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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 19 March 2021

 

विषयसूची

 सामान्य अध्ययन-II

1. चुनावी बांड की बिक्री के खिलाफ याचिका पर सुनवाई

2. उच्चतम न्यायालय द्वारा ‘राशन कार्ड निरस्तीकरण’ मामले में केंद्र से प्रत्युत्तर की मांग

 

सामान्य अध्ययन-III

1. पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP)

2. कार्बन अवशोषण एवं रूपांतरण के समाधान हेतु कृत्रिम प्रकाश संश्लेषण

3. राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन

4. उच्च इलेक्ट्रॉन गतिशीलता ट्रांजिस्टर (एचईएमटी)

5. डिजिटल ग्रीन सर्टिफिकेट

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. भारतीय-अमेरिकी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी फोरम (IUSSTF)

2. ‘गो इलेक्ट्रिक’ अभियान

3. ‘वन धन विकास योजना’ के लिए आदर्श राज्य

4. ‘कैच द रेन’ अभियान

5. राष्ट्रीय भारतीय नागरिक रजिस्टर (NRIC)

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्त्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेंस- अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही और संस्थागत तथा अन्य उपाय।

चुनावी बांड की बिक्री के खिलाफ याचिका पर सुनवाई


संदर्भ:

उच्चतम न्यायालय ने एक गैर-सरकारी संगठन ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ (ADR) द्वारा चुनावी बॉन्ड (Electoral Bond) की बिक्री पर रोक लगाने हेतु दायर की गई एक याचिका पर तत्काल सुनवाई के लिए सहमति व्यक्त की है।

याचिका में, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में विधानसभा चुनाव से पहले, 1 अप्रैल से शुरू होने वाली नए चुनावी बांड्स की बिक्री पर रोक लगाने की मांग की गई है।

संबंधित प्रकरण:

याचिकाकर्ता ने अदालत को ध्यान दिलाते हुए कहा है, कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और निर्वाचन आयोग दोनों का कहना है, कि चुनावी बांडों की बिक्री, मुखौटा कॉरपोरेशन और इकाईयों के लिए गैर-कानूनी धन तथा रिश्वत से प्राप्त आय को राजनीतिक दलों के पास जमा करने का एक जरिया बन गया है।

‘इलेक्टोरल बॉन्ड’ क्या हैं?

  • चुनावी बॉन्ड / इलेक्टोरल बॉन्ड (Electoral Bond), राजनीतिक दलों को चंदा देने के लिए एक वित्तीय साधन है।
  • इन बांड्स के लिए, 1,000 रुपए, 10,000 रुपए, 1 लाख रुपए, 10 लाख रुपए और 1 करोड़ रुपए के गुणकों में जारी किया जाता है, और इसके लिए कोई अधिकतम सीमा निर्धारित नहीं की गयी है।
  • इन बॉन्डों को जारी करने और भुनाने के लिए ‘भारतीय स्टेट बैंक’ को अधिकृत किया गया है। यह बांड जारी होने की तारीख से पंद्रह दिनों की अवधि के लिए वैध होते हैं।
  • ये बॉन्ड किसी पंजीकृत राजनीतिक दल के निर्दिष्ट खाते में प्रतिदेय होते हैं।
  • ये बांड, केंद्र सरकार द्वारा निर्दिष्ट जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर महीनों में प्रत्येक दस दिनों की अवधि में किसी भी व्यक्ति द्वारा खरीदे जा सकते है, बशर्ते उसे भारत का नागरिक होना चाहिए अथवा भारत में निगमित या स्थित होना चाहिए ।
  • कोई व्यक्ति, अकेले या अन्य व्यक्तियों के साथ संयुक्त रूप से इन बांड्स को खरीद सकता है।
  • बांड्स पर दान देने वाले के नाम का उल्लेख नहीं होता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. चुनावी बांड क्या हैं?
  2. पात्रता
  3. बांड का मूल्यवर्ग
  4. विशेषताएं
  5. ये बांड कौन जारी कर सकता है?

मेंस लिंक:

पारदर्शी राजनीतिक वित्तपोषण सुनिश्चित करने में चुनावी बांड की प्रभावशीलता की आलोचनात्मक रूप से परीक्षण कीजिए तथा इसके लिए विकल्प सुझाएँ?

