.1&imageview=0.

स्रोत: द हिंदू

 

 

विषय: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।

मानवाधिकार रिपोर्ट, 2020

(Human Rights Report)

 

संदर्भ:

हाल ही में, अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा ‘मानवाधिकार रिपोर्ट’, 2020 जारी की गई है।

प्रतिवर्ष अमेरिकी कांग्रेस के लिए पेश की जाने वाली यह रिपोर्ट पूर्वव्यापी होती है, और इसमें मानव अधिकारों संबंधी देश-वार चर्चा शामिल होती है।

प्रमुख निष्कर्ष:

  1. वर्ष 2020 में, अपनी रिपोर्टिंग और सोशल मीडिया पर भारत सरकार की आलोचना करने वाले पत्रकारों को प्रताड़ित करना तथा हिरासत में लिया जाना जारी रहा, हालाँकि सरकार, आम तौर पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करती है।
  2. सरकार द्वारा इंटरनेट कंपनियों से उपयोगकर्ताओं के डेटा की मांग संबंधी अनुरोधों में “नाटकीय रूप से वृद्धि” हुई।
  3. ऐसे कई उदाहरण देखे गए जिनमें सरकार द्वारा, अथवा सरकार के करीबी माने जाने वाले कर्ताओं द्वारा सरकार के आलोचक मीडिया आउटलेट्स को कथित तौर पर ऑनलाइन ट्रोलिंग सहित परेशान किया गया अथवा इन पर दबाव डाला गया।
  4. सरकार द्वारा वर्ष 2019 में फेसबुक से, उपयोगकर्ताओं के डेटा संबंधी 49,382 मांग अनुरोध किए गए, जो कि वर्ष 2018 से 32% से अधिक थे। इसी अवधि में, गूगल और ट्विटर से उपयोगकर्ताओं के डेटा संबंधी मांग में क्रमशः 69% तथा 68% वृद्धि देखी गई।

https://epaper.thehindu.com/Home/MShareArticle?OrgId=GDO8E9S7V.1&imageview=0.

स्रोत: द हिंदू

 

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

 

साबरमती रिवर फ्रंट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट

 

यह अहमदाबाद शहर का नवीनीकरण करने वाले एक पर्यावरण सुधार, सामाजिक उत्थान और शहरी कायाकल्प परियोजना है। इस परियोजना के तहत नदी के किनारे स्थित लगभग 200 हेक्टेयर भूमि का पुनरुद्धार किया जाएगा।

 

साबरमती नदी के बारे में:

  • यह नर्मदा और ताप्ती की भांति पश्चिमी की ओर प्रवाहित होने वाली नदियों में से एक है।
  • इसका उद्गम, उदयपुर जिला राजस्थान के तेपुर गांव के पास अरावली पहाड़ियों से होता है।
  • यह नदी, कैम्बे की खाड़ी (खंभात) में सागर से मिलती है।
  • अहमदाबाद शहर इस नदी के तट पर स्थित है।

 

 

तेलंगाना में सेवानिवृत्ति की आयु में वृद्धि

तेलंगाना में राज्य सरकार के कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाकर 61 वर्ष कर दी गई है। 27 मार्च को जारी एक अतिरिक्त गजट में इस संबंध में ‘क़ानून’ प्रकाशित हुआ था।

 

नकदुबा सिंहाला रामस्वामी सदाशिवन

(Nacaduba sinhala ramaswamii Sadasivan)

यह पश्चिमी घाट में अगस्त्यमाली बायोस्फीयर रिजर्व में खोजी गई एक नई तितली प्रजाति है।

 

 

आनंदम: प्रसन्नता केंद्र

(Ānandam: The Center for Happiness)

  • भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) जम्मू द्वारा “आनंदम : द सेंटर फॉर हैप्‍पीनैस” शुरू किया गया है।
  • यह केंद्र छात्रों और शिक्षकों दोनों को मानसिक तनाव से उबरने और सकारात्‍मकता का प्रसार करने में मदद करेगा। इसके साथ ही यह आई. आई. एम. जम्‍मू के सभी हितधारकों में समग्र विकास की भावना को प्रोत्‍साहित करेगा और उसका प्रसार करेगा।

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