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सामान्य अध्ययन – 1
विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।
1. आधुनिक उद्योगों के आगमन के बाद से भारत में श्रमिक वर्ग के आंदोलन के विकास पर एक लेख लिखिए। 1920 के दशक के उत्तरार्ध में यह विषम समूह एक संगठित वर्ग के रूप में कैसे उभरा? टिप्पणी कीजिए। (250 शब्द)
सन्दर्भ: आधुनिक भारतीय इतिहास: स्पेक्ट्रम प्रकाशन
निर्देशक शब्द:
लेख लिखिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय पर अपने ज्ञान और समझ के आधार पर उसके सभी पहलुओं को शामिल करते हुए उत्तर लिखें।
टिप्पणी कीजिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय पर अपने ज्ञान और समझ को बताते हुए एक समग्र राय विकसित करनी चाहिए।
उत्तर की संरचना:
परिचय:
श्रमिक वर्ग की शुरुआत पर चर्चा करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।
विषय वस्तु:
सम्पूर्ण भारत में उपस्थित विभिन्न वर्गों में चेतना के विकास के विभिन्न चरणों पर प्रकाश डालिए।
इसके विभिन्न चरणों- (1850 -1900), स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत, 1920 के दशक का उत्तरार्द्ध आदि पर विस्तार से चर्चा कीजिए।
एक संगठित अखिल भारतीय वर्ग के रूप में श्रमिक वर्ग के उभरने की इस प्रक्रिया ने राष्ट्रीय आंदोलन के विकास को कैसे प्रभावित किया? समझाइए।
निष्कर्ष:
इसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए निष्कर्ष निकालिए।
सामान्य अध्ययन – 2
विषय: जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की मुख्य विशेषताएँ।
2. चुनावी बॉन्ड (Electoral Bond) किसे कहते हैं? चुनावी वित्तपोषण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने में इनकी भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (250 शब्द)
सन्दर्भ: The Hindu
निर्देशक शब्द:
आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए- ऐसे प्रश्नों का उत्तर देते समय उस कथन अथवा विषय के पक्ष और विपक्ष दोनों में ही तथ्यों को बताते हुए अंत में एक सारगर्भित निष्कर्ष निकालना चाहिए।
उत्तर की संरचना:
परिचय:
चुनावी बॉन्ड की अवधारणा को प्रस्तुत करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।
विषय वस्तु:
इसकी प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
इसके गुण एवं दोष दोनों को सूचीबद्ध कीजिए। चुनावी वित्तपोषण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने में इसकी भूमिका पर चर्चा कीजिए।
निष्कर्ष:
इसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए निष्कर्ष निकालिए।
विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।
3. आंध्र प्रदेश एवं हरियाणा के स्थानीय श्रम कानून, कम आय वाले प्रवासी श्रमिकों को पीड़ित करते हैं। क्या आप सहमत हैं? आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)
सन्दर्भ: Indian Express
निर्देशक शब्द:
आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए- ऐसे प्रश्नों का उत्तर देते समय उस कथन अथवा विषय के पक्ष और विपक्ष दोनों में ही तथ्यों को बताते हुए अंत में एक सारगर्भित निष्कर्ष निकालना चाहिए।
उत्तर की संरचना:
परिचय:
हरियाणा एवं आंध्र प्रदेश राज्यों द्वारा स्थापित कानूनों का विवरण प्रस्तुत करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।
विषय वस्तु:
ऐसे कानूनों के लिए अनुकूल कारणों की व्याख्या कीजिए।
भारत में स्थानीय श्रम कानूनों के विकास को प्रस्तुत कीजिए एवं स्थानीय श्रम कानूनों से सम्बंधित समस्याओं पर चर्चा कीजिए।
निष्कर्ष:
इस प्रकार के कानूनों के कार्यान्वयन के लिए आदर्श समाधान प्रस्तुत करते हुए निष्कर्ष निकालिए।
विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।
4. स्वच्छ भारत मिशन 2.0, धारणीय ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एवं अपशिष्ट जल के सुरक्षित निपटान तथा पुन: उपयोग के नए एजेंडों का अनुसरण करते हुए धारणीय व्यवहार परिवर्तन की बात करता है। विस्तार से समझाइए। (250 शब्द)
सन्दर्भ: Indian Express
निर्देशक शब्द:
समझाइये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय प्रश्न से संबंधित सूचना अथवा जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर की संरचना:
परिचय:
स्वच्छ भारत मिशन क्या है? संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।
विषय वस्तु:
उत्तर के मुख्य भाग में निम्नलिखित पहलुओं पर प्रकाश डालिए:
- मिशन के उद्देश्य एवं प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा कीजिए।
