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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 12 March 2021

 

विषयसूची

 सामान्य अध्ययन-I

1. स्पेस हरिकेन / अंतरिक्षीय तूफ़ान

 

सामान्य अध्ययन-II

1. ‘वन नेशन वन राशन कार्ड’ प्रणाली

2. वार्षिक लोकतंत्र रिपोर्ट

 

सामान्य अध्ययन-III

1. ‘त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई’ तंत्र

2. उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन योजना: 33 ‘सक्रिय औषधीय सामग्री’ आवेदनों को मंजूरी

3. गलत अभियोजन के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में याचिका

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. बौद्धिक विकलांगता: परिभाषा

2. लिंगराज मंदिर

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, भौगोलिक विशेषताएँ

स्पेस हरिकेन / अंतरिक्षीय तूफ़ान


(Space Hurricane)

संदर्भ:

हाल ही में, चीन के वैज्ञानिकों ने उत्तरी ध्रुव के ऊपर, पहली बार, एकस्पेस हरिकेन / अंतरिक्षीय तूफ़ान(Space Hurricane) का पता लगाया है।

इससे पहले, ‘स्पेस हरिकेन’ को केवल सैद्धांतिक परिघटना माना जाता था।

प्रमुख तथ्य:

  • वैज्ञानिकों की रिपोर्ट के अनुसार, ये हरिकेन लगभग 600 मील क्षेत्र में विस्तृत था, और इसके द्वारा लगभग आठ घंटों तक आवेशित इलेक्ट्रॉनों की बारिश होती रही।
  • अकादमिक पेपर के अनुसार, ये स्पेस हरिकेन, वामावर्त्त दिशा (counter clockwise) में 4,700 मील प्रति घंटे की गति से घूर्णन कर रहा था।
  • ये हरिकेन उत्तरी ध्रुव के ठीक ऊपर अंतरिक्ष में देखा गया था।

इसका महत्व:

इस नई खोज से वैज्ञानिकों को यह जानने में मदद मिल सकती है, कि ‘सूर्य, पृथ्वी के वायुमंडल को किस प्रकार प्रभावित करता है?’ तथा इसके अलावा ‘विभिन्न कक्षाओं में स्थित उपग्रहों के लिए अंतरिक्षीय मौसम, किस प्रकार हानि पहुंचा सकता है?’ इस बारे में भी अधिक जानकारी हासिल हो सकती है।

स्पेस हरिकेन क्या हैं?

स्पेस हरिकेन’ अथवा ‘अंतरिक्षीय तूफ़ान’ को सौर हवाओं तथा पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के मध्य परस्पर क्रिया का परिणाम माना जाता है।

  • ‘स्पेस हरिकेन’, आकार में काफी विशाल, कीप की भांति, सर्पिल भू-चुंबकीय तूफान होते हैं, जो सामान्यतः अत्याधिक शांत परिस्थितियों में धुर्वों के ऊपर पृथ्वी के आयनमंडल में निर्मित होते हैं।
  • ये ‘उत्तर धुर्वीय ज्योति’ / ‘ऑरोरा बोरेलिस’ (aurora borealis) परिघटना से भी संबंधित होते हैं। ‘स्पेस हरिकेन’ की ‘कीप’ (funnel) से होने वाली इलेक्ट्रॉन वर्षा से चक्रवात-आकार के विशाल ऑरोरा / धुर्वीय ज्योति (auroras) उत्पन्न होती है।
  • ये प्लाज्मा से निर्मित होते हैं, तथा इनमे अत्याधिक तप्त आयनित गैसें होती हैं, जो अत्यंत तीव्र गति से घूर्णन करती हैं।

निर्माण:

सूर्य से सौर-पवनों के रूप में उन्मुक्त की गयी प्लाज्मा से ‘स्पेस हरिकेन’ का निर्माण होता है। इन आवेशित कणों के बादल अंतरिक्ष से होकर गुजरने के दौरान चुंबकीय क्षेत्रों से अंत:क्रिया करते हैं तथा चुंबकीय तूफानों को उर्जा प्रदान करते हैं।

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प्रभाव:

शोधकर्ताओं के अनुसार, इस प्रकार के तूफान उपग्रहों पर अधिक हानिकारक हो सकते हैं और रेडियो संकेतों और संचार में बाधा उत्पन्न कर सकते हैं, अतः इन घटनाओं को समझना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘स्पेस हरिकेन’ क्या है?
  2. निर्माण
  3. प्रमुख विशेषताएं
  4. यह कहाँ निर्मित होते है?
  5. यह साधारण तूफान से किस प्रकार भिन्न होते है?

