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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 16 March 2021

 

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

1. निर्वाचन आयोग द्वारा राजनीतिक दलों के प्रतीक चिह्नों पर निर्णय

2. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (संशोधन) विधेयक, 2021

3. NOTA (उपरोक्त में से कोई नहीं)

4. राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR)

 

सामान्य अध्ययन-III

1. राष्ट्रीय चक्रवात जोखिम शमन परियोजना (NCRMP)

 

सामान्य अध्ययन-IV

1. टीकाकरण प्राथमिकता समूह में न्यायाधीशों, वकीलों को शामिल करने का विरोध

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. अदानी पोर्ट्स द्वारा श्रीलंका में कंटेनर टर्मिनल का विकास

2. ग्रेट इंडियन बस्टर्ड्स

3. हथियारों के आयात और निर्यात पर SIPRI की रिपोर्ट

4. बारालाचा ला दर्रा

5. राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता और प्रबंधन विधेयक, 2019

6. RE-HAB परियोजना (हाथी-मानव संघर्ष कम करने हेतु मधुमक्खियों का उपयोग)

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थान।

निर्वाचन आयोग द्वारा राजनीतिक दलों के प्रतीक चिह्नों पर निर्णय


संदर्भ:

उच्चतम न्यायालय द्वारा, निर्वाचन आयोग द्वारा जोस के मणि गुट को आधिकारिक केरल कांग्रेस (मणि) के तौर पर मान्यता देने और उसे पार्टी का चुनाव चिन्ह (दो पत्तियां) आवंटित करने संबंधी निर्णय पर केरल उच्च न्यायालय के पुष्टिकरण को बरकरार रखा है।

पृष्ठभूमि:

केरल उच्च न्यायालय द्वारा नवंबर 2020 में, निर्वाचन आयोग द्वारा जोस के मणि गुट को आधिकारिक केरल कांग्रेस (एम) के तौर पर मान्यता देने और उसे पार्टी का चुनाव चिन्ह (दो पत्तियां) आवंटित करने संबंधी निर्णय को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया गया था।

न्यायाधीश ने कहा है कि, अदालत, भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत प्रदत्त अधिकार का प्रयोग करने संबंधी आयोग के निर्णय में हस्तक्षेप नहीं कर सकती है।

राजनीतिक दलों को प्रतीक चिन्हों का आवंटन

निर्वाचन आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार- किसी राजनीतिक दल को चुनाव चिह्न का आवंटन करने हेतु निम्नलिखित प्रक्रिया अपनाई जाती है:

  • नामांकन पत्र दाखिल करने के समय राजनीतिक दल / उम्मीदवार को निर्वाचन आयोग की प्रतीक चिह्नों की सूची में से तीन प्रतीक चिह्न प्रदान किये जाते हैं।
  • उनमें से, राजनीतिक दल / उम्मीदवार को ‘पहले आओ-पहले पाओ’ आधार पर एक चुनाव चिह्न आवंटित किया जाता है।
  • किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के विभाजित होने पर, पार्टी को आवंटित प्रतीक/चुनाव चिह्न पर निर्वाचन आयोग द्वारा निर्णय लिया जाता है।

निर्वाचन आयोग की शक्तियाँ:

चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग को राजनीतिक दलों को मान्यता प्रदान करने और प्रतीक चिह्न आवंटित करने का अधिकार दिया गया है।

  • आदेश के अनुच्छेद 15 के तहत, निर्वाचन आयोग, प्रतिद्वंद्वी समूहों अथवा किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के गुटों द्वारा पार्टी के नाम तथा प्रतीक चिह्न संबंधी दावों के मामलों पर निर्णय ले सकता है।
  • निर्वाचन आयोग, राजनीतिक दलों के किसी विवाद अथवा विलय पर निर्णय लेने हेतु एकमात्र प्राधिकरण भी है। सर्वोच्च न्यायालय ने सादिक अली तथा अन्य बनाम भारत निर्वाचन आयोग (ECI) मामले (1971) में इसकी वैधता को बरकरार रखा।

