HINDI INSIGHTS STATIC QUIZ 2020-2021
Quiz-summary
0 of 5 questions completed
Questions:
- 1
- 2
- 3
- 4
- 5
Information
Welcome to Insights IAS Static Quiz in HINDI. We have already outlined details of this New Initiative HERE.
You have already completed the quiz before. Hence you can not start it again.
Quiz is loading...
You must sign in or sign up to start the quiz.
You have to finish following quiz, to start this quiz:
Results
0 of 5 questions answered correctly
Your time:
Time has elapsed
You have reached 0 of 0 points, (0)
Categories
- Not categorized 0%
- 1
- 2
- 3
- 4
- 5
- Answered
- Review
-
Question 1 of 5
1. Question
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- संविधान भारत के राष्ट्रपति को या तो सदन या संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करने की शक्ति प्रदान करता है।
- जब संविधान लागू हुआ, तो संसद के प्रत्येक सत्र को संबोधित करने के लिए राष्ट्रपति की आवश्यकता थी।
- संविधान के 42वें संशोधन द्वारा यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रपति वर्ष में केवल एक बार संसद के दोनों सदनों को संबोधित करेगा।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: a)
संविधान राष्ट्रपति को या तो सदन या संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करने की शक्ति देता है।
अनुच्छेद 87 दो विशेष अवसर प्रदान करता है जिस पर राष्ट्रपति संयुक्त बैठक को संबोधित करता है।
पहला आम चुनाव के बाद नए विधानमंडल के प्रथम सत्र को संबोधित करना।
दूसरा प्रत्येक वर्ष संसद की पहली बैठक को संबोधित करना।
जब संविधान लागू हुआ, तो संसद के प्रत्येक सत्र को संबोधित करने के लिए राष्ट्रपति की आवश्यकता थी। इसलिए, 1950 में अस्थायी संसद के दौरान, राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने प्रत्यके सत्र को संबोधित किया था। 1951 में संविधान में प्रथम संशोधन द्वारा इस स्थिति को बदल दिया और द्वारा यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रपति वर्ष में केवल एक बार संसद के दोनों सदनों को संबोधित करेगा।
Incorrect
उत्तर: a)
संविधान राष्ट्रपति को या तो सदन या संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करने की शक्ति देता है।
अनुच्छेद 87 दो विशेष अवसर प्रदान करता है जिस पर राष्ट्रपति संयुक्त बैठक को संबोधित करता है।
पहला आम चुनाव के बाद नए विधानमंडल के प्रथम सत्र को संबोधित करना।
दूसरा प्रत्येक वर्ष संसद की पहली बैठक को संबोधित करना।
जब संविधान लागू हुआ, तो संसद के प्रत्येक सत्र को संबोधित करने के लिए राष्ट्रपति की आवश्यकता थी। इसलिए, 1950 में अस्थायी संसद के दौरान, राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने प्रत्यके सत्र को संबोधित किया था। 1951 में संविधान में प्रथम संशोधन द्वारा इस स्थिति को बदल दिया और द्वारा यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रपति वर्ष में केवल एक बार संसद के दोनों सदनों को संबोधित करेगा।
-
Question 2 of 5
2. Question
भारत के लोक लेखा के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- भारत के लोक लेखा में उन लेनदेन को शामिल किया जाता है जहां केंद्र सरकार एक बैंकर के रूप में कार्य करती है।
- इसमें राज्य भविष्य निधि और लघु बचत जमाएं शामिल हैं।
- भारत के लोक लेखा से व्यय के लिए संसद की स्वीकृति की आवश्यकता होती है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: b)
भारत के लोक लेखा में उन लेनदेन को शामिल किया जाता है जहां केंद्र सरकार एक बैंकर के रूप में कार्य करती है। यह निधि संविधान के अनुच्छेद 266 (2) के तहत गठित की गई थी।
उदाहरण: भविष्य निधि, लघु बचत इत्यादि। ये निधि सरकार से संबंधित नहीं है। इसे कुछ समय के बाद सभी जमाकर्ताओं को वापस करना होता है। निधि की इस प्रकृति के कारण, इससे होने वाले व्यय को संसद द्वारा अनुमोदित करने की आवश्यकता नहीं होती है।
Incorrect
उत्तर: b)
भारत के लोक लेखा में उन लेनदेन को शामिल किया जाता है जहां केंद्र सरकार एक बैंकर के रूप में कार्य करती है। यह निधि संविधान के अनुच्छेद 266 (2) के तहत गठित की गई थी।
उदाहरण: भविष्य निधि, लघु बचत इत्यादि। ये निधि सरकार से संबंधित नहीं है। इसे कुछ समय के बाद सभी जमाकर्ताओं को वापस करना होता है। निधि की इस प्रकृति के कारण, इससे होने वाले व्यय को संसद द्वारा अनुमोदित करने की आवश्यकता नहीं होती है।