- स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के बारे में संक्षेप में चर्चा कीजिए।
- समझाइए कि यह मिशन, धारणीय ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एवं अपशिष्ट जल के सुरक्षित निपटान तथा पुन: उपयोग के नए एजेंडों का अनुसरण करते हुए धारणीय व्यवहार परिवर्तन कैसे करता है।
निष्कर्ष:
इसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए निष्कर्ष निकालिए।
सामान्य अध्ययन – 3
विषय: सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियाँ एवं उनका प्रबंधन- संगठित अपराध और आतंकवाद के बीच संबंध।
5. देश में सुरक्षा वातावरण को सशक्त करने के उद्देश्य से गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), 1967 एवं राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अधिनियम को हाल ही में संशोधित किया गया था। गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की व्यापकता एवं मानवाधिकार संगठनों द्वारा इसका विरोध किये जाने के कारणों पर चर्चा करते हुए इस संदर्भ में हुए परिवर्तनों का विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)
सन्दर्भ: Indian Express
निर्देशक शब्द:
विश्लेषण कीजिए– ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के बहुआयामी सन्दर्भों जैसे क्या, क्यों, कैसे आदि पर ध्यान देते हुए उत्तर लेखन कीजिए।
उत्तर की संरचना:
परिचय:
इन अधिनियमों में किए गए हालिया संशोधनों का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।
विषय वस्तु:
समझाइए कि सुरक्षा के नाम पर इस अधिनियम के माध्यम से नागरिकों की मौलिक स्वतंत्रता एवं राज्य के हितों के बीच असंतुलन स्थापित किया गया है।
इन परिवर्तनों की सकरात्मकताओं एवं नकारात्मकताओं दोनों पर प्रकाश डालिए।
गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की व्यापकता पर प्रकाश डालिए।
मानवाधिकार संगठनों द्वारा इसका विरोध क्यों किया जा रहा है? इसके कारणों पर प्रकाश डालिए। उदाहरण भी प्रस्तुत कीजिए।
निष्कर्ष:
आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।
सामान्य अध्ययन – 4
विषय: लोक प्रशासन में लोक/सिविल सेवा मूल्य तथा नीतिशास्त्रः स्थिति तथा समस्याएँ; सरकारी तथा निजी संस्थानों में नैतिक चिंताएँ तथा दुविधाएँ; नैतिक मार्गदर्शन के स्रोतों के रूप में विधि, नियम, विनियम तथा अंतरात्मा; उत्तरदायित्व तथा नैतिक शासन, शासन व्यवस्था में नीतिपरक तथा नैतिक मूल्यों का सुदृढ़ीकरण; अंतर्राष्ट्रीय संबंधों तथा निधि व्यवस्था (फंडिंग) में नैतिक मुद्दे; कॉरपोरेट शासन व्यवस्था।
6. प्रभावी लोक प्रशासन के लिए भारतीय नौकरशाही के विकास के लिए कुछ उपाय बताइए। (250 शब्द)
सन्दर्भ: Indian Express
उत्तर की संरचना:
परिचय:
भारतीय नौकरशाही की स्थिति का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।
विषय वस्तु:
इसके विकास के लिए आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए।
प्रत्येक उपाय को विस्तार से समझाइए एवं जहाँ भी संभव हो उदाहरणों के साथ पुष्टि कीजिए।
निष्कर्ष:
आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।
विषय: नीतिशास्त्र तथा मानवीय सह-संबंधः मानवीय क्रियाकलापों में नीतिशास्त्र का सार तत्त्व, इसके निर्धारक और परिणाम; नीतिशास्त्र के आयाम; निजी और सार्वजनिक संबंधों में नीतिशास्त्र, मानवीय मूल्य- महान नेताओं, सुधारकों और प्रशासकों के जीवन तथा उनके उपदेशों से शिक्षा; मूल्य विकसित करने में परिवार, समाज और शैक्षणिक संस्थाओं की भूमिका।
7. क्या परिस्थितियों को मानवीय कार्यवाई की नैतिकता को आंकने का एकमात्र मानदंड माना जाना चाहिए या कार्रवाई की प्रकृति एवं उसके उद्देश्यों पर भी विचार किया जाना चाहिए? सोदाहरण अपना पक्ष प्रस्तुत कीजिए एवं उसकी पुष्टि भी कीजिए। (250 शब्द)
सन्दर्भ: नैतिकता, सत्यनिष्ठा एवं अभिवृत्ति: लेक्सिकन प्रकाशन
उत्तर की संरचना:
परिचय:
नैतिकता को परिभाषित करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।
विषय वस्तु:
उत्तर के मुख्य भाग में निम्नलिखित पहलुओं पर प्रकाश डालिए:
- मानवीय कार्रवाई की नैतिकता के आकलन के लिए इसके तत्वों (प्रकृति, परिस्थिति एवं उद्देश्य) की पहचान कीजिए।
- समझाइए कि हालाँकि परिस्थितियाँ, नैतिकता के आकलन का मानदंड होती हैं, लेकिन वे एकमात्र मानदंड नहीं हैं। नैतिकता निर्धारित करते समय उद्देश्य के साथ-साथ मानव कार्रवाई के प्रयोजन पर भी विचार किया जाना चाहिए।
- अपने उत्तर की पुष्टि के लिए उदाहरण भी प्रस्तुत कीजिए।
निष्कर्ष:
इसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए निष्कर्ष निकालिए।