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

उच्चतम न्यायालय द्वारा ‘राशन कार्ड निरस्तीकरण’ मामले में केंद्र से प्रत्युत्तर की मांग


संदर्भ:

उच्चतम न्यायालय ने, केंद्र सरकार से, ‘आधार’ से लिंक नहीं होने के कारण लगभग तीन करोड़ राशन कार्डों के रद्द किए जाने से संबंधित याचिका का जवाब देने को कहा है।

साथ ही, शीर्ष अदालत ने ‘शिकायत निवारण तंत्र’ के कार्यान्वयन पर रिपोर्ट की मांग भी की है। यह राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अनुच्छेद 14, 15 और 16 में ‘शिकायत निवारण तंत्र’ का प्रावधान किया गया है।

संबंधित प्रकरण:

उच्चतम न्यायालय में दायर एक याचिका में कहा गया है, कि इस तरह से राशन कार्ड रद्द होने की वजह से देश भर में भुखमरी से कई मौतें हुई हैं।

याचिकाकर्ता का कहना है, कि राशन कार्ड, भोजन के अधिकार’ (Right to food), का प्रतीक है, इसे ‘आधार’ से संबद्ध नहीं होने के कारण प्रतिबंधित या रद्द नहीं किया जा सकता है।

चिंताएं:

अदालत ने कहा है, कि यह मामला चिंता का विषय है, क्योंकि सरकार ने आदिवासियों और गरीबों के राशन कार्ड को केवल इसलिए रद्द कर दिया, क्योंकि इन्हें बायोमेट्रिक रूप से ‘आधार’ के साथ नहीं जोड़े जा सका था।

भारत संघ ने इसके लिए यूँ ही सामान्य रूप से एक स्पष्टीकरण जारी कर दिया कि ये रद्द किए गए कार्ड फर्जी थे। असली कारण यह है कि ‘आंख की पुतली’ की पहचान (iris identification), अंगूठे के निशान पर आधारित तकनीकी प्रणाली, आधार कार्ड का न होना, ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट का ठीक से काम न करना आदि वजहों से, संबंधित परिवारों को सूचित किये बिना ही, बड़े पैमाने पर राशन कार्डों को रद्द कर दिया गया।

‘राशन कार्ड’ क्या हैं?

राशन कार्ड, भारत में राज्य सरकारों द्वारा परिवारों के लिए जारी किया जाने वाला एक आधिकारिक दस्तावेज होता है। इसके माध्यम से, परिवार, ‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम’ (NFSA) के तहत रियायती खाद्यान्न खरीदने के लिए पात्र होते हैं। अधिकांश भारतीयों के लिए, राशन कार्ड, एक पहचान पत्र के रूप में भी काम करते हैं।

  • ‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम’ (NFSA) के तहत, सभी राज्य सरकारों के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत पात्र परिवारों की पहचान करना और उन्हें राशन कार्ड प्रदान करना अनिवार्य है।

वैश्विक सूचकांकों में भारत की रैंकिंग:

  • वर्ष 2020 में ‘भोजन के अधिकार’ अभियान से संबंधित ‘हंगर वॉच रिपोर्ट’ द्वारा भारत में भुखमरी संबंधी स्थिति को ‘चिंताजनक’ (grave) के रूप में वर्गीकृत किया गया था।
  • ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2020 में, भारत को 107 देशों की सूची में 94 वें स्थान पर रखा गया है, तथा इसे ‘भुखमरी संबंधी गंभीर श्रेणी’ में सूचीबद्ध किया गया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. राशन कार्ड क्या हैं?
  2. विशेषताएं
  3. लाभार्थियों की पहचान
  4. लाभ

मेंस लिंक:

‘आधार’ से संबद्ध नहीं होने के कारण तीन-करोड़ से अधिक राशन कार्डों को रद्द करने से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: मुख्य फसलें- देश के विभिन्न भागों में फसलों का पैटर्न- सिंचाई के विभिन्न प्रकार एवं सिंचाई प्रणाली- कृषि उत्पाद का भंडारण, परिवहन तथा विपणन, संबंधित विषय और बाधाएँ; किसानों की सहायता के लिये ई-प्रौद्योगिकी।

पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP)


(Eastern Rajasthan Canal Project)

संदर्भ:

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा ‘पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (Eastern Rajasthan Canal ProjectERCP) के लिए ‘राष्ट्रीय परियोजना’ का दर्जा प्रदान किए जाने की पुरजोर माँग की जा रही है।

‘पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना’ (ERCP) के बारे में:

पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना का उद्देश्य दक्षिणी राजस्थान में चंबल और इसकी सहायक नदियों जैसे कि कुन्नू, पार्वती, कालीसिंध सहित नदियों में बारिश के मौसम के दौरान उपलब्ध अधिशेष जल को एकत्र कर इसका उपयोग करना है।

  • इस मेगा परियोजना के तहत प्रदेश के 13 जिलों में पीने के पानी की आपूर्ति के अलावा, लगभग 2 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई के लिए पानी भी उपलब्ध कराया जाएगा।
  • इसके तहत, दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारे में भी पानी की आपूर्ति की जाएगी तथा इस क्षेत्र में बाढ़ और सूखे की स्थिति का भी समाधान किया जाएगा।

आवश्यकता:

राज्य जल संसाधन विभाग, राजस्थान के अनुसार, राजस्थान, भारत का क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा राज्य है, और इसका भौगोलिक क्षेत्रफल 342.52 लाख हेक्टेयर है, जोकि पूरे देश के क्षेत्रफल 10.4 प्रतिशत है, किंतु इस प्रदेश में भारत के सतही जल का मात्र 1.16 प्रतिशत और भूजल का मात्र 1.72 प्रतिशत जल उपलब्ध है।

  • राज्य के सभी जल निकायों में से केवल चंबल नदी के बेसिन में अधिशेष जल उपलब्ध रहता है। लेकिन, इस जल का भी सीधे उपयोग नहीं किया जा सकता क्योंकि कोटा बैराज के आसपास का क्षेत्र मगरमच्छ अभयारण्य के रूप में घोषित है।
  • इसलिए, पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना’ (ERCP) का उद्देश्य जल-धाराओं के एक नेटवर्क का निर्माण करना है। यह नेटवर्क, राजस्थान के 67 प्रतिशत क्षेत्र में विस्तारित होगा तथा राज्य की 41.13 प्रतिशत आबादी को जलापूर्ति करने में सक्षम होगा।

ERCP को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने संबंधी मांग का कारण:

मुख्यमंत्री द्वारा ‘पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना’ को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किए जाने संबंधी मांग का प्रमुख कारण इस परियोजना की भारी भरकम लागत बताया गया है। इसकी अनुमानित लागत लगभग 40,000 करोड़ रुपये है, जिसका राज्य सरकार द्वारा वहन करना संभव नहीं है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना’ (ERCP) के बारे में
  2. परियोजना के अंतर्गत आने वाला क्षेत्र।
  3. राजस्थान में नदियाँ और प्रमुख सहायक नदियाँ।
  4. राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा- लाभ।

मेंस लिंक:

पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना’ (ERCP) के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

कार्बन अवशोषण एवं रूपांतरण के समाधान हेतु कृत्रिम प्रकाश संश्लेषण


संदर्भ:

हाल ही में, जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र (Jawaharlal Nehru Centre for Advanced Scientific Research– JNCASR) के शोधकर्ताओं द्वारा एक समेकित प्रणाली विकसित की गयी है, जिसके द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) को अवशोषित करके सौर ईंधन में बदला जा सकता है।

शोधकर्ताओं ने इस प्रक्रिया को ‘कृत्रिम प्रकाश संश्लेषण’ (Artificial Photosynthesis) नाम दिया है। इनका मानना है, कि यह प्रक्रिया जीवाश्म ईंधन के उपयोग से होने वाले उत्सर्जन के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकती है।

कार्यविधि:

इस कृत्रिम प्रकाश संश्लेषण (AP) में सौर ऊर्जा का उपयोग किया जाता है और इसमें एक प्रकाश-सुग्राहीकारक / फोटोसेंसिटाइज़र (photosensitizer) की सहायता से अवशोषित कार्बन डाइऑक्साइड को कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) में परिवर्तित किया जाता है, जिसका उपयोग आंतरिक दहन इंजन के लिए ईंधन के रूप में किया जा सकता है।

