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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 03 March 2021

 

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

1. राजनीतिक दलों का पंजीकरण

2. नौकरशाही में ‘पार्श्विक भर्तियाँ’ (लेटरल एंट्री): कारण, प्रक्रिया और विवाद

 

सामान्य अध्ययन-III

1. कर्नाटक इंजीनियरिंग अनुसंधान नीति

2. विश्व वन्यजीव दिवस

3. प्रजाति संवर्धन कार्यक्रम / प्रजाति पुनर्प्राप्ति कार्यक्रम

4. साइबर स्वयंसेवक योजना

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. उपकर और अधिभार

2. हुरून ग्लोबल रिच लिस्ट 2021

3. LSTV-RSTV का विलय

4. हिमालयन सीरो

5. भारतीय भूमि पत्तन प्राधिकरण (LPAI)

6. स्वच्छ्ता सारथी फैलोशिप

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की मुख्य विशेषताएँ।

राजनीतिक दलों का पंजीकरण


(Registration of political parties)

संदर्भ:

निर्वाचन आयोग ने कहा है, कि नयी राजनीतिक पार्टियों के पंजीकरण के लिए नोटिस की अवधि 30 दिनों से घटाकर सात दिन कर दी गयी है। आयोग ने कोविड-19 महामारी के कारण लगाए गए प्रतिबंधों के कारण हो रही कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला किया है।

  • नोटिस की अवधि में यह छूट असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में नामांकन की अंतिम तारीख 19 मार्च तक और पश्चिम बंगाल में 7 अप्रैल (पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तारीख) तक लागू रहेगी।
  • मौजूदा दिशा-निर्देशों के अनुसार आवेदक संस्था को आयोग के समक्ष पंजीकरण के लिए पार्टी के प्रस्तावित नाम पर 30 दिन के भीतर आपत्ति, अगर कोई हो, मांगे जाने के लिए दो राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्रों और दो स्थानीय दैनिक समाचार पत्रों में दो दिन तक प्रकाशित कराने के लिए कहा जाता है।

राजनीतिक दलों का पंजीकरण:

राजनीतिक दलों का पंजीकरण ‘लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम’ (Representation of the People Act), 1951 की धारा 29A के प्रावधानों के अंतर्गत किया जाता है।

किसी राजनीतिक दल को पंजीकरण कराने हेतु अपनी स्थापना 30  दिनों के भीतर संबंधित धारा के तहत भारतीय निर्वाचन आयोग के समक्ष, निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार आवेदन प्रस्तुत करना होता है। इसके लिए भारत के संविधान के अनुच्‍छेद 324 और ‘लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम’, 1951 की धारा 29A  द्वारा प्रदत्‍त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भारतीय निर्वाचन आयोग दिशा-निर्देश जारी करता है।

भारत के ‘राष्ट्रीय राजनीतिक दल’ के लिए पात्रता:

  1. किसी राजनीतिक दल को राष्ट्रीय दल के रूप में मान्यता प्राप्त करने हेतु किन्ही भी चार अथवा अधिक राज्यों में होने वाले आम चुनावों अथवा विधानसभा चुनावों में होने वाले कुल मतदान के न्यूनतम छह प्रतिशत वैध मतों को हासिल करना अनिवार्य होता है।
  2. इसके अलावा, इसके लिए किसी भी राज्य अथवा राज्यों से लोकसभा में न्यूनतम चार सीटों पर विजय प्राप्त करना चाहिए।
  3. राजनीतिक दल द्वारा, लोकसभा चुनावों में कुल लोकसभा सीटों की 2 प्रतिशत (543 सदस्य की वर्तमान संख्या में से 11 सदस्य) सीटों पर जीत हासिल की गयी हो तथा ये सदस्य कम-से-कम तीन अलग-अलग राज्यों से चुने गए हों।

 ‘राज्य स्तरीय राजनीतिक दल’ के लिए पात्रता:

  1. किसी राजनीतिक दल को ‘राज्य स्तरीय राजनीतिक दल’ के रूप में मान्यता प्राप्त करने हेतु, राज्य में हुए लोकसभा या विधानसभा के चुनावों में होने वाले मतदान के कुल वैध मतों का न्यूनतम छह प्रतिशत हासिल करना अनिवार्य है।
  2. इसके अलावा, इसके लिए संबंधित राज्य की विधान सभा में कम से कम दो सीटों पर जीत हासिल होनी चाहिए।
  3. राजनीतिक दल के लिए, राज्य की विधानसभा के लिये होने वाले चुनावों में कुल सीटों का 3 प्रतिशत अथवा 3 सीटें, जो भी अधिक हो, हासिल होनी चाहिए।

लाभ:

  1. राज्य स्तरीय राजनीतिक दल’ के रूप में मान्यता प्राप्त किसी पंजीकृत दल को, संबंधित राज्‍य में अपने उम्‍मीदवारों को दल के लिये सुरक्षित चुनाव चिन्ह आवंटित करने का विशेषाधिकार प्राप्त होता है।
  2. राष्ट्रीय राजनीतिक दल’ के रूप में मान्यता प्राप्त किसी पंजीकृत दल को पूरे भारत में अपने उम्‍मीदवारों को दल के लिये सुरक्षित चुनाव चिन्‍ह आवंटित करने का विशेषाधिकार प्राप्‍त होता है।
  3. मान्‍यता प्राप्‍त राष्‍ट्रीय या राज्‍यस्‍तरीय राजनीतिक दलों के उम्‍मीदवारों को नामांकन-पत्र दाखिल करते वक्‍त सिर्फ एक ही प्रस्‍तावक की ज़रूरत होती है। साथ ही, उन्‍हें मतदाता सूचियों में संशोधन के समय मतदाता सूचियों के दो सेट नि:शुल्क पाने का अधिकार भी होता है तथा आम चुनाव के दौरान इनके उम्‍मीदवारों के लिए मतदाता सूची का एक सेट नि:शुल्क प्रदान की जाती है।
  4. इनके लिए, आम चुनाव के दौरान उन्‍हें आकाशवाणी और दूरदर्शन पर प्रसारण की सुविधा प्रदान की जाती है।
  5. मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के लिए आम चुनाव के दौरान स्‍टार प्रचारकों (Star Campaigner) की यात्रा का खर्च उस उम्‍मीदवार या दल के खर्च में नहीं जोड़ा जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. राजनीतिक दलों का पंजीकरण
  2. मान्यता प्राप्त बनाम गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल
  3. राज्य बनाम राष्ट्रीय दल
  4. मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के लिए लाभ
  5. स्टार प्रचारक कौन होते है?
  6. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 324
  7. ‘लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम’, 1951 की धारा 29A

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: लोकतंत्र में सिविल सेवाओं की भूमिका।

नौकरशाही में ‘पार्श्विक भर्तियाँ’ (लेटरल एंट्री): कारण, प्रक्रिया और विवाद


संदर्भ:

हाल ही में, संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने एक विज्ञापन जारी किया गया था, जिसमें केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में संयुक्त सचिव और निदेशक के 27 पदों के लिए ‘राष्ट्र निर्माण में योगदान करने के लिए इच्छुक प्रतिभाशाली और अभिप्रेरित भारतीय नागरिकों से’ आवेदन मांगे गए थे।

  • सरकार सचिवालय में ‘पार्श्विक भर्ती’ द्वारा नियुक्त होने वाले व्यक्तियों के लिए तीन से पांच साल के लिए अनुबंधित किया जाएगा।
  • ये पद “अनारक्षित” थे, अर्थात इनमे SC, ST और OBC के लिए कोई कोटा नहीं था।

सरकार में ‘लेटरल एंट्री’ / ‘पार्श्विक भर्ती’ से तात्पर्य:

  • नीति आयोग द्वारा अपने तीन वर्षीय कार्रवाई एजेंडा में इसकी अनुशंसा की गयी थी।
  • कर्मियों की नियुक्ति केंद्र सरकार में मध्यम और वरिष्ठ प्रबंधन स्तरों पर की जाएगी।
  • लेटरल एंट्री से भर्ती होने वाले ये प्रवेशी कार्मिक केंद्रीय सचिवालय का हिस्सा होंगे, जिसमे सामान्यतः केवल अखिल भारतीय सेवाओं / केंद्रीय सिविल सेवाओं से चुने गए नौकरशाह होते हैं।

आवश्यकता और महत्व:

  1. लेटरल एंट्री से भर्ती होने वाले प्रवेशी संबंधित क्षेत्र में विशेष ज्ञान और विशेषज्ञता रखते है।
  2. लेटरल एंट्री से दो उद्देश्य पूरे होते है, एक तो, सेवाओं में नयी प्रतिभायें आती हैं, तथा दूसरा श्रम-शक्ति की उपलब्धता में वृद्धि होती है।
  3. यह प्रक्रिया, निजी क्षेत्र और गैर-लाभकारी क्षेत्र जैसे हितधारकों को शासन प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर प्रदान करती है।
  4. इसके माध्यम से, सरकारी क्षेत्र की संस्कृति से संगठन संस्कृति में बदलाव लाने में मदद मिलेगी।

लेटरल एंट्री की आलोचना क्यों की जाती है?

  • इस प्रकार से की जाने वाली नियुक्तियों में कोई आरक्षण नहीं होता है।
  • इसके लिए, राजनीतिक दलों द्वारा अपने लोगों को खुले तौर भर्ती करने के लिए ‘पिछले दरवाजे’ / ‘बैक डोर’ एंट्री के रूप में देखा जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

अनुच्छेद 309 से 312 तक का अवलोकन।

मेंस लिंक:

सिविल सेवाओं में ‘लेटरल एंट्री’ / ‘पार्श्विक भर्ती’ लाभ तथा हानियों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव।

कर्नाटक इंजीनियरिंग अनुसंधान नीति


(Karnataka Engineering research policy)

संदर्भ:

हाल ही में, कर्नाटक सरकार द्वारा देश में पहली बार ‘इंजीनियरिंग अनुसंधान एवं विकास नीति’ (Engineering Research & Development– ER&D) जारी की गई है।

इंजीनियरिंग अनुसंधान एवं विकास नीति’ (ER&D) का महत्व:

  • उद्योगिक शीर्ष निकाय नैसकॉम (NASSCOM) के अनुसार, ER & D में आगामी पांच वर्षो के भीतर देश में 100 अरब डॉलर का उद्योग बनने की क्षमता है।
  • देश में ER&D क्षेत्र 12.8% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) के साथ सबसे तेजी से बढ़ने वाला उद्योग है।
  • इस बीच, वैश्विक इंजीनियरिंग अनुसंधान और विकास उद्योग को 2025 तक 2 ट्रिलियन डॉलर के व्यय तक पहुंचने की उम्मीद है।

नई नीति की प्रमुख विशेषताएं:

  1. इसका उद्देश्य अगले पांच वर्षों में देश में इस क्षेत्र में योगदान को बढ़ाकर 45% करने का प्रयास करना है।
  2. इस नीति में ER&D क्षेत्र में पांच वर्षों में 50,000 से अधिक नौकरियां सृजित करने की क्षमता है।
  3. इस नीति का उद्देश्य राज्य को इस क्षेत्र से निकलने वाले भविष्य के अवसरों का उपयोग करने के लिए तैयार करना है।
  4. नई नीति में एयरोस्पेस और रक्षा जैसे पांच प्रमुख फोकस क्षेत्रों की पहचान की गई है; वाहन, वाहनों के कल-पुर्जे और इलेक्ट्रिक वाहन; जैव प्रौद्योगिकी, फार्मा और चिकित्सा उपकरण; अर्धचालक, दूरसंचार, ईएसडीएम; और सॉफ्टवेयर उत्पाद।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

विश्व वन्यजीव दिवस


(World Wildlife Day)

संदर्भ:

वर्ष 2013 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly- UNGA) द्वारा 3 मार्च को, विश्व के वन्यजीवों तथा जंगली वनस्पतियों के बारे में जागरूकता फैलाने हेतु, संयुक्त राष्ट्र विश्व वन्यजीव दिवस के रूप में घोषित करने का निर्णय लिया गया था।

  • 3 मार्च 1973, को लुप्तप्राय वन्यजीव तथा वनस्पति प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर अभिसमय (Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and FloraCITES) पर हस्ताक्षर किए गए थे।
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के प्रस्ताव द्वारा CITES के सचिवालय को वैश्विक रूप से विश्व वन्यजीव दिवस मनाए जाने के लिए ‘समन्वयक’ के रूप में नामित किया गया है।

