Print Friendly, PDF & Email

INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 23 March 2021

 

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-I

1. महिलाओं के प्रति रूढ़िबद्धता के खिलाफ शीर्ष अदालत में सुधार हेतु विचार

 

सामान्य अध्ययन-II

1. वोटर वेरिफायबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT)

2. उपासना स्थल अधिनियम

3. यमन के हूती विद्रोहियों के समक्ष रियाद की युद्धविराम योजना

 

सामान्य अध्ययन-III

1. यूनिवर्सल बैंकों एवं लघु वित्त बैंकों के लिए आवेदनों का मूल्यांकन करने करने हेतु समिति

2. निर्यात उत्पादों पर शुल्क और करों में छूट (RoDTEP) योजना

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. दिल्ली में शराब पीने की उम्र 21 वर्ष की गई

2. सरकारी अनुबंधों में काम करने वालों के लिए कौशल प्रमाणपत्र आवश्यक

3. भारतीय वैज्ञानिक के नाम पर अंतरिक्ष स्टेशन पर पाए गए जीवाणु का नामकरण

4. गांधी शांति पुरस्कार

5. वर्ल्ड समिट ऑन इनफॉरमेशन सोसायटी फोरम (WSIS) 2021

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन, जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और उनके रक्षोपाय।

महिलाओं के प्रति रूढ़िबद्धता के खिलाफ शीर्ष अदालत में सुधार हेतु विचार


संदर्भ:

उच्चतम न्यायालय द्वारा अपने एक हालिया फैसले में:

  • न्यायाधीशों के लिए लैंगिक रूढि़वादी टिप्पणी करने से मना किया गया हैं।
  • अदालतों के लिए किसी यौन अपराधी और पीड़ित के बीच समझौता कराने अथवा विवाह कराने हेतु प्रयासों पर रोक लगा दी गयी है।

उच्चतम न्यायालय का यह फैसला मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा जारी एक आदेश के खिलाफ एक अपील पर आधारित था। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने छेड़छाड़ के आरोपी व्यक्ति को पीड़ित महिला से राखी बंधवाने का निर्देश दिया था।

आवश्यकता:

उच्चतम न्यायालय का यह फैसला, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) द्वारा 1 मार्च को वर्चुअल सुनवाई के दौरान की गई एक टिप्पणी पर चारो तरफ से होने वाली आलोचनाओं के पश्चात आया है। मुख्य न्यायाधीश ने बलात्कार के आरोपी के वकील से यह पूछा था, कि क्या उसका मुवक्किल पीड़ित महिला से विवाह करेगा?

इन उपायों की आवश्यकता:

  • शीर्ष अदालत द्वारा की जाने वाली इस प्रकार लैंगिक रूढ़िवादी टिप्पणियां, यौन अपराधों की गंभीरता को कम करती है, तथा पीड़ित को महत्वहीन बनाती हैं।
  • यहां तक ​​कि अदालत में इस तरह के आदेश या अभिव्यक्ति का अकेला उदाहरण, देश की पूरी न्यायिक व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है, और सभी को, विशेष रूप से यौन हिंसा (गंभीर अपराधों से लेकर तथाकथित छोटे अपराध तक) के शिकार व्यक्ति को निष्पक्ष न्याय की गारंटी देने संबंधी दावे को खोखला कर देता है ।

लैंगिक रूढ़िवादिता पर प्रहार करने वाले उल्लेखनीय निर्णय:

  • कामकाजी स्थानों पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न पर विशाखा दिशानिर्देशों का निर्धारण।
  • सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों के लिए स्थाई कमीशन हासिल करने हेतु समान अवसर देते हुए जस्टिस डी.वाई.चंद्रचूड़ का ऐतिहासिक फैसला। इसमें जस्टिस चंद्रचूड़ ने, संस्था द्वारा किये गए दावे, ‘महिलाएं पुरुषों की तुलना में शारीरिक रूप से कमजोर होती है’ की आलोचना भी की।
  • अनुज गर्ग मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने ‘रूमानी पितृव्यवहार की धारणा’ को फटकार लगाई थी, जिसमे व्यावहारिक रूप से, महिलाओं को किसी पद-प्रतिष्ठा पर नहीं, बल्कि एक पिंजरे में रखा जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. विशाखा दिशानिर्देश
  2. अनुज गर्ग केस किससे संबंधित है?
  3. महिलाओं के लिए स्थायी कमीशन के बारे में