  • इसमें, वैज्ञानिकों द्वारा मुख्यतः सामान्य सूक्ष्म-विन्यासों (Nanostructures) का उपयोग करते हुए प्राकृतिक प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया का अनुकरण किया है।
  • कार्बन डाइऑक्साइड को सौर ईंधन में बदलने की इस प्रक्रिया में पानी से ऑक्सीजन भी उत्पन्न होता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  • प्रकाश संश्लेषण के बारे में।

मेंस लिंक:

हाल ही में, वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड को कम करने के उद्देश्य से लागू की गई पहलों पर चर्चा कीजिए।

 स्रोत: पीआईबी

 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव।

 राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन


(National Technical Textiles Mission)

वर्ष 2020 में, आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) द्वारा एक 1,480 करोड़ रुपए के कुल परिव्यय से ‘राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन’ की स्थापना को मंजूरी दी गई थी।

उद्देश्य:

देश को तकनीकी वस्त्रों के क्षेत्र में अग्रणी बनाना तथा घरेलू बाजार में तकनीकी वस्त्रों के उपयोग में वृद्धि करना।

यह मिशन 2020-2021 से आरंभ होकर चार वर्षों की अवधि के लिए लागू किया जाएगा और इसमें चार घटक होंगे:

  1. पहले घटक में ‘अनुसंधान, नवाचार और विकास’ पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा और इस घटक में 1,000 करोड़ रुपए का परिव्यय होगा। इसमें फाइबर तथा भू-टेक्‍सटाइल, कृषि-टेक्‍सटाइल, चिकित्‍सा-टेक्‍सटाइल, मोबाइल-टेक्‍सटाइल और खेल-टेक्‍सटाइल के विकास पर आधारित अनुसंधान अनुप्रयोगों दोनों स्तर पर अनुसंधान किया जाएगा तथा जैव-निम्नीकरणीय तकनीकी वस्त्रों का विकास किया जाएगा।
  2. दूसरा घटक तकनीकी वस्त्रों के संवर्द्धन और विपणन विकास पर केन्द्रित होगा। इस घटक के तहत मिशन का लक्ष्य वर्ष 2024 तक घरेलू बाजार का आकार $ 40 बिलियन से बढाकर $ 50 बिलियन तक करने का निर्धारित किया गया है।
  3. तीसरा घटक निर्यात संवर्धन पर ध्यान केंद्रित करेगा, जिसके तहत देश में तकनीकी कपड़ा निर्यात को 14,000 करोड़ रुपए से बढाकर वर्ष 2021-2022 तक 20,000 करोड़ रुपए तक किया जाएगा और मिशन के समाप्त होने तक हर साल 10% औसत वृद्धि सुनिश्चित की जाएगी।
  4. अंतिम घटक में ‘शिक्षा, प्रशिक्षण और कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

‘तकनीकी वस्त्र’ क्या होते हैं?

तकनीकी वस्त्रों को मुख्य रूप से, सौंदर्यपरक विशेषताओं की अपेक्षा तकनीकी कार्य निष्पादन और कार्यात्मक आवश्यकताओं लिए निर्मित वस्त्र सामग्री और उत्पादों के रूप में परिभाषित किया जाता है।

तकनीकी वस्त्र उत्पादों को उनके अनुप्रयोग क्षेत्रों के आधार पर 12 व्यापक श्रेणियों में विभाजित किया गया है: एग्रोटेक, बिल्डटेक, क्लॉथटेक, जियोटेक, होमटेक, इंड्यूटेक, मोबिलटेक, मेडिटेक, प्रोटेक, स्पोर्ट्सटेक, ओइकोटेक, पैकटेक।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. तकनीकी वस्त्र क्या होते हैं?
  2. विशेषताएं
  3. प्रकार
  4. लाभ

मेंस लिंक:

तकनीकी वस्त्रों के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

उच्च इलेक्ट्रॉन गतिशीलता ट्रांजिस्टर (HEMT)


(High Electron Mobility Transistors)

संदर्भ:

भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा गैलियम नाइट्राइड (Gallium NitrideGaN) से एक अत्यधिक अत्‍यधिक विश्वसनीय, उच्च इलेक्ट्रॉन गतिशीलता ट्रांजिस्टर (High Electron Mobility Transistors– HEMT) विकसित किया गया है।

महत्व:

  • यह पहला स्वदेश निर्मित HEMT उपकरण है, तथा इलेक्ट्रिक कारों, लोकोमोटिव, पावर ट्रांसमिशन और हाई वोल्टेज तथा हाई-फ़्रीक्वेंसी स्विचिंग की आवश्यकता वाले अन्य क्षेत्रों में उपयोगी है।
  • इससे विद्युत् इलेक्ट्रॉनिक्स में प्रयुक्त होने वाले स्थिर और सक्षम ट्रांजिस्टर आयात करने की लागत में कमी आएगी।
  • यह नई प्रौद्योगिकी भारत को पावर ट्रांजिस्टर प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भर भी बनाएगी।

HEMT क्या हैं?