चुनाव चिह्नों के प्रकार

चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) (संशोधन) आदेश, 2017 के अनुसार, राजनीतिक दलों के प्रतीक चिह्न निम्नलिखित दो प्रकार के होते हैं:

  1. आरक्षित (Reserved): देश भर में आठ राष्ट्रीय दलों और 64 राज्य दलों को ‘आरक्षित’ प्रतीक चिह्न प्रदान किये गए हैं।
  2. स्वतंत्र (Free): निर्वाचन आयोग के पास लगभग 200 ‘स्वतंत्र’ प्रतीक चिह्नों का एक कोष होता है, जिन्हें चुनावों से पहले अचानक नजर आने वाले हजारों गैर-मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय दलों को आवंटित किया जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. राजनीतिक दलों को मान्यता प्रदान करने हेतु प्रक्रिया।
  2. राज्य दल और राष्ट्रीय दल क्या हैं?
  3. मान्यता प्राप्त दलों को प्राप्त लाभ।
  4. पार्टी प्रतीक चिह्न किसे कहते हैं? प्रकार क्या हैं?
  5. राजनीतिक दलों के विलय से जुड़े मुद्दों पर निर्णय कौन करता है?

मेंस लिंक:

राजनीतिक दलों को प्रतीक चिन्हों का आवंटन किस प्रकार किया जाता हैं? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

  

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (संशोधन) विधेयक, 2021


(National Capital Territory of Delhi (Amendment) Bill)

संदर्भ:

हाल ही में, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (संशोधन) विधेयक, 2021 लोकसभा में पेश किया गया।

विधेयक के प्रमुख बिंदु:

  1. विधेयक में वर्ष 1991 के अधिनियम की धारा 21, 24, 33 और 44 में संशोधन का प्रस्ताव किया गया है।
  2. इस विधेयक के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में सरकार का तात्पर्य ‘उपराज्यपाल’ होगा।
  3. विधेयक में, जिन मामलों पर दिल्ली विधानसभा को कानून बनाने की शक्ति प्राप्त है, उन मामलों में ‘उपराज्यपाल’ को विवेकाधीन शक्तियाँ प्रदान की गयी हैं
  4. इसके तहत, मंत्रिपरिषद (या दिल्ली मंत्रिमंडल) द्वारा लिए गए किसी निर्णय को लागू करने से पहले ‘उपराज्यपाल’ को अनिवार्य रूप से ‘अपनी राय प्रदान करने के लिए’ अवसर देना सुनिश्चित किया गया है।
  5. सरकार द्वारा अथवा किसी भी मंत्री द्वारा लिए गए निर्णयों के आधार पर सरकार द्वारा किसी कार्यकारी कार्यवाही करने से पहले ‘उपराज्यपाल’ की अनुमति लेनी आवश्यक होगी।
  6. विधेयक में, दैनिक प्रशासन से संबंधित मामलों के संदर्भ में विधानसभा अथवा इसकी किसी समिति को नियम बनाने अथवा प्रशासनिक निर्णयों के संबंध में पूछताछ करने हेतु प्रतिबंधित किया गया है।

दिल्ली की वर्तमान प्रशासन पद्धति

वर्ष 1991 में संविधान (उनहत्तरवां संशोधन) अधिनियम, 1991 के द्वारा संविधान में अनुच्छेद 239AA को जोड़ा गया था, इसके तहत एक विधानसभा सहित केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली का गठन किया गया था।

मौजूदा अधिनियम के अनुसार, दिल्ली विधान सभा को लोक व्यवस्था, पुलिस और भूमि को छोड़कर सभी मामलों में कानून बनाने की शक्ति प्राप्त है।

वर्तमान विवाद:

  • इस विधेयक ने निर्वाचित सरकार और उपराज्यपाल (L-G) के मध्य शक्तियों के वितरण संबंधी विवाद को पुनर्जीवित कर दिया है।
  • उच्चतम न्यायलय भी इस मामले में हस्तक्षेप कर चुका है, और वर्ष 2018 में शीर्ष अदालत द्वारा एक फैसला सुनाया गया था।

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय:

  • पुलिस, सार्वजनिक व्यवस्था और भूमि के अलावा अन्य मुद्दों पर उपराज्यपाल की सहमति आवश्यक नहीं है।
  • हालांकि, मंत्रिपरिषद द्वारा लिए गए निर्णयों के बारे में उपराज्यपाल सूचित करना आवश्यक होगा।
  • उपराज्यपाल, मंत्रिपरिषद की ‘सहायता और सलाह’ के लिए बाध्य है।
  • दिल्ली के उपराज्यपाल का दर्जा, किसी पूर्ण राज्य के राज्यपाल के समान नहीं है, बल्कि वह एक सीमित अर्थ में प्रशासक है, जो उपराज्यपाल के पदनाम से कार्य करता है।

चिंताएं:

इस संशोधन के माध्यम से, निर्वाचित सरकार के लिए अपनी सभी फाइलों पर उपराज्यपाल (एल-जी) के कार्यालय की अनुमति प्राप्त करने को अनिवार्य करना, मुख्यतः सरकार की स्वायत्तता तथा दिल्ली के पूर्ण राज्य के स्वप्न को भी को समाप्त करेगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अनुच्छेद 239A बनाम 239AA
  2. दिल्ली सरकार बनाम उपराज्यपाल की शक्तियाँ
  3. दिल्ली का प्रशासन, विधायिका वाले अन्य राज्यों के प्रशासन से किस प्रकार भिन्न है?
  4. दिल्ली को विधायिका कब प्रदान की गयी?
  5. दिल्ली उपराज्यपाल की नियुक्ति किस प्रकार की जाती है?

मेंस लिंक:

संविधान (उनहत्तरवां संशोधन) अधिनियम, 1991 पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की मुख्य विशेषताएँ।

NOTA (उपरोक्त में से कोई नहीं)


संदर्भ:

हाल ही में, उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार तथा भारत के निर्वाचन आयोग से अदालत में दायर एक याचिका पर प्रत्युत्तर देने को कहा है। याचिका में, नोटा (उपरोक्त में से कोई भी नहीं) / NOTA  (None of the above) के पक्ष में सर्वाधिक मतदान होने वाले निर्वाचन क्षेत्रों में फिर से चुनाव कराए जाने की मांग की गयी है।

याचिकाकर्ता की मांगें:

  • मतदाताओं द्वारा ‘अस्वीकृत’ किए गए उम्मीदवारों को फिर से नए चुनाव में नहीं उतारा जाना चाहिए।
  • मतदाताओं के लिए ‘अस्वीकार करने का अधिकार’ का प्रदान किया जाना चाहिए। यह प्रावधान मतदाताओं को उम्मीदवारों को चुनने के लिए बेहतर विकल्प प्रदान करेगा।

चुनौतियाँ:

  • यदि मतदाता, उम्मीदवारों को खारिज करते रहे, तो संसद / विधानसभा की सीटें खाली रह जाएंगी, जिससे विधायी कामकाज प्रभावित होगा।
  • राजनीतिक दल भी मतदाताओं के लिए किसी विशेष निर्वाचन क्षेत्र में मतदान न करने के लिए प्रभावित कर सकते हैं।

चुनाव में NOTA का उपयोग

उच्चतम न्यायालय द्वारा वर्ष 2013 में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए NOTA का विकल्प निर्धारित किया गया था। इस प्रकार, भारत नकारात्मक मतदान करने वाला 14 वाँ देश बन गया।