स्रोत: ET

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

वन नेशन वन राशन कार्ड’ प्रणाली


संदर्भ:

हाल ही में, वित्त मंत्रालय की घोषणा के अनुसार, उत्तराखंड, सुधारों को सफलतापूर्वक लागू करने वाला नवीनतम राज्य बनने के बाद, एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड प्रणाली ’को सफलतापूर्वक लागू करने वाले राज्यों की संख्या 17 हो गई है।

योजना के बारे में:

  • वन नेशन वन राशन कार्ड योजना के तहत लाभार्थी विशेषकर प्रवासी देश के किसी भी भाग में, अपनी पसंद की सार्वजानिक वितरण प्रणाली दुकान से खाद्यान्न प्राप्त करने में सक्षम हो होंगे।
  • लाभ: इस योजना के लागू होने पर कोई भी गरीब व्यक्ति, एक स्थान से दूसरे स्थान पर प्रवास करने पर खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत सब्सिडी वाले खाद्यान्न प्राप्त करने से वंचित नहीं होगा।
  • इसका उद्देश्य विभिन्न राज्यों से लाभ उठाने के लिये एक से अधिक राशन कार्ड रखने वाले व्यक्तियों पर रोक लगाना है।
  • महत्व: यह योजना लाभार्थियों को स्वतंत्रता प्रदान करेगी, क्योंकि वे किसी एक सार्वजानिक वितरण प्रणाली (PDS) दुकान से बंधे नहीं होंगे तथा दुकान मालिकों पर इनकी निर्भरता भी कम होगी। इस योजना के लागू होने पर PDS संबधित भ्रष्टाचार के मामलों पर अंकुश भी लगेगा।

एक राष्ट्र, एक राशन कार्डका मानक प्रारूप:

विभिन्न राज्यों द्वारा उपयोग किए जाने वाले प्रारूप को ध्यान में रखते हुए राशन कार्ड के लिए एक मानक प्रारूप तैयार किया गया है।

  • राष्ट्रीय पोर्टेबिलिटी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकारों को द्वि-भाषी प्रारूप में राशन कार्ड जारी करने के लिए कहा गया है। इसमें स्थानीय भाषा के अतिरिक्त, अन्य भाषा के रूप में हिंदी अथवा अंग्रेजी को सम्मिलित किया जा सकता है।
  • राज्यों को 10 अंकों का राशन कार्ड नंबर जारी करने के लिए कहा गया है, जिसमें पहले दो अंक राज्य कोड होंगे और अगले दो अंक राशन कार्ड नंबर होंगे।
  • इसके अतिरिक्त, राशन कार्ड में परिवार के प्रत्येक सदस्य के लिए यूनिक मेंबर आईडी बनाने के लिए राशन कार्ड नंबर के साथ दो अंक जोड़े जायेंगे।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. पीडीएस क्या है?
  2. NFSA क्या है? पात्रता? लाभ?
  3. उचित मूल्य की दुकानें (fair price shops) कैसे स्थापित की जाती हैं?
  4. राशनकार्ड का प्रस्तावित प्रारूप।

मेंस लिंक:

वन नेशन वन राशन कार्ड योजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: लोकतंत्र में सिविल सेवाओं की भूमिका।

 वार्षिक लोकतंत्र रिपोर्ट


(Annual democracy report)

संदर्भ:

हाल ही में, स्वीडन की एक संस्था ‘वैराइटी ऑफ डेमोक्रेसी’ (वी-डेम) इंस्टिट्यूट (Varieties of Democracy (V-Dem) Institute) द्वारा ‘ऑटोक्रेटाईज़ेशन गोज वायरल’ (Autocratisation goes viral) शीर्षक से पांचवीं ‘वार्षिक लोकतंत्र रिपोर्ट’ जारी की गई है।

इस रिपोर्ट में पिछले एक दशक में हुई घटनाओं की पृष्ठभूमि में विश्व के लोकतांत्रिक देशों की स्थिति का सार प्रस्तुत किया गया है।

रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु:

भारत के संदर्भ में:

  1. भारत का दर्जा, ‘विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र’ से गिर कर ‘चुनावी निरंकुशता’ (electoral autocracy) में परिवर्तित हो गया है।
  2. दर्जे में इस गिरावट के पीछे कारण: मीडिया का ‘मुँह बाँधना’ तथा मानहानि और देशद्रोह कानूनों का अत्यधिक प्रयोग।
  3. सेंसरशिप के मामले में भारत पाकिस्तान की तरह ‘निरंकुश’ हो गया है तथा अपने पड़ोसी देशों बांग्लादेश और नेपाल दोनों से भी ज्यादा ख़राब है।
  4. पत्रकारों को चुप कराने के लिए प्रायः ‘मानहानि का उपयोग’ किया जाता है तथा ‘विधिविरूद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम’ (UAPA) के उपयोग से नागरिक समाज पर प्रतिबंध लगाए गए हैं, और धर्मनिरपेक्षता की संवैधानिक प्रतिबद्धता का उल्लंघन किया गया है।
  5. नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के विरोध में शामिल विश्वविद्यालयों के छात्रों तथा कार्यकर्ताओं को भी विश्वविद्यालयों तथा प्राधिकारियों द्वारा दंडित किया गया है।
  6. हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि सिविल सोसाइटीज पर उत्तरोत्तर लगाम लगाईं जा रही है, जबकि ‘हिंदुत्व आंदोलन’ से जुड़े संगठनों को अधिक स्वतंत्रता हासिल हुई है।

वैश्विक स्तर पर स्वतंत्रता:

  • विश्व में उदारवादी लोकतांत्रिक देशों की संख्या, पिछले एक दशक में, 41 से कम होकर 32 देशों तक रह गयी है।
  • पिछले 10 वर्षों के दौरान, वैश्विक स्तर पर लोकतंत्र प्रणाली में काफी तेज गिरावट हुई है और वर्ष 2020 में लगातार जारी है। यह स्थिति, विशेषकर एशिया-प्रशांत क्षेत्र, मध्य एशिया, पूर्वी यूरोप और लैटिन अमेरिका में दर्ज की गयी है।
  • औसतन, विश्व के नागरिकों को वर्ष 2020 में प्राप्त लोकतंत्र का स्तर लुढ़क कर, वर्ष 1990 के लोकतंत्र स्तर तक पहुँच गया है।
  • 87 देशों में, संवृत तानाशाही (Closed Autocracies) सहित ‘इलेक्टोरल ऑटोक्रेसी’ अथवा ‘चुनावी तानाशाही’ सबसे लोकप्रिय शासन पद्धति बनी हुई है। इन देशों में विश्व की 68 प्रतिशत आबादी निवास करती है।
  • ब्राजील, भारत, तुर्की और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे G20 के कई राष्ट्र इस धारा का हिस्सा बन चुके हैं।
  • लोकतांत्रिक देशों की संख्या लगभग आधी होकर 16 देश बची है, इन देशों में विश्व की मात्र 4 प्रतिशत आबादी निवास करती है।

भारत के लिए चिंता का विषय:

  • इस रिपोर्ट से कुछ दिनों पहले ही अमेरिकी संस्था ‘फ्रीडम हाउस’ की रिपोर्ट में भारत को ‘आंशिक रूप से स्वतंत्र’ देश बताया गया था।
  • पिछले साल मार्च में, रिपोर्ट विदाउट बॉर्डर्स (RSF) द्वारा भारत को प्रेस की स्वतंत्रता की ‘निकृष्टतम डिजिटल हिंस्त्र’ (worst digital predators) सूची में चीन, रूस, ईरान और सऊदी अरब के साथ शामिल किया गया था।
  • अमेरिकी सरकार के ‘धार्मिक स्वतंत्रता मॉनिटर’ द्वारा भारत को ‘विशेष चिंताजनक देशों’ की सूची में शामिल करने की सिफारिश की थी।
  • अप्रैल में फिर से, RSF के प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में, भारत को 180 देशों की सूची में 142 वें स्थान पर रखा गया था। इस सूचकांक में भारत की स्थिति में, पिछले वर्ष की तुलना में दो स्थानों की गिरावट हुई।
  • सितंबर 2020 में कनाडा के फ्रेजर इंस्टीट्यूट द्वारा जारी वैश्विक आर्थिक स्वतंत्रता सूचकांक में भारत को 162 देशों और क्षेत्रों के मध्य 105 वें स्थान पर रखा गया, और इसके स्थान में 26 अंकों की गिरावट हुई थी।
  • अंत में दिसंबर 2020 में, काटो इंस्टीट्यूट (Cato Institute) के मानव स्वतंत्रता सूचकांक 2020 में भारत को 162 देशों में 111 वाँ स्थान हासिल हुआ था।

