Print Friendly, PDF & Email

INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 30 March 2021

 

विषयसूची

 

सामान्य अध्ययन-II

  1. प्रसन्नता पाठ्यक्रम
  2. विशिष्ट भू-खंड पहचान संख्या (ULPIN) योजना
  3. NRC के तहत अस्वीकरण पर्चियां शीघ्र ही जारी की जाएंगी

 

सामान्य अध्ययन-III

  1. आठ चक्रवातों के कारण ओडिशा को ₹ 31,945 करोड़ का नुकसान
  2. ‘ग्रेटर टिपरालैंड’ की मांग

 

सामान्य अध्ययन-IV

  1. जेल रेडियो
  2. हमला करने के आरोपी को नशा-मुक्ति केंद्र पर सामुदायिक सेवा करने का आदेश

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. पेट्रीसिया माउंटबेटन
  2. गीगा मेष

 

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

प्रसन्नता पाठ्यक्रम

(Happiness Curriculum)

 

संदर्भ:

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इस शैक्षणिक सत्र से प्रायोगिक परियोजना (पायलट प्रोजेक्ट) के रूप में एक ‘प्रसन्नता पाठ्यक्रम’ (Happiness Curriculum) शुरू किए जाने की संभावना है।

इसे ‘प्राप्ति पाठ्यक्रम’ (Realisation Curriculum) कहा जाएगा तथा इसी शैक्षणिक सत्र से मथुरा के विद्यालयों में शुरू किया जाएगा।

उद्देश्य:

उत्तर प्रदेश में इस पाठ्यक्रम शुरू करने का उद्देश्य सार्थक और चिंतनशील कहानियों और गतिविधियों के माध्यम स्थायी खुशी या प्रसन्नता हासिल करने की यात्रा में छात्रों का सहयोग करना है।

‘प्रसन्नता पाठ्यक्रम’ क्या है?

‘प्रसन्नता पाठ्यक्रम’ का आरंभ पहली बार वर्ष 2018 में दिल्ली सरकार द्वारा किया गया था ।

इस पाठ्यक्रम के तहत विद्यालयों में छात्रों के कल्याण और खुशी पर ध्यान देने साथ-साथ उनकी अनुभूति, भाषा, साक्षरता, संख्यात्मकता और कला में विकास को प्रोत्साहित करने पर बल दिया जाता है।

इस पाठ्यक्रम को किस प्रकार लागू किया जाएगा?

इस पाठ्यक्रम को नर्सरी से आठवीं कक्षा तक के छात्रों के लिए तैयार किया गया है।

  • वर्ग 1 में नर्सरी और केजी के छात्र शामिल होंगे, इनके लिए एक शिक्षक की देखरेख में दिमागी गतिविधियों तथा अभ्यास से संबंधित द्वि-साप्ताहिक कक्षाओं का आयोजन किया जायेगा, इनमे से प्रत्येक सत्र 45 मिनट का होगा। कक्षा 1-2 के बच्चों के लिए साप्ताहिक कार्यदिवसों के दौरान दिमागी गतिविधियों तथा अभ्यास के साथ-साथ चिंतनशील प्रश्नों को शामिल करते हुए कक्षाओं का आयोजन किया जाएगा।
  • दूसरे वर्ग में कक्षा 3-5 के छात्रों, तथा तीसरे वर्ग में कक्षा 6-8 तक के छात्रों को शामिल किया जाएगा, जो उपरोक्त गतिविधियों के अलावा, उनके व्यवहार में परिवर्तन को दर्शाने वाले आत्म-अभिव्यक्ति में भाग लेंगे।

इस पाठ्यक्रम के शिक्षण परिणामों को चार श्रेणियों में विभक्त किया गया है:

  1. यथोचित वुद्धिपरक और सचेत (आत्मबोध के स्तर में वृद्धि करना, प्रभावी श्रवण विकसित करना, यथार्थ में बने रहना)।
  2. आलोचनात्मक चिंतन एवं मीमांसा विकसित करना (रूढ़ियों और मान्यताओं से परे सोच, अपने स्वयं के विचारों और व्यवहारों को प्रतिबिंबित करने संबंधी क्षमता विकसित करना)।
  3. सामाजिक-भावनात्मक कौशल विकसित करना (सहानुभूति प्रदर्शित करना, चिंता और तनाव का सामना करना।
  4. बेहतर संचार कौशल विकसित करना और एक आत्मविश्वासपूर्ण और हँसमुख व्यक्तित्व विकसित करना (दैनिक जीवन पर एक संतुलित दृष्टिकोण विकसित करना, आत्मविश्वास को प्रतिबिंबित करना, जिम्मेदार बनना और स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को प्रतिबिंबित करना)।

मूल्यांकन-विधि:

मूल्यांकन के लिए, कोई परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी और न ही कोई अंक प्रदान किए जाएंगे। इस पाठ्यक्रम के तहत मूल्यांकन गुणात्मक होगी, जिसमे, प्रत्येक छात्र की अद्वितीय एवं भिन्न यात्रा को ध्यान में रखते हुए “परिणाम के बजाय प्रक्रिया” पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

https://epaper.thehindu.com/Home/MShareArticle?OrgId=GSU8E3NRM.1&imageview=0.

स्रोत: द हिंदू

 

 


विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

विशिष्ट भू-खंड पहचान संख्या (ULPIN) योजना

(Unique Land Parcel Identification Number)

 

 

संदर्भ:

हाल ही में, ‘यूनीक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर’ (ULPIN) अर्थात ‘विशिष्ट भू-खंड पहचान संख्या योजना’ की शुरुआत की गई है, और इस योजना को मार्च 2022 तक पूरे देश में लागू किया जाएगा।

इस योजना को, ‘डिजिटल भारत भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम’ (Digital India Land Records Modernisation ProgrammeDILRMP) के एक भाग के रूप में एक संसदीय स्थायी समिति द्वारा लोकसभा में प्रस्तुत रिपोर्ट में प्रस्तावित किया है। ज्ञातव्य है, कि डिजिटल भारत भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP) की शुरुआत वर्ष 2008 में की गई थी, जिसका बाद के वर्षो में कई बार विस्तार किया गया था।

 

योजना के बारे में:

  • इस योजना के तहत, देश में प्रत्येक भूखंड को एक 14-अंकीय पहचान संख्या जारी की जाएगी।
  • इसे ‘जमीन की आधार संख्या’ भी कहा जा रहा है। यह संख्या, जमीन के सर्वेक्षण किये जा चुके प्रत्येक खंड की विशिष्ट रूप से पहचान करेगी तथा विशेष रूप से ग्रामीण भारत में, जहाँ आमतौर पर भूमि-अभिलेख काफी पुराने तथा विवादित होते हैं, भूमि-संबंधी धोखाधड़ी पर रोके लगाएगी।
  • इसके तहत भू-खंड की पहचान, उसके देशांतर और अक्षांशो के आधार पर की जाएगी और विस्तृत सर्वेक्षण और भू-संदर्भित भूसंपत्‍ति-मानचित्र पर निर्भर होगी।

लाभ:

ULPIN के बहुपक्षीय लाभ हैं। जानकारी का यह एकल स्रोत, भू-स्वामित्व प्रमाणित कर सकता है और इससे भू-स्वामित्व संबंधी संदिग्ध दावे समाप्त होंगे। यह आसानी से सरकारी भूमि की पहचान करने में सहायक होगा तथा न्यायहीन भूमि-लेनदेन से बचाएगा।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ULPIN के बारे में।
  2. प्रमुख विशेषताएं।
  3. DILRMP के बारे में।

 

मेंस लिंक:

‘डिजिटल भारत भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम’ (DILRMP) पर एक टिप्पणी लिखिए।

https://epaper.thehindu.com/Home/MShareArticle?OrgId=GSU8E3NQU.1&imageview=0.