NOTA का चुनावी महत्व

  • चुनावी उम्मीदवारों के प्रति असंतुष्ट होने पर, NOTA आम लोगों को अपनी नापसंदगी व्यक्त करने का अवसर देता है।
  • यह, अधिक लोगों द्वारा अधिक मतदान करने की संभावना को बढ़ाता है, भले ही वे किसी भी उम्मीदवार का समर्थन न करते हों, और इससे फर्जी वोटों की संख्या में भी कमी होती है।
  • इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि नकारात्मक मतदान “चुनावों में एक संस्थागत बदलाव ला सकता है और इससे राजनीतिक दलों को स्वच्छ छवि वाले उम्मीदवारों को पेश करने के लिए विवश होना पड़ेगा”।

राज्य सभा में NOTA:

  • उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 2018 में कहा था, कि NOTA का विकल्प केवल सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार तथा प्रत्यक्ष चुनावों के लिए उपलब्ध है, न कि एकल हस्तांतरणीय मत द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के लिए। अतः राज्यसभा निर्वाचन हेतु NOTA का विकल्प नहीं है।
  • अदालत के अनुसार, राज्यसभा निर्वाचन में NOTA लागू करना संविधान के अनुच्छेद 80 (4) और भारत के PUCL बनाम भारत संघ (2013) मामले में दिए गए सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के विपरीत है।
  • क्योंकि NOTA अप्रत्यक्ष चुनावों में ‘निष्पक्षता’ के उद्देश्य को असफल कर देता है, तथा यह, इस प्रकार के चुनावों में निर्वाचक की भूमिका को नजरअंदाज कर देता है और दलबदल और भ्रष्टाचार जैसी कुप्रथाओं को प्रोत्साहित करता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. NOTA क्या है?
  2. NOTA मतदान प्रक्रिया
  3. यह पहली बार कब इस्तेमाल किया गया था?

मेंस लिंक:

NOTA, अस्वीकार करने का अधिकार और नए उम्मीदवार का चुनाव, मतदाताओं को अपना असंतोष व्यक्त करने की शक्ति देगा। चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर


(National Population Register)

संदर्भ:

केंद्र सरकार, जनगणना अधिकारियों द्वारा दरवाजे- दरवाजे जाकर गणना शुरू करने से एक महीना पहले, निवासियों के लिए स्वतः ही, ऑनलाइन माध्यम से, राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (National Population Register- NPR) फॉर्म भरने की अनुमति देने संबंधी योजना बनाई जा रही है।

योजना:

  • राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर फॉर्म को ऑनलाइन भरने के बाद, निवासियों के लिए एक संदर्भ कोड प्राप्त होगा, जिसे वे, जनगणना करने हेतु आने वाले कार्मिक को बता सकते हैं।
  • प्रत्यर्थी (Respondent) का विवरण, जनगणना करने हेतु विकसित की गयी मोबाइल एप्लिकेशन प्रदर्शित होगा, हालाँकि, कोई ‘बायोमेट्रिक्स अथवा दस्तावेज़’ एकत्र नहीं किए जाएंगे। इन विवरणों को तब सिस्टम में संग्रहीत किया जाएगा।

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR)

यह ‘देश के सामान्य निवासियों’ की एक सूची होती है।

  • राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (National Population Register- NPR) को नागरिकता कानून, 1955 और नागरिकता (नागरिकों का पंजीकरण और राष्‍ट्रीय पहचान-पत्र जारी करना) नियम, 2003 के प्रावधानों के अनुसार स्थानीय, उप-ज़िला, ज़िला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जाता है।
  • राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) में पंजीकरण कराना भारत के प्रत्येक ‘सामान्य निवासी’ के लिये अनिवार्य है।

उद्देश्य: देश के प्रत्येक आम नागरिक की विस्तृत पहचान का डेटाबेस तैयार करना।

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर को पहली बार वर्ष 2010 में तैयार किया गया और फिर 2015 में इसे अद्यतन किया गया था।

सामान्य निवासी’ कौन है?

