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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 15 March 2021

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

1. इंजीनियरिंग में प्रवेश हेतु गणित, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान की अनिवार्यता नहीं: एआईसीटीई

2. सूचकांक निगरानी प्रकोष्ठ

3. क्वाड समूह के नेताओं का ‘खुले एवं मुक्त’ इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए समर्थन

 

सामान्य अध्ययन-III

1. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग

2. पौराणिक सरस्वती नदी के अध्ययन हेतु समिति

3. ‘पेयजल गुणवत्ता जांच, निगरानी और निरीक्षण’ तंत्र

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. भारत के विदेशी मुद्रा भंडार की विश्व में स्थिति

2. अय्या वैकुंडा स्वामीकल

3. आत्मानिर्भर निवेशक मित्र

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

इंजीनियरिंग में प्रवेश हेतु गणित, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान की अनिवार्यता नहीं: एआईसीटीई


संदर्भ:

तकनीकी शिक्षा नियामक, ‘अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद’ (All India Council for Technical Education-AICTE) द्वारा स्नातक स्तर पर जैव प्रौद्योगिकी, कपड़ा या कृषि इंजीनियरिंग जैसे तकनीकी पाठ्यक्रमों में अध्ययन करने के इच्छुक छात्रों के लिए भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित (PCM) को वैकल्पिक बना दिया गया है। हालाँकि, कंप्यूटर विज्ञान जैसे अधिकांश इंजीनियरिंग विषयों में प्रवेश लेने के लिए PCM विषय अनिवार्य रहेगे।

ये संशोधित विनियमन, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) की परिकल्पना के अनुरूप है, जिसमे विषयों के चुनाव में लचीलेपन को प्रोत्साहित किया गया है।

नवीनतम दिशानिर्देशों के अनुसार:

  • छात्रों को प्रवेश हेतु अर्हता प्राप्त करने के लिए 14 विषयों की सूची में से किन्ही भी तीन विषयों में 45% अंक प्राप्त करने आवश्यक होंगे।
  • कार्यक्रमों के तहत वांछित शिक्षा परिणाम हासिल करने के लिए विश्वविद्यालयों द्वारा, विविध पृष्ठभूमियों से आने वाले छात्रों के लिए उपयुक्त ‘ब्रिज कोर्स’ पाठ्यक्रम जैसे गणित, भौतिकी, इंजीनियरिंग ड्राइंग आदि उपलब्ध कराए जाएँगे।

‘नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति’ के बारे में:

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उद्देश्य 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुकूल स्कूल और कॉलेज की शिक्षा को अधिक समग्र, लचीला बनाते हुए भारत को एक ज्ञान आधारित जीवंत समाज तथा ज्ञान की वैश्विक महाशक्ति में बदलना और प्रत्येक छात्र में निहित अद्वितीय क्षमताओं को सामने लाना है।

नई शिक्षा नीति के प्रमुख बिंदु:

  1. केंद्र तथा राज्यों द्वारा शिक्षा पर सार्वजनिक व्यय को GDP के 6% तक बढ़ाया जायेगा।
  2. मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय किया जाएगा।

डिजिटल शिक्षा:

  1. सीखने, मूल्यांकन करने, योजना बनाने, प्रशासन को बढ़ावा देने के लिए, प्रौद्योगिकी का उपयोग करने पर विचारों का मुक्त आदान-प्रदान करने हेतु एक मंच प्रदान करने के लिए एक स्वायत्त निकाय, राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी मंच (National Educational Technology ForumNETF) का निर्माण किया जाएगा।
  2. डिजिटल शिक्षा संसाधनों को विकसित करने हेतु एक प्रौद्योगिकी यूनिट (Technology Unit) का गठन किया जायेगा। यह नयी यूनिट, डिजिटल अवसंरचना, सामग्री तथा क्षमता-निर्माण को समन्वित करेगी।

 अध्यापक शिक्षण:

  1. वर्ष 2030 तक, शिक्षण कार्य करने के लिए न्यूनतम योग्यता 4 वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड डिग्री की जायेगी।
  2. शिक्षा में डिजिटल-विभाजन को पाटने में सहायता करने के लिए शिक्षकों को भारतीय स्थितियों के अनुकूल ऑनलाइन शैक्षणिक विधियों का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