स्रोत: द हिंदू

 


विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

NRC के तहत अस्वीकरण पर्चियां शीघ्र ही जारी की जाएंगी

 

 

संदर्भ:

हाल ही में, केंद्र सरकार ने, असम सरकार से वर्ष 2019 में प्रकाशित आखिरी राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) में शामिल नहीं किये जाने वाले लोगों के लिए ‘अस्वीकरण पर्चियां’ (Rejection Slips) तत्काल जारी करने को कहा है।

पृष्ठभूमि:

असम राज्य में, कुल 3.30 करोड़ आवेदकों में से 19 लाख आवेदक राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) की आख़िरी सूची से बाहर हो गए थे। इस ‘राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर’ को तैयार करने में पांच वर्ष का समय तथा 1,220 करोड़ रुपए का व्यय हुआ है।

 

‘राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर’ क्या है?

  • राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) मुख्यतः अवैध भारतीय नागरिकों का आधिकारिक रिकॉर्ड है। इसमें ‘नागरिकता अधिनियम, 1955 के अनुसार, भारतीय नागरिक के रूप में पात्र व्यक्तियों के बारे में जनांकिक विवरण शामिल किया जाता है।
  • सबसे पहले इस रजिस्टर को वर्ष 1951 की जनगणना के बाद तैयार किया गया था। इसके बाद, कुछ समय पूर्व तक कभी भी अद्यतन / अपडेट नहीं किया गया था।
  • अब तक, केवल असम राज्य के लिए इस तरह के डेटाबेस को तैयार किया गया है।

 

 

असम में ‘राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर’ को अद्यतन किए जाने का कारण:

वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने, नागरिकता अधिनियम, 1955 और नागरिकता नियम, 2003 के अनुसार, असम के सभी भागों में ‘राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर’ को अद्यतन करने का आदेश दिया था। यह प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर वर्ष 2015 में शुरू हुई।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. जनगणना और NPR के बीच संबंध।
  2. NPR बनाम NRC
  3. NRC, असम समझौते से किस प्रकार संबंधित है।
  4. नागरिकता प्रदान करने और रद्द करने के लिए संवैधानिक प्रावधान।
  5. जनगणना किसके द्वारा की जाती है?

 

मेंस लिंक:

एक राष्ट्रव्यापी राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC)  प्रक्रिया क्यों नहीं संभव हो सकती है, चर्चा कीजिए।

https://epaper.thehindu.com/Home/MShareArticle?OrgId=GSU8E3NR0.1&imageview=0.

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: आपदा और आपदा प्रबंधन।

आठ चक्रवातों के कारण ओडिशा को ₹ 31,945 करोड़ का नुकसान

 

 

संदर्भ:

ओडिशा सरकार को वर्ष 1999 के सुपर साइक्लोन के पश्चात आने वाले आठ भिन्न-भिन्न चक्रवातों के कारण कुल 31,945.80 करोड़ रुपए का नुख्सान हुआ है, किंतु राज्य को इसके लिए केंद्र सरकार से मामूली, कुल नुक्सान की मात्र एक-छठी, सहायता प्राप्त हुई है।

इन चक्रवातों मे शामिल है:

फैलिन (2013), हुदहुद (2014), तितली, फेथाई और डे (DAYE)  (2018), बुलबुल और फानी (2019) और अम्फान (2020)।

‘चक्रवात’ क्या होते है?

उष्णकटिबंधीय चक्रवात, हवाओं की एक विस्तृत प्रणाली होते है, जिसमे हवाएं, एक निम्न वायुदाब केंद्र के चारो ओर घूर्णन करती हैं, इसमें हवाओं की दिशा, भूमध्य रेखा के उत्तर में वामावृत (counter-clockwise) और भूमध्य रेखा के दक्षिण में दक्षिणावर्त (clockwise) होती है।

चक्रवातों की उत्पत्ति:

 