मेंस लिंक:

शीर्ष अदालत द्वारा की जाने वाली लैंगिक रूढ़िवादी टिप्पणियां, यौन अपराधों की गंभीरता को कम करती है। टिप्पणी कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की मुख्य विशेषताएँ।

वोटर वेरिफायबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT)


संदर्भ:

निर्वाचन आयोग द्वारा चार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों में सभी मतदान केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) के साथ वोटर वेरिफायबल पेपर ऑडिट ट्रेल (Voter Verifiable Paper Audit Trail- VVPAT) का उपयोग करने का निर्णय लिया गया है।

VVPAT क्या है?

मतदाता सत्यापन पर्ची ऑडिट ट्रेल (VVPAT), इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) का उपयोग करने वाले मतदाताओं को प्रतिपुष्टि प्रदान करने का एक तरीका है।

  • VVPAT से अभिप्राय, एक स्वतंत्र सत्यापन प्रणाली से है, जिसे मतदाताओं के लिए यह सत्यापित करने हेतु डिज़ाइन किया गया है कि उनका वोट सही ढंग से डाला गया है। इसके अलावा यह संग्रहीत इलेक्ट्रॉनिक परिणामों का लेखा सत्यापन करने हेतु के लिए एक माध्यम भी प्रदान करती है।
  • इसमें, जिसके पक्ष में मतदान किया गया था, उस उम्मीदवार का नाम तथा दल अथवा उम्मीदवार का चुनाव चिह्न दर्ज होता है।

vvpat

VVPATs का महत्व और आवश्यकता:

  • VVPAT, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में खराबी अथवा संभावित चुनाव धोखाधड़ी का पता लगाने में मदद करती है।
  • यह संग्रहीत इलेक्ट्रॉनिक परिणामों का लेखा सत्यापन करने हेतु के लिए एक माध्यम प्रदान करती है। यह वोटों को बदलने या नष्ट करने के लिए एक बाधक के रूप में भी कार्य करती है।
  • VVPAT प्रणाली से युक्त EVM पूरी पारदर्शिता के साथ मतदान प्रणाली की परिशुद्धता सुनिश्चित करती हैं और मतदाताओं के विश्वास को बहाल करती हैं।
  • ईवीएम और वीवीपैट से चुनाव प्रक्रिया में तेजी आती हैं क्योंकि ईवीएम पर वोटों की गणना में, मतपत्रों की गणना की तुलना में, बहुत कम समय लगता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. VVPAT के बारे में
  2. विशेषताएं
  3. EVM क्या हैं?
  4. मतदान के अधिकार के बारे में

मेंस लिंक:

चुनावों में वोटर वेरिफायबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

उपासना स्थल अधिनियम


(Places of Worship Act)

संदर्भ:

लखनऊ की 350 साल पुराणी ‘टीलेवाली मस्जिद’ के एक सह-मुतवल्ली, वासिफ हसन ने सुप्रीम कोर्ट से ‘उपासना स्थल अधिनियम’ के प्रावधानों को चुनौती देने वाली अदालत में लंबित याचिका संबंधी मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।

आवेदनकर्ता ने याचिका का विरोध करते हुए कहा है, कि उपरोक्त याचिका नुकसान पहुंचाने वाली है, और इसका उद्देश्य मुस्लिम समुदाय को, भारत में अन्य धार्मिक समुदायों से अलग एक पृथक श्रेणी के रूप में विलग करना है।

संबंधित प्रकरण:

हाल ही में, अदालत में एक विशेष कानून- उपासना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991- को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर की गई है। इस अधिनियम में धार्मिक स्थलों को 15 अगस्त 1947 की स्थिति में स्थिर रखने का प्रावधान किया गया है।

