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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 17 March 2021

 

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-I

1. ओरुनुदोई योजना

 

सामान्य अध्ययन-II

1. मनोनीत सांसदों के लिए दलबदल निरोधक कानून की प्रयोज्यता

2. मुल्लापेरियार बांध विवाद

 

सामान्य अध्ययन-III

1. झारखंड में स्थानीय लोगों हेतु निजी क्षेत्र में 75% नौकरियां आरक्षित करने वाला विधेयक

2. ‘विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट 2020’

3. ‘विकास वित्त संस्थान’ की स्थापना हेतु विधेयक को मंजूरी

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. विश्व का सबसे ऊंचा रेलवे पुल

2. यूरोपीय संघ क्षेत्र, ‘LGBTIQ फ्रीडम ज़ोन’ घोषित

3. अंतर्राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (IRENA)

 


सामान्य अध्ययन- I


 

शामिल विषय: महिलाओं से जुड़े मुद्दे।

ओरुनुदोई योजना


(Orunudoi scheme)

संदर्भ:

दिसंबर 2020 में असम सरकार द्वारा शुरू की गई, ओरुनुदोई योजना राज्य की सबसे लोकप्रिय योजनाओं में से एक है।

इस योजना के बारे में:

  • इस योजना के तहत, असम के गरीब परिवारों की महिला सदस्यों को 830 रुपये की मासिक सहायता प्रदान की जाती है।
  • प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer- DBT) योजना होने के कारण सहयता राशि सीधे ही परिवार की महिला प्रमुख के खाते में भेज दी जाती है, क्योंकि वे ही परिवार की प्रमुख देखभाल करने वाली होती हैं।
  • यह योजना ‘गरीब और जरूरतमंद परिवारों’ को अपना पैसा इच्छानुसार व्यय करने का विकल्प प्रदान करती है।

पात्रता:

  1. इस योजना का लाभ उठाने हेतु केवल असम की स्थायी निवासी महिलाओं द्वारा आवेदन किया जा सकता है, तथा आवेदक के समूचे परिवार की आय 2 लाख रुपये प्रति वर्ष से कम होनी चाहिए।
  2. योजना के तहत, विकलांग सदस्यों, तलाकशुदा / विधवा / पृथक / अविवाहित महिलाओं वाले परिवारों को विशेष रूप से प्राथमिकता दी जाती है। इसके तहत, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) की सुरक्षा से वंचित तथा बिना राशन कार्ड वाले गरीब परिवारों को भी प्राथमिकता दी जाती है।
  3. बिना महिला सदस्य वाले परिवारों, सांसदों, विधायकों (पूर्व और वर्तमान), पंचायती राज संस्थाओं के सदस्यों और शहरी स्थानीय निकायों के सदस्यों, सरकारी अधिकारियों और सहकारी समितियों के कर्मचारियों को योजना से बाहर रखा गया है।
  4. चार पहिया वाहन, मशीनीकृत नावें, ट्रैक्टर या रेफ्रीजरेटर, एसी और वाशिंग मशीन, या 15 बीघा से अधिक कृषि भूमि रखने वाले परिवार इस योजना का लाभ उठाने हेतु पात्र नहीं हैं।

orunodoi

प्रीलिम्स लिंक:

  1. योजना की प्रमुख विशेषताएं
  2. पात्रता
  3. लाभार्थी।

मेंस लिंक:

योजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

मनोनीत सांसदों के लिए दलबदल निरोधक कानून की प्रयोज्यता


(Applicability of Anti-defection law for nominated MPs)

संदर्भ:

हाल ही में, मनोनीत सांसद स्वपन दासगुप्ता ने अपना कार्यकाल पूरा होने के एक साल पहले ही राज्यसभा से त्यागपत्र दे दिया है।

संबंधित प्रकरण:

भाजपा द्वारा स्वप्न दासगुप्ता को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तारकेश्वर निर्वाचन क्षेत्र के लिए अपने उम्मीदवार के रूप में उतारा गया है, इस पर विपक्ष ने इनको दल-बदल क़ानून के तहत राज्यसभा से निरर्हक घोषित किये जाने का मुद्दा उठाया है।

‘मनोनीत अथवा नामित सदस्य’ कौन होते हैं?