  • चक्रवातों की उतपत्ति, अत्यंत निम्न वायु दाब तंत्र के बनने तथा उसके चारो ओर हवाओं के तीव्र संचरण के परिणाम स्वरूप होती है।
  • हवाओं की गति, दिशा, तापमान तथा आर्द्रता जैसे कारक चक्रवातों के विकास में सहायक होते हैं।
  • बादलों के निर्माण से पूर्व, पानी, वायुमंडल से ऊष्मा ग्रहण कर जल-वाष्प में परिवर्तित हो जाता है। जल-वाष्प, वर्षा के रूप में पुनः तरल रूप में परिवर्तित हो जाती है और इस प्रक्रिया के दौरान वायुमंडल में ऊष्मा निर्मुक्त होती है।
  • वायुमंडल में निर्मुक्त होने वाली इस ऊष्मा से आस-पास की वायु गर्म हो जाती है। ये वायु गर्म होकर ऊपर उठती है जिससे निम्न दाब का निर्माण होता है। इसके परिणाम स्वरूप हवाएं तीव्रता से निम्नदाब केंद्र की ओर झपटती है और इस प्रकार एक चक्रवात का निर्माण होता है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. चक्रवातों की उत्पत्ति के लिए उत्तरदायी कारक
  2. विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में चक्रवातों का नामकरण।
  3. भारत के पूर्वी तट में अधिक चक्रवात आने का कारण
  4. कोरिओलिस बल क्या है?
  5. ‘संघनन की गुप्त ऊष्मा’ क्या होती है?

 

मेंस लिंक:

उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के निर्माण के लिए उत्तरदायी कारकों पर चर्चा कीजिए।

https://epaper.thehindu.com/Home/MShareArticle?OrgId=GSU8E3HTE.1&imageview=0.

स्रोत: द हिंदू

 

 

विषय: आंतरिक सुरक्षा के लिये चुनौती उत्पन्न करने वाले शासन विरोधी तत्त्वों की भूमिका।

 

‘ग्रेटर टिपरालैंड’ की मांग

 

संदर्भ:

त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद् (Tripura Tribal Areas Autonomous District Council–  TTAADC) के लिए होने वाले चुनाव अभियानों में ‘ग्रेटर टिपरालैंड’ (Greater Tipraland) की माँग एक प्रमुख मुद्दा रही है।

 

 

‘ग्रेटर टिपरालैंड’ क्या है?

  • ‘ग्रेटर टिपरालैंड’ (Greater Tipraland), मूल रूप से एक सत्तारूढ़ सहयोगी जनजातीय दल- इंडीजनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (IPFT) द्वारा ‘टिपरालैंड’ की मांग का विस्तार है, जिसके तहत त्रिपुरा के आदिवासियों के लिए एक अलग राज्य बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
  • इस नई मांग में, ‘त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद’ (TTAADC) के बाहर स्थानीय क्षेत्रों या गाँवों में रहने वाले प्रत्येक आदिवासी को प्रस्तावित मॉडल के अंतर्गत शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है।
  • हालांकि, यह विचार केवल त्रिपुरा के आदिवासी परिषद क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि भारत के विभिन्न राज्यों जैसे असम, मिजोरम आदि में निवास करने वाले, यहां तक ​​कि बंदरबन, चटगांव, खगराचारी तथा बांग्लादेश के अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले त्रिपुरियों के ‘टिपरासा’ (Tiprasa) को भी शामिल करने तक विस्तृत है।

संबंधित प्रकरण:

क्षेत्रीय राजनीतिक दलों का कहना है, कि त्रिपुरा में NRC को संशोधित करने की मांग अधूरी रहने और पिछले दिनों हुआ CAA का विरोध, ‘ग्रेटर टिपरालैंड’ की मांग उठने का कारण है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘ग्रेटर टिपरालैंड’ के बारे में।
  2. NRC के बारे में।
  3. CAA क्या है?

https://epaper.thehindu.com/Home/MShareArticle?OrgId=GSU8E3HTC.1&imageview=0.

