HINDI INSIGHTS STATIC QUIZ 2020-2021
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Question 1 of 5
1. Question
सदन में अपनी सीट ग्रहण करने से पूर्व संसद के प्रत्येक सदस्य को निम्नलिखित किसके समक्ष शपथ लेनी पड़ती है।
Correct
उत्तर: a)
इस उद्देश्य के लिए राष्ट्रपति या उनके द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति के समक्ष शपथ ली जाती है।
संसद के सदस्य को निम्नलिखित की शपथ लेनी पड़ती है:
भारत के संविधान के प्रति विश्वास और निष्ठा रखना;
भारत की संप्रभुता और अखंडता को बनाए रखना; तथा
अपने कर्तव्यों का ईमानदारी पूर्वक निर्वहन करना।
Incorrect
उत्तर: a)
इस उद्देश्य के लिए राष्ट्रपति या उनके द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति के समक्ष शपथ ली जाती है।
संसद के सदस्य को निम्नलिखित की शपथ लेनी पड़ती है:
भारत के संविधान के प्रति विश्वास और निष्ठा रखना;
भारत की संप्रभुता और अखंडता को बनाए रखना; तथा
अपने कर्तव्यों का ईमानदारी पूर्वक निर्वहन करना।
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Question 2 of 5
2. Question
प्रो-टेम्प (अस्थायी) अध्यक्ष के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें।
- उसे लोकसभा द्वारा सदन के सदस्यों में से चुना जाता है।
- वह तब तक लोकसभा की बैठकों की अध्यक्षता करता है जब तक कि नए निर्वाचित अध्यक्ष संसदीय प्रक्रियाओं से परिचित नहीं हो जाते।
- प्रो-टेम्प अध्यक्ष को अध्यक्ष की सभी शक्तियाँ प्राप्त होती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: a)
- संविधान द्वारा यह निर्धारित किया गया है, कि अंतिम लोकसभा का अध्यक्ष नवनिर्वाचित लोकसभा की पहली बैठक से ठीक पूर्व अपना पद त्याग कर देता है। इसलिए, राष्ट्रपति लोकसभा के एक सदस्य को प्रो टेम्प अध्यक्ष के रूप में नियुक्त करता है। आमतौर पर, वरिष्ठतम सदस्य को इसके लिए चुना जाता है।
- प्रो-टेम्प अध्यक्ष को अध्यक्ष की सभी शक्तियाँ प्राप्त होती हैं। वह नवनिर्वाचित लोकसभा की पहली बैठक की अध्यक्षता करता है। उसका मुख्य कर्तव्य नए सदस्यों को शपथ दिलाना होता है। वह सदन को नए अध्यक्ष का चुनाव करने में सक्षम बनता है।
- जब नए अध्यक्ष को सदन द्वारा चुना जाता है, तो प्रो टेम अध्यक्ष का पद समाप्त हो जाता है। इसलिए, यह पद एक अस्थायी पद है, जो कुछ दिनों के लिए ही विद्यमान रहता है।
Incorrect
उत्तर: a)
- संविधान द्वारा यह निर्धारित किया गया है, कि अंतिम लोकसभा का अध्यक्ष नवनिर्वाचित लोकसभा की पहली बैठक से ठीक पूर्व अपना पद त्याग कर देता है। इसलिए, राष्ट्रपति लोकसभा के एक सदस्य को प्रो टेम्प अध्यक्ष के रूप में नियुक्त करता है। आमतौर पर, वरिष्ठतम सदस्य को इसके लिए चुना जाता है।
- प्रो-टेम्प अध्यक्ष को अध्यक्ष की सभी शक्तियाँ प्राप्त होती हैं। वह नवनिर्वाचित लोकसभा की पहली बैठक की अध्यक्षता करता है। उसका मुख्य कर्तव्य नए सदस्यों को शपथ दिलाना होता है। वह सदन को नए अध्यक्ष का चुनाव करने में सक्षम बनता है।
- जब नए अध्यक्ष को सदन द्वारा चुना जाता है, तो प्रो टेम अध्यक्ष का पद समाप्त हो जाता है। इसलिए, यह पद एक अस्थायी पद है, जो कुछ दिनों के लिए ही विद्यमान रहता है।
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Question 3 of 5
3. Question
राज्य विधानमंडल में द्वितीय सदन होने के विरुद्ध आम तौर पर निम्नलिखित में से कौन से तर्क दिए गए हैं?