स्कूली शिक्षा:

  1. 3 वर्ष 6 वर्ष की आयु तक प्री-प्राइमरी शिक्षा को वर्ष 2025 तक सार्वभौमिक किया जायेगा।
  2. वर्ष 2030 तक स्कूली शिक्षा में 100 नामाकंन के साथ पूर्व-विद्यालय से माध्यमिक स्तर तक की शिक्षा के सार्वभौमिकरण का लक्ष्य।
  3. स्कूलों में छठे ग्रेड से ही व्यावसायिक शिक्षा शुरू हो जाएगी और इसमें इंटर्नशिप शामिल होगी।
  4. कक्षा 5 तक बच्चे की मातृभाषा को शिक्षा के माध्यम के रूप में उपयोग किया जाएगा।

 नवीन पाठ्यक्रम और शैक्षणिक संरचना:

नई शिस्खा नीति में, मौजूदा 10 + 2 पाठ्यक्रम और शैक्षणिक संरचना को 5 + 3 + 3 + 4 डिज़ाइन में परिवर्तित करने का प्रस्ताव किया गया है, जिसके तहत 3-18 वर्ष आयु वर्ग के सभी छात्रों को शामिल किया जाएगा।

इसके अंर्तगत –

  1. पांच वर्षीय बुनियादी चरण: तीन वर्षीय पूर्व-प्राथमिक स्कूल तथा कक्षा 1 और 2;
  2. तीन वर्षीय प्रारंभिक चरण अथवा उत्तर प्राथमिक चरण अर्थात कक्षा 3, 4 एवं 5;
  3. तीन वर्षीय माध्यमिक (Upper Primary) अथवा उच्च प्राथमिक चरण, अर्थात कक्षा 6, 7 एवं 8;
  4. चार वर्षीय उच्च माध्यमिक (Secondary) चरण, अर्थात कक्षा 9, 10, 11 एवं 12।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. नई शैक्षणिक संरचना के अंतर्गत 5 + 3 + 3 + 4 डिजाइन का अवलोकन।
  2. नई नीति के अनुसार ‘विशेष शैक्षिक क्षेत्र’ क्या हैं?
  3. पॉलिसी के अनुसार ‘लैंगिक समावेशी कोष’ की स्थापना कौन करेगा?
  4. प्रस्तावित अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट की भूमिका।
  5. उच्च शिक्षा में ‘सकल नामांकन अनुपात’ लक्ष्य?
  6. प्रस्तावित ‘राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी मंच’ के बारे में।

मेंस लिंक:

हाल ही में घोषित नई शिक्षा नीति 2020 के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्त्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेंस- अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही और संस्थागत तथा अन्य उपाय।

सूचकांक निगरानी प्रकोष्ठ


(Index Monitoring Cell)

संदर्भ:

हाल ही में, ‘सूचकांक निगरानी प्रकोष्ठ’ / इंडेक्स मॉनिटरिंग सेल (IMC) द्वारा केंद्र सरकार के लिए अपनी रिपोर्ट सौंप दी गई है।

प्रमुख सिफारिशें:

  • मानहानि को गैर-अपराध घोषित किया जाए।
  • किसी मीडिया या प्रकाशन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने से पहले ‘प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया’ की सहमति, पहले से आवश्यक बनाई जानी चाहिए।

‘इंडेक्स मॉनिटरिंग सेल’ के बारे में:

  • वर्ष 2020 में ‘सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा गठित की गई थी।
  • इसका कार्य ‘विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक’ में भारत की रैंकिंग में सुधार करना है तथा मीडिया की स्वतंत्रता को मापने हेतु एक वस्तुनिष्ठ मापदंड विकसित करना है।
  • यह प्रकोष्ठ, राज्यों के लिए, अपने राज्य में प्रेस स्वतंत्रता रैंकिंग जारी करने हेतु एक तंत्र भी तैयार करेगा।

IMC का गठन:

‘सूचकांक निगरानी प्रकोष्ठ’ (IMC) में पत्र सूचना कार्यालय (Press Information Bureau) के महानिदेशक, भारतीय समाचार पत्रों के रजिस्ट्रार कार्यालय, ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन तथा प्रेस सुविधा इकाई के अधिकारियों के अलावा ‘प्रेस कांउसिल ऑफ़ इंडिया’ तथा नीति आयोग के  भारतीय प्रेस परिषद’ सचिव शामिल होंगे।