याचिकाकर्ता ने इस कानून को ‘मनमाना, तर्कहीन और पूर्वव्यापी’ बताया है।

अधिनियम का उद्देश्य:

  • इस अधिनियम का उद्देश्य, किसी उपासना स्थल के धार्मिक स्वरूप को, उसकी 15 अगस्त 1947 को विद्यमान स्थिति में स्थिर रखना है।
  • अधिनियम में, उपासना स्थल के उक्त तिथि को विद्यमान धार्मिक स्वरूप के रखरखाव का भी प्रावधान किया गया है।
  • इसका उद्देश्य किसी भी समूह द्वारा उपासना स्थल की पूर्व स्थिति के बारे में, तथा उस संरचना अथवा भूमि पर नए दावे करने से रोकने हेतु पहले से उपाय करना था।
  • इस क़ानून से दीर्घकालीन सांप्रदायिक सद्भाव के संरक्षण में मदद करने की अपेक्षा की गयी थी।

प्रमुख बिंदु:

  • अधिनियम में यह घोषणा की गयी है, कि किसी भी उपासना स्थल का धार्मिक स्वरूप वैसा ही रहेगा जैसा 15 अगस्त 1947 को था।
  • इसमें कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी धार्मिक संप्रदाय के उपासना स्थल को अलग संप्रदाय या वर्ग में नहीं बदलेगा।
  • इस क़ानून के अनुसार, 15 अगस्त 1947 को विद्यमान किसी उपासना स्थल के धार्मिक स्वरूप के संपरिवर्तन के संदर्भ में किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकारी के समक्ष लंबित कोई वाद, अपील या अन्य कार्यवाही इस अधिनियम के प्रारंभ पर उपशमित हो जाएगी और इसं पर आगे कानूनी कार्यवाही नहीं की जा सकती है।

अपवाद:

ये प्रावधान निम्नलिखित संदर्भों में लागू नहीं होंगे:

  1. उक्त उपधाराओं में निर्दिष्ट कोई उपासना स्थल, जो प्राचीन संस्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 के अन्तर्गत आने वाला कोई प्राचीन और ऐतिहासिक संस्मारक या कोई पुरातत्वीय स्थल या अवशेष है।
  2. इस अधिनियम के प्रारंभ के पूर्व किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकारी द्वारा, उपरोक्त मामलों से संबंधित कोई वाद, अपील या अन्य कार्यवाही, जिसका अंतिम रूप से विनिश्चय, परिनिर्धारण या निपटारा कर दिया गया है।
  3. इस अधिनियम की कोई बात उत्तर प्रदेश राज्य के अयोध्या में स्थित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद के रूप में सामन्यतः ज्ञात स्थान या उपासना स्थल से संबंधित किसी वाद, अपील या अन्य कार्यवाही पर लागू नहीं होगी। इस अधिनियम के उपबंध, किसी अन्य लागू क़ानून के ऊपर प्रभावी होंगे।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. उपासना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम की प्रमुख विशेषताएं।

मेंस लिंक:

उपासना स्थल अधिनियम कानून से संबंधित मुद्दों पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

यमन के हूती विद्रोहियों के समक्ष रियाद की युद्धविराम योजना


संदर्भ:

सऊदी अरब द्वारा यमन में जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए एक नई शांति पहल प्रस्तुत की गई है।

शांति पहल के प्रमुख बिंदु:

  • संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में देशव्यापी युद्धविराम तथा हवाई और समुद्री मार्गों को फिर से खोला जाना।
  • साना हवाई अड्डे को फिर से खोलना तथा होदेदाह (Hodeidah) बंदरगाह के माध्यम से ईंधन और खाद्य सामग्री के आयात की अनुमति देना। वर्तमान में इन दोनों स्थानों पर रियाद के शत्रुओं अर्थात ईरान समर्थित हूती (Houthi) विद्रोहियों का नियंत्रण है।
  • सऊदी समर्थित सरकार और हूती विद्रोहियों के बीच राजनीतिक वार्ता को फिर से शुरू करना।