- राज्य सभा के विपरीत जिसके पास कानून बनाने की पर्याप्त शक्तियां हैं, विधान परिषदों के पास ऐसा करने के लिए संवैधानिक आधार का अभाव है।
- जैसा कि धन विधेयक के संदर्भ में प्रावधान है, कि परिषद केवल चौदह दिनों तक अपने पास रख सकती है, जो विधानसभा द्वारा पारित धन विधेयक को रोकने के के बजाय एक औपचारिकता मात्र है।
सही उत्तर कूट का चयन कीजिए:
Correct
उत्तर: c)
द्वितीय सदन होने के विरुद्ध तर्क:
विधायिका में बुद्धिजीवियों को स्थान प्रदान करने के उदात्त उद्देश्य को पूरा करने के बजाय, इसमें पार्टी के पक्षकारों को प्रवेश दिया जा रहा है जो निर्वाचित होने में विफल रह जाते हैं।
राज्यसभा के विपरीत, जिसे गैर-वित्तीय कानून निर्माण की पर्याप्त शक्तियां प्राप्त हैं, विधान परिषदों के पास ऐसा करने के लिए संवैधानिक आधार का अभाव है। विधान सभाओं के पास परिषद द्वारा किसी कानून के संबंध में दिए गए सुझावों / संशोधनों को ओवरराइड करने की शक्ति है।
जहाँ राज्यसभा सांसद राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव में मतदान कर सकते हैं, वहीँ विधान परिषद के सदस्य नहीं कर सकते है। ज्ञातव्य है कि राज्यसभा सदस्यों के चुनाव में MLCs भी मतदान नहीं कर सकते हैं
जैसा कि धन विधेयक के संदर्भ में प्रावधान है, कि परिषद केवल चौदह दिनों तक अपने पास रख सकती है, जो विधानसभा द्वारा पारित धन विधेयक को रोकने के के बजाय एक औपचारिकता मात्र है।
Incorrect
उत्तर: c)
द्वितीय सदन होने के विरुद्ध तर्क:
विधायिका में बुद्धिजीवियों को स्थान प्रदान करने के उदात्त उद्देश्य को पूरा करने के बजाय, इसमें पार्टी के पक्षकारों को प्रवेश दिया जा रहा है जो निर्वाचित होने में विफल रह जाते हैं।
राज्यसभा के विपरीत, जिसे गैर-वित्तीय कानून निर्माण की पर्याप्त शक्तियां प्राप्त हैं, विधान परिषदों के पास ऐसा करने के लिए संवैधानिक आधार का अभाव है। विधान सभाओं के पास परिषद द्वारा किसी कानून के संबंध में दिए गए सुझावों / संशोधनों को ओवरराइड करने की शक्ति है।
जहाँ राज्यसभा सांसद राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव में मतदान कर सकते हैं, वहीँ विधान परिषद के सदस्य नहीं कर सकते है। ज्ञातव्य है कि राज्यसभा सदस्यों के चुनाव में MLCs भी मतदान नहीं कर सकते हैं
जैसा कि धन विधेयक के संदर्भ में प्रावधान है, कि परिषद केवल चौदह दिनों तक अपने पास रख सकती है, जो विधानसभा द्वारा पारित धन विधेयक को रोकने के के बजाय एक औपचारिकता मात्र है।
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Question 4 of 5
4. Question
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- संविधान के अनुसार किसी व्यक्ति को मुख्यमंत्री नियुक्त करने से पहले उसे विधान सभा में बहुमत सिद्ध करना होगा।
- केवल एक व्यक्ति जो विधान सभा का सदस्य है, उसे मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त किया जा सकता है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: d)
राज्यपाल पहले उसे मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त कर सकता है और फिर उसे उचित समय के भीतर विधान सभा में बहुमत सिद्ध करने के लिए कह सकता है। ऐसा कई मामलों में किया गया है।
एक व्यक्ति जो राज्य विधायिका का सदस्य नहीं है, उसे छह महीने के लिए मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त किया जा सकता है, उस समय के दौरान, उसे राज्य की विधायिका के लिए चुना जाना चाहिए, यदि वह विफल रहता है तो उसे मुख्यमंत्री पद से हटा दिया जायेगा।