उच्च इलेक्ट्रॉन गतिशीलता ट्रांजिस्टर (HEMT) सामान्य रूप से एक ऑफ उपकरण (OFF device) है और यह 4 एम्‍पियर तक की विद्युत-धारा को परिवर्तित कर सकता है और 600 वोल्‍ट पर संचालित हो सकता है।

  • HEMT को एकीकृत सर्किट में डिजिटल ऑन-ऑफ स्विच के रूप में उपयोग किया जाता है।
  • HEMT ट्रांजिस्टर, सामान्य ट्रांजिस्टर की तुलना में मिलीमीटर तरंग आवृत्तियों तक की उच्च आवृत्तियों पर काम करने में सक्षम होते हैं, और उच्च आवृत्ति वाले उत्पादों जैसे सेल फोन, सॅटॅलाइट टेलीविजन रिसीवर, वोल्टेज कन्वर्टर्स और रडार उपकरणों में प्रयुक्त किए जाते हैं।
  • इनका, सॅटॅलाइट रिसीवर, कम क्षमता वाले एम्पलीफायरों और रक्षा उद्योग में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. HEMT क्या हैं?
  2. ये साधारण ट्रांजिस्टर से किस प्रकार भिन्न हैं?
  3. लाभ
  4. अनुप्रयोग

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

डिजिटल ग्रीन सर्टिफिकेट


संदर्भ:

हाल हही में, यूरोपीय आयोग द्वारा एक ‘डिजिटल हरित प्रमाणपत्र’ अर्थात ‘डिजिटल ग्रीन सर्टिफिकेट’ शुरू किया गया है। इसके माध्यम, से कोविड-19 के लिए टीकाकरण किये जा चुके, नकारात्मक परीक्षण वाले अथवा इससे ठीक हो चुके यूरोपीय संघ के नागरिकों को यूनियन के सभी देशों में निर्बाध रूप से यात्रा करने की अनुमति दी जाएगी।

‘डिजिटल ग्रीन सर्टिफिकेट’ क्या है?

  • यह एक डिजिटल दस्तावेज़ है, जिसमे एक QR कोड होगा तथा इसे मोबाइल फोन में संग्रहीत एवं प्रदर्शित किया जाया जा सकता है।
  • इसे जानबूझकर ‘वैक्सीन पासपोर्ट’ का नाम नहीं दिया गया है, क्योंकि कुछ सदस्य देशों के अनुसार, इससे जिन लोगों का अभी तक टीकाकरण नहीं हो पाया है, उनके साथ भेदभाव होगा।
  • यूरोपीय संघ के सभी नागरिक अथवा यूरोपीय संघ में कानूनी रूप से निवास कर रहे किसी अन्य तीसरे देश के नागरिक इन डिजिटल प्रमाणपत्रों का उपयोग करने के पात्र होंगे और उन्हें मुक्त भ्रमण पर लगे प्रतिबंधों से छूट प्राप्त होगी।

ये ‘प्रमाण पत्र’ किसके द्वारा जारी किए जायेंगे?

‘डिजिटल ग्रीन सर्टिफिकेट’, अस्पतालों, परीक्षण केंद्रों और स्वास्थ्य अधिकारियों तथा निर्दिष्ट अधिकारियों द्वारा जारी किये जा सकते हैं।

इस प्रकार के ‘दस्तावेज़ों’ की आवश्यकता:

महामारी फैलने के कारण, यूरोपीय संघ और समूचे विश्व में पर्यटन उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