यमन में युद्ध: पृष्ठभूमि

  • यमन में जारी संघर्ष की जड़ें वर्ष 2011 में हुए अरब स्प्रिंग या अरब विद्रोह में खोजी जा सकती हैं। इस दौरान हुए एक विद्रोह ने काफी लंबे समय से देश में शासन कर रहे सत्तावादी राष्ट्रपति, अली अब्दुल्ला सालेह को अपने डिप्टी अब्दरब्बू मंसूर हादी को सत्ता सौंपने के लिए विवश कर दिया था।
  • मध्य पूर्व के सबसे गरीब देशों में से एक यमन में स्थिरता लाने के उद्देश्य से यह राजनीतिक परिवर्तन किया गया था, लेकिन राष्ट्रपति हादी को आतंकवादी हमलों, भ्रष्टाचार, खाद्य असुरक्षा, और कई सैन्य अधिकारियों की पूर्व राष्ट्रपति सालेह के प्रति वफादारी सहित विभिन्न समस्याओं से निपटने के लिए संघर्ष करना पड़ा।
  • यमन में वर्तमान संघर्ष की शुरुआत वर्ष 2014 में, हूती शिया मुस्लिम विद्रोह आंदोलन द्वारा नए राष्ट्रपति की कमजोरी का फायदा उठाते हुए उत्तरी साद प्रांत (Saada province) और इसके पड़ोसी क्षेत्रों का नियंत्रण जब्त करने के साथ हुई।
  • हूती (Houthi), ज़ैदी शिया मुसलमानों का एक समूह है जिसने लगभग 1,000 वर्षों तक इस क्षेत्र के एक राज्य पर शासन किया था।

यमन में सऊदी अरब के हस्तक्षेप का कारण:

सऊदी अरब ने, यमन के राजधानी शहर ‘साना’ पर शिया हूती विद्रोहियों द्वारा कब्जा करने तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त राष्ट्रपति हादी की सरकार देश के दक्षिणी भाग में सीमित हो जाने के पश्चात यमन में हस्तक्षेप किया है।

यमन में ‘मानवीय स्थिति’ कितनी खराब है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, वर्ष 2015 में सऊदी हस्तक्षेप के बाद से यमन में कम से कम 10,000 लोग मारे गए हैं। गठबंधन सेनाओं के हवाई हमलों से देश के बुनियादी ढांचे को व्यापक नुक्सान पहुंचा है, और जगह-जगह पर नाकाबंदी से भोजन और दवाओं की आपूर्ति में कमी आयी है, जिससे यमन में मानव-आबादी तबाही की गर्त में पहुँच रही है। यदि जल्दी ही इन तक कोई सहायता नहीं पंहुची तो लगभग 12 मिलियन लोग भुखमरी की कगार पर पहुँच जाएंगे। देश को व्यापक स्तर पर हैजे का प्रकोप भी झेलना पड़ा है। यूनिसेफ के अनुसार, यमन में हर 10 मिनट में एक बच्चे की मौत हो जाती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. हूती (Houthi) कौन हैं?
  2. वर्तमान संकट क्या है?
  3. यमन की अवस्थिति।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय।

यूनिवर्सल बैंकों एवं लघु वित्त बैंकों के लिए आवेदनों का मूल्यांकन करने करने हेतु समिति


संदर्भ:

हाल ही में, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा यूनिवर्सल बैंकों और लघु वित्त बैंकों के लिए किए गए आवेदनों का मूल्यांकन करने हेतु श्यामला गोपीनाथ की अध्यक्षता में एक स्थायी बाह्य सलाहकार समिति के गठन की घोषणा की गई है।

इस समिति का गठन, केंद्रीय बैंक द्वारा निरंतरता के आधार पर बैंकिंग परमिट दिए जाने संबंधी एक पूर्व-घोषित योजना का एक भाग है, इस प्रक्रिया को आमतौर पर ‘ऑन टैप’ (On-Tap) लाइसेंसिंग के रूप में जाना जाता है।

ऑन टैप’ लाइसेंसिंग क्या होती है?

