Print Friendly, PDF & Email

INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 06 March 2021

 

विषयसूची

 सामान्य अध्ययन-II

1. अल साल्वाडोर: मलेरिया मुक्त घोषित होने वाला पहला मध्य अमेरिकी देश

2. भारत द्वारा श्रीलंका के साथ रक्षा-संबंधों की पुनःपुष्टि

 

सामान्य अध्ययन-III

1. ‘ओपेक प्लस’ के निर्णय का अर्थव्यवस्था-बहाली पर प्रभाव

2. जीएमओ फसलों पर FSSAI के दिशानिर्देश

3. वनाग्नि पर ‘भारतीय वन सर्वेक्षण’ की रिपोर्ट

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. ठोस ईंधन आधारित डक्टेड रैमजेट प्रौद्योगिकी (SFDR)

2. रक्त चंदन / रेड सैंडर्स

3. पोचमपल्ली इकत

4. व्हेल शार्क

5. मछली पकड़ने वाली बिल्लिया

6. ‘नकारात्मक वर्णनों’ से निपटने हेतु मंत्रिमंडलीय समूह द्वारा सुझाव

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

अल साल्वाडोर: मलेरिया मुक्त घोषित होने वाला पहला मध्य अमेरिकी देश


संदर्भ:

अल साल्वाडोर (El Salvador), हाल के वर्षों में, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से मलेरिया मुक्त प्रमाण पत्र हासिल करने वाला मध्य अमेरिका का पहला देश और संपूर्ण अमेरिका में तीसरा देश बन गया है।

  • जब किसी देश में, किसी बीमारी की स्थानीय संचरण श्रंखला, कम से कम तीन वर्षों तक, देशव्यापी रूप से भंग अथवा नाकाम रहती है, तो उस देश को मलेरिया उन्मूलन प्रमाण पत्र प्रदान कर दिया जाता है।
  • हाल के वर्षों में, मलेरिया उन्मूलन करने वाले, WHO अमेरिका क्षेत्र के अन्य देश पराग्वे (2018) और अर्जेंटीना (2019) हैं।

उच्‍च जोखिम से उच्‍च प्रभाव (HBHI) पहल

(High Burden to High Impact initiative)

  • विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन में मलेरिया के अधिक जोखिम वाले 11 देशों में उच्‍च जोखिम और उच्‍च प्रभाव (HBHI) पहल शुरू की है।
  • भारत में, इस पहल को पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्‍य प्रदेश – इन चार राज्‍यों में शुरू किया गया है।

मलेरिया के बारे में:

  • मलेरिया, परजीवी से होने वाली बीमारी है। मलेरिया परजीवी आमतौर पर एक विशेष प्रकार के मच्छर को संक्रमित करता है।
  • संक्रमण: मलेरिया, मादा एनोफिलीज मच्‍छरों से फैलता है। मादा एनोफिलीज मच्‍छर स्पोरोजोइट्स (sporozoites) परजीवी को मनुष्य की त्वचा में प्रविष्ट करते है।

चार प्रकार के मलेरिया परजीवी मनुष्यों को संक्रमित करते हैं:

  • प्‍लासमोडियम फेलसिपेरम (Plasmodium falciparum), प्‍लासमोडियम वीवेक्‍स ( vivax), पी. ओवले (P. ovale) और पी. मलेरिया (P. malariae)।
  • इसके अलावा, दक्षिण पूर्व एशिया में मैकाक लंगूरों को संक्रमित कने वाला पी. नोलेसी ( knowlesi) परजीवी मनुष्यों को भी संक्रमित करता है, जिससे मलेरिया का संक्रमण पशुओं से मनुष्यों (जूनोटिक मलेरिया) में फैलता है।