-
Question 3 of 5
3. Question
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत एक गैर-संवैधानिक निकाय है।
- आयोग इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ का परिणाम था।
- आयोग नौकरियों में आरक्षण के उद्देश्य से पिछड़ा वर्ग के रूप में अधिसूचित समुदायों की सूचियों में शामिल किए जाने और बहिष्करण पर विचार करता है।
- आयोग के पास सिविल कोर्ट के समान अधिकार हैं।
उपरोक्त कथनों में से कौन-से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: b)
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग एक संवैधानिक निकाय है (123 वां संविधान संशोधन विधेयक 2017 और संविधान में 102वां संशोधन 2018 इसे संवैधानिक निकाय बनता) (भारतीय संविधान का अनुच्छेद 338B) जिसे सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत 14 अगस्त 1993 को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम, 1993 के प्रावधानों के अनुसार स्थापित किया गया था।
आयोग इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ का परिणाम था।
आयोग नौकरियों में आरक्षण के उद्देश्य से पिछड़ा वर्ग के रूप में अधिसूचित समुदायों की सूचियों में शामिल किए जाने और बहिष्करण पर विचार करता है और NCBC अधिनियम, 1993 की धारा 9 (1) के अनुसार केंद्र सरकार को आवश्यक सलाह देता है। इसी तरह, राज्य भी पिछड़ा वर्ग के लिए आयोग गठित कर सकते हैं।
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के साथ-साथ राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के पास सिविल कोर्ट के समान अधिकार प्राप्त हैं।
Incorrect
उत्तर: b)
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग एक संवैधानिक निकाय है (123 वां संविधान संशोधन विधेयक 2017 और संविधान में 102वां संशोधन 2018 इसे संवैधानिक निकाय बनता) (भारतीय संविधान का अनुच्छेद 338B) जिसे सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत 14 अगस्त 1993 को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम, 1993 के प्रावधानों के अनुसार स्थापित किया गया था।
आयोग इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ का परिणाम था।
आयोग नौकरियों में आरक्षण के उद्देश्य से पिछड़ा वर्ग के रूप में अधिसूचित समुदायों की सूचियों में शामिल किए जाने और बहिष्करण पर विचार करता है और NCBC अधिनियम, 1993 की धारा 9 (1) के अनुसार केंद्र सरकार को आवश्यक सलाह देता है। इसी तरह, राज्य भी पिछड़ा वर्ग के लिए आयोग गठित कर सकते हैं।
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के साथ-साथ राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के पास सिविल कोर्ट के समान अधिकार प्राप्त हैं।
-
Question 4 of 5
4. Question
पुदुचेरी विधान सभा के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- पुदुचेरी विधान सभा एक सदनीय विधायिका है।
- विधान सभा के सदस्य सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर लोगों द्वारा सीधे चुने जाते हैं और भारत सरकार द्वारा नामित भी होते हैं।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
हल: c)
संविधान द्वारा प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करते हुए, केंद्र सरकार ने केंद्र शासित प्रदेश अधिनियम, 1963 अधिनियमित किया था। यह कानून निर्दिष्ट करता है कि पुडुचेरी विधायिका में 30 निर्वाचित विधायक होंगे, और अधिकतम तीन विधायक केंद्र सरकार द्वारा नामित होंगे। कानून यह भी निर्दिष्ट करता है कि नामांकित व्यक्ति सरकारी कर्मचारी नहीं होने चाहिए।
Incorrect
हल: c)
संविधान द्वारा प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करते हुए, केंद्र सरकार ने केंद्र शासित प्रदेश अधिनियम, 1963 अधिनियमित किया था। यह कानून निर्दिष्ट करता है कि पुडुचेरी विधायिका में 30 निर्वाचित विधायक होंगे, और अधिकतम तीन विधायक केंद्र सरकार द्वारा नामित होंगे। कानून यह भी निर्दिष्ट करता है कि नामांकित व्यक्ति सरकारी कर्मचारी नहीं होने चाहिए।
-
Question 5 of 5
5. Question
भारत के विधि आयोग के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- भारत का विधि आयोग समय-समय पर भारत सरकार द्वारा गठित एक वैधानिक निकाय है।
- आयोग का पुनर्गठन प्रत्येक पांच वर्ष में किया जाता है।
- विधि आयोग द्वारा स्वत: संज्ञान के आधार पर देश में विधि संबंधी शोध एवं प्रचलित कानूनों की समीक्षा की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही नहीं हैं?