‘ऑन टैप’ लाइसेंसिंग (On-Tap licensing) का अर्थ होता है, कि बैंकिंग लाइसेंस प्रदान करने हेतु आरबीआई की खिड़की पूरे बर्ष भर खुली रहेगी।

‘यूनिवर्सल बैंकिंग’ क्या होती है?

यूनिवर्सल बैंकिंग, वह बैंकिंग प्रणाली है, जिसमे विविध प्रकार की वित्तीय सेवाएँ, जैसे कि निवेश बैंकिंग, वाणिज्यिक बैंकिंग, विकास बैंकिंग, बीमा और मर्चेंट बैंकिंग, म्यूचुअल फंड, फैक्टरिंग, हाउसिंग फाइनेंस जैसी अन्य वित्तीय सेवाएं प्रदान की जाती हैं।

आरबीआई के यूनिवर्सल बैंक लाइसेंसिंग दिशानिर्देश:

  1. बैंकिंग और वित्त क्षेत्र में वरिष्ठ स्तर पर कार्य करने संबंधी 10 वर्ष का अनुभव रखने वाले भारत के निवासी / पेशेवर व्यक्ति होना चाहिए।
  2. बैंक की प्रारंभिक न्यूनतम पेड-अप वोटिंग इक्विटी पूंजी ‘पाँच बिलियन’ होनी चाहिए। इसके पश्चात, बैंक के पास हर समय न्यूनतम ‘पाँच बिलियन’ शुद्ध निवल पूंजी होनी चाहिए।
  3. वैयक्तिक प्रवर्तकों या एकल रूप से बढ़ावा देने वाले / परिवर्तित प्रवर्तक अथवा इकाईयां, जो किसी अन्य समूह का भाग नहीं है, उनके लिए नॉन-ऑपरेटिव फाइनेंशियल होल्डिंग कंपनी (NOFHC) की शर्त पूरी करना आवश्यक नहीं है।
  4. NOFHC की कुल चुकता इक्विटी पूंजी का न्यूनतम 51 प्रतिशत, प्रवर्तक/ प्रवर्तक समूह के स्वामित्व में रहेगा। प्रवर्तक/ प्रवर्तक समूह के अलावा किसी भी शेयरधारक का NOFHC में महत्वपूर्ण प्रभाव और नियंत्रण नहीं होना चाहिए।
  5. बैंक द्वारा व्यापार के प्रारंभ से छह वर्षों के भीतर बैंक अपने शेयरों को शेयर बाजारों में सूचीबद्ध कराया जाएगा।
  6. बैंक के लिए अपने प्रवर्तकों, 10 प्रतिशत से अधिक शेयरधारिता अथवा बैंक में पेड-अप इक्विटी रखने वाले प्रमुख शेयरधारकों अथवा उन संस्थाओं, जिनमें बैंक के प्रवर्तकों के रिश्तेदारों का महत्वपूर्ण प्रभाव या नियंत्रण है, के साथ किसी प्रकार का संपर्क रखना प्रतिबंधित होगा।
  7. बैंक अपनी कुल शाखाओं के कम से कम 25 प्रतिशत शाखाएं बैंक-रहित ग्रामीण केंद्रों में खोलेगा।
  8. बैंक प्राथमिक क्षेत्र के ऋण लक्ष्यों और मौजूदा घरेलू अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के लिए लागू उप-लक्ष्यों का अनुपालन करेगा।
  9. बैंक के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशकों की संख्‍या अधिक होनी चाहिए।
  10. रिजर्व बैंक द्वारा प्रदान की सैद्धांतिक मंजूरी, जारी होने की तारीख से 18 महीने तक वैध रहेगी और उसके बाद उसकी वैधता अपने आप समाप्‍त हो जाएगी।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. NBFCs – अर्थ।
  2. प्रकार
  3. RBI के तहत NBFCs
  4. NBFC-MFI- पात्रता, कार्य।
  5. निवल स्वामित्व राशि (NOF) क्या है?
  6. अर्हक संपत्ति क्या होती हैं?
  7. लघु वित्त बैंक (SFB) क्या हैं?
  8. NBFCs, SFBs और भुगतान बैंकों के मध्य अंतर