दुर्गम अंचलारे मलेरिया निराकरण (DAMaN) पहल

  • भारतीय राज्यों में, ओडिशा (Odisha) की मलेरिया उन्मूलन की दिशा में दुर्गम अंचलारे मलेरिया निराकरण (Durgama Anchalare Malaria NirakaranDAMaN) पहल महत्वपूर्ण है।
  • इस पहल का उद्देश्य राज्य के ‘पहुँच से बाहर’ और सर्वाधिक प्रभावित लोगों तक अपनी सेवाएं पहुंचाना है। इस पहल में स्पर्शोन्मुख मलेरिया से निपटने के लिए इन-बिल्ट इनोवेटिव रणनीतियाँ सम्मिलित की गयी हैं।
  • इस कार्यक्रम को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मलेरिया रिसर्च (ICMR-NIMR), नेशनल वेक्टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम (NVBDCP), ओडिशा और मेडिसिन फॉर मलेरिया वेंचर (MMV) द्वारा संयुक्त रूप से शुरू किया गया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. वायरस और बैक्टीरिया के कारण होने वाले विभिन्न रोगों में अंतर और उदाहरण।
  2. मलेरिया- कारण और उपचार।

 स्रोत: डाउन टू अर्थ

  

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

भारत द्वारा श्रीलंका के साथ रक्षा-संबंधों की पुनःपुष्टि


संदर्भ:

हाल ही में, भारतीय वायु सेना प्रमुख और 23 भारतीय विमानों ने कोलंबो में श्रीलंका वायु सेना (SLAF) की 70 वीं वर्षगांठ के अवसर तीन दिवसीय कार्यक्रम में भाग लिया, इसके साथ ही भारत ने श्रीलंका के साथ अपने मजबूत रक्षा-सहयोग संबंधों को साबित किया है।

भारतीय वायुसेना ने आखिरी बार, ‘श्रीलंका वायु सेना’ की 50 वीं वर्षगांठ के अवसर पर वर्ष 2001 में इस तरह के आयोजन में भाग लिया था।

भारत-श्रीलंका रक्षा संबंध: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

  • श्रीलंका में तीन दशक से अधिक समय तक चले गृहयुद्ध के दौरान, भारत ने राजनीतिक रूप से और कई बार अपनी सेना का उपयोग करते हुए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
  • उस दौरान, विवादास्पद भारतीय शांति रक्षा बल (IPKF) श्रीलंका में मौजूद रहे।
  • भारत द्वारा वर्ष 1987 में ‘ऑपरेशन पूमलाई’ (Operation Poomala) भी शुरू किया गया, इसमें अभियान में भारतीय वायु सेना द्वारा जाफना में खाद्य सामग्री गिराई गई थी।
  • श्रीलंका में युद्ध-समाप्ति के बाद से, भारत-श्रीलंका सैन्य साझेदारी का अधिकतर ध्यान प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर रहा है। प्रतिवर्ष लगभग 1,200 श्रीलंकाई सैन्य कर्मियों को भारत द्वारा प्रशिक्षित किया जाता है।
  • वर्ष 2020 में, द्वीप के पूर्वी तट पर एक तेल टैंकर में आग लग जाने पर भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के जवानों ने एक महत्वपूर्ण अग्निशमन अभियान में श्रीलंकाई नौसेना की मदद की गई थी।

श्रीलंका का भू-राजनीतिक महत्व:

हिंद महासागर क्षेत्र में श्रीलंका की द्वीपीय देश के रूप में अवस्थिति, कई प्रमुख शक्तियों के लिए रणनीतिक भू राजनीतिक महत्व रखती है।

  • वर्ष 1948 का ब्रिटिश रक्षा और विदेश मामले समझौता, तथा वर्ष 1962 में पूर्व सोवियत संघ द्वारा किया गया समुद्रीय समझौता, श्रीलंका की रणनीतिक अवस्थिति में पश्चिमी अभिरुचि को व्यक्त करने वाले कुछ उदाहरण हैं।
  • वर्ष 2015 के बाद से, श्रीलंका पोर्ट सिटी परियोजना के लिए और चीनी वित्त पोषित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को जारी रखने के लिए चीन पर काफी निर्भर है।
  • चीन की ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल’ रणनीति, का उद्देश्य हिंद महासागर में प्रभुत्व स्थापित करने के लिए भारत को घेरना है।