  • राज्यसभा में जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से 12 सदस्य मनोनीत किये जाते हैं।
  • राज्यसभा में नामित करने हेतु व्यापक मानदंड के रूप में सदस्यों को साहित्‍य, विज्ञान, कला और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों का विशेष ज्ञान अथवा व्‍यावहारिक अनुभव एवं विशिष्ट पहचान होनी चाहिए।
  • इन सदस्यों को, केंद्र सरकार की अनुशंसा पर राष्ट्रपति द्वारा नामित किया जाता है।
  • नामित सदस्यों के लिए, सिवाय एक उल्लेखनीय अंतर के, निर्वाचित सदस्यों के समान अधिकार और विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं – वे राष्ट्रपति के चुनाव में मतदान नहीं कर सकते।

‘दलबदल विरोधी कानून’ क्या है?

(Anti-defection law)

  • संविधान में, 52 वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा एक नयी अनुसूची (दसवीं अनुसूची) जोड़ी गई थी।
  • इस संशोधन का उद्देश्य सांसदों और विधायकों द्वारा, अपने मूल राजनीतिक दलों, जिनके टिकट पर चुनाव लड़ा था, को छोड़ कर अन्य दलों में शामिल होने पर रोक लगा कर, सरकारों में स्थिरता लाना था।
  • इसके अंतर्गत राजनीतिक निष्ठा के परिवर्तन करने वाले सदस्यों को संसदीय सदस्यता से वंचित करने तथा मंत्री बनने पर प्रतिबंध करने का प्रावधान किया गया है मंत्री बनने पर

इस क़ानून में उन परिस्थितियों को निर्दिष्ट किया गया है, जिनके तहत सांसदों द्वारा राजनीतिक दल परिवर्तन करने पर कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। यह क़ानून दल-बदलने वाले सांसदों के संदर्भ में तीन प्रकार की परिस्थितियां निर्धारित करता है:

  1. जब कोई सदस्य, जिस राजनीतिक पार्टी के टिकट पर निर्वाचित हुआ हो, स्वेच्छा से उस पार्टी की सदस्यता का त्याग कर देता है, अथवा सदन में उस पार्टी की इच्छा के विपरीत मतदान करता है।
  2. जब कोई सदस्य स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में निर्वाचित होता है, तथा चुनाव के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल हो जाता है।
  3. मनोनीत सांसदों के संदर्भ में, यह कानून निर्दिष्ट करता है कि कोई सदस्य सदन में नामित होने के छह महीने के भीतर, किसी राजनीतिक पार्टी में शामिल होने का विकल्प चुन सकते हैं। लेकिन, यदि इस अवधि के पश्चात वे किसी पार्टी में शामिल होते है, तो उनकी सदस्यता रद्द हो जाएगी।

 प्रीलिम्स लिंक:

  1. दल-बदल कानून संबधित विभिन्न समितियों और आयोगों के नाम
  2. समिति तथा आयोग में अंतर
  3. पीठासीन अधिकारी तथा न्यायिक समीक्षा का निर्णय
  4. राजनीतिक दलों के विलय तथा विभाजन में अंतर
  5. क्या पीठासीन अधिकारी पर दलबदल विरोधी कानून लागू होता है?
  6. संबंधित मामलों में उच्चत्तम न्यायालय के निर्णय

मेंस लिंक:

दलबदल विरोधी कानून के प्रावधानों का परीक्षण कीजिए। क्या यह कानून अपने उद्देश्यों को पूरा करने में विफल रहा है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थान।

मुल्लापेरियार बांध विवाद


(Mullaperiyar Dam Issue)

संदर्भ:

हाल ही में, उच्चतम न्यायालय द्वारा मुल्लापेरियार मामले में तमिलनाडु को चेतावनी जारी की गई है।

अदालत का निर्देश:

  • अदालत ने कहा है, कि उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षी समिति को मुल्लापेरियार बांध के लिए ‘रुल कर्व’ (rule curve) संबंधी जानकारी देने में विफल रहने पर, तमिलनाडु के मुख्य सचिव ‘व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार’ होंगे तथा इसके लिए उनके खिलाफ ‘उचित कार्रवाई’ की जाएगी।
  • पर्यवेक्षी समिति द्वारा तीन प्रमुख सुरक्षा मुद्दों– बाँध के उपकरणों की निगरानी तथा प्रदर्शन, ‘रुल कर्व’ निर्धारित करना तथा बाँध के दरवाजों के परिचालन कार्यक्रम को तय करना- का समाधान करने हेतु निर्देश जारी किए जाएँ अथवा उचित कदम उठाए जाएँ और चार सप्ताह की अवधि में अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

संबंधित प्रकरण:

केरल सरकार द्वारा तमिलनाडु पर वर्ष 1939 के पुराने ‘बाँध-दरवाजा परिचालन कार्यक्रम’ (गेट ऑपरेशन शेड्यूल) को शुरू करने का आरोप लगाया गया है। केरल ने पेरियार बाघ अभयारण्य के निकट स्थित बांध में जल स्तर की उचित निगरानी संबंधी कमी के बारे में भी आशंका व्यक्त की है।

‘रुल कर्व’ क्या होता है?