गृह मंत्रालय के अनुसार, ‘देश का सामान्य निवासी’ को निम्नलिखित रूप से परिभाषित किया गया है- वह व्यक्ति, जो कम-से-कम पिछले छह महीनों से किसी स्थानीय क्षेत्र में रहता है अथवा अगले छह महीने या उससे अधिक समय तक के लिये किसी विशेष स्थान पर रहने का इरादा रखता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. नागरिकता से संबंधित संवैधानिक प्रावधान
  2. NPR डेटा के घटक।
  3. सामान्य निवासी कौन है?
  4. NPR कौन तैयार करता है?
  5. कोई व्यक्ति भारतीय नागरिकता कैसे प्राप्त कर सकता है?
  6. क्या एक भारतीय नागरिक दोहरी नागरिकता रख सकता है?
  7. महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त, भारत के बारे में।

मेंस लिंक:

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) के तहत डेटा संग्रह के लिए राज्यों द्वारा विरोध क्यों किया जा रहा है। चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: आपदा और आपदा प्रबंधन।

राष्ट्रीय चक्रवात जोखिम शमन परियोजना (NCRMP)


(National Cyclone Risk Mitigation Project)

संदर्भ:

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) द्वारा देश में चक्रवात जोखिमों से निपटने हेतु राष्ट्रीय चक्रवात जोखिम शमन परियोजना (National Cyclone Risk Mitigation Project) नामक एक परियोजना शुरू की गई है।

परियोजना का उद्देश्य भारत के तटीय राज्यों और संघ शासित प्रदेशों में चक्रवातों के प्रभाव को कम करने हेतु उपयुक्त संरचनात्मक और गैर-संरचनात्मक उपाय करना है।

परियोजना के बारे में:

  • इस परियोजना को, संबंधित राज्य सरकारों तथा ‘राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान’ (NIDM) के समन्वय से गृह मंत्रालय के तत्वावधान में ‘राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण’ (NDMA) द्वारा लागू किया जाएगा।
  • परियोजना के तहत संवेदनशीलता के विभिन्न स्तरों सहित 13 चक्रवात प्रवण राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (संघ शासित प्रदेशों) की पहचान की गयी है।
  • इसके लिए विश्व बैंक द्वारा सहायता प्रदान की जा रही है।

चक्रवातीय घटनाओं की आवृत्ति, जनसंख्या आकार और आपदा प्रबंधन के लिए मौजूदा संस्थागत तंत्र के आधार पर इन राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों को दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है।

  1. श्रेणी I: उच्च भेद्यता वाले राज्य अर्थात आंध्र प्रदेश, गुजरात, ओडिशा, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल।
  2. श्रेणी II: निम्न भेद्यता वाले राज्य यानी महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, गोवा, पांडिचेरी, लक्षद्वीप, दमन और दीव, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह।

परियोजना के घटक:

  • बेहतर पूर्व चेतावनी प्रसारण पद्धति
  • आपदाओं का सामना करने हेतु स्थानीय समुदायों की क्षमता वृद्धि
  • आपातकालीन शरणस्थल, प्रभावित स्थान से निकासी, और उच्च क्षेत्रों में तूफानी हवाओं, बाढ़ और चक्रवातों से बचाव के लिए बेहतर पहुँच।
  • समग्र विकास एजेंडे में जोखिम शमन उपायों को मुख्य रूप शामिल करने हेतु केंद्रीय, राज्य और स्थानीय स्तरों पर DRM क्षमता को मजबूत करना।

स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययन- IV


 

विषय: लोक प्रशासन में लोक/सिविल सेवा मूल्य तथा नीतिशास्त्रः स्थिति तथा समस्याएँ; सरकारी तथा निजी संस्थानों में नैतिक चिंताएँ तथा दुविधाएँ