श्रीलंका की अवस्थिति, वाणिज्यिक और औद्योगिक दोनों उद्देश्यों पूरे कर सकती है और इसका उपयोग सैन्य अड्डे के रूप में भी किया जा सकता है।

  • श्रीलंका का कोलंबो पत्तन विश्व का 25 वां सबसे व्यस्त कंटेनर पोर्ट है, और त्रिंकोमाली (Trincomalee) में गहरे पानी का प्राकृतिक बंदरगाह दुनिया का विश्व सबसे बड़ा प्राकृतिक बंदरगाह है।
  • द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, पत्तन नगर त्रिंकोमाली, अमेरिका के पूर्वी बेड़े और ब्रिटिश रॉयल नेवी का प्रमुख सैन्य बेस था।

china's_string_pearls

प्रीलिम्स लिंक:

अवस्थिति:

  1. पोर्ट सिटी ऑफ त्रिंकोमाली
  2. कोलंबो बंदरगाह
  3. चाबहार बंदरगाह

मेंस लिंक:

चीन की ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल’ रणनीति पर टिप्पणी कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

‘ओपेक प्लस’ के निर्णय का अर्थव्यवस्था-बहाली पर प्रभाव


संदर्भ:

हाल ही में, ओपेक प्लस देशों द्वारा अप्रैल माह में आपूर्ति-वृद्धि नहीं करने पर सहमति व्यक्त की गई है। पेट्रोलियम निर्यातक देशों का यह समूह कोविड-19 महामारी के दौरान मांग में महत्वपूर्ण वृद्धि होने की प्रतीक्षा कर रहा है।

इस घोषणा के बाद कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है और इस साल यह 33% अधिक हो चुकी है।

भारत के लिए चिंता:

भारत, दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। भारत अपने तेल का लगभग 84% आयात करता है और अपनी मांग के 3/5 वें हिस्से को पूरा करने के लिए पश्चिम-एशियाई आपूर्ति पर निर्भर है।

चूंकि, भारत कच्चे तेल के सर्वाधिक खपत वाले देशों में से एक है, इस कारण तेल-उत्पादक देशों द्वारा इस तरह की कार्रवाइयों से चिंतित है, क्योंकि इससे उपभोग-आधारित आर्थिक बहाली पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, और विशेष रूप से, ये हमारे कीमत-संवेदनशील बाजार में उपभोक्ताओं के लिए हानिकारक है।

‘ओपेक प्लस’ क्या है?

  • ओपेक प्लस (OPEC+) कच्चे तेल का उत्पादन करने वाले देशों का एक गठबंधन है। यह गठबंधन वर्ष 2017 से तेल बाजारों में की जाने वाली आपूर्ति में सुधार कर रहा है।
  • ओपेक प्लस देशों में अज़रबैजान, बहरीन, ब्रुनेई, कजाकिस्तान, मलेशिया, मैक्सिको, ओमान, रूस, दक्षिण सूडान और सूडान शामिल हैं।

ओपेक (OPEC) क्या है?

ओपेक (OPECOrganization of the Petroleum Exporting Countries) ‘पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन’ है।

  • इसकी स्थापना, सितंबर, 1960 में आयोजित बगदाद सम्मेलन, इराक में पांच देशों, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान, इराक, कुवैत, सऊदी अरब और वेनेजुएला द्वारा समझौते पर हस्ताक्षर के साथ की गयी थी। ये पांचो देश ओपेक संगठन के संस्थापक सदस्य थे।
  • OPEC एक स्थायी, अंतर-सरकारी संगठन है।
  • इस संगठन का उद्देश्य अपने सदस्य देशों के मध्य पेट्रोलियम नीतियों का समन्वय और एकीकरण करना तथा उपभोक्ता राष्ट्रों के लिए पेट्रोलियम की सफल, आर्थिक और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु तेल बाज़ारों का स्थिरीकरण सुनिश्चित करना है।
  • इसका मुख्यालय ऑस्ट्रिया के वियना शहर में है।
  • पर्याप्त मात्रा में तेल निर्यात करने वाला, तथा संगठन के आदर्शों को साझा करने वाला कोई भी देश OPEC का सदस्य बन सकता है।