 

स्रोत: द हिंदू

 

 


सामान्य अध्ययन-IV


 

विषय: निजी और सार्वजनिक संबंधों में नीतिशास्त्र।

जेल रेडियो

(Jail Radio)

 

संदर्भ:

  • हाल ही में, ‘तिनका तिनका’ फाउंडेशन द्वारा, राज्य सरकार के सहयोग से, हरियाणा की जेलों में ‘जेल रेडियो’ परियोजना की शुरूआत की गई है।
  • जेल रेडियो, कैदियों द्वारा संचालित एक आंतरिक प्रस्तुतिकरण है। इसके तहत रेडियो कार्यक्रम परिसर के अंदर एक स्टूडियो से प्रसारित किए जाते हैं और स्पीकरों माध्यम से बैरकों में कैदियों तक पहुंचाए जाते हैं।
  • इस परियोजना का उद्देश्य कैदियों को एक सार्थक कार्य प्रदान कर उनकी रचनात्मकता को सामने लाना है।

इस पहल की आवश्यकता और महत्व:

इन कैदियों को समाज में एक दिन वापस लौटना होता है। इसलिए, इनके लिए एक आड़ देना महत्वपूर्ण है। इनमें से कई कैदियों को अतीत में हुए पर पछतावा होता है और इसके लिए ये पश्चाताप भी करते हैं। इनके लिए उपचार की आवश्यकता होती है।

 

 

https://epaper.thehindu.com/Home/MShareArticle?OrgId=GSU8E3NS2.1&imageview=0.

स्रोत: द हिंदू

 

 

विषय: निजी और सार्वजनिक संबंधों में नीतिशास्त्र।

 

हमला करने के आरोपी को नशा-मुक्ति केंद्र पर सामुदायिक सेवा करने का आदेश

 

 

संदर्भ:

हाल ही में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने पीवीआर कॉम्प्लेक्स में एक महिला के साथ सार्वजनिक रूप से मारपीट करने के आरोपी व्यक्ति को, पीड़िता द्वारा मामले को आगे बढ़ाने से मना करने के बाद, नशामुक्ति केंद्र पर एक महीने की सामुदायिक सेवा करने का आदेश दिया है।

संबंधित प्रकरण:

इस मामले में, पीड़ित व्यक्ति की अंतिम भुक्तभोगी है। याचिकाकर्ता, पीडित महिला के लिए परेशान करता रहा है और याचिकाकर्ता के खिलाफ शुरू की गई कार्यवाही में उसे और परेशान किया जा रहा है।

 

https://epaper.thehindu.com/Home/MShareArticle?OrgId=GSU8E3HTQ.1&imageview=0.

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


 

पेट्रीसिया माउंटबेटन

  • पेट्रीसिया एडविना विक्टोरिया माउंटबेटन, बर्मा की दूसरी काउंटेस माउंटबेटन थीं और ब्रिटेन के शाही घराने से संबंधित थी। वे महारानी विक्टोरिया की पड़पोती तथा ब्रिटेन की क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय के 99 वर्षीय पति प्रिंस फिलिप की सगी चचेरी बहिन थी।
  • वह, भारत के अंतिम वायसराय लॉर्ड लुईस माउंटबेटन की सबसे बड़ी बेटी थीं।

 

चर्चा का कारण:

पैट्रिशिया माउंटबेटेन के निजी संग्रह की 350 से अधिक वस्तुएं लंदन में नीलाम होने जा रही हैं। इन वस्तुओं में, भारत से विरासत में प्राप्त जयपुर के हीरे जड़े कंगन तथा रत्नजड़ित सजावटी हाथियों का एक जोड़ा भी शामिल है। लंदन में सोथबी द्वारा की जा रही इन वस्तुओं की नीलामी से .6 मिलियन पाउंड से अधिक राशि हासिल हुई है।

 

 

गीगा मेष

(Giga Mesh)

  • यह ग्रामीण क्षेत्रों में कम लागत वाले इंटरनेट के लिए एक उत्पाद है।
  • इसे महिलाओं के नेतृत्व वाले स्टार्टअप ‘एस्ट्रोम’ (Astrome) द्वारा विकसित किया गया है।
  • गीगा मेष नामक यह वायरलेस उत्पाद दूरसंचार ऑपरेटरों को 5 गुना कम लागत पर गुणवत्ता, उच्च गति वाले ग्रामीण दूरसंचार बुनियादी ढांचे को तैनात करने में सक्षम बना सकता है।

 


Join our Official Telegram Channel HERE for Motivation and Fast Updates

Subscribe to our YouTube Channel HERE to watch Motivational and New analysis videos