टीकाकरण प्राथमिकता समूह में न्यायाधीशों, वकीलों को शामिल करने का विरोध


  • न्यायाधीशों, न्यायिक कर्मचारियों और वकीलों को ‘कोविड-19 टीकाकरण’ के लिए ‘प्राथमिकता’ श्रेणी में शामिल करने का अनुरोध करते हुए उच्चतम न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई थी।
  • केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को अपने जबाव में कहा है, कि पेशे के आधार पर कोविड-19 टीकाकरण के लिए प्राथमिकता देना “भेदभाव” होगा और यह व्यापक राष्ट्रीय हितों के खिलाफ है।
  • सरकार ने कहा है, व्यापार, पेशे अथवा किसी अन्य प्रकृति के आधार पर किया जाने वाला किसी भी प्रकार का विशिष्ट वर्गीकरण, न तो संभव है और न ही उचित है।

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


अदानी पोर्ट्स द्वारा श्रीलंका में कंटेनर टर्मिनल का विकास

  • अदानी समूह की एक फर्म ‘अदानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड’ (APSEZ) के लिए कोलंबो में वेस्ट कंटेनर टर्मिनल (WCT) को विकसित करने और संचालित करने हेतु श्रीलंका सरकार द्वारा आशय पत्र (letter of intent- LOI) दिया गया है।
  • ‘वेस्ट कंटेनर टर्मिनल’ को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के रूप में 35 वर्षों की अवधि के लिए निर्माण, परिचालन एवं हस्तांतरण (Build, Operate and Transfer) के आधार पर विकसित किया जाएगा।
  • WCT में जहाजी घाट की लंबाई 1,400 मीटर तथा गहराई 20 मीटर होगी, इससे यह अल्ट्रा लार्ज कंटेनर ढोने वाले जहाजों को संभालने हेतु एक प्रमुख पोतांतरण कार्गो गंतव्य स्थल बन जाएगा।

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड्स

संदर्भ: सर्वोच्च न्यायालय ने प्राथमिकता के आधार पर, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड पक्षियों को बचाने के लिए राजस्थान और गुजरात में इन पक्षियों के प्राकृतिक आवासों से होकर गुजरने वाली ओवरहेड पावर केबल को, भूमिगत केबल के साथ प्रतिस्थापित करने की आवश्यकता पर जांच करने का निर्णय लिया है।

संबंधित प्रकरण: ग्रेट इंडियन बस्टर्ड पक्षी, अपने घटते हुए प्राकृतिक आवासों से गुजरने वाली झूलती  हुई बिजली लाइनों से टकराकर मर रहे हैं।

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड्स (GIB):

IUCN स्थिति: गंभीर रूप से संकटग्रस्त।

भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची 1 और CMS कन्वेंशन तथा CITES की  परिशिष्ट I में सूचीबद्ध।

पर्यावरण और वन मंत्रालय के वन्यजीव आवास के एकीकृत विकास कार्यक्रम के तहत पुन:प्राप्ति कार्यक्रम के लिए चिह्नित।

प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड – राजस्थान- मौजूदा संरक्षित क्षेत्रों में बस्टर्ड प्रजनन स्थलों की पहचान करना और बाड़ लगाना और साथ ही संरक्षित क्षेत्रों के बाहर के क्षेत्रों में सुरक्षित प्रजनन बाड़ा प्रदान करना।

संरक्षित क्षेत्र: मरुस्थल राष्ट्रीय उद्यान अभयारण्य – राजस्थान, रोलपाडु वन्यजीव अभयारण्य – आंध्र प्रदेश और करेरा वन्यजीव अभयारण्य- मध्य प्रदेश।

भारत में वास-स्थल:

राजस्थान में केवल दो जिले – जैसलमेर और बाड़मेर के वन्य क्षेत्रों में प्रजनन करने वाली ग्रेट इंडियन बस्टर्ड्स की आबादी पायी जाती है। यह पक्षी मामूली संख्या में गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में भी पाया जाते हैं।