OPEC_1

प्रीलिम्स लिंक:

  1. OPEC के संस्थापक सदस्य
  2. शीर्ष तेल उत्पादक
  3. भारत द्वारा कच्चे तेल का आयात
  4. कच्चे तेल के घटक और शोधन
  5. भारत में कच्चे तेल के भंडारण की सुविधा
  6. ओपेक सदस्यों का भौगोलिक अवस्थति
  7. ओपेक और गैर-ओपेक सदस्यों द्वारा उत्पादित कच्चे तेल का प्रकार

मेंस लिंक:

ओपेक जैसे समूह विश्व भर में तेल की कीमतों को किस प्रकार प्रभावित करते हैं? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

जीएमओ फसलों पर FSSAI के दिशानिर्देश


संदर्भ:

8 फरवरी को भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा एक आदेश के तहत आयातित खाद्य फसलों में ‘आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों’ (Genetically Modified Organisms- GMO) की सीमा 1% निर्धारित कर दी गई है।

  • इस पर, व्यापारिक संगठनों ने कहा है कि यह सीमा अस्वीकार्य रूप से काफी अधिक है।
  • यह खाद्य एवं कुछ अन्य उपभोग्य सामग्रियों में जीएमओ की शून्य मात्रा की वकालत करने के तुल्य है।

भारत में GMO विनियमन:

  • आयातित उपभोग्य सामग्रियों में GMO के स्तर को विनियमित करने का कार्य शुरू में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के तहत आनुवंशिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति (Genetic Engineering Appraisal Committee- GEAC) द्वारा किया जाता था।
  • खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के लागू होने के बाद इसकी भूमिका को कम कर दिया गया तथा इसके स्थान पर FSSAI को आयातित सामग्रियों को मंज़ूरी प्रदान करने के लिये कहा गया।

‘आनुवंशिक रूप से संशोधित जीव’ (ट्रांसजेनिक जीव) क्या हैं?

आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों (GMOs) में, जेनेटिक इंजीनियरिंग तकनीकों का उपयोग करके आनुवंशिक सामग्री (DNA) को परवर्तित किया जाता है या कृत्रिम रूप से किसी अन्य जीवाणु को प्रविष्ट कराया जाता है।

  • आनुवंशिक संशोधन प्रकिया में जीनों का उत्परिवर्तन, अंतर्वेशन या विलोपन शामिल होते है।
  • अंतर्वेशित किए जाने वाले जीन, आमतौर पर किसी अन्य जीवाणु से लिए जाते हैं (जैसे बीटी कपास (Bt Cotton) में, बेसिलस थुरिंगिनेसिस (Bacillus thuringiensis- Bt) जीवाणु से जीन को अंतर्वेशित किया जाता है)।
  • किसी प्रजाति में आनुवंशिक संशोधन, प्रजाति में प्राकृतिक रूप से अनुपस्थित, एक वांछनीय नई विशेषता को उत्प्रेरित करने के लिए किया जाता है।

जीएम तकनीकों का उपयोग:

  1. जैविक एवं चिकित्सीय अनुसंधान,
  2. फार्मास्यूटिकल दवाओं का उत्पादन,
  3. प्रायोगिक चिकित्सा (जैसे जीन थेरेपी),
  4. कृषि (जैसे स्वर्ण चावल, बीटी कपास आदि),
  5. आनुवंशिक रूप से संशोधित बैक्टीरिया से प्रोटीन इंसुलिन का उत्पादन करने हेतु,
  6. जीएम बैक्टीरिया आदि से जैव ईंधन का उत्पादन करने हेतु।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. GM फसलें क्या हैं?
  2. GMOs क्या हैं?
  3. GEAC के बारे में।
  4. जैव सुरक्षा पर कार्टाजेना प्रोटोकॉल के बारे में।

स्रोत: डाउन टू अर्थ

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

वनाग्नि पर ‘भारतीय वन सर्वेक्षण’ की रिपोर्ट


संदर्भ:

हाल ही में, भारतीय वन सर्वेक्षण (Forest Survey of India- FSI) द्वारा देश में वनाग्नि पर एक रिपोर्ट जारी की गई है।

प्रमुख निष्कर्ष:

  1. भारतीय वन सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार, 22 फरवरी से 1 मार्च 2021 के मध्य ओडिशा में कम से कम 5,291 वनाग्नि की घटनाएँ दर्ज की गई थी। पूरे देश में इस अवधि के दौरान यह सर्वाधिक घटनाएँ थी।
  2. ओडिशा में वनाग्नि के कुछ प्रमुख कारणों में, महुआ के फूलों और केंदू के पत्तों का संग्रहण, वन क्षेत्रों में झूम कृषि और पशुचारण आदि शामिल हैं।
  3. आंकड़ों के अनुसार, इसी अवधि के दौरान, देश में, तेलंगाना में दूसरी सर्वाधिक वनाग्नि घटनाएँ (1,527) दर्ज की गयी, इसके बाद, इस मामले में मध्यप्रदेश (1,507) और आंध्र प्रदेश (1,292) का स्थान रहा।

चिंताएँ:

  • वनाग्नि (Forest fires), वैश्विक चिंता का विषय बन चुकी है। कई देशों में, वनाग्नि के कारण विशाल क्षेत्र जल कर नष्ट हो रहे हैं, और ग्लोबल वार्मिंग के कारण ‘जंगलों में आग लगने के मौसम’ में वृद्धि होती जा रही है।
  • वैश्विक स्तर पर, वनाग्नि के कारण, अरबों टन CO2 वायुमंडल में पहुँचती है, तथा वनाग्नि और अन्य जगहों पर आग लगने के कारण उत्पन्न धुएं के संपर्क में आने से लाखों लोग बीमार होकर काल कलवित हो जाते है।

वन अग्नि के कारण:

वनाग्नि की घटनाएँ, प्रायः प्राकृतिक कारणों के साथ-साथ मानव-निर्मित या मानवजनित कारणों से भी होती है।

  1. प्राकृतिक कारण: आकाशीय बिजली गिरने अथवा बांस के वृक्षों की परस्पर रगड़ जैसे प्राकृतिक कारणों से जंगलों में कभी-कभार आग लग जाती है। उच्च वायुमंडलीय तापमान और निम्न आर्द्रता आग लगने के लिए अनुकूल परिस्थितियों का निर्माण करते हैं।
  2. मानव निर्मित कारण: लौ, जली हुई सिगरेट, विद्युत् की चिंगारी या प्रज्वलन का कोई अन्य स्रोत भी वनाग्नि का कारण हो सकता है।
  3. परंपरागत रूप से भारतीय जंगल आग से प्रभावित हो रहे हैं। मानव और मवेशियों की बढ़ती आबादी और व्यक्तियों और समुदायों द्वारा चराई, झूम खेती और वन उत्पादों संबंधी मांग में वृद्धि के साथ यह समस्या और बढ़ गई है।
  4. उच्च तापमान, हवा की गति और दिशा, मृदा और वातावरण में आद्रता का स्तर और शुष्क महीनों के दौर में वुद्धि, वनाग्नि को तीव्र कर सकती है।

वनाग्नि से निपटने हेतु भारत द्वारा उठाए जा रहे कदम:

  • वनाग्नि पर राष्ट्रीय कार्य योजना (National Action Plan on Forest Fires– NAPFF): इस कार्ययोजना की शुरुआत वर्ष 2018 में की गयी थी। वन विभागों के साथ काम करने हेतु उन्हें प्रोत्साहित करके वनाग्नि की घटनाओं में कमी लाना था।
  • वनाग्नि रोकथाम एवं प्रबंधन योजना (Forest Fire Prevention and Management Scheme– FPM), विशेष रूप से वनाग्नि घटनाओं से निपटने में राज्यों की सहायता हेतु समर्पित एकमात्र केंद्र द्वारा वित्तपोषित कार्यक्रम है।

स्रोत: डाउन टू अर्थ

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


ठोस ईंधन आधारित डक्टेड रैमजेट प्रौद्योगिकी (SFDR)

(Solid Fuel Ducted Ramjet)

हाल ही में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा ‘ठोस ईंधन आधारित डक्टेड रैमजेट’ प्रौद्योगिकी (Solid Fuel Ducted RamjetSFDR) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया।

इस प्रौद्योगिकी के सफल प्रदर्शन से रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान (डीआरडीओ) को तकनीकी लाभ लाभ हासिल हुआ है, जिससे वह लंबी दूरी की हवा से हवा में मिसाइलें विकसित करने में सक्षम होगा।

लाभ:

  • रैमजेट (Ramjet) चालित मिसाइलें, ठोस प्रणोदकों चालित मिसाइलों की तुलना में अधिक दूरी तक मार करने में सक्षम होती है और औसतन अधिक तेज गति प्रदान करती हैं।
  • रैमजेट मिसाइल में, ठोस प्रणोदक के भाग के रूप में एक ऑक्सीकारक के प्रयोग की बजाय वायुमंडलीय ऑक्सीजन का उपयोग किया जाता है।
  • चूंकि, रैमजेट मिसाइल को ऑक्सीडाइजर नही ढोना पड़ता है, इसलिए यह बड़ा वारहेड भी ले जा सकती हैं।

रक्त चंदन / रेड सैंडर्स

(Red sanders)

  • रक्त चंदन / रेड सैंडर्स (Pterocarpus santalinus) अपने समृद्ध चिकित्सीय गुणों और रंग के लिए जाना जाता है।
  • यह वृक्ष, आंध्र प्रदेश के कई जिलों और केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में स्थानिक रूप से पाया जाता है।
  • इस पादप- प्रजाति को वर्ष 1995 में CITES के परिशिष्ट II में सूचीबद्ध किया गया था, और वर्ष 2004 में रक्त चंदन का निर्यात प्रतिबंधित कर दिया गया था।
  • लेकिन, 2019 में, विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) द्वारा निर्यात नीति को संशोधित किया गया और कृषि-भूमि पर उगाये जाने वाले लाल चन्दन के निर्यात की अनुमति दी गयी।
  • रेड सैंडर्स आमतौर पर लाल मिट्टी और उष्ण एवं शुष्क जलवायु सहित पथरीली, निम्न तथा परती भूमि में उगते हैं।
  • अंतरार्ष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) द्वारा पहले इसे रेड लिस्ट की संकटग्रस्त प्रजाति श्रेणी में रखा गया था, बाद में इसे संकट-निकट (Near Threatened) श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया है।

पोचमपल्ली इकत

(Pochampally Ikat)

