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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 27 March 2021

 

विषयसूची

 सामान्य अध्ययन-I

1. लाचित बोड़फुकन

 

सामान्य अध्ययन-II

1. चुनावी बॉन्ड योजना और इसे उच्चतम न्यायालय में चुनौती का कारण

2. बिहार पुलिस विधेयक

3. अनुप्रतीकात्मक पर्यटक स्थल योजना का विकास

 

सामान्य अध्ययन-III

1. नासा तथा इसरो का संयुक्त पृथ्वी-निगरानी मिशन ‘निसार’

2. आरओसी फाइलिंग करते समय क्रिप्टोकरेंसी होल्डिंग्स का खुलासा करना अनिवार्य

3. बाघ पुनर्वास परियोजना

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. ‘शिगमो’ त्योहार

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

लाचित बोड़फुकन


(Lachit Borphukan)

संदर्भ:

असम में चुनावों के दौरान, सराईघाट की लड़ाई (1671) में मुगलों को हराने वाले अहोम सेनापति लाचित बोड़फुकन (Lachit Borphukan) का अक्सर जिक्र किया जा रहा है।

‘लाचित बोड़फुकन’ कौन थे?

  • वह अहोम साम्राज्य में एक सेनापति थे।
  • इन्हें सन् 1671 में हुए सराईघाट के प्रसिद्ध युद्ध के लिए जाना जाता है, जिसमे उन्होंने रामसिंह प्रथम के नेतृत्व में मुगल सेना द्वारा अहोम साम्राज्य पर कब्जा करने के प्रयास को विफल कर दिया।
  • सराईघाट का युद्ध गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र के तट पर लड़ा गया था।
  • राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) द्वारा वर्ष 1999 से प्रतिवर्ष सर्वश्रेष्ठ कैडेट को लाचित बोड़फुकन स्वर्ण पदक प्रदान किया जाता है।

पृष्ठभूमि:

सन् 1671 में सराईघाट की लड़ाई के अंतिम चरण के दौरान, जब मुगलों ने सराईघाट में नदी से होकर असमिया सेना पर हमला किया, तो कई असमिया सैनिकों की हिम्मत उखड गयी। ऐसे में आहोम साम्राज्य के सेनापति लाचित ने सभी सैनिकों का आह्वाहन किया और उन्हें अंतिम सांस तक लड़ने के लिए प्रेरित किया, जिसके परिणामस्वरूप मुगलों की जबरदस्त हार हुई।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. लाचित बोड़फुकन को किस रूप में याद किया जाता है?
  2. सराईघाट का युद्ध किसके मध्य लड़ा गया था?
  3. किस भारतीय संस्थान द्वारा लाचित बोड़फुकन स्वर्ण पदक प्रदान किया जाता है?

मेंस लिंक:

सराईघाट की लड़ाई के कारणों और परिणामों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययन- II


 

चुनावी बॉन्ड योजना और इसे उच्चतम न्यायालय में चुनौती का कारण


संदर्भ:

उच्चतम न्यायालय द्वारा पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी राज्यों में विधानसभा चुनाव से पहले शुरू होने वाली नए चुनावी बांड्स की बिक्री पर रोक लगाने की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया गया है।

यद्यपि अदालत ने कहा है, कि चुनावी बॉन्ड योजना के विरुद्ध वर्ष 2017 में दायर की गई व्यापक संवैधानिक चुनौती अभी तक लंबित है, अतः अभी चुनावी बांड्स की वर्तमान बिक्री पर रोक लगाने का कोई औचित्य नहीं है।

चुनावी बॉन्ड योजना पर लंबित चुनौती:

चुनावी बॉन्ड योजना की संवैधानिकता को चुनौती देने के अलावा, याचिकाकर्ताओं ने अदालत से सभी राजनीतिक दलों को ‘सार्वजनिक कार्यालय’ (Public Offices) घोषित करने की मांग की गयी थी, ताकि इनको ‘सूचना के अधिकार अधिनियम’ के अंतर्गत लाया जा सके और राजनीतिक दलों को अपनी आय और व्यय का खुलासा करने के लिए बाध्य किया जा सके।

‘इलेक्टोरल बॉन्ड’ क्या हैं?