हथियारों के आयात और निर्यात पर SIPRI की रिपोर्ट

यह रिपोर्ट स्वीडिश थिंक टैंक ‘स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट’ (SIPRI) द्वारा जारी की गई है।

प्रमुख निष्कर्ष:

  • भारत, सऊदी अरब के बाद दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक देश बना हुआ है।
  • वर्ष 2011–15 में, अमेरिका, भारत को हथियार आपूर्ति करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश था, लेकिन 2016–20 में अमेरिका से भारत का हथियारों का आयात पिछले पांच साल की अवधि की तुलना में 46% कम हुआ। जिसके परिणामस्वरूप 2016–20 में अमेरिका, भारत के लिए चौथा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया। इस अवधि में रूस हथियारों का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता देश था।
  • वर्ष 2016-20 में फ्रांस और इज़राइल क्रमशः दूसरे और तीसरे सबसे बड़े हथियार आपूर्तिकर्ता देश थे।

बारालाचा ला दर्रा

  • सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा पहली बार, लद्दाख में लेह से संपर्क बहाल करने के लिए पूर्व-निर्धारित समय से काफी पहले हिमाचल प्रदेश में अवस्थित महत्वपूर्ण बारालाचा ला दर्रे को फिर से खोलने पर काम शुरू कर दिया गया है।
  • बारालाचा दर्रा, ज़ांस्कर श्रेणी में अवस्थित एक उच्च पर्वतीय दर्रा है।
  • यह, हिमाचल प्रदेश के लाहौल जिले को लद्दाख के लेह जिले से जोड़ता है, तथा लेह-मनाली राजमार्ग पर स्थित है।
  • यह दर्रा, भागा नदी और युनाम नदी के मध्य जल-विभाजक के रूप में भी कार्य करता है।

राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता और प्रबंधन विधेयक, 2019

राज्यसभा ने राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता और प्रबंधन विधेयक (National Institutes of Food Technology Entrepreneurship and Management Bill), 2019 पारित कर दिया है। इस विधेयक में हरियाणा के कुंडली और तमिलनाडु के तंजावुर में दो खाद्य प्रौद्योगिकी संस्थानों को राष्ट्रीय महत्व का दर्जा दिया गया है।

  • विधेयक में इन संस्थानों को, खाद्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में, अनुसंधान और ज्ञान प्रसार के संदर्भ में स्वायतता प्रदान करता है।
  • विधेयक में बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का भी प्रावधान किया गया है, जो संस्थानों के प्रमुख कार्यकारी निकाय के रूप में तथा कार्यक्रमों के समन्वय और प्रदर्शन में सुधार हेतु विमर्श की सुविधा के लिए एक परिषद के रूप में कार्य करेगा।

RE-HAB परियोजना (हाथी-मानव संघर्ष कम करने हेतु मधुमक्खियों का उपयोग)

RE-HAB (Reducing Elephant-Human Attacks using Bees) अर्थात ‘हाथी-मानव संघर्ष कम करने हेतु मधुमक्खियों का उपयोग’ परियोजना, खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) की एक पहल है।

  • यह KVIC के ‘राष्ट्रीय शहद मिशन’ के अंतर्गत एक उप-मिशन है।
  • इसका उद्देश्य, मानव बस्तियों में हाथी के हमलों को विफल करने हेतु मधुमक्खियों का उपयोग करके “मधुमक्खी बाड़” का निर्माण करना है।
  • यह पायलट प्रोजेक्ट को कर्नाटक के कोडागु में शुरू किया गया है।
  • इसके तहत, ऐसा माना जाता है, कि हाथी कहीं भी मधुमक्खियों के करीब नहीं जाएंगे, इसलिए जंगल और गाँवों की सीमा पर मधुमक्खी के बक्से लगाए जाएंगे, और इस तरह से मानव वस्तियों में अतिक्रमण करने से बचेंगे। हाथी, मधुमक्खियों से डरते हैं, यह एक स्थापित तथ्य है।


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