‘रुल कर्व’ (rule curve), किसी बांध के जलाशय में उतार-चढ़ाव के स्तर को तय करता है। बांध के गेट खोलने का कार्यक्रम ‘रुल कर्व’ पर आधारित होता है। यह किसी बांध के ‘मुख्य सुरक्षा’ तंत्र का हिस्सा होता है।

मुल्लापेरियार बांध- महत्वपूर्ण तथ्य:

यद्यपि, मुल्लापेरियार बांध केरल में स्थित है, किंतु, वर्ष 1886 में त्रावणकोर के महाराजा तथा भारत के राज्य सचिव के मध्य, पेरियार सिंचाई कार्यों के लिए 999 वर्षों के लिए पट्टा अनुबंधपत्र (lease indenture), जिसे पेरियार लेक लीज एग्रीमेंट भी कहा जाता है, पर हस्ताक्षर करने के बाद से इसका परिचालन तमिलनाडु द्वारा किया जाता है।

  • इसका निर्माण वर्ष 1887 और 1895 के मध्य किया गया था, इस बाँध से अरब सागर की बहने वाली नदी की धारा को मोड़कर बंगाल की खाड़ी की ओर प्रवाहित किया गया था, इसका उद्देश्य मद्रास प्रेसीडेंसी में मदुरई शुष्क वर्षा क्षेत्र को सिंचाई हेतु पानी उपलब्ध कराना था।
  • यह बांध केरल के इडुक्की ज़िले में मुल्लायार और पेरियार नदियों के संगम पर स्थित है।

तमिलनाडु का पक्ष:

तमिलनाडु का कहना है कि, बाँध को बांध को मजबूत करने के उपाय किए जा चुके हैं, किंतु केरल सरकार जलाशय के जल स्तर को बढ़ाने के प्रयासों में बाधा उत्पन्न कर रही है, जिससे मदुरै के किसानों को नुकसान हो रहा है।

केरल का पक्ष:

केरल,  बाँध के प्रवाह की दिशा में स्थिति इडुक्की के भूकंप-प्रवण जिले के निवासियों द्वारा तबाही की आशंकाओं को लेकर चिंतित है।

वैज्ञानिकों का कहना है, कि इस क्षेत्र में रिक्टर पैमाने पर छह माप से ऊपर भूकंप आने पर, तीन मिलियन से अधिक लोगों का जीवन गंभीर खतरे में पड़ जाएगा।

Mullaperiyar_Dam

प्रीलिम्स लिंक:

  1. मुल्लायार और पेरियार नदियो की अवस्थिति
  2. मुल्लापेरियार बांध की अवस्थिति?
  3. बांध का प्रबंधन कौन करता है?
  4. पेरियार लेक लीज एग्रीमेंट, 1886 के बारे में।
  5. अंतरराज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 (IRWD अधिनियम) के बारे में।

मेंस लिंक:

मुल्लापेरियार बांध का मुद्दा तमिलनाडु और केरल के बीच विवाद का कारण क्यों बन गया है, परीक्षण कीजिए। क्या केंद्र सरकार इस मुद्दे को हल करने में मदद कर सकती है? परीक्षण कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

झारखंड में स्थानीय लोगों हेतु निजी क्षेत्र में 75% नौकरियां आरक्षित करने वाला विधेयक


संदर्भ:

हाल ही में, झारखंड सरकार द्वारा स्थानीय लोगों के लिए निजी क्षेत्र की नौकरियों में 75% आरक्षण की घोषणा की गई है।

विधेयक में ‘निजी क्षेत्र की नौकरियों’ को किस प्रकार परिभाषित किया गया है?