  • वर्ष 2017 के केंद्रीय बजट में घोषित, ‘इलेक्टोरल बॉन्ड’ / चुनावी बांड्स, ब्याज-मुक्त विशेष भुगतान साधन (Interest-Free Bearer Instrument) होते हैं, जिनका इस्तेमाल राजनीतिक दलों को गुमनाम रूप से चंदा देने के लिए किया जाता है।
  • इन भुगतान साधनों पर क्रेता अथवा प्राप्तकर्ता के बारे में कोई जानकारी दर्ज नहीं होती है।
  • इन भुगतान साधनों के धारक (जोकि राजनीतिक दल होते हैं) को इसका स्वामी माना जाता है।
  • ये बांड्स, 1,000 रुपए, 10,000 रुपए, 1 लाख रुपए, 10 लाख रुपए और 1 करोड़ रुपए के गुणक में जारी किए जाते हैं है, और इन बॉन्डों को जारी करने और भुनाने के लिए ‘भारतीय स्टेट बैंक’ को अधिकृत किया गया है।
  • दानकर्ता इन बांड्स को खरीदकर किसी राजनीतिक दल के लिए दान कर सकते हैं, जिन्हें प्राप्तकर्ता द्वारा 15 दिनों के भीतर सत्यापित खाते के माध्यम से भुनाया जा सकता है।
  • किसी व्यक्ति अथवा कंपनी के लिए चुनावी बांड्स खरीदने के संबंध में कोई अधिकतम सीमा निर्धारित नहीं की गयी है।
  • यदि किसी राजनीतिक दल के द्वारा बांड्स जारी होने की तिथि से 15 दिनों के भीतर इन्हें भुनाया नहीं जाता है, तो भारतीय स्टेट बैंक इन बांड्स को प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा कर देती है।

चुनावी बांड्स योजना को चुनौती देने का कारण:

  • इन बांड्स की छपाई और इनकी बिक्री और भुगतान के लिए ‘भारतीय स्टेट बैंक’ को दिए जाने वाले कमीशन का भुगतान केंद्र सरकार द्वारा करदाताओं के पैसे से किया जाता है।
  • चुनावी बॉन्ड दान-दाताओं को अज्ञात रखा जाता है।
  • वित्त अधिनियम 2017 में एक संशोधन के माध्यम से, केंद्र सरकार द्वारा राजनीतिक दलों ‘चुनावी बांड्स’ के माध्यम से प्राप्त दान का खुलासा करने से छूट प्रदान की गई है।
  • पारदर्शिता की मांग करने वाले कार्यकर्ताओं के अनुसार, ये नागरिकों के ‘जानकारी के अधिकार’ (Right to Know) का उल्लंघन है तथा ये राजनीतिक वर्ग को और भी अधिक गैर-जबावदेह बनाते हैं।

निर्वाचन आयोग का विचार:

  • निर्वाचन आयोग ने, कि राजनीतिक दलों को इस तरीके से प्राप्त अनुदानों का खुलासा करने से छूट देने वाले ‘जन प्रतिनिधित्व कानून’ में संशोधन पर आपत्ति जताई थी।
  • जब चुनावी बांड के माध्यम से प्राप्त अंशदान की रिपोर्ट नहीं की जाती है, तो राजनीतिक दलों की अनुदान रिपोर्ट का अवलोकन करने पर इस बात का पता नहीं लगाया जा सकता है, कि क्या राजनीतिक दल ने ‘जन प्रतिनिधित्व कानून’ की धारा 29(b) का उल्लंघन करते हुए अनुदान या चंदा प्राप्त किया है। उपरोक्त धारा में राजनीतिक दलों को सरकारी कंपनियों और विदेशी स्रोतों से दान लेने से प्रतिबंधित किया गया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. चुनावी बांड क्या हैं?
  2. पात्रता
  3. बांड का मूल्यवर्ग
  4. विशेषताएं
  5. ये बांड कौन जारी कर सकता है?