मेंस लिंक:

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी – सूक्ष्म वित्त संस्थान (NBFC-MFIs) के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव।

निर्यात उत्पादों पर शुल्क और करों में छूट (RoDTEP) योजना


(Remission of Duties and Taxes on Export Products (RoDTEP) scheme)

संदर्भ:

‘निर्यात उत्पादों पर शुल्क और करों में छूट’ (Remission of Duties and Taxes on Export Products– RoDTEP) योजना के तहत निर्यातकों को देय लाभ दरों संबंधी अधिसूचना जारी होने में, योजना के शुरू होने में आ रही ‘शुरुआती दिक्कतों’ की वजह से अभी और समय लग सकता है।

संबंधित प्रकरण:

  • निर्यातकों को आशंका है, देर से अधिसूचित होने पर लाभ दरें, तकनीकी समिति द्वारा अनुशंसित दरों से कम हो सकती हैं।
  • करों में अपर्याप्त छूट देने से निर्यात उत्पादों में अवशिष्ट सन्निहित कर भी जुड़ जाएंगे और इससे भारतीय उद्योगों को विश्व बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा।
  • भारतीय निर्यातक पहले से ही महामारी के बाद अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसे कई प्रमुख बाजारों की मांग में अस्थिरता से जूझ रहे हैं।

RoDTEP योजना के बारे में:

इस योजना की घोषणा वर्ष 2020 में ‘मर्चेंडाइज़ एक्सपोर्ट्स फ्रॉम इंडिया स्कीम’ (Merchandise Exports from India Scheme-MEIS) की प्रतिस्थापना करने हेतु की गई थी, जो कि विश्व व्यापार संगठन के नियमों के अनुरूप नहीं थी।

इस योजना के तहत, निर्यातकों के लिए ‘निर्यात उत्पादों’ पर लगने वाले ‘संलग्न केंद्रीय, राज्य और स्थानीय शुल्कों या करों’ को वापस किए जाने का प्रावधान किया गया है। इन करों से अब तक निर्यातकों के लिए छूट नहीं दी जा रही थी अथवा वापस नहीं किए जा रहे थे और इसलिए, भारत के निर्यात को नुकसान में रखते थे।

महत्व:

  • इस योजना के माध्यम से भारतीय निर्यातक, निर्यात के लिए आवश्यक अंतर्राष्ट्रीय मानकों को पूरा करने में सक्षम होंगे। इसके तहत अंतर्राष्ट्रीय संगठनों पर निर्भर रहने के बजाय निर्यातकों को देश में ही सस्ती परीक्षण और प्रमाणन उपलब्ध कराया जाएगा।
  • इसके तहत, निर्यातकों के लिए कर निर्धारण प्रक्रिया पूर्णतयः स्वचालित हो जाएगी। व्यवसायों के लिए स्वचालित रिफंड-मार्ग के माध्यम से अपने GST रिफंड हेतु पहुंच हासिल होगी।
  • इससे देश की अर्थव्यवस्था और उद्यमों के लिए कार्यशील पूंजी में वृद्धि होगी।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


दिल्ली में शराब पीने की उम्र 21 वर्ष की गई

  • नई आबकारी नीति के तहत, दिल्ली सरकार द्वारा शहर में शराब-उपभोग हेतु न्यूनतम आयु 25 वर्ष से घटाकर 21 वर्ष करने का फैसला किया गया है।
  • इसके अलावा, ‘राष्ट्रीय राजधानी में शराब की कोई नई दुकान नहीं खोली जाएगी’ तथा दिल्ली में कोई भी सरकारी शराब की दुकान नहीं होगी।

सरकारी अनुबंधों में काम करने वालों के लिए कौशल प्रमाणपत्र आवश्यक

  • सरकार द्वारा सरकारी अनुबंधों के तहत काम करने वाले सभी श्रमिकों को कौशल हेतु आधिकारिक प्रमाण पत्र होना अनिवार्य करना चाहिए।
  • कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय द्वारा सभी सरकारी विभागों से उनकी निगरानी में जारी होने वाले सभी अनुबंधों के लिए इसे अनिवार्य किया जाए।