इस विधेयक में, दुकानों, प्रतिष्ठानों, खदानों, उद्यमों, उद्योगों, कंपनियों, सोसाइटीज, ट्रस्टों, सीमित देयता भागीदारी फर्मों, तथा दस या अधिक व्यक्तियों को नियोजित करने वाले व्यक्ति को निजी क्षेत्र अथवा इकाई माना गया है।

विधेयक के प्रमुख बिंदु:

  • इस विधेयक के पारित होने तथा अधिनियम के रूप में लागू होने के तीन महीने के भीतर सभी नियोक्ताओं को, 30, 000 रुपये से कम कुल मासिक वेतन या मजदूरी- अथवा सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित निर्देशों के अनुसार- पाने वाले कर्मचारियों को एक निर्दिष्ट पोर्टल पर पंजीकृत करना होगा।
  • निर्दिष्ट पोर्टल पर पंजीकरण प्रक्रिया पूरी किये बगैर किसी भी व्यक्ति को काम पर नहीं लिया जाएगा।
  • सभी स्थानीय उम्मीदवारों के लिए खुद को पोर्टल पर पंजीकृत करना आवश्यक होगा, इसके बगैर उन्हें 75 प्रतिशत आरक्षण का लाभ प्राप्त नहीं होगा।
  • वांछित कौशल योग्यता या प्रवीणता के पर्याप्त संख्या में स्थानीय उम्मीदवार उपलब्ध नहीं होने पर नियोक्ता द्वारा इस संबंध में छूट का दावा किया जा सकता है।
  • नियोक्ता के लिए रिक्तियों और रोजगार के बारे में पोर्टल पर प्रति तिमाही विवरण दर्ज करना होगा जिसकी जांच एक प्राधिकृत अधिकारी (AO), अर्थात जिला रोजगार अधिकारी द्वारा की जाएगी। ये अधिकारी सत्यापन के उद्देश्य से किसी भी रिकॉर्ड की मांग कर सकता है।
  • प्राधिकृत अधिकारी (AO) द्वारा पारित किसी आदेश के खिलाफ असंतुष्ट नियोक्ता द्वारा 60 दिनों के भीतर अपीलीय प्राधिकारी, निदेशक, रोजगार और प्रशिक्षण, झारखंड सरकार के समक्ष अपील की जा सकती है।

इस नीति से संबंधित चिंताएँ एवं अन्य मुद्दे:

  1. यह नीति अनुच्छेद 16 से सबंधित संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करती है।
  2. विविधता में एकता पर प्रभाव: इस नीति से किसी क्षेत्र में स्थानीय बनाम गैर-स्थानीय द्वन्द की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिससे देश के एकीकरण को खतरा पैदा हो सकता है।
  3. यह क्षेत्र में पूंजी निवेश को हतोत्साहित कर सकता है।
  4. एक व्यवसाय की स्वतंत्रता को प्रभावित करता है।
  5. प्रतिस्पर्धा की भावना के खिलाफ है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. विधेयक के प्रमुख प्रावधान।
  2. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 16 किससे संबंधित है?
  3. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 बनाम आरक्षण।

मेंस लिंक:

75% निजी नौकरियों को आरक्षित करने संबंधी झारखंड सरकार के निर्णय से जुड़े मुद्दों पर चर्चा

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट 2020′


(World Air Quality Report)

संदर्भ:

‘विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट 2020’ शीर्षक से जारी यह रिपोर्ट एक स्विस संगठन आइ क्यू एयर (IQAir) द्वारा तैयार की गई है।

वैश्विक शहरों की रैंकिंग रिपोर्ट 106 देशों के PM2.5 डेटा पर आधारित है, जिसे जमीन पर स्थित निगरानी स्टेशनों द्वारा मापा जाता है, जिनमें से अधिकांश निगरानी स्टेशन, सरकारी एजेंसियों द्वारा संचालित होते हैं।

भारतीय शहरों में वायु प्रदूषण:

  1. दिल्ली, विश्व की सर्वाधिक प्रदूषित राजधानी: हालाँकि दिल्ली की वायु गुणवत्ता में वर्ष 2019 से 2020 तक लगभग 15 प्रतिशत का सुधार हुआ है। सुधार के बावजूद दिल्ली दुनिया के 10 वें सबसे प्रदूषित शहर और शीर्ष प्रदूषित राजधानी के रूप में शीर्ष स्थान पर है।
  2. भारत, दुनिया भर के शीर्ष 30 सबसे प्रदूषित शहरों में से 22 शहरों के साथ, सबसे प्रदूषित शहरों की रैंकिंग में सबसे ऊपर है।
  3. रिपोर्ट के अनुसार, चीन के झिंजियांग शहर के बाद गाजियाबाद दुनिया का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर है।
  4. शीर्ष 10 प्रदूषित शहरों की सूची में आठ भारतीय शहर हैं – बुलंदशहर, बिसरख जलालपुर, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, कानपुर, लखनऊ (सभी उत्तरप्रदेश में), राजस्थान का भिवाड़ी तथा दिल्ली।
  5. भारत में वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में परिवहन, खाना पकाने के लिए जैव ईंधन जलाना, बिजली उत्पादन, उद्योग, निर्माण, अपशिष्ट दहन और समय-समय पर कृषि-अपशिष्टो का दहन आदि शामिल हैं।