  • इसलिए, कई देशों द्वारा डिजिटल प्रमाण पत्र या पासपोर्ट जारी करने पर विचार किया जा रहा है। ये दस्तावेज, इस बात का प्रमाण होंगे कि एक व्यक्ति को टीका लगाया जा चुका है या कोविड​​-19 से ठीक हो चुका है।
  • इसी वर्ष फरवरी में, इज़राइल ‘वैक्सीन पासपोर्ट’ नाम से प्रमाण पत्र जारी करने वाला पहला देश बन गया था, जिसके द्वारा टीकाकृत व्यक्तियों के लिए कुछ सुविधाओं का उपयोग करने और कार्यक्रमों में भाग लेने की अनुमति दी जाती है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


भारतीय-अमेरिकी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी फोरम (IUSSTF)

(Indo-U.S. Science and Technology Forum)

  • IUSSTF की स्थापना, मार्च 2000 में, भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकारों के मध्य हस्ताक्षरित एक समझौते के तहत की गयी थी।
  • ‘भारतीय-अमेरिकी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी फोरम’ (IUSSTF) एक द्विदेशीय संगठन है जिसका वित्त पोषण भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) और अमेरिकी राज्य विभाग द्वारा किया जाता है।
  • यह फोरम, सरकार, शैक्षणिक और उद्योग समुदाय के बीच महत्वपूर्ण अंतःक्रियाओं के माध्यम से विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और नवाचार को बढ़ावा देता है।

‘गो इलेक्ट्रिक’ अभियान

(Go Electric Campaign)

  • इस अभियान की शुरुआत विद्युत् मंत्रालय द्वारा की गई है।
  • इसका उद्देश्य: इलेक्ट्रिक वाहन और खाना पकाने के इलेक्ट्रिक उपकरणों जैसे इंडक्शन कुक हॉब्स, इलेक्ट्रिक प्रेशर कुकर आदि को अपनाने से होने वाले लाभों के बारे में लोगों के मध्य जागरूकता पैदा करना है।

‘वन धन विकास योजना’ के लिए आदर्श राज्य

मणिपुर, ‘वन धन विकास योजना’ कार्यक्रम लागू किये गए राज्यों में चैंपियन राज्य के रूप में उभरा है। मणिपुर राज्य में, वन धन कार्यक्रम, स्थानीय आदिवासियों के लिए रोजगार का एक प्रमुख स्रोत बन चुका है।

  • वन धन विकास योजना, वनोपज आधारित जनजातियों के लिए स्थायी आजीविका सृजन हेतु एक कार्यक्रम है, जिसके तहत वन धन केंद्रों की स्थापना करके लघु वन उपज का मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और विपणन किया जाता है।
  • यह, आदिवासी समुदायों के मध्य रोजगार और आय बढ़ाने में योगदान करने वाली एक प्रमुख योजना है।
  • इस कार्यक्रम को TRIFED द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।

‘कैच द रेन’ अभियान

(Catch the rain Campaign)

जल शक्ति मंत्रालय के अधीन ‘राष्ट्रीय जल मिशन’ द्वारा वर्ष 2020 में ‘कैच द रेन: जहाँ भी हो, जब भी हो’ टैग लाइन के साथ ‘कैच द रेन’ अभियान शुरू किया गया था।

  • इसका उद्देश्य सभी राज्यों और हितधारकों के लिए लोगों की सक्रिय भागीदारी सहित, जलवायु परिस्थितियों और उप-मृदा स्तर के अनुकूल रेन वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर (RWHS) का निर्माण करने हेतु प्रेरित करना है।
  • इस अभियान में, देश भर के 623 जिलों में स्थित “नेहरू युवा केंद्र संगठन” (NYKS) सहित यूथ क्लबों को शामिल किया गया है।

राष्ट्रीय भारतीय नागरिक रजिस्टर (NRIC)

(National Register of Indian Citizens)

  • वर्ष 2004 में संशोधित नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 14A के अनुसार देश के प्रत्येक नागरिक को राष्ट्रीय भारतीय नागरिक रजिस्टर (NRIC) में पंजीकरण कराना अनिवार्य है।
  • नागरिकता अधिनियम, 1955 के अंतर्गत बनाए गए नागरिकता नियम 2003 के नियम संख्या 3 में निहित प्रावधानों के अनुसार, राष्ट्रीय भारतीय नागरिक रजिस्टर एवं जनसंख्या रजिस्टर का निर्माण तथा रखरखाव महापंजीयक, नागरिक पंजीकरण (Registrar General of Citizen Registration) के द्वारा किया जाएगा।

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