विश्व वन्यजीव दिवस 2021 का विषय: “वन और आजीविका: मनुष्यों और ग्रह को संभालने वाले”  (Forests and Livelihoods: Sustaining People and Planet)।

CITES के बारे में:

  • लुप्तप्राय वन्यजीव तथा वनस्पति प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर अभिसमय (CITES), 183 सदस्य देशों के मध्य एक अंतरराष्ट्रीय नियामक संधि है।
  • इस संधि पर वर्ष 1973 में हस्ताक्षर किये गए थे और यह वनस्पति एवं जीवों की 35,000 से अधिक वन्य प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित करती है।
  • इस अभिसमय का ध्यान केवल प्रजातियों की सुरक्षा पर ही नहीं होता है। यह वन्य-प्रजातियों की संधारणीयता के लिए अहानिकारक नियंत्रित व्यापार को भी बढ़ावा देता है।

CITES की कार्यविधि:

यह अभिसमय, मुख्य रूप से वर्गीकरण और लाइसेंसिंग की प्रणाली के माध्यम से काम करता है।

वन्य प्रजातियों को परिशिष्ट I से III में वर्गीकृत किया गया है। यह अक्सर IUCN की रेड लिस्ट में सूचीबद्ध प्रजाति की खतरे की स्थिति को दर्शाता है। अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (International Union for Conservation of Nature-IUCN) की संकटग्रस्त प्रजातियों की रेड लिस्ट पहली बार वर्ष 1964 में तैयार की गयी थी।

  1. परिशिष्ट I: अत्यधिक संकटग्रस्त (Highly Endangered) के रूप में वर्गीकृत प्रजातियों के व्यापार को प्रतिबंधित करती है।
  2. परिशिष्ट II: में कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में व्यापार की अनुमति दी गयी है। इसके लिए निर्यातक देशों को परमिट प्राप्त करना आवश्यक होता है, लेकिन आयातक देशों के लिए इसकी आवश्यकता नहीं होती है।
  3. परिशिष्ट III: में सूचीबद्ध प्रजातियों के व्यापार हेतु केवल इनके मूल प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है।

राष्ट्रीय CITES प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा वैज्ञानिक प्राधिकारियों के लिए गैर-हानिकारक निष्कर्षों दिखाने के बाद परमिट जारी किए जा सकते हैं।

CITES, अभिसमय के सदस्य पक्षकारों पर कानूनी रूप से बाध्यकारी है, तथा सदस्य देश, इसके लक्ष्यों को लागू करने हेतु अपने कानूनों को इसके अनुकूल बनाने के लिए बाध्य होते हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘विदेशज प्रजातियां’ क्या हैं- एडवाइजरी में दी गयी परिभाषा?
  2. CITES क्या है?
  3. CITES के तहत प्रजातियों का वर्गीकरण?
  4. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम क्या है?
  5. नए दिशानिर्देशों के अनुसार, नई विदेशी प्रजातियों का आयात करते समय क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है?
  6. राज्य के ‘मुख्य वन्यजीव वार्डन’

मेंस लिंक:

देश में विदेशज प्रजातियों के आयात के लिए हाल ही में जारी किये गए दिशा-निर्देशों के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

प्रजाति संवर्धन कार्यक्रम / प्रजाति पुनर्प्राप्ति कार्यक्रम


(Species Recovery Programme)

संदर्भ:

पिछले महीने, राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड तथा केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा राजस्थान और गुजरात के कुछ हिस्सों में पाई जाने वाली एक मध्यम आकार की जंगली बिल्ली ‘स्याहगोश’ / कैरॅकेल (Caracal) को गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजातियों की सूची में शामिल किया था।

भारत में गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजातियों के लिए रिकवरी कार्यक्रम में अब 22 वन्यजीव प्रजातियां शामिल की जा चुकी हैं।

‘स्याहगोश’ / कैरॅकेल के बारे में:

  • कैरॅकेल, भारत के अलावा, अफ्रीका, मध्य पूर्व, मध्य और दक्षिण एशिया के कई देशों में पाई जाती है।
  • अफ्रीका के कुछ हिस्सों में इसकी संख्या में काफी वुद्धि हो रही है, जबकि एशिया में इसकी संख्या में कमी देखी जा रही है।
  • इस जगली बिल्ली / बनबिलाव के लंबे पैर, छोटा चेहरा, लंबे कैनाइन दांत और विशिष्ट प्रकार के लंबे और नुकीले कान होते हैं, जिनके ऊपरी सिरों पर गहरे स्याह बाल होते हैं।
  • इसके विशिष्ट कानों के आधार पर ही इसका नामकरण किया गया है – कैरॅकेल, तुर्की शब्द कारकुलक (karakulak) से लिया गया है, जिसका अर्थ है ‘काले कान’।
  • भारत में, इसे स्याहगोश कहा जाता है, को ‘ब्लैक ईयर’ का फ़ारसी अनुवाद है।

ऐतिहासिक साक्ष्य:

इसका उल्लेख अबुल फजल के अकबरनामा में, अकबर (1556-1605) के समय में, एक शिकार किये जाने वाले जानवर के रूप में मिलता है। कैरॅकेल का वर्णन और इसके चित्र मध्यकालीन ग्रंथों जैसे अनवर-ए-सुहाइली, तूतीनामा, खमसा-ए-निज़ामी और शाहनामा में पाए जा सकते हैं।

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प्रजाति रिकवरी कार्यक्रम के बारे में:

  • यह वन्यजीव आवासों के एकीकृत विकास (Integrated Development of Wildlife HabitatsIDWH) कार्यक्रम के तीन घटकों में से एक है।
  • IDWH को वर्ष 2008-09 में केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में शुरू किया गया था।
  • इसका उद्देश्य, संरक्षित क्षेत्रों (राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, संरक्षण /कंजर्वेशन रिजर्व’ और बाघ रिजर्व को छोड़कर रिजर्व’), संरक्षित क्षेत्रों के बाहर वन्यजीवों की सुरक्षा और गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजातियों और आवासों को बचाने के लिए रिकवरी कार्यक्रमों के लिए सहायता प्रदान करना है।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. IDWH के बारे में।
  2. IDWH के अंतर्गत घटक।
  3. प्रजाति रिकवरी प्रोग्राम के बारे में।
  4. कैरॅकेल के बारे में।
  5. अकबरनामा के बारे में।

मेंस लिंक:

वन्यजीव आवासों का एकीकृत विकास (IDWH)  कार्यक्रम के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।

साइबर स्वयंसेवक योजना


(Cyber volunteer plan)

संदर्भ:

इंटरनेट फ़्रीडम फ़ाउंडेशन (IFF) नामक एक डिजिटल स्वतंत्रता संगठन ने ‘साइबर स्वयंसेवक योजना’ (Cyber volunteer plan) के बारे में गृह मंत्रालय के लिए एक पत्र लिखा है, जिसमे कहा गया है, कि ‘साइबर स्वयंसेवक योजना’ से समाज में ‘संभावित रूप से सामाजिक अविश्वास पैदा करने वाली निगरानी की संस्कृति तथा निरंतर संदेह’ उत्पन्न होगा’।

संबंधित चिंताएँ:

‘इंटरनेट फ़्रीडम फ़ाउंडेशन’ का कहना है कि, इस बारे में कोई जानकारी नहीं है, कि मंत्रालय किस प्रकार सुनिश्चित करेगा कि, इस योजना का दुरुपयोग किसी गुमराह व्यक्ति द्वारा निजी या राजनीतिक प्रतिशोध लेने के लिए नहीं किया जाएगा। योजना में, एक बार शिकायत करने के बाद उसे वापस लेने के लिए भी कोई प्रक्रिया नहीं है।

‘साइबर स्वयंसेवक योजना’ के बारे में:

गृह मंत्रालय की ‘साइबर अपराध स्वयंसेवक’ योजना में ‘भारत के साइबर अपराध तंत्र में सुधार’ हेतु इंटरनेट पर गैरकानूनी सामग्री को चिह्नित करने के लिए लगभग 500 व्यक्तियों को जोड़ने का  लक्ष्य रखा गया है।