इन रिपोर्टों में भारत की गिरावट, केवल पिछले कुछ वर्षों में लोकतांत्रिक स्वतंत्रता की निगरानी करने वाले स्वतंत्र संस्थाओं द्वारा संकलित सूचकांकों में इसकी गिरावट को दर्शाती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. उपर्युक्त विभिन्न रिपोर्ट्स और उनके प्रकाशक।
  2. भारत का प्रदर्शन।

मेंस लिंक:

हाल ही में जारी वार्षिक लोकतंत्र रिपोर्ट में भारत के प्रदर्शन पर टिप्पणी कीजिए।

स्रोत: द प्रिंट

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

‘त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई’ तंत्र


(Prompt Corrective Action-PCA)

संदर्भ:

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने चार साल बाद IDBI बैंक लिमिटेड को अपनी ‘त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई’  (Prompt Corrective Action-PCA) सूची से बाहर निकाल दिया है। रिजर्व बैंक का कहना है कि राज्य द्वारा संचालित ऋणदाता ‘आईडीबीआई बैंक’ द्वारा उनके किसी भी पैरामीटर का उल्लंघन नहीं किया गया है।

पृष्ठभूमि:

आईडीबीआई बैंक को वर्ष 2017 में अपने काफी राशि के ख़राब ऋणों और परिसंपत्तियों पर नकारात्मक लाभ के कारण तथाकथित ‘त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई’ (Prompt Corrective Action-PCA) तंत्र के अंतर्गत रखा गया था। उस समय भारतीय ऋणदाता ख़राब परिसंपत्तियों के के रिकॉर्ड स्तर से जूझ रहे थे, इन स्थितियों ने आरबीआई को इस प्रकार का कदम उठाने के लिए उत्प्रेरित किया था।

  • अब, बैंक ने न्यूनतम नियामक पूंजी, सकल गैर-निष्पादित आस्तियों (NPA) तथा जारी आधार पर लाभ-अनुपात संबंधी मानकों का अनुपालन करने संबंधी एक लिखित में प्रतिबद्धता व्यक्त की है।
  • इसके साथ ही, बैंक ने इन प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में मदद करने हेतु लागू किये गए संरचनात्मक और प्रणालीगत सुधारों से आरबीआई को अवगत कराने के लिए भी कहा है।

‘त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई’ (PCA) क्या है?

  • ‘त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई’ वह तंत्र होता है, जिसके अंतर्गत आरबीआई कमजोर वित्तीय मैट्रिक्स वाले बैंकों को अपनी निगरानी में रखता है।
  • आरबीआई द्वारा वर्ष ‘त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई’ तंत्र की शुरुआत वर्ष 2002 में, खराब परिसंपत्ति गुणवत्ता, अथवा लाभ प्रदान करने की क्षमता में कमी होने के कारण ‘पूंजी में कमी’ (undercapitalised) हो गए बैंकों के लिए एक संरचित प्रारंभिक हस्तक्षेप तंत्र (structured early-intervention mechanism) के रूप में की गयी थी।
  • इसका उद्देश्य भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में गैर-निष्पादित आस्तियों (NPAs) की समस्या पर नियंत्रण करना है।
  • वर्ष 2017 में, भारत में वित्तीय संस्थानों के लिए संकल्प प्रशासन पर वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद के कार्यकारी समूह तथा वित्तीय क्षेत्र विधायी सुधार आयोग की सिफारिशों के आधार पर इस तंत्र की समीक्षा की गई थी।

त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई’ तंत्र कब लागू किया जाता है?

कुछ निश्चित जोखिम सीमाओं का उल्लंघन होने पर ‘त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई’ तंत्र लागू किया जाता है। परिसंपत्ति की गुणवत्ता, लाभप्रदता और पूंजी तथा इसी तरह के कुछ निश्चित स्तरों के आधार पर तीन जोखिम सीमाएं निर्धारित की गयी हैं।

प्रतिबंधों के प्रकार:

‘त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई’ के तहत दो प्रकार के प्रतिबंध होते हैं: अनिवार्य और विवेकाधीन।

लाभांश, शाखा विस्तार, निदेशकों के मुआवजे पर प्रतिबंध अनिवार्य श्रेणी में आते हैं, जबकि विवेकाधीन प्रतिबंधों में ऋण और जमाओं पर प्रतिबंध शामिल हो सकते हैं।

त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई’ लागू होने पर बैंक क्या करेगा?