संविधान के अनुसार, मुख्यमंत्री राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों में से किसी एक का सदस्य हो सकता है।
Incorrect
उत्तर: d)
राज्यपाल पहले उसे मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त कर सकता है और फिर उसे उचित समय के भीतर विधान सभा में बहुमत सिद्ध करने के लिए कह सकता है। ऐसा कई मामलों में किया गया है।
एक व्यक्ति जो राज्य विधायिका का सदस्य नहीं है, उसे छह महीने के लिए मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त किया जा सकता है, उस समय के दौरान, उसे राज्य की विधायिका के लिए चुना जाना चाहिए, यदि वह विफल रहता है तो उसे मुख्यमंत्री पद से हटा दिया जायेगा।
संविधान के अनुसार, मुख्यमंत्री राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों में से किसी एक का सदस्य हो सकता है।
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Question 5 of 5
5. Question
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- दसवीं अनुसूची को 1985 में 42वें संशोधन अधिनियम द्वारा संविधान में जोड़ा गया था।
- दलबदल-रोधी कानून स्पीकर / अध्यक्ष को ऐसे सदस्य को अयोग्य घोषित करने की अनुमति देता है जो व्हिप के वोटिंग निर्देशों के खिलाफ कार्य करता है।
- दलबदल निरोधक कानून पार्टी गठबंधन के दल परिवर्तन को रोककर सरकार को स्थिरता प्रदान करता है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: c)
दसवीं अनुसूची को 1985 में 52वें संशोधन अधिनियम द्वारा संविधान में जोड़ा गया था।
यह उस प्रक्रिया को समाप्त करता है जिसके द्वारा विधायकों को सदन के किसी अन्य सदस्य की याचिका पर विधायिका के पीठासीन अधिकारी द्वारा दलबदल के आधार पर अयोग्य ठहराया जा सकता है।
दलबदल के आधार पर अयोग्यता के रूप में प्रश्न पर निर्णय ऐसे सदन के अध्यक्ष को संदर्भित किया जाता है, और उसका निर्णय अंतिम होता है और इसे अदालत में चुनौती दी जा सकती है।
दलबदल विरोधी कानून के लाभ:
पार्टी गठबंधन के दल परिवर्तन को रोककर सरकार को स्थिरता प्रदान करता है।
यह सुनिश्चित करता है कि उम्मीदवार पार्टी के साथ-साथ नागरिकों के प्रति भी वफादार रहें।
पार्टी के अनुशासन को बढ़ावा देता है।
भारत में, तीन लाइन के व्हिप के खिलाफ विद्रोह करना एक सांसद की सदस्यता को खतरे में डाल सकता है।
Incorrect
उत्तर: c)
दसवीं अनुसूची को 1985 में 52वें संशोधन अधिनियम द्वारा संविधान में जोड़ा गया था।
यह उस प्रक्रिया को समाप्त करता है जिसके द्वारा विधायकों को सदन के किसी अन्य सदस्य की याचिका पर विधायिका के पीठासीन अधिकारी द्वारा दलबदल के आधार पर अयोग्य ठहराया जा सकता है।
दलबदल के आधार पर अयोग्यता के रूप में प्रश्न पर निर्णय ऐसे सदन के अध्यक्ष को संदर्भित किया जाता है, और उसका निर्णय अंतिम होता है और इसे अदालत में चुनौती दी जा सकती है।
दलबदल विरोधी कानून के लाभ:
पार्टी गठबंधन के दल परिवर्तन को रोककर सरकार को स्थिरता प्रदान करता है।
यह सुनिश्चित करता है कि उम्मीदवार पार्टी के साथ-साथ नागरिकों के प्रति भी वफादार रहें।
पार्टी के अनुशासन को बढ़ावा देता है।
भारत में, तीन लाइन के व्हिप के खिलाफ विद्रोह करना एक सांसद की सदस्यता को खतरे में डाल सकता है।