मेंस लिंक:

पारदर्शी राजनीतिक वित्तपोषण सुनिश्चित करने में चुनावी बांड की प्रभावशीलता की आलोचनात्मक रूप से परीक्षण कीजिए तथा इसके लिए विकल्प सुझाएँ?

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: लोकतंत्र में सिविल सेवाओं की भूमिका।

बिहार पुलिस विधेयक


संदर्भ:

हाल ही में, विपक्ष द्वारा विरोध करने के दौरान ही ‘बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक’ (Bihar Special Armed Police Bill), 2021 पारित कर दिया गया।

इस विधेयक का उद्देश्य सुरक्षा में अभिवर्धन करना है, और इसका विस्तार काफी सीमित है, क्योंकि यह क़ानून केवल कुछ विशिष्ट क्षेत्रों पर ही लागू होता है।

विधेयक का उद्देश्य:

इस विधेयक का उद्देश्य, विकास संबंधी जरूरतों को पूरा करने तथा राज्य के विस्तृत हित में बिहार की सैन्य पुलिस को अच्छी तरह से प्रशिक्षित तथा बहु-क्षेत्रीय विशेषज्ञताओं से सुसज्जित ‘सशस्त्र पुलिस बल’ के रूप में विकसित करना है।

प्रमुख प्रावधान:

  1. इस विधेयक के अंतर्गत, ‘बिहार सैन्य पुलिस’ का नाम बदलकर ‘बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस’ किया गया है, तथा इसके लिए, ‘केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल’ (CISF) की तर्ज पर अधिक शक्ति प्रदान की गयी है, जिससे ‘बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस’, राज्य की वाणिज्यिक और औद्योगिक परिसंपत्तियों को बेहतर ढंग से सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम हो सकेगी।
  2. ‘बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस’ बल का कार्य, अधिसूचित प्रक्रिया के अनुसार ‘लोक-व्यवस्था बनाए रखना, चरमपंथ से निपटना, अधिसूचित प्रतिष्ठानों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करना’ होगा। इसके लिए अन्य कार्यो का निर्वहन करने हेतु भी अधिसूचना जारी की जा सकती है।
  3. विधेयक में, ‘विशेष सशस्त्र पुलिस अधिकारियों’ को बिना वारंट के तलाशी और गिरफ्तारी करने का अधिकार प्रदान किया गया है।
  4. इन अधिकारियों द्वारा किए गए कुछ अपराधों पर अदालत केवल सरकार की मंजूरी के बाद ही संज्ञान ले सकता है।

आवश्यकता:

पिछले एक दशक के दौरान, केंद्रीय बलों पर राज्य की निर्भरता में वृद्धि हुई है। राज्य के पास स्वंय का एक संगठित सशस्त्र पुलिस बल होने से सरकारी व्यय में बचत होगी तथा स्थानीय लोगों के लिए अधिक नौकरियों का सृजन होगा।

संबंधित मुद्दे और चिंताएँ:

  • यह विधेयक कुछ मामलों में पुलिस कर्मियों के लिए ‘निरंकुश शक्‍ति’ प्रदान करता है।
  • अधिनियम की धारा 15 में कहा गया है, कि कुछ अपवादों को छोड़कर यदि कोई विशेष सशस्त्र पुलिस अधिकारी किसी गंभीर मामले में संलिप्त होता है, तो अदालत, सरकार की अनुमति के बगैर उस पर संज्ञान नहीं ले सकती।
  • सरकार का कहना है कि यह विधेयक केवल कुछ क्षेत्रों पर लागू होगा, लेकिन इन क्षेत्रों को निर्दिष्ट नहीं किया गया है और न ही यह स्पष्ट किया गया है, कि किस आधार पर इन क्षेत्रों को अधिसूचित किया जाएगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. विधेयक की प्रमुख विशेषताएं।
  2. 7 वीं अनुसूची में ‘पुलिस’ विषय किसके अधीन है?