  • इस कार्यक्रम में 200 ‘साइबर जागरूकता प्रमोटर’ और 50 ‘साइबर विशेषज्ञ’ शामिल किये जाएंगे।
  • इस प्रोजेक्ट को ‘भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र’ (Indian Cyber Crime Coordination Centre-I4C) के रूप में जाना जाता है।
  • इसकी शुरुआत पिछले हफ्ते आंतकवाद-ग्रस्त जम्मू-कश्मीर में हुई थी, यहाँ पुलिस द्वारा लोगों को ‘साइबर स्वयंसेवक’ के तौर पर पंजीकृत कराने हेतु एक इश्तिहार (circular) जारी किया गया है।

इस योजना के तहत, स्वयंसेवकों को इस कार्यक्रम के साथ उनके संबंध के बारे में कोई भी सार्वजनिक बयान जारी करना निषिद्ध है, और किसी भी सोशल मीडिया या सार्वजनिक मंच पर गृह मंत्रालय के नाम का उपयोग करने तथा मंत्रालय से किसी प्रकार की संबद्धता का दावा करने के लिए ‘सख्ती से प्रतिबंधित’ है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. I4C के बारे में।
  2. ‘साइबर स्वयंसेवक’ कौन हैं?
  3. भूमिकाएं और जिम्मेदारियां।

मेंस लिंक:

साइबर स्वयंसेवक कौन हैं? उनकी भूमिकाओं और कार्यों से संबंधित चिंताओं पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


उपकर और अधिभार

(Cess and surcharge)

संदर्भ:

एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र के सकल कर राजस्व (gross tax revenue- GTR) में उपकर और अधिभार का हिस्सा वर्ष 2011-12 में 10.4% से बढ़कर वर्ष 2020-21 में लगभग दोगुना अर्थात 19.9% हो गया है, इस कारण 15 वें वित्त आयोग (Finance Commission- FC) ने राज्यों को दिए जाने वाले उच्च  अनुदान को घटाने तथा करों के वितरण को कम करने की अनुशंसा की है।

उपकर (Cess) क्या होता है?

  • यह किसी सेवा या क्षेत्र के विकास या कल्याण हेतु सरकार द्वारा लगाए या वसूले जाने वाले कर का एक रूप होता है।
  • यह प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों पर और इनके ऊपर लगाया जाता है।
  • किसी विशेष उद्देश्य के लिए संग्रहीत किए गए उपकर को किसी अन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता है।
  • यह सरकार के लिए राजस्व का एक स्थायी स्रोत नहीं होता है, और उद्देश्य पूरा हो जाने पर इसे समाप्त कर दिया जाता है।
  • वर्तमान में, केंद्र द्वारा संग्रहीत उपकर और अधिभार राज्यों के साथ कर-वितरण का हिस्सा नहीं है।

उदाहरण: शिक्षा उपकर, स्वच्छ भारत उपकर, कृषि-कल्याण उपकर आदि।

अधिभार (Surcharge) क्या होता है?

  • अधिभार, मौजूदा करों पर लगाया गया अतिरिक्त शुल्क या कर होता है।
  • उपकर के विपरीत, अधिभार आमतौर पर प्रकृति में स्थायी होते है।
  • यह सामान्य दरों के अनुसार देय आयकर पर प्रतिशत के रूप में लगाया जाता है। यदि वित्तीय वर्ष के लिए कोई कर देय नहीं है, तो कोई अधिभार नहीं लगाया जाता है।
  • अधिभार के माध्यम से अर्जित राजस्व पर केवल का केंद्र का अधिकार होता है और, अन्य कर-राजस्व के विपरीत, राज्यों के साथ साझा नहीं किया जाता है।
  • अधिभार से संग्रहीत राजस्व भारत के समेकित कोष में जमा होता है।

हुरून ग्लोबल रिच लिस्ट 2021

हाल ही में, हुरुन ग्लोबल रिच लिस्ट 2021 का 10 वां संस्करण जारी किया गया है।

प्रमुख निष्कर्ष:

  1. विश्व में 607 नए अरबपति बने है, अर्थात प्रति दो दिनों में तीन अरबपति या तीन से अधिक अरबपति बने हैं।
  2. वर्ष 2020 के दौरान भारत में ने 2020 में 55 नए अरबपति बने है, अर्थात हर हफ्ते एक अरबपति या एक से अधिक अरबपति बने हैं।
  3. हुरून ग्लोबल रिच लिस्ट 2021 में शीर्ष पर टेस्ला के एलन मस्क ( 197 बिलियन डॉलर) है। इनके बाद अमेजन के जेफ बेजोस (189 बिलियन डॉलर), और LVMH के सीईओ और चेयरमैन मोएट हेन्नेसी का स्थान है।
  4. रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी दुनिया के 8वें सबसे अमीर शख्स बन गए हैं। पिछले एक साल में मुकेश अंबानी की दौलत 24 फीसदी बढ़ी और अब वह 83 अरब डॉलर के मालिक हैं।
  5. हुरून की लिस्ट के मुताबिक, भारत में रहने वाले अरबपतियों की संख्या 177 है, और यह विश्व में अरबपतियों की संख्या में तीसरे स्थान पर बरकरार है।
  6. भारतीय अरबपतियों की सूची में, अंबानी के बाद अदानी समूह के गौतम अडानी और परिवार की संपत्ति लगभग दोगुनी होकर $ 32 बिलियन हो गई।
  7. देशों के अनुसार, चीन में अरबपतियों की संख्या सर्वाधिक है, और यह 1058 अरबपतियों के साथ सूची में शीर्ष स्थान पर है, इसके बाद अमेरिका (696), भारत (177), जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम और स्विट्जरलैंड (प्रत्येक में 100 से अधिक) का स्थान है।
  8. महाद्वीप के अनुसार, एशिया में 51 प्रतिशत अरबपतियों की हिस्सेदारी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में अब 209 अरबपति हैं।
  9. शहरों में, मुंबई में सबसे अधिक अरबपति (60) हैं, इसके बाद नई दिल्ली (40) और बेंगलुरु (22) का स्थान है।

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LSTV-RSTV का विलय

  • लोकसभा टीवी (LSTV) और राज्यसभा TV (RSTV) के विलय को अंतिम रूप दे दिया गया है और इसे संसद टीवी (Sansad TV) द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा।
  • सेवानिवृत्त IAS अधिकारी रवि कपूर को इसके सीईओ के रूप में नियुक्त किया गया है।

हिमालयन सीरो

(Himalayan serow)

  • यह बकरी और एक मृग से मिलता-जुलता एक हिमालयी स्तनपायी जानवर है।
  • हाल ही में, हिमालयन सीरो को असम में देखे जाने वाला सबसे नया जीव घोषित किया गया है।
  • इसे 3 दिसंबर को 950 वर्ग किमी में विस्तृत मानस टाइगर रिजर्व में देखा गया था।
  • यह IUCN की रेड लिस्ट में ‘असुरक्षित’ के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
  • यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची- I के तहत सूचीबद्ध है, जिसके तहत इसे पूर्ण सुरक्षा प्रदान की गयी है।

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भारतीय भूमि पत्तन प्राधिकरण (LPAI)

(Land Ports Authority of India)

  • LPAI एक वैधानिक निकाय है, जिसे ‘भारतीय भूमि पत्तन प्राधिकरण अधिनियम’, 2010 के तहत स्थापित किया गया है।
  • इस अधिनियम के तहत, LPAI को भारत की अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं के साथ निर्दिष्ट बिंदुओं पर यात्रियों और सामानों की सीमा पार आवाजाही के लिए सुविधाओं को विकसित करने, स्वच्छता और प्रबंधन करने की शक्ति पर्दान की गयी है।

स्वच्छ्ता सारथी फैलोशिप

  • प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय द्वारा ‘स्वच्छता सारथी फ़ेलोशिप’ का शुभारंभ किया गया है।
  • इसका उद्देश्य, अपशिष्ट प्रबंधन के समक्ष मौजूद विभिन्न चुनौतियों को वैज्ञानिक और टिकाऊ तरीके से निपटान के लिए काम कर रहे नगर निगम कर्मियों,सफाई कर्मियों, स्वयं सहायता समूहों,सामुदायिक कार्यकर्ताओं और छात्रों को मान्यता प्रदान करना है।
  • यह फ़ेलोशिप, ‘वेस्ट टू वेल्थ’ मिशन का हिस्सा है।
  • ‘वेस्ट टू वेल्थ’ मिशन प्रधानमंत्री-विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सलाहकार परिषद (PM-STIAC) के 9 राष्ट्रीय मिशनों में से एक है।

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