  • पोचमपल्ली इकत, एक पारंपरिक बुनाई तकनीक हैं, जिसमें रंगे धागों को ऊपर-नीचे बुनकर पहाड़ जैसी आकृतियां बनाई जाती है।
  • पोचमपल्ली इकत, दोहरे इकत शैली का उपयोग करता है। कपड़ों का रंगों को प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त किया जाता है।
  • निजाम के समय में, पोचमपल्ली इकत को बर्मा (म्यांमार) और पश्चिम एशिया और पूर्वी अफ्रीका में निर्यात किया जाता था, जहाँ उन्हें एशियाई रूमाल के रूप में जाना जाता था।
  • ‘इकत’ शब्द, एक मलय-इंडोनेशियाई व्यंजना ‘मांगिकत’ (mangikat) से लिया गया है, जिसका अर्थ होता है, गाँठ या हवा को बाँधना होता है।
  • इसे अब भौगोलिक संकेत (GI) दर्जा दिया गया है।
  • ऐसा कहा जाता है कि इन साड़ियों की बुनाई प्रक्रिया के शिल्पकला को चिराला गांव से पोचमपल्ली लाया गया था।

व्हेल शार्क

(Whale shark)

  1. अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) के अनुसार, ‘व्हेल शार्क’ मछलियों की सबसे बड़ी जीवित प्रजाति है और यह वर्तमान में ‘संकटग्रस्त’ श्रेणी के तहत सूचीबद्ध है।
  2. भारत में इसे ‘वन्यजीव संरक्षण अधिनियम’ के तहत संरक्षित किया गया है।
  3. व्हेल शार्क की आयु लगभग 130 वर्ष होती है और इसके शरीर पर डॉट्स का एक अनूठा पैटर्न होता है।
  4. इसकी लंबाई 10 मीटर तक हो सकती है और इसका वजन लगभग 20 टन होता है।
  5. आवास: व्हेल शार्क, विश्व के सभी उष्णकटिबंधीय महासागरों में पाए जाती हैं। भारत के समुद्री तटों के किनारे भी व्हेल शार्क पाई जाती हैं।

मछली पकड़ने वाली बिल्लियां

(Fishing Cats)

  • एशिया की सबसे बड़ी खारे पानी की लैगून, ओडिशा की चिलिका झील के आसपास इस चपल मछली पकड़ने वाली बिल्ली (Fishing Cats) पर पहला सर्वेक्षण 1 मार्च 2021 से शुरू हुआ था।
  • मछली पकड़ने वाली बिल्लियाँ, आकार में घरेलू बिल्लियों से लगभग दोगुनी होती हैं।
  • ये, प्रायः उत्तरी और पूर्वी भारत के दलदली आर्द्रभूमि और पूर्वी तट के मैंग्रोव वनों में पाई जाती हैं।

IUCN लाल सूची: असुरक्षित (Vulnerable)

fishing_cats_1

‘नकारात्मक वर्णनों’ से निपटने हेतु मंत्रिमंडलीय समूह द्वारा सुझाव

  • हाल ही में, सरकार की सूचनाओं अथवा संचार को दुरस्त करने तथा इनके ‘नकारात्मक वर्णन’ को निष्प्रभावी करने हेतु एक मंत्रिमंडलीय समूह (GoM) का गठन किया गया था।
  • मंत्रिमंडलीय समूह ने, सोशल मीडिया पर 50 नकारात्मक और 50 सकारात्मक प्रभावकारी व्यक्तियों को ट्रैक करने, बिना तथ्यों के सरकार के खिलाफ लिख रहे लोगों तथा मिथ्या वर्णन करने वाले/ फर्जी खबरें फैलाने वालों को निष्प्रभावी करने के लिए सुझाव दिए हैं।
  • मंत्रिमंडलीय समूह द्वारा अनुशंसित कार्रवाई बिंदुओं में, प्रसार भारती समाचार सेवा को “मुख्यधारा की समाचार एजेंसी” में शामिल करना भी शामिल है।
  • दीर्घकालिक रणनीतियों में “पत्रकारिता संस्थानों के साथ समन्वय करने पर सहमति व्यक्त की गयी है क्योंकि पत्रकारिता के वर्तमान छात्र, भविष्य के पत्रकार होंगे”।

  • Join our Official Telegram Channel HERE for Motivation and Fast Updates
  • Subscribe to our YouTube Channel HERE to watch Motivational and New analysis videos