‘प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक’ के बारे में:

पेरिस स्थित रिपोर्टर्स सेन्स फ्रंटियर्स (RSF), जिसे ‘रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ भी कहा जाता है, एक गैर-लाभकारी संगठन है, जो दुनिया भर में पत्रकारों पर होने वाले हमलों को दर्ज करने का कार्य करता है।

  • इसके द्वारा 22 अप्रैल 2020 को जारी किए गए ‘प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक’ (प्रेस फ्रीडम इंडेक्स) रिपोर्ट में भारत को कुल 180 देशों की सूची में 142 वां स्थान दिया गया था ।
  • सूचकाकं में रैंकिंग हेतु मूल्यांकन किये जाने वाले मापदंडों में, बहुलतावाद (Pluralism), मीडिया स्वतंत्रता, परिवेश तथा स्व- नियंत्रण (self-censorship), कानूनी ढांचा तथा अन्य मानकों के अलावा पारदर्शिता शामिल किए जाते हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘सूचकांक निगरानी प्रकोष्ठ’ (IMC) की स्थापना कब और क्यों की गई थी?
  2. ‘प्रेस फ्रीडम इंडेक्स’ के बारे में
  3. मापदंड
  4. भारत का प्रदर्शन

मेंस लिंक:

वार्षिक ‘प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक’ में भारत की रैंकिंग में सुधार करने हेतु तरीके सुझाइए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

क्वाड समूह के नेताओं का ‘खुले एवं मुक्त’ इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए समर्थन


संदर्भ:

हाल ही में, क्वाड समूह के नेताओं का पहला शिखर सम्मेलन वर्चुअल प्रारूप में आयोजित किया गया था। इस शिखर सम्मलेन में भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया ने भाग लिया।

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सम्मेलन के परिणाम:

  • क्वाड समूह के सदस्य देशों द्वारा वैक्सीन की ‘न्यायसंगत’ पहुंच सुनिश्चित करने पर सहमति व्यक्त की गई।
  • इन नेताओं ने कहा कि, भारत-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific region) के लिए मानवाधिकारों के अनुरूप प्रशासित किया जाना चाहिए।
  • नेताओं ने चीन द्वारा पेश की जा रही चुनौतियों पर भी चर्चा की।

क्वाड समूह’ क्या है?

यह, जापान, भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया देशों का एक चतुष्पक्षीय संगठन है।

  • इस समूह के सभी सदस्य राष्ट्र लोकतांत्रिक राष्ट्र होने साथ-साथ गैर-बाधित समुद्री व्यापार तथा सुरक्षा संबंधी हित साझा करते हैं।

क्वाड समूह की उत्पत्ति:

क्वाड समूह की उत्पत्ति के सूत्र, वर्ष 2004 में आयी सुनामी के बाद राहत कार्यों के लिए चारो देशों द्वारा किए गए समन्वित प्रयासों में खोजे जा सकते हैं।

  • इसके बाद, इन चारो देशों के मध्य वर्ष 2007 में हुए आसियान शिखर सम्मेलन के दौरान पहली बार बैठक हुई।
  • इसका उद्देश्य, जापान, भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया, चारो देशों के मध्य समुद्री सहयोग बढ़ाना था।

इस संगठन का महत्व:

  • क्वाड (Quad) समान विचारधारा वाले देशों के लिए परस्पर सूचनाएं साझा करने तथा पारस्परिक हितों संबंधी परियोजनाओं पर सहयोग करने हेतु एक अवसर है।
  • इसके सदस्य राष्ट्र एक खुले और मुक्त इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण को साझा करते हैं।
  • यह भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के मध्य वार्ता के कई मंचों में से एक है तथा इसे किसी एक विशेष संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए।

क्वाड समूह’ के प्रति चीन का दृष्टिकोण:

  1. यह एक सामान्य समझ है, कि क्वाड किसी भी देश के खिलाफ सैन्य रूप से मुकबला नहीं करेगा। फिर भी, चीन के रणनीतिक समुदाय द्वारा, इसे एक उभरता हुआ “एशियाई नाटो” ब्रांड बताया जाता है।
  2. विशेष रूप से, भारतीय संसद में जापानी पीएम शिंजो आबे द्वारा ‘दो सागरों का मिलन’ (Confluence of Two Seas) संबोधन ने क्वाड अवधारणा को एक नया बल दिया है। इसने भारत के आर्थिक उदय को मान्यता प्रदान की है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. क्वाड – संरचना।
  2. यह पहली बार कब प्रस्तावित किया गया था?
  3. हिंद महासागर क्षेत्र में देश और महत्वपूर्ण द्वीप।
  4. इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का भौगोलिक अवलोकन।
  5. इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण समुद्र और जलडमरूमध्य।

मेंस लिंक:

शांति और सुरक्षा बनाए रखने और संयुक्त राष्ट्र के समुद्रीय कानून के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए क्वाड की औपचारिक बहाली और पुन: प्रवर्तन की आवश्यकता है। परीक्षण कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM)


संदर्भ:

अध्यादेश के व्यपगत हो जाने के कारण, केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और इसके निकटवर्ती क्षेत्रों के लिए, पांच माह पूर्व गठित किया गया ‘वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग’ (Commission for Air Quality ManagementCAQM) भंग कर दिया गया है।

पृष्ठभूमि:

  • अध्यादेश को कानून का रूप देने के लिए इसे संसद सत्र शुरू होने के छह हफ्ते के भीतर सदन में पेश नहीं किया जा सका, जिसकी वजह से इसकी वैधता समाप्त हो गई और आयोग स्वत: भंग हो गया।
  • वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) का गठन करने के लिए पूर्ववर्ती ‘पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम एवं नियंत्रण) प्राधिकरण’ (Environment Pollution (Prevention and Control) Authority) अर्थात EPCA को भंग कर दिया गया था।

‘वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग’ के बारे में:

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) का गठन अक्टूबर 2020 में ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और इसके निकटवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन हेतु आयोग अध्यादेश’, 2020 (‘Commission for Air Quality Management in National Capital Region and Adjoining Areas Ordinance’) के तहत किया गया था ।

संरचना:

आयोग की अध्यक्षता भारत सरकार के सचिव अथवा राज्य सरकार के मुख्य सचिव के रैंक के अधिकारी द्वारा की जाएगी।

यह एक स्थायी निकाय होगा और इसमें 20 से अधिक सदस्य होंगे।

  • यह आयोग एक ‘वैधानिक प्राधिकरण’ होगा।
  • यह केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जैसे निकायों का अधिक्रमण (Supersede) करेगा।
  • इस आयोग को वायु प्रदूषण से संबंधित मुद्दों पर इन राज्य सरकारों को निर्देश जारी करने की शक्तियां प्राप्त होंगी।

अधिकार-क्षेत्र:

इस आयोग का वायु प्रदूषण से संबंधित मामलों में हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के क्षेत्रों सहित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) पर विशेष अधिकार क्षेत्र होगा, तथा यह संबंधित राज्य सरकारों तथा CPCB और ISRO के साथ कार्य करेगा।

आयोग की दंडात्मक शक्तियाँ:

आयोग के निर्देशों का उल्लंघन किये जाने पर, जैसे कि किसी प्रतिबंधित क्षेत्र में एक औद्योगिक इकाई की स्थापना करने पर, 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना और 5 साल तक के कारावास की सजा होगी।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. EPCA के बारे में
  2. NGT के बारे में
  3. CPCB के बारे में
  4. ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन हेतु आयोग अध्यादेश’, 2020 का अवलोकन

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

पौराणिक सरस्वती नदी के अध्ययन हेतु समिति


संदर्भ:

केंद्र सरकार द्वारा आगामी दो वर्षो में पौराणिक ‘सरस्वती’ नदी के अध्ययन हेतु योजना बनाने के लिए एक सलाहकार समिति का पुनर्गठन किया गया है। इसके पहले गठित समिति का कार्यकाल वर्ष 2019 में समाप्त हो गया था।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा इस विषय पर अध्ययन हेतु 28 दिसंबर, 2017 को पहली बार दो वर्ष की अवधि के लिए एक समिति का गठन किया था।

समिति की संरचना:

इस समिति के अध्यक्ष केंद्रीय संस्कृति मंत्री होंगे, तथा इसमें संस्कृति, पर्यटन, जल संसाधन, पर्यावरण और वन, आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के अधिकारी; भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के प्रतिनिधि; गुजरात, हरियाणा और राजस्थान की सरकारों के अधिकारी; और ‘भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण’  के अधिकारी शामिल होंगे।

‘सरस्वती नदी’ के बारे में:

ऐसा माना जाता है कि, सरस्वती नदी का उद्गम हिमालय में कैलाश पर्वत के पश्चिम में स्थित कपाल तीर्थ से हुआ था और यह अपने उद्गम स्थल से दक्षिण में मानसरोवर तक बहती थी, इसके पश्चात पश्चिम की ओर मुड़कर प्रवाहित होती थी।

यह नदी हरियाणा, राजस्थान और उत्तर गुजरात से होकर प्रवाहित होती थी तथा कच्छ के रण से होकर पश्चिमी सागर से मिलने से पहले पाकिस्तान से भी होकर गुजरती थी। सरस्वती नदी की कुल लंबाई लगभग 4,000 किमी मानी जाती है।

सरस्वती नदी की दो शाखाएँ थीं: पश्चिमी और पूर्वी।

  • हिमालयन से उद्गमित ‘अतीत की’ सतलुज, जो वर्तमान की घग्गर-पटियालीवाली धाराओं के माध्यम से होकर बहती थी,  को प्राचीन सरस्वती नदी की पश्चिमी शाखा माना जाता है।
  • दूसरी ओर, मार्कंड और सरसुती, सरस्वती नदी की पश्चिमी शाखा का प्रतिनिधित्व करती है, जिसे टोंस-यमुना के नाम से जाना जाता है।
  • इन शाखाओं का संगम, पटियाला से 25 किमी दक्षिण में ‘शुतराणा’ नामक स्थान के निकट होता था। और फिर एकाएक, यह रेगिस्तान (कच्छ के रण) को पार करती हुई पश्चिमी समुद्र की खाड़ी में मिल जाती थी।

ऐतिहासिक साक्ष्य:

  • सरस्वती नदी, प्रमुख ऋग्वैदिक नदियों में से एक है और इसका उल्लेख ऋग्वेद तथा बाद के वैदिक और उत्तर वैदिक ग्रंथों में मिलता है।
  • ऋग्वेद के छठवें भाग में ‘नदीस्तुति सूक्त’ नाम से स्तोत्र दिए गए हैं, जिनमे सरस्वती नदी की ‘पूर्णकालिक मां, अद्वितीय नदी तथा सर्वोच्च देवी’ के रूप में स्तुति की गयी है।
  • 6000 ईसा पूर्व और 4000 ईसा पूर्व के मध्य, 2000 वर्षों तक सरस्वती एक महान नदी के रूप में बहती थी।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. सरस्वती नदी के बारे में।
  2. इसकी उत्पत्ति, बेसिन राज्य और सहायक नदियाँ।
  3. अन्य हिमालयी नदियाँ।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

‘पेयजल गुणवत्ता जांच, निगरानी और निरीक्षण’ तंत्र


(Framework for water quality testing, monitoring)

संदर्भ:

हाल ही में, जल शक्ति मंत्रालय द्वारा ‘पेयजल गुणवत्ता जांच, निगरानी और निरीक्षण’ तंत्र का शुभारंभ किया गया।

प्रमुख तथ्य:

  • यह फ्रेमवर्क / तंत्र, केंद्र सरकार के प्रमुख कार्यक्रम ‘जल जीवन मिशन’ का एक भाग है। जल जीवन अभियान के लिए निर्धारित कुल 3.6 लाख करोड़ रुपए के बजट में से 2% राशि गुणवत्ता निगरानी के लिए रखी गई है।
  • इन दिशानिर्देशों में अगले वर्ष से प्रत्येक राज्य, जिले और ब्लॉक में ‘परीक्षण एवं अंशशोधन प्रयोगशालाओं हेतु राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड’ (National Accreditation Board for Testing and Calibration Laboratories– NABL) का नेटवर्क स्थापित करने को अनिवार्य किया गया है।
  • पंचायत स्तर पर, गाँव की पानी एवं स्वच्छता समितियों की महिला टीमों के लिए को फील्ड टेस्ट किट प्रदान की जाएँगी।
  • राज्य सरकारें, नेटवर्क में निजी भागीदारों को भी शामिल कर सकती हैं, लेकिन केंद्र द्वारा नेटवर्क तक आम आदमी की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए टैरिफ सीमा निर्धारित की गई है।
  • जनता द्वारा स्वैच्छिक रूप से किए जाने वाले परीक्षणों के अलावा, अधिकारियों के लिए नियमित रूप से निरीक्षण करना अनिवार्य किया गया है। परीक्षण के सभी परिणामों को जल गुणवत्ता सूचना प्रबंधन प्रणाली में दर्ज किया जाएगा।