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वैश्विक परिदृश्य:

  • भारत, वर्ष 2019 के उलट, वर्ष 2020 में विश्व का तीसरा सर्वाधिक प्रदूषित देश है। वर्ष 2019 के दौरान भारत की वायु गुणवत्ता, विषक्ता में सर्वाधिक पांचवे स्थान पर थी।
  • वर्ष 2020 में बांग्लादेश और पाकिस्तान में 5 का औसत भारत की तुलना में खराब था।
  • इस नवीनतम रिपोर्ट में चीन को 11 वें स्थान पर रखा गया है।
  • निगरानी किये जाने वाले 106 देशों में से केवल 24 देशों द्वारा 5 पर विश्व स्वास्थ्य संगठन के वार्षिक दिशानिर्देशों को पूरा किया गया।

आगे की राह:

यद्यपि दिल्ली सहित कई शहरों में लॉकडाउन की वजह से वायु गुणवत्ता में मामूली सुधार हुआ है, फिर भी वायु प्रदूषण का स्वास्थ्य एवं अर्थव्यवस्था पर हानिकारक प्रभाव खतरनाक स्थिति में है।

  • इसलिए, सरकारों तथा शहरों के लिए, संवहनीय एवं स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को प्राथमिकता देना, पैदल चलने, साइकिल चलाने और सुलभ सार्वजनिक परिवहन को प्रोत्साहित करने जैसे कम लागत, सक्रिय और कार्बन-तटस्थ परिवहन विकल्पों को प्रोत्साहित करने पर जोर देना उपयुक्त होगा।
  • स्वच्छ ऊर्जा और स्वच्छ परिवहन के लिए परिवर्तन को तीव्र करने से न केवल जिंदगानियों को बचाया जा सकता है, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी व्यय में भी नाटकीय रूप से कमी आती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. रिपोर्ट के बारे में- जारीकर्ता, रैंकिंग मापदंड।
  2. भारत और उसके शहरों का प्रदर्शन।
  3. विश्व भर के देशों का प्रदर्शन।
  4. भारत का सापेक्षिक प्रदर्शन।

मेंस लिंक:

विभिन्न स्तरों पर प्रयासों के बावजूद, दिल्ली को दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी के रूप में स्थान दिया गया है? टिप्पणी कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

‘विकास वित्त संस्थान’ की स्थापना हेतु विधेयक को मंजूरी


संदर्भ:

हाल ही में, केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा ‘विकास वित्त संस्थान’ (Development Finance InstitutionDFI) अर्थात ‘नेशनल बैंक फॉर फाइनेंसिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट’ (NaBFID) की स्थापना के लिए एक विधेयक को मंजूरी दे दी गई है।

पृष्ठभूमि:

सरकार द्वारा पिछले बजट में बुनियादी ढाँचे को बढ़ावा देने हेतु ‘विकास वित्त संस्थान’ (DFI) की स्थापना करने का प्रस्ताव दिया गया था।

प्रमुख तथ्य:

  • ‘नेशनल बैंक फॉर फाइनेंसिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट’ (NaBFID) की स्थापना 20,000 करोड़ रुपए की राशि से की जाएगी तथा इसके लिए सरकार की ओर से 5,000 करोड़ रुपए का प्रारंभिक अनुदान दिया जाएगा।
  • प्रारंभ में, इस पर पूरी तरह से सरकार का स्वामित्व होगा लेकिन बाद में सरकारी हिस्सेदारी एक चौथाई तक कम की जाएगी।
  • शुरुआती 10 वर्षों के लिए, इसे कुछ कर संबंधी लाभ भी प्रदान किये जाएंगे और इस संबंध में भारतीय स्टाम्प अधिनियम में कुछ संशोधन किए जाएंगे।
  • NaBFID में एक पेशेवर बोर्ड होगा और इसमें न्यूनतम 50% सदस्य गैर-आधिकारिक निदेशक होंगे।
  • किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति को इसका अध्यक्ष नियुक्त किया जाएगा।