  • ‘त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई’ लागू होने पर, बैंकों को अपनी शुल्क-आधारित आय में वृद्धि करने हेतु महंगी जमाओं को नवीनीकृत करने अथवा उनका उपयोग करने की अनुमति नहीं होती है।
  • बैंकों के लिए अपने गैर-निष्पादित आस्तियों (NPAs) भंडार को कम करने तथा नए NPA निर्माण को रोकने के लिए विशेष अभियान शुरू करना होगा।
  • बैंकों के लिए नए व्यापार क्षेत्रों में प्रवेश करने की भी अनुमति नहीं होगी। आरबीआई अंतर-बैंक बाजार से ऋण लेने के लिए भी बैंक पर प्रतिबंध भी लगाएगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. PCA के बारे में
  2. विशेषताएं
  3. मानक

मेंस लिंक:

‘त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई’ तंत्र के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: ET

 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन योजना: 33 सक्रिय औषधीय सामग्री’ आवेदनों को मंजूरी


संदर्भ:

सरकार द्वारा ‘उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन योजना’ (production linked incentive scheme: PLI Scheme) के तहत 5,082.65 करोड़ रुपये के प्रतिबद्ध निवेश के लिए 33 ‘सक्रिय दवा सामग्री’ (active pharmaceutical ingredients- API) आवेदनों को मंजूरी दी गई है।

API क्या होता है?

प्रत्येक औषधि दो मुख्य अवयवों से बनती है – रासायनिक रूप से सक्रिय API तथा रासायनिक रूप से निष्क्रिय, एक्ससिपिएंट्स (Excipients)। एक्ससिपिएंट्स, ऐसा तत्व होता है जो किसी व्यक्ति के शरीर में API को प्रभावी बनाता है।

  • API, वे रासायनिक यौगिक होते है जो किसी दवा के उत्पादन करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कच्चा माल होते है।
  • औषधियों में, API किसी बीमारी को ठीक करने के लिए इच्छित प्रभाव पैदा करते है। उदाहरण के लिए, पैरासिटामोल, क्रोसिन के लिए API है और यह API पैरासिटामोल, शरीर में दर्द और बुखार से राहत देता है।
  • फिक्स्ड-डोज़ कॉम्बिनेशन दवाओं में कई API का उपयोग किया जाता है, जबकि क्रोसिन जैसी सिंगल-डोज़ दवा सिर्फ एक API का उपयोग करती हैं।

API, किस प्रकार निर्मित होते हैं?

  • API मात्र कच्चे माल की एक अभिक्रिया द्वारा उत्पादित नहीं किये जाते है, बल्कि कई रासायनिक यौगिकों के माध्यम से API का निर्माण होता है। वे रासायनिक यौगिक, जो कच्चे माल से API बनने की प्रक्रिया में होते है, उन्हें मध्यवर्ती (intermediate) कहा जाता है।
  • कुछ APIs ऐसे होते हैं जो कच्चे माल से API बनने की प्रक्रिया में दस से अधिक प्रकार के मध्यवर्ती योगिकों से होकर गुजरते हैं। निर्माण की इस लंबी प्रक्रिया को उच्च स्तर की शुद्धता की प्राप्ति तक जारी रखा जाता है।

भारत, API मार्केट में चीन से किस प्रकार पिछड़ गया?