Correct
उत्तर: a)
- विधि आयोग (Law Commission) द्वारा केंद्र सरकार द्वारा इसे सौंपे गये या स्वतः संज्ञान के आधार पर विधि संबंधी अनुसंधान और प्रचलित कानूनों में सुधार करने एवं नए कानूनों के निर्माण के लिए कानूनों की समीक्षा की जाती है। यह प्रक्रियाओं में देरी को समाप्त करने, मामलों को तेजी से निपटाने, अभियोग की लागत कम करने के लिए न्याय आपूर्ति प्रणालियों में सुधार लाने के लिए अध्ययन और अनुसंधान भी करेगा।
- भारतीय विधि आयोग, भारत सरकार द्वारा समय-समय पर गठित एक गैर-सांविधिक निकाय (non-statutory body) है। आयोग का मूल रूप से 1955 में गठन किया गया था और इसका प्रत्येक 3 वर्ष के लिए पुनर्गठन किया जाता है। 21वें भारतीय विधि आयोग का कार्यकाल 31 अगस्त, 2018 तक था।
- विभिन्न विधि आयोग प्रगतिशील विकास और देश के कानून के संहिताकरण के बारे में महत्वपूर्ण योगदान देने में समर्थ रहे हैं।
- 22वां विधि आयोग सरकारी राजपत्र में गठन के आदेश के प्रकाशन की तिथि से 3 वर्ष की अवधि के लिए गठित किया जायेगा।
Incorrect
उत्तर: a)
- विधि आयोग (Law Commission) द्वारा केंद्र सरकार द्वारा इसे सौंपे गये या स्वतः संज्ञान के आधार पर विधि संबंधी अनुसंधान और प्रचलित कानूनों में सुधार करने एवं नए कानूनों के निर्माण के लिए कानूनों की समीक्षा की जाती है। यह प्रक्रियाओं में देरी को समाप्त करने, मामलों को तेजी से निपटाने, अभियोग की लागत कम करने के लिए न्याय आपूर्ति प्रणालियों में सुधार लाने के लिए अध्ययन और अनुसंधान भी करेगा।
- भारतीय विधि आयोग, भारत सरकार द्वारा समय-समय पर गठित एक गैर-सांविधिक निकाय (non-statutory body) है। आयोग का मूल रूप से 1955 में गठन किया गया था और इसका प्रत्येक 3 वर्ष के लिए पुनर्गठन किया जाता है। 21वें भारतीय विधि आयोग का कार्यकाल 31 अगस्त, 2018 तक था।
- विभिन्न विधि आयोग प्रगतिशील विकास और देश के कानून के संहिताकरण के बारे में महत्वपूर्ण योगदान देने में समर्थ रहे हैं।
- 22वां विधि आयोग सरकारी राजपत्र में गठन के आदेश के प्रकाशन की तिथि से 3 वर्ष की अवधि के लिए गठित किया जायेगा।