आवश्यकता:

  • 2018-19 के आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में केवल 4% कार्यबल औपचारिक रूप से प्रशिक्षित है।
  • ऐसा इसलिए होता है क्योंकि सरकारी ठेकेदार आमतौर पर कम वेतन की मांग करने वाले अनौपचारिक श्रमिकों को पसंद करते हैं। इससे एक द्वंद् की स्थिति उत्पन्न हो रही है, जिसमे सरकार अपनी परियोजनाओं के लिए कुशल मानव-शक्ति के उपयोग पर जोर दिए बगैर कार्यबल में कौशल को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है।

भारतीय वैज्ञानिक के नाम पर अंतरिक्ष स्टेशन पर पाए गए जीवाणु का नामकरण

अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर बैक्टीरिया की चार प्रजातियों की खोज की गई है, जिनमें से एक का नामकरण (मेथिलोबैक्टीरियम अजमाली- Methylobacterium ajmalii ), भारतीय जैव विविधता वैज्ञानिक सैयद अजमल खान के नाम पर किया गया है।

  • बैक्टीरिया के चारो उपभेद मिथाइलोबैक्टीरिया परिवार से संबंधित है।
  • इसके एक उपभेद की पहचान मिथाइलोरुब्रम रोडेशियानम बैक्टीरिया (Methylorubrum rhodesianum bacteria) के रूप में की गई है, तथा अन्य तीनो उपभेद (स्ट्रेन) अब तक अज्ञात थे।
  • ये जीवाणु पौधों की वृद्धि में सहायक हैं।

गांधी शांति पुरस्कार

  • बांग्लादेश के राष्ट्रपिता ‘शेख मुजीबुर रहमान’ और ओमान के पूर्व सुल्तान, स्वर्गीय काबूस बिन सैद अल सैद को क्रमशः 2020 और 2019 के लिए गांधी शांति पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
  • गांधी शांति पुरस्कार के लिए इनका चयन प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी निर्णायक मंडल द्वारा किया गया था, इसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश, लोकसभा में सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता, लोकसभा अध्यक्ष और सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक भी शामिल थे।

गांधी शांति पुरस्कार के बारे में:

  • गांधी शांति पुरस्कार की शुरुआत, वर्ष 1995 में महात्मा गांधी की 125वीं जयंती के उपलक्ष्य में भारत भारत सरकार द्वारा की गयी थी।
  • यह वार्षिक पुरस्कार व्यक्तियों और संस्थानों को अहिंसा और अन्य गांधीवादी आदर्शों के माध्यम से राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन में उनके योगदान हेतु दिया जाता है।
  • इसमें एक करोड़ रुपये नकद राशि, एक पट्टिका और एक प्रशस्ति पत्र तथा एक उत्कृष्ट पारंपरिक हस्तकला / हथकरघा निर्मित उपहार प्रदान किया जाता है।
  • यह पुरस्कार राष्ट्रीयता, नस्ल, भाषा, जाति, पंथ से परे सभी व्यक्तियों के लिए है।

वर्ल्ड समिट ऑन इनफॉरमेशन सोसायटी फोरम (WSIS) 2021

  • WSIS 2021, सूचना एवं संचार प्रोद्योगिकी (ICT) के लिए विश्व समुदाय का सबसे बड़ा वार्षिक कार्यक्रम है।
  • इसका आयोजन सामूहिक रूप से अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU), UNESCO, UNDP और UNCTAD द्वारा किया गया है।
  • यह फोरम, बहु-हितधारक कार्यान्वयन गतिविधियों, सूचना विनिमय, जानकारी सृजन, सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान के समन्वय के लिए एक कुशल तंत्र साबित हो चुका है।

  • Join our Official Telegram Channel HERE for Motivation and Fast Updates
  • Subscribe to our YouTube Channel HERE to watch Motivational and New analysis videos