90 के दशक की शुरुआत में, भारत API उत्पादन में आत्मनिर्भर था।

  • हालांकि, API निर्माता के रूप में चीन के उदय के साथ, इसने भारतीय बाजार पर सस्ते उत्पादों के माध्यम से कब्जा कर लिया।
  • चीन ने कम लागत वाला API उत्पादन उद्योग स्थापित कर लिया। इस उद्योग को कम-लागत पूंजी, सरकार द्वारा भारी मात्रा में वित्तीय सहायता तथा कर प्रोत्साहन आदि का लाभ मिला।
  • चीन में उद्योग परिचालन की लागत भारत की लागत की एक-चौथाई है। यहां तक कि चीन में वित्तीय लागत 6-7 प्रतिशत है, जबकि भारत में वित्तीय लागत 13-14 प्रतिशत होती है।
  • अतः, अधिक लागत तथा कम मुनाफे वाले उद्योग के कारण भारतीय फार्मा कंपनियों ने कुछ वर्षों से API का उत्पादन बंद कर दिया।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. API क्या है?
  2. मध्यवर्ती क्या है?
  3. फिक्स्ड-डोज़ दवाओं बनाम सिंगल-डोज़ दवा संयोजनों में API
  4. भारत तथा चीन में API उत्पादन की तुलना
  5. औषधियों में एक्ससिपिएंट्स क्या होते हैं?

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: विकास और फैलते उग्रवाद के बीच संबंध।

गलत अभियोजन के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में याचिका


(Plea in SC against wrongful prosecution)

संदर्भ:

हाल ही में, पुलिस अथवा अधिकारियों द्वारा गलत तरीके से अभियोजन के पीड़ितों को मुआवजा देने हेतु सरकार के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने की मांग करते हुए सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है।

आवश्यकता:

  • लगभग 5 बिलियन की आबादी वाले भारत में पुलिस तथा अभियोजन प्रक्रिया में कमियों के कारण गलत अभियोजन के लिए कोई प्रभावी वैधानिक / कानूनी तंत्र नहीं है, जिसके परिणामस्वरूप व्यापक स्तर पर झूठे मामले सामने आते हैं।
  • इससे न केवल राष्ट्र का सामाजिक ताना-बना नष्ट होता है, बल्कि 40 मिलियन से अधिक विचाराधीन मामलों के अत्यधिक बोझ से दबी हुई न्यायपालिका भी प्रभावित होती है।

उपाय:

  • सरकार के लिए वर्ष 2018 में भारत के विधि आयोग द्वारा अपनी 277 वीं रिपोर्ट में ‘अदालत की ग़लती’ (miscarriage of justice) विषय पर, की गई सिफारिशों को लागू करना चाहिए।
  • आयोग ने नवंबर 2017 में बबलू चौहान मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के आधार पर “अभियोजन पक्ष और गलत तरीके से पीड़ितों को राहत और पुनर्वास के मुद्दे की व्यापक जांच” हेतु रिपोर्ट तैयार की थी।

पृष्ठभूमि:

भारत की जेलों में बंद कुल कैदियों में लगभग 70 प्रतिशत अभियोगाधीन (Undertrials) कैदी हैं। उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और दिल्ली सहित राज्यों द्वारा अपनी जेलों में कोविड-19 के मामले दर्ज किए गए हैं। कथित तौर पर यह महामारी कई जेलों में फ़ैल गई, फिर भी कई बीमार या बुजुर्ग अपराधियों को उनके अपराध की गंभीरता के कारण जमानत नहीं दी गयी है।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


बौद्धिक विकलांगता: परिभाषा

दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की अनुसूची में “बौद्धिक विकलांगता” (Intellectual Disability) को एक स्थिति के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जिसके तहत व्यक्ति, बौद्धिक कामकाज (तार्किक, सीखने की क्षमता, समस्या हल करने) और अनुकूली व्यवहार (adaptive behaviour), दोनों में महत्वपूर्ण तरीके से अक्षम होता है।

अनुकूली व्यवहार के तहत दैनिक क्रियाओं, सामाजिक और व्यावहारिक कुशलता, ‘सीखने की निर्दिष्ट अक्षमता’ तथा ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम विकार (Autism Spectrum Disorder-ASD) को शामिल किया गया है।

लिंगराज मंदिर

  • यह मंदिर भगवान् शिव को समर्पित है।
  • सोम वंश के राजा यायति केशरी द्वारा इसका निर्माण कराया गया था।
  • लाल पत्थर से निर्मित यह मंदिर कलिंग शैली की वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
  • मंदिर के उत्तर में स्थित बिन्दुसागर झील है।
  • मंदिर में विष्णु की प्रतिमाएँ भी स्थापित हैं, जिन्हें संभवत: 12 वीं शताब्दी के दौरान पुरी में जगन्नाथ मंदिर का निर्माण करने वाले गंग शासकों द्वारा प्रचलित जगन्नाथ संप्रदाय की प्रमुखता के कारण स्थापित किया गया है।


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