दिशानिर्देशों के तहत निर्धारित बुनियादी जल गुणवत्ता मानक:

pH मान, घुले हुए ठोस पदार्थों की कुल मात्रा, गंदलापन, क्लोराइड मात्रा, कुल क्षारीयता, कुल कठोरता, सल्फेट, लोहा, कुल आर्सेनिक, फ्लोराइड, नाइट्रेट, कुल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया, ई.कोली (e.coil) अथवा ताप-सह कोलीफॉर्म बैक्टीरिया।

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स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


भारत के विदेशी मुद्रा भंडार की विश्व में स्थिति

  • विदेशी मुद्रा भंडार के मामले में भारत, रूस को पीछे छोड़ते हुए विश्व का चौथा सबसे बड़ा देश बन गया है।
  • भारत का विदेशी मुद्रा भंडार, लगभग 18 महीने के आयात हेतु पर्याप्त है, और इसमें दुर्लभ चालू-खाता अधिशेष, स्थानीय शेयर बाजार और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश में वृद्धि से जबरदस्त उछाल आया है।
  • भारत की विदेशी मुद्रा होल्डिंग्स 5 मार्च को 3 अरब डॉलर की गिरावट के साथ 580.3 अरब डॉलर पर पहुंच गई।
  • अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की सूची में विदेशी मुद्रा भंडार के मामले में चीन शीर्ष स्थान पर है, इसके बाद जापान और स्विट्जरलैंड का स्थान है।

अय्या वैकुंडा स्वामीकल

(Ayya Vaikunda Swamikal)

अय्या वैकुंडा स्वामीकल (1809-1851), 19वीं शताब्दी के महान विचारक और समाज सुधारक थे।

  • वह 19 वीं शताब्दी के शुरुआती दशकों में त्रावणकोर रियासत में निवास करते थे।
  • उन्होंने वर्ष 1836 में भारत के शुरुआती सामाजिक-सुधार आंदोलन, ‘समथवा समाजम’ (Samathwa Samajam), की स्थापना की।
  • वह दक्षिण भारत में पूजा करने हेतु दर्पण स्थापित करने वाले पहले व्यक्ति थे।
  • वह ‘अय्या वज़ी’ (Ayya Vazhi) नामक आध्यात्मिक विचारों के एक नए मार्ग के प्रतिपादक थे।
  • उन्होंने, ‘एक जाति, एक धर्म, एक कुटुंब, एक दुनिया, एक भगवान’ का नारा दिया।
  • उन्होंने ‘मेल मुंडू सामाराम’ (Mel Mundu Samaram) नामक एक आंदोलन का नेतृत्व किया।

 

आत्मानिर्भर निवेशक मित्र

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा ‘आत्मनिर्भर निवेशक मित्र’ पोर्टल की शुरुआत की जा रही है।

  • यह पोर्टल, घरेलू निवेशकों को सहारा एवं सुविधा प्रदान करने, सूचनाओं को प्रसारित करने तथा सहूलियत देने के लिए विकसित किया जा रहा है।
  • यह, व्यवसायों के लिए आवश्यक अनुमोदन, लाइसेंस और मंजूरी के बारे में आवश्यक जानकारी प्रदान करेगा।
  • यह, केंद्रीय मंत्रालयों, उद्योग संघों, राज्य विभागों जैसे एकल मंच पर निवेशकों को विभिन्न हितधारकों से जुड़ने में भी मदद करेगा।
  • यह परियोजना “इन्वेस्ट इंडिया” एजेंसी के अंतर्गत शुरू की गयी है, जिसे 2009 में भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग के तहत एक गैर-लाभकारी उपक्रम के रूप में स्थापित किया गया था।

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