मेंस लिंक:

‘बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक’ से संबंधित मुद्दों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

अनुप्रतीकात्मक पर्यटक स्थल योजना का विकास


(Development of Iconic Tourist Destinations Scheme)

संदर्भ:

मध्य प्रदेश पर्यटन तथा ‘इंडिया कन्वेंशन प्रमोशन ब्यूरो’ (ICPB) के सहयोग से पर्यटन मंत्रालय द्वारा खजुराहो, मध्य प्रदेश में ‘माइस रोड शो- मीट इन इंडिया’ का आयोजन किया जा रहा है। ‘माइस’ का तात्पर्य: MICE अर्थात Meetings (सभाएं), Incentives (प्रोत्साहन), Conferences (सम्मेलन) and Exhibition (प्रदर्शनी) है।

योजना के बारे में:

  • यह, देश में समग्र दृष्‍टिकोण अपनाते हुए चिन्हित किए गए ‘अनुप्रतीकात्मक पर्यटन स्थलों के विकास हेतु एक ‘केंद्रीय क्षेत्रक’ योजना है।
  • इस योजना का उद्देश्य भारत में पर्यटन की आमद को बढ़ावा देना और अन्य पर्यटन स्थलों के लिए एक मॉडल के रूप में कार्य करना है।
  • इस योजना के लिए नोडल एजेंसी ‘पर्यटन मंत्रालय’ है, और इसमें नागरिक उड्डयन, रेलवे आदि मंत्रालय भी शामिल हैं।

खजुराहो के मंदिरों के बारे में:

  • खजुराहो मंदिर देश के सबसे खूबसूरत मध्यकालीन स्मारकों में शामिल हैं। इन मंदिरों का निर्माण 900 से 1130 ईस्वी के मध्य चंदेल शासकों द्वारा कराया गया था।
  • ये मंदिर, अपनी कामोद्दीपक मूर्तियों के लिए विश्व-विख्यात हैं। खजुराहो मंदिरों का पहली बार लिखित रूप से उल्लेख, ईस्वी सन् 1022 में अबू रिहान अल बिरूनी तथा 1335 ईस्वी में अरब यात्री इब्न बतूता के विवरणों में मिलता है।
  • खजुराहो के मंदिरों का निर्माण एक साथ ही किये गया था, लेकिन ये मंदिर, हिंदू तथा जैन, दो धर्मो के लिए समर्पित थे, जोकि इस क्षेत्र के हिंदुओं और जैनियों के मध्य विभिन्न धार्मिक विचारों की स्वीकृति और सम्मान की परंपरा का संकेत देते हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. खजुराहो नृत्योत्सव, मंदिर।
  2. चंदेल शासक
  3. अल बिरूनी

मेंस लिंक:

‘अनुप्रतीकात्मक पर्यटक स्थल योजना’ के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

नासा तथा इसरो का संयुक्त पृथ्वी-निगरानी मिशन ‘निसार’


(What is NISAR, the joint Earth-Observing mission of NASA and ISRO?)

संदर्भ:

नासा और इसरो द्वारा ‘नासा-इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार उपग्रह’ (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar satellite)  अर्थात ‘निसार’ (NISAR) नामक उपग्रह को संयुक्त रूप से विकसित करने हेतु कार्य किया जा रहा है।

NISAR के बारे में:

  • इस उपग्रह को वर्ष 2022 में भारत के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से एक ध्रुवीय कक्षा के निकट प्रक्षेपित किया जाएगा।
  • यह उपग्रह अपने तीन-वर्षीय मिशन के दौरान प्रत्येक 12 दिनों में पूरे ग्लोब की बारीकी से जांच (scan) करेगा। यह उपग्रह अपने मिशन के दौरान पृथ्वी पर भूमि, बर्फ की चादर और समुद्री बर्फ की चित्रण कर ग्रह की एक ‘अभूतपूर्व’ दृश्य प्रदान करेगा।
  • यह सॅटॅलाइट, टेनिस कोर्ट के आधे आकार के किसी भी क्षेत्र में ग्रह की सतह से 4 इंच की ऊंचाई पर किसी भी गतिविधि का पता लगाने में सक्षम होगा।
  • नासा द्वारा इस उपग्रह के लिए रडार, विज्ञान आंकड़ो हेतु हाई-रेट कम्युनिकेशन सब-सिस्टम, जीपीएस रिसीवर और एक पेलोड डेटा सबसिस्टम प्रदान किये जाएंगे।
  • इसरों (ISRO) द्वारा स्पेसक्राफ्ट बस, दूसरे प्रकार के राडार (S- बैंड रडार), प्रक्षेपण यान और प्रक्षेपण संबंधी सेवाएं प्रदान की जाएंगी।
  • निसार (NISAR) उपग्रह में नासा द्वारा अब तक लॉन्च किया गया सबसे बड़ा रिफ्लेक्टर एंटीना लगाया जाएगा, और इसका मुख्य उद्देश्य, पृथ्वी की सतह पर होने वाले सूक्ष्म परिवर्तनों पर नज़र रखना, ज्वालामुखी विस्फोट होने बारे में चेतावनी संकेत भेजना, भूजल आपूर्ति निगरानी में मदद करना और बर्फ की चादरों को पिघलने वाली दर का पता लगाना है।

‘सिंथेटिक एपर्चर रडार’:

  • निसार (NISAR), ‘नासा-इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार [NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar satellite (SAR)] का संक्षिप्त रूप है। नासा द्वारा ‘सिंथेटिक एपर्चर रडार’ का उपयोग पृथ्वी की सतह में होने वाले परिवर्तन को मापने हेतु किया जाएगा।
  • सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR), मुख्यतः उच्च विभेदन छवियां (High-Resolution Images) खीचने की तकनीक को संदर्भित करता है। उच्च सटीकता के कारण, यह रडार, बादलों और अंधेरे को भी भेद सकता है, अर्थात यह किसी भी मौसम में चौबीसो घंटे आंकड़े एकत्र करने में सक्षम है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) के बारे में
  2. निसार (NISAR) के बारे में
  3. उद्देश्य

मेंस लिंक:

निसार उपग्रह पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

आरओसी फाइलिंग करते समय क्रिप्टोकरेंसी होल्डिंग्स का खुलासा करना अनिवार्य


संदर्भ:

हाल ही में, कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय द्वारा की गई एक घोषणा के अनुसार, कंपनियों के लिए ‘कंपनी रजिस्ट्रार’ (Registrar of Companies RoC) के समक्ष अपने वित्तीय विवरण दाखिल करते समय क्रिप्टोकरेंसी अथवा आभासी मुद्राओं से संबंधित संपत्तियों या व्यवसायों का खुलासा करना अनिवार्य होगा।

यह समावेशन क्या दर्शाता है?

यह भारत में क्रिप्टो संपत्तियों को विनियमित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है और इससे क्रिप्टोकरेंसी में होने वाले निवेशों की रिपोर्टिंग / फाइलिंग में काफी पारदर्शिता आएगी। अब तक, सरकार द्वारा क्रिप्टोकरेंसियों पर प्रतिबंध लगाने की योजना बनाई जा रही थी।

‘क्रिप्टोकरेंसी’ क्या होती हैं?

क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrencies) एक प्रक्रार की डिजिटल करेंसी होती है, जो क्रिप्टोग्राफी के नियमों के आधार पर संचालित और बनाई जाती है। क्रिप्टोग्राफी का अर्थ को कोडिंग की भाषा को सुलझाने की कला है। यह एक इलेक्ट्रॉनिक कैश सिस्टम होता है, जिसमे ‘किसी वित्तीय संस्था के बगैर एक पार्टी द्वारा दूसरी पार्टी को ऑनलाइन भुगतान किया जाता है ।

उदाहरण: बिटकॉइन, एथेरियम (Ethereum)आदि।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. विभिन्न क्रिप्टोकरेंसी
  2. विभिन्न देशों द्वारा शुरू की गई क्रिप्टोकरेंसी
  3. ब्लॉकचेन तकनीक क्या है?