आवश्यकता:

  • महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन के वित्तपोषण के लिए आवश्यक 111 लाख करोड़ रुपए की राशि जुटाने हेतु।
  • परियोजनाओं की क्रेडिट रेटिंग बढ़ाने हेतु।
  • DFI द्वारा उन परियोजनाओं के लिए राशि उपलब्ध कराई जाएगी, जिनमे जोखिम होने के कारण अन्य संस्थान निवेश करने को तैयार नहीं होते हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. NaBFID के बारे में।
  2. NIP क्या है? इसे कब लॉन्च किया गया था?
  3. NIP के तहत शामिल परियोजनाएं
  4. NIP पर अतनु चक्रवर्ती की अध्यक्षता में कार्य बल द्वारा की गई प्रमुख सिफारिशें
  5. कार्य बल द्वारा की गई सिफारिशों के अनुसार प्रस्तावित तीन समितियां
  6. भारत निवेश ग्रिड क्या है?

मेंस लिंक:

राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP) के महत्व और विशेषताओं पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


विश्व का सबसे ऊंचा रेलवे पुल

  • इसका निर्माण जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर किया जा रहा है।
  • 1,250-करोड़ रुपए की लागत वाला यह पुल चिनाब नदी के तल से 359 मीटर की ऊंचाई पर स्थित होगा।
  • इस पुल से गुजरने वाली रेलवे लाइन की उंचाई एफिल टॉवर से 35 मीटर अधिक होने की उम्मीद है।
  • पूरा होने के पश्चात्, यह पुल चीन में बीपन नदी (Beipan river) पर निर्मित शुआईबाई (Shuibai) रेलवे पुल (275 मीटर) के रिकॉर्ड को पार कर जाएगा।

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यूरोपीय संघ क्षेत्र, ‘LGBTIQ फ्रीडम ज़ोन’ घोषित

  • हाल ही में, यूरोपीय संसद द्वारा प्रतीकात्मक रूप से पूरे 27 सदस्यीय समूह ‘LGBTIQ फ्रीडम ज़ोन’ घोषित कर दिया गया है।
  • यूरोपीय संघ के अधिकांश देशों (23/27) में सम-लैंगिक विवाह को मान्यता प्राप्त हैं, इसने से 16 देशों द्वारा सम-लैंगिक विवाह के लिए कानून भी बनाए जा चुके हैं।
  • यूरोपीय संघ द्वारा पारित संकल्प के अनुसार, LGBTIQ लोगों को यूरोपीय संघ में किसी भी स्थान पर निवास करने, सार्वजनिक रूप से असहिष्णुता, भेदभाव या उत्पीड़न के डर के बिना अपने लैंगिक-रुझान और लैंगिक पहचान को प्रकट करने की स्वतंत्रता दी गयी है।

अंतर्राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (IRENA)

वर्ल्ड एनर्जी ट्रांजिशन आउटलुक (World Energy Transitions Outlook) रिपोर्ट, अंतर्राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (International Renewable Energy Agency- IRENA) द्वारा जारी की जाती है।

नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, कोविड-19 आपदा ने सभी देशों के लिए अपनी अर्थव्यवस्थाओं में जीवाश्म ईंधन को नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में परिवर्तित करने में तेजी लाने का एक अप्रत्याशित अवसर प्रदान किया है।

IRENA के बारे में:

  1. यह एक अंतर-सरकारी संगठन है, और यह परस्पर सहयोग तथा जानकारी बढ़ाने, नवीकरणीय ऊर्जा के संवहनीय उपयोग और इसे अपनाने हेतु प्रोत्साहन प्रदान करने का कार्य करता है।
  2. यह विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा पर केंद्रित पहला अंतरराष्ट्रीय संगठन है, तथा औद्योगिक और विकासशील देशों, दोनों में जरूरतों का समाधान करता है।
  3. इसकी स्थापना 2009 में हुई और इसका क़ानून 8 जुलाई 2010 को लागू हुआ था।
  4. इसका मुख्यालय मसदर सिटी, अबू धाबी में है।
  5. IRENA को संयुक्त राष्ट्र में पर्यवेक्षक का दर्जा प्राप्त है।

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