मेंस लिंक:

‘क्रिप्टोकरेंसी’ क्या होती हैं? इनके विनियमन की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

बाघ पुनर्वास परियोजना


संदर्भ:

भारत में पहली अंतर-राज्यीय ‘बाघ पुनर्वास परियोजना’ (Tiger Relocation Project) परियोजना की शुरुआत वर्ष 2018 में हुई थी, जिसके तहत ‘कान्हा टाइगर रिज़र्व’ मध्य प्रदेश के एक नर (महावीर) बाघ तथा ‘बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व’ मध्य प्रदेश की एक मादा (सुंदरी) बाघिन को ओडिशा के ‘सतकोसिया बाघ अभयारण्य’ में, राज्य में बाघों की आबादी बढ़ाने के उद्देश्य से, स्थानांतरित किया गया था।

आवश्यकता:

इस पुनर्वासन का उद्देश्य दो उद्देश्यों की पूर्ति करना था:

  1. बाघों की अधिक आबादी वाले क्षेत्रों में, क्षेत्रीय विवादों को कम करने के लिए, बाघों की आबादी कम करना।
  2. विभिन्न कारणों से बाघों की आबादी काफी कम हो जाने वाले क्षेत्रों में बाघों की संख्या में वृद्धि करना।

चर्चा का कारण:

हाल ही में, सुंदरी बाघिन को मध्यप्रदेश वापस भेज दिया गया है। अभयारण्य के किनारों पर रहने वाले ग्रामीणों द्वारा भारी विरोध के कारण यह निर्णय लिया गया।

‘सतकोसिया बाघ अभयारण्य’ के बारे में:

  • ओडिशा में अवस्थित है।
  • सतकोसिया, बाघों की आबादी बढ़ने की संभावना वाले अभ्यारण्यों के अंतर्गत आता है।
  • इसे वर्ष 2007 में टाइगर रिजर्व के रूप में घोषित किया गया था, उस समय इसमें बाघों की संख्या 12 थी, जोकि वर्ष 2018 में घटकर दो रह गई।
  • इस पुनर्वासन का उद्देश्य आरक्षित क्षेत्रों में बाघों की आबादी में वृद्धि करना था।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य और जीवमंडल भंडार के मध्य अंतर।
  2. M-STrIPES किससे संबंधित है?
  3. GTIC क्या है?
  4. प्रोजेक्ट टाइगर कब लॉन्च किया गया था?
  5. NTCA -संरचना और कार्य।
  6. हाल ही में ‘ऑल इंडिया टाइगर एस्टीमेशन’ 2018 का चौथा चक्र गिनीज रिकॉर्ड बुक में क्यों दर्ज हुआ?
  7. सबसे ज्यादा बाघों की आबादी वाला राज्य।
  8. उच्चतम बाघ घनत्व वाला राज्य।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


‘शिगमो’ त्योहार

  • शिगमोत्सव अथवा शिगमो (Shigmotsav or Shigmo), गोवा के आदिवासी समुदायों द्वारा ‘धान की समृद्ध और सुनहरी फसल’ के लिये मनाए जाने वाला उत्सव है।
  • यह गोवा की संस्कृति और परंपराओं में अंतर्निहित रंगों, गीत और नृत्य से भरा एक जीवंत उत्सव है।
  • कुनबी, गावड़ा और वेलिप सहित विभिन्न कृषि समुदाय इस त्योहार को मनाते हैं, यह वसंत की शुरुआत का प्रतीक भी होता है।
  • इस उत्सव में भाग लेने वाले समुदायों द्वारा घोड़े मोदिनी (Ghode Modni- घुड़सवार योद्धाओं का नृत्य), गोप और फुगड़ी जैसे लोक नृत्य किये जाते हैं।


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